Friday, October 2, 2026

चिता आंदोलन 21वें दिन भी जारी, 43 परिवारों के लिए 3.22 करोड़ की राशि स्वीकृत

  •  अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार सहित सभी साथियों की रिहाई की मांग 
  •  कार्रवाई के बजाय प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान किया जाए


पन्ना। मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित विस्थापित परिवारों के पूर्ण मुआवजा, उचित पुनर्वास और हक-अधिकारों की मांग को लेकर चल रहा चिता आंदोलन अमित भटनागर की गिरफ्तारी के बाद भी 21वें दिन जारी है। आंदोलन के बीच प्रशासन की ओर से मझगांय परियोजना से प्रभावित 43 परिवारों के लिए पुनर्वास अनुदान की अंतर राशि के भुगतान की अनुमति दी गई है। 

जल संसाधन विभाग द्वारा मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत बांध निर्माण के डूब क्षेत्र में प्रभावित परिवारों को एकमुश्त पुनर्वास अनुदान अंतर राशि प्रति परिवार के मान से 7 लाख 50 हजार रूपए कुल 17 करोड़ 17 लाख 50 हजार रूपए स्वीकृत की गई है। इस क्रम में कलेक्टर ऊषा परमार ने आदेश जारी कर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व व भू-अर्जन अधिकारी के प्रस्ताव पर 43 परिवारों को कुल 3 करोड़ 22 लाख 50 हजार रूपए की राशि भुगतान करने की अनुमति प्रदान की है। 

इनमें राजू अहिरवार अमला अहिरवार, मुल्ली, कुंजी कोंदर, सरजू कोंदर रेखा कोंदर, लच्छी कोंदर, रमा कोंदर मुन्नी कोंदर, हल्के यादव सियारानी यादव, लेखराम यादव गेंदा रानी यादव, कमलेश यादव रामदेवी यादव, ईश्वरदीन यादव प्यारी बाई, हेतराम यादव शिववती यादव, विक्रम यादव गोरा यादव, भगवतदीन यादव मुन्नी यादव, इन्द्रकुमार यादव सुनीता यादव, हनुमान यादव हक्की बाई यादव, यश कुमारी यादव सुरेश कुमार, कुतली यादव, देवीदीन यादव केशरदेवी यादव, जगप्रसाद यादव कुश्मा यादव, कामता प्रसाद यादव ज्योति यादव, लक्ष्मीप्रसाद यादव मालती यादव, बलवान यादव चुनु बाई यादव, रोशनी अहिरवार, छेदीलाल अहिरवार सीमा अहिरवार, हरदीन कोंदर चिरारो कोंदर, बेटालाल फूला बसोर, रामरूप अहिरवार लक्ष्मी अहिरवार, जयराम यादव रामदेवी यादव, रामनरेश यादव भूरी यादव, सुशीला, केदार सिंह सविता सिंह, कपूर सिंह इन्द्रकुंवर सिंह यादव, भानसिंह यादव केशकुंवर, बामु पाल गीता पाल, रामदश पाल रीना पाल, सुरेश कुमार पाल रामदेवी पाल, राजू पाल केशकली पाल, सुनीता पाल, पुष्पेन्द्र पाल विनीता देवी पाल, जयपाल पाल राजकुमारी पाल, श्री पाल कुसुम पाल, रानीबहु पाल एवं कल्याण सिंह केशकुवर शामिल हैं। 

आंदोलनकारियों ने इसे प्रभावित परिवारों की मांगों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, लेकिन उनका कहना है कि अभी सभी प्रभावित परिवारों को उनका पूरा अधिकार मिलना बाकी है। इधर, आंदोलनकारियों के अनुसार अमित भटनागर का जेल में भी आमरण अनशन आज पांचवें दिन जारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार सहित आंदोलन से जुड़े जिन साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, उन्हें रिहा किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सभी पात्र प्रभावित परिवारों के नाम सूची में शामिल नहीं किए जाते, सभी को पूर्ण मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि 43 परिवारों के लिए राशि स्वीकृत होना महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन उनकी मांग केवल कुछ परिवारों तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि मझगांय डैम से प्रभावित हर पात्र परिवार को उसका पूरा मुआवजा, पुनर्वास और अधिकार मिलना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आंदोलनकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रभावित परिवारों की शेष समस्याओं का समाधान किया जाए और अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार सहित गिरफ्तार सभी साथियों की रिहाई सुनिश्चित की जाए।

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Thursday, October 1, 2026

पन्ना टाइगर रिजर्व के खुले प्रवेश द्वार, पर्यटकों में दिखा भारी उत्साह

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व का प्रवेश द्वार आज 01 अक्टूबर से पर्यटकों के भ्रमण हेतु खुल गया है। देशी और विदेशी पर्यटक अब यहाँ वन्य प्राणियों का दीदार करने के साथ ही खूबसूरत जंगल व हरी-भरी वादियों का लुत्फ़ ले सकेंगे। 

नया पर्यटन सत्र शुरू होने पर आज सुबह टाइगर रेिजर्व के मंडला गेट पर पर्यटकों के स्वागत की विशेष तैयारी की गई थी। फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र श्रीवास्तव और डिप्टी डायरेक्टर बी. के. पटेल की मौजूदगी में गेट को फूलों से सजाया गया था। उत्साह पूर्ण माहौल में फीता काट कर प्रवेश द्वार खोले गए और गाइड, जिप्सी चालक व सैलानियों का फूल मालाओं से स्वागत किया गया। 

मौके पर मौजूद अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर गेट से जिप्सियों को सफारी के लिए रवाना किया। आज पर्यटन सत्र के पहले दिन ही बड़ी संख्या में पर्यटक पार्क भ्रमण के लिए मंडला प्रवेश द्वार पर पहुंचे। पर्यटकों में वन्य प्राणियों खासकर बाघ का दीदार करने को लेकर भारी उत्साह दिखाई दे रहा था।

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Wednesday, September 30, 2026

दमन से नहीं रुकेगा आंदोलन, जेल में भी जारी रहेगा : अमित भटनागर

 


पन्ना। न्याय और अपने हक़ के लिए शांति पूर्ण तरीके से आवाज उठाना क्या अब सचमुच गुनाह हो गया है ? मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित आदिवासियों और किसानों के चल रहे आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस बल को जिस तरह से उतारा गया और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों को गिरफ्तार किया गया, उसे देखकर तो यही प्रतीत होता है कि मौजूदा दौर में अपने हक़ और न्याय की आवाज उठाना नासमझी है। यह नासमझी मझगांय बांध के प्रभावितों ने की है। यही वजह है कि उन्हें पुलिस की प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।  

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में मझगांय बांध के प्रभावितों का पिछले एक पखवाड़े से भी अधिक समय से आंदोलन चल रहा है। प्रभावितों की मांगों पर सहृदयता पूर्वक विचार करने के बजाय प्रशासन ने जिस तरह से पुलिस बल के जरिए आंदोलन को जबरन ख़त्म करने का रास्ता अख्तियार किया है, उससे जनाक्रोश और बढ़ता जा रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि आंदोलन को कुचलने के लिए बीते 28 सितम्बर को पुलिस बल के साथ सिविल ड्रेस में  कुछ लठैत भी शामिल थे। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दल भी आंदोलनकारियों के समर्थन में सक्रिय हो गए हैं। जिला कांग्रेस कमेटी ने तो बकायदा पुलिस अधीक्षक पन्ना को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि चिता आंदोलन के दौरान ग्रामीणों एवं आंदोलनकारियों के साथ हुई मारपीट एवं पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

इधर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर ने आज सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा है कि पन्ना जिले में अपने हक अधिकार उचित मुआवजा, पुर्नवास और पर्यावरण की रक्षा के लिए चिता आंदोलन कर रहे महिलाओं सहित सत्याग्रहियों पर भाजपा सरकार में पुलिस और गुंडों की दम पर लगातार 3 दिन से जिस तरह से लाठीचार्ज, अभद्रता और अमर्यादित व्यवहार किया जा रहा है, यह लोकतंत्र की हत्या है। मैं इसके खिलाफ अपने साथियों के साथ गिरफ्तारी की घोषणा करता हूं। दमन से नहीं रुकेगा आंदोलन, जेल में भी जारी रहेगा आमरण अनशन। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ सिर्फ इनके साथ अन्याय नहीं ये लोकतंत्र की हत्या है, इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन होना चाहिए।

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Tuesday, September 22, 2026

चिता आंदोलन के 11वें दिन सैकड़ों लोग गहरे पानी में उतरे

  • घर, खेत और गांव संकट में, लेकिन प्रभावितों को अभी तक न्यायपूर्ण मुआवजा नहीं
  • केन-बेतवा, मझगाय, रुंझ सहित विभिन्न परियोजनाओं के प्रभावितों ने उठाई आवाज


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मझगाय बांध प्रभावितों का चिता आंदोलन 11वें दिन और तेज हो गया। सैकड़ों महिला-पुरुष गहरे पानी में उतरकर जल सत्याग्रह में शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने कमर से लेकर छाती तक पानी में खड़े होकर शरीर पर मिट्टी लगाई और विरोध दर्ज कराया। सुबह शुरू हुआ प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। आंदोलनकारियों का कहना है कि सांकेतिक जल सत्याग्रह अब धीरे-धीरे वास्तविक जल सत्याग्रह में बदल रहा है।

चिता सत्याग्रह के साथ मिट्टी सत्याग्रह और फांसी सत्याग्रह के बाद अब जल सत्याग्रह ने आंदोलन को नया स्वरूप दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि बढ़ते पानी के बीच घर, खेत और गांव संकट में हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को अभी तक न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिला है। जय किसान संगठन के नेता एवं आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने बिना किसी जनप्रतिनिधि का नाम लिए कहा, “घर डूब रहे हैं, गांव डूब रहे हैं और जिंदगियां डूब रही हैं, लेकिन जवाबदेह और जिम्मेदार लोगों की बेशर्मी तैर रही है।”

उन्होंने कहा कि मझगाय के साथ रुंझ परियोजना, केन-बेतवा लिंक परियोजना, सिंगरौली-ललितपुर रेल मार्ग सहित विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित लोग लंबे समय से विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में वर्षों तक संघर्ष के बाद मुआवजा बढ़ाया जाता है और फिर इसका श्रेय लेने की कोशिश होती है, जबकि प्रभावित परिवार तब तक अपना घर, जमीन और आजीविका खो चुके होते हैं।

भटनागर ने आरोप लगाया कि किसानों की सिंचित जमीन को असिंचित मानने, खड़ी फसलों पर जेसीबी चलाने तथा निर्माण कार्यों में अनियमितताओं से ग्रामीणों को नुकसान हुआ है। उन्होंने परियोजनाओं से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल मुआवजे और पुनर्वास का नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा का भी संघर्ष है। विकास के नाम पर विस्थापन हो, लेकिन पर्यावरणीय नुकसान, जंगलों और जैव विविधता की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।

भटनागर ने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक मनमानी, विस्थापन और पर्यावरणीय क्षति के खिलाफ है। प्रभावितों को न्यायपूर्ण मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक सत्याग्रह जारी रहेगा।

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Tuesday, September 15, 2026

मझगाय बांध के डूब क्षेत्र में चौथे दिन भी जारी रहा चिता आंदोलन

  • विस्थापित आंदोलनकारियों  का नारा “न्याय दो या मार दो” 
  • पानी में चिताओं पर लेटकर प्रभावित करा रहे विरोध दर्ज 


पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगाय बांध, रुंझ बांध और सिंगरौली–ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित विस्थापितों का चिता आंदोलन आज चौथे दिन भीषण गर्मी के बीच जारी रहा। आंदोलन में प्रभावित परिवारों के साथ बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं अपने बच्चों को लेकर शामिल हुईं। डूबते गांवों और बढ़ते जलस्तर के बीच प्रभावित लोग पानी में चिताओं पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने कहा कि जब इन परियोजनाओं की शुरुआत हुई थी, तब प्रभावित लोगों ने विकास का विरोध नहीं किया था। उन्होंने केवल ग्रामसभा, पारदर्शिता, कानून के पालन, उचित मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग की थी। लेकिन प्रभावितों का आरोप है कि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया और कई मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना उनकी जमीन और संपत्तियों पर कार्रवाई की गई।

अमित भटनागर ने कहा कि जब प्रभावित लोगों ने धरना-प्रदर्शन शुरू किया तो धारा 144 और वर्तमान में लागू धारा 163 जैसी निषेधात्मक कार्रवाइयों के माध्यम से आंदोलन को रोकने का प्रयास किया गया। आंदोलन तेज होने पर आंदोलनकारियों पर मुकदमे लगाए गए। इसके बावजूद प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर लगातार लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करते रहे।

उन्होंने कहा कि आज स्थिति बेहद गंभीर है विकास के नाम पर विस्थापित आदिवासी किसानों के घर और गांव पुलिसिया दमन के माध्यम से बुलडोज कर दिए गए, उनके घर पानी में डूब चुके हैं, कई गांवों में पानी पहुंच चुका है और कुछ घर लगातार गिर रहे हैं, लेकिन अनेक प्रभावित परिवारों को अभी तक उनका मुआवजा नहीं मिला है। उनका कहना है कि बिना उचित मुआवजा और पुनर्वास के लोगों के घरों और गांवों को डुबाना गंभीर मानवीय और कानूनी सवाल खड़ा करता है।

5 लाख से 12.50 लाख रु. के पुनर्वास पैकेज तक, फिर भी भुगतान का इंतजार

आंदोलनकारियों के अनुसार पहले प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास पैकेज ₹5 लाख था। जुलाई में हुए चिता आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री द्वारा कैबिनेट में प्रभावित परिवारों के लिए ₹12.50 लाख के पैकेज का निर्णय घोषित किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद आंदोलनकारियों का आरोप है कि अभी तक कई परिवारों को बढ़ा हुआ पैकेज तो दूर, पहले निर्धारित ₹5 लाख की राशि भी नहीं मिली है। प्रभावित किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी जमीनों के रिकॉर्ड में सिंचित भूमि को असिंचित कर दिया गया, जिससे मुआवजे की राशि प्रभावित हुई, लेकिन इस अंतर की राशि भी उन्हें नहीं दी गई। कई परिवारों के मकान और जमीन का मुआवजा भी लंबित बताया जा रहा है।

अमित भटनागर ने कहा, “एक तरफ सरकार परियोजना का काम आगे बढ़ा रही है और दूसरी तरफ प्रभावित परिवारों के घर पानी में डूब रहे हैं। जिन लोगों को पहले मुआवजा और पुनर्वास मिलना चाहिए था, वे आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह केवल मुआवजे का सवाल नहीं है, बल्कि संविधान, कानून, जीवन, गरिमा और न्याय के अधिकारों का सवाल है।”

कई परियोजनाओं के प्रभावित एक मंच पर

चिता आंदोलन में केवल केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित लोग ही नहीं, बल्कि मझगाय बांध, रुंझ बांध और सिंगरौली–ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित लोग भी शामिल हुए। प्रभावितों ने अपनी समस्याएं साझा करते हुए कहा कि परियोजनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़ी उनकी पीड़ा समान है। आंदोलनकारियों ने कहा कि विकास के नाम पर उनकी जल, जंगल, जमीन और जीवन छीना जा रहा है, लेकिन उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जा रही है।

उन्होंने कहा “पहले जल–जंगल–जमीन छीनी गई, फिर घर और गांव डुबो दिए गए। जब लोग न्याय मांगने सड़क पर आए तो निषेधाज्ञा और मुकदमों का सामना करना पड़ा और अब बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी रोकी जा रही हैं। आखिर यह कैसा विकास है?” अमित भटनागर ने कहा कि चिता आंदोलन का नारा “न्याय दो या मार दो” विस्थापित परिवारों की बेबसी और आक्रोश को व्यक्त करता है।

उन्होंने कहा, “हम सरकार से पूछ रहे हैं कि अगर हमें न्याय नहीं देना है तो क्या सरकार ने यह तय कर लिया है कि हमें मार दिया जाए? इस तरह घर, जमीन, गांव और जड़ों से उखाड़कर दर-दर भटकाने से अच्छा है कि सरकार हमारी पीड़ा को समझे और न्याय दे। हम मौत नहीं मांग रहे हैं, हम न्याय मांग रहे हैं। हमें उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और हमारे संवैधानिक व कानूनी अधिकार चाहिए।”

दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत ने कहा कि “हम महिलाएं अपने बच्चों के साथ इस आंदोलन में इसलिए बैठी हैं क्योंकि अब हमारी आवाज सुनने वाला कोई नहीं बचा है। हमारे घर डूब रहे हैं, जमीन जा रही है और कई परिवारों को अभी तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। अमित ने कहा कि जब राज्य ही अपने बनाए कानूनों और संविधान की भावना का पालन नहीं करता, तब संघर्ष और आंदोलन ही हमारे पास लोकतांत्रिक रास्ता रह जाता है। बिजली और पानी रोककर हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। सरकार को दमन की जगह विस्थापितों की पीड़ा सुननी होगी और उन्हें न्याय, मुआवजा तथा सम्मानजनक पुनर्वास देना होगा।”

उन्होंने कहा कि चिता आंदोलन किसी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। यह अन्याय, प्रशासनिक मनमानी और प्रभावित लोगों के अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष है। उन्होंने सरकार से मांग की कि डूब क्षेत्र के प्रत्येक प्रभावित परिवार का तत्काल सत्यापन कराया जाए, लंबित मुआवजा दिया जाए, सिंचित-असिंचित भूमि के मूल्यांकन की शिकायतों का निराकरण किया जाए, मकान एवं अन्य परिसंपत्तियों का उचित मूल्यांकन किया जाए तथा घोषित पुनर्वास पैकेज और सभी वैधानिक अधिकार तत्काल दिए जाएं। जब तक विस्थापितों को न्याय नहीं मिलता, चिता आंदोलन जारी रहेगा। यह लड़ाई केवल कुछ गांवों की नहीं है। यह जल–जंगल–जमीन–जीवन, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है।



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Sunday, September 13, 2026

विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी वत्सला की स्टेच्यू का पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला गेट पर हुआ अनावरण

 


पन्ना। गणेश चतुर्थी पर्व की पूर्व संध्या पर मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला गेट पर विश्व की सबसे उम्रदराज हथिनी वत्सला की स्मृति में उनके स्टेच्यू का भव्य अनावरण किया गया। इस गरिमामयी समारोह में मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार, पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं वरिष्ठजन उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, वन मंडलाधिकारी दक्षिण पन्ना, उप संचालक, सहायक संचालक पन्ना, परिक्षेत्र अधिकारी सहित वन अमला इस अवसर पर मौजूद रहा।

वत्सला के इस स्टेचू की स्थापना और अनावरण में जे.के. सीमेंट अमानगंज की विशेष और महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके अधिकारीगण भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। अनावरण करते हुए विस अध्यक्ष श्री तोमर द्वारा विधि-विधान से वत्सला की पूजा-अर्चना की गई और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए याद किया गया तथा उनकी प्रतिमा को अकोला गेट पर स्थापित किया गया। 

उल्लेखनीय है कि वत्सला विश्व की सबसे बुजुर्ग  हथिनी मानी जाती थी। उनका जन्म लगभग वर्ष 1917 के आसपास केरल के नीलांबुर जंगलों में हुआ था। इसके पश्चात वे पन्ना आईं और पन्ना की भौगोलिक परिस्थितियों एवं उबड़-खाबड़ स्थानों में उन्होंने अपना एक लंबा जीवन व्यतीत किया। वत्सला ने अपने सम्पूर्ण जीवन में किसी नर हाथी के साथ मेटिंग नहीं की। इसके साथ ही उन्होंने दूसरी हथिनियों के बच्चों का लालन-पालन अत्यंत स्नेह और वात्सल्य के साथ किया। उनके इसी प्रेमपूर्ण और वात्सल्यमयी स्वभाव के कारण आसपास के वन्यजीव प्रेमी और पन्ना के स्थानीय लोग उन्हें आदर और स्नेह से दादी मां कहकर पुकारते थे। वत्सला दादी मां की इन्हीं स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए अकोला गेट पर इस स्टेच्यू को स्थापित किया गया है।

गौरतलब है कि दुनिया की सबसे उम्रदराज कही जाने वाली हथिनी वत्सला की तमाम खूबियों में से एक खूबी उसके शारीरिक बनावट को लेकर भी है। जिससे हाथियों के झुंड में भी वत्सला को आसानी से पहचाना जा सकता था। दरअसल वत्सला की सूंड दूसरे अन्य हांथियों के मुकाबले अधिक लंबी रही है। सूंड की लंबाई इतनी अधिक थी कि वत्सला जब खड़ी होती थी तो दो से तीन फिट सूंड को जमीन के ऊपर मोड़ कर रखना पड़ता था। उसकी इस खूबी के कारण वन्यजीव प्रेमी वत्सला को पांच पैर वाली हथिनी भी कहते रहे हैं। वत्सला की सूंड इतनी लंबी कैसे हुई, इस बाबत वन्य प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव कुमार गुप्ता का कहना है कि शुरुआती दिनों में हथिनी वत्सला के द्वारा लकड़ी की बोगियों को उठाने व रखने का कार्य किया जाता रहा है। यही वजह है कि उम्र बढ़ने के साथ ही वत्सला की सूंड भी लंबी हो गई। वत्सला भौतिक रूप से भले ही अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन दुनिया भर के वन्य जीव प्रेमियों के जेहन में उसकी स्मृतियाँ हमेशा जीवित रहेंगी। 

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मझगांय बाँध के डूब क्षेत्र में घरों तक पहुँचा पानी, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

  • ग्रामीण आँखों के सामने देख रहे हैं अपना उजड़ता संसार, प्रशासन नदारत 
  • बढ़ते जलस्तर के साथ लोगों की चिंताएँ बढ़ रहीं लेकिन जिम्मेदार संवेदनहीन 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में निर्मित मझगांय बाँध के डूब क्षेत्र में घरों तक पानी पहुँच गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बढ़ते जलस्तर और विस्थापन की समस्याओं को लेकर जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में दो दिन से यहाँ चिता आंदोलन चल रहा है। डूब क्षेत्र में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार हर दिन पानी गाँव की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और कई घरों में पानी भरता जा रहा है। पानी को लगातार अपनी ओर बढ़ता देखकर ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है। कई लोग बीमार हैं, अनेक परिवारों की आँखों में आँसू हैं और चेहरों पर अपने घर, खेत और भविष्य को लेकर गहरी चिंता दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों को ज्ञापन दे चुके हैं, अपनी समस्याओं को लेकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया। ग्रामीणों के अनुसार कई पात्र परिवारों को अभी तक मुआवज़ा नहीं मिला है और मुआवज़े की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पैसों की मांग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि जब गाँव डूबने की कगार पर है और लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर रहा है, उस समय जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी दिखाई नहीं दे रही है। ग्रामीणों ने सत्ता पक्ष के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने बताया कि "आज चिता आंदोलन का दूसरा दिन है। हर दिन पानी गाँव की तरफ बढ़ रहा है। लोग अपनी आँखों के सामने अपने घर और संसार को डूबते देख रहे हैं। उनकी आँखों में आँसू हैं, मन में डर है और अनेक सवाल हैं, लेकिन जिनसे जवाब चाहिए, वही प्रशासन और जिम्मेदार लोग दिखाई नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि लोगों ने बार-बार ज्ञापन दिए, अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए और न्याय की गुहार लगाई, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो मजबूर होकर चिता आंदोलन शुरू करना पड़ा। अब लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है और उनके सवालों के साथ उनकी मांगें भी बढ़ती जा रही हैं।

आंदोलन दबाने के लिए बिजली काटने का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आंदोलन के पहले दिन मझगाय डेम प्रभावित गांव वनहरी के टपरियन गाँव की बिजली काट दी गई, जिसे ग्रामीण आंदोलनकारियों पर दबाव बनाने और गाँव में भय का माहौल पैदा करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ पानी बढ़ रहा है और दूसरी तरफ बिजली काटे जाने से उनकी परेशानियाँ और बढ़ गई हैं। उन्होंने बिजली व्यवस्था तत्काल बहाल करने की मांग की है।

मुआवज़ा दो, पुनर्वास दो, लोगों को डूबने के लिए मजबूर मत करो। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में लंबित मुआवज़े का तत्काल भुगतान, पारदर्शी सर्वे, उचित पुनर्वास, बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था तथा मुआवज़े की प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच शामिल है। अमित भटनागर ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या विकास के खिलाफ नहीं है, बल्कि विस्थापितों के अधिकार, न्याय और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ घर और गाँव नहीं डूब रहे हैं। अगर विस्थापितों के अधिकार, संविधान और इंसानियत की आवाज को भी डुबो दिया गया, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर स्थिति होगी। जय किसान संगठन की नेता दिव्या अहिरवार, हिसाबी राजपूत ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर तत्काल संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो चिता आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

आंदोलन को जिला कांग्रेस ने दिया समर्थन 

चिता आंदोलन के दूसरे दिन भी जिला कांग्रेस के नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पहुंच कर प्रदर्शन कारियों की मांग को जायज ठहराया, भाजपा की मोहन सरकार और  जिला प्रशासन को तानाशाह और भ्रष्ट करार दिया। अनीस खान जिलाध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी पन्ना,पूर्व प्रत्याशी भरत मिलन पांडे, प्रेम कुमार पांडेय,राकेश गर्ग, सौरभ पटेरिया, कदीर खान, सुरेन्द्र आदिवासी, हसीब खान, रिंकू खान,मैकू अहिरवार, राजा जी बुंदेला, विकास तिवारी, आशा यादव, रेहान मोहम्मद नेता प्रतिपक्ष, वैभव थापक महामंत्री जिला कांग्रेस, अक्षय तिवारी महामंत्री जिला कांग्रेस, जगत पाल सिंह पूर्व प्रदेश सचिव मध्य प्रदेश कांग्रेस, भूपेन्द्र सिंह सचिव जिला कांग्रेस प्रदर्शन स्थल में पहुंचे।

केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े पटवारी रिश्वत कांड के शिकायतकर्ता दयाराम आदिवासी,राजकुमार आदिवासी, सुना बाई, मझगांय बांध से दीपक द्विवेदी, उपेन्द्र विश्वकर्मा,अंकित सोनी, ठाकुरदीन पाल, राजरानी प्रजापति, रानी आदिवासी, मंगल यादव, गयाप्रसाद कोंदर, रूंझ बांध से महेश आदिवासी, दौलत आदिवासी, मालती आदिवासी, अनारी आदिवासी, अमरप्रसाद आदिवासी, कृपाल आदिवासी, निरपत आदिवासी, प्रभुदयाल आदिवासी, रामौतार आदिवासी, रतन आदिवासी, प्रकाश आदिवासी, बद्री आदिवासी, राकेश आदिवासी, देवीदीन आदिवासी, राजाराम आदिवासी, ललितपुर सिंगरौली रेल मार्ग-  पूरन यादव, राजाराम प्रजापति, अखिलेश जैन, शिवधनी यादव, जगदीश पटेल, आशा बाई साहू, इन्दू पाठक, मालती बाई सोनकर, रामनारायण प्रजापति सहित सैकड़ों विस्थापितों ने आंदोलन में सक्रिय सहभागिता निभाई।

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केन-बेतवा लिंक परियोजना के क्रियान्वयन से बुंदेलखंड क्षेत्र में आएगी खुशहाली : मुख्यमंत्री

  •  पन्ना के बलराम कृषि महोत्सव में वर्चुअली शामिल हुए मुख्यमंत्री, किसानों से किया संवाद
  • अतिवर्षा प्रभावित क्षेत्र में फसल सर्वे व किसानों की समस्याओं को निराकृत करने के निर्देश 


पन्ना। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पन्ना महाराजा छत्रसाल और भगवान श्री जुगल किशोर की नगरी है। यह एक मात्र धरती है, जहां हीरा मिलता है। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पन्ना नेशनल पार्क में बाघ पुनर्स्थापना की बदौलत बाघों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को पन्ना जिला मुख्यालय स्थित सब्जी मंडी प्रांगण में आयोजित प्रदेश के 28वें बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र को केन बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य बड़ी सौगातें मिली हैं। इससे क्षेत्र में खुशहाली और नागरिकों के जीवन स्तर में बदलाव आएगा। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस पर 17 सितम्बर से एक माह तक संचालित होने वाले सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ होगा। आगामी 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री श्री मोदी बतौर कुशल प्रशासक 25 वर्ष पूर्ण करेंगे। यह हम सब के लिए गौरव और गर्व का पल है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन से विश्व में भारत का मान सम्मान बढ़ा है। आज केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा किसान हित में कई कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में बलराम महोत्सव के आयोजन से किसानों को बहुत लाभ मिलेगा। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा आधुनिक कृषि सहित नवाचार तकनीकों की जानकारी से बड़ी संख्या में किसान लाभांवित होंगे। 

पवई बांध, मझगांय और रुंझ सहित कई लघु सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से वृहद स्तर पर किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। उद्यानिकी खेती अपनाने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा और प्रोत्साहन देने की अपील की। उन्होंने किसानों से अतिरिक्त आय के अवसर के रूप में पशुपालन और अन्य गतिविधियां अपनाने पर जोर दिया। साथ ही विभिन्न विकास कार्यों का जिक्र करते हुए गौशाला की राशि में बढ़ोत्तरी की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अवगत कराया कि सेवा संकल्प अभियान में ग्रामीण जरूरतमंद व्यक्तियों को निःशुल्क रजिस्ट्री की सुविधा का लाभ भी मिलेगा। भविष्य में इस योजना को नगरीय क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पर्यटन को बढ़ावा देने के दृष्टिगत होम स्टे जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात भी कही।

 प्रगतिशील किसानों से संवाद कर कार्यों की सराहना की

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बलराम कृषि महोत्सव के जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिले के प्रगतिशील किसानों से संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की। ग्राम शाहपुर खुर्द की महिला कृषक कविता रानी बताया कि वे 2019 से निरंतर प्राकतिक खेती कर रही हैं। वर्तमान में 6 गांव के लोगों को प्रशिक्षण के जरिए उन्नत खेती के गुर  भी सिखा रही हैं। इसके अलावा कृषि में कम लागत के माध्यम से आय बढ़ोत्तरी के तरीके भी बताती हैं। महिला कृषक ने कृषि विज्ञान केंद्र पन्ना से निरंतर मिले सहयोग और मार्गदर्शन की जानकारी भी दी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने धान लगाने की विधि भी पूछी। धाम मोहल्ला पन्ना निवासी राजकमल शर्मा ने कृषि क्षेत्र में शुरू किए गए स्टार्टअप की जानकारी दी। जरूआपुर के प्रगतिशील कृषक सुब्रत मलिक ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से उद्यानिकी खेती के जरिए आय में बढ़ोत्तरी की जानकारी दी। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के हितग्राही नत्थू प्रसाद यादव ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनू योजना के तहत मुर्रा भैंस क्रय कर सफलतापूर्वक डेयरी व्यवसाय गतिविधि करने के बारे में अवगत कराया।

प्रभारी मंत्री सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी की चर्चा



मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रभारी मंत्री एवं विधायकगण सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी चर्चा कर संवाद किया। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री तथा पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों के हित में बलराम कृषि महोत्सव ऐतिहासिक निर्णय है। इससे कृषि एवं किसान के जीवन में व्यापक बदलाव एवं परिवर्तन आएगा। इस मौके पर पन्ना विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कृषि क्षेत्र में बेहतर कार्यों की जानकारी दी। साथ ही गौशालाओं के विकास और दुग्ध उत्पादन एवं पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लक्ष्य में बढ़ोत्तरी का आग्रह किया। गुन्नौर विधायक डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने ग्राम श्यामरडाडा में जैविक खेती के बारे में बताया। साथ ही अतिवर्षा से फसल हानि का सर्वे कर मुआवजा वितरण की बात कही। 

इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा जिला कलेक्टर को अतिवर्षा प्रभावित क्षेत्र में फसल सर्वे और किसानों की अन्य समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में संचालित जन विश्वास अभियान में शिविरों के माध्यम से भी आम जनता को लाभांवित किया जा रहा है। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट किसानों और मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। जिला स्तरीय कार्यक्रम में कलाकारों के दल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोक नृत्य सहित देश भक्ति गीत की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत कृषि की लाभकारी जानकारी प्रदान की तथा उन्नत कृषि यंत्रों का प्रदर्शन भी किया गया।

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Thursday, September 10, 2026

पन्ना में 47 हजार की रिश्वत लेते पटवारी संतोष चिकवा रंगे हाथों गिरफ्तार

  •  केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापित आदिवासी से मांगी गई थी रिश्वत 
  • आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला हुआ दर्ज


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुवार को 47 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पटवारी संतोष चिकवा को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।आरोपी पटवारी द्वारा रिश्वत की रकम केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित दयाराम आदिवासी से पटवारी प्रतिवेदन बनाने के एवज में मांगी गई थी।

डीएसपी लोकायुक्त सागर ने जानकारी देते हुए बताया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत विस्थापित हुए दयाराम आदिवासी निवासी खजुरी कुड़ार से आरोपी पटवारी ने मुआवजे और जमीन से जुड़े कार्य के बदले 47 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। पीड़ित दयाराम आदिवासी की शिकायत पर लोकायुक्त सागर की 10 सदस्यीय टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप रचा और पटवारी को रिश्वत की राशि स्वीकार करते ही जिला चिकित्सालय पन्ना के गेट पर रंगे हांथ धर दबोचा। लोकायुक्त पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विस्थापित आदिवासियों के हक पर डाका डालने वाले पटवारी पर हुई इस कार्रवाई से राजस्व महकमें में हड़कंप मचा हुआ है।

छोटी मछली नहीं, पूरे नेटवर्क तक पहुँचे जांच : अमित भटनागर

 पन्ना जिले की केन-बेतवा लिंक परियोजना के नाम पर प्रभावित किसानों, आदिवासियों और ग्रामीणों के साथ लंबे समय से सामने आ रही कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच लोकायुक्त की कार्रवाई ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सागर लोकायुक्त की टीम द्वारा गुरुवार को जनवार-गहदरा पटवारी संतोष चिकवा को 47 हजार रु. की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने की कार्रवाई ने उन आशंकाओं को और गंभीर बना दिया है, जिन्हें हम लंबे समय से उठाते आ रहे हैं। 

केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े आदिवासियों के मुद्दों को लम्बे समय से उठाते आ रहे जय किसान संगठन के नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि हम लगातार कह रहे हैं कि केन-बेतवा परियोजना में प्रभावित आदिवासियों और किसानों की अशिक्षा, सरलता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी के अभाव का लाभ उठाकर बड़े स्तर पर अनियमितताएं की जा रही हैं। आज लोकायुक्त की कार्रवाई ने कम से कम यह बता दिया कि आखिर जमीन और मुआवजे से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार का नेटवर्क कितना गहरा है ?

अमित भटनागर ने कहा कि संतोष चिकवा यदि रिश्वतखोरी की एक कड़ी है, तो जांच केवल उसी कड़ी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पटवारी को पकड़ लेना कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है, लेकिन इसे अंत नहीं माना जा सकता। यह पता लगाना जरूरी है कि रिश्वत की मांग किसके कहने पर हुई ? किसके संरक्षण में हुई ? किसे इसका लाभ मिलना था ? और जमीन, सर्वे, मुआवजा तथा पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया में ऊपर तक कौन-कौन लोग जुड़े हैं ? उन्होंने कहा कि प्रभावित आदिवासी और किसान लंबे समय से मुआवजा, जमीन के सर्वे, परिसंपत्तियों के मूल्यांकन और पुनर्वास को लेकर गंभीर शिकायतें उठा रहे हैं। ऐसे में एक कर्मचारी की गिरफ्तारी को पूरे तंत्र की जांच का प्रवेश-बिंदु बनाया जाना चाहिए।

अमित भटनागर ने मांग की है कि इस मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा जांच का दायरा केवल पटवारी या किसी एक कर्मचारी तक सीमित न रखा जाए। उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच होती है तो यह सामने आ सकता है कि भ्रष्टाचार की कड़ियां कहां से शुरू होती हैं, और कहां तक जाती हैं। हमें आशंका है कि यह मामला केवल एक पटवारी की रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं हो सकता। इसलिए बड़े अधिकारियों, संबंधित कर्मचारियों और यदि किसी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका के संबंध में कोई साक्ष्य सामने आता है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने जांच एजेंसियों से मांग की कि मुआवजा प्रकरणों, जमीन के रिकॉर्ड, सर्वे रिपोर्ट, मूल्यांकन, नामांतरण, सहमति/ग्रामसभा से जुड़े दस्तावेजों और प्रभावित परिवारों की शिकायतों को आपस में जोड़कर जांच की जाए। आदिवासी की मजबूरी को भ्रष्टाचार का अवसर न बनाया जाए। आपने कहा कि विकास परियोजना के नाम पर विस्थापित होने वाले गरीब किसान और आदिवासी प्रशासनिक प्रक्रिया की जटिलताओं से अक्सर अनजान होते हैं। ऐसी स्थिति में यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर रिश्वत मांगता है तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि कमजोर और विस्थापित नागरिक के अधिकारों पर हमला है।

उन्होंने कहा कि हम विकास के विरोधी नहीं हैं। हमारी लड़ाई उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें कानून और अधिकारों को दरकिनार करके गरीब, किसान और आदिवासी को उसके ही अधिकारों के लिए भटकना पड़े। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पूरी व्यवस्था की जांच कराए।

जय किसान संगठन की मुख्य मांगें -

  • संतोष चिकवा रिश्वत प्रकरण की जांच को व्यापक किया जाए
  • रिश्वतखोरी की पूरी कड़ी और संभावित लाभार्थियों की जांच हो
  • संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए
  • यदि जांच में किसी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका के साक्ष्य मिलते हैं तो उसकी भी निष्पक्ष जांच हो
  • केन-बेतवा परियोजना के प्रभावित गांवों में मुआवजा, सर्वे, परिसंपत्ति मूल्यांकन और पुनर्वास प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए
  • आदिवासी और किसान परिवारों की शिकायतों की स्वतंत्र सुनवाई कर उनका निराकरण किया जाए

अमित भटनागर ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता, कानून और प्रभावित लोगों के अधिकारों के लिए है। एक पटवारी पकड़ा गया है तो जांच यहीं खत्म नहीं होनी चाहिए। अगर भ्रष्टाचार की जड़ें ऊपर तक हैं, तो उन्हें भी सामने लाना होगा। छोटी मछली पकड़कर बड़े भ्रष्टाचार को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

वीडियो अमित भटनागर -



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Monday, September 7, 2026

पन्ना पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से “वर्क फ्रॉम होम” का झांसा देकर फ्रॉड करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के 05 सक्रिय सदस्यों को राजस्थान से किया गिरफ्तार


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से “वर्क फ्रॉम होम” का झांसा देकर फ्रॉड करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के 01 विधि-विरुद्ध बालक सहित 05 सक्रिय सदस्यों को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फरियादिया को घर बैठे बुक/कंटेन्ट लिखने का कार्य देकर 05 लाख 87 हजार रूपये की धोखाधड़ी की थी। मामले में गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से ठगी गई राशि में से 5 लाख 82 हजार रूपये बरामद हुए हैं। 

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू ने जानकारी देते हुए आज आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि फरियादिया कुमारी शशि कुशवाहा 19 वर्ष निवासी परषोत्तमपुर थाना कोतवाली पन्ना द्वारा थाना कोतवाली पन्ना में रिपोर्ट की गई कि 17 अगस्त 2026 को वह अपने इंस्टाग्राम अकाउंट का उपयोग कर रही थी। इसी दौरान उसे घर बैठे नौकरी/वर्क फ्रॉम होम से संबंधित एक वीडियो विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में दी गई जानकारी के आधार पर फरियादिया ने टेलीग्राम एप डाउनलोड कर “विश्वाबुक पब्लिकेशन” नामक ग्रुप ज्वाइन किया। ग्रुप के माध्यम से आरोपियों द्वारा फरियादिया को घर बैठे बुक/कंटेन्ट लिखने का कार्य देकर 25 हजार रूपये भुगतान करने का झांसा दिया गया। 

इसके बाद आरोपियों द्वारा अलग-अलग बहाने बनाकर फरियादिया से रजिस्ट्रेशन फीस, डिलीवरी चार्ज, सिक्योरिटी चार्ज, विड्रॉल चार्ज एवं बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन चार्ज आदि के नाम पर लगातार अलग-अलग क्यूआर कोड भेजकर यूपीआई/फोन-पे के माध्यम से रकम ट्रांसफर कराई गई। आरोपियों द्वारा फरियादिया को यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके खाते में उसकी रकम एवं नौकरी से संबंधित भुगतान प्राप्त हो जाएगा। इसी झांसे में फरियादिया से विभिन्न किश्तों में कुल 5 लाख 87 हजार 391 रूपये की राशि ट्रांसफर करा ली गई। फरियादिया की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली पन्ना में अपराध क्रमांक 658/26 धारा 318(4), 319(2) बीएनएस के तहत पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया ।



मामले में गठित पुलिस टीम द्वारा तकनीकी साक्ष्यों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन एवं उपलब्ध डिजिटल जानकारी का विश्लेषण करते हुए आरोपियों की पहचान एवं स्थान का पता लगाया गया। मामले की तकनीकी जानकारी एवं मुखबिर सूचना के आधार पर पुलिस टीम द्वारा संदेही व्यक्तियों को चिन्हित किया जाकर आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु तत्परता से कार्यवाही करते हुए मामले में शामिल 05 व्यक्तियों को दौसा, राजस्थान से पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। 

पूँछताछ किये जाने पर उक्त व्यक्तियों द्वारा बताया गया कि हम लोग सोशल मीडिया पर वर्क फ्रॉम होम के लुभावने विज्ञापन प्रसारित करते हैं, विज्ञापन देखकर हमसे संपर्क करने वाले व्यक्तियों को हम लोग वर्क फ्रॉम होम का भरोसा देकर एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ देते हैं। इसके बाद अलग अलग चार्ज (जैसे - रजिस्ट्रेशन फीस, डिलीवरी चार्ज, सिक्योरिटी चार्ज, विड्रॉल चार्ज एवं बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन चार्ज आदि ) बताकर पैसो की ठगी कर लेते हैं। यही घटना हम लोगो ने फरियादिया शशि कुशवाहा के साथ की थी। पुलिस टीम द्वारा मामले में 04 आरोपियों को गिरफ्तार किया जाकर 01 विधिविरूद्ध बालक को पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है। प्रकरण में आरोपियों से पूछताछ एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विवेचना जारी है ।

धोखाधड़ी और फ्राड के इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में दिलखुश 18 वर्ष निवासी महराजपुरा तालाब गाँव थाना लालसोट जिला दौसा राजस्थान, छोटा उर्फ हेमराज 20 वर्ष निवासी ग्राम करनपुरा थाना लालसोट जिला दौसा राजस्थान, संतोष मीना 23 वर्ष निवासी करनपुरा थाना लालसोट जिला दौसा राजस्थान,अजय कुमार 20 वर्ष निवासी उगरिया बास थाना लालसोट जिला दौसा राजस्थान तथा एक विधि विरूद्ध बालक शामिल है। मामले में पुलिस टीम द्वार गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 5 लाख 82 हजार रूपये नगद एवं 04 मोबाइल (02 आई फोन, 02 एन्ड्रॉयड) कीमती करीब 2 लाख 50 हजार रूपये सहित कुल मशरूका कीमती करीब 8 लाख 32 हजार रूपये का जप्त किया गया है।



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