Tuesday, March 17, 2026

पन्ना जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित, जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किया आदेश

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार ने जनहित में पेयजल एवं अन्य निस्तार समस्याओं के दृष्टिगत तथा आम जनता को पेयजल प्रदाय बनाए रखने व जनता की आवश्यकता की पूर्ति के उद्देश्य से इस सम्बन्ध में विधिवत आदेश जारी किया गया है। म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग कर जारी आदेश में जिले के सभी विकासखंड व नगरीय क्षेत्रों को 16 मार्च से 20 जुलाई 2026 तक की अवधि के लिए जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि सिंचाई इत्यादि कार्यों में भूगर्भीय जल का अत्यधिक दोहन होने के कारण पेयजल स्रोतों के जल स्तर में कमी आई है। नलकूपों एवं अन्य जल स्रोत के जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। इस कारण जिले में पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना है। इस संबंध में कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खंड पन्ना द्वारा सार्वजनिक पेयजल स्रोतों की क्षमता प्रभावित न होने के मद्देनजर निजी नलकूप खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई थी। 

आदेश लागू होने के उपरांत अब कोई भी व्यक्ति बगैर अनुमति के शासकीय भूमि पर स्थित जल स्रोतों में पेयजल तथा घरेलू प्रयोजनों को छोड़कर अन्य किसी भी प्रयोजन के लिए नहरों में प्रवाहित जल के अलावा अन्य स्रोतों का जल दोहन किन्हीं भी साधनों द्वारा जल का उपयोग नहीं करेगा। जिले के सभी विकासखंड और नगरीय क्षेत्रों के समस्त नदी, नालों, स्टॉप डैम, सार्वजनिक कुओं व अन्य जल स्रोतों का उपयोग घरेलू प्रयोजनों के लिए भी तत्काल प्रभाव से सुरक्षित किया गया है। जल अभावग्रस्त क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति स्वयं अथवा निजी ठेकेदार एसडीएम की अनुज्ञा प्राप्त किए बगैर किसी भी प्रयोजन के लिए नवीन नलकूप का निर्माण नहीं करेगा। शासकीय नलकूप खनन पर यह आदेश लागू नहीं होगा।

निजी भूमि पर नलकूप खनन की लेना होगी अनुमति

स्वयं की निजी भूमि पर नलकूप खनन कार्य के लिए संबंधित व्यक्तियों को निर्धारित प्रारूप में नियत शुल्क के साथ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन करना होगा। इसके लिए सभी एसडीएम को उनके क्षेत्राधिकार अंतर्गत सक्षम अधिकारी प्राधिकृत किया गया है। संबंधित एसडीएम द्वारा अनुमति देने के पूर्व आवश्यक जांच एवं परीक्षण की कार्रवाई पूर्ण की जाएगी तथा अनुमति दिए जाने के संबंध में जनपद पंचायत सीईओ, तहसीलदार एवं नगरीय निकायों के सीएमओ से अभिमत प्राप्त किया जाएगा। 

सार्वजनिक पेयजल स्रोत सूखने एवं वैकल्पिक रूप से कोई दूसरा पेयजल स्रोत उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित एसडीएम पेयजल परीक्षण संशोधित अधिनियम 2002 की धारा 4ए तथा 4बी के प्रावधानों के अधीन निश्चित अवधि के लिए निजी पेयजल स्रोत का अधिग्रहण कर सकेंगे। आदेश के उल्लंघन पर संबंधित के विरूद्ध म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 संशोधन 2022 की धारा 9 व भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकेगी। समस्त अनुविभागीय मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, थाना प्रभारी, पीएचई के फील्ड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी, नगरीय निकायों के सीएमओ, जनपद पंचायत सीईओ तथा ग्राम पंचायतों के सचिव को आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के लिए निर्देशित किया गया है।

पशु चारा एवं भूसा के निर्यात व परिवहन पर लगा प्रतिबंध

जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार द्वारा पन्ना जिले में पशुधन के लिए चारा-भूसा की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से जिले के बाहर भूसा चारा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिला मजिस्ट्रेट ने उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश चारा निर्यात नियंत्रण आदेश 2000 में निहित प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से आगामी 31 जुलाई तक भूसा चारा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। अब कोई भी कृषक, व्यापारी, निर्यातक व्यक्ति किसी भी प्रकार से प्रतिबंधित पशुचारा व भूसा का परिवहन किसी वाहन, मोटर या किसी भी यान द्वारा पन्ना जिले के बाहर अन्य जिले में संबंधित क्षेत्र के उपखंड मजिस्ट्रेट की अनुज्ञा के बगैर निर्यात नहीं करेगा। आदेश के क्रियान्वयन व अनुपालन के लिए संबंधित तहसीलदार, नायब तहसीलदार व थाना प्रभारी को दायित्व सौंपा गया है। पशु आहार में आने वाले सभी प्रकार के चारा भूसा को जिले के बाहर सीमावर्ती जिलों में परिवहन एवं निर्यात संबंधी प्रतिबंध के पालन के दौरान संबंधित अधिकारी द्वारा नियत बिंदुओं पर जांच कर उल्लंघन संबंधी प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

जिले में पशु चारा और भूसा की कमी की आशंका के दृष्टिगत पशुओं को पर्याप्त मात्रा में चारा भूसा की आपूर्ति बनाए रखने के संबंध में सीमावर्ती जिलों में पशुचारा व भूसा निर्यात संबंधी प्रतिबंध के तहत नियुक्त अधिकारी पशु चारे के निर्यात के लिए उपयोग में लाए गए साधन को रोककर तलाशी ले सकेंगे या रोकने व तलाशी के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत भी कर सकते हैं। इसके अलावा किसी स्थान में प्रवेश कर तलाशी लेने एवं किसी व्यक्ति को प्रवेश करने व तलाशी लेने के लिए भी प्राधिकृत किया जा सकेगा। जांच के दौरान वस्तुओं को ले जाने के लिए उपयोग में लाए जा रहे पशुओं, यानों, जलयानों, नावों अथवा वाहनों के साथ अधिग्रहित कर सकेगा।

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डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध है गैस बुकिंग की सुविधा

 


पन्ना। अपर मुख्य सचिव खाद्य विभाग द्वारा सिलेंडर की वितरण व्यवस्था सुचारू बनाए रखने तथा घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। ऑयल कंपनियो ने मोबाइल एप, एसएमएस, व्हाट्सएप तथा आईवीआरएस कॉल द्वारा गैस बुकिंग की सुविधा प्रदान की है। उपभोक्ता बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यम का प्रयोग कर अनावश्यक रूप से एजेंसी पर जाने से बच सकते हैं।

सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि सूचना तंत्र सुदृढ़ कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करें। यदि कहीं वितरण व्यवस्था में अनियमितता या विलंब की शिकायत मिलती है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराई जाए। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी तथा घरेलू एलपीजी गैस की उपलब्धता के संबंध में ऑयल कंपनियों से समन्वय के लिए राज्य स्तर पर 6 सदस्यीय समिति भी गठित की गई है, जो कामर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी करेगी। औद्योगिक एवं वाणिज्यिक संस्थाओ से आग्रह किया गया है कि वे उपलब्धता अनुसार पीएनजी के कनेक्शन लें। पीएनजी की आपूर्ति लगातार बनी हुई है और आगे भी जारी रहेगी। प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, घरेलू पीएनजी तथा सीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है। साथ ही गैस सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक है। प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट एवं वितरकों के गोदाम में पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि विगत अंतिम रिफिल के 25 दिन बाद पुनः बुकिंग कराएं। प्रशासन द्वारा वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह भी दी गई है। जिन कार्यों में गैस ज्यादा खर्च होती है, उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। प्रदेश में घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति जारी है, उपभोक्ता अनावश्यक रूप से अफवाहों से भ्रमित न हों। देश की रिफायनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही हैं तथा पश्चिम एशिया के अतिरिक्त अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सिलेंडर बुकिंग संबंधित शिकायत या सुझाव हेतु भारत गैस हेल्पलाइन नंबर 1800-22-4344, इंडेन गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 तथा एचपी गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क किया जा सकता है।

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Monday, March 16, 2026

एक छोटा सा प्रवासी पक्षी जिसने तोड़ दिया विश्व रिकॉर्ड, 11 दिनों में तय किया 13,560 किमी. का सफर

 


कुदरत का करिश्मा देखिए, एक छोटे से प्रवासी पक्षी ने विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है....! उसने विशाल पैसिफिक महासागर को बिना रुके पार कर 8,425 मील (13,560 किमी) की लंबी उड़ान भरी। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, इस पक्षी ने अपनी यात्रा 12 अक्टूबर, 2022 को अमेरिका के अलास्का से शुरू की थी और यह 11वें दिन ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया में जाकर रुका। बार-टेड "गॉडविट" नाम का यह पक्षी पैसिफिक महासागर के पार अपने प्रवास के दौरान खाने, पीने या सोने के लिए नहीं रुकता। 

आखिर यह कैसे कर लेता है यह सब ? उड़ान से पहले यह अपने शरीर में लगभग शल्य चिकित्सा जैसा बदलाव करता है। यह अपने पाचन अंगों को लगभग शून्य कर देता है। पेट, आंतों और लीवर को कच्चे ईंधन में बदल देता है। पक्षी मूल रूप से अपने पेट को फैट रिजर्व बनाने के लिए खाता है, जो इसके पंखों को लगभग दो सप्ताह तक शक्ति प्रदान करेगा। मस्तिष्क भी पूरी तरह से सोता नहीं है। इसका आधा हिस्सा सक्रिय रहता है, जबकि दूसरा आधा आराम करता है। 

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, इस पक्षी ने अपनी यात्रा 12 अक्टूबर, 2022 को अमेरिका के अलास्का से शुरू की थी और यह 11वें दिन ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया में जाकर रुका। इस दौरान इस पक्षी ने 13,560 किलोमीटर का सफर तय किया। इस शानदार पक्षी ने बिना रुके लगातार 11 दिन और एक घंटे तक अपनी उड़ान जारी रखी और अपना सफर पूरा किया। अपनी उड़ान के दौरान गॉडविट की पीठ के निचले हिस्से में वैज्ञानिकों ने 5G सैटेलाइट टैग लगा दिया था, जिसकी मदद से वह उसे ट्रैक कर रहे थे।


आपको बता दें गॉडविट पक्षी का आकार लड़ाकू विमान की तरह होता है और इसके लंबे-नुकीले पंख इसे हवा में इसे तेज उड़ने की क्षमता देते हैं। इस पक्षी का वजन 230 से 450 ग्राम के बीच होता है। इसके पंखों की चौड़ाई लगभग 70 से 80 सेंटीमीटर होती है। वहीं एक वयस्क गॉडविट की लंबाई 37 से 39 सेंटीमीटर के बीच हो सकती है। इस पक्षी के बारे में बताया गया है कि ये दिन और रात की उड़ान के दौरान अपने शरीर के वजन को आधा या उससे भी कम कर लेते हैं। इसके साथ ही वह अपने अंगों को सिकोड़ लेते हैं जिसकी वजह से हवा में उड़ने पर इस पक्षी का शरीर काफी छोटा हो जाता है। इसी वजह से यह पक्षी बगैर रुके लंबे समय तक उड़ पाते हैं। 

उड़ान के दौरान गॉडविट एक ही समय में बेहोश और नेविगेटिंग (Navigating) कर रहा होता है, इसकी नेविगेशनल प्रेसिजन वास्तव में आश्चर्यजनक है। पक्षी अलास्का से निकलता है...., और न्यूज़ीलैंड में उतरता है, जिसकी सटीकता शुरुआती जीपीएस सिस्टम को भी शर्मिंदा कर देगी। यह पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड, वायुमंडलीय दबाव ग्रेडिएंट, तारों की स्थिति और संभावित रूप से क्वांटम-लेवल कंपास मेकैनिज्म को पढ़ता है, जो इसे मैग्नेटिक फील्ड लाइनों को अपने दृश्य क्षेत्र पर ओवरले देखने देता है। हम मशीनों को इंजीनियर करने में अरबों खर्च करते हैं, जो इस पक्षी को इंस्टिंक्ट, फैट रिजर्व और आधे सोए हुए मस्तिष्क पर करते हैं। ज्ञात रहे, एक वाणिज्यिक विमान द्वारा सबसे लंबी रिकॉर्ड की गई नॉन-स्टॉप उड़ान लगभग 20 घंटे है। इस पक्षी ने 11 दिन लगाए, बिना रनवे के.....!

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Sunday, March 8, 2026

महिला दिवस आज : भविष्य की सभ्यता स्त्री के आसपास बनेगी


बुनियादी भूल जो सारी शिक्षा और सारी सभ्यता को खाए जा रही है, वह यह है कि अब तक के जीवन का सारा निर्माण पुरुष के आसपास हुआ है, स्त्री के आसपास नहीं। अब तक की सारी सभ्यता, सारी संस्कृति, सारी शिक्षा पुरुष ने निर्मित की है, पुरुष के ढंग से निर्मित हुई है, स्त्री के ढंग से नहीं। पुरुष के जो गुण हैं, सभ्यता ने उनको ही सब कुछ मान रखा है। स्त्री की जो संभावना है, स्त्री के जो मन के भीतर छिपे हुए बीज हैं, वे जैसे विकसित हो सकते हैं, उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पुरुष बिलकुल अधूरा है, स्त्री के बिना तो बहुत अधूरा है। और पुरुष अगर अकेला ही सभ्यता को निर्मित करेगा तो वह सभ्यता भी अधूरी होगी; न केवल अधूरी होगी, बल्कि खतरनाक भी होगी।

वह खतरनाक इसलिए होगी कि पुरुष के मन की जो तीव्र आकांक्षा है वह एंबीशन है, महत्वाकांक्षा है। पुरुष के मन में प्रेम बहुत गहराई पर नहीं है, महत्वाकांक्षा! और जहां महत्वाकांक्षा है वहां ईर्ष्या होगी, जहां महत्वाकांक्षा है वहां हिंसा होगी, जहां महत्वाकांक्षा है वहां घृणा होगी, जहां महत्वाकांक्षा है वहां युद्ध होगा। पुरुष का सारा चित्त एंबीशन से भरा हुआ है। स्त्री के चित्त में एंबीशन नहीं है, महत्वाकांक्षा नहीं है, बल्कि प्रेम है। और हमारी पूरी सभ्यता प्रेम से बिलकुल शून्य है, प्रेम से बिलकुल रिक्त है, प्रेम की उसमें कोई जगह नहीं है। पुरुष ने अपने ही ढंग से पूरी बात निर्मित कर ली है। उसकी सारी शिक्षा भी उसने अपने ढंग से निर्मित कर ली है। उसने जीवन की जो संरचना की है वह अपने ही ढंग से की है। उसमें युद्ध प्रमुख है, उसमें संघर्ष प्रमुख है, उसमें तलवार प्रमुख है।

यहां तक कि अगर कोई स्त्री भी तलवार लेकर खड़ी हो जाती है तो पुरुष उसे बहुत आदर देता है। जोन ऑफ आर्क को, झांसी की रानी लक्ष्मी को पुरुष बहुत आदर देता है। इसलिए नहीं कि वे बहुत कीमती स्त्रियां थीं, बल्कि इसलिए कि वे पुरुष जैसी स्त्रियां थीं। वह उनकी मूर्तियां खड़ी करता है चौरस्तों पर। वह गीत गाता है: खूब लड़ी मर्दानी, झांसी वाली रानी थी। वह कहता है कि वह मर्दानी थी, इसलिए आदर देता है। लेकिन अगर कोई पुरुष जनाना हो तो अनादर करता है, आदर नहीं देता। स्त्री मर्दानी हो तो आदर देता है। स्त्री तलवार लेकर लड़ती हो, सैनिक बनती हो, तो पुरुष के मन में सम्मान है। पुरुष के मन में हिंसा के और महत्वाकांक्षा के अतिरिक्त किसी बात का कोई सम्मान नहीं है।

यह जो पुरुष अधूरा है, सारी शिक्षा भी उसी पुरुष के लिए निर्मित हुई है। हजारों वर्षों तक स्त्री को कोई शिक्षा नहीं दी गई। एक बड़ी भूल थी कि स्त्री अशिक्षित रह जाए। फिर कुछ वर्षों से स्त्री को शिक्षा दी जा रही है। और अब दूसरी भूल की जा रही है कि स्त्री को पुरुषों जैसी शिक्षा दी जा रही है। यह अशिक्षित स्त्री से भी खतरनाक स्त्री को पैदा करेगी। अशिक्षित स्त्री कम से कम स्त्री थी। शिक्षित स्त्री पुरुष के ज्यादा करीब आ जाती है, स्त्री कम रह जाती है। क्योंकि जिस शिक्षा से गुजरती है उसका मौलिक निर्माण पुरुष के लिए हुआ है। एक ऐसी स्त्री पैदा हो रही है सारी दुनिया में, जो अगर सौ दो सौ वर्ष इसी तरह की शिक्षा चलती रही तो अपने समस्त स्त्री-धर्म को खो देगी। उसके जीवन में जो भी महत्वपूर्ण है, उसकी प्रतिभा में जो भी कीमती है, उसके स्वभाव में जो भी सत्य है, वह सब विनष्ट हो जाएगा।

स्त्री शिक्षित होनी चाहिए। लेकिन उस तरह की शिक्षा में नहीं जो पुरुष की है। स्त्री के लिए ठीक स्त्री जैसी शिक्षा विकसित होनी जरूरी है। यह हमारे ध्यान में नहीं है और अभी मनुष्य-जाति के किन्हीं विचारकों के ध्यान में बहुत स्पष्ट नहीं है कि नारी की शिक्षा पुरुष से बिलकुल ही भिन्न शिक्षा होगी।

नारी भिन्न है।

मैं आपको यह कहना चाहता हूं, स्त्री और पुरुष समान आदर के पात्र हैं, लेकिन समान बिलकुल भी नहीं हैं, बिलकुल असमान हैं। स्त्री स्त्री है, पुरुष पुरुष है। और उन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है। इस फर्क को अगर ध्यान में न रखा जाए तो जो भी शिक्षा होगी वह स्त्री के लिए बहुत आत्मघाती होने वाली है। वह स्त्री को नष्ट करने वाली होगी। स्त्री और पुरुष मौलिक रूप से भिन्न हैं। और उनकी यह जो मौलिक भिन्नता है, यह जो पोलेरिटी है, जैसे उत्तर और दक्षिण ध्रुव भिन्न हैं, जैसे बिजली के निगेटिव और पाजिटिव पोल भिन्न हैं, यह जो इतनी पोलेरिटी है, इतनी भिन्नता है, इसी की वजह से उनके बीच इतना आकर्षण है। इसी के कारण वे एक-दूसरे के सहयोगी और साथी और मित्र बन पाते हैं। यह असमानता जितनी कम होगी, यह भिन्नता जितनी कम होगी, यह दूरी जितनी कम होगी, उतना ही खतरनाक है मनुष्य के लिए। 

मेरी दृष्टि में, स्त्रियों को पुरुषों जैसा बनाने वाली शिक्षा, सारी दुनिया में हर, एक-एक बच्चे तक पहुंचाई जा रही है। पुरुष तो पहले से ही विक्षिप्त सभ्यता को जन्म दिया है। एक आशा है कि स्त्री एक नई सभ्यता की उन्नायक बने। लेकिन वह आशा भी समाप्त हो जाएगी अगर स्त्री भी पुरुष की भांति दीक्षित हो जाती है।

मेरी दृष्टि में, स्त्री को गणित की नहीं, संगीत की और काव्य की शिक्षा ही उपयोगी है। उसे इंजीनियर बनाने की कोई भी जरूरत नहीं। इंजीनियर वैसे ही जरूरत से ज्यादा हैं। पुरुष पर्याप्त हैं इंजीनियर होने को। स्त्री को कुछ और होने की जरूरत है। क्योंकि अकेले इंजीनियरों से और अकेले गणितज्ञों से जीवन समृद्ध नहीं होता। उनकी जरूरत है, उनकी उपयोगिता है। लेकिन वे ही जीवन के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जीवन की खुशी किन्हीं और बातों पर निर्भर करती है। बड़े से बड़ा इंजीनियर और बड़े से बड़ा गणितज्ञ भी जीवन में उतनी खुशी नहीं जोड़ पाता जितना गांव में एक बांसुरी बजाने वाला जोड़ देता है।

मनुष्य-जाति की खुशी बढ़ाने वाले लोग, मनुष्य के जीवन में आनंद के फूल खिलाने वाले लोग वे नहीं हैं जो प्रयोगशालाओं में जीवन भर प्रयोग ही करते रहते हैं। उनसे भी ज्यादा वे लोग हैं जो जीवन के गीत गाते हैं और जीवन के काव्य को अवतरित करते हैं।

मनुष्य जीता किसलिए है? काम के लिए? फैक्ट्री चलाने के लिए? रास्ते बनाने के लिए? मनुष्य रास्ते बनाता है, फैक्ट्री भी चलाता है, दुकान भी चलाता है, इसलिए कि इन सब से एक व्यवस्था बन सके और उस व्यवस्था में वह आनंद, शांति और प्रेम को पा सके। वह जीता हमेशा प्रेम और आनंद के लिए है। लेकिन कई बार ऐसा हो जाता है कि साधनों की चेष्टा में हम इतने संलग्न हो जाते हैं कि साध्य ही भूल जाता है।

मेरी दृष्टि में, पुरुष की सारी शिक्षा साधन की शिक्षा है। स्त्री की सारी शिक्षा साध्य की शिक्षा होनी चाहिए, साधन की नहीं। ताकि वह पुरुष के अधूरेपन को पूरा कर सके। वह पुरुष के लिए परिपूरक हो सके। वह पुरुष के जीवन में जो अधूरापन है, जो कमी है, उसे भर सके। पुरुष फैक्ट्रियां खड़ी कर लेगा, बगीचे कौन लगाएगा? पुरुष बड़े मकान खड़े कर लेगा, लेकिन उन मकानों में गीत कौन गुंजाएगा? पुरुष एक दुनिया बना लेगा जो मशीनों की होगी, लेकिन उन मशीनों के बीच फूलों की जगह कौन बनाएगा? 

स्त्री के व्यक्तित्व के प्रेम को कितना गहरा कर सके, ऐसी शिक्षा चाहिए। ऐसी शिक्षा चाहिए जो उसके जीवन को और भी सृजनात्मक प्रेम की तरफ ले जा सके।

:- ओशो, नारी और क्रांति

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Monday, February 23, 2026

पुलिस अधीक्षक पन्ना के निर्देशन पर साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जांच हेतु कार्यशाला आयोजित

  • पुलिस कॉन्फ्रेंस हॉल पन्ना मे आयोजित उक्त प्रशिक्षण मे थाना प्रभारियों सहित 50 से अधिक विवेचना अधिकारी हुये शामिल
  • एन.सी.आर.पी., e-FIR, जे.एम.आई.एस, सी.ई.आई.आर., पोर्टल एवं साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की गई विस्तृत चर्चा


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता नायडू के निर्देशन में आज पुलिस कॉन्फ्रेंस हॉल पन्ना में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं प्रभावी विवेचना के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिले के समस्त थाना प्रभारियों सहित 50 से अधिक विवेचकों को प्रशिक्षित किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों - जैसे सोशल मीडिया दुरुपयोग, ऑनलाइन ठगी, बैंक फ्रॉड, डिजिटल पहचान चोरी, फिशिंग आदि की त्वरित एवं प्रभावी जांच सुनिश्चित करना तथा विवेचकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना रहा। पुलिस अधीक्षक पन्ना के निर्देशन में जिले के सभी थाना क्षेत्रों में साइबर हेल्पडेस्क की स्थापना की जा चुकी है, जिससे आमजन की शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।

अतरिक्त पुलिस अधीक्षक पन्ना सुश्री वन्दना सिंह चौहान की उपस्थिति मे आयोजित उक्त प्रशिक्षण में जिला साइबर टास्क फोर्स के कर्मचारी प्र.आर. राहुल सिंह बघेल, आशीष अवस्थी, धर्मेन्द्र सिंह आर. राहुल पाण्डेय, नितिन नवराज, उपनेन्द्र सिंह, द्वारा अधिकारियों को साइबर अपराधों की तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्य के संकलन, संरक्षण एवं विश्लेषण की विधि तथा आवश्यकतानुसार उच्च स्तरीय एजेंसियों से समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यशाला में विभिन्न महत्वपूर्ण पोर्टलों के उपयोग संबंधी प्रशिक्षण भी दिया गया, जिनमें मोबाइल ट्रेसिंग हेतु सी.ई.आई.आर. (CEIR) पोर्टल, साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों के लिए एन.सी.आर.पी. (NCRP) पोर्टल तथा अन्य राज्यों से समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई हेतु सी.आई.ए.आर. (CIAR) पोर्टल शामिल हैं। इन पोर्टलों के माध्यम से विवेचक अब साइबर अपराधों की त्वरित जांच एवं धनराशि फ्रीज/रिकवरी जैसी कार्यवाही समयबद्ध रूप से कर सकेंगे।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को यह भी अवगत कराया गया कि Ministry of Home Affairs द्वारा National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर 01 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों में ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज करने का प्रावधान लागू किया गया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत यदि पीड़ित द्वारा पोर्टल पर 1 लाख रुपये से अधिक की धनराशि की ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की जाती है, तो संबंधित प्रकरण स्वतः संबंधित राज्य/जिला पुलिस को अग्रेषित होता है तथा त्वरित विधिक कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। अधिकारियों को ई-एफआईआर की प्रक्रिया, शिकायत के सत्यापन, प्रारंभिक जांच, संबंधित बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराने, डिजिटल साक्ष्य संकलन तथा समयबद्ध विवेचना के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रावधान से गंभीर साइबर वित्तीय अपराधों में शीघ्र कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित होगी एवं पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने में सहायता मिलेगी।

प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों द्वारा बैंक खातों, यूपीआई, एटीएम फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग एवं अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित मामलों में तत्काल तकनीकी कार्यवाही संभव हो सकेगी। विशेष रूप से ऑनलाइन ठगी के मामलों में प्रारंभिक 24 घंटे को “गोल्डन आवर” माना जाता है, जिसमें त्वरित सूचना एवं कार्रवाई से ठगी गई धनराशि की रिकवरी की संभावना अधिक रहती है।

कार्यशाला के दौरान साइबर फ्रॉड की पहचान करने की तकनीक, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया, फॉरेंसिक जांच की मूलभूत जानकारी, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के उपयोग तथा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का भी व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। वास्तविक प्रकरणों की केस स्टडी के माध्यम से अधिकारियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से भी प्रशिक्षित किया गया।

पन्ना पुलिस जनता की सुरक्षा के प्रति सदैव सजग है एवं डिजिटल युग में नागरिकों को सुरक्षित एवं भरोसेमंद वातावरण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नागरिकों से अपील है कि साइबर अपराध से संबंधित किसी भी घटना की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा अपने नजदीकी थाना के साइबर हेल्पडेस्क पर दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

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Saturday, February 21, 2026

पन्ना जिले में 7 लाख 50 हजार 769 मतदाता पंजीकृत

  • एसआईआर मतदाता सूची का हुआ अंतिम प्रकाशन
  • सूची के प्रकाशन उपरांत बढ़े 14 हजार 837 मतदाता


पन्ना। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पन्ना जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 अंतर्गत शनिवार को पन्ना, पवई एवं गुनौर विधानसभा की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया। इस मौके पर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ऊषा परमार की अध्यक्षता में राजनैतिक दल की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें जानकारी दी गई कि 21 फरवरी को एसआईआर मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन उपरांत जिले में कुल 7 लाख 50 हजार 769 मतदाता पंजीकृत हैं, जबकि इसके पहले 23 दिसम्बर को प्रकाशित प्रारंभिक मतदाता सूची में 7 लाख 35 हजार 932 मतदाता दर्ज थे। एसआईआर घोषणा तिथि 27 अक्टूबर की स्थिति में 7 लाख 76 हजार 76 मतदाता शामिल थे। सूची के प्रारंभिक प्रकाशन से अंतिम प्रकाशन की अवधि में शुद्ध रूप से कुल 14 हजार 837 मतदाताओं की वृद्धि हुई है। 

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अंतर्गत विभिन्न चरणों में संपन्न कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आयोग के निर्देश मुताबिक सफल रूप से संपन्न हुई एसआईआर की समस्त गतिविधियों में निर्वाचन कार्य में संलग्न लोकसेवकों सहित सभी राजनैतिक दल का सहयोग भी सराहनीय रहा है। बैठक में राजनैतिक दल के अध्यक्ष व प्रतिनिधियों से प्रकाशित मतदाता सूची के संबंध में आवश्यक जानकारी को बूथ लेवल एजेन्ट तक पहुंचाने की अपेक्षा की गई। 

बैठक में विधानसभावार फोटोरहित मतदाता सूची की सीडी का वितरण किया गया। साथ ही फोटोयुक्त मतदाता सूची का सेट भी प्रदान किया गया। इस दौरान निरंतर रूप से नवीन नाम जोड़ने, निरसन और संशोधन के संबंध में अवगत कराया गया। बताया गया कि जिले में कुल एक हजार 4 मतदान केन्द्र हैं। एसआईआर प्रक्रिया अंतर्गत 23 दिसम्बर से 22 जनवरी तक दावा आपत्ति प्राप्त करने की अवधि निर्धारित थी। इस दौरान नवीन नाम जोड़ने के लिए 17 हजार 399 आवेदन स्वीकृत हुए, जबकि निरसन के लिए 2 हजार 122 आवेदन तथा आवश्यक संशोधन के लिए 6 हजार 357 आवेदन स्वीकृत हुए हैं। 

अंतिम मतदाता सूची अनुसार पवई विधानसभा में सर्वाधिक 2 लाख 77 हजार 144 मतदाता हैं। इनमें एक लाख 48 हजार 208 पुरूष मतदाता एवं एक लाख 28 हजार 936 महिला मतदाता शामिल हैं। गुनौर विधानसभा में एक लाख 22 हजार 834 पुरूष एवं एक लाख 5 हजार 653 महिला मतदाता सहित कुल 2 लाख 28 हजार 487 मतदाता हैं। इसी तरह पन्ना विधानसभा में 2 लाख 45 हजार 138 मतदाता शामिल हैं। इनमें एक लाख 32 हजार 152 पुरूष मतदाता, एक लाख 12 हजार 985 महिला मतदाता तथा एक अन्य मतदाता शामिल है। पन्ना विधानसभा में 185, पवई में 41 और गुनौर में 89 सर्विस वोटर्स हैं। 

एसआईआर प्रक्रिया में जिले के तीन विधानसभा अंतर्गत लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी एवं नो मैपिंग के एक लाख 46 हजार 466 नोटिस जारी कर तामील करवाए गए एवं सुनवाई का अवसर प्रदान कर प्रारंभिक सूची के आधार पर एक हजार 547 नाम विलोपित करने की कार्रवाई की गई। राजनैतिक दल की बैठक में अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी मधुवंतराव धुर्वे, निर्वाचन पर्यवेक्षक उमाशंकर दुबे सहित भारतीय जनता पार्टी से आशीष तिवारी एवं राजेश गुप्ता, इंडियन नेशनल कांग्रेस से राजबहादुर पटेल, बहुजन समाज पार्टी से चौधरी एस.बी. रमन और आम आदमी पार्टी से अंजली यादव उपस्थित रहीं।

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Thursday, February 19, 2026

बेहद जायकेदार होती है अजयगढ क्षेत्र की अरहर दाल

अजयगढ़ क्षेत्र के सिद्धपुर ग्राम में अरहर के खेत का दृश्य ( फोटो : ज्ञानेन्द्र तिवारी )

पन्ना। बुंदेलखंड क्षेत्र में पैदा होने वाली अरहर की दाल अपनी उच्च गुणवत्ता, प्राकृतिक स्वाद और पोषण के लिए प्रसिद्ध है, यह अनपॉलिश्ड (unpolished) अरहर फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है। अरहर की खेती व पैदावार को द्रष्टिगत रखते हुए इस पूरे इलाके को दाल का कटोरा भी कहा जाता है। यह क्षेत्र विशेषकर महोबा, हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट दाल के प्रमुख उत्पादक के रूप में जाने जाते हैं, यही वजह है कि इस इलाके को 'दाल का कटोरा' कहा जाता है।

खाने की थाली में यदि अरहर की दाल न हो तो भोजन करने पर पेट तो भर जाता है लेकिन संतुष्टि नहीं मिलती। बुंदेलखंड के बाँदा व चित्रकूट जिले से सटे विन्ध्यांचल पहाड़ियों की गोद में बसे अजयगढ की अरहर दाल का स्वाद बेहद जायकेदार होता है। अजयगढ क्षेत्र में उत्पादित होने वाली दाल को खाने के बाद फिर और कहीं की दाल रास नहीं आती। चावल के साथ अजयगढ़ की दाल खाने का मजा ही और है। अजयगढ के आरामगंज, सिंहपुर से लेकर सिद्धपुर व कालिंजर तक हर तरफ जिधर देखो वहां अरहर के खेत नजर आते हैं। विन्ध्यांचल की प्राचीन पहाड़ियों की तलहटी में अरहर की फसल से लहलहाते खेतों को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है। 

बताया जा रहा है कि बुंदेलखंड क्षेत्र में पैदा होने वाली अरहर की दाल को जल्द ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने वाली है। इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद अरहर की दाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और किसानों को दाल बेचने पर बेहतर दाम मिलेंगे। यहाँ की दाल पकाने में हल्की, क्रीमी और नरम होती है, जो अपनी पौष्टिकता के लिए जानी जाती है। यह दाल स्वास्थ्य के लिए उत्तम मानी जाती है, जिसे सुपाच्य होने के कारण सूप के रूप में भी पसंद किया जाता है।

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Tuesday, February 17, 2026

पेयजल समस्या से जूझ रहा गांव अब बन रहा पानीदार

  • पानी बचाने की मिसाल बना पन्ना जिले का फुलवारी गांव
  • गांव को जल संकट से निजात दिलाने पंचायत संकल्पित 
  • बचे हुए घरों में पंचायत पूरा करायेगी रूफवाटर हार्वेस्टिंग


पन्ना। दशकों से पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे इस गांव की कहानी बहुत दिलचस्प और प्रेरणादायी है। बारिश के पानी का संरक्षण करने की पहल से यह गांव अब पानीदार हो गया है। जिन हैंडपम्पों से जनवरी के महीने से ही पानी की जगह सिर्फ हवा निकलने लगती थी, अब उनसे स्वच्छ पानी निकल रहा है। वर्षा जल संचय की तकनीक अपनाने से ग्रामीणों को अब खारे पानी की समस्या से भी निजात मिल गई है। इस अनूठे बदलाव से पन्ना जिले का फुलवारी गांव अन्य दूसरे गांवों के लिए जो जल संकट का सामना कर रहे हैं, उनके लिए मिशाल बन गया है।   

उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय पन्ना से 38 किलोमीटर दूर स्थित फुलवारी गांव में कुल 162 परिवार रहते हैं। तक़रीबन 500 की आबादी वाला यह गांव दशकों से पानी की कमी और इसके खारेपन की समस्या से जूझ रहा था। जनवरी से ही गांव के कुएं और बोरवेल सूखने लगते थे, जिससे ढाई किलोमीटर पैदल चलकर गांव की महिलाओं को दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता था। महिलाएं झुंड बनाकर इटवा तिलहा गांव पानी लेने जाया करती थीं। पानी की कमी इस गांव की पहचान बन चुकी थी। जनवरी 2025 में यहां जल जीवन मिशन ने हर घर नल से जल पर काम करना शुरू किया। 

सरकार के साथ ही एक निजी संस्था समर्थन ने भी ग्रामीणों की मदद के लिए आगे आया। दरअसल, समर्थन पन्ना जिले के 32 पंचायतों के 40 गांवों में जल जीवन मिशन और अटल भू-जल योजना में सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। इन्हीं में फुलवारी भी शामिल है। गांव में जल संकट को देखते हुए संस्था ने वर्षा जल संचयन पर कार्य करने की योजना बनाई। ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। हालांकि यह काम इतना आसान नहीं था। क्योंकि ग्रामीण सुबह होते ही मजदूरी के लिए गांव से निकल जाते थे। संस्था ने महिलाओं को जागरूक करना शुरू किया।

स्कूल में वर्षा जल संचयन की अनुमति मिलते ही आया बदलाव

शुरुआती संघर्ष और लोगों की मानसिकता बदलने में ज्यादा समय नहीं लगा। समर्थन के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. योगेश कुमार बताते हैं कि संस्था ने यह पहल शुरू की तो गांव के लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनका मानना था कि जल संचयन संरचना का निर्माण व्यर्थ है और इससे कोई लाभ नहीं होगा। कई ग्रामीणों ने संस्था पर अविश्वास जताया और उनके प्रयासों को नकार दिया। वे इसे एक सरकारी या गैर-सरकारी योजना समझकर नजर अंदाज कर रहे थे, लेकिन संस्था के ब्लॉक समन्वयक कमल ने गांव की महिला कविता, राखी और माया को जल मित्र बनाया और उन्हें साथ लेकर ग्रामीणों को जागरूक करने लगे।


उनकी मेहनत का पहला परिणाम तब देखने को मिला जब पंचायत की मदद से गांव के स्कूल ने अपनी छत पर वर्षा जल संचयन संरचना के निर्माण की अनुमति दे दी गई। बस यहीं से बदलाव शुरू हो गया। गांव के स्कूल में एक हैंडपंप था, जो दिसंबर और जनवरी में सूख जाया करता था। संस्था ने स्कूल की छत से वर्षा जल को पाइप के माध्यम से जमीन के अंदर भेजने के लिए एक जल संचयन संरचना बनाई। कुछ ही महीनों में इसका असर दिखने लगा। जो हैंडपंप सर्दियों में ही पानी देना बंद कर देता था, वह अब साल भर पानी देने लगा। सबसे बड़ी बात यह थी कि पहले पानी खारा होता था, लेकिन अब मीठा पानी मिलने लगा। 

यह बदलाव ग्रामीणों के लिए चौकाने वाला था। जो लोग पहले जल संचयन संरचनाओं के निर्माण को लेकर संदेह में थे, वे अब इसे अपनाने के लिए आगे आने लगे। जिले के कई पंचायत के प्रतिनिधि ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यो ने ग्राम का भ्रमण कर परिणाम को देखा एवं सरपंच कीर्ति बागरी एवं सचिव अखिलेश गर्ग से समझा। ग्राम पंचायत के सचिव का कहना है कि हमारा संकल्प फुलवारी गांव को पानीदार बनाकर ग्रामीणों को स्वच्छ मिठा पानी उपलब्ध करना है, इस लक्ष्य को हम हासिल करके ही रहेंगे। गांव के लोगो ने जनभागीदारी करके जिले के लिये एक मिशाल कायम किया है। समर्थन टीम के सक्रिय  सहयोग से ग्राम पंचायत भी फुलवारी गांव को पानीदार बनाने के लिए उत्साहित और संकल्पित है। 

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Friday, February 13, 2026

प्राकृतिक खेती से कृषि लागत में आ सकती है कमी

  •  मौसम परिवर्तन के प्रभाव की रोकथाम के साथ प्राकृतिक खेती अपनाने से जलवायु एवं पर्यावरण भी रहेगा सुरक्षित


पन्ना। मौसम परिवर्तन (Climate Change) से फसल उत्पादन में कमी, अनिश्चित बारिश और कीटों का प्रकोप बढ़ा है। प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य को सुधारकर, जल संरक्षण कर और कार्बन सोखकर (Carbon Sequestration) जलवायु अनुकूल लचीलापन प्रदान करती है। यह रसायनों का उपयोग कम कर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करती है, जिससे यह टिकाऊ कृषि का एक प्रमुख समाधान है। प्राकृतिक खेती न केवल जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम करती है, बल्कि यह किसानों के लिए कम लागत में टिकाऊ आय का साधन भी बन रही है। 

हमारा देश कृषि प्रधान देश है। जलवायु में आ रहे परिवर्तन से किसान प्रभावित न हो इसके लिये जिले के जनकपुर में स्थिति केवीके के वैज्ञानिक लगातार सलाह दे रहे है। डा.पी.एन.त्रिपाठी,डा. आरके जायसवाल,डा.आरपी त्रिपाठी एवं रितेश बगोरा ने तकनीकी सलाह एवं किसान भाईयो को कम लागत से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सलाह भी दे रहे हैं। जिले की कई संस्थाये प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं।

मौसम में आ रहे परिवर्तन से फसल पर प्रभाव न पड़े इसके लिये किसान गेंहू एवं चने में पुष्प अवस्था में तापमान से राहत एवं नुकशान से बचने के लिये फसल को जीवन चक्र पूरा करने के लिये 05234 एवं वोरान का घोल बनाकर छिड़काव कर दें, ताकि पोषक तत्व  एवं पोषण मिले। वोरान पोषक तत्व है, फसल के जड़ो तक पहचेगा तो फसल उत्पादन अच्छा होगा। बोरान एवं 05234 का घोल गेहू एवं चना में डालने से फायदा होगा।

टमाटर एवं सब्जी के उत्पादन में जैविक खाद एवं कीटनाशक का उपयोग करें ताकि मानव जाति स्वास्थ्य रहे एवं किसान की लगात को कम किया जा सके।

प्राकृतिक खेती से उत्पादित सब्जियां न सिर्फ स्वास्थ्य को बेहतर रखती हैं अपितु इन सब्जियों का स्वाद भी रुचिकर होता है। प्राकृतिक खेती अपनाने से कृषि लागत में जहाँ कमी आयेगी वहीं पर्यावरण भी सुरक्षित होगा।

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Monday, February 9, 2026

दुर्लभ प्रवासी पक्षी ब्लूथ्रोट की सलेहा क्षेत्र के पटना–तमोली में उपस्थिति दर्ज


मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में सलेहा क्षेत्र अंतर्गत पटना–तमोली में बर्ड वाचिंग के दौरान दुर्लभ प्रवासी पक्षी ब्लूथ्रोट की उपस्थिति दर्ज की गई है। प्रकृति संरक्षण कार्यकर्ता अजय चौरसिया द्वारा ली गई स्पष्ट तस्वीरों के आधार पर क्षेत्र में इस आकर्षक प्रवासी पक्षी की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

ब्लूथ्रोट फ्लाईकैचर परिवार से संबंधित एक कीटभक्षी प्रवासी पक्षी है। यह प्रजाति यूरोप, पैलिआर्कटिक क्षेत्र तथा पश्चिमी अलास्का में पाई जाती है और शीत ऋतु में 8 से 10 हजार किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय कर भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंचती है।

लगभग 13 से 14 सेंटीमीटर लंबा यह पक्षी अपने विशिष्ट सौंदर्य के लिए जाना जाता है। नर ब्लूथ्रोट के गले पर मौजूद चमकीला नीला रंग, जिसके मध्य सफेद अथवा हल्का लाल धब्बा होता है, इसकी पहचान बनाता है। भूरी-स्लेटी पीठ और हल्के रंग का पेट इसके सौंदर्य को संतुलित रूप देता है।सलेहा क्षेत्र अंतर्गत पटना–तमोली में दशकों से किए जा रहे प्रकृति संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब जैव विविधता के रूप में सामने आ रहा है। 

विशेषज्ञों के अनुसार, इतने लंबे प्रवास के बाद इस पक्षी का यहां ठहराव क्षेत्र की सुरक्षित पारिस्थितिकी का प्रमाण है। संरक्षण कार्यकर्ताओं का मानना है कि ब्लूथ्रोट जैसे दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी भविष्य में और अधिक प्रजातियों के आगमन की संभावना को मजबूत करती है।

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