Saturday, February 17, 2024

खेती में घाटे की भरपाई करने खेतों में लगायें यह पेड़

  • खेती अब लाभ का नहीं घाटे का धंधा बन चुका है। ऐसी स्थिति में इस घाटे की भरपाई व भविष्य की जरूरतों के लिए चंदन एक बेहतर विकल्प बन सकता है। चंदन को सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाला पेड़ माना जाता है। इस पेड़ की खेती से किसान कुछ सालों में आसानी से लाखों रुपये कमा सकते हैं।

चंदन का पौधा ( फोटो - बाबूलाल दाहिया )

।। बाबूलाल दाहिया ।।

केंद्र की सरकार ने जब चार पांच साल पहले कहा था कि "हम 2022 तक किसानों को खेती में दूना लाभ देगे।" तो एक ओर जहां किसानों की बाछें खिल गई थीं कि  " उनके 18-19 रुपये किलो बिकने वाले गेहू धान अब 35-40 रुपये में बिकने लगेंगे ?" वही कृषि कल्याण विभाग से जुड़े कृषि बैज्ञानिक भी कुछ इसी तरह दूना लाभ का अलाप शुरू कर दिए थे।

सन 22 से आंगे बढ़ते हुए हम सन 24 में पहुंच गए हैं। खेती में दूना लाभ तो नहीं मिला, न मिलेगा ही। क्योकि सरकार अगर अनाज का मूल्य बढ़ाती भी है तो बस वही पहले जैसा ही 1-2 रुपये सरकारी खरीदी का मूल्य बढ़ जाता है ? अलबत्ता खाद ,बीज, डीजल अवश्य महंगे हो गए हैं इसलिए जुताई-सिंचाई आदि सब मिलाकर कृषि लागत बढ़ गई है। पर एक खेती अवश्य है जिसे कुछ थोड़े से भू-भाग में अपना लेने से 12-13 वर्षो में बिना कोई लागत किसानों को एक सम्मान जनक लाभ मिल सकता है। वह है चन्दन के पौधे उगाना।

अगर किसान घर के आस-पास चन्दन के 8-10 पौधे भी तैयार कर लिए तो भविष्य की योजना के लिए लाभकारी हो सकता है। क्यो कि यदि बैंक में भी रुपये जमा किए जाएं तो जिस प्रकार मुद्रा स्फीत बढ़ रही है और रुपये की क्रय शक्ति उत्तरोत्तर घट रही है तो जरूरी नही कि 10-12 वर्ष तक आज के जमा 100₹ की क्रय शक्ति अभी के बराबर ही बनी रहे ?

किन्तु अगर किसी को अभी हाल में जन्म लिए अपनी बेटी बेटे के शिक्षा और विवाह आदि के लिए 20 वर्ष बाद के खर्च की योजना बनाना है तो रुपये जोड़ कर धरने के बजाय 4-5 चन्दन के पेड़ लगा देना पर्याप्त रहेगा। वह 20 वर्ष में इतने बड़े हो जाएंगे जिन्हें बेच किसान आराम से उनका विवाह सम्पन्न कर सकता है। चन्दन की खेती केलिए मद्धय वर्षा और भरपूर धूप की आवश्यकता होती है अस्तु मध्यप्रदेश का मौसम उसके लिए उपयुक्त है।

चन्दन का पौधा अन्य पौधों की तरह ग्रोथ नही करता।क्यो कि इसकी जड़ें धरती से उस तरह पोषक तत्व नही ले पाती जिस तरह अन्य पेड़ । इसलिए इसे कतार से कतार 15 और पौधे से पौधा 12 फीट की दूरी पर जब  रोपा जाय तो बीच मे 6 फीट की दूरी पर एक होस्ट  यानी यजमान पौधे के रूप में अमरूद, सीताफल य बकायन का पौधा भी लगा दिया जाय। क्योकि  इन पौधों की जड़ें जब जमीन को तोड़ेंगी तो चन्दन का पौधा भी पोषक तत्व लेने के लिए वही अपनी जड़ें पहुँचा देगा। लेकिन उसे जल भराव के बजाय उचहन भूमि में ही लगाया जाना चाहिए।

लगाने का महीना जुलाई ही अच्छा माना जाता है । पर उसके पहले अप्रेल मई में 1 गुणे 1  हाथ गहरे गड्ढे खोद उन्हें धूप देना अच्छा रहता है। यदि बलुहन मिट्टी न, हो, तो कम्पोस्ट और बराबर- बराबर मिट्टी मिलाते समय कुछ रेत भी मिलाना उपयुक्त रहेगा। लेकिन पौधा एक फीट से कम का न हो। वर्ना पौधे के मर जाने की सम्भावना अधिक रहती है।

चन्दन की डालों को तीन साल तो नही छांटना चाहिए।पर उसके बाद अनावश्यक डालों की छटाई कर देने से पौधा मोटा होकर सीधा बढ़ता है। जब पौधा 5 वर्ष का हो जाय तो सिंचाई सिर्फ गर्मी में करनी चाहिए । ठंडी आदि ऋतु में नही। 12 से 15 वर्ष में पेड़ परिपक्व हो जाता है। लेकिन जब वह 15 वर्ष का हो जाय तो सिंचाई बिल्कुल नही करनी चाहिए। क्यो कि उससे लाल रंग वाली साल बनने में बाधा पहुँचती है।

चन्दन की तैयार लकड़ी के तीन भाग होते हैं। और उसी के अनुसार उसका - अलग अलग मूल्य का भी निर्धारण होता है।वह है

1-- ऊपरी छिलका

2-- छिलके के बाद की सफेद लकड़ी।

3--  साल पड़ी हुई बीच की लाल रंग की लकड़ी

साल वाली बीच की लकड़ी में तेल निकलता है जिसका मूल्य  3 से 4 लाख रुपये प्रति लीटर होता है । इसलिए  तीनो प्रकार की लकड़ी की एक पेड़ में मात्रा और अलग - अलग मूल्य लगभग इस प्रकार होते हैं।

1-- ऊपरी पर्त की लकड़ी की मात्रा 30 से 60 किलो मूल्य 50₹ प्रति किलो ।

2--  बाद की कच्ची सफेद लकड़ी की मात्रा 20 से 40 किलो मूल्य 600 से 800₹  प्रति किलो।

3-- पौधे के मध्य की लाल रंग की साल वाली लकड़ी की मात्रा 12 से 20 किलो और मूल्य 6000 से 12000 रुपये प्रति किलो। चंदन की लकड़ी में सुगंध 8 साल के बाद ही आती है। उसकी इस लकड़ी को सन्दल इत्र बनाने वाली य डाबर आदि कम्पनी खरीदती हैं।

इस तरह चन्दन के एक पौधा की तीन प्रकार की लकड़ी से ही अकेले लाखों रुपये कमाए जा सकते है। इसकी लकड़ी जड़ समेत खोद कर निकालने के बाद आरी से काट ली जाती है । क्यो कि जड़ भी सुगन्धित होती है।  सरकार ने चन्दन की लकड़ी से प्रतिबन्ध हटा दिया है। बस उसे लगाते समय पटवारी से खसरा में लगे हुए पेड़ दर्ज करा लें और खसरे की नकल ले लें वा काटते समय वन विभाग से मंजूरी लेलें।  इस तरह से चन्दन के पौधे खेत की मेंड़ ,घर के पास के बाड़ य बगीचों में लगाए जाकर सम्मान जनक पैसे कमाए जा सकते हैं।

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