पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार ने जनहित में पेयजल एवं अन्य निस्तार समस्याओं के दृष्टिगत तथा आम जनता को पेयजल प्रदाय बनाए रखने व जनता की आवश्यकता की पूर्ति के उद्देश्य से इस सम्बन्ध में विधिवत आदेश जारी किया गया है। म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग कर जारी आदेश में जिले के सभी विकासखंड व नगरीय क्षेत्रों को 16 मार्च से 20 जुलाई 2026 तक की अवधि के लिए जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि सिंचाई इत्यादि कार्यों में भूगर्भीय जल का अत्यधिक दोहन होने के कारण पेयजल स्रोतों के जल स्तर में कमी आई है। नलकूपों एवं अन्य जल स्रोत के जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। इस कारण जिले में पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना है। इस संबंध में कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खंड पन्ना द्वारा सार्वजनिक पेयजल स्रोतों की क्षमता प्रभावित न होने के मद्देनजर निजी नलकूप खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई थी।
आदेश लागू होने के उपरांत अब कोई भी व्यक्ति बगैर अनुमति के शासकीय भूमि पर स्थित जल स्रोतों में पेयजल तथा घरेलू प्रयोजनों को छोड़कर अन्य किसी भी प्रयोजन के लिए नहरों में प्रवाहित जल के अलावा अन्य स्रोतों का जल दोहन किन्हीं भी साधनों द्वारा जल का उपयोग नहीं करेगा। जिले के सभी विकासखंड और नगरीय क्षेत्रों के समस्त नदी, नालों, स्टॉप डैम, सार्वजनिक कुओं व अन्य जल स्रोतों का उपयोग घरेलू प्रयोजनों के लिए भी तत्काल प्रभाव से सुरक्षित किया गया है। जल अभावग्रस्त क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति स्वयं अथवा निजी ठेकेदार एसडीएम की अनुज्ञा प्राप्त किए बगैर किसी भी प्रयोजन के लिए नवीन नलकूप का निर्माण नहीं करेगा। शासकीय नलकूप खनन पर यह आदेश लागू नहीं होगा।
निजी भूमि पर नलकूप खनन की लेना होगी अनुमति
स्वयं की निजी भूमि पर नलकूप खनन कार्य के लिए संबंधित व्यक्तियों को निर्धारित प्रारूप में नियत शुल्क के साथ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन करना होगा। इसके लिए सभी एसडीएम को उनके क्षेत्राधिकार अंतर्गत सक्षम अधिकारी प्राधिकृत किया गया है। संबंधित एसडीएम द्वारा अनुमति देने के पूर्व आवश्यक जांच एवं परीक्षण की कार्रवाई पूर्ण की जाएगी तथा अनुमति दिए जाने के संबंध में जनपद पंचायत सीईओ, तहसीलदार एवं नगरीय निकायों के सीएमओ से अभिमत प्राप्त किया जाएगा।
सार्वजनिक पेयजल स्रोत सूखने एवं वैकल्पिक रूप से कोई दूसरा पेयजल स्रोत उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित एसडीएम पेयजल परीक्षण संशोधित अधिनियम 2002 की धारा 4ए तथा 4बी के प्रावधानों के अधीन निश्चित अवधि के लिए निजी पेयजल स्रोत का अधिग्रहण कर सकेंगे। आदेश के उल्लंघन पर संबंधित के विरूद्ध म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 संशोधन 2022 की धारा 9 व भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकेगी। समस्त अनुविभागीय मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, थाना प्रभारी, पीएचई के फील्ड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी, नगरीय निकायों के सीएमओ, जनपद पंचायत सीईओ तथा ग्राम पंचायतों के सचिव को आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के लिए निर्देशित किया गया है।
पशु चारा एवं भूसा के निर्यात व परिवहन पर लगा प्रतिबंध
जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार द्वारा पन्ना जिले में पशुधन के लिए चारा-भूसा की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से जिले के बाहर भूसा चारा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिला मजिस्ट्रेट ने उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश चारा निर्यात नियंत्रण आदेश 2000 में निहित प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से आगामी 31 जुलाई तक भूसा चारा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। अब कोई भी कृषक, व्यापारी, निर्यातक व्यक्ति किसी भी प्रकार से प्रतिबंधित पशुचारा व भूसा का परिवहन किसी वाहन, मोटर या किसी भी यान द्वारा पन्ना जिले के बाहर अन्य जिले में संबंधित क्षेत्र के उपखंड मजिस्ट्रेट की अनुज्ञा के बगैर निर्यात नहीं करेगा। आदेश के क्रियान्वयन व अनुपालन के लिए संबंधित तहसीलदार, नायब तहसीलदार व थाना प्रभारी को दायित्व सौंपा गया है। पशु आहार में आने वाले सभी प्रकार के चारा भूसा को जिले के बाहर सीमावर्ती जिलों में परिवहन एवं निर्यात संबंधी प्रतिबंध के पालन के दौरान संबंधित अधिकारी द्वारा नियत बिंदुओं पर जांच कर उल्लंघन संबंधी प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
जिले में पशु चारा और भूसा की कमी की आशंका के दृष्टिगत पशुओं को पर्याप्त मात्रा में चारा भूसा की आपूर्ति बनाए रखने के संबंध में सीमावर्ती जिलों में पशुचारा व भूसा निर्यात संबंधी प्रतिबंध के तहत नियुक्त अधिकारी पशु चारे के निर्यात के लिए उपयोग में लाए गए साधन को रोककर तलाशी ले सकेंगे या रोकने व तलाशी के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत भी कर सकते हैं। इसके अलावा किसी स्थान में प्रवेश कर तलाशी लेने एवं किसी व्यक्ति को प्रवेश करने व तलाशी लेने के लिए भी प्राधिकृत किया जा सकेगा। जांच के दौरान वस्तुओं को ले जाने के लिए उपयोग में लाए जा रहे पशुओं, यानों, जलयानों, नावों अथवा वाहनों के साथ अधिग्रहित कर सकेगा।
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