Thursday, February 19, 2026

बेहद जायकेदार होती है अजयगढ क्षेत्र की अरहर दाल

अजयगढ़ क्षेत्र के सिद्धपुर ग्राम में अरहर के खेत का दृश्य ( फोटो : ज्ञानेन्द्र तिवारी )

पन्ना। बुंदेलखंड क्षेत्र में पैदा होने वाली अरहर की दाल अपनी उच्च गुणवत्ता, प्राकृतिक स्वाद और पोषण के लिए प्रसिद्ध है, यह अनपॉलिश्ड (unpolished) अरहर फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है। अरहर की खेती व पैदावार को द्रष्टिगत रखते हुए इस पूरे इलाके को दाल का कटोरा भी कहा जाता है। यह क्षेत्र विशेषकर महोबा, हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट दाल के प्रमुख उत्पादक के रूप में जाने जाते हैं, यही वजह है कि इस इलाके को 'दाल का कटोरा' कहा जाता है।

खाने की थाली में यदि अरहर की दाल न हो तो भोजन करने पर पेट तो भर जाता है लेकिन संतुष्टि नहीं मिलती। बुंदेलखंड के बाँदा व चित्रकूट जिले से सटे विन्ध्यांचल पहाड़ियों की गोद में बसे अजयगढ की अरहर दाल का स्वाद बेहद जायकेदार होता है। अजयगढ क्षेत्र में उत्पादित होने वाली दाल को खाने के बाद फिर और कहीं की दाल रास नहीं आती। चावल के साथ अजयगढ़ की दाल खाने का मजा ही और है। अजयगढ के आरामगंज, सिंहपुर से लेकर सिद्धपुर व कालिंजर तक हर तरफ जिधर देखो वहां अरहर के खेत नजर आते हैं। विन्ध्यांचल की प्राचीन पहाड़ियों की तलहटी में अरहर की फसल से लहलहाते खेतों को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है। 

बताया जा रहा है कि बुंदेलखंड क्षेत्र में पैदा होने वाली अरहर की दाल को जल्द ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने वाली है। इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद अरहर की दाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और किसानों को दाल बेचने पर बेहतर दाम मिलेंगे। यहाँ की दाल पकाने में हल्की, क्रीमी और नरम होती है, जो अपनी पौष्टिकता के लिए जानी जाती है। यह दाल स्वास्थ्य के लिए उत्तम मानी जाती है, जिसे सुपाच्य होने के कारण सूप के रूप में भी पसंद किया जाता है।

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