Saturday, August 31, 2019

केन किनारे खेत के टीलों से निकाली जा रही रेत

  •   अवैध उत्खनन और परिवहन का शुरू हो गया सिलसिला
  •   अजयगढ़ पुलिस ने उत्खनन करते  पकड़ी एक एलएनटी मशीन


केन किनारे स्थित खेत के टीले को खोदकर रेत निकालती एलएनटी मशीन। 

अजयगढ़/पन्ना। रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन के लिये कुख्यात हो चुके पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र से प्रवाहित होने वाली केन नदी में मौजूदा समय पानी है, इसलिये नदी से रेत निकालना संभव नहीं है। इसके बावजूद इलाके में रेत का अवैध उत्खनन जारी है। खनन कारोबारियों ने बारिश के इस मौसम में रेत के उत्खनन हेतु नया तरीका ईजाद कर लिया है। केन किनारे स्थित खेतों में सैकड़ो वर्षों से जमा हुई रेत के कारण बड़े टीले बन गये हैं। इन टीलों के ऊपरी सतह की मिट्टी हटाते ही रेत का जमा स्टाक निकल आता है, जिसे रेत कारोबारी धड़ल्ले से खोद रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि बारिश के मौसम में रेत के उत्खनन पर रोक लगी होती है, बावजूद इसके नदी किनारे स्थित खेतों से न सिर्फ रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है अपितु डम्फरों, ट्रकों व ट्रेक्टरों से रेत का बेरोकटोक परिवहन भी हो रहा है। खेतों से निकली जा रही यह रेत पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश सहित पन्ना जिले में भी पहुँच रही है। पिछले कुछ दिनों से पन्ना शहर के बाईपास मार्ग से सुबह रेत से भरे ट्रक व ट्रेक्टर बड़ी संख्या में गुजरते हैं। सूत्रों के मुताबिक अजयगढ़ क्षेत्र में अनेकों जगह अवैध रूप से रेत के बड़े डम्प भी हैं, जहां से रेत निकल रही है। मालुम हो कि केन नदी में अधिक जल भराव होने के कारण रेत नहीं निकल पा रही है। ऐसी स्थिति में रेत माफि याओं द्वारा खेतों में अवैध उत्खनन किया जा रहा है जहां पर रेत आसानी से मिल रही है। नदी किनारे स्थित खेत के टीलों को खोदकर रेत निकाली जा रही है। खेतों से रेत का अवैध तरीके से किये जा रहे उत्खनन का खुलासा उस समय हुआ जब ग्राम जिगनी के खेतों पर अवैध उत्खनन कर रही एक एलएनटी मशीन को पुलिस ने जब्त किया। अजयगढ़ थाना पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक खेत में रेत के उत्खनन की सूचना नगर निरीक्षक डी.के. सिंह  को मिली। उन्होंने तुरन्त पुलिस इंस्पेक्टर सुयश पाण्डे के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर तत्काल ग्राम जिगनी के लिये रवाना किया। जहां पर एलएनटी मशीन द्वारा खेतों के टीलों को खोदकर रेत एकत्रित की जा रही थी। जिसको जब्त कर चंदौरा चौकी में खड़ा करा दिया गया है। पुलिस ने रेत के अवैध उत्खनन का प्रकारण बनाकर खनिज विभाग को भेज दिया है।

इनका कहना है...

  • अवैध उत्खनन पर सख्ती से कार्यवाही की जायेगी। जो एलएनटी मशीन पकड़ी गई है, सूचना मिलने पर इसी तरह की आगे भी कार्यवाही जारी रहेगी। मुखबिर तंत्र को  सक्रिय कर दिया गया है।
                                                                                                          डी. के. सिंह नगर निरीक्षक अजयगढ़ 


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Thursday, August 29, 2019

पन्ना का निरपत सागर तालाब पानी से हुआ लबालब

  •   धरमसागर व लोकपाल सागर तालाब को अच्छी बारिश का इंतजार
  •   इन्हीं तीन तालाबों के पानी से बुझती है पन्नावासियों की प्यास


पन्ना के निरपत  तालाब से ओवरफ्लो होकर निकलता पानी। 

अरुण सिंह,पन्ना। पिछले तीन-चार दिनों से रुक-रुककर हो रही झमाझम बारिश के चलते पन्ना शहर का निरपत सागर तालाब उफना गया है लेकिन दो अन्य प्रमुख तालाब धरमसागर व लोकपाल सागर अभी आधा भी नहीं भरे हैं। इन दोनों तालाबों को लबालब भरने के लिये अच्छी बारिश का इंतजार है। मालुम हो कि ये तीनों तालाब पन्नावासियों के जीवन का आधार हैं। इन्हीं तालाबों से नगर में पेयजल की आपूॢत होती है, इसलिये नगरवासियों को भी अच्छी बारिश का इंतजार है ताकि धरमसागर व लोकपाल सागर तालाब भी लबालब भर सकें। जिससे गर्मी के मौसम में नगरवासियों को जल संकट का सामना न करना पड़े।
उल्लेखनीय है कि शहर के इन तीनों प्राचीन जलाशयों का तत्कालीन पन्ना नरेशों ने निर्माण कुछ इस तरीके से कराया था कि कम बारिश होने पर भी ये तालाब भर जाया करते थे। लेकिन आबादी बढऩे के साथ ही इन प्राचीन तालाबों तक बारिश का पानी पहुँचने की जो व्यवस्था थी वह अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई जिससे तालाब औसत बारिश होने पर पूरे नहीं भर पाते। जबकि निरपत सागर तालाब में बारिश का पानी दूर तक पहुँच जाता है, जिससे यह तालाब इतनी बारिश में ही उफना गया है। धरमसागर व लोकपाल सागर तालाब औसत बारिश में भर सके इसके लिये किलकिला फीडर वाली नहर की पूर्व व्यवस्था को बहाल करने हेतु प्रशासन ने मंशा जाहिर की है। इस संबंध में कलेक्टर पन्ना कर्मवीर शर्मा ने सीमांकन कराकर नहर मार्ग का अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिये हैं। यदि ऐसा संभव हुआ तो आने वाले वर्षों में ये दोनों तालाब भी निरपत सागर तालाब की तरह कम बारिश होने पर भी भर सकेंगे।

जिले में अब तक 698.3 मिमी हुई औसत वर्षा

अधीक्षक भू-अभिलेख ने बताया कि पन्ना जिले की औसत वर्षा 1176.4 मिमी है। जिसमें जिले में चालू मानसून मौसम के दौरान गत 1 जून से अब तक 698.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि अभी तक वर्षामापी केन्द्र पन्ना में 724.0 मिमी, गुनौर में 472.4 मिमी, पवई में 945.2 मिमी, शाहनगर में 602.1 मिमी तथा अजयगढ़ में 747.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इस प्रकार इस अवधि में अब तक सर्वाधिक वर्षा, वर्षामापी केन्द्र पवई में तथा सबसे कम वर्षा गुनौर में दर्ज की गई है। जबकि गत वर्ष इसी अवधि की औसत वर्षा 652.2 मिमी दर्ज की गई थी। जिसमें पन्ना में 629.5 मिमी, गुनौर में 543.2 मिमी, पवई में 771.8 मिमी, शाहनगर में 596.7 मिमी तथा अजयगढ़ में 719.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। उन्होंने बताया कि 29 अगस्त को जिले की औसत वर्षा 2.7 मिमी दर्ज की गई है। जिसमें वर्षामापी केन्द्र पन्ना में 3.2 मिमी तथा अजयगढ़ में 10.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
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Wednesday, August 28, 2019

गाय के शिकार की दावत उड़ाने तेंदुओं के बीच हुई जंग

  •   आपसी संघर्ष में 3 वर्षीय मादा तेंदुआ की मौत
  •   कौआसेहा के जंगल में बाघ ने किया था गाय का शिकार
  •   पन्ना शहर से लगे जंगल में बाघ व तेंदुआ का रहवास 


कौआसेहा के जंगल में मिला मादा तेंदुआ का शव।

अरुण सिंह,पन्ना। वनराज द्वारा किये गये गाय के शिकार की दावत उड़ाने को लेकर दो तेंदुओं के बीच हुई भीषण जंग में तीन वर्षीय मादा तेंदुआ को अपनी जान गंवानी पड़ी। मामला पन्ना शहर से लगे उत्तर वन मण्डल के विश्रामगंज वन परिक्षेत्र अन्तर्गत कौआसेहा बीट के जंगल का है। जिस जगह पर मादा तेंदुआ का शव मिला, उसके निकट ही गाय का किल भी पड़ा हुआ था। इस भारी भरकम गाय का शिकार बाघ या बाघिन द्वारा किया गया रहा होगा, जिसे खाने के बाद जब वनराज वहां से चला गया तो इस बचे हुये किल को खाने के लिये तेंदुओं के बीच आपसी जंग हुई जिसमें कम उम्र की मादा तेंदुआ बुरी तरह से जख्मी होने के चलते दम तोड़ दिया। इस मादा तेंदुआ की मौत के तकरीबन 40 घण्टे बाद जंगल से उसका शव बरामद हुआ है।


वनराज द्वारा जंगल में किल की गई गाय।

उल्लेखनीय है कि पन्ना शहर से लगभग 3 किमी दूर कौआसेहा का जंगल हमेशा से बाघों व तेंदुओं का प्रिय रहवास स्थल रहा है। इस वन क्षेत्र में सागौन वृक्षों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई होने  व मानवीय दखल के बावजूद वन्य प्राणियों की मौजूदगी बनी हुई है। पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की तेजी से बढ़ रही तादाद के चलते कई बाघ कोर क्षेत्र से बाहर निकलकर आस-पास के जंगल में विचरण कर रहे हैं। पन्ना शहर से लगे कौआसेहा के जंगल में सागौन वृक्ष का भले ही सफाया हो गया है, लेकिन यहां दूसरी प्रजाति के पेड़-पौधे व वनस्पतियां तथा झाडिय़ां बहुतायत में हैं। यही वजह है कि इस जंगल में बाघ और तेंदुआ सहित शाकाहारी वन्य जीव सांभर, नीलगाय, चीतल, चिंकारा  और चौसिंगा  नजर आते हैं। गर्मी के मौसम में भी सैकड़ों फिट गहरे कौआसेहा में हमेशा पानी बना रहता है तथा इस सेहा में दर्जनों प्राकृतिक गुफायेंं भी हैं, जहां बाघ सहित अन्य दूसरे मांसाहारी जीव तेंदुआ और भालू मजे से रहते हैं। लेकिन यहां पर कोर क्षेत्र जैसी मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण मानवीय दखलंदाजी बढऩे तथा शिकारियों की सक्रियता को देखते हुये वन्य प्राणियों पर हर समय खतरा मंडराता रहता है।

पोस्टमार्टम से हुआ जंग होने का खुलासा


जंगल में मृत पाये गये मादा तेंदुये के शव का पोस्टमार्टम होने पर इस बात का खुलासा हुआ कि मादा तेंदुआ की मौत आपसी संघर्ष में हुई है। यह संघर्ष क्यों हुआ, इसका सबूत भी वहीं निकट पड़े गाय के किल को देखकर मिल गया है। गाय का यह किल भी तकरीबन दो दिन पुराना था, जिससे दुर्गन्ध आ रही थी। जाहिर है कि इस गाय का शिकार किसी बाघ या फिर बाघिन ने किया होगा। मालुम हो कि गाय काफी बड़ी और तंदरुस्त थी, जिसे तेंदुआ नहीं मार सकता। आमतौर पर तेंदुआ चीतल, चौसिंगा, बकरी, गाय का छोटा बछड़ा या छोटी और कमजोर गाय का ही शिकार करता है। ऐसी स्थिति में इसकी पूरी संभावना है कि बड़ी गाय का शिकार बाघ ने किया होगा और भरपेट खाने के बाद जब वह चला गया तो तेंदुआ उस किल को खाने पहुँचे और उसी दौरान विवाद की स्थिति निर्मित  होने पर संघर्ष हुआ जिसमें मादा तेंदुआ की मौत हुई।

गर्दन में मिले केनाइन दाँत के निशान


वन मण्डलाधिकारी उत्तर पन्ना नरेश सिंह यादव ने बताया कि जंगल में मृत पाई गई मादा तेंदुआ की गर्दन में पोस्टमार्टम के दौरान केनाइन दाँत के चार निशान पाये गये हैं। तेंदुआ के गर्दन की हड्डी टूटी हुई थी तथा शरीर सड़ चुका था, जिससे भीषण दुर्गन्ध आ रही थी। मृत मादा तेंदुआ के शव को देखकर यह प्रतीत हो रहा था कि इसकी मौत दो दिन पूर्व हुई होगी। मौके पर तेंदुआ के सभी अंग पूरी तरह सुरक्षित पाये गये। मृत तेंदुआ का पोस्टमार्टम करने वाले वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही पता लगेगा कि मादा तेंदुआ की मौत कैसे हुई। आपने बताया कि जाँच हेतु सेम्पल आईवीआरआई बरेली केनाइन डिस्टेम्पर टेस्ट के लिये, एसडब्ल्यूएफएच जबलपुर हिस्टो पैथोलॉजिकल एग्जामिनेशन के लिये तथा रिजनल राज्य न्यायालयिक प्रयोगशाला ग्वालियर डॉक्सीकोलोजिकल एग्जामिनेशन के लिये भेजा गया है।

स्मृति वन में किया गया दाह संस्कार


स्मृति वन में मृत तेंदुआ के दाह संस्कार का दृश्य।

जंगल की निरानी दुनिया में अपना वजूद कायम रखने के लिये हर समय खतरों का सामना करने के साथ-साथ वन्य प्राणियों को प्रतिद्वन्दियों से भीषण संघर्ष भी करना पड़ता है। तीन वर्षीय मादा तेंदुआ की आपसी संघर्ष में हुई मौत इसका जीता-जागता उदाहरण है। नई संतति को जन्म देने से पूर्व ही यह युवा मादा तेंदुआ असमय काल कवलित हो गई। मालुम हो कि चार वर्ष की होने पर मादा तेंदुआ शावक के जन्म देने योग्य हो पाती है। लेकिन इससे पहले ही यह संघर्ष में मारी गई। इस मृत मादा तेंदुआ के शव का दाह संस्कार नियमानुसार स्मृति वन में किया गया। इस मौके पर क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्र्व के.एस. भदौरिया, उप वन मण्डलाधिकारी विश्रामगंज नरेन्द्र सिंह  परिहार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर 

Saturday, August 24, 2019

जुगुल किशोर की नगरी में रही जन्माष्टमी पर्व की धूम

  •   जन आस्था का केन्द्र है पन्ना का श्री जुगुल किशोर जी मंदिर
  •   हजारों श्रद्धालुओं ने नटखट नंदकिशोर के किये दर्शन
  •   नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल के जयकारों से गूँजा पन्ना


पन्ना स्थित सुप्रसिद्ध श्री जुगुल किशोरजी का मन्दिर। 

अरुण सिंह,पन्ना। जन आस्था के केन्द्र पन्ना के श्री जुगुल कशोर मन्दिर में गुरूवार को कृष्ण जन्मोत्सव की धूम रही। मन्दिर को विद्युत लडिय़ों व बंदनवारों द्वारा आकर्षक ढंग से सजाया गया था। जिससे मन्दिर की अनुपम छटा देखते ही बन रही थी। सुबह से ही भगवान श्री जुगुल किशोर जी की एक झलक पाने श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। रात्रि के समय तो मानो पूरा नगर ही उमड़ पड़ा। मन्दिर परिसर में पन्ना के जुगुल किशोर मुरलिया में हीरे जड़े हैं गीत व नटखट नंदकिशोर के जयकारे गूँज रहे थे।
जन्मोत्सव की मनोरम झाँकी

उल्लेखनीय है कि पवित्र नगरी पन्ना में मथुरा की तर्ज पर कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। गुरूवार को भाद्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ठीक रात्रि 12 बजे श्री जुगुल किशोर मन्दिर मेंं नटखट नंदलाल का जन्म हुआ। इस जन्मोत्सव को लेकर पूरे नगर में कान्हा के उत्सव की धूम मची हुई थी। श्री जुगुल किशोर मन्दिर में जन्म के पश्चात हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। मन्दिर में जन्म के पूर्व जन्म के पश्चात बधाईयां व सोहर गीत महिलाओं द्वारा मधुर ध्वनि में गाये गये और भगवान कृष्ण के जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान रहा।
भगवान का जन्म होते ही पटाखे, बैण्डबाजे बजने लगे और पवित्र नगरी के श्रद्धालु नाच उठे। मन्दिर में श्रद्धालुओं की खुशी का ठिकाना ही नहीं था। भगवान के जन्म होते ही महिलाओं ने बधाईयां, सोहर गीतों को गाया और कृष्ण भगवान के जयकारे लगाये गये। इसके पश्चात भगवान कृष्ण के जन्म के पश्चात चँवर डुलाकर भगवान की आरती हुई। इस दौरान जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। मन्दिर में डीजे व बैण्डबाजे की धुन पर नंद के आनंद भये जय कन्हैया लाल की, राधे-राधे जपो चले आयेंगे बिहारी, बरसाने वाले राधे, श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी जैसे गीत गाये गये। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जन आस्था के केन्द्र पन्ना के श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर का निर्माण तत्कालीन पन्ना नरेश महाराजा हिन्दूपत ने सम्वत् 1813 में कराया था। बुन्देली स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना यह भव्य मन्दिर पन्ना शहर के मध्य में स्थित है। मन्दिर में प्रतिष्ठित भगवान श्री जुगुल किशोर जी की नयनाभिराम जीवन्त प्रतीत होती प्रतिमा के दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो जाते हैं। यही वजह है कि पन्ना के जुगुल किशोर मन्दिर को बुन्देलखण्ड का वृन्दावन कहा जाता है।

इन मन्दिरों में मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव

पवित्र नगरी पन्ना में प्रमुख मन्दिर श्री जुगुल किशोर मन्दिर, श्री गोविन्द जी मन्दिर, उल्टी मुरली वाले मन्दिर, श्रीरामबाग मन्दिर जनकपुर रोड, श्री नवलकिशोर जी मन्दिर में श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इन मन्दिरों में जन्मोत्सव के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। नगर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि में हलचल बनी रही। इन मन्दिरों के अलावा घरों में भी जन्माष्टमी उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं ने  पूजा कर नटखट नन्दलाल का जन्मोत्सव धूमधाम और आस्था के साथ मनाया।


Friday, August 23, 2019

मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष के बन रहे हालात

  •  बीते 2 माह के दौरान तेंदुआ  दो बार कर चुका है हमला 
  •  टकराव रोकने समय रहते करने होंगे कारगर उपाय


मानव और वन्य प्राणियों के बीच होने वाले संघर्ष का द्रश्य। ( फाइल फोटो )

अरुण सिंह,पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष के हालात निर्मित हो रहे हैं। वन्य प्राणी जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं जिससे हिंसक टकराव की स्थिति निर्मित हुई है। जिले के अमानगंज क्षेत्र में ही बीते 2 माह के दौरान तेंदुआ द्वारा हमला किए जाने की दो घटनाएं हो चुकी हैं। ताजी घटना 22 अगस्त की है जिसने हर किसी को दहला कर रख दिया है। जंगल से निकलकर एक तेंदुआ सुबह अमानगंज कस्बा स्थित सरकारी रेस्ट हाउस में घुस आया जिसके हमले से 2 लोग जख्मी हुए इसके बाद का घटनाक्रम अत्यधिक भयावह और चिंताजनक है। दोपहर के समय पन्ना टाइगर रिजर्व के 4 हाथियों को लेकर रेस्क्यू दल व वन अमला मौके पर पहुंचा और तेंदुए को ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास किया तो यह तेंदुआ बेहद खूंखार हो गया और असामान्य बर्ताव करते हुए हाथी के ऊपर हमला बोल दिया, जिससे हाथी में सवार वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ संजीव कुमार गुप्ता ट्रेंकुलाइज गन सहित हाथी से नीचे गिर गए। मौके पर 4 हाथियों की मौजूदगी के कारण वे तेंदुए के हमले से बाल - बाल बच गए हैं लेकिन हाथी से गिरने के कारण चोट आई है।

इसके पूर्व अमानगंज क्षेत्र में ही पगरा गांव में तेंदुआ ने 21 जून 19 को वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ संजीव गुप्ता सहित दो वन सुरक्षा श्रमिकों व एक ग्रामीण को घायल कर दिया था। इन घटनाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात किस तरह से बिगड़ रहे हैं तथा टकराव की स्थितियां निर्मित हो रही हैं। यहां यह विचार करना जरूरी है कि आखिर इस तरह के हालात क्यों बने हैं कि वन्य प्राणी आबादी क्षेत्र में आने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जंगल में इंसानी आबादी का लगातार बढ़ता जा रहा दबाव है जो वन्यजीवों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। बड़े पैमाने पर हो रही अवैध कटाई से जंगल सिमटते जा रहे हैं जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक अधिवास तथा भोजन की उपलब्धता में कमी हुई है, परिणाम स्वरूप वन्यजीव आबादी क्षेत्र में घुसपैठ करने लगे हैं। टकराव की दूसरी बड़ी वजह एक जंगल से दूसरे क्षेत्र के जंगल तक पहुंचने का मार्ग कॉरीडोर खत्म हो गया है, वहां आबादी बस गई है ।पूर्व में वन्य प्राणी इन क्षेत्रों को कॉरीडोर के रूप में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए उपयोग करते रहें हैं। वे अभी भी उन्हीं रास्तों का अनुकरण करते हैं नतीजतन टकराव की स्थितियां निर्मित होती है। वन व पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार मानव जनित अथवा प्राकृतिक परिस्थितियां वन्यजीवों को आक्रमण करने के लिए विवश करती हैं। अतीत में जब जंगल बहुतायत में थे और मानव आबादी कम थी तब मानव और वन्यजीव दोनों अपनी अपनी सीमाओं में सुरक्षित रहते रहे हैं, लेकिन मानव आबादी में हुई बेतहाशा वृद्धि से परिस्थितियां बदल गई हैं। वन क्षेत्र में मानवीय दबाव बढ़ने के साथ-साथ वनों की अंधाधुंध कटाई व अवैध उत्खनन का सिलसिला भी शुरू हुआ है जिसका परिणाम मानव और वन्यजीवों के बीच न खत्म होने वाला संघर्ष है जो सामने दिखाई दे रहा है।

मानव केंद्रित विकास की सोच खतरनाक


समस्या पर यदि गहराई से विचार करें तो पता चलेगा कि मानव केंद्रित विकास की सोच ही इन सारी समस्याओं की जननी है। अहंकार के वशीभूत होकर मानव अपने को सर्वोपरि मानता है जबकि प्रकृति की नजर में किसी के प्रति कोई दुराभाव नहीं है, सब बराबर हैं और सभी को सह अस्तित्व की भावना के साथ धरती में रहने का हक है। लेकिन मनुष्य की सर्वोपरि होने की सोच ने प्रकृति पर ही जीत हासिल करने की कोशिश शुरू की, नतीजतन प्राकृतिक ताना-बाना तहस-नहस हो गया और आपदाओं के रूप में वह प्रकट होने लगा। सोचने की बात है कि वन्यजीवों के आश्रय पर हमने कब्जा कर घर बना लिए और अब अगर वह हमारे घरों में आकर अपना हिस्सा मांगते हैं तो हमें उनकी  इस गुस्ताखी पर गुस्सा आता है। इस सब के बावजूद अभी भी वक्त है कि गंभीर होती जा रही इस समस्या का रचनात्मक समाधान निकाला जाए ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच हो रहे टकराव को खत्म किया जा सके। ऐसे में संघर्ष टालने का सबसे बेहतर विकल्प है पर्यावरण के अनुकूल विकास यानि कि तुम भी रहो और हम भी रहें ताकि बिना किसी टकराव के जिंदगी की गाड़ी मजे से चलती रहे।
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Thursday, August 22, 2019

हमलावर तेंदुये ने जब हांथी के ऊपर बोला हमला

  •  हांथी का संतुलन बिगड़ने से वन्य प्राणी चिकित्सक नीचे गिरे 
  •   पन्ना जिले के अमानगंज रेस्ट हाउस में तेंदुआ ने गुरूवार की सुबह जमाया था डेरा
  •   आबादी क्षेत्र में तेंदुआ की मौजूदगी से कस्बा सहित अंचल  में मचा है हड़कम्प
  •   रेस्ट हाउस के आस-पास सुबह से हजारों की संख्या में लोगों  लगा रहा जमावड़ा 
  •   पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम, पुलिस बल व वन अधिकारी मौके पर मौजूद 


अमानगंज के रेस्ट हाउस परिसर में तैनात वनकर्मी। 

अरुण सिंह,पन्ना। जंगलों की बड़े पैमाने पर हो रही अवैध कटाई व अनियंत्रित उत्खनन के चलते तेजी से सिमटते जंगल, प्रवास स्थल व भोजन की कमी और जंगलों में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के चलते म.प्र. के पन्ना जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थितियां निर्मित हो रही हैं। वन्य प्राणियों के आबादी क्षेत्र में घुसने की घटनाओं में जिस तरह से इजाफा  हुआ है उससे हालात चिन्ताजनक बन गये हैं। गुरूवार 22 अगस्त की सुबह जंगल से निकलकर एक तेंदुआ पन्ना जिले के अमानगंज कस्बा स्थित रेस्ट हाउस में डेरा जमा दिया है जिससे पूरे कस्बे में हड़कम्प मचा है। रेस्ट हाउस में तेंदुये की मौजूदगी का पता आज सुबह तब चला जब कुछ लोग वहां फू ल तोडऩे के लिये पहुँचे। उनके शोर-शराबा मचाने पर तेंदुआ हमलावर हो गया, फलस्वरूप दो लोगों  ऊपर हमला करने से  उनको मामूली चोटें आई हैं जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अमानगंज में इलाज के लिये भर्ती कराया गया है। वहीँ रेस्क्यू टीम के मौके पर पहुंचने पर दोपहर बाद जब इस बेकाबू हो  चुके तेंदुए को ट्रैंक्युलाइज कर बेहोश करने का प्रयास किया गया तो तेंदुआ आक्रामक होकर हांथी के ऊपर ही हमला बोल दिया, जिससे हांथी का संतुलन बिगड़ने पर वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता नीचे तेंदुआ के निकट जा गिरे और उसके हमले बाल - बाल बचे।
 

रेस्ट हॉउस जिसके  परिसर में पूरे दिन डेरा डाले रहा तेंदुआ। 
उल्लेखनीय है कि आबादी क्षेत्र में स्थित लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस में तेंदुये के डेरा जमा कर बैठे होने की सूचना आनन- फानन पूरे कस्बे में फैल गई थी, जिससे वहां पर हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम उमड़
पड़ा। भीड़ बढऩे तथा अत्यधिक शोर होने से रेस्ट हाउस परिसर में मौजूद तेंदुआ विचलित दिखा और इधर से उधर भागता नजर आया। तेंदुये की भाग-दौड़ करने का वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ है जिसमें तेंदुये के दौडऩे का दृश्य व भारी शोर-शराबा सुनाई दे रहा है। मामले की जानकारी मिलते ही पन्ना से टाइगर रिजर्व का रेस्क्यू दल व उपसंचालक पन्ना टाइगर रिजर्व ईश्वर रामहरि जरांडे सहित वन अधिकारी और वन अमला मौके पर पहुँच गया। टाइगर रिजर्व के प्रशिक्षित हाथियों को भी रेस्ट हाउस में बुलाया गया ताकि सुरक्षित तरीके से इस तेंदुये को यहां से वन क्षेत्र की ओर भगाया जा सके। मौके पर पन्ना टाइगर रिजर्व के चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे ताकि  आवश्यकता पडऩे पर इस तेंदुये को ट्रंक्यूलाइज कर बेहोश किया जा सके।  मौके पर मौजूद अधिकारियों ने दोपहर लगभग 1:30 बजे बताया कि रेस्ट हाउस परिसर में तेंदुआ कहीं छिपा बैठा है जो फिलहाल नजर नहीं आ रहा। दो हाथी पहुँच चुके हैं जबकि दो हाथी और बुलाये गये हैं, उनके पहुँचने पर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया जायेगा। रेस्ट हाउस के मुख्य प्रवेश द्वार को पूरी तरह बन्द कर दिया गया है ताकि भीड़ अन्दर प्रवेश न करे। मौके पर मौजूद वन अमले ने रेस्ट हाउस की घेराबन्दी की हुई है।

और तेंदुआ ने हांथी के ऊपर कर दिया  हमला



जंगल का खतरनाक वन्य प्राणी तेंदुआ। ( फाइल फोटो )

पन्ना टाईगर रिजर्व के प्रशिक्षित चार हांथी रेस्ट हाऊस परिसर में घुसे तेंदुये को खदेडऩे के लिये दोपहर में जब वहां पहुँचे तो यह तेंदुआ रेस्ट हाऊस की बाउण्ड्री फांदकर बगल के खेत में घुस गया। चारों हांथियों को लेकर टाईगर रिजर्व का रेस्क्यू दल जब खेत में पहुँचकर इस हमलावर हो चुके तेंदुये की घेराबन्दी करके उसे ट्रंक्यूलाइज करने का प्रयास किया गया तो तेंदुआ भड़क उठा और तेज गुर्राहट के साथ बिजली की भांति हांथी के ऊपर कूदकर माथे पर पंजा मारा, जिससे हांथी भी विचलित हो गया। हांथी के माथे में तेंदुआ का पंजा लगने से वहां जख्म होने के कारण खून भी निकलने लगा। इस खतरनाक घटनाक्रम के दौरान हांथी का संतुलन बिगड़ गया, जिससे हांथी के ऊपर सवार पन्ना टाईगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता नीचे गिर गये।

तेंदुआ से बाल-बाल बचे वन्य प्राणी चिकित्सक


रेस्ट हॉउस  बाहर उमड़ी भीड़ का नजारा। 

तेंदुये द्वारा हांथी के ऊपर जैसे ही हमला किया गया, उसी समय संतुलन बिगडऩे से वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. गुप्ता नीचे गिर गये। वहीं निकट ही गुस्से से तमतमाया तेंदुआ भी था, लेकिन डॉ. गुप्ता ने यहां सूझबूझ दिखाते हुये किसी तरह अपने को बचा लिया। उनकी ट्रक्यूलाइज गन, बैग व अन्य सामान भी नीचे गिर गया था, जिसे नहीं उठाया जा सका। वहां पर तेंदुआ कब्जा जमाकर बैठ गया था। डॉ. गुप्ता को किसी तरह बचाकर रेस्ट हाऊस लाया गया, जिन्हें गाड़ी से पन्ना भेज दिया गया है। उनके पसली व शरीर के अन्य कई हिस्सों में चोट आई है। मालुम हो कि वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. गुप्ता के नाम सर्वाधिक बाघों को ट्रक्यूलाइज करने का रिकार्ड है। बाघों से आज तक इन्हें इस तरह की असहज स्थित का सामना नहीं करना पड़ा। जबकि तेंदुआ का रेस्क्यू खतरनाक साबित हुआ है। इसके पूर्व बीते माह पगरा गाँव में रेस्क्यू के दौरान एक तेंदुआ ने डॉ. गुप्ता के ऊपर हमला कर घायल कर दिया था, यह दूसरी घटना है जिसमें डॉक्टर साहब बाल-बाल बचे हैं।

हांथियों का भी तेंदुआ नहीं कर रहा लिहाज


आमतौर पर बाघ व तेंदुआ हांथी का लिहाज करते हैं  और उसके निकट आने से बचते हैं । लेकिन यह तेंदुआ इतना खतरनाक और हमलावर हो चुका है कि वह हांथियों का भी बिलकुल लिहाज नहीं कर रहा। रेस्क्यू टीम में शामिल रहे वन कर्मियों  के मुताबिक चार-चार हांथियों से इस तेंदुये को घेरा गया, फिर भी वह काबू में आने के बजाय हांथियों पर ही हमला करने लगा। तेंदुये के हमलावर तेवरों को देख मार डर के हांथी चिग्घाडऩे लगे और पीछे हटने लगे थे। वन कर्मियों के मुताबिक इतनी विकट और भयावह स्थिति इसके पूर्व कभी निर्मित  नहीं हुई। तेंदुआ शाम 6 बजे तक खेत में ही मौजूद था और उसी के पास ट्रंक्यूलाइज करने वाली गन व सामान भी पड़ा है, जिसे उठाने का साहस कोई नहीं कर पा रहा।

 काबू में करने के लिये खेत में बांधा गया बकरा


बेकाबू और हमलावर हो चुके इस तेंदुआ को काबू में लाने के लिये खेत में बकरा भी बंधवाया गया, लेकिन तेंदुआ इतना चालाक है कि वे सारे उपायों और किये जा रहे प्रयासों को विफल कर दिया है। अब चूँकि  दिन ढलने के करीब है, ऐसी स्थिति में उसे ट्रक्यूलाइज कर बेहोश करने की पूरी संभावनायें खत्म हो चुकी हैं। ऐसी स्थिति में मौके पर मौजूद पन्ना टाईगर रिजर्व के उप संचालक व अन्य अधिकारियों ने पटाखे मंगाने का निर्णय लिया है। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि बड़ी संख्या में पटाखा फोडऩे से हो सकता है यह तेंदुआ जंगल की तरफ रुख कर ले और यहां से चला जाये। रेस्ट हाऊस के आस-पास सुबह से ही लोगों का हुजूम लगा हुआ है, भीड़ को नियंत्रित करने के लिये भारी तादाद में पुलिस बल की भी तैनाती की गई है।
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Wednesday, August 21, 2019

जंगल जाने वाले मवेशी बाघों का बन रहे आसान शिकार

  •   पन्ना-मझगवां मार्ग के किनारे वनराज ने गाय को दबोचा
  •   सड़क किनारे से गाय को घसीटकर बाघ ले गया खखरी के भीतर
  •   मार्ग से गुजर रही एनएमडीसी की बस में सवार लोगों ने देखा रोमांचक नजारा




अरुण सिंह,पन्ना। म.प्र. के पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की तेजी से बढ़ रही संख्या के चलते यहां के बाघ अब कोर क्षेत्र से बाहर निकलकर बफर क्षेत्र के जंगल में भी विचरण करने लगे हैं। कोर क्षेत्र से लगे आस-पास के जंगलों में वनराज की मौजूदगी होने से जंगल जाने वाले मवेशी बाघों का आसान शिकार बन रहे हैं। टाईगर रिजर्व के बाघ आये दिन कोर क्षेत्र से बाहर आकर सड़क पार करके मवेशियों का शिकार करते हैं और फिर वापस चले जाते हैं। पन्ना-अमानगंज मार्ग पर सड़क मार्ग पर चहल-कदमी करते हुये बाघ अक्सर दिख जाते हैं। लेकिन बुधवार की सुबह आज पन्ना-मझगवां मार्ग पर सड़क के किनारे गाय का शिकार करते हुये वनराज को राहगीरों ने देखा। उसी समय वहां से गुजर रही एनएमडीसी की बस में सवार लोगों ने गाय के शिकार का यह रोमांचकारी दृश्य वीडियो में भी कैद किया है, जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि 10 वर्ष पूर्व पन्ना का जंगल बाघों से विहीन हो गया था, लेकिन यहां बाघ पुनर्स्थापना  योजना को मिली चमत्कारिक सफलता के चलते बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ा है। मौजूदा समय पन्ना टाईगर रिजर्व में आधा सैकड़ा से भी अधिक लगभग 52 बाघ हैं जो कोर क्षेत्र की धारण क्षमता से अधिक हैं। ऐसी स्थिति में पन्ना टाईगर रिजर्व के युवा बाघ अपने लिये बसेरा ढूँढऩे के लिये आस-पास के जंगलों में विचरण कर रहे हैं। जाहिर है कि इन जंगलों में बीते कई वर्षों से बाघों की मौजूदगी नहीं रही है, फलस्वरूप मवेशी जंगलों में बिना किसी खतरे के चरते रहते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं, जंगल में वनराज की हर तरफ मौजूदगी है, जिससे मवेशी जंगल में अब सुरक्षित नहीं हैं। चूंकि वन्य जीवों की तुलना में मवेशी बाघ का आसान शिकार होते हैं, इसलिये बाघ भी बिना ज्यादा परिश्रम किये अधिक से अधिक बायोमास प्राप्त करने मवेशियों को अपना शिकार बनाते हैं।

राहगीरों ने देखा शिकार का यह रोमांचक नजारा



 शिकार करने के बाद बाघ गाय को घसीटकर ले जाते हुये 

पन्ना-मझगवां मार्ग पर दरेरा मोड़ के पास बुधवार की सुबह जब एक बलशाली युवा बाघ ने गाय की गर्दन पकड़ कर उसे जमीन पर पटका, उस समय सड़क मार्ग से अनेकों राहगीर गुजर रहे थे। रोंगटे खड़े कर देने वाला शिकार का यह रोमांचक नजारा देख जो जहां था वहीं ठिठक गया, सड़क मार्ग पर आवागमन कुछ देर के लिये थम गया। लोग अपने मोबाइल पर इस अद्भुत दृश्य को कैद करने से भी नहीं चूके। गाय को मारने के बाद बाघ उसे घसीटते हुये पत्थर की बनी खखरी के पार घने जंगल में ले गया। भारी भरकम गाय को पत्थर की ऊँची खखरी के दूसरी ओर ले जाते हुये बाघ को देख लोग हैरत में पड़ गये और यह कहते हुये सुनाई दिये कि इस बाघ में गजब की ताकत है। बाघ द्वारा गाय का शिकार किये जाने की सूचना मिलते ही कुछ ही देर में वन कर्मी पहुँच गये। उप संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व ईश्वर रामहरि जर्राडे ने बताया कि निगरानी के लिये वहां हांथी भी तैनात किये गये हैं।

बाघों की सुरक्षा हेतु मवेशियों के किल की निगरानी जरूरी



पन्ना टाईगर रिजर्व के आस-पास आबादी क्षेत्र से लगे जंगलों में बाघों द्वारा आये दिन मवेशियों का शिकार किया जा रहा है। मवेशियों के शिकार की बढ़ती घटनाओं को देखते हुये वन अमले पर यह अतिरिक्त जिम्मेदारी भी बढ़ गई है कि वे मवेशी के किल की तब तक सघन निगरानी करें जब तक बाघ उसे खा नहीं लेता। किल की निगरानी में लापरवाही बरते जाने पर बाघ की सुरक्षा पर न सिर्फ खतरा रहता है अपितु उसके केनाइन डिस्टेम्पर जैसी घातक बीमारी से संक्रमित होने की भी संभावना रहती है। मालुम हो कि केनाइन डिस्टेम्पर आवारा कुत्तों के जरिये फैलती है। यदि आबादी क्षेत्र के आस-पास घूमने वाले आवारा कुत्ते बाघ द्वारा किये गये शिकार को खाते हैं और फिर बाघ भी उस किल को खा लेता है तो इस घातक बीfमारी के संक्रमण का खतरा उत्पन्न हो जाता है। जिसे रोकने के लिये बाघ द्वारा किये गये मवेशी के किल की निगरानी बेहद जरूरी होती है।

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Tuesday, August 20, 2019

बंदर हीरा खनिज खण्ड में 34.20 मिलियन कैरेट हीरों का भण्डार

  •   इस खदान से प्राप्त हीरों का पन्ना के महेन्द्र भवन में हुआ डिस्प्ले
  •   अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की 6 बड़ी कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने हीरों का किया अवलोकन

खनिज सचिव नरेंद्र सिंह व कलेक्टर कर्मवीर शर्मा आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुये। 


अरुण सिंह,पन्ना। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के छतरपुर जिले में स्थित बंदर डायमण्ड ब्लाक से निकले हीरों का अवलोकन व निरीक्षण करने के लिये मंगलवार 20 अगस्त को जिला मुख्यालय पन्ना स्थित महेन्द्र भवन पैलेस में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की 6 बड़ी कम्पनियों के प्रतिनिधियों का जमावड़ा रहा। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच महेन्द्र भवन के सभाकक्ष में इन प्रतिनिधियों के अवलोकन हेतु बेशकीमती हीरों को प्रदर्शित किया गया था। मालुम हो कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में खनिज की उपलब्धता को दृष्टिगत रखते हुये राज्य शासन द्वारा 13 खनिज खण्डों को चिह्नित कर एनआईटी जारी की गई है। जिसमें छतरपुर जिले के बकस्वाहा क्षेत्र में स्थित बंदर हीरा खण्ड भी शामिल है। इस खनिज खण्ड के नीलामी की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। इस डायमण्ड ब्लाक में 34.20 मिलियन कैरेट हीरों का भण्डार है। परियोजना के मूर्तरूप लेने पर छतरपुर व पन्ना जिले के लिये विकास के नये द्वार खुलेंगे।


 विभिन्न कम्पनियों के प्रतिनिधि प्रदर्शित  हीरों का अवलोकन करते हुये।

खनिज विभाग के सचिव नरेन्द्र सिंह  परमार ने आज सायं पत्रकारों को जानकारी देते हुये बताया कि बंदर डायमण्ड ब्लाक में 34.20 मिलियन कैरेट हीरों का भण्डार है, जिसका अनुमानित खनिज संसाधन मूल्य 55 से 60 हजार करोड़ रू. है। आपने बताया कि बंदर डायमण्ड ब्लाक में बहुराष्ट्रीय हीरा खनन कम्पनी रियो टिंटो को प्रास्पेक्टिंग  के दौरान 2700 कैरेट वजन के कच्चे हीरे मिले थे, जिन्हें पन्ना स्थित हीरा कार्यालय में जमा कराया गया था। खनिज सचिव श्री सिंह ने बताया हीरों का अवलोकन कराने के बाद भाग ले रही कम्पनियों के प्रतिनिधियों को 364 हेक्टेयर में फैले बंदर खनिज खण्ड क्षेत्र का अवलोकन कराया जायेगा। हीरों को प्रदर्शित  किये जाने के इस भव्य आयोजन में एंसल ग्रुप, रूंगटा, आडानी, फ्यूरा, वेदान्ता समूह तथा एनएमडीसी के प्रतिनिधि शामिल हुये। इन व्यापारिक समूहों द्वारा इस हीरा खण्ड में निवेश हेतु गहरी रुचि दिखाई गई है।

डिस्प्ले में रखे गये थे हीरों के 11 बॉक्स


महेन्द्र भवन पैलेस के सभाकक्ष में आयोजित हीरों के डिस्प्ले में सभी कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने आज पूरे दिन प्रदॢशत किये गये हीरों का तल्लीनता के साथ निरीक्षण किया। कलेक्टर पन्ना कर्मवीर शर्मा ने बताया कि प्रदर्शन में अवलोकन एवं अध्ययन हेतु हीरों के 11 बॉक्स रखे गये थे। जिसमें बॉक्स क्र. 1 से 8 तक 1604 नग हीरे वजन 832.84 कैरेट, बॉक्स क्र. 9 में पॉलिस किये हुये 59 नग हीरे वजन 9.01 कैरेट तथा बॉक्स क्र. 10 एवं 11 में कुल 1670 नग हीरे वजन 866.17 कैरेट थे। इस डिस्प्ले में पन्ना जिले की उथली हीरा खदानों से निकले 7 नग हीरे वजन 24.32 कैरेट भी प्रदर्शित  किये गये थे। कलेक्टर श्री शर्मा ने बताया कि अवलोकन हेतु प्रदॢशत किये गये इन हीरों में 323 कैरेट वजन के जेम क्वालिटी वाले हीरे भी थे, जिनमें सबसे बड़ा हीरा 18 कैरेट वजन का था।

पन्ना के नाम पर होगी ब्रांडिंग : कलेक्टर 


सदियों से बेशकीमती हीरों की उपलब्धता के लिये प्रसिद्ध रहे पन्ना शहर को हीरे से पृथक नहीं किया जा सकता। पन्ना और हीरा एक तरह से पर्यायवाची हो चुका है, इसलिये इस क्षेत्र में हीरा चाहे जहां भी निकले, उसकी ब्रांडिंग पन्ना के नाम पर ही होगी। महेन्द्र भवन में आयोजित हुई प्रेसवार्ता में कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहा कि पन्ना में इतने बृहद स्तर पर हीरों का प्रदर्शन होने से यहां पर डायमण्ड पार्क व हीरा कटिंग  और पॉलिसिंग  यूनिट स्थापित करने की भूमिका तैयार हो गई है। आपने कहा कि पन्ना जिले की उथली हीरा खदानों को संस्थागत स्वरूप प्रदान करने के संबंध में भी विशेषज्ञों से चर्चा हुई है। ऐसा होने पर उथली खदानों को लेकर जो विसंगतियां और नकारात्मक बातें हैं वे दूर होंगी। इससे यहां पर्यटन के विकास को भी गति मिलेगी।

उथली खदानों के 70 फीसदी हीरे होते हैं चोरी


प्रदेश शासन के खनिज सचिव नरेन्द्र सिंह  परमार ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि मैं भी इसी क्षेत्र का हूँ और यहां की हकीकत से अवगत हूँ। आपने बताया कि पन्ना जिले की उथली हीरा खदानों से प्राप्त होने वाले 70 फीसदी हीरे चोरी होते हैं। फिर भी प्रतिमाह औसतन 500 कैरेट हीरे जमा होते हैं। आपने कहा कि आज के इस आयोजन से पूरा फोकस पन्ना पर ही केन्द्रित रहा, जिसका आने वाले समय में निश्चित ही पन्ना को लाभ मिलेगा। खनिज सचिव ने कहा कि यह मत भूलें कि हमारा इकलौता डायमण्ड आफिस पन्ना में ही है। बंदर डायमण्ड ब्लाक में परियोजना शुरू होने पर न केवल बुन्देलखण्ड अपितु समूचे देश के लिये गौरव की बात होगी।

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Monday, August 19, 2019

मन्दिरों के शहर पन्ना में अनूठी है हलछठ पर्व मनाने की परम्परा

  •   ऐतिहासिक श्री बल्देव जी मन्दिर में होता है भव्य आयोजन 
  •   पूर्व और पश्चिम की स्थापत्य का अनूठा संगम है यह मन्दिर 


पवित्र नगरी पन्ना स्थित श्री बल्देव जी का भव्य मन्दिर। 

अरुण सिंह,पन्ना। बेशकीमती हीरों व प्राचीन भव्य मन्दिरों के लिये प्रसिद्ध म.प्र. के पन्ना शहर में हलछठ का पर्व बड़ेे ही धूमधाम व अनूठे अंदाज में मनाया जाता है। इस मौके पर यहां के भव्य श्री बल्देव जी मन्दिर की निराली छटा देखते ही बनती है। समूचे बुन्देलखण्ड अंचल के हजारों श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ हलछठ पर्व मनाने तथा भगवान हलधर की एक झलक पाने के लिये यहां खिचें चले आते हैं।
उल्लेखनीय है कि पवित्र नगरी पन्ना में इस विशाल और भव्य मन्दिर का निर्माण तत्कालीन पन्ना नरेश महाराजा रूद्रप्रताप सिंह  ने 143 वर्ष पूर्व सन् 1876 में करवाया था। यह मन्दिर पूर्व और पश्चिम की स्थापत्य कला का अनूठा संगम है। बाहर से देखने पर यह मन्दिर लन्दन के प्रसिद्ध सेन्टपॉल चर्च का प्रतिरूप नजर आता है। इस मन्दिर की स्थापत्य कला और अनुपम सौन्दर्य को निहारकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। भगवान श्री कृष्ण की सोलह कलाओं के प्रतीक मन्दिर निर्माण में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं। मन्दिर में प्रवेश हेतु 16 सोपान सीढ़ी, 16 झरोखे, 16 लघु गुम्बद व 16 स्तम्भ पर विशाल मण्डप है। मन्दिर का शिखर स्वर्ण कलश से सुशोभित है। महाराजा रूद्रप्रताप सिंह  को कृषि से अत्यधिक लगाव था, इसलिये उन्होंने हलधर भगवान श्री बल्देव जी की नयनाभिराम कृष्णवर्णी प्रतिमा मन्दिर के गर्भग्रह में प्रतिष्ठित कराई थी। यह अनूठा मन्दिर राज्य की पुरातात्विक धरोहर में शामिल किया गया है।
मन्दिर समिति से मिली जानकारी के मुताबिक 21 अगस्त को श्री बल्देव जी मन्दिर में भगवान श्री हलधर का जन्म दिन हलछठ के रूप में धूमधाम के साथ मनाया जायेगा। हलछठ पर्व को देखते हुये मन्दिर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। पर्व के दिन मन्दिर में शान्ति एवं सुरक्षा व्यवस्था कायम रखने के लिये पुलिस बल व कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती की जायेगी। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री बल्देव जी मन्दिर में 21 अगस्त को अपरान्ह ठीक 12 बजे धूमधाम के साथ बल्दाऊ जी का जन्मोत्सव मनाया जायेगा।

जन्माष्टमी एवं हलषष्ठी पर्व की तैयारियां जोरों पर 


श्री कृष्ण जन्माष्टमी एवं हलषष्ठी पर्व को मनाये जाने के संबंध में श्री बल्देव जी मन्दिर प्रांगण में अपर कलेक्टर जे.पी. धुर्वे की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि नगर मुख्यालय स्थित मन्दिरों में दोनों त्यौहार भव्यता के साथ आयोजित किये जायें। त्यौहारों के दौरान आवश्यकतानुसार पुलिस बल पुरूष एवं महिला तैनात करने की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक पन्ना को सौंपी गई है। जिससे मन्दिरों में शान्तिपूर्ण ढंग से त्यौहारों का आयोजन किया जा सके। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी अनुविभागीय मजिस्ट्रेट पन्ना को सौंपी गई है। मन्दिरों की साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी मुुख्य नगरपालिका अधिकारी पन्ना को होगी। त्यौहारों के दौरान नियमित रूप से विद्युत प्रदाय एवं जनरेटर की व्यवस्था की जिम्मेदारी कार्यपालन यंत्री विद्युत मण्डल की होगी। त्यौहार के दौरान मन्दिर परिसर में चिकित्सक दल दवाओं सहित एम्बुलेन्स के साथ नियुक्त करने की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपी गई है। त्यौहारों के दौरान मन्दिर जाने वाले मार्गो पर यातायात नियंत्रण करने एवं वाहनों की पार्किंग व्यवस्था एवं भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की व्यवस्था के लिये कर्मचारियों की तैनाती थाना प्रभारी यातायात पन्ना द्वारा की जायेगी। स्वयं सेवकों को पहचान पत्र वितरित करने की जिम्मेदारी तहसीलदार पन्ना की होगी।

आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का विवरण


बैठक में बताया गया कि श्री जुगल किशोर जी मन्दिर में 23 अगस्त को रात्रि 12 बजे श्री कृष्ण उत्सव मनाया जायेगा। वहीं मन्दिर प्रांगण में 24 अगस्त को 3.30 बजे से 6.30 बजे तक दधिकांदो एवं भजन कीर्तन का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। 24 अगस्त को भगवान श्री कृष्ण जी की शयन आरती के बाद रात्रि 10.30 बजे से भण्डारे का आयोजन किया जायेगा। छठी का कार्यक्रम 28 अगस्त को शाम 7 बजे आयोजित होगा। श्री गोविन्द जी मन्दिर में 23 अगस्त को श्री कृष्ण उत्सव का आयोजन रात्रि 11.30 बजे एवं 28 अगस्त को छठी एवं भण्डारे का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। श्री बल्देव जी मन्दिर में 21 अगस्त को श्री बल्देव जी का जन्मदिन हलछठ का कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से किया जायेगा। श्री बल्देव जी की छठी का कार्यक्रम 26 अगस्त को रात्रि 8 बजे से तथा 27 अगस्त को रात्रि 9 बजे से भण्डारे का आयोजन किया जायेगा। इन सभी मन्दिरों के लिये शासन द्वारा दी जाने वाली राशि जारी कर दी गई है। मन्दिरों के लिये प्राप्त राशि का उपयोग तहसीलदार पन्ना द्वारा किया जायेगा।

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Sunday, August 18, 2019

एशिया महाद्वीप की इकलौती हीरा खदान पर संकट के बादल

  •   सेन्ट्रल इंपावर्ड कमेटी ने की है परियोजना को बन्द करने की अनुशंसा
  •   कमेटी ने डायमण्ड माइन्स का क्लोजर प्लान 30 सितम्बर तक प्रस्तुत करने दिये निर्देश
  •   इंपावर्ड कमेटी के इस फरमान से परियोजना सहित जिले में हड़कम्प


एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना का प्रवेश द्वार।


अरुण सिंह,पन्ना। बेशकीमती हीरों के लिये विख्यात डायमण्ड सिटी पन्ना की पहचान पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 20 किमी दूर पन्ना टाईगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण्य में मझगवां स्थित एशिया महाद्वीप की इकलौती मैकेनाइज्ड एनएमडीसी हीरा खदान को बन्द करने के लिये 30 सितम्बर 2019 तक क्लोजर प्लान सबमिट करने के निर्देश सेन्ट्रल इंपावर्ड कमेटी ने दिये हैं। कमेटी के इस फरमान से हीरा खनन परियोजना सहित समूचे जिले में हड़कम्प मची है। खजुराहो संसदीय क्षेत्र के सांसद वी.डी. शर्मा व पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह  ने एनएमडीसी हीरा खदान को पन्ना शहर की पहचान बताया है। इन दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा है कि एनएमडीसी हीरा खदान को किसी भी कीमत पर बन्द नहीं होने दिया जायेगा। मालुम हो कि हीरा खनन परियोजना द्वारा हीरा उत्खनन की अनुमति वन्य जीव संरक्षण विभाग द्वारा प्राप्त की गई थी, जिसकी वैधता 31/12/2020 तक ही है।
उल्लेखनीय है कि जंगल व खनिज सम्पदा से समृद्ध पन्ना जिले में बीते साल दशकों में ऐसी कोई बड़ी परियोजना व उद्योग स्थापित नहीं हुये जिनसे यहां के विकास को गति मिलती। यहां पर सिर्फ एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना है, जिससे पन्ना की पहचान है। इस परियोजना के कारण ही छोटे से शहर पन्ना को देश व दुनिया में डायमण्ड सिटी के रूप में जाना जाता है। दुर्भाग्य से यदि यह परियोजना बन्द होती है तो प्रतिवर्ष शासन को मिलने वाले करोड़ों रू. के राजस्व की जहां हानि होगी वहीं डायमण्ड सिटी के रूप में पन्ना की जो पहचान है वह भी खत्म हो जायेगी। एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना सिर्फ इस जिले की ही नहीं प्रदेश व देश के लिये गौरव की बात है। इस खदान से उत्तम क्वालिटी वाले उज्जवल किस्म के बेशकीमती हीरे निकलते हैं जिनकी दुनिया में सर्वाधिक माँग रहती है।

परियोजना की उत्पादन क्षमता 1 लाख कैरेट


मझगंवा स्थित खदान क्षेत्र जहां से हीरा निकलते हैं।

अत्याधुनिक संयंत्रों से सुसज्जित एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना की उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष 1 लाख कैरेट हीरों की है। परियोजना द्वारा खनन व हीरे के निष्पादन हेतु 113.331 हेक्टेयर भूमि का उपयोग खनि पट्टे के रूप में व 162.631 हेक्टेयर भूमि का उपयोग निष्पादन संयंत्र व कार्यालय हेतु पूरक भूमि पट्टे के रूप में किया जा रहा है। वन्य जीव संरक्षण विभाग द्वारा परियोजना संचालन हेतु 31/12/2020 तक की अनुमति प्राप्त है। परियोजना सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अभी खदान से 9.08 लाख टन किम्बर लाईट अयस्क का खनन व उससे 8.5 लाख कैरेट हीरों का उत्पादन शेष है।

अब तक 13 लाख कैरेट हीरों का हुआ उत्पादन


एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना के उत्पादन वर्ष 1968 से लेकर अब तक कुल 13 लाख कैरेट हीरे का उत्पादन किया गया है। वर्ष 1999 तक यहां हीरा की बिनाई की जाती थी, वर्ष 2001 में हीरा निष्पादन हेतु नवीनतम यंत्रीकृत तकनीकी का उपयोग कर उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 1 लाख कैरेट प्रतिवर्ष किया गया है। भारतीय खनन ब्यूरो के द्वारा खनन सुरक्षा नियमों के तहत आगामी वर्षों में 90 लाख टन किम्बर लाईट खनन का अनुमोदन किया गया है। 9.5 कैरेट प्रति 100 टन किम्बर लाईट की दर से 90 लाख टन किम्बर लाईट से 8.50 लाख कैरेट हीरे का उत्पादन अपेक्षित है। इसके लिये परियोजना संचालन की दीर्घकालीन स्थाई अनुमति आवश्यक है।

सांसद व विधायक ने खदान का लिया जायजा


हीरा खनन परियोजना का भ्रमण करते सांसद वी.डी. शर्मा  व विधायक ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह ।

क्षेत्र सांसद वी.डी. शर्मा व पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना पर छाये संकट व उत्पन्न व्यवधान की स्थिति को जानने के लिये यहां का भ्रमण किया। परियोजना प्रबन्धन द्वारा प्रजेन्टेशन के माध्यम से सांसद व विधायक को पूरी गतिविधियों से अवगत कराया गया तथा उन्हें खदान व संयंत्र का भ्रमण भी कराया गया। इस मौके पर कर्मचारी यूनियन के महामंत्री समर बहादुर सिंह व अन्य पदाधिकारियों ने सांसद और विधायक को एक ज्ञापन भी सौंपा है। जिसमें विशेष रूप से यह लेख किया गया है कि खनिज सम्पदा प्रकृति में विशेष परिस्थितियों से निर्मित होती है, जिसका स्थानांतरण असंभव होता है। खनन कार्य खनिज सम्पदा के प्राप्ति स्थल पर ही करना होता है। यह भी ध्यान रखने योग्य है कि हीरा खनन परियोजना का प्रारंभ सन् 1958 में हुआ था, जबकि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम सन् 1972 में लागू हुआ है। परियोजना द्वारा आगामी 20 वर्षों के लिये खनन पट्टे की अवधि बढ़ाने हेतु आवेदन किया है, जिस पर निर्णय होना अभी लम्बित है। इस पर क्षेत्रीय सांसद व विधायक क्या भूमिका निभाते हैं, यह भविष्य के गर्त में है।
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दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर 

Friday, August 16, 2019

हीरा खनन परियोजना पन्ना की पहचान: सांसद

  •   एनएमडीसी को किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जायेगा बन्द
  •   आयोजित प्रेसवार्ता में विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर सांसद ने रखे विचार


पन्ना में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते सांसद वी.डी. शर्मा साथ में पन्ना विधायक व भाजपा जिलाध्यक्ष

अरुण सिंह,पन्ना। हीरा खनन परियोजना एनएमडीसी पन्ना जिले की पहचान है, इसे किसी भी कीमत पर बन्द नहीं होने दिया जायेगा। यह बात खजुराहो लोकसभा क्षेत्र के सांसद वी.डी. शर्मा ने आज सर्किट  हाऊस पन्ना में आयोजित प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना मझगवां एशिया महाद्वीप की इकलौती हीरा खदान है जहां आधुनिक तरीके से बेशकीमती रत्न हीरे निकाले जाते हैं। पर्यावरण हितैषी यह परियोजना प्रतिवर्ष जहां 40 हजार कैरेट से भी अधिक हीरों का उत्पादन करती है, वहीं शासन को करोड़ों रू. राजस्व भी देती है। परियोजना के संचालन से आस-पास स्थित ग्रामों को जरूरी सुविधायें भी मिल रही हैं, जिसे देखते हुये इस परियोजना को बन्द होने से बचाने के लिये हरसंभव प्रयास किये जायेंगे।
आयोजित इस प्रेसवार्ता में सांसद श्री शर्मा ने देश, प्रदेश और लोकसभा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न ज्वलंत मुद्दों और विषयों पर बड़े ही बेबाक ढंग से अपने विचार रखे। उन्होंने धारा 370 हटाये जाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया और कहा कि आतंकवाद को प्रश्रय देने वाली इस धारा के हटने से अब सही अर्थों में कश्मीर भारत का हिस्सा बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह के इस साहसिक निर्णय से कश्मीर अब विकास की ओर अग्रसर होगा तथा आतंकवाद के साये से देश का यह खूबसूरत इलाका पूरी तरह से मुक्त हो सकेगा। सांसद ने बताया कि जम्मू कश्मीर में जब धारा 370 लागू हुआ था, उस समय भी अनेकों लोगों ने इसका विरोध किया था। केन्द्र सरकार के इस साहसिक निर्णय का देश के जनमानस ने व्यापक स्तर पर स्वागत और समर्थन किया है। उन्होंने पाक अधिकृत कश्मीर को भी भारत का अभिन्न अंग बताया और कहा कि यह इसी का हिस्सा है।
केन-बेतवा लिंक  परियोजना से संबंधित पूछे गये सवालों के जवाब में सांसद वी.डी. शर्मा ने कहा कि पन्ना जिले के हितों की अनदेखी नहीं करने दी जायेगी। आपने कहा कि मैने स्पष्ट रूप से यह बात रखी है कि इस परियोजना से पन्ना जिले को कैसे और कितना लाभ मिलेगा, पहले यह सुनिश्चित किया जाये। सांसद ने बरियारपुर डेम की भी चर्चा की और कहा कि अंग्रेजों के जमाने में जो समझौता हुआ था, वह आज भी कायम है। जिसका नुकसान पन्ना जिले को कई दशकों से उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस दोषपूर्ण समझौते पर अब पुनर्विचार  होना चाहिये। पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवालों के जवाब में सांसद श्री शर्मा ने कहा कि पन्ना जिले में पर्यटन विकास की विपुल संभावनायें हैं, इस दिशा में बहुत कुछ करने की जरूरत है ताकि इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। आपने बताया कि प्राचीन ऐतिहासिक इमारत महेन्द्र भवन जहां कलेक्ट्रेट संचालित होता था, उस भवन को टूरिज्म विभाग को सौंप दिया गया है। वन और पर्यावरण से जुड़े सवालों की ओर सांसद श्री शर्मा का ध्यान आकृष्ट कराते हुये पत्रकारों ने उनसे कहा कि पन्ना जिले में समृद्ध वन क्षेत्र है, लेकिन इसी कारण पन्ना का विकास भी बाधित हुआ है। पर्यावरणीय सेवाओं के बदले पन्ना जिले के विकास हेतु विशेष पैकेज तथा वन क्षेत्र के किसानों को रॉयल्टी मिलनी चाहिये ताकि लोग स्वेच्छा से खुशी-खुशी जंगल की सुरक्षा व संरक्षण में सहभागी बनें। सांसद ने इस सुझाव पर सहमति जताते हुये कहा कि इस दिशा में प्रयास किये जायेंगे। क्षेत्रीय सांसद की इस प्रेसवार्ता के दौरान स्थानीय विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह , भाजपा जिलाध्यक्ष सतानन्द गौतम सहित पार्टी के कई स्थानीय नेता व पदाधिकारी मौजूद रहे।

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Wednesday, August 14, 2019

भक्ति शर्मा जिन्होंने प्रदेश की महिलाओं का बढ़ाया मान

  • आत्मविश्वास से लवरेज महिला ने बदल दी गांव की तस्वीर 
  • महिलाओं के लिये प्रेरणादाई है भक्ति शर्मा की कहानी 


भारत की 100 प्रभावी महिला में शामिल भक्ति शर्मा अमेरिका से लौटी हैं अब मध्यप्रदेश में एक ग्राम पंचायत की सरपंच है। अपने साथ हमेशा एक पिस्टल रखती हैं। इनके गांव में बहुत सारे खास काम होते हैं, यहां एक सरपंच योजना चलती है.. किसान को मुआवजा मिलता है। हर आदमी का बैंक अकाउंट है और हर खेत का मृदा कार्ड.. कुछ ही वर्षों में इन्होंने अपने गांव की तस्वीर बदल दी है.. पढ़िए इनकी सफलता की कहानी...
भक्ति शर्मा ने एमए राजनीति शास्त्र से किया है, अभी वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। भोपाल जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर बरखेड़ी अब्दुल्ला ग्राम पंचायत है। इस पंचायत की सरपंच भक्ति शर्मा के शौक पुरुषों जैसे हैं। इन्हें ट्रैक्टर चलाना, पिस्टल रखना, अपनी गाड़ी से सड़कों पर फर्राटे भरना, किसी भी अधिकारी से बेधड़क बात करना पसंद है। ये अपनी बोलचाल की भाषा में भी जाता है, खाता है, आता हूँ का प्रयोग सामान्य तौर पर करती हैं। इस पंचायत में कुल 2700 जनसँख्या है जिसमे 1009 वोटर हैं। ओडीएफ हो चुकी इस पंचायत में आदर्श आंगनबाड़ी से लेकर हर गली में सोलर स्ट्रीट लाइटें हैं।
“सरपंच बनते ही सबसे पहला काम हमने गांव में हर बेटी के जन्म पर 10 पौधे लगाना और उनकी माँ को अपनी दो महीने की तनख्वाह देने का फैसला लेकर किया। पहले साल 12 बेटियां पैदा हुई, माँ अच्छे से अपना खानपान कर सके इसलिए अपनी यानि सरपंच की तनख्वाह ‘सरपंच मानदेय’ के नाम से शुरू की।”
भक्ति ने कहा, “हमारी पहली ऐसी ग्राम पंचायत बनी जहाँ हर किसान को उसका मुआवजा मिला। हर ग्रामीण का राशनकार्ड, बैंक अकाउंट, मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाया। इस समय पंचायत का कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं है। महीने में दो से तीन बार फ्री में हेल्थ कैम्प लगता है।
भक्ति ने कहा, “हमारी पहली ऐसी ग्राम पंचायत बनी जहाँ हर किसान को उसका मुआवजा मिला। हर ग्रामीण का राशनकार्ड, बैंक अकाउंट, मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाया। पहले साल में 113 लोगों को पेंशन दिलानी शुरू की, इस समय पंचायत का कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं है। महीने में दो से तीन बार फ्री में हेल्थ कैम्प लगता है, जिससे पंचायत का हर व्यक्ति स्वस्थ्य रहे।”




ग्राम पंचायत का कोई भी काम भक्ति अपनी मर्जी से नहीं करती हैं। पंचों की बैठक समय-समय पर अलग से होती रहती है। जब ये सरपंच बनी थीं तो इस पंचायत में महज नौ शौचालय थे अभी ये पंचायत ओडीएफ यानि खुले में शौच से मुक्त हो चुकी है। भक्ति का कहना है, “हमने पंचायत में कोई भी काम अलग से नहीं किया, सिर्फ सरकारी योजनाओं को सही से लागू करवाया है। पंच बैठक में जो भी निर्धारित करते हैं वही काम होता है। ढ़ाई साल में बहुत ज्यादा विकास तो नहीं करवा पाए हैं क्योंकि जब हम प्रधान बने थे उस समय गांव की सड़कें ही पक्की नहीं थी, इसलिए पहले जरूरी काम किए।”
भक्ति ने अपने प्रयासों से अपनी पंचायत को सरकार की मदद से एक बड़ा सामुदायिक भवन पास करा लिया है। भक्ति का कहना है, “आगामी छह महीने में इस भवन में डिजिटल क्लासेज शुरू हो जायेंगी, जो पूरी तरह से सोलर से चलेंगी। इसमें महिलाओं के लिए सिलाई सेंटर, और चरखा केंद्र खुलेगा। किसानों के लिए समय-समय पर बैठकें होंगी, जिससे वो खेती के आधुनिक तरीके सीख सकें। बच्चों के लिए तमाम तरह की गतिविधी होंगी जिससे उन्हें गांव में शहर जैसी सुविधाएँ मिल सकें।”
पंचायत की हर महिला निडर होकर रात के 12 बजे भी अपनी पंचायत में निकल सके भक्ति शर्मा की ऐसी कोशिश है। भक्ति ने कहा, “पंचायत की हर बैठक में महिलाएं ज्यादा शामिल हों ये मैंने पहली बैठक से ही शुरू किया। मिड डे मील समिति में आठ महिलाएं है। महिलाओं की भागीदारी पंचायत के कामों में ज्यादा से ज्यादा रहे जिससे उनकी जानकारी बढ़े और वो अपने आप को सशक्त महसूस करें।”
पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से ग्राम पंचायत में पानी की बहुत समस्या है। पीने के पानी के लिए तो सबमर्सिबल लगा है लेकिन खेती को समय से पानी मिलना थोड़ा मुश्किल होता है। भक्ति का कहना है, “जिनके पास 1012 एकड़ जमीन है, हमारी कोशिश है वो हर एक किसान कम से कम एक एकड़ में जैविक खेती जरुर करें। बहुत ज्यादा संख्या में तो नहीं लेकिन किसानों ने जैविक खेती करने की शुरुआत कर दी है।”
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Tuesday, August 13, 2019

बहुचर्चित नीलेश द्विवेदी हत्याकाण्ड का पुलिस ने किया खुलासा

  •   मामले में 9 आरोपी गिरफ्तार, 2 कट्टा एवं 2 जिन्दा कारतूस बरामद
  •   हत्याकाण्ड का एक आरोपी अज्जू उर्फ अजय परमार अभी भी फरार
  •   आरोपी की पन्ना पुलिस द्वारा की जा रही सरगर्मी से तलाश


आयोजित प्रेस वार्ता में हत्याकाण्ड का खुलासा करते हुये पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी। 

अरुण सिंह,पन्ना। बहुचॢचत नीलेश द्विवेदी हत्याकाण्ड मामले में पन्ना पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की है। इस मामले का एक आरोपी अज्जू उर्फ अजय परमार अभी भी फरार है जिसकी पुलिस द्वारा सरगर्मी के साथ तलाश की जा रही है। पुलिस ने इन आरोपियों के कब्जे से दो कट्टा व दो जिन्दा कारतूस भी बरामद किया है। मालुम हो कि विगत एक पखवाड़ा पूर्व 26 जुलाई को भाजपा नेता नीलेश द्विवेदी को आरोपियों द्वारा उस समय गोली मारी गई थी जब वे मोटर साइकिल से अपने  गाँव की ओर जा रहे थे। घटना को लेकर इलाके में अभी भी भय और दहशत का माहौल बना हुआ है। आरोपियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर लोगों द्वारा धरना और प्रदर्शन भी किये जा रहे थे। जिससे पुलिस के ऊपर भी  खासा दबाव था। हत्याकाण्ड के 9 आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद पुलिस ने भी राहत की साँस ली है। पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने प्रेसवार्ता आयोजित कर आज इस सनसनीखेज हत्याकाण्ड का खुलासा किया। मामले की जानकारी देते हुये उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को फ रियादी राजेश शुक्ला पिता रामचरण शुक्ला उम्र 40 वर्ष निवासी मोहनपुरा द्वारा चौकी ककरहटी में रिपोर्ट की गई थी कि आज मैं सब्जी खरीदकर नीलेश द्विवेदी के साथ उसकी मोटर साइकिल पर पीछे बैठकर अपने घर वापस आ रहा था तभी रास्ते में अटरहा नाला के पास रिपटा के पास लाल साहब उर्फ  वासुदेव बुन्देला अपने साथियों भूपत अहिरवार , जगदीश राजपूत और सत्तार खान निवासी पन्ना के साथ रोड पर खड़े थे। इन्होंने मोटर साईकिल रोककर भूपत अहिरवार एवं जगदीश राजपूत मुझे मोटर साईकिल से उतार कर गले में हाथ डाल कर रोड के किनारे ले गये और आगे पुलिया के पास नीलेश द्विवेदी को रोककर लाल साहब बुन्देला ने पिछली सरपंची के चुनाव की बुराई पर से जान से मारने की नियत से कट्टा से दो फायर नीलेश द्विवेदी को मारे, जो बाये पैर के घुटना व घुटना के नीचे लगे। नीलेश को गोली मार कर चारो लोग मोटर साईकिलों में बैठकर मुराज तरफ  भाग गये । नीलेश को इलाज हेतु अस्पताल ले जाया गया। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली पन्ना में अप.क्र. 522/19 धारा 307,34 भादवि 25,27 आर्म्स  एक्ट का कायम किया गया।

आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु गठित की गई थीं तीन टीमें


मामले की गंभीरता को देखते हुये पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी द्वारा स्वयं घटना स्थल पर पहुँचकर घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। इलाज दौरान रीवा अस्पताल में आहत नीलेश द्विवेदी की मृत्यु हो जाने पर मामले में आरोपियों के विरूद्ध धारा 302 भादवि का इजाफ ा किया गया। पुलिस अधीक्षक पन्ना के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बी.के.एस. परिहार के कुशल मार्गदर्शन तथा एसडीओपी आर.एस. रावत के नेतृत्व में आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु 3 विशेष पुलिस टीमो का गठन किया गया जिसमें एक टीम की कमान नगर निरीक्षक कोतवाली पन्ना अरविन्द कुजूर दूसरी टीम की कमान उनि एम.एल. यादव एवं तीसरी टीम की कमान उनि सुशील शुक्ला को सौपी गई। उक्त पुलिस टीम एवं सायबर सेल की मदद से आरोपियो की गिरफ्तारी हेतु घटना दिनांक से सतत् प्रयास किये गये। पुलिस द्वारा अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया। मुखबिर सूचना  एवं सायबर सेल की मदद से तकनीकी साक्ष्यो के आधार पर घटना के मुख्य आरोपी लाल साहब उर्फ  वासुदेव सिंह  बुन्देला निवासी समाना की बातचीत एफआईआर में नामजद आरोपियों के अलावा छतरपुर तरफ  के अन्य लोगो से होना पाया गया एवं लाल साहब एवं छतरपुर तरफ  के अन्य संदेहियों की मौजूदगी घटना स्थल के आस-पास एवं घटना स्थल पर 1 दिन पूर्व से घटना समय तक पाई गई। उक्त व्यक्तियों का संपर्क लाल साहब सिंह से होना पाया गया तकनीकी साक्ष्य के आधार पर घटना स्थल पर उपस्थित सन्तराजा उर्फ  मानवेन्द्र सिंह परमार निवासी बुढरख, विवेक सिंह बुन्देला निवासी भगवां, विकास द्विवेदी निवासी बजरंग नगर छतरपुर, गोलू उर्फ  महिपाल सिंह परमार निवासी नयागाँव, अभिषेक शुक्ला के घरों में जाकर पुलिस द्वारा पता किया गया जो घटना के एक दिन पूर्व से अपने अपने घरों में मौजूद नहीं थे। संदेहियों की पतारसी एवं गिरफ्तारी में लगी पुलिस टीमों द्वारा अलग-अलग संभावति जगहों में तलाश की गई।

बायपास रोड झांसी से गिरफ्तार हुये मुख्य आरोपी


पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दिनांक 12-13 अगस्त की दरिम्यानी रात सत्तार खान निवासी पन्ना, लालसाहब उर्फ  वासुदेव सिंह बुन्देला निवासी समाना, सन्तराजा उर्फ  मानवेन्द्र सिंह परमार निवासी बुढरख व सन्तराजा के साथी अभिषेक शुक्ला निवासी बरोल को दतिया, ग्वालियर तरफ  जाने की सूचना प्राप्त होने पर बायपास रोड झाँसी से पकड़ा गया। आरोपियों से पूछताछ किये जाने पर लालसाहब द्वारा अपने साथी जगदीश राजपूत, भूपत अहिरवार, सत्तार खान, सन्तराजा परमार, अभिषेक शुक्ला, विकास द्विवेदी, गोलू परमार, विवेक सिंह व अज्जू उर्फ अजय परमार के साथ घटना कारित करना बताया । बाद पूछताछ चारों को अभिरक्षा में लिया एवं विवेक सिंह बुन्देला, विकास द्विवेदी, गोलू उर्फ  महिपाल सिंह परमार की तलाश हेतु उनि एम.एल. यादव को सतना-रीवा तरफ  रवाना किया गया था जो उक्त तीनों आरोपियों को सतना रोड शेरगंज के पास एवं भूपत अहिरवार, जगदीश राजपूत को उनि सुशील शुक्ला द्वारा दमोह जबलपुर रोड जबलपुर नाका के पास से पकड़ा गया। आरोपियों से पूछताछ करने पर उनके द्वारा जुर्म स्वीकारने पर पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। आरोपी सन्तराजा उर्फ  मानवेन्द्र सिंह परमार एवं उसके साथी अभिषेक पिता घनश्याम शुक्ला निवासी बरोल अन्धेरी ईस्ट मुंबई से मुताबिक मेमोरेण्डम घटना में प्रयुक्त आलाजर्ब एक 12 बोर का देशी कट्टा, 1 जिन्दा कारतूस सन्तराजा से एवं एक 315 बोर का देशी कट्टा व 1 जिन्दा कारतूस अभिषेक शुक्ला से जप्त किया गया है।

पुलिस ने इन आरोपियों को किया है गिरफ्तार


मामले में पुलिस ने जिन 9  आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनमें लालसाहब उर्फ  वासुदेव सिंह बुन्देला पिता स्व.मुन्नू राजा उर्फ  दिवाकरदेव बुन्देला 30 साल निवासी समाना थाना कोतवाली पन्ना, जगदीश सिंह पिता रामसिंह राजपूत उम्र 55 वर्ष निवासी रनवाहा थाना कोतवाली पन्ना जिला पन्ना, भूपत पिता नन्दी अहिरवार  45 साल निवासी घटारी थाना कोतवाली पन्ना, शेख सत्तार पिता शेख सकूर 53 साल निवासी आगरा मोहल्ला पन्ना थाना कोतवाली पन्ना, गोलू उर्फ  महिपाल सिंह पिता बहादुर सिंह परमार 23 साल नि. नयागांव थाना पिपट छतरपुर, विकास द्विवेदी पिता कृष्णकुमार द्विवेदी 22 साल निवासी पन्ना नाका बजरंगनगर जीवन ज्योती कालोनी छतरपुर, सन्तराजा उर्फ  मानवेन्द्र सिंह पिता गोविन्द सिंह परमार निवासी बुढरख थाना महराजपुर छतरपुर, विवेक सिंह पिता बलबीर सिंह बुन्देला 24 साल निवासी भगवां जिला छतरपुर एवं अभिषेक पिता घनश्याम शुक्ला 26 साल निवासी निवासी बरोल अन्धेरी ईस्ट मुंबई ( महाराष्ट्र ) शामिल हैं। मामले में आरोपी अज्जू उर्फ  अजय परमार निवासी बड़ामलहरा फरार है जिसकी गिरफ्तारी होना शेष है।

गिरफ्तारी में इनकी रही सराहनीय भूमिका


हत्याकाण्ड के आरोपियों की गिरफ्तारी व सम्पूर्ण कार्यवाही में नगर निरीक्षक कोतवाली अरविन्द कुजूर, उनि एम.एल. यादव, उनि सुशील शुक्ला, उनि राकेश तिवारी, उनि एम.डी. शाहिद, प्र. आर. रामकृष्ण पाण्डेय , शिवेन्द्र सिंह, कुंजबिहारी सिंह,प्रेमलाल पाण्डेय, आर. बृषकेतु रावत, सरवेन्द्र , बीरेन्द्र , रामपाल, राहुल सिंह बघेल, आईमात सेन, नितिन मिश्रा, तेजेन्द्र राजौरा , दीपप्रकाश, बृह्मदत्त शुक्ला, सलीम खान, रविकरन सिंह, प्रदीप पाण्डेय, कमलेश नगायच एवं सायबर सेल से सूबेदार नेहा सिंह, नीरज रैकवार, आशीष अवस्थी, धर्मेन्द्र सिंह राजावत का सराहनीय योगदान रहा। उक्त टीम को पुलिस अधीक्षक पन्ना द्वारा पुरुष्कृत करने की घोषणा की गई है।
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Sunday, August 11, 2019

वनोपज से समृद्ध पन्ना के जंगलों में पड़ोरा की बहार

  • मानसून सीजन में इन्ही दिनों मिलती है पौष्टिक गुणों से भरपूर यह सब्जी 
  • यह जंगली सब्जी बाजार में बिक रही 100 से 150 रुपये प्रति किलो 



अरुण सिंह,पन्ना । औषधीय जड़ी बूटियों और वनोपज से समृद्ध पन्ना जिले के जंगलों में इन दिनों पड़ोरा की बहार है। अत्यधिक पौष्टिक व आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर यह जंगली सब्जी पन्ना के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगती है। इन दिनों पड़ोरा की लतर में फल आये हुये हैं जो बामुश्किल एक पखवाड़ा तक ही मिलेंगे। वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले आदिवासी जंगल से पड़ोरा तोड़कर न सिर्फ खाते हैं अपितु बाजार में बेंच भी देते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय हो जाती है। पन्ना के बाजार में जंगली पड़ोरा 100 से 150 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
गौरतलब है कि पड़ोरा एक बहुवर्षीय कद्दूवर्गीय फसल है, जो पौष्टिक गुणों से भरपूर होने के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों की रोकथाम में सहायक होती है। इसकी खेती कर किसान समृद्ध बन सकते हैं। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों से इसकी खेती करने की अपील की गई है।  उद्यान विभाग के सहायक संचालक एमके भट्ट ने बताया कि पन्ना के जंगली क्षेत्रों में पड़ोरा बिना उगाये उग जाता हैं इसलिए आदिवासियों द्वारा पन्ना के जंगलों से तुड़ाई कर बाजार में इन दिनों 100 से 150 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। जंगल क्षेत्रों के आस-पास के लोग इसको सब्जी के रूप में बहुतायत से उपयोग करते हैं। पड़ोरा के बीजों की बुवाई का समय जून-जुलाई है। पड़ोरा के बीज को एक बार बोने के बाद इसके मादा पौधे से लगभग 8 से 10 वर्षो तक फल प्राप्त होते रहते हैं। इस पर कीड़ों व बीमारियों का प्रकोप बहुत कम होता है। परन्तु फल मक्खी पड़ोरा के फलों को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। सहायक संचालक भट्ट ने बताया कि पड़ोरा का प्रयोग सब्जी के रूप में किया जाता है जो बहुत स्वादिष्ट होती है तथा मानव संतुलित आहार का एक महत्वपूर्ण भाग है। आपने बताया कि पड़ोरा की सब्जी पौष्टिक गुणों से भरपूर होती है। पड़ोरा के फलों का उपयोग अचार बनाने के लिए भी किया जाता है। यह कफ, खांसी, अरूचि, वात, पित्तनाशक और हृदय में होने वाले दर्द से राहत दिलाता है। पड़ोरा के फलों का सेवन मधुमेह रोगी के शर्करा नियंत्रण में भी बहुत उपयोगी होता है।

पड़ोरा को कहा जाता है सबसे ताकतवर सब्जी


मौजूदा दौर में जंक फूड का इतना क्रेज बढ़ चुका है कि लोग अपने शरीर को जरूरी ताकत देने वाली सब्जी, दाल का सेवन कम ही करते हैं। यह बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ सबज्यिां ऐसी होती हैं, जिन्हें कुछ दिन खाने पर ही इसका फायदा मिल जाता है. ऐसी ही एक सब्जी पड़ोरा है। ऐसा कहा जाता है कि यह दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है. इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इस सब्जी में इतनी ताकत होती है कि महज कुछ दिन के सेवन से ही आपका शरीर तंदुरुस्त बन जाता है। पड़ोरा को कंटोला,ककोड़े और मीठा करेला के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में भी इसे सबसे ताकतवर सब्जी के रूप में माना गया है। यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूर होती है, जिसे खाने से शरीर ताकतवर बनता है। यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्जी है. जो शरीर को साफ रखने में भी काफी सहायक है। अगर आप इसकी सब्जी नहीं खाना चाहते तो अचार बनाकर भी सेवन कर सकते हैं। आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज के लिए इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं, यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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Thursday, August 8, 2019

केन नदी के तेन्दूघाट में पूरा हुआ बांध निर्माण का कार्य

  •   इस मध्यम सिंचाई परियोजना से पवई व गुनौर जनपद के 83 गाँव होंगे लाभान्वित
  •   बांध की जलधारण क्षमता 124.80 मिलियन घन मीटर, 25 हजार हेक्टेयर से अधिक   भूमि में होगी सिंचाई




केन नदी के तेंदू घाट में जल संसाधन विभाग द्वारा निर्मित कराया गया बांध। 

अरुण सिंह,पन्ना।

 केन नदी के तेन्दूघाट पर वर्ष 2015 से निर्माणाधीन पवई मध्यम सिंचाई परियोजना का कार्य पूरा हो गया है। जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 105 किमी दूर शाहनगर तहसील के पडऱहा ग्राम के निकट जल संसाधन विभाग द्वारा 806 मीटर लम्बा तथा 37 मीटर ऊँचा बांध बनाया गया है, जिसकी पुनरीक्षित लागत 600.81 करोड़ रू. है। इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना से पवई व गुनौर जनपद क्षेत्र के 83 ग्रामों के किसानों की 25 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि ङ्क्षसचित होगी। सिंचाई सुविधा मिलने से इस अंचल के किसान अब अपने खेतों से जहां भरपूर पैदावार ले सकेंगे, वहीं उनकी जिन्दगी में भी खुशहाली आयेगी।


उल्लेखनीय है कि बारिश के ही पानी पर पूरी तरह से आश्रित इस अंचल के किसानों की जिन्दगी में खुशहाली लाने तथा खेती को लाभ का धन्धा बनाने की मंशा से प्रदेश सरकार ने केन नदी के तेन्दूघाट पर बांध के निर्माण को मंजूरी प्रदान की थी। जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री बी.एल. दादौरिया की देखरेख में पवई मध्यम सिंचाई परियोजना का कार्य वर्ष 2015 में शुरू हुआ और इन्हीं के रहते बांध निर्माण का यह कार्य पूरा हो गया। मौजूदा समय कार्यपालन यंत्री श्री दादौरिया जल संसाधन संभाग पवई में कार्यरत हैं। इनकी तकनीकी दक्षता और कार्यक्षमता को देखते हुये प्रदेश सरकार ने पन्ना जिले की निर्माणाधीन दो मध्यम सिंचाई परियोजनाओं रून्ज व मझगांय बांध के निर्माण की जवाबदारी भी इन्हें सौंप दी है। मालुम हो कि ये दोनों ही सिंचाई परियोजनायें जल संसाधन संभाग पन्ना के अन्तर्गत आती हैं। लेकिन भू-अर्जन व डूब क्षेत्र के किसानों को मुआवजा वितरण सहित अन्य कई तकनीकी कारणों के चलते इन दोनों ही मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का कार्य विवादों में घिरा हुआ था, जिससे निर्माण कार्य या तो ठप्प था या फिर कछुआ गति से चल रहा था। इस व्यवधान व विवादों को दूर करने तथा कार्य की गति में तेजी लाने के लिये शासन ने जल संसाधन संभाग पवई के कार्यपालन यंत्री बी.एल. दादौरिया को इन दोनों बांधों की जिम्मेदारी सौंप दी है।

तेंदूघाट पर बने बांध में लगे हैं 9 गेट


केन नदी में तेंदूघाट पर बनकर तैयार हुये विशाल बांध में 10 मी. गुणे  10.50 मी. के कुल 9 गेट लगे हैं। गेट के लेबल तक बांध में पानी भरा हुआ है। मौजूदा समय इस बांध के गेट खुले हैं, फलस्वरूप अतिरिक्त पानी इन गेटों से निरन्तर निकल रहा है। कार्यपालन यंत्री श्री दादौरिया ने बताया कि मानसूनी बारिश में विराम लगने पर अगस्त महीने के बाद बांध के गेट बन्द कर दिये जायेंगे। इस बांध के बन जाने से अब जहां हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि ङ्क्षसचित होगी, वहीं पूरे इलाके में जल स्तर भी सुधरेगा। जिससे पेयजल की समस्या का काफी हद तक निराकरण हो सकेगा। श्री दादौरिया के मुताबिक बांध की जलधारण क्षमता 124.80 मिलियर घन मीटर तथा जल गृहण क्षेत्र लगभग 995 वर्ग किमी है। बांध के डूब क्षेत्र में तकरीबन 1373 हेक्टेयर भूमि आई है, जिसमें निजी भूमि 599 हेक्टेयर, शासकीय भूमि 536 हेक्टेयर तथा 238 हेक्टेयर के लगभग वन भूमि प्रभावित हुई है।

नहरों से होगी 11 हजार हेक्टेयर की सिंचाई


पवई मध्यम सिंचाई परियोजना के द्वारा नहरों के माध्यम से 11 हजार हेक्टेयर से भी अधिक कृषि भूमि         सिंचित होगी। नहरों के अलावा 14 हजार 800 हेक्टेयर की पाइप लाइन एरीगेशन की निविदा बुलाई गई है। कार्यपालन यंत्री श्री दादौरिया ने बताया कि पवई मध्यम ङ्क्षसचाई परियोजना के तहत निर्मित  की जाने वाली मुख्य नहरों की लम्बाई 40.61 किमी है। इसमें 37 किमी लम्बी नहर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, शेष कार्य इस वर्ष नवम्बर माह तक पूरा करने का लक्ष्य है। नहरों के निर्माण का कार्य पूरा होने पर अंचल के किसानों को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी, जिससे सूखा और अल्प वर्षा के चलते बदहाली का जीवन गुजारने वाले किसानों की जिन्दगी खुशहाल होगी।
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सुषमा जी के जीवन का हर क्षण देश को समर्पित रहा: महदेले

  •  भाजपा कार्यालय पन्ना में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा
  •   म.प्र. के कार्यकर्ता भाग्यशाली, जिन्हें सुषमा जी का सानिध्य मिला


 वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व  विदेश मंत्री स्व. श्री मति सुषमा स्वराज जी को श्रद्धांजली अर्पित करते हुये भाजपा नेता। 

पन्ना। म.प्र. के कार्यकर्ता भाग्यशाली हैं, जिन्हें सुषमा स्वराज जी का मार्गदर्शन मिला। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं,  लेकिन वे विचारों से हमेशा अजर अमर रहेंगी। सुषमा जी ने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक देश की सेवा की। विचार और संगठन के लिये अपना तिल-तिल दिया। आदरणीय सुषमा जी ऐसी पुस्तक थीं जिसमें ज्ञान, संवेदनशीलता, नैतिकता, कर्तव्यबोध और अद्भुत संगठन क्षमता समाहित थी। यह बात भारतीय जनता पार्टी कि वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री कुसुम सिंह  महदेले ने जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में स्व. सुषमा जी का पुण्य स्मरण करते हुये कही। उन्होंने कहा कि वह मेरे लिये चार चुनाव में प्रचार करने के लिये आई ओर उन्होंने सभा की मुझे उनका आशीर्वाद व सानिध्य प्राप्त हुआ है!
सभा में पार्टी के जिलाध्यक्ष सतानंद गौतम ने श्रीमती सुषमा स्वराज जी से जुड़े संस्मरण साझा करते हुये कहा कि आदरणीय सुषमा दीदी अद्भुत व्यक्तित्व की धनी थीं। उनकी जिह्वा पर माँ सरस्वती विराजमान थीं। उनको सदन में सुनने के लिये सांसद लालायित रहते थे। उनके द्वारा रखे गये विषयों में हमेशा नवीनता के साथ ही सार्थकता भी होती थी। सदन में वे अपनी बुद्धियुक्ति से किये गये प्रश्न और उठाये गये मुद्दों से सब को निरुत्तर कर देती थीं। विदेश मंत्री रहते हुये उनके कार्यकाल में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिसमें उन्होंने विदेशों में फं से भारतीयों की त्वरित मदद की। उनमें गजब की संवेदनशीलता के साथ व्यवस्था के प्रति समर्पण भी था। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बाबू लाल यादव ने कहा कि वे एक संवेदनशील महिला थीं। उन्होंने अपनी कार्यकुशलता के बल पर समाज में एक अलग छाप छोड़ी। वे संगठनात्मक क्षमता की धनीं थी। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से उनका सीधा संवाद था। श्रद्धांजली सभा में नगर पालिका अध्यक्ष मोहन लाल कुशवाहा  ने कहा कि वे मातृत्व और स्नेह से भरी हुई, आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय विदुषी थीं। उन्होंने भारतीयता और भारत को अपने अंदर विचारों के माध्यम से जीने का काम किया। शोक सभा में जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, मंडल अध्यक्ष नेमीचंद्र जैन, महामंत्री विवेक मिश्रा,  तरूण पाठक, बृजेन्द्र गर्ग, बृजेन्द्र मिश्रा, आशा गुप्ता सहित अन्य नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने स्व. श्रीमती सुषमा स्वराज को श्रद्धांजली दी।
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Tuesday, August 6, 2019

जंगल की वनाच्छादित भूमि में बेखौफ होकर हो रहा अतिक्रमण

  • उत्तर वन मंडल के देवेन्द्रनगर परिक्षेत्र में सौ से भी अधिक लोगों ने किया कब्ज़ा 
  • भवानीपुर बीट के जंगल में करीब डेढ़  दो किमी. क्षेत्र में बन गई हैं झुग्गियां 
  • वन अमले की लापरवाही और अनदेखी के चलते अतिक्रमण की समस्या हुई गंभीर 


देवेंद्रनगर वन परिक्षेत्र के भवानीपुर बीट में हुये अतिक्रमण का द्रश्य। 

अरुण सिंह,पन्ना। वनों की सुरक्षा और पर्यावरण को संतुलित बनाये रखने के लिए एक ओर जहां  पौधरोपण के लिए जिले भर में जगरूकता अभियान व  रैलियों का आयोजन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वन अमले लापरवाही और अनदेखी के चलते  जंगल की भूमि में  खुले आम जहाँ - तहाँ बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो रहा है। ताजा मामला पन्ना जिले के उत्तर वन मण्डल में देवेन्द्रनगर परिक्षेत्र के अन्तर्गत वन चौकी पहाड़ीखेरा के भवानीपुर बीट का  है।  नागौद-कालींजर स्टेट हाईवे सड़क मार्ग के किनारे उमरी, भवानीपुर, हनुमानपुर, टिगुंलीटोला आदि ग्रामों के सैकड़ों लोगों ने जंगल की करीब 20 हेक्टेयर जमीन पर झोपड़ी बनाकर लगभग डेढ़ से दो किमी तक अवैध कब्जा कर लिया है।
उल्लेखनीय है कि इस बेशकीमती वनाच्छादित भूमि पर अवैध कब्जा होने से जंगल व पर्यावरण को भारी नुकसान होने की सम्भावना जताई जा रही है। वन अमले की अनदेखी और लापरवाही के  कारण यह स्थित निर्मित हो रही है। वन भूमि पर झोपड़ी बनाकर कब्जा करने वालों ने बताया कि हम लोग इस जमीन पर वर्षों से झाड़ी काटकर काबिज चले आ रहे हैं। हमारे बसने व निवासरत रहने की जगह न होने के कारण हम लोगों के द्वारा अतिक्रमण किया गया है। इनका यह  भी कहना है कि डिप्टी व रेन्जर द्वारा हमसे पैसे लेकर हमें काबिज होने के लिए कहा गया था। वन भूमि पर अवैध कब्जों से जंगल जहां उजड़ रहे हैं वहीँ वन्य प्राणी मजबूर होकर आबादी क्षेत्र की ओर जाने को मजबूर हैं, जिससे वन्य प्राणियों और ग्रामीणों  के बीच संघर्ष की स्थिति निर्मित हो रही है। इसका सबसे दु:खद और चिंताजनक पहलू यह है कि जंगल कटने  के साथ - साथ  बहुमूल्य वनौषधियॉ भी अपना अस्त्तिव खोती जा रही हैं। वन भूमि पर अतिक्रमण की इस गंभीर हो चुकी समस्या की ओर वन मंडलाधिकारी उत्तर वन मंडल पन्ना नरेश सिंह यादव का ध्यान आकृष्ट कराये जाने पर आपने स्वीकार किया कि वन भूमि में अतिक्रमण हुआ है, जिसके लिये कहीं न कहीं वन अमले की अनदेखी और नकारापन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार वनकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी तथा वन भूमि से अतिक्रमण हटवाया जायेगा।

वन अमले से बेखौफ हैं अतिक्रमणकारी 


मौके पर मौजूद जंगल में झुग्गी बनाकर रहने वाले अतिक्रमणकारी । 

वनाच्छादित भूमि पर डेढ़ से दो किमी. तक अतिक्रमण कर झुग्गियां बनाकर रह रहे लोग इतने बेखौफ हैं कि उन्हें वन अमले से भी कोई भय नहीं लगता। हालात ये हैं कि वन अमला भी पुलिस फ़ोर्स के बिना अतिक्रमण स्थल पर  जाने से कतरा रहा है। इन अतिक्रमणकारियों से इलाके के लोग भी परेशान हैं. क्योंकि वहां से वे मवेशियों को भी नहीं निकलने दे रहे। ग्रामीणों के जाने पर वे मारपीट व झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। क्षेत्र के ही निवासी राजकुमार मिश्रा ने पन्ना आकर डीएफओ श्री यादव को बताया कि कुछ  वनकर्मी  अतिक्रमण करने वालों के बीच जाकर बैठते हैं जिससे उनके हौसले बढे  हुये हैं। ग्रामीण ने बताया कि ये लोग रातोरात अतिक्रमण कर  झुग्गी बना लेते हैं। इनमें से ज्यादातर लोग ईंट गारा का काम करते हैं, कारीगर हैं जिससे कुछ  दिनों में ईंट गारे का घर भी तैयार कर लेते हैं। वन भूमि में कुछ घर बन भी चुके हैं।

डीएफओ ने डिप्टी रेंजर व वीट गार्ड को दिया नोटिस  



नरेश सिंह यादव डीएफओ 
वन मंडलाधिकारी नरेश सिंह यादव  ने डिप्टी रेंजर दद्दी प्रसाद यादव व बीट गार्ड गोरेलाल द्विवेदी को फटकार लगाते हुये उन्हें कारण बताओ नोटिस थमाया है। डीएफओ का साफ कहना है कि वन अमले की मिली भगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण संभव नहीं है। उन्होंने डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड की इस बात को कि अतिक्रमण एक रात  में हुआ है को  सिरे से ख़ारिज करते हुये कहा कि इतना बड़ा अतिक्रमण एक ही रात में  कैसे संभव हो सकता है ? निश्चित ही  इसके लिए किसी न किसी रूप में वन अमला जिम्मेदार है, अपनी जवाबदारी से वे बच नहीं सकते ।  श्री यादव ने कहा कि डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने वन परिक्षेत्राधिकारी देवेंद्रनगर को निर्देश दिये कि जब तक वन भूमि से पूरी तरह अतिक्रमण नहीं हट जाता तब तक अतिक्रमण वाली वन भूमि पर कैम्प करें। डीएफओ ने मामले के संबंध में पुलिस की मदद लेने के लिये एसपी पन्ना मयंक अवस्थी को पत्र भी लिखा है। उन्होंने बताया कि पुलिस व राजस्व अमले के साथ मौके पर जाकर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जायेगी।

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