Saturday, January 30, 2021

पन्ना में बन रहा एशिया का पहला डायमण्ड म्यूजियम

  • म्यूजियम को विश्व स्तरीय बनाने के लिए हो रहे पूरे प्रयास 
  • कलेक्टर श्री मिश्र ने अधिकारियों के साथ किया विचार विमर्श 

मंदिरों के शहर पन्ना का नजारा। 

अरुण सिंह,पन्ना। हीरा खदानों के लिए देश और दुनिया में प्रसिद्ध मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एशिया का पहला डायमण्ड म्यूजियम बनकर तैयार हो रहा है। विश्व स्तरीय इस म्यूजियम के निर्माण हेतु जिस स्थल का चयन किया गया है, वह शहर के प्राचीन तालाब धरमसागर के निकट पहाड़ी के ऊपर है। इसी पहाड़ी पर सरकिट हाउस व कलेक्टर बंगला भी स्थित है, यही वजह है कि पहाड़ी को पहाड़ कोठी के नाम से जाना जाता है। पहाड़कोठी से मंदिरों के शहर पन्ना का विहंगम द्रश्य बेहद मनोरम व मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। इसी पहाड़ी में स्थित एक राजशाही ज़माने में निर्मित पुराने बंगले को म्यूजियम में तब्दील किया जा रहा है। 

 कलेक्टर पन्ना संजय कुमार मिश्र बताते हैं कि हीरा उत्पादक जिले के नाम से पन्ना को भारत ही नहीं अपितु पूरी दुनिया में जाना जाता है। हीरे के इतिहास, महत्व, उत्खनन, तरासने, आभूषणों में जडने तक की जानकारी के साथ बुन्देलखण्ड के इतिहास, संस्कृति, पुरातत्व, मदिरों आदि की जानकारी एक साथ एक जगह उपलब्ध कराने के लिए यह म्यूजियम बनाया जा रहा है। मालुम हो कि पन्ना के पहाडकोठी पर डायमण्ड म्यूजियम बनाये जाने की सोच कलेक्टर संजय कुमार मिश्र की है, जो अब आकार लेने लगी है। यह एशिया महाद्वीप का पहला डायमण्ड म्यूजियम होगा। इस म्यूजियम को विश्व स्तरीय बनाने के लिए कलेक्टर श्री मिश्र द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रयास के इसी क्रम में कलेक्टर श्री मिश्र द्वारा हीरा उत्खनन परियोजना के कन्सल्टेंस संकेत कम्युनिकेशन दिल्ली की एक टीम के साथ बैठक आयोजित कर विचार विमर्श किया गया।


म्यूजियम को विश्व स्तरीय बनाने के सम्बन्ध में अधिकारियों से चर्चा करते कलेक्टर श्री मिश्र। 

बैठक में संकेत कम्युनिकेशन दिल्ली द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में डिजाइन किए गए म्यूजियम, मंदिर एवं टेलीफिल्म आदि का प्रदर्शन कर जानकारी दी गई। कलेक्टर श्री मिश्र ने मौके पर ले जाकर डायमण्ड म्यूजियम निर्माण कार्य में अब तक हुई प्रगति की जानकारी देने के साथ उन्होंने बताया कि इस म्यूजियम में हीरे के उत्खनन से लेकर तरासने तक के पुराने औजारों को भी प्रदर्शित किया जायेगा। हीरे की उथली खदानों के साथ एनएमडीसी द्वारा किए जा रहे उत्खनन कार्य को भी दिखाया जाएगा। म्यूजियम को पूर्णत: स्वचलित बनाए जाने की योजना है। म्यूजियम में प्रवेश के लिए पोस्टकार्ड साइज का प्रवेश टिकट रखा जायेगा, जिसके ऊपर हीरे का फोटो प्रिंट होगा। संकेत कम्युनिकेशन के दल द्वारा मौके पर डायमण्ड म्यूजियम के निर्माण कार्य का अवलोकन किया गया। कलेक्टर श्री मिश्र ने बताया कि म्यूजियम के सामने एक पन्ना व्यू-प्वाइंट बनाया जायेगा। जिससे लोग आसानी से पन्ना नगर का नजारा देख सकें। उन्होंने बताया कि म्यूजियम के पीछे पहाडी को विकसित करने की योजना है। धरम सागर तालाब की ओर से पहाडी पर जाने के लिए रोडवे बनाया जायेगा। इसके अलावा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस पूरे क्षेत्र को विकसित किया जायेगा। इस अवसर पर एनएमडीसी के अधिकारीगण, स्थानीय समिति के सदस्य, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अशोक चतुर्वेदी, शहरी विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी अरूण पटैरिया के साथ शासकीय एवं अशासकीय सदस्य उपस्थित रहे।

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Friday, January 29, 2021

पन्ना की लाड़ली ने 12 हजार फीट ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा

  •  माइनस 20 डिग्री की बर्फीली ठंढ में गाया राष्ट्रगान
  •  'टॉप ऑफ द वर्ल्ड' फतह करने का है कठिन इरादा 

बर्फीली 12 हजार फीट ऊंची चोटी पर तिरंगा के साथ पन्ना की बेटी गौरी। 

अरुण सिंह,पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की धरती सिर्फ रत्नगर्भा ही नहीं अपितु प्रतिभाशाली और बहादुर सपूतों तथा यहाँ की धरती का गौरव बढ़ाने वाली बेटियों की जन्मदात्री भी है। पन्ना जिले की एक बहादुर बेटी ने हाड़ कंपा देने वाली माइनस 20 डिग्री सेल्सियस की ठंड में तिरंगा फहराकर यह साबित कर दिया है कि वे नामुमकिन को भी मुमकिन बनाने का हौसला रखती हैं। मध्यम आय वर्ग वाले परिवार की बेटी गौरी अरजरिया ने यह अविश्वसनीय कारनामा गणतंत्र दिवस के अवसर पर किया है। इस लाड़ली ने तकरीबन 12 हजार फीट की ऊंचाई पर चढऩे के बाद वहां पर न सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया अपितु उत्तराखंड के केदार कांठा पहाड़ पर खड़े होकर हाड़ कंपाने वाली ठंड में राष्ट्रगान भी गाया है। 


कठिन लक्ष्य हासिल करने के बाद ख़ुशी और सुकून के क्षण। 

उल्लेखनीय है कि गौरी अरजरिया का जन्म पन्ना जिले के सिमरिया कस्बे में सामान्य आर्थिक आय वर्ग वाले परिवार में हुआ है। इनके पिता रामकुमार अरजरिया कृषक तथा मां ग्रहणी हैं। सिमरिया कस्बे में ही रहकर गौरी ने बीएससी और डीएड की शिक्षा पूरी की, लेकिन इस बीच उसके मन में कुछ अलग करने का भी जज्बा पैदा हुआ। मोबाइल पर चर्चा करते हुए 26 वर्षीय गौरी ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उसने अपने गांव सिमरिया में ही पर्वतारोहण की तैयारी शुरू कर दी थी। गौरी ने बताया कि इंटरनेशनल एडवेंचर फाउंडेशन ग्रुप के सदस्यों के साथ मिलकर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। इसके पूर्व इन्होने पश्चिम बंगाल की  'रेन ऑफ पीक' की करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचने में भी सफलता हासिल की है। उत्तरकाशी स्थित केदार कांठा पहाड़ पर उनके साथ उत्तरप्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ राज्य के सदस्य भी शामिल थे। इन लोगों ने सुबह पांच बजे 12,500 फीट की ऊंचाई पर पहुंचकर प्रथम स्थान हासिल किया।  फिर साल 2019 में बेसिक माउंटेनियरिंग का कोर्स किया। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहीं। गौरी ने बताया कि उनका सपना 'टॉप ऑफ द वर्ल्ड' माउंट एवरेस्ट पर पहुंचकर वहां राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने का है। 

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Wednesday, January 27, 2021

पन्ना में केबिनेट मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने किया ध्वजारोहण

  • समूचे जिले में उत्साह के साथ मनाया गया गणतंत्र दिवस
  • जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित निकाली गई झांकियां 

परेड का निरीक्षण करते हुए मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह।

अरुण सिंह,पन्ना। जिले में गणतंत्र दिवस धूमधाम और उत्साह के साथ समारोहपूर्वक मनाया गया। जिला मुख्यालय पन्ना में गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन स्थानीय पुलिस परेड मैदान में किया गया। यहां आयोजित मुख्य समारोह में प्रदेश के खनिज साधन एवं श्रम विभाग मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा ध्वजारोहण किया गया। ध्वजारोहण के उपरांत परेड की सलामी तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री का प्रदेश की जनता के नाम संदेश वाचन किया गया। संदेश वाचन के उपरांत मंच से ही मुख्य अतिथि द्वारा रंग-बिरंगे गुब्बारे आसमान में छोड़े गये। 

पीटीआर की झांकी 

परेड कमाण्डर द्वारा अगली कार्यवाही करते हुए तीन हर्सफायर किए गए एवं राष्ट्रीय सलामी दी गयी। सेना के सर्वोच्च कमाण्डर राष्ट्रप्रति का जयघोष के उपरांत परेड मंच से गुजरते हुए राष्ट्रीय ध्वज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि को अभिवादन प्रस्तुत किया गया। इसके उपरांत मुख्य अतिथि श्री सिंह, कलेक्टर संजय कुुमार मिश्र एवं पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना द्वारा परेड कामण्डर एवं अन्य कमाण्डरों से परिचय प्राप्त किया। इस अवसर पर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित झांकिया निकाली गयी। इसमें क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व, वनमण्डलाधिकारी उत्तर/दक्षिण, राज्य आजीविका मिशन, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, विद्युत मण्डल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, महिला एवं बाल विकास, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, स्कूल शिक्षा, आदिम जाति कल्याण, कृषि विभाग, उप संचालक उद्यानिकी, पशु चिकित्सा सेवाएं, नगरपालिका आदि की झांकियों के माध्यम से लोगों को शासन की योजनाओं की जानकारी दी गयी। इसके उपरांत पुरस्कार वितरित किये गये। आयोजित कार्यक्रम का संचालन प्रमोद अवस्थी एवं श्रीमती मीना मिश्रा द्वारा किया गया। सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम में जिला पंचायत के अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, अधिकारी/कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, पत्रकार एवं आमजन उपस्थित रहे।

हीरा खनन परियोजना में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया गणतन्त्र दिवस
  • दिव्यांग ग्रामीणजनों को प्रदान किये गये ट्राइसाइकिल और व्हीलचेअर


एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खनन परियोजना में राष्ट्र का 72वां "गणतन्त्र दिवस" पूरे हर्षोल्लास के साथ धूम-धाम से मनाया गया । परियोजना खेल मैदान में आयोजित समारोह में प्रात: 09:00 बजे मुख्य अतिथि एवं परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक  एस.के. जैन और परियोजना की वरिष्ठतम कर्मचारी श्रीमती कुसुम मिश्रा द्वारा संयुक्त रूप से 'राष्ट्रीय-ध्वज' को परियोजना के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीण जनों की उपस्थिती में फहराया गया । ध्वजारोहण के साथ ही डीएव्ही पब्लिक स्कूल, मझगवां द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। इसके उपरांत मुख्य अतिथि ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल जवानों की सलामी गारद का निरीक्षण किया और परेड की सलामी ली । 

अपने संदेश में मुख्य अतिथि एस.के. जैन ने परियोजना की वर्तमान परिस्थिती के संबंध में विस्तार पूर्वक बताया । नोबल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संबंध में नागरिकों को सचेत करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि यह महामारी अब तक समाप्त नहीं हुई है और जब तक सभी लोगों का टीककरण न हो जाए, तब तक वे अपने सामाजिक आचार-व्यवहार में ढिलाई नहीं बरते। इस समारोह को सार्थकता प्रदान करते हुए परियोजना द्वारा अपने 'नैगम सामाजिक दायित्व' के अंतर्गत ग्राम हिनौता के विष्णु अहिरवार, कुमारी शिवानी सेन एवं रामकिशोर को 'ट्राइसाईकल' और श्रीमती मीरा यादव को 'व्हीलचेअर' प्रदान किया गया।   

समारोह में प्रबंधक (कार्मिक)  अभिजीत कुमार मिश्रा सहित समस्त विभागाध्यक्ष, अधिकारी, कर्मचारी, श्रमिक संघ एम.पी.आर.एच.के.एम.एस. के महामंत्री  समर बहादुर सिंह और पी.एच.के.एम.एस. के महामंत्री भोला प्रसाद सोनी एवं अन्य पदाधिकारीगण, सभी एसोशियेसन के पदाधिकारी, डायमण्ड इव्स क्लब की अध्यक्षा श्रीमती रेखा जैन सहित सभी सदस्य, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के सहायक समादेशक  धीरज सिंह राणा व जवान, डीएव्ही पब्लिक स्कूल के प्राचार्य पी.सी. सिंह व शिक्षकगण और मझगवां व हिनौता के निवासी उपस्थित थे । कार्यक्रम के उपरांत परियोजना की महिला समिति 'डायमंड इव्स क्लब' की अध्यक्षा श्रीमती रेखा जैन के नेतृत्व में सदस्याओं ने परियोजना चिकित्सालय का दौरा किया और वहाँ भर्ती अस्वस्थजनों के बीच फल वितरित किये।

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Tuesday, January 26, 2021

जिन्होंने देखा राजाशाही का वैभव, वे चिर निद्रा में लीन

  •  पूर्व सांसद व पन्ना राज परिवार के वरिष्ठ सदस्य लोकेंद्र सिंह नहीं रहे
  •  प्रकृति प्रेमी रहे राजा को सादगी पूर्ण ढंग से दी गई अंतिम विदाई 

पूर्व सांसद लोकेन्द्र सिंह अपने प्रिय कुत्तों को दुलारते हुए। 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। जिनका बचपन राजाशाही वैभव में गुजरा, जिनकी जिंदादिली, मिलनसारिता और ईमानदारी के किस्से सुनाए जाते रहे हैं, वे ठीक गणतंत्र दिवस के दिन जब हर तरफ उत्सवी माहौल और फिजा में देशभक्ति के तराने गूंज रहे थे, चिर निद्रा में लीन हो गये। जी हां पन्ना राजघराने के वरिष्ठ सदस्य पूर्व सांसद व विधायक लोकेंद्र सिंह अब नहीं रहे। उन्होंने 75 वर्ष की आयु पूरी कर आज अंतिम सांस ली। श्री सिंह का अंतिम संस्कार सायं 4:00 बजे पन्ना शहर में स्थित राज परिवार के मुक्तिधाम छत्रसाल पार्क में किया गया। उनकी बेटी कामाख्या (लकी राजा) ने अपने पिता को नम आंखों से मुखाग्नि दी। पूर्व सांसद की अंतिम विदाई में राज परिवार के सदस्यों सहित गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में आमजन शामिल हुए। 

उल्लेखनीय है कि जीवन पर्यंत प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण हेतु समर्पित रहे पूर्व सांसद लोकेंद्र सिंह ने पन्ना टाइगर रिजर्व की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पन्ना के लिए उनकी यह सौगात इतनी अविस्मरणीय है कि वे इसके लिए सदैव याद किए जाते रहेंगे। राज परिवार से होते हुए भी आम लोगों के बीच जाकर उनसे मेल मुलाकात करना आपके स्वभाव में रहा है। यही वजह है कि लोगों ने इन्हें अपना सांसद और विधायक भी चुना। आप दो बार विधायक व एक बार सांसद रहे, लेकिन राजनैतिक महत्वाकांक्षा इनके भीतर कभी नहीं रही। 

प्रकृति और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आपने विरोध का भी सामना किया तथा सच्चाई और ईमानदारी का साथ कभी नहीं छोड़ा। अपनी इन खूबियों के कारण उन्हें राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन वे अडिग रहे। हवा के विपरीत चलने के कारण क्षमता और काबिलियत के बावजूद उन्हें मंत्री पद हासिल नहीं हो सका। जबकि राजनीति के जानकार आज भी यह कहते हैं कि राजा यदि समय के हिसाब से अपने में बदलाव लाते तो प्रदेश ही नहीं अपितु केंद्र में मंत्री बनने तक का सफर तय कर लेते।

 


पूर्व सांसद लोकेन्द्र सिंह के विदा हो जाने का मतलब पन्ना राज परिवार के एक महत्वपूर्ण अध्याय का भी खत्म हो जाना है। उनकी गैरमौजूदगी से जो रिक्तता पैदा होगी, उसकी भरपाई शायद संभव नहीं है। क्योंकि राजपरिवार के मौजूदा समय में वे इकलौते ऐसे सदस्य थे, जिन्हें प्रकृति, पर्यावरण, समाज, राजनीति और पन्ना के गौरवपूर्ण इतिहास की गहरी समझ थी। जिंदगी जीने का भी उनका अपना निराला अंदाज था। उनके जैसी बेबाकी और निर्भीकता अब शायद ही देखने को मिले। 

ऐसे जिंदादिल इंसान को आज सैकड़ों लोगों ने बेहद सादगी पूर्ण माहौल में अंतिम विदाई दी। इस मौके पर उनके भतीजे महाराज राघवेंद्र सिंह जूदेव, नागौद राजपरिवार के अनेकों लोग, खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह, भास्कर देव बुंदेला, डॉ विजय परमार, केशव प्रताप सिंह, प्रदीप सिंह राठौड़, लोकेंद्र प्रताप सिंह इटौरी, पुष्पेंद्र सिंह परमार, शिवजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में क्षत्रिय समाज के लोग शामिल हुए तथा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अंतिम विदाई दी।

नौ वर्ष की उम्र में किया था वनराज का शिकार


हाँथ में बंदूक लिए शिकार किये बाघों के साथ बालक लोकेन्द्र सिंह। (फाइल फोटो) 

पन्ना राजघराने के सदस्य पूर्व सांसद लोकेन्द्र सिंह जब महज नौ वर्ष के थे, तब उन्होंने एक बाघ को मार गिराया था। पांच साल बाद जब लोकेन्द्र सिंह 15 वर्ष के हुए तो उन्होंने सन् 1960 में पटोरी नामक स्थान पर तीन बाघों को एक साथ मौत की नींद सुला दिया। इस बाघ परिवार का सफाया करने के बाद 15 वर्ष के इस राजकुमार ने बड़े ही गर्व के साथ शिकार किये गये बाघों के पास बैठकर हांथ में बन्दूक लिए फोटो भी खिंचाई. लेकिन शिकार की इस घटना ने बालक लोकेन्द्र सिंह को विचलित कर दिया और उनकी जिन्दगी के नये अध्याय  का श्रीगणेश हो गया।

शिकार के शौकीन रहे लोकेन्द्र सिंह का हृदय परिवर्तन होने पर उन्होंने यह कसम खा ली कि अब कभी बाघ का शिकार नहीं करूंगा। उन्होंने वन व पर्यावरण की सुरक्षा तथा बाघों के संरक्षण को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। इसी सोच के चलते लोकेन्द्र सिंह की पहल से पन्ना में सर्वप्रथम गंगऊ सेंचुरी बनी, बाद में 1981 में पन्ना राष्ट्रीय उद्यान का निर्माण हुआ। 

वर्ष 1994 में पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व बनाया गया. लेकिन टाइगर रिजर्व बनने के बाद भी यहां बाघों की दुनिया आबाद होने के बजाय सिमटती चली गई। हालत यहां तक जा पहुंची कि वर्ष 2009 में बाघों की यह धरती बाघ विहीन हो गई। पूरे देश व दुनिया में किरकिरी होने पर यहां बाघ पुर्नस्थापना योजना शुरू हुई, जिसके चमत्कारिक परिणाम देखने को मिले। अब पन्ना का यह जंगल बाघों से आबाद है,  यहां के कोर व बफर क्षेत्र में 60 से भी अधिक नर व मादा बाघ विचरण कर रहे हैं।

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Sunday, January 24, 2021

पन्ना टाइगर रिज़र्व को मिली व्याख्यान केन्द्र की सौगात

  •   मौजूदा समय 65 बाघों का घर बन चुका है पन्ना 
  •   कोर व बफर में टाइगर साइटिंग होने से पर्यटक बढ़े 

पन्ना टाइगर रिज़र्व के मंडला गेट पर बने व्याख्यान केन्द्र का अवलोकन करते खनिज मंत्री। 

अरुण सिंह,पन्ना। बाघ पुनर्स्थापना योजना को मिली शानदार सफलता के चलते देश और दुनिया में विख्यात हो चुके मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व में पर्यटन सुविधाओं का भी विस्तार हो रहा है। प्रदेश के खनिज साधन एवं श्रम विभाग मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा पर्यटन गांव मडला स्थित पन्ना टाइगर रिज़र्व के प्रवेश द्वार पर स्थापित वन व्याख्यान केन्द्र का लोकार्पण किया है। यह वन व्याख्यान केन्द्र 110 लाख रूपये की लागत से बनाया गया है। इस व्याख्यान केन्द्र में पर्यटकों के लिए कुछ समय बिताने की सुविधा के साथ वन एवं पर्यटन से जुडी जानकारियां देने के लिए म्यूजियम एवं पदर्शन की व्यवस्था है। 

उल्लेखनीय है कि पन्ना टाइगर रिज़र्व मौजूदा समय 65 बाघों का घर बन चुका है। बाघों का कुनबा बढ़ने से कोर व बफर क्षेत्र में टाइगर साइटिंग खूब हो रही है, जिससे पर्यटक भी बढे हैं। खनिज मंत्री श्री सिंह ने बताया कि उन्होंने पन्ना टाइगर रिजर्व के मड़ला गेट पर नवीन टिकट बुकिंग काउंटर एवं व्याख्यान केंद्र का शुभारंभ किया है। अब बाहर से आने वाले पर्यटकों को पन्ना टाइगर रिजर्व घूमने के लिए मड़ला गेट से भी टिकट उपलब्ध हो सकेगी। इसके पूर्व पर्यटकों को पार्क भ्रमण हेतु टिकट के लिए गेट से तक़रीबन डेढ़ किमी. दूर कर्णावती प्रकृति व्याख्या केन्द्र में जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा पर्यटकों को गेट में ही मिल सकेगी। मंत्री श्री सिंह ने व्याख्यान केन्द्र के अन्दर पर्यटकों को दी जाने वाली सुविधाओं का अवलोकन किया। पर्यटकों के बैठने, प्रशाधन एवं जानकारी देने के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के प्रति उन्होंने संतोष जाहिर किया।

पर्यटन गांव मंडला में बनेगा आधुनिक थाना

पन्ना जिले के पर्यटन गांव मंडला में प्रतिदिन बड़ी संख्या में देशी व विदेशी पर्यटक पार्क भ्रमण के लिए आते हैं, जिसे देखते हुए यहाँ पर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित थाना भवन का निर्माण होगा। खनिज मंत्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह ने थाना परिसर मडला में 94.10 लाख रूपये की लागत से निर्मित होने वाले आधुनिक थाना भवन का भूमिपूजन वैदिक रीति के साथ किया। इस अवसर पर उन्होंने कुदाली से खुदाई कर भवन के आधारशिला की ईंट स्थापित की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थितों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह थाना छतरपुर एवं पन्ना जिले की सीमा पर होने के साथ राष्ट्रीय उद्यान होने के कारण पर्यटकों का आना जाना निरंतर होता है। इसलिए आधुनिक तकनीकी से लैस थाना होना यहां की महती आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह थाना भवन निर्मित हो जाने के बाद आमजनता को सुविधा मिलने के साथ अपराधों में कमी आएगी। यह थाना भवन बहुत ही आकर्षक एवं सुविधाजनक बनेगा, लोगों को थाने में आकर अच्छा महसूस होगा। इस क्षेत्र की पेयजल एवं विद्युत की समस्या का निराकरण भी शीघ्र किया जायेगा। मडला ग्राम भारत सरकार की जल जीवन मिशन योजना में भी शामिल है, फलस्वरूप यहाँ पेयजल की कोई समस्या नहीं रहेगी। क्षेत्र में पर्यटकों का आना जाना बढ रहा है, जिससे इस क्षेत्र का तेजी से विकास होगा। पर्यटन बढ़ने से यहां के लोगों को रोजगार के नये - नये अवसर मुहैया होंगे। 

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Friday, January 22, 2021

पुलिस ने देवेंद्रनगर में अवैध शराब भट्टी को किया ध्वस्त

  •  मौके पर 250 लीटर महुआ लाहन को किया गया नष्ट 
  • दो आरोपी गिरफ्तार, भट्टी में बनी 75 लीटर शराब जप्त 

अवैध रूप से शराब बनाने में उपयोग होने वाला महुआ लाहन, जिसे पुलिस ने नष्ट किया।  

अरुण सिंह, पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में अवैध शराब का कारोबार नासूर बन चुका है। जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में हर कहीं अवैध रूप से शराब बनाई और बेचीं जा रही है, जिसका असर आम जन जीवन व कानून व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। इस बावत लगातार शिकायतें मिलने पर मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक मंयक अवस्थी ने अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिये हैं। जिसके परिपालन में आज पुलिस ने देवेन्द्रनगर के कंजडाना क्षेत्र में जो अनैतिक गतिविधियों के लिए बदनाम है, वहां छापामार कारवाही करते हुए अवैध शराब भट्टी को ध्वस्त किया है। पुलिस ने मौके पर दो आरोपियों को शराब बनाते हुए गिरफ्तार कर 250 लीटर महुआ लाहन को नष्ट किया है। पुलिस ने भट्टी में बनी 75 लीटर महुआ की शराब भी जप्त की है। कच्ची महुआ की अवैध शराब बनाते पाये जाने पर दो आरोपियो के विरूद्ध धारा 34(1) आबकारी एक्ट के तहत अपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।

शराब की भट्टियां। 

 पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अवैध शराब बनाने, परिवहन करने एवं बेचने वालों के विरुद्ध चलाये जा रहे विशेष अभियान के तहत अति.पुलिस अधी. बी के सिह परिहार के निर्देशन एवं एसडीओपी आर.एस. रावत के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरी. डी.के. सिह द्वारा देवेन्द्रनगर के कंजडाना क्षेत्र में   मुखबिर लगाये गये थे। अबैध रूप से भट्टी चढाकर कच्ची महुआ की शराब बनाने जानकारी आज मुखबिर से प्राप्त होने पर छापामार कारवाही की गई। मौके पर 75 लीटर कच्ची महुआ की हाथ भट्टी बनी शराब कुल कीमती 15000/- रू. तथा शराब बनाने का उपकरण एवं समान जप्त किया गया। लगभग 250 लीटर महुआ का लहान नष्ट किया जाकर आरोपीगणो को गिरफ्तार किया गया है। थाना देवेन्द्रनगर में आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्र 29/2021 एवं 30/2021 धारा 34 (1) आबकारी एक्ट पंजीबद्ध किया गया है।   

उक्त कार्यवाही में निरीक्षक डी.के. सिंह  थाना प्रभारी देवेन्द्रनगर, उप निरीक्षक प्रियंका पटेल, सउनि. मान सिह, सउनि. सुरेन्द्र सिह परिहार, प्र. आर बाबूलाल प्रजापति, कमलेश सिंह, श्रीकांत पाठक , आर आदित्य कुशवाहा, आर सत्यबीर सिंह, आर राजू साहू, दिलीप शर्मा, भरत पाण्डेय, दीपक मिश्रा,नीरज बागरी, राजकुमार, पुष्पराज सिंह, महेश सिंह, महिला आर दिब्या सिंह तथा सुप्रिया त्रिपाठी की सराहनीय भूमिका रही।

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Thursday, January 21, 2021

वन मंत्री ने तालगांव में किया बाघिन का दीदार

  •  पन्ना टाइगर रिजर्व को वन्य प्राणी उपचार केंद्र की दी सौगात 
  •  हिनौता हाथी कैंप में हथनी रूपकली के बच्चे का किया नामकरण 
  •  पन्ना में बाघों के बढ़ते कुनबे व संरक्षण कार्य को वन मंत्री ने सराहा 

पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता गेट में  पत्रकारों से चर्चा करते हुए वन मंत्री विजय शाह। 

।। अरुण सिंह ।। 

पन्ना। मध्यप्रदेश के वन मंत्री विजय शाह ने पन्ना प्रवास के दौरान आज सुबह पन्ना टाइगर रिजर्व में तालगांव के निकट बाघिन का दीदार   किया। पार्क भ्रमण से पूर्व वन मंत्री सुबह सबसे पहले हिनौता हाथी कैंप में पहुंचकर हथनी रूपकली के मादा बच्चे का नामकरण किया। इस हथिनी ने विगत 4 माह पूर्व 18 सितंबर 20 को यहां मादा बच्चे को जन्म दिया था। वन मंत्री विजय शाह ने हिनौता हाथी कैंप में चहल कदमी करने वाले इस चंचल और शरारती मादा बच्चे को कर्णावती नाम दिया। यहां हाथियों को केला और गुड़ खिलाने के बाद वन मंत्री पार्क भ्रमण पर निकल गये।

पार्क भ्रमण के बाद हिनौता प्रवेश द्वार पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए वन मंत्री विजय शाह ने पन्ना टाइगर रिजर्व के शून्य से 65 तक के सफर को बड़ी उपलब्धि बताया। आपने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब यह कहा जाता था कि पन्ना में टाइगर बताओ और इनाम पाओ, लेकिन आज हम बड़े गर्व से कह सकते हैं कि प्रदेश में यदि 526 बाघ हैं तो 65 बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व में हैं। शून्य से शुरुआत कर इस मुकाम तक पहुंचना कोई साधारण कार्य नहीं है। पन्ना को फिर से आबाद करने में आर. श्रीनिवास मूर्ति जैसे वन अधिकारियों का सराहनीय योगदान रहा है,जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। श्री मूर्ति के अलावा पन्ना टाइगर रिज़र्व को यहां तक पहुंचाने में अपना योगदान देने वाले कई वन अधिकारी आज यहां मौजूद हैं। पेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक विक्रम सिंह परिहार जिन्होंने श्री मूर्ति के साथ मिलकर पन्ना के खोये हुए गौरव को वापस दिलाया तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) आलोक कुमार ने भी बतौर क्षेत्र संचालक टाइगर रिजर्व को आगे ले जाने में अथक प्रयास किया है। मैं इन सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के योगदान की सराहना करता हूं।


वन्य प्राणी उपचार केंद्र के निर्माण हेतु भूमि पूजन व शिलान्यास के अवसर का चित्र। 

वन मंत्री श्री शाह ने बड़े उत्साह के साथ बताया कि आज हमारे प्रदेश को टाइगर स्टेट के साथ-साथ लेपर्ड स्टेट का दर्जा मिला है। यह उपलब्धि निश्चित ही वन अधिकारियों व कर्मचारियों के अथक श्रम व संरक्षण को जाता है। श्री शाह ने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में हम गिद्धों और घडय़िालों के संरक्षण में भी नंबर वन रहेंगे। वन मंत्री ने बताया कि बफर में सफर योजना के तहत जल्दी ही पन्ना में भी लोग हॉट एयर बैलून सफारी का लुफ्त उठा सकेंगे। इस अभिनव योजना को मूर्त रूप देने तथा बफर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तीन दिन की कार्यशाला खजुराहो में आयोजित की गई है। पन्ना प्रवास के दौरान वन मंत्री ने बडौर के पास वन्य प्राणी उपचार केंद्र के निर्माण हेतु भूमि पूजन व शिलान्यास भी किया। इस केंद्र की सौगात मिलने से घायल व बीमार वन्य प्राणियों को समय पर समुचित उपचार की सुविधा मिल सकेगी। भूमि पूजन के उपरांत वन मंत्री तकरीबन 2:30 बजे पन्ना से खजुराहो के लिए रवाना हो गये।

कुंजवन से गेट खोले जाने की हुई मांग


कांग्रेस के नेता वन मंत्री से चर्चा करते हुए साथ में ग्रामीण। 

वन मंत्री के पन्ना प्रवास के दौरान कांग्रेस नेता शिवजीत सिंह के नेतृत्व में पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र के गांवों से विस्थापित सैकड़ो लोगो ने वन मंत्री विजय शाह को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने रहने व खेती के लिए जमीन का पट्टा, सहित मूलभूत सुविधायें दिलवाने की मांग की। इसके अलावा वन एवं राजस्व की जमीन का सीमांकन कराकर बंद पड़ी हीरा एवं पत्थर खदानों पुन: संचालित कराने तथा वन विभाग के अंदर जो ग्राम आते हैं, उन गांवों में बिजली,पानी, वनभूमि पट्टा एवं हरसा से झिन्ना तक पक्की सड़क बनाये जाने व पन्ना  टाइगर रिजर्व के भ्रमण हेतु प्रवेश द्वार कुंजवन से खोले जाने की मांग की गई। कुंजवन से गेट खुलने पर पार्क भ्रमण हेतु आने वाले पर्यटक पन्ना आयेंगे जिसका लाभ पन्ना को मिलेगा। 

अवैध वन कटाई की कराई जाये जाँच 


वन मंत्री से चर्चा करते योगेन्द्र भदौरिया। 

जिले के उत्तर वन मंडल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुई वनों की कटाई तथा अवैध रूप से चल रही हीरा खदानों की जाँच कराने के सम्बन्ध में भी वन मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। योगेन्द्र भदौरिया की अगुआई में सौंपे गये इस ज्ञापन के दौरान भाजपा के कई नेता भी मौजूद रहे। वन मंत्री से अनुरोध किया गया कि पुराना पन्ना स्थित बाई पास रोड, टपरियन - बड़ी देवी मार्ग एवं झिन्ना से आने वाले मार्ग पर सीसीटीव्ही कैमरे लगवाये जायें, ताकि अवैध वन कटाई में लिप्त लोगों की पहचान हो सके। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि वन व वन्य प्राणियों के संरक्षण में रूचि रखने वाले ईमानदार और कर्मठ वन अधिकारियों की पदस्थापना उत्तर वन मंडल में की जाये जो तेजी से उजड़ रहे जंगल को सहेज सकें।

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Wednesday, January 20, 2021

पन्ना में बनेगा नवीन श्रमोदय आवासीय विद्यालय

  •   130 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान: श्रम मंत्री
  •   संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल की हुई बैठक 



भोपाल। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में जल्द ही नवीन श्रमोदय आवासीय विद्यालय का निर्माण किया जाएगा। राज्य के श्रम मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि पन्ना में श्रमिकों के बच्चों के लिए नवीन श्रमोदय आवासीय विद्यालय का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए वर्ष 2020-21 में राशि 130 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि पन्ना जिले में शिक्षा की उचित व्यवस्था न होने के कारण बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को पन्ना जिले से बाहर अन्य बड़े शहरों में जाकर शिक्षा ग्रहण करने जाना पड़ता है, पन्ना जिले में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को पन्ना में ही उच्च शिक्षा प्राप्त हो, इसके लिए शीघ्र ही नवीन श्रमोदय आवासी विद्यालय का निर्माण किया जायेगा।

यह बातें उन्होंने मंगलवार को मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्‍याण मण्डल की 32वीं. बैठक को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि निर्माण श्रमिक पंजीयन तथा मण्डल की कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाये। इसके लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को परिचय पत्र (स्मार्ट कार्ड) प्रदाय किये जायें। उन्होंने निर्देश दिये कि मण्डल की विभिन्न योजनाओं में समय-समय पर वांछित संशोधन, संचालन तथा पर्यवेक्षण में परामर्श के लिए कन्सलटेंट की सेवायें ली जायें। उन्होंने पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित कौशल प्रशिक्षण योजना 2012 में संशोधन प्रस्ताव का अनुमोदन किया।

मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने मण्डल द्वारा संचालित औजार/उपकरण योजना में संशोधन का अनुमोदन किया। बैठक में श्रमोदय आवासीय विद्यालयों में मैस संचालन के लिए निविदा प्रक्रिया किये जाने, मण्डल कार्यालय एवं श्रम कार्यालयों में आउटसोर्स पर हाउसकीपिंग, सिक्योरिटी एवं अन्य स्टाफ रखने की स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा श्रमोदय आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत श्रमिकों के बच्चों कों गणवेश उपलब्ध करवाने एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों का अनुमोदन किया। बैठक में श्रम विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, श्रमायुक्त आशुतोष अवस्थी, श्रम विभाग के उप सचिव छोटे सिंह एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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एक लाख की रिश्वत लेते अजयगढ़ तहसीलदार रंगे हाँथ गिरफ्तार

  • जमीन के सीमांकन के एवज में मांगी थी आवेदक से एक लाख की रिश्वत
  • बुद्धवार की सुबह रेस्ट हाउस में लोकायुक्त पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही

लोकायुक्त की टीम रिश्वत लेने के आरोपी प्रभारी तहसीलदार का हाँथ केमिकल युक्त पानी में धुलाते हुए। 

अरुण सिंह,पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में लोकायुक्त पुलिस सागर की टीम ने अजयगढ़ के प्रभारी तहसीलदार उमेश तिवारी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाँथ गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त सागर की टीम ने यह कार्यवाही अजयगढ़ स्थित शासकीय रेस्ट हाउस में तहसीलदार श्री तिवारी के कमरे में की है। मामले के बाद से राजस्व महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

उल्लेखनीय है कि अपनी कार्यप्रणाली को लेकर प्रभारी तहसीलदार इसके पूर्व भी सुर्ख़ियों में रह चुके हैं। रिश्वत लेने के मामले में लोकायुक्त पुलिस सागर के शिकंजे में आने के तक़रीबन एक वर्ष पूर्व प्रभारी तहसीलदार उमेश तिवारी अजयगढ़ में रह चुके हैं। उस समय इन्होने रेस्ट हाउस के कमरे से रुपये चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, यह मामला कई दिनों तक सुर्ख़ियों में रहा है। जिसके चलते तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने इन्हें अजयगढ़ से हटा कर पवई भेज दिया था। पवई से इनकी पदस्थापना शाहनगर व सिमरिया हुई और घूम फिरकर आप फिर अजयगढ़ आने में कामयाब हो गये। लेकिन इस बार लोकायुक्त पुलिस के हत्थे चढ़ गये। लगभग 29 वर्ष की छोटी आयु में ही अपने भ्रष्ट आचरण के चलते कैरियर बर्बाद करने वाले इस राजस्व अधिकारी ने यह साबित कर दिया है कि पन्ना जिले में भ्रष्टाचार लाइलाज बीमारी बन चुकी है।  

 लोकायुक्त पुलिस सागर के उप पुलिस अधीक्षक राजेश खेड़े ने बताया कि फरियादी अंकित मिश्रा पिता राजकुमार मिश्रा 25 वर्ष निवासी वार्ड क्रमांक 14 अजयगढ़ जिला पन्ना से उसके चाचा के प्लाट में भवन बनाने की स्वीकृति के एवज में तहसीलदार द्वारा एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। इस आशय की शिकायत फरियादी द्वारा लोकायुक्त पुलिस में की गई थी। फलस्वरुप आज अजयगढ़ रेस्ट हाउस के रूम नंबर 3 में तहसीलदार उमेश तिवारी जब रिश्वत की राशि ले रहे थे, उसी समय उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया गया। ट्रैप किए जाने के बाद तहसीलदार उमेश तिवारी को कार्यवाही के लिए अजयगढ़ थाना ले जाया गया है। श्री खेड़े ने बताया कि मामले में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। 

लोकायुक्त पुलिस सागर की टीम प्रभारी तहसीलदार को रिश्वत लेते हुये पकड़ने के बाद अजयगढ़ रेस्ट हाउस से पुलिस थाना ले जाते हुए....  



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Monday, January 18, 2021

अजयगढ़ दुर्ग के वास्तु शिल्प को देख मंत्रमुग्ध हुए खनिज मंत्री

  •  पुरातात्विक महत्व के इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण व विकास जरुरी 
  •  मंत्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा पर्यटन की द्रष्टि से महत्वपूर्ण है यह दुर्ग 

अजयगढ़ दुर्ग के रंगमहल की भव्यता व अनूठी शिल्प कला को निहारते मंत्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह।  

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। किसी समय चन्देल राजाओं के शक्ति का केन्द्र रहा मध्यप्रदेश के पन्ना जिले का ऐतिहासिक अजयगढ़ दुर्ग उपेक्षा के चलते खण्डहर में तब्दील होता जा रहा  है। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी की दूरी पर विन्ध्यांचल की दुर्गम पर्वत श्रेणियों पर स्थित यह अजेय दुर्ग अपने जेहन में भले ही  वीरता की अनेकों गौरव गाथायें सहेजे है , लेकिन इसके बावजूद यहां  भूले भटके भी पर्यटक दिखाई नहीं  देते। चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित इस दुर्ग की वास्तुकला के अवशेषों का अवलोकन करने पर ऐसा प्रतीत होता है  कि खजुराहो  और कालींजर के विश्व प्रसिद्ध शिल्प के शिल्पियों के हांथ में इतनी पैनी छैनियां नहीं थीं, जितनी की अजयगढ़ दुर्ग के वास्तुकारों के पास थीं। वास्तव में अजयगढ़ का किला वास्तु शिल्प की दृष्टि से अधिक कलात्मक, अनूठा और बेजोड़ है।

उल्लेखनीय है  कि खजुराहो  शिल्प में यक्ष-यक्षिणी की मैथुन मुद्राओं को पाषाण पर उकेर कर जहाँ  जीवंत रूप प्रदान किया गया है , वहीँ अजयगढ़ की शिल्पकला सत्यं, शिवम, सुन्दरम् की गरिमा से युक्त है । राजाओं और महाराजाओं के उत्थान एवं पतन के इतिहास को अपने जेहन में समेटे अजयगढ़ दुर्ग का प्राकृतिक सौन्दर्य चिरस्थायी है । पर्वत शिखरों से फूटते झरने, नागिन सी बल खाती घाटियां, मनोरम गुफायें, गहरी खाईयां, विशाल सरोवर व श्याम गौर चïट्टानें दर्शकों का मन मोह लेती  हैं। इसके बावजूद इस अनूठे दुर्ग की लगातार घोर उपेक्षा हुई है , जिससे यह अभी तक पर्यटन के मानचित्र से ओझल बना हुआ है । गौरतलब है  कि चन्देल राजाओं द्वारा निर्मित इस भव्य दुर्ग के निर्माण में पत्थरों का तो प्रयोग किया गया है  किन्तु उनको जोडऩे में कहीं  भी मसाले का प्रयोग नहीं  हुआ । जानकारों का कहना है  कि इसके निर्माण में गुरूत्वाकर्षण के सिद्धातों के आधार पर कोणीय संतुलन विधि का प्रयोग किया गया है । प्राकृतिक झंझावातों, प्रकोपों, मानवीय युद्धों के विध्वंशक प्रहारों  तथा अभिशापों को झेलने वाला यह दुर्ग अपनी भव्यता, अद्वितीयता और सुदृढ़ता का परिचय दे रहा है , जो निश्चित ही  खजुराहों  तथा अन्य ऐतिहासिक स्थलों से किसी भी दृष्टि से कम नहीं  है।


स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ किले में भ्रमण करते हुए खनिज मंत्री। 

मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर प्रदेश शासन के मंत्री व स्थानीय विधायक ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह अजयगढ़ प्रवास के दौरान जब इस प्राचीन दुर्ग का भ्रमण किया तो यहाँ की अनूठी वास्तु शिल्प और कला को देख मंत्रमुग्ध हो गये। मंत्री जी ने कहा कि अजयगढ़ के चंदेलकालीन किले में निर्मित रंगमहल की अदभुत कलाकारी को देखा, जो पर्यटन की द्रष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अजयगढ़ का ऐतिहासिक दुर्ग पुरातात्विक महत्व के साथ - साथ एक कला तीर्थ भी है, जिसका संरक्षण किया जाकर सुनियोजित विकास कराया जायेगा। ताकि पर्यटन की द्रष्टि से अजयगढ़ किला अपनी एक अलग पहचान बना सके। मंत्री के भ्रमण से स्थानीय लोगों में चंदेल शासकों के शक्ति का केन्द्र रहे अजयगढ़ दुर्ग के विकास की उम्मीद जागी है।    

कला साधकों की आश्रय स्थली रहा है अजयगढ़ दुर्ग


अजयगढ़ दुर्ग का रंगमहल। 

पन्ना जिले का अजयगढ़ दुर्ग सैकड़ों वर्ष पूर्व चंदेल शासकों के शक्ति का केंद्र रहा है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस दुर्ग को अजेय कहा जाता था। ऐतिहासिक महत्व के इस प्राचीन दुर्ग की स्थापत्य एवं मूर्तिकला मंत्रमुग्ध कर देने वाली है। यहां की मूर्तिकला में संगीत व नृत्य के अनेक दृश्यों का चित्रण हुआ है। सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण रहे अजयगढ़ दुर्ग में उत्कीर्ण प्रतिमाओं को देखने से यह प्रतीत होता है कि तत्कालीन शासकों की संगीत व नृत्य कला में गहरी अभिरुचि थी।

 ऐसा कहा जाता है कि विश्व प्रसिद्ध खजुराहो के मंदिरों का निर्माण अजयगढ़ दुर्ग के बाद हुआ है। चंदेल काल को कालिंजर एवं अजयगढ़ के इतिहास का स्वर्णिम युग कहा जाता है। क्योंकि इसी काल में इन दुर्गों को राजनीतिक, सामरिक एवं सांस्कृतिक गरिमा प्राप्त हुई। उस समय संगीत व मूर्तिकला को काफी महत्व दिया जाता था। स्त्रियों की भी संगीत साधना में गहरी अभिरुचि थी तथा तत्कालीन समाज उनकी इस स्वाभाविक गतिविधि में बाधक नहीं था। स्त्रियां अपनी इच्छानुसार किसी भी ललित कला का चयन कर सकती थीं। यही कारण है कि चंदेल काल में संगीत व नृत्य कला ने अप्रतिम शिखर की ऊंचाइयों को हासिल किया। अजयगढ़ व कालिंजर दोनों ही दुर्गों की मूर्ति कला में संगीत के वाद्य यंत्रों को बजाते हुए स्त्रियों का बड़ा ही मनोहारी अंकन मिलता है। अजयगढ़ के रंग महल मंदिर समूह के द्वितीय मंदिर के मंडप में बांसुरी बजाते हुए एक सुर - सुंदरी की अत्यधिक कमनीय मूर्ति है। वह दो हाथों में बांसुरी पकड़े हुए बजाते दिखाई गई है। इस प्रकार की बांसुरी वादिकाओं की मूर्तियां अन्य मंदिरों के मंडपों में भी प्राप्त होती हैं। कालिंजर के नीलकंठ मंदिर के मंडप में बांसुरी वादिका का सुंदर अंकन है। पुरुषों के द्वारा बांसुरी बजाने का शिल्पांकन  कालिंजर और अजयगढ़ में मिलता है। बांसुरी वादन के दृश्यों की बहुलता इस बात का द्योतक है कि तत्कालीन युग में बांसुरी सर्वाधिक लोकप्रिय वाद्य था। बांसुरी के अलावा ढोलक, मजीरा, डमरु, शंख, झालर आदि वाद्य यंत्रों का भी उस काल में बहुतायत से प्रयोग होता था। चंदेल काल में नृत्य कला को भी काफी बढ़ावा मिला। कालिंजर व अजयगढ़ के मंदिरों में नृत्य के सुंदर दृश्यों का शिल्पांकन किया गया है। कालिंजर में नीलकंठ मंदिर के प्रवेश द्वार पर पट्टिका में नृत्य का बड़ा सुंदर दृश्य उकेरा गया है। उस काल में मंदिर नृत्य व संगीत साधना के केंद्र हुआ करते थे। चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिर भी उस समय नृत्य, संगीत व तंत्र साधना के केंद्र रहे हैं। इन मंदिरों में साधकों को ऊर्जा के उर्ध्वगमन की शिक्षा दी जाती थी। फलस्वरुप साधक कामवासना का अतिक्रमण कर अध्यात्म के रहस्यों का साक्षात्कार करने में सफल होते थे। नृत्य, संगीत व तंत्र साधना के सूत्र व अनगिनत रहस्य आज भी अजयगढ़ के प्राचीन दुर्ग व खजुराहो के मंदिरों में छिपे हैं। इन रहस्यों को जानने व समझने के लिए वही अंतर्दृष्टि चाहिए जो उस काल के रहस्यदर्शियों व मनीषियों के पास थी। जानकारों का कहना है कि खजुराहो के मंदिर व अजयगढ़ का दुर्ग सिर्फ पर्यटकों के घूमने व भ्रमण करने की जगह नहीं है, बल्कि यहां की आबोहवा में गहरी आध्यात्मिक अनुभूतियां भी होती हैं।

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Sunday, January 17, 2021

सेही का शिकार करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

  •  आरोपियों ने फंदा लगाकर कुत्ते की मदद से किया शिकार 
  •  अकोला बफर से लगे इटवांकला गांव के पास की घटना 

वन्य प्राणी सेही के साथ शिकार के आरोपी तथा पीछे खड़े वन कर्मचारी। 

अरुण सिंह,पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से लगे बफर व टेरिटोरियल के जंगल में वन्य प्राणियों के शिकार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। कुछ ही दिनों पूर्व झलाई बीट में सांभर, जंगली सुअर व खरगोश का शिकार हुआ था और अब सेही के शिकार की घटना प्रकाश में आई है। शिकार का यह मामला भी पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला बफर से लगे क्षेत्र का है। जहां दो आरोपियों ने वन्य प्राणियों का शिकार करने के लिए फंदा लगाया था। फंदे में जब सेही नहीं फसी तो कुत्ते की मदद से उसका शिकार किया गया। शिकार के इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

 वन परिक्षेत्र अधिकारी अकोला बफर लालबाबू तिवारी ने आज सायं बताया कि इटवांकला गांव के पास अकोला बफर की सीमा पर स्थित खेत में सेही का शिकार किया गया है। मामले में आरोपी आदेश आदिवासी व अनिल आदिवासी जो रिश्ते में पिता व पुत्र हैं, उन्हें मृत सेही, उसके कांटे, फंदा और खूंटा सहित गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपियों को आज न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। रेंजर श्री तिवारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ वन अपराध क्रमांक 51/04 वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी में परिक्षेत्र सहायक मूरध्वज पटेल, रोहित गुप्ता बीट गार्ड, बृजमोहन सहरिया तथा ओमप्रकाश कुरेले वनरक्षक की सराहनीय भूमिका रही।

गौरतलब है कि जंगलों में पाये जाने वाले वन्य प्राणी सेही के शरीर में बड़ी संख्या में नुकीले कांटे होते हैं, जिनके भय से हिंसक मांसाहारी वन्य जीव भी सेही का शिकार करने से परहेज करते हैं। अपने ऊपर हमला होने पर यह तेज धारदार और नुकीले काँटों को अपने शरीर के ऊपर आवरण बनाकर अपनी सुरक्षा करता है। लेकिन हिंसक वन्य प्राणियों से अपनी सुरक्षा कर लेने वाली सेही शिकारियों से नहीं बच पाती। शातिर शिकारी जाल व कुत्तों की मदद से इस खूबसूरत और निर्दोष वन्य जीव को निशाना बना लेते हैं। 

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परसमनिया पठार की छिगरी अरहर की क्या है खूबी ?

  • बता रहे हैं, जैविक खेती के पक्षधर पद्मश्री बाबूलाल दाहिया 
  • एक बार भी स्वाद चख लिया तो जीवन पर्यंत रहेगी अनुभूति

खेत में लहलहाती छिगरी नामक अरहर, जिसका स्वाद होता है बेमिसाल।  

मित्रो ! अंग्रेजी के दो शब्द  हिंदी में भी बहुत प्रसिद्ध है। क्वालटी और  क्वान्टिटी, पहले का आशय है गुणवत्ता एवं दूसरे का मात्रा। पर इतना भर नही प्रकृति का एक नियम भी है कि वह हर चीजों में संतुलन बनाकर रखती है। अगर सूर्य और पृथ्वी के बीच ही संतुलन न रहे तो वह सूर्य में समा जाय। अथवा यदि पृथ्वी व चंद्रमा के बीच संतुलन न हो तो वह टूट कर हमारी धरती में गिर जाय। इसी तरह यदि किसी वस्तु की अधिक पैदावार होगी तो उसके गुणवत्ता में निश्चय ही कमी होगी। और यदि पैदावार कम होगी तो उसमे गुणवत्ता भरपूर होगी। जिसे सतना जिला के उचेहरा ब्लाक स्थित परसमनिया पठार की इस छिगरी नामक अरहर में भली भांति देखा जा सकता है।

आज बाजार में बहुत प्रकार की रंग बिरंगी आकर्षक दानों की अरहर एवं उसकी दाल उपलब्ध है। कुछ ऐसी बिपुल उत्पादक किस्मे आ गई हैं, जो पूस माघ में ही पक जाती हैं व भरपूर उत्पादन देती हैं। किन्तु जो स्वाद परसमनिया पठार की चैत्र बैसाख में कट कुट कर घर आने वाली इस छिगरी नामक अरहर में है वह सब बैज्ञानिको की निकाली हुई बिपुल उत्पादन वाली किस्मों में नहीं है। वह स्वाद में इस छिगरी के मुकाबले दो कौड़ी की भी नहीं लगती। आषाढ़ में बोई जाकर बैसाख में लौट कर किसान के घर आने वाली इस अरहर पर तो एक पहेली भी थी कि....

जेठवा तोर कान करेव नहि लइजातिउ असाढ़बय तान।

अर्थातु- जेठ मैने तुम्हारा सम्मान किया अस्तु कट कुट कर बैसाख में घर आ गई। अगर बीच मे तुम न होते तो आषाढ़ में ही आती। क्यों कि यहां की संस्कृति में अनुज बधू एवं जेठ के बीच एक बहुत सम्मान का रिश्ता होता है। लेकिन इतना भर नहीं, सतना जिले की इस दाल को और भी स्वादिस्ट एवं गुणवत्ता पूर्ण बना देने वाली एक तकनीक भी यहां विकसित है। वह है अरहर को भून कर उसकी दाल का उपयोग करना।

परन्तु यह सब करने में समय और ज्ञान का समन्वय भी जरूरी होता है। दाल भूनने के पहले अरहर को रात्रि में पानी में फुला दिया जाता है और सुबह उतरा कर ऊपर आए हुए विकृत दानों को अलग कर दिया जाता है। ऐसा कर देने से उस अरहर में साबूत दाने ही रह जाते हैं। क्योंकि उसमें बहुत सी कीड़ो से कटी अधखाई हुई अरहर भी होती है जिसे यहां की बोली में " किचुहिली" कहा जाता है। किचुहिली मिली दाल भी स्वाद को बिगाड़ देती है।

इस तरह  किचुहिली को निकाल कर उस अरहर को आंगन में सूखने के लिए डाल दिया जाता है। और जब वह सूख जाती है तब एक घड़े का ऊपरी हिस्सा फोड़ नीचे वाले हिस्से को चूल्हे में चढ़ा कर उसे हल्का हल्का भूना जाता है। उस अरहर भूनने के मिट्टी पात्र को खपडी कहा जाता है। यह सब करने के पश्चात खपडी से भुनी उस अरहर को हाथ चलित देसी चकरिया से दल कर दाल निकाल ली जाती है।

लीजिए यह है विशेष तकनीक से निकाली गई बघेल खण्ड की परम्परागत अरहर छिगरी एवं उसकी भून कर दली हुई दाल जो सदियों से लोगो के जीभ और मन में बसी हुई है। यदि किसी ने एक बार भी उसका स्वाद चख लिया तो जीवन पर्यंत उसकी अनुभूति बनी रहती है।

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Saturday, January 16, 2021

सक्षम नेतृत्व से पन्ना के विकास को मिल रही नई दिशा

  •  सांसद और विधायक की सक्रियता से आम जनता को जागी उम्मीद 
  • क्षेत्र के विकास का हरसंभव प्रयास किया जाएगा - ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह

सिलधरा गांव में क्रिकेट टूनामेंट के समापन अवसर पर क्रिकेट खेलते हुए मंत्री श्री सिंह। 

अरुण सिंह,पन्ना। जिस क्षेत्र को योग्य, सक्षम और ऊर्जा से लवरेज नेतृत्व मिल जाता है, उस क्षेत्र का कायाकल्प स्वमेव होने लगता है। पन्ना विधानसभा क्षेत्र के लोग इस मामले में निश्चित ही भाग्यशाली हैं कि उन्हें विकास और जनसेवा के लिए समर्पित नेतृत्व मिला है जो बड़ी - बड़ी बातें और आश्वासन देने के बजाय काम पर यकीन करता है। क्षेत्रीय सांसद व भाजपा प्रेदशाध्यक्ष बी.डी. शर्मा और प्रदेश के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह की जोड़ी जिस उत्साह के साथ सक्रिय है, पन्ना जिले के विकास को एक नई गति और दिशा मिली है। पन्ना प्रवास के दौरान मंत्री श्री सिंह जिस तरह से जन समस्याओं के निराकरण तथा जनता से रूबरू मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जानने में रूचि दिखा रहे हैं उससे आमजन का नेतृत्व के प्रति भरोसा प्रगाढ़ हुआ है। लोगों में अब उम्मीद जागी है कि प्रकृति की अनुपम सौगातों से समृद्ध पन्ना की रत्नगर्भा धरती में प्रकृति से मित्रवत व्यवहार करते हुए विकास की नई इबारत लिखी जायेगी जो आने वाली पीढ़ी के जीवन को खुशहाल करेगी।

खनिज मंत्री श्री सिंह अपने पन्ना प्रवास के दौरान गत दिवस पन्ना विधान सभा क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण अंचलों का भ्रमण कर ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित एवं निर्माणाधीन कार्यो का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता ने मुझे चुना है और मैं प्रदेश शासन में मंत्री हॅू। मेरी जिम्मेदारी होगी कि मैं हमेशा क्षेत्र की जनता की सेवा में तत्पर रहूं। क्षेत्र के विकास एवं समस्याओं के निराकरण के लिए मेरे द्वारा हरसंभव प्रयास किये  जायेंगे। भ्रमण के प्रथम चरण में उन्होंने श्री सारंगधर मंदिर में पहुंचकर मंदिर की समस्याओं के संबंध में चर्चा की। जनता की मांग के अनुसार मुख्य मंदिर के उपरी तरफ फर्सीकरण, रेन बसेरा बनाये जाने के साथ तालाब जीर्णोद्धार कराये जाने की मांग की गई जिस पर मंत्री श्री सिंह ने कहा कि कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि मंदिर को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए समिति बनाई जाए। जिससे मंदिर की भूमियों का भी सही ढंग से प्रबंधन हो सके।


बृजपुर में नवनिर्मित आधुनिक थाना भवन का लोकार्पण करते हुए। 

मंत्री श्री सिंह द्वारा बृजपुर में निर्मित 94 लाख रूपये लागत के आधुनिक थाना भवन का लोकार्पण वैदिक रीति से किया गया। इसके उपरांत ग्राम धरमपुर में सामुदायिक भवन का लोर्कापण, पहाडीखेरा में पंचायत भवन, सीसी रोड, पुलिया निर्माण कार्य का लोकार्पण वैदिक रीति से पूजन उपरांत नाम पट्टिका अनावरण कर किया गया। ग्राम हरद्वाही उमरी में गौशाला का भूमिपूजन किया गया। इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए मंत्री श्री सिंह द्वारा कहा गया कि शासन द्वारा प्रत्येक वर्ग के कल्याण की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जिन कल्याणकारी योजनाओं को पूर्व शासन द्वारा बंद कर दिया गया था उन्हें पुन: प्रारंभ कर दिया गया है। जिसमें संबल योजना के तहत हितग्राहियों का पुन: पंजीयन कर लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आधुनिकतम थाना बन कर तैयार हो गया है, इसका लाभ इस क्षेत्र की जनता को मिलेगा। यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा है जिससे यहां अपराध की घटनाएं घटित होती रहती है। शीघ्र ही पहाडीखेरा क्षेत्र में एक पुलिस थाना स्थापित किया जाएगा। अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस की गश्ती बढा दी गयी है। उन्होंने क्षेत्र की जनता की मांग को दृष्टिगत रखते हुए आश्वस्त किया कि सिरस्वाहा, सुकवाहा बांध का कार्य कराया जायेगा। पन्ना से पहाडीखेरा मार्ग का शीघ्र ही दोहरीकरण कराया जायेगा। उन्होंने सिलधरा में आयोजित क्रिकेट टूनामेंट के समापन अवसर पर विजेता जेतवारा एवं उप विजेता जरूआखेरा को शील्ड वितरित की। उन्होंने कहा कि ग्राम हरद्वाही उमरी में गौशाला का निर्माण होने से किसानों की समस्याओं के साथ-साथ गौवंश की रक्षा हो सकेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत होने वाले कार्य के अलावा क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने के लिए बांधों का निर्माण कराया जाएगा। इस संबंध में जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए गए हैं। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण होने से जल स्तर उपर आएगा। पेयजल की समस्या से निदान मिलेगा। उन्होंने कहा कि आगामी आने वाले समय में शीघ्र ही शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों में सभी विभाग के अधिकारी उपस्थित होंगे जिससे मौके पर ही आमजनों की समस्याओं का निराकरण हो सकेगा। 

इस अवसर पर जिला पंचायत के अध्यक्ष रविराज सिंह यादव ने सम्बोधित करते हुए कहा कि थाना भवन बनने के अलावा क्षेत्र में और भी विकास कार्य तेजी से होंगे। कलेक्टर संजय कुमार मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि आपके क्षेत्र में आधुनिक थाना भवन बन गया है अब पुलिस भी आधुनिक उपकरणों से लेस हो चुकी है। जिससे पुलिस जनता को और अधिक सेवाएं दे सकेगी। आमजनता को चाहिए कि नारी के सम्मान की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहें।  इस कार्य में जब पुलिस की आवश्यकता होगी सहयोग करेगी। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने अपने उद्बोधन में कहा कि बृजपुर में नया थाना भवन बन गया है यह थाना भवन अत्याधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त होगा। क्षेत्र में अपराधों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। आगामी समय में पहाडीखेरा में भी थाने की स्थापना की जायेगी। 

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Thursday, January 14, 2021

पन्ना की एनएमडीसी खदान में बंद नहीं होगा हीरा खनन कार्य

  • राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की बैठक में विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा 
  • मुख्यमंत्री ने कहा वन्यप्राणी संरक्षण और विकास में संतुलन हो  

मध्यप्रदेश राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। 

भोपाल। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वन्य क्षेत्रों और वन्यप्राणियों का संरक्षण एवं वन क्षेत्रों में विकास कार्य इस तरह संपादित हों कि इससे मानव जीवन पर भी विपरीत प्रभाव न पड़े। दोनों के मध्य संतुलन स्थापित हो। अभ्यारण्य और राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्रों में सड़क निर्माण, संचार विकास और अन्य आवश्यक कार्य वन्यप्राणियों को क्षति पहुंचाए बिना सम्पन्न हों, इसका ध्यान रखा जाए। पन्ना जिले में गंगऊ अभ्यारण्य में एन.एम.डी.सी. की 275 हेक्टेयर में हीरा खनन कार्य के संबंध में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह सुनिश्चित करें कि हीरा खनन का कार्य बंद न हो, साथ ही विकास भी हो और वन्य प्राणी संरक्षण भी हो। दोनों में संतुलन आवश्यक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मध्यप्रदेश राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की 19वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में वन मंत्री कुंवर विजय शाह, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 अफ्रीकी चीतों को बसाने के लिए अनुकूल है मध्यप्रदेश

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान और नौरादेही वन्यप्राणी अभ्यारण्य में चीतों के रहवास के लिए उपयुक्त पाए जाने की स्थिति है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान जो करीब 750 वर्ग किलोमीटर में स्थित है वहां मात्र एक गांव है जिसके विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है। इसी तरह एक हजार किलोमीटर से अधिक वर्ग किलोमीटर में स्थित नौरादेही वन्यप्राणी अभ्यारण्य सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में स्थित है। यहाँ वर्तमान में 63 ग्रामों में से 13 गांव विस्थापित किए जा चुके हैं। अन्य 15 ग्रामों के विस्थापन की प्रक्रिया प्रचलन में है। इसके दृष्टिगत मध्यप्रदेश के इन संरक्षित क्षेत्रों में अफ्रीकी चीते की स्थापना की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इस संबंध में वैधानिक रूप से आवश्यक अनुमतियों के पश्चात कार्य को गति दी जाएगी। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वाय.वी. झाला द्वारा मध्यप्रदेश के संरक्षित क्षेत्रों में अफ्रीकी चीतों की अनुकूलता के संबंध में प्राथमिक सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके लिए मध्यप्रदेश में तैयारियां प्रारंभ की गई हैं। प्रस्तावित वैकल्पिक संरक्षित क्षेत्र गांधीसागर अभ्यारण्य मंदसौर में शाकाहारी वन्यप्राणियों के ट्रांसलोकेशन के लिए नरसिंहगढ़ अभ्यारण्य राजगढ़ से 500 चीतों ट्रांसलोकेशन करने की अनुमति भी प्राप्त हुई है।

टाइगर स्टेट के बाद मध्यप्रदेश अब तेंदुआ स्टेट भी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बफर में सफर जैसी गतिविधियों से पर्यटन विकास संभव होगा। उन्होंने मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट के बाद तेंदुआ स्टेट बनने पर बधाई दी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 3421 तेंदुए होने पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य में तेंदुआ संख्या लगभग साढ़े तीन हजार है। यह निश्चित ही एक उपलब्धि है। देश में कुल 12852 तेंदुएं हैं। मध्यप्रदेश को टाइगर के बाद तेंदुआ राज्य बनने के पश्चात अन्य वन्यप्राणियों की श्रेणी में भी अग्रणी बनने की संभावनाएं बढ़ी हैं। बोर्ड के सदस्य  अभिलाष खांडेकर ने सुझाव दिया कि राजस्थान में तेंदुआ रिजर्व बनाया जा रहा है, मध्यप्रदेश में भी ऐसा संभव है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने श्री खांडेकर के इस सुझाव पर सहमति जताई।

पहले हासिल कर लिया था बाघ प्रदेश का दर्जा 

मध्यप्रदेश ने अखिल भारतीय बाघ गणना 2018 में 526 बाघ पाए जाने के साथ बाघ प्रदेश का दर्जा हासिल किया था। अब तेंदुआ स्टेट का दर्जा मिलने से मध्यप्रदेश प्रथम और कर्नाटक एवं महाराष्ट्र द्वितीय एवं तृतीय क्रम पर हैं। बैठक में बाघों के रहवासों और संरक्षित क्षेत्रों का भारत सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं के साथ ही कैम्पा फण्ड से भी वित्त पोषण पर चर्चा हुई। संरक्षित क्षेत्रों में रहवास प्रबंधन, वन्यप्राणियों की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, मानव-वन्यप्राणी द्वंद के प्रबंधन और बाघ एवं शाकाहारी वन्यप्राणियों के अधिक घनत्व के क्षेत्रों से कम घनत्व के संरक्षित क्षेत्रों में ट्रांसलोकेशन किए जाने पर चर्चा हुई। प्रदेश में वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए 16,794 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 6 टाइगर रिजर्व सहित 11 राष्ट्रीय उद्यान एवं 24 वन्यप्राणी अभ्यारण्यों का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में वन्यप्राणी संरक्षण और प्रबंधन की गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित हों। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश के सभी नेशनल पार्क में नाईट जंगल सफारी, बैलून सफारी शुरू करने, जंगली हाथियों के रेस्क्यू, घड़ियालों की पुनर्स्थापना के संबंध में गतिविधियां संचालित हैं। बैठक में मध्यप्रदेश की टाइगर स्टेट के रूप में स्थिति सुदृढ़ करने के लिए योजना पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही प्रदेश में बाघों की पुनर्स्थापना के लिए सतपुड़ा, नौरादेही, संजय गांधी अभ्यारण में आवश्यक परिस्थितियों के निर्माण के संबंध में और स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के सशक्तिकरण पर भी चर्चा हुई। प्रदेश में माधव, गांधीसागर और नौरादेही राष्ट्रीय उद्यान में हो रहे कार्यों पर भी विचार किया गया। ये चारों राष्ट्रीय उद्यान भारत सरकार द्वारा चयनित हैं। यहाँ भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून द्वारा सर्वेक्षण कार्य पूर्ण किया गया है।

खरमोर संरक्षण हेतु कंजर्वेंशन ब्रीडिंग केन्द्र प्रारंभ करने पर सहमति

बैठक में बताया गया कि धार जिले के सरदारपुर में वन्यप्राणी अभ्यारण्य का गठन खरमोर प्रजाति के पक्षी के लिए किया गया है। यह पक्षी घास के मैदानों में पायी जाने वाली महत्वपूर्ण और संकटग्रस्त प्रजाति है। पश्चिमी मध्यप्रदेश के धार के अलावा झाबुआ, रतलाम, मंदसौर और नीमच में ये पाए जाते हैं। इनकी संख्या कम हुई है। प्रदेश में खरमोर संरक्षण के लिए कंजर्वेंशन ब्रीडिंग केन्द्र प्रारंभ करने पर सहमति हुई। इसके लिए करीब साढ़े तीन सौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पूर्व में अधिसूचित किया गया था। खरमोर अभ्यारण्य सरदारपुर के क्षेत्र के अंतर्गत वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 का पालन करते हुए आवश्यक गतिविधियों के संचालन पर सहमति हुई। जिन क्षेत्रों में खरमोर पक्षी कुछ वर्ष से प्रवास नहीं कर रहे हैं उन क्षेत्रों को अभ्यारण्‍य क्षेत्र से बाहर करने के संबंध में विचार किया गया। इसी तरह खरमोर के लिए सैलाना अभ्यारण्य के पुनर्गठन प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि खरमोर का संरक्षण महत्वपूर्ण है, इनके रहवास वाले क्षेत्रों में ऐसी फसलों को प्रोत्साहित किया जाए जिससे पक्षियों को भी भोजन मिल सके। इसी तरह सैलाना अभ्यारण्य की सीमा से 10 किलोमीटर परिधि में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस हाईवे एन.एच.-148एन के 8 लेन निर्माण के लिए वन्यप्राणियों की सुरक्षा की शर्त पर बोर्ड द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है।

राज्य मछली महाशीर को बचाएंगे

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के बड़वाह वनमण्डल में महाशीर संरक्षण योजना लागू की गई है। राज्य शासन ने महाशीर संरक्षण और प्रजनन पर 61 लाख रूपए की राशि खर्च की है। वर्ष 2020 में महाशीर का चार बार कृत्रिम प्रजनन कराया गया जिसके फलस्वरूप 4000 फ्राई प्राप्त किए गए। ये स्वस्थ स्थिति में है, इन्हें नर्मदा के जल प्रवाह में छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एक समय नर्मदा में इन मछलियों की संख्या काफी अधिक थी। इनके संरक्षण के कार्य को गति दी जाए। बोर्ड की बैठक में डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ के सदस्य ने सुझाव दिया कि उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में महाशीर संरक्षण के कार्यों का अध्ययन कर मध्यप्रदेश में श्रेष्ठ गतिविधियों को अपनाया जा सकता है। बैठक में जानकारी दी गई कि महाशीर संरक्षण के लिए प्रदेश में बीते नवम्बर माह में राज्य स्तरीय स्टियरिंग कमेटी भी बनाई गई है जिसकी शीघ्र ही बैठक होने वाली है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मत्स्य पालन विभाग द्वारा भी महाशीर संरक्षण प्रयासों से जुड़ने के निर्देश दिये।

किसानों का भी पक्ष जानें, समाधान निकाला जाए

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के कुछ स्थानों से नीलगाय और अन्य पशुओं द्वारा खेतों में नुकसान पहुंचाने के समाचार मिलते हैं। ऐसे मामलों में किसानों का पक्ष जानते हुए आवश्यक उपाय किए जाएं। वन्यप्राणियों और मनुष्यों के बीच द्वंद की स्थिति निर्मित हो तो उसका समाधान निकाला जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सागर जिले में प्रस्तावित डॉ. अम्बेडकर अभ्यारण्य के संबंध में जिला योजना समिति के अनुमोदन के पश्चात बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखने के निर्देश दिए। यह अभ्यारण्य 258 वर्ग किलोमीटर में प्रस्तावित है। प्रस्तावित अभ्यारण्य क्षेत्र में कोई राजस्व ग्राम नहीं है।

संचार संबंधी अनुमतियां

बोर्ड की बैठक में गांधी सागर अभ्यारण्य क्षेत्र में सड़क निर्माण, वीरांगना दुर्गावती अभ्यारण्य दमोह के क्षेत्र में बेहतर संचार सुविधा के लिए ओ.एफ.सी. केबल डालने की अनुमति भी प्रदान की गई। इसी तरह की अनुमतियां ग्वालियर के घाटीगांव हुकना पक्षी सोनचिड़िया अभ्यारण्य, माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी, नरसिंहगढ़ अभ्यारण्य एवं कान्हा टाइगर रिजर्व मण्डला के क्षेत्र के अंतर्गत भी प्रदान की गईं। इसके अलावा ओरछा अभ्यारण्य क्षेत्र में 132 के.व्ही. विद्युत पारेषण लाइन और 14 टॉवर के निर्माण के लिए 13.50 हेक्टयर भूमि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कम्पनी सागर को प्रदान की गई। यह सभी अनुमतियां वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत प्रदान की गईं।

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हीरों व मंदिरों के साथ अब आंवला भी बनेगा पन्ना की पहचान

  • एक जिला एक उत्पाद के लिए जिले में आंवला उत्पाद का हुआ चयन
  • पन्ना के जंगलों में प्राकृतिक रूप से प्रचुर संख्या में हैं आंवले के वृक्ष  

आंवला का मुरब्बा बनातीं पन्ना जिले में स्वसहायता समूह की महिलायें।  

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। बेशकीमती रत्न हीरों और भव्य मंदिरों के लिए मशहूर मध्यप्रदेश का पन्ना जिला अब आंवला उत्पादों के लिये भी जाना जायेगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री  की मंशानुसार आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के अन्तर्गत एक जिला एक उत्पाद योजनान्तर्गत पन्ना जिले को आंवला उत्पाद के लिए चयनित किया गया है। उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के जंगल में आंवला के वृक्ष प्राकृतिक रूप से बहुतायत में पाये जाते हैं। यहाँ का आंवला दूसरे प्रांतों में स्थित आयुर्वेदिक कारखानों में पहुँचाया जाता रहा है। लेकिन इसका अपेक्षित लाभ स्थानीय निवासियों व जिले को नहीं मिल पाता था। लेकिन अब एक जिला एक उत्पाद के लिए जिले में आंवला उत्पाद का चयन होने से इसका पूरा लाभ स्थानीय लोगों को मिल सकेगा। मालुम हो कि पन्ना जिले का आंवला औषधीय गुणों से भरपूर और रेशारहित होने के कारण उपयोग में अत्यधिक लाभकारी एवं सरल है। यही वजह है कि एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत आंवले के उत्पाद हेतु पन्ना जिले का चयन किया गया है ताकि आंवला उत्पाद के लिए भी देश और दुनिया में पन्ना की पहचान बन सके। 

उल्लेखनीय है कि आज से तक़रीबन दो दशक पूर्व भी पन्ना को आंवला जिला बनाने की दिशा में प्रयास हुए थे। पन्ना के निकट सकरिया गांव में वन विभाग द्वारा 42 हेक्टेयर क्षेत्र में आंवले के पौधे रोपित कराये गये थे। आंवले का उत्पादन शुरू होने पर आसपास के ग्रामों की गरीब महिलाओं को आंवला मुरब्बा सहित अन्य उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिलाया गया था। सकरिया में निर्मित आंवला उत्पाद ने खूब ख्याति अर्जित की तथा यहाँ के उत्पादों की मांग दूर - दूर तक होने लगी। सकरिया के अलावा पन्ना जिले का दहलान चौकी गांव भी आंवला मुरब्बा सहित आंवले के अन्य उत्पादों के लिए जाना जाता है। इस गांव की महिलाओं द्वारा बनाये आंवला मुरब्बा की पन्ना सहित अन्य जिलों व दूसरे प्रदेशों तक सप्लाई होती है। दहलान चौकी को ख्याति मिलने पर पन्ना - अजयगढ़ घाटी में व्यापक पैमाने पर आंवला के पौधों का रोपण कराने की योजना भी बनी थी ताकि यह ऐतिहासिक और खूबसूरत घाटी आंवला घाटी के रूप में अपनी पहचान बना सके। लेकिन दुर्भाग्य से यह सुन्दर पर्यावरण हितैषी व रोजगार परक योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। अब चूँकि पन्ना जिले को आंवला उत्पाद के लिए चयनित किया गया है, इसलिए उम्मीद जागी है कि अजयगढ़ घाटी की खूबसूरती और उपयोगिता बढ़ाने के लिए यहाँ पर प्रचुर संख्या में आंवले के पौधों का रोपण कराने की योजना मूर्तरूप ले सकेगी। 

सहायक संचालक उद्यान महेन्द्र मोहन भट्ट ने बताया कि आंवले से बनने वाली सामग्री आंवला मुरब्बा, अचार, चटनी, सुपारी, रशीली केण्डी, आंवला लड्डू, बर्फी, चूर्ण, चवनप्राश आदि का उत्पादन जिले में वृहद रूप में प्रारंभ करने की योजना तैयारी की गयी है। जिले में स्वसहायता समूहों द्वारा आंवले का मुरब्बा, आंवला सुपारी, आंवला पाउडर, आंवला रस का उत्पादन किया जा रहा है। इसके द्वारा उत्पादित आंवला मुरब्बा, केण्डी, आचार राष्ट्रीय स्तर तक आयोजित होने वाले ग्रामोद्योग मेलों में विक्रय किये जा चुके हैं। जिले में उत्पादित हो रही आंवले की सामग्री स्थानीय स्तर पर एवं पडोसी जिलों में आसानी से बिक जाती है। जिला मुख्यालय पर आजीविका मिशन द्वारा उत्पादों के विक्रय के लिए दुकान स्थापित की गयी है। बडे पैमाने पर आंवले के उत्पाद जिले में तैयार करने के लिए लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे जिले में आंवला से बनने वाली सामग्री की इकाईया स्थापित कर लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सके। वर्तमान में जिले के किसानों द्वारा आंवले की विभिन्न प्रजातियों की खेती की जा रही है। आंवले की सामग्री का उत्पादन बडे पैमाने पर प्रारंभ किये  जाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। श्री भट्ट ने बताया कि किसानों को अपने खेतों व खाली पड़ी जगह पर आंवला लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आपने बताया कि नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन परिसर के एक पोर्सन में आंवले के विभिन्न प्रजाति के पौधों के रोपण की योजना है। इसके अलावा शासकीय कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों व खाली पड़ी जमीनों पर भी आंवले के पौधे लगाये जायेंगे। 



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Wednesday, January 13, 2021

पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन ने 4 शावकों को दिया जन्म

  •   नन्हे शावकों के साथ चहल कदमी करते हुए दिखी बाघिन 
  •   नये मेहमानों के आने से टाइगर रिजर्व में खुशी का माहौल

पन्ना की बाघिन पी- 213 (32) अपने शावक को मुँह में दबाकर ले जाते हुए। 

अरुण सिंह,पन्ना। बाघों से आबाद हो चुके मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से नये वर्ष में एक बड़ी खुशखबरी आई है। यहां बाघिन पी- 213 (32) ने चार नन्हे शावकों को जन्म दिया है। क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व उत्तम कुमार शर्मा ने आज सायं यह खुशखबरी देते हुए बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व में ही जन्मी तथा यहीं  पली-बढ़ी बाघिन पी-213(32) ने दूसरी बार शावकों को जन्म दिया है। 

क्षेत्र संचालक श्री शर्मा ने बताया कि बाघिन ने पन्ना टाइगर रिजर्व के वन परीक्षेत्र गहरीघाट में 2 से 3 माह पूर्व शावकों को जन्म दिया है। यह बाघिन जब अपने नन्हें शावकों को एक स्थान से दूसरे किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर रही थी, उसी दौरान कैमरा ट्रैप में शावक को मुंह में दबाकर ले जाते हुए उसका फोटोग्राफ प्राप्त हुआ है। आपने बताया कि बाघिन और शावकों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा रही है। श्री शर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हाल ही में मॉनिटरिंग दल को चारों शावकों के साथ बाघिन प्रत्यक्ष दिखाई दी है। अब ये नन्हें शावक अपनी मां के साथ चहल कदमी करने लगे हैं। श्री शर्मा ने बताया कि बाघिन तथा उसके चारों शावक पूर्णरूपेण स्वस्थ हैं।

 पन्ना में लगातार बढ़ रहा बाघों का कुनबा

 बाघ पुनर्स्थापना योजना को मिली शानदार सफलता के बाद से ही पन्ना में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। विगत 10 वर्ष पूर्व बांधवगढ़ से पन्ना आई संस्थापक बाघिन टी-1 ने यहाँ शावकों को जन्म देने का सिलसिला जब से शुरू किया, तभी से नये मेहमानों का आगमन निरंतर जारी है। इस बाघिन ने 16 अप्रैल 2010 को धुँधुआ सेहा में चार शावकों को जन्म देकर पन्ना में बाघों के उजड़ चुके संसार को आबाद कर एक नया इतिहास रचा था। मौजूदा समय आलम यह है कि पन्ना टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र बाघों के बढ़ते कुनबे के चलते छोटा पड़ गया है। तकरीबन 576 वर्ग किलोमीटर में फैले कोर क्षेत्र में 30 वयस्क बाघ रह सकते हैं, जबकि यहां बाघों की संख्या आधा सैकड़ा के पार जा पहुंची है। ऐसी स्थिति में कई बुजुर्ग व युवा बाघ कोर क्षेत्र के बाहर बफर व टेरिटोरियल में विचरण करने लगे हैं।



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Monday, January 11, 2021

पन्ना के जगन्नाथ स्वामी मंदिर में कई कबूतर मृत मिले

  •  मृत पक्षियों का सैंपल जांच के लिए भेजा जा रहा भोपाल 
  •  पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने स्थिति का लिया जायजा

जगन्नाथ स्वामी मंदिर की छत से मृत कबूतर एकत्र करती पशु चिकित्सा विभाग की टीम। 

अरुण सिंह,पन्ना। प्रदेश के डेढ़ दर्जन जिलों में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बीच अन्य जिलों से भी पक्षियों के मरने की खबरें आ रही हैं। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में भी आज बड़ी संख्या में कबूतरों के मरने की जानकारी मिली है। पन्ना शहर के मध्य में स्थित प्राचीन जगन्नाथ स्वामी मंदिर की छत में दो दर्जन से अधिक कबूतर मृत पाए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में कबूतरों के मरने की खबर से शहर में हड़कंप मचा हुआ है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने आज सुबह 10:30 बजे मंदिर की छत से 26 मृत कबूतर एकत्र कर जांच हेतु सैंपल भोपाल भेजा है। जांच रिपोर्ट आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 उप संचालक पशु चिकित्सा विभाग डॉ वीके त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार की सुबह उन्हें सूचना मिली थी कि जगन्नाथ स्वामी मंदिर में कई कबूतर मृत पड़े हैं। सूचना मिलते ही डॉक्टर नरेंद्र सिंह बुंदेला के साथ एक टीम तुरंत भेजी गई, जहां 26 मृत कबूतर पाये गये हैं। डॉक्टर त्रिपाठी ने बताया कि कबूतर कई दिनों से मर रहे हैं, क्योंकि मृत पाये गये कबूतरों में कई सड़ चुके हैं। पशु चिकित्सक डॉक्टर नरेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि मंदिर में कबूतरों के मरने की जानकारी नगर पालिका प्रशासन पन्ना को दे दी गई है तथा मंदिर को सैनिटाइज करने के लिए कहा गया है। कबूतरों की मौत कैसे हुई, यह पूछे जाने पर डॉ. बुंदेला ने कहा कि अभी इस संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। जांच रिपोर्ट आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि कबूतरों की मौत वर्ल्ड फ्लू के संक्रमण से हुई या इसके पीछे अन्य कोई वजह है। आपने बताया कि पन्ना शहर के अलावा जिले के अजयगढ़ व पवई में मुर्गी मरने तथा ककरहटी में एक कौवा के मरने की सूचना मिली है। इन सभी के भी सैंपल जांच के लिए भेजे गये हैं।

इसी मन्दिर से निकलती है सुप्रसिद्ध रथयात्रा 


मंदिर के गुम्मद पर बैठे कबूतर। 

मंदिरों के शहर पन्ना स्थित प्राचीन जगन्नाथ स्वामी मन्दिर से ही हर साल सुप्रसिद्ध रथयात्रा निकलती है जिसमें समूचे बुन्देलखण्ड क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। राजमंदिर पैलेस के निकट स्थित यह प्राचीन मन्दिर जन आस्था का केन्द्र है। इस विशाल मन्दिर के ऊँचे गुम्मद ( शिखर ) पर हमेशा कबूतर नजर आते हैं। सैकड़ों कबूतरों का इस मंदिर में बसेरा रहता है। चूँकि मंदिर की छत में आमतौर पर कोई नहीं जाता, इसलिए कबूतरों के मरने की जानकारी तुरंत नहीं हो सकी। जब दर्जनों कबूतर मरकर सड़ने लगे तब तब जाकर इसकी भनक लगी। मालुम हो कि अभी तक जिले में बर्ड फ्लू के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन कबूतरों के मरने की इस ताजी घटना के बाद से लोग सशंकित हैं। प्रशासन ने बर्डफ्लू से बचाव के लिए सावधानी बरतने की अपील की है।

लक्षण दिखने पर लें डॉक्टर की सलाह 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एल.के. तिवारी ने बर्डफ्लू के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि बर्डफ्लू की बीमारी पूर्व में भी प्रदेश में पक्षियों में फैल चुकी है। मानव में यह बीमारी बहुत कम ही फैलती है। बर्डफ्लू की बीमारी का ईलाज उपलब्ध है। जिला चिकित्सालय में भी इस बीमारी की दवाएं उपलब्ध हैं। इस बीमारी में भी मरीज को सर्दी, जुखाम, बुखार होता है। लापरवाही बरतने पर इसका असर फेफडों में हो जाने पर रोगी गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है। किसी भी व्यक्ति को सर्दी, जुखाम, बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। कलेक्टर संजय कुमार मिश्र के निर्देशानुसार बर्ड फ्लू बीमारी की जानकारियों के आदान-प्रदान के लिए जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। यह नियंत्रण कक्ष 24 घंटे कार्य करेंगा। जिससे कहीं भी बर्डफ्लू की बीमारी संबंधी कार्यवाही के लिए प्रभारी अधिकारी डॉ. प्रियंका सिंह को बनाया गया है।

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पर्यटक अब आसमान से देख सकेंगे जंगल का नजारा

  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हॉट एयर बैलून वाइल्ड लाइफ सफारी लांच
  • प्रदेश के पेंच,कान्हा औऱ पन्ना टाइगर रिजर्व में भी शुरू करने की योजना



।। अरुण सिंह ।। 

पन्ना। प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बफर में सफर योजना के तहत देश के किसी टाइगर रिजर्व में पहली बार हॉट एयर बैलून वाइल्ड लाइफ सफारी को लांच किया गया है। फ़िलहाल यह सुविधा प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के लिए उपलब्ध है। अब पर्यटक आसमान से जंगल का खूबसूरत नजारा देखने के साथ - साथ जंगल में बाघ, तेंदुआ, भालू सहित दूसरे वन्य जीवों का भी दीदार कर सकेंगे। इसकी शुरुआत पिछले दिनों मध्य प्रदेश के वन मंत्री  विजय शाह ने की है।  वन मंत्री ने कहा कि इस एयर बैलून के जरिए पर्यटक टाइगर रिजर्व में टाइगर, तेंदुआ, भारतीय स्लोथ बियर और अन्य जंगली जानवरों को ऊंचाई से देख सकेंगे। 

मध्य प्रदेश के फॉरेस्ट मिनिस्टर ने इसे लांच करते हुए कहा कि हॉट एयर बैलून वाइल्डलाइफ सफारी के लांच होने के साथ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों के लिए अब एक और रोमांचक गतिविधि लिस्ट में जुड़ गई है। यह सुविधा देश में पहली बार शुरू की गई है। शाह के मुताबिक अब अफ्रीका के जंगलों की तरह भारत में भी पर्यटक ऊंचाई से जंगल में विचरण कर रहे जानवरों को देख सकेंगे। वन मंत्री ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश सरकार हॉट एयर बैलून वाइल्ड लाइफ सफारी को पेंच, कान्हा औऱ पन्ना के टाइगर रिजर्व में भी शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में शुरू किये गये एयर बैलून सेवा को जयपुर की स्काई वाल्ट्ज कंपनी संचालित करेगी। 

मध्य प्रदेश में  पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा




मालुम हो कि अभी तक प्रदेश के जंगलों में  केवल जीप से वाइल्ड लाइफ सफारी की जाती थी, लेकिन अब अफ्रीका में हो रही सफारी की तर्ज़ पर भारत के मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में भी हॉट एयर बैलून वाइल्ड लाइफ सफारी की जायेगी। इस नये आकर्षण से मध्य प्रदेश का पर्यटन और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य पेंच टाइगर रिजर्व, कान्हा टाइगर रिजर्व और पन्ना टाइगर रिजर्व में भी इस सेवा को शुरू करने की योजना बना रहा है। यह सेवा जयपुर स्थित स्काई वाल्ट्ज द्वारा संचालित की जा रही है. इस परियोजना को मध्य प्रदेश वन विभाग, ताज सफ़ारी और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा कार्यान्वित किया गया था। 

उल्लेखनीय है कि भारत में 12 साल पहले हॉट एयर बैलून की शुरुआत करने वाली स्काई वाल्ट्ज कंपनी को मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हॉट एयर बैलून सफारी का लाइसेंस दिया गया है। बांधवगढ़ आने वाले देशी विदेशी सैलानियों की बड़ी संख्या देखते हुए कंपनी को उम्मीद है कि भारत के जंगलों की विविधता देखने इस सफारी को पर्यटकों का अच्छा समर्थन मिलेगा। वन मंत्री श्री शाह ने कहा है कि नेशनल पार्क में काम करने वाले छोटे कर्मचारी व मजदूरों के लिए साल में एक बार पार्क डे मनाया जायेगा। इसकी शुरूआत कर रहे हैं, ताकि उनके परिवार के लोग भी एक दिन जिप्सी में बैठकर पार्क घूम सकें।

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Sunday, January 10, 2021

आज हमने धान की रोटी खाया - बाबूलाल दाहिया

 


 जी हाँ धान की रोटी ! धान हमारे क्षेत्र का बहुत पुराना अनाज है जिसके अवशेष हड़प्पा मोहन जोदाड़ो आदि के खुदाई में भी मिले है। कहते है जब तक फारसी का यह लोक प्रिय शब्द ,,अनाज ,, प्रचलन में नही आया था  और गेहूं चना आदि बाहर के अन्न यहां नही आये थे तब तक सभी अन्न 'धान्य' और' लघु धन्य' ही कहलाते थे।

धान्य तो अपना धान ही था पर लघु धान्य में - कोदो, कुटकी ,सावां ,काकुन, मडुवा, बाजरा, ज्वार आदि सभी आते थे जिन्हें अब मोटे अनाज य 'माइनर मिलट् ' कहा जाता है।

 किन्तु धान का छिलका उतारने के बाद  उसका जो भाग निकलता है उसे चावल कहते है।

 "चावलम " यानी जिसे चबा लेने से शरीर मे तुरन्त बल आ जाय। क्योकि पहले चावल एक घण्टे पानी मे भिगो कर कच्चा भी नास्ते के रूप में चबाया जाता था। किन्तु बहुत लोगो को यह पता न होगा कि इस चावल को निकालते समय धान से भूसी निकल जाने के बाद भी 5 भाग बनते है जिन्हें,

1,, चावल

2,, किनकी

3,, टुटेशन

4,, मेरखुआ

5,, कना

आदि नामो से पुकारा जाता है। टुटेशन तो बारीक बाली किनकी है पर मेरखुआ पोकची अधपकी धान का मरजीवक चावल कहलाता है जो भूसी में ही चिपका रहता है।

इनमे चावल और किनकी को तो सीधे राध कर भात खाया जाता है और कना को मवेशियों को खिलाया जाता है । लेकिन "टुटेशन " छोटी किनकी और मेरखुआ को पिसा कर उसकी रोटी ही खाई जाती है। किन्तु यह बहुत कम मात्रा में निकलता है इसलिए इन  कड़कदार लेकिन गुरतल रोटियों का आनंद 10 --15 दिन से अधिक नही मिलता।

चावल और रोटी के तासीर में भी बहुत अंतर होता है। भात का तासीर जहाँ ठंडा होता है वही रोटी का तासीर गर्म।

 इसलिए रोटी अगहन से माघ तक ही खाई जाती है जिससे सीत जनित बीमारियां भी नही होती।

 किन्तु उसके बाद खाने से गर्म तासीर के कारण पेट मे जलन सी होने लगती है। पर इन रोटियों को तभी खाया जा सकता है जब उनके साथ दो हिस्सा सब्जी,  भुर्ता या चने की भाजी हो? साथ ही हरी लहसुन धनिया में पीसा हुवा नमक भी।

 लेकिन इसकी रोटी बनाने की भी तकनीक होती है । बस थोड़ी - थोड़ी मात्रा में आटे को माडते जाय और हाथ से पोते जाय। क्यो कि बेलन चौकी इसमे काम नही करते।

भइया इसीलिए तमाम बोलिया हिंदी की दादी कौंन कहे पर दादी से कम नही है ? जिनमे खेत की तैयारी से लेकर बोते नीदते काटते थाली में आई यह रोटी परोसते तक दोढाई सौ शब्द बन जाते है। और वह समूचे शब्द बोलियों के होते हैं। किसी भाषा के नही?

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