Saturday, March 30, 2024

पन्ना जिले की चांदीपाठी एवं भीना रेत खदान पर हुई कार्यवाही

  •  चांदीपाठी, बीरा व चंदौरा सहित अनेकों जगह चल रही हैं अवैध खदानें 
  •  भारी भरकम मशीनों से अवैध खनन होने से केन नदी का मिट रहा वजूद

केन नदी की चाँदीपाठी रेत खदान क्षेत्र में कार्यवाही करती प्रशासन की संयुक्त टीम। 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। बुंदेलखंड क्षेत्र के पन्ना जिले से गुजरने वाली जीवन दायिनी केन नदी को रेत माफियाओं ने छलनी कर दिया है जिसके दुष्परिणाम केन किनारे स्थित ग्रामों में साफ नजर आने लगा है। बड़े पैमाने पर यहां हो रहे अवैध खनन की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराए जाने के बाद आज शनिवार को राजस्व व पुलिस महकमें की टीम द्वारा चांदीपाठी एवं भीना रेत खदान पर छापामार कार्यवाही की गई है।

प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार अजयगढ़ एसडीएम कुशल सिंह गौतम की अगुवाई में भारी पुलिस बल के साथ राजस्व विभाग की टीम ने शनिवार को अपरान्ह चांदीपाठी रेत खदान पर छापा मार करवाई की है। बताया जा रहा है कि प्रशासन द्वारा की जाने वाली इस कार्यवाही की भनक रेत माफियाओं को पहले ही लग चुकी थी, इसलिए खनन में उपयोग होने वाली भारी भरकम मशीनों को वहां से हटा दिया गया था। प्रशासन की इस टीम ने मौके पर पहुंच कर जायजा लियां, जहां पाया गया कि यहां पर अवैध रूप से रेत का खनन किया जा रहा है। अधिकारियों ने खदान क्षेत्र में बनी झोपड़ियों को हटवाया तथा मौके से तकरीबन एक दर्जन तेल से भरे ड्रम व दो लिफ्ट मशीन जप्त किये गए हैं, जिनमें 2850 लीटर डीजल भरा हुआ था।

खनन माफियाओं द्वारा केन नदी के प्रवाह को रोक कर अवैध रूप से रेत निकाली जा रही थी। ट्रैकों व डंपरों में रेत  लोड करने के लिए अस्थाई मार्ग वह पुल भी बनाया गया था। छापा मार कार्यवाही के दौरान इस अस्थाई मार्ग व पुल को भी तोड़ा गया है। इस कार्यवाही के संबंध में जब पन्ना के खनिज अधिकारी रवि पटेल से जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि उनकी ड्यूटी निर्वाचन में लगी है, इसलिए वे मौके पर नहीं गए। खनिज विभाग के कर्मचारी को टीम के साथ भेजा गया है। लेकिन पता चला है कि इस कार्यवाही के दौरान खनिज विभाग से मौके पर कोई भी मौजूद नहीं था। जिसे देखते हुए खनिज महकमें की भूमिका को संदेह की नजरों से देखा जा रहा है। 


कलेक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि अवैध उत्खनन की शिकायत मिलने पर संयुक्त टीम द्वारा उक्त कार्यवाही की गई है। इस दौरान 600 घनमीटर रेत जप्त कर चंदौरा चौकी में रखवाया गया है। कार्यवाही के दौरान संयुक्त कलेक्टर कुशल सिंह गौतम सहित एसडीओपी राजीव सिंह भदौरिया, थाना प्रभारी अजयगढ़ बखत सिंह, तहसीलदार सुरेन्द्र अहिरवार, नायब तहसीलदार खेमचन्द्र यादव एवं पुलिस बल मौजूद रहा। इस छापामार कार्यवाही के बाद से रेत खदान क्षेत्रों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर यदि इस तरह की छापा मार कार्यवाही की जाती रहे तथा अवैध खनन पर सतत निगरानी हो तो काफी हद तक अवैध खनन पर रोक लग सकती है।  

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Friday, March 22, 2024

आपसी सौहार्द एवं भाईचारे के साथ मनाएं त्यौहार : कलेक्टर

  • कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक आयोजित 
  • निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का पालन कर पर्वों को मनाने की अपील 



पन्ना। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में आगामी दिनों में विभिन्न त्यौहार शांतिपूर्वक एवं सौहार्दपूर्ण माहौल में परस्पर भाईचारे की भावना के साथ मनाए जाने के उद्देश्य से शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक हुई। इस मौके पर नपाध्यक्ष मीना पाण्डेय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष संतोष सिंह यादव सहित कलेक्टर सुरेश कुमार, पुलिस अधीक्षक सांई कृष्ण एस थोटा, अपर कलेक्टर नीलाम्बर मिश्र, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरती सिंह एवं समिति के सभी सदस्यगण उपस्थित रहे।

शांति समिति की बैठक में वर्तमान में प्रभावशील लोकसभा निर्वाचन की आचार संहिता और भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का पालन कर सभी पर्वों को मनाने की अपील की गई। कलेक्टर श्री कुमार ने उपस्थितजनों को त्यौहारों की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पर्वों के दौरान कोलाहल नियंत्रण अधिनियम और उच्चतम न्यायालय की गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाए। डीजे के उपयोग पर पूर्णतः प्रतिबंध लागू रहेगा। उन्होंने कहा कि 24 मार्च को रात्रि 10 बजे तक होलिका दहन कर लिया जाए। इस दौरान यह ध्यान रखा जाए कि मुख्य चैराहों के स्थान पर सड़क के किनारे होलिका दहन हो। साथ ही विद्युत तार के नीचे होलिका दहन न करने तथा 25 मार्च को होली पर्व पर केमिकलयुक्त रंग का उपयोग नहीं करने का आग्रह भी किया। जिला कलेक्टर द्वारा त्यौहारों के मद्देनजर कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की तैनाती सहित आवश्यक साफ-सफाई, निर्बाध रूप से विद्युत आपूर्ति एवं पानी की व्यवस्था, निर्धारित समय पर नगरवासियों को पानी की सप्लाई, एम्बुलेंस एवं मेडिकल टीम की तैनाती, टैंकर, फायरब्रिगेड इत्यादि की समय पूर्व व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्यौहारों के पहले मिष्ठान दुकानों पर संयुक्त दल द्वारा सघन निरीक्षण की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिला आबकारी अधिकारी को सोमवार, 25 मार्च को शुष्क दिवस के तहत मदिरा दुकानों को बंद रखने तथा मदिरा के क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध के संबंध में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि होली एवं रामनवमी पर्व पर हाइवे सहित अन्य मार्गों पर वाहन चालकों से अवैध रूप से चंदा वसूली पर प्रतिबंध लगाने की कार्यवाही भी करें।

पुलिस अधीक्षक द्वारा आगामी पर्वों के दृष्टिगत सुरक्षा व यातायात व्यवस्था सहित पुलिस टीम द्वारा गश्ती की कार्यवाही इत्यादि के संबंध में अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि त्यौहारों पर तेज आवाज और निर्धारित डेसीबल से अधिक आवाज में बजने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों को जप्त कर संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि त्योहारों से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के लिए विधिवत अनुमति भी प्राप्त की जाए। पार्किंग व्यवस्था के साथ ही आवश्यक पुलिस व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने किसी भी अप्रिय स्थिति में संबंधित थाना में तत्काल सूचना देने के लिए कहा। इस दौरान प्राणनाथ मंदिर में 23 मार्च से एक अप्रैल तक होली उत्सव की जरूरी व्यवस्थाओं व श्रद्धालुओं की सुविधाओं के संबंध में चर्चा कर अन्य मंदिरों में भी प्रतीकात्मक रूप से होली पर्व मनाने के लिए कहा। त्यौहार सामग्रियों व प्रसाद के संबंध में दुकानों और प्रतिष्ठानों में दर सूची के प्रदर्शन सहित आवश्यकतानुसार प्रतिबंधात्मक कार्यवाही तथा किसी घटना पर त्वरित नियंत्रण के उद्देश्य से आवश्यक कार्यवाही के लिए निर्देशित किया।

बैठक में ईद-उल-फितर त्यौहार के दौरान बादशाह सांई और बेनीसागर स्थित मस्जिद में नमाज की तैयारियों व ईद मिलन समारोह स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं सहित झूलेलाल जयंती पर रानीगंज गुरूद्वारा से निकलने वाले जुलूस तथा भगवान महावीर जयंती पर नगर में निकलने वाली प्रभात फेरी की आवश्यक तैयारी व व्यवस्थाओं के संबंध में भी चर्चा की गई। साथ ही 9 अप्रैल को रामनवमी पर्व के तहत बैठकी के आयोजन और जुलूस इत्यादि के संबंध में मार्गों पर साफ-सफाई व्यवस्था सहित गुड फ्राईडे, अम्बेडकर जयंती, बुद्ध पूर्णिमा पर्व के आयोजन के लिए भी समिति सदस्यों से सुझाव प्राप्त कर आवश्यक निर्देश दिए गए। 

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Thursday, March 21, 2024

विश्व जल दिवस : संचार की विभन्न विधाओ में पारंगत हुए जलमित्र

  • समर्थन संस्था के सहयोग से 80 जल मित्र ग्रामों में सक्रिय 
  • जल एवं स्वच्छता के महत्व बावत दे रहे उपयोगी जानकारी 

पर्यावरण संरक्षण तथा जल व स्वच्छता के महत्व को पेंटिंग के माध्यम से बताती ग्रामीण बालिका। 

पन्ना। स्वयं सेवी संस्था समर्थन डब्लू.एच.एच के सहयोग से जल एवं स्वच्छता विषय पर काम कर रही है। कार्यक्रम के सहयोगी की भमिका में जल मित्र तैयार किये गये हैं। संस्था के कार्यक्षेत्र में लगभग 80 जल मित्र हैं, जो ग्राम स्तर पर जल एवं स्वच्छता को बेहतर करने एवं पानी के महत्व को बताने के लिये ग्राम सभा स्तर पर ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति एवं ग्राम पंचायत को सहयेग कर रहे हैं। 

मालुम हो कि हर साल 22 मार्च को वैश्विक स्तर पर जल दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत 1993 में हुई थी। प्रतिवर्ष जल दिवस की एक खास थीम निर्धारित की जाती है। इस वर्ष विश्व जल दिवस 2024 की थीम 'शांति के लिए जल का लाभ उठाना' है। इस थीम के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि जब समुदाय और देश इस बहुमूल्य साझा संसाधन पर मिलकर सहयोग करते हैं तो पानी शांति का एक उपकरण बन सकता है। दुनिया का 70 फीसदी हिस्सा पानी से घिरा है, लेकिन उसमें से पीने योग्य पानी लगभग तीन फीसदी ही है। 97 फीसदी पानी ऐसा है जो पीने लायक ही नहीं है। अब तीन फीसदी पानी पर पूरी दुनिया जीवित है। 

समर्थन संस्था के ज्ञानेंद्र तिवारी ने बताया कि जल मित्रो में रचनात्मक संचार एवं नेतृत्व के गुण विकसित करने के लिये चार दिन का प्रशिक्षण पन्ना के ताज खजुराहो होटल में रखा गया। पियूष चक्रवर्ती ने युवाओ को स्थानीय संसाधन एवं मानव संसाधन को उपयोग करते संचार एवं संवाद में आकृतियों, हावभाव,लेखन,उठना बैठना, बोल चाल उतार चढाव कब कैसे उपयोग करना एवं अपनी भूमिका को बदलने की कला को निखारने का प्रयास किया।


प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण उपरांन्त कहा कि हम लोग जब किसी को कुछ कहते थे, तो उसका असर कुछ भी नही पड़ता था, लोग सुन कर भी अनसुना कर देते थे। अब प्रशिक्षण में संवाद की जो विभिन्न विधा बताई गई है, उससे हमें अपने काम में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम में लेखन,गायन, नाटक, कविता, गीत लेखन एवं उसका निरंतर अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम में जलमित्र आरती,पूजा,दिनेश,अंलली,बीनागोड,आरती ,प्रीतम, विजयकांन्त,सुधा सहित 25 जलमित्रों ने भाग लिया। समर्थन से आशीष विश्वास ,सुरेन्द्र त्रिनाठी,कमल एवं चाली ने कार्यक्रम को बेहतर बनाने में सहयोग किया।

सीख - कलाकृतियों एवं संवाद में जल संरक्षण को प्रमुखता से रखा गया । जल संरक्षण एवं संबर्धन प्राकृतिक पर्यावरण पर प्रशिक्षण को फोकस किया गया। प्रशिक्षक की भूमिका में पीयूष ने कहा कि  निरंतर अभ्यास से संवाद एवं संचार में निखार आयेगा। अपनी बोली एवं भाषा का उपयोग करें जो लोगों को सहज समझ में आती हो। बात जितनी स्पष्ट होगी उतना काम आसान होगा।

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Monday, March 18, 2024

नदी का दोहन करता समाज...!!


।। आशीष सागर दीक्षित ।। 

बुंदेलखंड के बाँदा मे केन नदी किनारे खेती करने वाला भौतिक किसान आर्थिक युग मे कितना धनलोलुपता का शिकार है यह तस्वीर उसकी बानगी है।

बाँदा आसपास क्षेत्र मे जहां भी केन नदी मे लाल मौरम का उत्खनन हो रहा है। खासकर उन मौरम खदानों मे जिसमें पहले भी खंड चलने के कारण अब मौरम / बालू शेष नही बची है। वहां क्षेत्र गांव के किसान नदी किनारे अपनी कृषि भूमि अर्थात तरी ( जिसमें वो सब्जी आदि पैदा करते थे। ) उसे खनन ठेकेदारों को रुपयों मे बेचने लगा है। यह तस्वीर पैलानी क्षेत्र के ग्रामपंचायत सांडी से मौरम खंड 4 की है। इस गाँव मे खंड 60 और 2 के हालात कुछ यूं ही है। या ये समझें कि बाँदा खनन मामले मे लगभग यही है। 

केन नदी के तीरे किसानों ने अपने खेतिहर ज़मीन मे उपलब्ध मौरम को पोकलैंड से उत्खनन कराया है। जिससे तालाब जितनी गहराई हो गई है। केन नदी के तट पर लीज मे हुए खदानों पर यूं तो यूपी उपखनिज परिहार अधिनियम की उपधारा 41ज के अनुसार 3 मीटर गहराई तक ही बालू / मौरम निकासी का प्रावधान है। लेकिन क्योंकि केन मे किनारे मौरम नही बची है इसलिए अब या तो रात मे नदी की मध्य जलधारा मे प्रतिबंधित पोकलैंड से लाल बालू निकासी होती है। अथवा इस तर्ज पर किसान से तरी का खेत कुछ रुपया मे लेकर उसकी बालू निकाल ली जा रही है। खदानों मे बाकायदा सड़क पर चलने वाले रोलर मशीन है जो मौरम निकासी के बाद इन भारीभरकम तालाब जैसे गड्ढों को मिट्टी से भर देते है ताकि प्रशासन की निगाहों से बचा जा सके। 

उल्लेखनीय है कि यह नदी कछार / तरी से लगे बालू / मौरम युक्त खेतों पर ही गर्मी की फसल ककड़ी, खरबूजा, खीरा, तरबूज आदि मौसमी फसल पैदा होती थी। जब मौरम नही होगी तो यह ठंडी फसलें पैदा नही होंगी। बावजूद इसके त्वरित आर्थिक लाभ से आकर्षित क्षेत्र के किसान ऐसा पर्यावरण विरोधी / खेती के भविष्य को रसातल मे पहुंचाने वाला कृत्य कर रहें है। इतना ही नही नदी खदानों के रस्ते पर स्थित अपने खेत किराए ( हलफनामा अनुबंध ) मे देकर मोटी रकम लेने के बाद ठेकेदारों द्वारा पोकलैंड, जेसीबी, रोलर आदि परिवहन नदी कैचमेंट एरिया मे पहुंचाने की मदद करते है। 

कुल मिलाकर नदियां अब धरतीपुत्र अन्नदाता की जलमाता नही बल्कि ठेकेदारों बनाम किसानों की भौतिक सम्रद्धि का संसाधन बन चुकी है। लेकिन कब तक यह गौर करने वाली बात है...। कभी केन नदी पर सिंचाई को आश्रित रहने वाले मल्लाह अब नदी की लूट मे साझीदार है। इन्हें नदी की जैवविविधता से फिलहाल मतलब नही है। सरकार को राजस्व से वास्ता है।

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Sunday, March 17, 2024

जीवन को प्रेम से भरें

 


आप कहेंगे - हम सब प्रेम करते हैं । मैं आपसे कहूं । आप शायद ही प्रेम करते हों । आप प्रेम चाहते होंगे । और इन दोनों में जमीन आसमान का फर्क है । प्रेम करना । और प्रेम चाहना । ये बड़ी अलग बातें हैं । हममें से अधिक लोग बच्चे ही रहकर मर जाते हैं । क्योंकि हरेक आदमी प्रेम चाहता है । 

प्रेम करना बड़ी अदभुत बात है । प्रेम चाहना । बिलकुल बच्चों जैसी बात है । छोटे छोटे बच्चे प्रेम चाहते हैं । मां उनको प्रेम देती है । फिर वे बड़े होते हैं । वे और लोगों से भी प्रेम चाहते हैं । परिवार उनको प्रेम देता है । फिर वे और बड़े होते हैं । अगर वे पति हुए । तो अपनी पत्नियों से प्रेम चाहते हैं । अगर वे पत्नियां हुईं । तो वे अपने पतियों से प्रेम चाहती हैं । और जो भी प्रेम चाहता है । वह दुख झेलता है । क्योंकि प्रेम चाहा नहीं जा सकता । प्रेम केवल किया जाता है । चाहने में पक्का नहीं है । मिलेगा या नहीं मिलेगा । और जिससे तुम चाह रहे हो । वह भी तुमसे चाहेगा । तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी । दोनों भिखारी मिल जाएंगे । और भीख मांगेंगे । दुनिया में जितना पति पत्नियों का संघर्ष है । उसका केवल एक ही कारण है कि वे दोनों एक दूसरे से प्रेम चाह रहे हैं । और देने में कोई भी समर्थ नहीं है । 

इसे थोड़ा विचार करके देखना । आप अपने मन के भीतर । आपकी आकांक्षा प्रेम चाहने की है हमेशा । चाहते हैं । कोई प्रेम करे । और जब कोई प्रेम करता है । तो अच्छा लगता है । लेकिन आपको पता नहीं है । वह दूसरा भी प्रेम करना । केवल वैसे ही है । जैसे कि कोई मछलियों को मारने वाला आटा फेंकता है । आटा वह मछलियों के लिए नहीं फेंक रहा है । आटा वह मछलियों को फांसने के लिए फेंक रहा है । वह आटा मछलियों को दे नहीं रहा है । वह मछलियों को चाहता है । इसलिए आटा फेंक रहा है। इस दुनिया में जितने लोग प्रेम करते हुए दिखायी पड़ते हैं। वे केवल प्रेम पाना चाहने के लिए आटा फेंक रहे हैं। थोड़ी देर वे आटा खिलाएंगे, फिर..। और दूसरा व्यक्ति भी जो उनमें उत्सुक होगा। वह इसलिए उत्सुक होगा कि शायद इस आदमी से प्रेम मिलेगा। वह भी थोड़ा प्रेम प्रदर्शित करेगा । थोड़ी देर बाद पता चलेगा । वे दोनों भिखमंगे हैं। और भूल में थे। एक दूसरे को बादशाह समझ रहे थे। और थोड़ी देर बाद उनको पता चलेगा कि कोई किसी को प्रेम नहीं दे रहा है। और तब संघर्ष की शुरुआत हो जाएगी। 


दुनिया में दाम्पत्य जीवन नर्क बना हुआ है । क्योंकि हम सब प्रेम मांगते हैं । देना कोई भी जानता नहीं है । सारे झगड़े के पीछे बुनियादी कारण इतना ही है । और कितना ही परिवर्तन हो । किसी तरह के विवाह हों । किसी तरह की समाज व्यवस्था बने । जब तक जो मैं कह रहा हूं । अगर नहीं होगा । तो दुनिया में स्त्री और पुरुषों के संबंध अच्छे नहीं हो सकते । उनके अच्छे होने का एक ही रास्ता है कि हम यह समझें कि प्रेम दिया जाता है । प्रेम मांगा नहीं जाता । सिर्फ दिया जाता है । जो मिलता है । वह प्रसाद है । वह उसका मूल्य नहीं है । प्रेम दिया जाता है । जो मिलता है । वह उसका प्रसाद है । वह उसका मूल्य नहीं है । नहीं मिलेगा । तो भी देने वाले का आनंद होगा कि उसने दिया । अगर पति पत्नी एक दूसरे को प्रेम देना शुरू कर दें । और मांगना बंद कर दें । तो जीवन स्वर्ग बन सकता है । और जितना वे प्रेम देंगे । और मांगना बंद कर देंगे । उतना ही अदभुत जगत की व्यवस्था है- उन्हें प्रेम मिलेगा । और उतना ही वे अदभुत अनुभव करेंगे । जितना वे प्रेम देंगे । उतना ही सेक्स उनका विलीन होता चला जाएगा। 

- ओशो 

Saturday, March 16, 2024

खजुराहो लोकसभा क्षेत्र में 26 अप्रैल को होगा मतदान

  • 19 लाख 94 हजार से अधिक मतदाता करेंगे मताधिकार का उपयोग
  • 2 हजार 293 मतदान केन्द्रों पर मतदान, 4 जून को होगी मतगणना 

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेश कुमार पत्रकारों को जानकारी देते हुए। 

पन्ना। लोकसभा निर्वाचन के अंतर्गत खजुराहो संसदीय क्षेत्र के आठ विधानसभा क्षेत्रों के 19 लाख 94 हजार 330 मतदाता 2 हजार 293 मतदान केन्द्रों पर अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। खजुराहो संसदीय क्षेत्र में 26 अप्रैल को लोकसभा निर्वाचन संपन्न होगा, जबकि मतगणना 4 जून को करवाई जाएगी। लोकसभा क्षेत्र खजुराहो में पन्ना जिले की सभी तीन विधानसभा और कटनी एवं छतरपुर जिले की क्रमशः 03 एवं 02 विधानसभा शामिल हैं।

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेश कुमार ने 16 मार्च को लोकसभा निर्वाचन कार्यक्रम जारी होने के उपरांत कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सम्पन्न हुई प्रेस वार्ता में उक्ताशय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संपूर्ण जिले में आदर्श आचार संहिता प्रभावशील हो गई है। इस अवधि में सभी राजनैतिक दलों और लोकसेवकों को निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। 

आदर्श आचरण संहिता के तहत समस्त अयुद्ध लाइसेंस अधिनियम के तहत निरस्त माने जाएंगे। कोलाहल अधिनियम, संपत्ति विरूपण अधिनियम, धारा 144 प्रभावशील कर दी गई है। सराय अधिनियम, मुद्रक एवं प्रकाशकों से संबंधित लोक प्रतिनिधित्व संबंधी अधिनियम 1951 की धारा 127-क का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी ने जिले में स्वतंत्र व निष्पक्ष लोकसभा निर्वाचन संपन्न कराने के दृष्टिगत की गई आवश्यक तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही मतदान एवं मतगणना दिवस की व्यवस्थाओं सहित विभिन्न टीम व दलों के गठन, ईव्हीएम की उपलब्धता, मतदान दल, निर्वाचन प्रशिक्षण, दिव्यांग मतदाताओं एवं 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को होम वोटिंग की सुविधा इत्यादि की जानकारी भी दी।

पुलिस अधीक्षक साईं कृष्ण एस थोटा ने बताया कि लोकसभा निर्वाचन के अंतर्गत सभी विधानसभा क्षेत्र में आवश्यक सुरक्षा प्रबंधन किए जाएंगे। भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के तहत संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील मतदान केन्द्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती होगी एवं वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आदर्श आचरण संहिता का पालन करने के लिए समस्त आवश्यक प्रबंध जिला एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों के द्वारा किए जाएंगे। 

जिला पंचायत सीईओ एवं स्वीप के नोडल अधिकारी संघ प्रिय ने बताया कि जिले में मतदाता जागरूकता गतिविधियों के जरिए मतदान प्रतिशत में बढ़ोत्तरी के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। गत चुनाव में कम मतदान प्रतिशत वाले मतदान केन्द्रों और क्षेत्रों में भी मतदाता जागरूकता की विशेष गतिविधियों के साथ लोगों को मतदान करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।  

28 मार्च से लिए जाएंगे नाम निर्देशन पत्र

लोकसभा निर्वाचन अंतर्गत खजुराहो लोकसभा क्षेत्र के लिए मतदान द्वितीय चरण में 26 अप्रैल को संपन्न होगा। इसके लिए 28 मार्च को अधिसूचना जारी होगी। इसी दिन से अभ्यर्थियों से नाम निर्देशन पत्र प्राप्त किए जाएंगे। नामांकन की अंतिम तिथि 4 अप्रैल निर्धारित है, जबकि 5 अप्रैल को नामांकन की संवीक्षा होगी। अभ्यर्थी द्वारा 8 अप्रैल तक अभ्यर्थिता से नाम वापस लिया जा सकेगा। मतगणना 4 जून को संपन्न कराई जाएगी।

कलेक्टर ने शासकीय सेवकों के अवकाश पर लगाया प्रतिबंध



कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेश कुमार ने लोकसभा आम निर्वाचन की घोषणा और आदर्श आचार संहिता प्रभावशील होने के फलस्वरूप सभी श्रेणी के अधिकारी-कर्मचारियों के अवकाश पर प्रतिबंध लगा दिया है। न्याय विभाग के अतिरिक्त जिले के सभी कार्यालय प्रमुख जिला निर्वाचन अधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बगैर मुख्यालय से बाहर नहीं जाएंगे और न ही किसी प्रकार का अवकाश लेंगे। तृतीय श्रेणी के समस्त कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृति संबंधी आवेदन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के माध्यम से जिला निर्वाचन अधिकारी को प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा जिले से बाहर स्थानांतरण की स्थिति में जिला कलेक्टर की स्वीकृति के बगैर संबंधित को भारमुक्त करने पर भी प्रतिबंध रहेगा।

इसके अतिरिक्त जिला चिकित्सालय में मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा के उपरांत ही सभी प्रकार के शासकीय सेवकों के चिकित्सकीय अवकाश स्वीकृत किए जाएंगे। एकल चिकित्सक का प्रमाण पत्र मान्य नहीं किया जाएगा। इस संबंध में जारी आदेश में उल्लेखित है कि आदेश जारी होने के पूर्व से शासकीय सेवक के मेडिकल अवकाश पर रहने पर मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर अस्वस्थता प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा और कार्यालय प्रमुख के माध्यम से जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत कर स्वीकृति उपरांत ही अवकाश मान्य किया जाएगा। 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सभी चिकित्सकों से आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल बोर्ड के प्रमाण पत्र में हिन्दी में यह लेख करना भी जरूरी है कि संबंधित शासकीय सेवक अस्वस्थता के आधार पर पूर्ण अवकाश की पात्रता रखता है अथवा निर्वाचन के किस तरह का कार्य करने योग्य है। कार्यालय प्रमुख को मेडिकल अवकाश की अनुशंसा के साथ यह भी प्रतिवेदित करना जरूरी होगा कि पूर्व में संबंधित कर्मचारी द्वारा निर्वाचन ड्यूटी के समय कब-कब मेडिकल अवकाश लिया गया है। सभी मेडिकल अवकाश के प्रकरण कार्यालय प्रमुख के माध्यम से ही प्रस्तुत किए जाएंगे, जिसमें कार्यालय प्रमुख यह प्रतिवेदन भी देंगे कि इसके पूर्व के निर्वाचन ड्यूटी में संबंधित लोकसेवक ने कब-कब मेडिकल अवकाश लिया है तथा अन्य विभागीय कार्य के लिए संबंधित लोकसेवक कैसे कर्तव्य पर उपस्थित रहते हैं।

शिक्षा विभाग के शैक्षणिक अवकाश के आवेदन पत्र जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा ही जिला निर्वाचन कार्यालय भेजे जाएंगे। किसी भी शासकीय सेवक का आवेदन कार्यालय प्रमुख या नियंत्रणकर्ता अधिकारी की अनुशंसा के बिना जिला निर्वाचन कार्यालय में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी कार्यालय प्रमुखों को अवकाश दिवस में भी ई-मेल, डाक प्रेषण एवं प्राप्त करने की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। उक्तादेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील हो गया है और लोकसभा निर्वाचन के परिणाम की घोषणा होने तक प्रभावशील रहेगा।

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Friday, March 15, 2024

पन्ना के नवागत कलेक्टर ने कार्यभार ग्रहण किया


पन्ना। पन्ना जिले के नवागत कलेक्टर एवं 2010 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुरेश कुमार ने आज सायं संयुक्त कार्यालय भवन पहुंचकर कार्यभार ग्रहण किया। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सुरेश कुमार की कलेक्टर पद पर पहली पदस्थापना की गई है। निवर्तमान कलेक्टर हरजिंदर सिंह को पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंत्रालय में अपर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

नवागत कलेक्टर श्री कुमार विगत 3 नवम्बर 2022 से राजस्व मंडल ग्वालियर में सचिव पद पर कार्यरत थे। 27 सितम्बर 1966 को जन्मे श्री कुमार मूलतः हरियाणा निवासी हैं और एमएससी एवं एलएलबी की उपाधि प्राप्त की है। नवागत कलेक्टर ने पदभार ग्रहण करने के उपरांत अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया और लोकसभा निर्वाचन की तैयारियों सहित जिले की सामान्य व भौगोलिक स्थिति की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ संघ प्रिय, अपर कलेक्टर नीलाम्बर मिश्र, नवागत पन्ना एसडीएम संजय कुमार नागवंशी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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गांव की महिलाओं ने सीखा घनजीवामृत बनाने का तरीका

  • घनजीवामृत से सुधरती है मिट्टी की सेहत 
  • किसान सखियॉं अपना रही प्राकृतिक खेती


पन्ना। समर्थन संस्था लगातार ग्रामीण क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये महिला समूहो को तैयार कर रहा है। प्राकृतिक खेती के तरफ संस्था जिले में राज्य ग्रमीण आजिविका मिशन, कृषि विज्ञाने केन्द्र एवं कृषि विभाग के समन्वित प्रयास से जिले की लगभग 500 से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुका है। 

आज ग्राम विलखुरा एवं विल्हा की दीदियो को प्रकाश नागर एवं कीर्तनदीदी ने प्रशिक्षण दिया। ज्ञानेन्द्र तिवारी ने घनजीवामृत बनाने की विधि का प्रयोग कराया। सभी दीदी ने मिलकर घनजीवामृत बनाया एवं जहरमुक्त खेती करने की सपथ ली।

घनजीवामृत नाम से विदित होता है कि वह जीवामृत जिसमें सूक्ष्म जीवो का घनत्व अर्थात संख्या जीवामृत से ज्यादा है। यह भी जीवामृत के समान ही मिटटी में लाये जाने वाले सूक्ष्म जीवो की संख्या बढ़ाता है। इन सूक्ष्मजीवों की सक्रियता एवं कार्य करने की रफतार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

खेत की मृदा सजीव होती है उसमें प्राण सूक्ष्म जीवों की वजह से होते हैं। ये मृदा में पाये जाने वाले सूक्ष्म जीव अपनी क्रियाशीलता के द्वारा पौधो को पोषक तत्वो के साथ विभिन्न हार्मोन जिन्हे हमारे किसान भाई बोल चाल की भाषा में टानिक कहते हैं उपलब्ध कराते हैं।

घनजीवामृत बनाने की विधि एवं सामग्री -

देशी गाय का गोबर 100 किलो,गुड़ 1 किलो,वेसन 2 किलो,1 किलो मिटटी,देशी गाय का गोमूत्र 2 लीटर मिलाकर गोवर को गूदकर छोटे छोटे उपले के रूप में बोरे में रखकर छाव में सुखा लते हैं।  इसके वाद पावडर बनाकर रख लेते हैं। यह 6 माह तक भंडारित किया जा सकता है।

किसानो को इसका लाभ मिलेगा - मिटटी में सूक्ष्मजीव की सख्या, मिटटी कोमल होगी,जल धारण क्षमता बढ़गी,भूमि की संरचना में सुधार होगा, नत्रजन की मात्रा बढेगी, मित्र केचुऑं की संख्या लगातार बढेगी। फास्फोरस,पोटास जिंक जैसे तत्वो की घुलनशीलता में वृद्धि होती है।

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प्राचीन दुर्ग के लिए प्रसिद्ध अजयगढ़ बन चुका है अवैध रेत खनन का गढ़

  • सरकार का अवैध उत्खनन रोकने का दावा हुआ खोखला साबित
  • अवैध उत्खनन से छलनी हो रहा जीवनदायिनी केन नदी का सीना

केन नदी में पानी के भीतर से रेट निकालती दैत्याकार मशीन, जलचरों की आफत।  

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। रेत के अवैध उत्खनन को लेकर पन्ना जिले का अजयगढ़ क्षेत्र सुर्खियों में है। किसी समय चन्देल राजाओं के शक्ति का केन्द्र रहे अजेय दुर्ग के लिए प्रसिद्ध अजयगढ़ अब रेत के अवैध खनन का गढ़ बन चुका है। केन नदी में हर तरफ दैत्याकार मशीनों से बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन किया जा रहा है, जिससे खनिज एवं पर्यावरण संबंधी नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। 

केन नदी में स्वीकृत रेत खदानों के अलावा उन क्षेत्रों में भी व्यापक पैमाने पर अवैध उत्खनन चल रहा है जहां कोई खदान मंजूर नहीं है। विधान सभा चुनाव के समय से अजयगढ़ क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार कई गुना अधिक हो गया है। दिन ढलने के साथ ही दैत्याकार मशीनें रेत निकालने में जुट जाती हैं। केन नदी की रेत खदानों में पूरी रात ट्रकों व डम्फरों की लाइन लगने से यहां पूरी रात गहमा-गहमी मची रहती है।

उल्लेखनीय है कि विलुप्त होने की कगार में पहुँच चुके विभिन्न प्रजाति के जलचरों को आश्रय प्रदान करने वाली जीवनदायिनी केन नदी का वजूद संकट में है। रेत के अवैध कारोबार में लिप्त लोगों द्वारा इस खूबसूरत नदी का सीना भारी भरकम दैत्याकार मशीनों से छलनी किया जा रहा है। नदी के प्रवाह क्षेत्र से मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर रेत निकाले जाने से मगर, घडिय़ाल व विभिन्न प्रजाति की मछलियों सहित अन्य जलचर और जलीय वनस्पतियां नष्ट हो रही हैं। अनियंत्रित उत्खनन से केन नदी का पूरा ईको सिस्टम तहस-नहस हो गया है, जिसके दुष्परिणाम केन किनारे बसे ग्रामों को भोगना पड़ रहा है। आलम यह है कि रेत के इस खेल में अधिक से अधिक कमाई करने की रेत माफियाओं में होड़ मची है, जिससे जीवनदायिनी केन नदी के चीथड़े उड़ रहे हैं। 

बुन्देलखण्ड क्षेत्र की जीवनरेखा कही जाने वाली केन नदी को बीते डेढ़ दशक में ही रेत कारोबारियों ने इस कदर खोखला कर दिया है कि गर्मी शुरू होते ही मार्च और अप्रैल के महीने में इस सदानीरा नदी की जलधार टूट जाती है। लगभग 427 किमी लम्बी इस नदी के कई हिस्से गर्मी के मौसम में मैदान बन जाते हैं जहां धूल के बबन्डर उठते नजर आते हैं। अविरल बहने वाली स्वच्छ नदियों में शुमार केन की ऐसी दुर्दशा की कल्पना एक-डेढ़ दशक पूर्व शायद ही किसी ने की हो। चिन्ता की बात यह है कि हम अभी भी नहीं चेत रहे, केन नदी से भारी भरकम मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर रेत निकालकर उसका सीना छलनी करने में जुटे हुये हैं। जिससे यह बारहमासी नदी अब बरसाती बन रही है। 

केन नदी के तटवर्ती 90 फीसदी ग्रामों के कुयें जल स्तर नीचे खिसकने के कारण जहां सूख रहे हैं, वहीं गर्मी के मौसम में हैण्डपम्पों से भी पानी निकलना बन्द हो जाता है। रेत के अधाधुन्ध उत्खनन से केन नदी का नैसर्गिक प्रवाह बाधित होने तथा पानी की मात्रा कम होने से तटवर्ती ग्रामों के मछवारों, मल्लाहों, नदी किनारे खेती करने वाले किसानों की जीवनचर्या पर बुरा असर हुआ है। इतना ही नहीं जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध रही केन नदी में पाई जाने वाली वनस्पतियां जहां नष्ट हो रही हैं वहीं जीव-जन्तुओं और मछलियों की विभिन्न प्रजातियों के भी नष्ट होने का खतरा मंडराने लगा है। 

अपने अस्तित्व को बचाने के लिये बीते एक दशक से संघर्ष कर रही इस जीवनदायिनी नदी की पुकार सुनने को कोई तैयार नहीं है। लालची और संवेदनशील रेत कारोबारी तथा निहित स्वार्थों की पूर्ति में रत रहने वाले राजनेताओं व अधिकारियों की सांठगांठ से केन सहित उसकी सहायक नदियों का सुनियोजित तरीके से जिस तरह से गला घोंटा जा रहा है, यह आने वाले समय में भयावह साबित हो सकता है। 

ओवर लोड ट्रकों व डम्फरों की धमाचौकड़ी से सड़कें हुई जानलेवा 


पन्ना जिले की विश्रामगंज घाटी में आज सुबह हुए हादसे का द्रश्य। 

बड़े पैमाने पर हो रहे रेत के अवैध उत्खनन से सड़कों पर रेत से भरे ट्रकों व डम्फरों की धमाचौकड़ी मची रहती है। पन्ना जिले की अजयगढ़ घाटी तो ओवर लोड ट्रकों व डम्फरों की आवाजाही के चलते दुर्घटनाओं की पर्याय बन चुकी है। आज शुक्रवार की सुबह पन्ना-अजयगढ़ के बीच विश्रामगंज घाटी में एक यात्री बस और रेत से ओवरलोड ट्रक के बीच हुई भीषण भिड़ंत में ड्राइवर-कंडक्टर सहित आधा दर्जन से अधिक यात्रियों के घायल होने की जानकारी प्राप्त हुई है। 

मिली जानकारी के अनुसार विंध्याचल यात्री बस पन्ना से रवाना होकर अजयगढ़ जा रही थी, तभी‌ सुबह लगभग 6 बजे विश्रमागंज घाटी की मोड में अजयगढ़ की तरफ आ रहे रेत से ओवरलोड ट्रक और बस में आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। यह भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि बस और ट्रक का अगला हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इस सड़क हादसे के बाद घाटी में घण्टों आवागमन ठप्प रहा, जिससे जाम में फंसे लोग हैरान और परेशान रहे। घटना के बाद यात्री बस को रस्सों से बांध कर दूसरे ट्रक से पीछे खींचा गया, तब जाकर आवागमन बहाल हुआ। हादसे के बाद 108 एंबुलेंस से कुछ घायलों को अजयगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कुछ को जिला चिकित्सालय पन्ना पहुंचाया गया, जहाँ उनका इलाज जारी है। 

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Thursday, March 14, 2024

वृद्धावस्था मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है ?

प्रतीकात्मक फोटो इंटरनेट से साभार 

जब भी मैं अपने चौथे वर्ष के विद्यार्थियों को क्लीनिकल मेडिसिन पढ़ाता हूँ, तो मैं पूछता हूँ- वृद्धावस्था में मानसिक संभ्रम के क्या कारण होते हैं ?

कुछ कहते हैं- "मस्तिष्क में ट्यूमर", मैं कहता हूँ- नहीं! कुछ अन्य कहते हैं- अल्ज़ाइमर का प्रारम्भ"। मेरा उत्तर फिर वही होता है- नहीं!

उनका हर उत्तर रद्द हो जाने के बाद उनके पास कोई उत्तर नहीं बचता।

लेकिन उनका मुँह तब खुला रह जाता है, जब मैं निम्नलिखित तीन *सबसे अधिक सामान्य कारण* बताता हूँ-

1 -  अनियंत्रित डायबिटीज़

2 -  मूत्र में संक्रमण

3 -  डीहाइड्रेशन (जल की कमी)

यह मज़ाक़ लग सकता है, पर है नहीं। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग पानी पीना स्थायी रूप से भूल जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनका तरल पदार्थ पीना रुक जाता है। जब उन्हें पीने की याद दिलाने वाला आसपास कोई नहीं होता, तो वे डीहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं।

डीहाइड्रेशन एक गम्भीर बात है और उसका कुप्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है। इससे अचानक मानसिक संभ्रम (mental confusion) हो सकता है, रक्तचाप गिर सकता है, हृदय की धड़कनें बढ़ सकती हैं, वक्ष (chest) में दर्द हो सकता है, गहरी बेहोशी (coma) और मृत्यु तक हो सकती है।

तरल वस्तुएँ पीना भूलने की यह आदत 60 की उम्र में शुरू होती है, जब हमारे शरीर में जल की मात्रा आवश्यक मात्रा की केवल 50% रह जाती है। 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों में जल का सुरक्षित भंडार कम होता है। यह उम्र बढ़ने की प्राकृतिक प्रक्रिया का एक भाग है।

लेकिन इससे कई और भी समस्याएँ होती हैं। हालाँकि उनके शरीर में जल की मात्रा कम होती है, फिर भी उन्हें प्यास तक नहीं लगती, क्योंकि उनका आन्तरिक संतुलन बनाने वाला तंत्र भली प्रकार कार्य नहीं करता।

*निष्कर्ष*

60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग सरलता से डीहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं, केवल इसलिए नहीं कि वे पानी कम पीते हैं, बल्कि इसलिए भी कि उन्हें अपने शरीर में पानी की कमी अनुभव नहीं होती।

हालाँकि 60 से ऊपर के व्यक्ति स्वस्थ लग सकते हैं, लेकिन प्रतिक्रियाओं और रासायनिक कार्यों की शिथिलता उनके सम्पूर्ण शरीर को हानि पहुँचा सकती है। इसलिए हमें निम्न दो बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए-

(1) तरल पीने की आदत बनायें। तरल पदार्थों में जल, जूस, चाय, नारियल पानी, दूध, सूप और रसीले फल जैसे तरबूज, ख़रबूज़ा, आड़ू, अनन्नास, सन्तरा, किन्नू आदि शामिल हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको *हर दो घंटे बाद* कुछ तरल अवश्य पीना चाहिए।

(2) परिवार  के सभी सदस्यों को बता दें कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को तरल पीने के लिए देते रहें। साथ ही उन पर दृष्टि भी रखें। यदि आपको लगता है कि वे तरल पीने में आना-कानी करते हैं और उनमें आए दिन चिड़चिड़ापन, साँस लेने में कठिनाई या भूल जाने जैसी समस्याएँ आती हैं, तो निश्चित रूप से ये डीहाइड्रेशन के लक्षण हैं।

आपके परिवार और मित्रों को भी ये महत्वपूर्ण बातें जाननी चाहिए, ताकि वे अधिक स्वस्थ और प्रसन्न रहें। इस जानकारी को 60 वर्ष से ऊपर के लोगों के साथ जरुर साझा करें।

— डॉ अर्नोल्ड लिचेंस्टीन

(मूल अंग्रेज़ी से अनुवाद)

सौजन्य : स्वामी अगेह भारती

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Friday, March 1, 2024

मध्यप्रदेश में तेंदुओं की संख्या पन्ना और सतपुड़ा में सबसे ज्यादा

  • टाइगर स्टेट के साथ तेंदुआ स्टेट का दर्जा बरक़रार 
  • समूचे देश में मध्य प्रदेश पहले पायदान पर कायम 


पन्ना। जंगल का शहजादा कहे जाने वाले तेंदुओं की संख्या मध्यप्रदेश में बढ़ी है, परिणाम स्वरूप मध्य प्रदेश का तेंदुआ स्टेट का दर्जा बरकरार है। विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि मध्य प्रदेश में पन्ना और सतपुड़ा तेंदुओं की आबादी के मामले में सबसे अग्रणी हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गुरुवार को भारत में तेंदुओं की स्थिति पर जारी की गई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। 

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में तेंदुओं की आबादी लगभग 13,874 है। तेंदुओं की यह आबादी 2018 में 12,852 दर्ज की गई थी। लेकिन मौजूदा गणना के उपरांत तेंदुओं की आबादी में 7.95 फीसदी का इजाफा हुआ है। पूरे देश की बात की जाए तो सबसे ज्यादा 3,907 तेंदुओं के साथ मध्य प्रदेश पहले पायदान पर हैं। देश में तेंदुओं की सर्वाधिक संख्या मध्य प्रदेश में है। इसके बाद महाराष्ट्र में 1985, कर्नाटक में 1879 और तमिलनाडु में 1070 तेंदुआ हैं। वहीं साल 2018 की बात की जाए तो मध्यप्रदेश में तेंदुओं की संख्या 3421 थी। 

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने तेंदुओं की संख्या पर रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि टाइगर रिजर्व या सबसे अधिक तेंदुए की आबादी वाले जगहों की बात की जाए तो आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में नागार्जुन सागर और इसके बाद मध्य प्रदेश में पन्ना और सतपुड़ा हैं। राज्य के वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन्य जीव हमारे जंगल की शान हैं।

मालुम हो कि मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व में जहाँ बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है, वहीं जंगल के राजकुमार तेंदुओं की भी अच्छी खासी तादाद है। टाइगर रिज़र्व के अलावा जिले के उत्तर व दक्षिण वन मंडल क्षेत्र में भी तेंदुओं की मौजूदगी पाई गई है। जाहिर है कि मध्यप्रदेश को तेंदुआ स्टेट का दर्जा दिलाने में पन्ना जिले की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

टाइगर रिज़र्व के बाहर तेंदुओं को मिले सुरक्षित रहवास 

जंगल का शहजादा कहा जाने वाला तेंदुआ पन्ना टाइगर रिज़र्व के कोर क्षेत्र से बाहर बफर व टेरिटोरियल के जंगल में सुरक्षित नहीं है। यहां स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र को यदि अलग कर दें तो बफर क्षेत्र व उत्तर तथा दक्षिण वन मंडल का जंगल तेंदुओं के लिए सुरक्षित नहीं बचा है। तकरीबन 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौडऩे की क्षमता रखने वाला यह खूबसूरत वन्य जीव शातिर शिकारियों के निशाने पर रहता है। 

पन्ना शहर से लगे उत्तर वन मंडल के विश्रामगंज वन परिक्षेत्र तथा अजयगढ़ से लगे धरमपुर वन परिक्षेत्र में जिस तरह से बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और जंगल की कटाई हो रही है, उससे इन वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के रहने लायक स्थान का तेजी से क्षरण हुआ है। आबादी वाले इलाकों के आसपास तेंदुओं की मौजूदगी होने से इंसानों और तेंदुओं के बीच संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। संघर्ष की यह स्थिति तेंदुओं के वजूद को बनाये रखने के लिए एक बड़ी चुनौती है।  

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