Tuesday, August 29, 2023

पर्यटन क्षेत्र में विकास के लिए सुरक्षा के साथ बेहतर कनेक्टिविटी जरूरी : कलेक्टर

  • महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थल परियोजना के संबंध में हुई कार्यशाला
  • वृहस्पति कुंड में ग्लास ब्रिज के निर्माण से यह बनेगा लोगों के आकर्षण का केन्द्र 


पन्ना। म.प्र. पर्यटन बोर्ड की सहयोगी आधार संस्था द्वारा आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थल परियोजना के संबंध में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में सुरक्षा सहित मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के संबंध में चर्चा की गई।

इस मौके पर कलेक्टर हरजिंदर सिंह ने कहा कि किसी भी पर्यटन स्थल के विकास, विस्तार और पहचान के लिए ब्रांडिग, समुचित व्यवस्थाएं और सुरक्षा के साथ बेहतर कनेक्टिविटी भी जरूरी है। पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों को सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वृहद वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के कारण जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं है। वृहस्पति कुंड में ग्लास ब्रिज के निर्माण से यह लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनेगा। साथ ही डायमण्ड पार्क की स्थापना से स्थानीय कारीगर के हुनर को बढ़ावा मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी महिलाओं की सहभागिता जरूरी है। इस कार्य में आधार संस्था की कारगर पहल सराहनीय है। इसके अलावा पुलिस विभाग के साथ सभी सहभागी विभागों के द्वारा समन्वय के साथ कार्य किया जाना भी आवश्यक है। जिले के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के दृष्टिगत सीसीटीवी कैमरे से निगरानी सहित अन्य सुरक्षात्मक उपायों की बात कही। साथ ही टीम वर्क के रूप में सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार कर बेहतर पर्यटन के लिए कार्य करने की अपेक्षा की।  

पर्यटन बोर्ड की सलाहकार रंजना मिश्रा ने पर्यटन विभाग द्वारा आधार संस्था के सहयोग से मड़ला, पन्ना और अजयगढ़ में क्रियान्वित कार्यों और जागरूकता गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं में महिलाओं के सुरक्षित पर्यटन की दृष्टि से किए गए जागरूकता कार्यों की जानकारी दी। गणतंत्र दिवस के मौके पर 500 बेटियों को प्रदान किए गए आत्मरक्षा प्रशिक्षण और गाइड व कुकिंग क्लास तथा माटीकला एवं टेराकोटा कला के प्रशिक्षण के बारे में भी अवगत कराया। परियोजना के उद्देश्य, सुरक्षित पर्यटन के साथ रोजगार गतिविधियां संचालित करने तथा स्टेकहोल्डर्स के साथ सुरक्षित पर्यटन की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी गई। कार्यशाला में उपस्थितजनों से जरूरी सुझाव भी प्राप्त किए गए। सेफ्टी ऑडिट के संबंध में भी चर्चा हुई। कार्यशाला में जिला पंचायत सीईओ संघ प्रिय, आधार संस्था की मेहरून्निशा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

00000

Saturday, August 26, 2023

भारतीय पक्षियों की स्थिति 2023

  • भारत के पक्षियों के संरक्षण पर एक रिपोर्ट, जो हजारों पक्षी प्रेमियों द्वारा योगदान किए गए लाखों अवलोकनों पर आधारित  है।



दुनिया भर में सामान्य तौर पर पक्षियों और जैव विविधता में गिरावट आ रही है। इस उद्देश्य के लिए, भारत ने होने वाले नुकसान की भरपाई हेतु एवं पारिस्थिकी तंत्र सुधारने तथा अधिक स्थिरता हासिल करने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किये है । इसके हिस्से के रूप में, समय-समय पर आँकलन की आवश्यकता है कि देश में जैव विविधता की क्या स्थिति है । "भारत के पक्षियों की स्थिति 2020 रिपोर्ट" भारत की अधिकांश पक्षी प्रजातियों के संरक्षण की स्थिति का आँकलन करने का पहला प्रयास था। इसने उच्च संरक्षण चिंता की 101 प्रजातियों की पहचान की, जिन पर केंद्रित प्रयासों की आवश्यकता है।

तीन साल बाद, रिपोर्ट का यह दूसरा संस्करण बहुत बड़े सूचना आधार पर एक अद्यतन (नवीन परिदृश्य ) प्रदान करता है, जिससे अधिक प्रजातियों का आँकलन किया जा सकता है। रिपोर्ट के नए अनुभाग पक्षियों की व्यवस्थित निगरानी के महत्व पर जोर देते हैं, और भारत में पक्षियों को जो खतरे हैं उन के बारे में जो ज्ञात है, उसकी समीक्षा करते हैं।

स्टेट ऑफ इंडियाज़ बर्ड्स 2023 रिपोर्ट बनाने के लिए 13 संगठन एक साथ आए हैं, जिनमें सरकारी संस्थान, विश्वविद्यालय और गैर सरकारी संगठन शामिल हैं। रिपोर्ट के लिए मुख्य सूचना आधार नागरिक विज्ञान डेटा है जो जीवन के सभी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमियों द्वारा तैयार और संकलित किया गया है। इस प्रकार यह रिपोर्ट सार्वजनिक और सामूहिक भागीदारी तथा सहयोग पर आधारित है - यदि हमें अपने बहुमूल्य पक्षियों और जैव विविधता का संरक्षण करना है तो यह रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रमुख अंश -

  • संरक्षण प्राथमिकता तय करने के लिए 942 भारतीय पक्षियों का आंकलन किया गया
  • 30000 पक्षी प्रेमियों ने 30 मिलियन (3 करोड़) अवलोकनों का योगदान दिया जिसका उपयोग विश्लेषण एवं पक्षियों के वितरण को समझने में सहायक हुआ।
  • 217 प्रजातियाँ पिछले आठ वर्षों में स्थिर रही या बढ़ रही हैं।
  • 178 प्रजातियों को उच्च संरक्षण प्राथमिकता के रूप में वर्गीकृत किया गया।
  • नीलकंठ (Indian Roller) सहित 14 प्रजातियों को IUCN रेड लिस्ट में पुनर्मूल्यांकन के लिए अनुशंसित किया गया।
  • पिछले तीन दशकों में एशियाई कोयल की संख्या में वृद्धि दर्ज की गयी है। 
  • भारतीय मोर की संख्या में वृद्धि दर्ज की गयी है। 
  • खुले पारिस्थितिकी तंत्र, नदियों और तटों जैसे प्रमुख प्राकृतिक-वास में रहने वाले पक्षियों की संख्या में कमी आई है।
  • शिकारी पक्षी (रैप्टर), प्रवासी तटीय पक्षी, और बत्तखों की संख्या में सबसे अधिक गिरावट आई है।
  • आठ प्रमुख खतरे भारत में पक्षियों के लिए संश्लेषित हैं।
  • भारत के विभिन्न स्थानों पर की गयी केस स्टडीज (अध्ययन), पक्षियों की सुनियोजित एवं नियमित निगरानी (मॉनिटरिंग) की महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट करते हैं।
  • नीति एवं कार्यकलाप में सामंजस्य एवं एकरूपता के द्वारा उच्च सरंक्षण प्राथमिकता प्राप्त प्रजातियों का चिन्हांकन, उपेक्षित प्राकृतिक-वास की समस्याओं का समाधान, एवं अनुसंधान तथा निगरानी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

डेंगू और चिकनगुनिया से स्वयं को और परिवार को रखें सुरक्षित

  • मच्छर से फैलने वाले वाहक जनित रोग डेंगू व चिकुनगुनिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी


पन्ना। वर्षाकाल में जगह-जगह पानी इकट्ठा हो जाने से उनमें मच्छरों की उत्पत्ति व वृद्धि होती है। ये मच्छर रोगी व्यक्ति को काटने पर संक्रमित हो जाते हैं व इन संक्रमित मच्छर के काटने से मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया रोग का प्रसार होता है। मलेरिया बुखार से ग्रसित रोगियों को ठंड लगकर बुखार आना, सिरदर्द, भूख न लगना सामान्य लक्षण हैं। 

डेंगू बुखार में 104 फेरेनहाइट से अधिक तेज बुखार, शरीर पर लाल चकत्ते, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, आंखे घुमाने में दर्द शुरुआत की दशा के सामान्य लक्षण है। गंभीर स्थिति में मुंह, नाक और आंतों से खून आना, पेट दर्द, उल्टी होना और आंखों में खून उतरना प्लेटलेट्स में अत्यधिक गिरावट होना जैसे लक्षण होते हैं। चिकुनगुनिया बुखार में उंगलियों और हाथ-पैर के जोड़ों में तेज दर्द, सिर दर्द, हल्का बुखार बना रहना, त्वचा में चकत्ते होना सामान्य लक्षण है। जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय द्वारा डेंगू व चिकुनगुनिया से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। मच्छर से फैलने वाले वाहक जनित रोग मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया जैसी बीमारियों से सुरक्षा के लिए मच्छरों से बचाव व नियंत्रण के लिए जनभागीदारी के साथ जनजागृति होना भी आवश्यक है। 

इसी तरह डेंगू व चिकुनगुनिया बुखार टाईगर/एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर दिन में सक्रिय रहता है। बीमारी फैलाने वाले मच्छर घरों में नमी वाले अंधेरे स्थान में विश्राम करते हैं एवं साफ व रूके पानी में पनपते हैं, जो कि घरों में व आसपास पानी से भरे पात्र जैसे-गमले, टंकी, टायर, मटके, कूलर, टूटा-फूटा कबाड़ में भरे पानी, नल, हैण्डपप व कुएं के आसपास पानी में मच्छर अपने अण्डे देते हैं व 7 से 8 दिन में अंडे से मच्छर बनने का जीवनचक्र पूर्ण हो जाता है। इसलिए पानी से भरे बर्तन, टंकियों आदि का पानी सप्ताह में बदलते रहना चाहिए और कुएं, हैण्डपंप, नल के आसपास पानी एकत्र न होने दें। उन्हें मिट्टी से भराव करायें या पानी की निकासी कराकर मच्छरों की उत्पत्ति स्थल को नष्ट करें व मच्छरों के लार्वा नहीं पनपने दें।

मच्छरों से बचाव के लिए सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। पूरे आस्तीन के कपड़े पहनें। मच्छर भगाने वाली क्रीम या क्वाइल का उपयोग करें। नीम की पत्ती का धुंआ करना भी कारगर उपाय है। डेंगू, चिकुनगुनिया की जांच जिला चिकित्सालय में निःशुल्क उपलब्ध है। प्रारंभिक अवस्था में बीमारी का पता चल जाने पर इन बीमारियों का इलाज आसानी से हो सकता है। इसलिए बीमारी के लक्षण दिखने पर शीघ्र स्वास्थ्य केन्द्र में निःशुल्क जांच करवाकर चिकित्सक के परामर्श से पूर्ण उपचार लेना चाहिए।

00000

Friday, August 25, 2023

जल प्रबंधन का मॉडल बना आदिवासी गांव पल्थरा, एक एक बूंद पानी का हो रहा उपयोग

  • घने जंगल के बीच स्थित छोटा सा आदिवासी गांव पल्थरा स्वच्छता और जल प्रबंधन का मॉडल विलेज बन चुका है। इस गांव के हर घर में किचन गार्डन है, जहां नहाने धोने वाले पानी का उपयोग होता है। अतिरिक्त पानी गांव में निर्मित हौदी (टैंक) में इकट्ठा होता रहता है, जिसे मवेशी पीते हैं।

पन्ना से 27 किलोमीटर दूर लगभग डेढ़ सौ की आबादी वाला पल्थरा गांव रहुनिया पंचायत में आता है। 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना (मध्यप्रदेश)। हमारे घर में नहानी बन गई है, अब हम वहीं नहाते और कपड़ा धोते हैं। यह पानी बहकर बर्बाद नहीं होता, पाइप से होकर बगिया में चला जाता है। घर की बगिया (गृह वाटिका) में भटा, मिर्च और टमाटर लगे हैं, जिससे सब्जी खरीदनी नहीं पड़ती। पल्थरा गांव की 60 वर्षीय सहजरानी गोंड बड़े उत्साह के साथ अपनी बगिया को दिखाते हुए बताती हैं कि अब बहुत अच्छा हो गया है। हमारे गांव में गंदगी और कीचड़ कहीं नहीं दिखेगा, पहले के मुकाबले गांव बहुत सुधर गया है।

जिला मुख्यालय पन्ना से 27 किलोमीटर दूर लगभग डेढ़ सौ की आबादी वाला पल्थरा गांव रहुनिया पंचायत में आता है। इस पंचायत में पल्थरा के अलावा पाठा, गुड़हा, पाली व गुजार गांव भी आते हैं। सभी गांव जंगल से लगे हैं तथा यहां रहने वाले अधिसंख्य लोग आदिवासी हैं। डेढ़ दो दशक पूर्व तक इन ग्रामों तक पहुंचने के लिए ना तो सड़क मार्ग था और ना ही आवागमन के साधन, जंगली रास्ते से होकर लोगों को पैदल या दो पहिया वाहन से जाना पड़ता था। लेकिन अब पक्की सड़क बन गई है तथा आदिवासियों के बच्चों में शिक्षा के प्रति भी रुझान बढ़ा है। पल्थरा गांव में 32 आदिवासी परिवार रहते हैं, इन परिवारों के शत प्रतिशत बच्चे स्कूल जाते हैं। गांव में प्राथमिक शाला के अलावा आंगनबाड़ी केंद्र भी है।



जनक सिंह गोंड 67 वर्ष ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत घरों में नल लगने के बाद गांव में स्वच्छता और पानी के प्रबंधन पर समाजसेवी संस्था समर्थन के सहयोग से चार माह पूर्व काम शुरू हुआ। इस काम में गांव के लोगों ने भी रुचि ली और सहयोग भी किया। इसका परिणाम यह हुआ कि अब नल से आने वाले पानी की बिल्कुल भी बर्बादी नहीं होती। गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था है ताकि इस पानी का उपयोग सब्जी भाजी की सिंचाई में हो सके। जनक सिंह बताते हैं कि पहले जब नल नहीं था तो हैंडपंप से पानी लेते थे। उस समय जल प्रबंधन की ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे गंदा पानी जहां तहां बहकर गंदगी और कीचड़ करता था। इससे जहां बीमारियां फैलती थीं वहीं वातावरण भी दूषित रहता था। लेकिन अब हमारा गांव बदल गया है, कहीं भी गंदगी और कीचड़ नहीं दिखेगा। गांव के लोगों की सोच में भी बदलाव आया है, अब हर कोई अपने बच्चों को पढाने में खासा रुचि ले रहे हैं। बड़े गर्व के साथ जनक सिंह ने बताया कि उनकी बेटी हीरा सिंह गोंड बी.ए. की पढ़ाई पन्ना से पूरी कर अब बी.एड. कर रही है। हीरा सिंह से प्रेरित होकर अब गांव की दूसरी बच्चियां भी ऊंची कक्षाओं की पढ़ाई पन्ना में करने लगी हैं।

ग्रे वॉटर क्या है और कैसे हो रहा इसका प्रबंधन

स्वच्छता व जल प्रबंधन के विशेषज्ञ तथा पल्थरा गांव में समर्थन संस्था के सलाहकार रहे राजकुमार मिश्रा ने बताया कि शौचालय को छोड़कर घरों में नहाने, कपड़ा धोने व अन्य उपयोग से जो पानी निकलता है उसे ही ग्रे वॉटर या गंदला पानी कहते हैं। पल्थरा गांव में इसी पानी को साफ कर उसका पुनः उपयोग सुनिश्चित किया गया है। श्री मिश्र बताते हैं कि भारत सरकार भी चाहती है कि ग्रे वॉटर का प्रबंध हो। लगभग 32 परिवारों वाले इस छोटे से गांव पल्थरा में ग्रे वॉटर प्रबंधन का काम समुदाय के सहयोग से बीते तीन-चार माह में पूरा किया गया है। इसके पूर्व गांव में 80 फ़ीसदी पानी बर्बाद होता था, जिससे कीचड़ और गंदगी होती थी। गांव के लोग जहां पर नहाते व कपड़े धोते थे, वहां और हैंडपंप के आसपास पानी फैलने से कीचड़ मचा रहता था। यही कीचड़ युक्त गंदा पानी मवेशी पीते थे, पूरा वातावरण दूषित और नारकीय था। इस बर्बाद होने वाले पानी का प्रबंध होने से अब एक-एक बूंद पानी का उपयोग सुनिश्चित हुआ है।


समर्थन टीम व पल्थरा गांव के लोग जिनके प्रयासों से ग्रे वाटर प्रबंधन का कार्य सफल हुआ। 

राजकुमार मिश्रा व समाजसेवी संस्था समर्थन के रीजनल कोऑर्डिनेटर ज्ञानेंद्र तिवारी ने मुझे पल्थरा गांव का भ्रमण कराकर जल प्रबंधन के कार्य का अवलोकन कराया। अब इस गांव के हर घर में नहानी (स्नान घर) बनी है। यहां नहाने और कपड़े धोने से निकलने वाला गंदा पानी सिल्ट चेंबर में जाकर साफ होता है और गृह वाटिका में पहुंचता है। अतिरिक्त पानी पाइप लाइन के माध्यम से हौदी (टैंक) में पहुंच जाता है। सभी घरों की नहानी तथा गांव के दो हैंडपंपों को हौदी से जोड़ा गया है, जहां अतिरिक्त पानी एकत्रित होता रहता है। अब गांव के मवेशी इसी हौदी में भरे पानी को पीते हैं। इस हौदी के भरने पर वहीं पास में एक और टैंक बना है, जिसमें पानी पहुंच जाता है। इस टैंक में ग्राम वासियों ने कमल के फूल लगा दिए हैं, जिससे कीचड़ व गंदगी के बजाय यहां की रौनक व सुंदरता और बढ़ गई है।

पल्थरा प्रदेश का इकलौता गांव जहां ग्रे वाटर का प्रबंधन हुआ

मध्य प्रदेश के कई जिलों में स्वच्छता और जल प्रबंधन का काम करने वाले राजकुमार मिश्र ने बताया कि पूरे प्रदेश में ऐसा कोई भी गांव नहीं है जहां ग्रे वाटर प्रबंधन हेतु निर्धारित पूरे ट्रीटमेंट हुए हों। राजकुमार मिश्र ने बताया कि ग्रे वाटर प्रबंधन के तीन सिद्धांत हैं, जिसे थ्री आर कहते हैं। इसमें रिड्यूस यानी पानी का कम से कम उपयोग, रियूज यानी कि गंदे पानी को साफ करके उसका पुनः उपयोग तथा तीसरा सिद्धांत बचा पानी जिसका उपयोग ना हो सके उसे रिचार्ज कर दिया जाए। पल्थरा गांव में रिचार्ज की नौबत नहीं आ रही, पूरा का पूरा पानी उपयोग हो रहा है।

                            


गुलाब सिंह गोंड 60 वर्ष ने बताया कि नहाने और कपड़े धोने में बर्बाद होने वाले पानी के प्रबंधन का यह कम चार माह में पूरा हुआ है। गर्मियों में पूरे 4 माह तक राजकुमार मिश्रा जी हमारे गांव में ही रहकर काम कराया है। गुलाब सिंह बताते हैं कि मैं अपने घर का एक कमरा जिसमें भूसा भरा रहता था, उसे खाली करके साफ किया, यहीं पर चार माह मिश्रा जी रहे। इस दौरान गांव के लोगों ने इनका पूरा ध्यान रखा और काम में भी भरपूर सहयोग किया। समर्थन के रीजनल कोऑर्डिनेटर ज्ञानेंद्र तिवारी बताते हैं कि पल्थरा गांव के लोगों को संस्था द्वारा ग्रे वॉटर प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि जल प्रबंधन का काम बिना किसी रूकावट के संचालित होता रहे।

ज्ञानेंद्र तिवारी ने बताया कि समर्थन संस्था के निर्देशक डॉक्टर योगेश कुमार ने भी गांव का विजिट किया तथा टीम को मार्गदर्शन दिया। पूरी प्रक्रिया में पल्थरा गांव के सभी पुरुषों, महिलाओं व बच्चों की भी भागीदारी रही है।  आपने बताया कि ग्रे वाटर प्रबंधन कार्य समर्थन ने WHH से किया है। इस कार्य में कुल व्यय 603823 रुपये हुआ, जिसमें ग्रामीणों (समुदाय) की भागीदारी 94,252 रुपये (श्रम व सामग्री) तथा 509571 समर्थन संस्था ने व्यय किया। इस तरह से समर्थन के ईमानदार प्रयासों व सामुदायिक सक्रिय भागीदारी से पन्ना जिले का यह छोटा सा आदिवासी गांव अब ग्रे वॉटर प्रबंधन के मामले में मॉडल विलेज बन गया है।

00000

Tuesday, August 22, 2023

पन्ना में डायमंड पार्क सहित हीरा कार्यालय भवन का होगा निर्माण

  • स्थापना व निर्माण के लिए राशि आवंटित
  • खनिज मंत्री के प्रयास से मिली बड़ी सौगात 
  • उम्मीद है वर्षों से रिक्त पड़े पद भी भरेंगें 




पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में डायमण्ड पार्क की स्थापना के साथ ही खनिज कार्यालय पन्ना के सामने स्थित शासकीय भूमि पर हीरा कार्यालय भवन निर्माण का कार्य होगा, इसके लिए राशि स्वीकृत हुई है। खनिज साधन एवं श्रम मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के विशेष प्रयास से जिले को छः विकास कार्यों की सौगात मिली है, जिसमें डायमण्ड पार्क की स्थापना व हीरा कार्यालय भवन का निर्माण कार्य शामिल है। खनिज साधन विभाग के डीएमएफ मद से सभी कार्य स्वीकृत किए गए हैं। 

मिली अधिकृत जानकारी के मुताबिक पन्ना नगर में पानी की सुलभ उपलब्धता के लिए कटरा डैम से लोकपाल सागर तक 6 किलोमीटर और निरपत सागर से पहाड़कोठी तक पाइपलाइन बिछाने का कार्य शीघ्र शुरू होगा। इसके लिए तीन करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसी तरह पन्ना विधानसभा अंतर्गत विभिन्न मजरा टोलों में 12 करोड़ 73 लाख की राशि से विद्युतीकरण का कार्य किया जाएगा। शासकीय उत्कृष्ट उ.मा.विद्यालय के खेल मैदान को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए बाउण्ड्रीवाल निर्माण के लिए 8 लाख रूपए राशि की स्वीकृति भी प्रदान की गई है। इसके अलावा अजयपाल पर्यटन स्थल के पहुंचमार्ग की सड़क चौड़ीकरण निर्माण कार्य के लिए 6 करोड़ रूपए तथा खनिज कार्यालय पन्ना के सामने स्थित शासकीय भूमि पर हीरा कार्यालय भवन निर्माण के लिए 1 करोड़ 41 लाख की स्वीकृति भी प्रदान की गई है। पन्ना जिले में डायमण्ड पार्क स्थापना के लिए 3 करोड़ 98 लाख रूपए राशि का आवंटन भी किया गया है। उम्मीद की जाती है कि नवीन हीरा कार्यालय भवन का निर्माण होने के साथ ही इस कार्यालय में वर्षों से रिक्त पड़े पदों को भी भरा जायेगा ताकि हीरा कार्यालय का कार्य ठीक ढंग से संपादित हो सके। 

उल्लेखनीय है कि पन्ना स्थित देश के इकलौते हीरा कार्यालय में हीरा अधिकारी सहित हीरा पारखी एक सीनियर व तीन जूनियर, इंस्पेक्टर के तीन पद, ऑफिस सुपरिटेंडेंट एक पद, लिपिक चार पद, हवलदार तीन पद, सिपाही तीस पद, मेठ तीन पद, क्षेत्रीय सहायक एक पद, ड्राइवर एक पद, चौकीदार दो पद तथा भृत्य के दो पद स्वीकृत हैं। लेकिन मौजूदा समय इस ऑफिस में हीरा पारखी सहित कुल पांच कर्मचारी बचे हैं जो किसी तरह एक कमरे में सिमट चुके हीरा कार्यालय को चला रहे हैं। मौजूदा समय नवीन कलेक्ट्रेट भवन में हीरा कार्यालय महज एक छोटे से कमरे में संचालित है, जिसमें बैठने तक को जगह नहीं है। हालात ये हैं कि हीरा कार्यालय का आधे से भी अधिक सामान महेन्द्र भवन स्थित पुराने ऑफिस में पड़ा हुआ है। 

00000

Monday, August 21, 2023

पन्ना के बृहस्पति कुण्ड में प्रदेश का पहला ग्लास ब्रिज बनेगा

  • रत्नगर्भा धरती में पर्यटन विकास की असीम संभावनायें मौजूद
  • प्रकृति के अनुपम सौगातों का विकास की दिशा में हो उपयोग



पन्ना। भव्य प्राचीन मंदिरों और हीरा की खदानों के लिये प्रसिद्ध मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में प्रकृति ने सृजन के विविध रूपों को जिस तरह से प्रकट किया है वह  मंत्रमुग्ध कर देने वाला है। पहली बार जो कोई भी यहाँ आता है, इस रत्नगर्भा धरती के अतुलनीय सौन्दर्य को निहारकर मंत्रमुग्ध हो जाता है। लेकिन प्रकृति के अनुपम सौगातों का पन्ना के विकास की दिशा में रचनात्मक उपयोग नहीं हो सका। पर्यटन विकास की असीम संभावनायें मौजूद होने के बावजूद अभी तक यह जिला पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र नहीं बन सका है। 

यहां प्राचीन भव्य मन्दिरों के अलावा ऐतिहासिक महत्व के स्थलों, खूबसूरत जल प्रपातों व प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण मनोरम स्थलों की भरमार है। इनका समुचित ढंग से प्रचार-प्रसार न होने के कारण देशी व विदेशी पर्यटक इस जिले की खूबियों से अनभिज्ञ हैं। यही वजह है कि पर्यटकों को आकर्षित  करने की खूबियों के बावजूद पन्ना पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं हो सका। देर से ही सही लेकिन अब पन्ना के नवागत कलेक्टर हरजिंदर सिंह ने विशेष रूचि प्रदर्शित करते हुए जिस तरह से आते ही सकारात्मक पहल शुरू की है, उससे मन्दिरों के शहर पन्ना को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किये जाने की उम्मीद जागी है।

उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड का नियाग्रा कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्थित बृहस्पति कुण्ड जलप्रपात की खूबसूरती निहारने के लिए ग्लास ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों द्वारा पन्ना के सर्किट हाउस में पर्यटन निगम की टीम के साथ बैठक कर बृहस्पति कुण्ड जलप्रपात और आसपास के क्षेत्र का पर्यटन बढ़ाने के उद्देश्य से बनाये प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। जिला पुरातत्व, पर्यटन और संस्कृति परिषद पन्ना के सदस्य के रूप में शामिल आबकारी उप निरीक्षक मुकेश पाण्डेय द्वारा भी बैठक में आवश्यक सुझाव दिए गए।

मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की तकनीकी टीम द्वारा बृहस्पति कुण्ड जलप्रपात पहुँचकर वास्तविक स्थिति और लोकेशन का अध्ययन और सर्वे किया गया। वास्तुविद सतीश कालान्तरे ने बताया कि बृहस्पति कुण्ड जलप्रपात के आसपास फिलहाल सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना हमेशा बनी रहती है। इसलिए बृहस्पति कुण्ड जलप्रपात के चारों तरफ सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई जाएगी। रेलिंग भी इस तरीके से लगाई जाएगी कि स्थान की खूबसूरती भी बनी रहे और सुरक्षा भी। बृहस्पति कुण्ड आश्रम की तरफ एक मजबूत ग्लास ब्रिज बनाया जाएगा, जिस पर चढ़कर पर्यटक जलप्रपात के ठीक सामने खड़े होकर जलप्रपात की खूबसूरती को निहार सकेंगे। यह देश का दूसरा और मध्यप्रदेश का पहला ग्लास ब्रिज होगा। 

कार्यपालन यंत्री श्री चौरसिया ने बताया कि जलप्रपात के आसपास लोगो को धूप-बारिश से बचने के लिए पैगोडा डिजाइन के विश्राम स्थल भी बनाये जाएंगे। दिनों-दिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए समुचित संख्या में प्रसाधन गृह और एक बड़ी पार्किंग की भी व्यवस्था होगी। जलप्रपात के पास खाली पड़े चट्टानी मैदान में खूबसूरत लैंडस्केप और उद्यान विकसित किया जाएगा। इस क्षेत्र के महत्व और जानकारी को दर्शाते हुए कई सूचना पट्ट लगाए जाएंगे। बृहस्पति कुण्ड क्षेत्र को विकसित करने का कार्य कई चरणों मे पूर्ण होगा। पहले चरण में जलप्रपात के चारों तरफ सुरक्षा रेलिंग, ग्लास ब्रिज, विश्राम स्थल, पार्किंग, प्रसाधन गृह, कैफेटेरिया आदि का निर्माण होगा। दूसरे चरण में जलप्रपात के नीचे की तरफ स्टॉप डैम बनाकर नौकायन और एडवेंचर गतिविधियों की व्यवस्था भी की जाएगी।

00000

Tuesday, August 15, 2023

पन्ना में स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने किया ध्वजारोहण

  • स्कूलों के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की दी आकर्षक प्रस्तुति
  • मुख्य अतिथि ने जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का किया वाचन 

मुख्य अतिथि बृजेन्द्र प्रताप सिंह प्रदेश की जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करते हुए। 

पन्ना। देश का 77वां स्वतंत्रता दिवस समारोह पन्ना जिले में हर्षोल्लास एवं गरिमामय ढंग से मनाया गया। जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन स्थानीय पुलिस परेड ग्राउण्ड में हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि खनिज साधन एवं श्रम मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने सुबह 9 बजे ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। इस दौरान राष्ट्रगान की धुन बजाई गई।

ध्वजारोहण के पश्चात कैबिनेट मंत्री श्री सिंह ने खुली जिप्सी में कलेक्टर हरजिंदर सिंह, पुलिस अधीक्षक र्साइं कृष्ण एस थोटा और रक्षित निरीक्षक के साथ परेड का निरीक्षण किया। मुख्य अतिथि ने प्रदेश की जनता के नाम संबोधित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संदेश का वाचन किया और आकाश में गुब्बारे छोड़े। समारोह में आकर्षक मार्च पास्ट का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और प्रजातंत्र रक्षकों का सम्मान भी हुआ। मुख्य अतिथि ने परेड कमाण्डरों से परिचय प्राप्त किया।

स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम में सशस्त्र और गैर शस्त्र परेड सहित विभिन्न स्कूलों के बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक पीटी प्रदर्शन आकर्षण का केन्द्र रहे। सीनियर और जूनियर वर्ग में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां हुईं। सीनियर वर्ग में सीएम राइज स्कूल को प्रथम, लिश्यू आनंद उ.मा. विद्यालय को द्वितीय और शासकीय आर.पी. उत्कृष्ट उ.मा. विद्यालय को तृतीय स्थान मिला। इसी तरह जूनियर वर्ग में डायमंड पब्लिक स्कूल को प्रथम, जवाहर नवोदय विद्यालय रमखिरिया को द्वितीय और महर्षि विद्या मंदिर उ.मा. विद्यालय को तृतीय स्थान मिला।


मुख्य अतिथि द्वारा बेहतर परेड प्रदर्शन के लिए भी पुरस्कार वितरित किए गए। सशस्त्र बल परेड वर्ग में जिला पुलिस बल को प्रथम, विशेष सशस्त्र बल की 10वीं वाहिनी सागर को द्वितीय और होमगार्ड की टुकड़ी को तृतीय स्थान मिला। इसी तरह कनिष्ठ वर्ग में शासकीय छत्रसाल महाविद्यालय की एनसीसी टुकड़ी को प्रथम, एनएसएस टुकड़ी को द्वितीय और स्काउट-गाइड टुकड़ी को संयुक्त रूप से तीसरा स्थान मिला। इसके अतिरिक्त विभिन्न शासकीय दायित्वों के निर्वहन में बेहतर कार्य के लिए भी अधिकारी-कर्मचारियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में नपाध्यक्ष मीना पाण्डेय, नपा उपाध्यक्ष आशा गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष मीना राजे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष संतोष सिंह यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, शासकीय सेवक, गणमान्य नागरिक और पत्रकारगण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनय श्रीवास्तव एवं प्रमोद अवस्थी द्वारा किया गया।

कलेक्टर ने संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन में किया ध्वजारोहण

स्वतंत्रता दिवस पर कलेक्टर हरजिंदर सिंह ने संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन में सुबह 8 बजे ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया गया। जिला कलेक्टर ने अधिकारी-कर्मचारियों को आजादी के पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर अपर कलेक्टर नीलाम्बर मिश्र, एसडीएम अशोक अवस्थी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। सभी शासकीय कार्यालयों में कार्यालय प्रमुखों द्वारा सुबह 7.30 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।

खनिज मंत्री ने दिव्यांग बच्चों के साथ किया विशेष भोज

खनिज साधन एवं श्रम मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह स्थानीय पुलिस परेड ग्राउण्ड में ध्वजारोहण के पश्चात बायपास रोड स्थित सीडब्ल्यूएसएन बालक छात्रावास पहुंचे और दिव्यांग बच्चों के साथ विशेष भोज किया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा दिव्यांग छात्रों से भेंट कर उनका सम्मान किया गया। छात्रावास में अतिथियों द्वारा आंवला और अशोक के पौधों का रोपण भी किया गया। 

00000

Monday, August 14, 2023

पन्ना जिले के इचोलिया गांव में घर के भीतर घुसा तेंदुआ

  • वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, किया जायेगा रेस्क्यू 
  • तेंदुओं और इंसानों के बीच बढ़ता टकराव चिंता का विषय 



।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में उत्तर वन मंडल अंतर्गत वन परिक्षेत्र धरमपुर के ग्राम इचोलिया में रात के समय एक तेंदुआ घर के भीतर घुस गया, जिससे गांव में हड़कंप और दहशत का माहौल है। सोमवार की सुबह खबर मिलते ही वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुँच गए हैं तथा तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए सतना से रेस्क्यू टीम को बुलाया गया है। जिस घर में तेंदुआ घुसा है उसके आसपास लोगों की भारी भीड़ जमा है।  

वन परिक्षेत्राधिकारी धरमपुर नरेश ककोड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि इचोलिया गांव उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है। आज सुबह तक़रीबन 4 बजे जैसे ही हमें जानकारी मिली, हम मौके पर पहुँच गए हैं, रेस्क्यू टीम का इंतजार किया जा रहा है। आपने बताया कि जिस कच्चे घर में तेंदुआ घुसा हुआ है वहां बकरियां एक कमरे में बंधी हुई थीं, इनकी गंध से तेंदुआ यहाँ पर आया होगा। रेस्क्यू टीम के आने पर तेंदुए को ट्रंक्यूलाइज कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जायेगा। आपने यह भी बताया कि यह तेंदुआ विगत कई दिनों से इस इलाके में घूम रहा है। एक सप्ताह पूर्व इसने तेंदुए ने एक बकरी भी खाई थी जिसका मुआवजा दिया जा रहा है। ग्रामवासियों के मुताबिक यह तेंदुआ 15-20 दिनों से यहीं आसपास घूम रहा है, कई बार मवेशियों के ऊपर हमला भी कर चुका है जिससे गांव के लोग दहशत में हैं। 

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ सालों में मध्यप्रदेश में जहाँ बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है, वहीं तेंदुओं की संख्या भी बढ़ी है। जबकि वन क्षेत्र तेजी से घट रहा है, यही वजह है कि वन्य प्राणी आबादी क्षेत्र के निकट पहुंचने लगे हैं। मालूम हो कि मध्य प्रदेश में देश के 26 फीसदी से भी अधिक तेंदुए रहते हैं और यहां इनकी आबादी में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसी के साथ प्रदेश में तेंदुए और इंसानों के बीच टकराव भी बढ़ रहा है जो चिंता की बात है। मध्यप्रदेश तेंदुए की आबादी के मामले में पहले स्थान पर है। तेंदुए जंगल के साथ-साथ इंसानी आबादी के करीब भी रहने में सहज हैं। इसलिए इंसान और तेंदुओं के बीच टकराव की आशंका अधिक है। 

जानकारों का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र व उत्तर वन मंडल के जंगल से लगे डेढ़ सैकड़ा से भी अधिक गांव हैं, जहां हिंसक वन्य प्राणियों का खतरा बना रहता है। मौजूदा समय पन्ना टाइगर रिज़र्व में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसी स्थिति में यहाँ के बाघ अपने लिए इलाके की तलाश में बाहर निकल रहे है। बाघों के साथ तेंदुओं की तादाद भी बढ़ी है लेकिन इनके रहने के लिए जंगल सुरक्षित नहीं बचा। इन हालातों को देखते हुए यह जरुरी हो गया है कि इनके रहने के स्थान को सुरक्षित रखा जाय। पन्ना सहित मध्य प्रदेश में जंगलों का जिस तरह तेजी से ह्रास हो रहा है, उससे इंसानों और जंगली जीवों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है। 

 घर में घुसे तेंदुए को सतना की रेस्क्यू टीम ने ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ा

पन्ना जिले के इचोलिया गांव में बीती रात से जो भय और दहशत का माहौल था उससे गांव के लोगों को निजात मिल गई है। सतना से पहुंची रेस्क्यू टीम ने घर में घुसे तेंदुए को ट्रैंक्युलाइज करने के बाद पिंजड़े में कैद कर लिया, जिसका स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ दिया जायेगा।  

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल अंतर्गत वन परिक्षेत्र धरमपुर के ग्राम इचोलिया में महेंद्र सिंह के कच्चे मकान में बीती रात एक तेंदुआ घुस गया था। ग्रामीणों को जब इस बात की भनक लगी तो उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया, जिससे डरकर तेंदुआ घर के अंदर लकड़ियों के ढेर में छुप गया। वन परिक्षेत्राधिकारी धरमपुर ने बताया कि एक हफ्ते पूर्व इस तेंदुए ने बकरी का शिकार किया था। बीती रात तेंदुआ बकरियों की गंध से ही इस घर में घुसा लेकिन बकरियों वाले कमरे का दरवाजा बंद था। ग्रामीणों के शोर मचने पर यह लकड़ियों के ढेर में छिपकर बैठ गया।  सतना से आई रेस्क्यू टीम ने उत्तर वन मंडल पन्ना के सहयोग से सोमवार 14 अगस्त दोपहर करीब 1 बजे रेस्क्यू करके पकड़ा।  तेंदुए को देखने के लिए  इचोलिया गांव में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। तेंदुए का सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू हो जाने के बाद ग्रामवासियों ने राहत की साँस ली है। बताया जा रहा है कि यह तेंदुआ पिछले 15 दिनों से गांव के आसपास घूम रहा है, जिसके चलते क्षेत्र के लोग दहशत में थे।



00000