Monday, February 23, 2026

पुलिस अधीक्षक पन्ना के निर्देशन पर साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जांच हेतु कार्यशाला आयोजित

  • पुलिस कॉन्फ्रेंस हॉल पन्ना मे आयोजित उक्त प्रशिक्षण मे थाना प्रभारियों सहित 50 से अधिक विवेचना अधिकारी हुये शामिल
  • एन.सी.आर.पी., e-FIR, जे.एम.आई.एस, सी.ई.आई.आर., पोर्टल एवं साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की गई विस्तृत चर्चा


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता नायडू के निर्देशन में आज पुलिस कॉन्फ्रेंस हॉल पन्ना में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं प्रभावी विवेचना के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिले के समस्त थाना प्रभारियों सहित 50 से अधिक विवेचकों को प्रशिक्षित किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों - जैसे सोशल मीडिया दुरुपयोग, ऑनलाइन ठगी, बैंक फ्रॉड, डिजिटल पहचान चोरी, फिशिंग आदि की त्वरित एवं प्रभावी जांच सुनिश्चित करना तथा विवेचकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना रहा। पुलिस अधीक्षक पन्ना के निर्देशन में जिले के सभी थाना क्षेत्रों में साइबर हेल्पडेस्क की स्थापना की जा चुकी है, जिससे आमजन की शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।

अतरिक्त पुलिस अधीक्षक पन्ना सुश्री वन्दना सिंह चौहान की उपस्थिति मे आयोजित उक्त प्रशिक्षण में जिला साइबर टास्क फोर्स के कर्मचारी प्र.आर. राहुल सिंह बघेल, आशीष अवस्थी, धर्मेन्द्र सिंह आर. राहुल पाण्डेय, नितिन नवराज, उपनेन्द्र सिंह, द्वारा अधिकारियों को साइबर अपराधों की तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्य के संकलन, संरक्षण एवं विश्लेषण की विधि तथा आवश्यकतानुसार उच्च स्तरीय एजेंसियों से समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यशाला में विभिन्न महत्वपूर्ण पोर्टलों के उपयोग संबंधी प्रशिक्षण भी दिया गया, जिनमें मोबाइल ट्रेसिंग हेतु सी.ई.आई.आर. (CEIR) पोर्टल, साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों के लिए एन.सी.आर.पी. (NCRP) पोर्टल तथा अन्य राज्यों से समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई हेतु सी.आई.ए.आर. (CIAR) पोर्टल शामिल हैं। इन पोर्टलों के माध्यम से विवेचक अब साइबर अपराधों की त्वरित जांच एवं धनराशि फ्रीज/रिकवरी जैसी कार्यवाही समयबद्ध रूप से कर सकेंगे।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को यह भी अवगत कराया गया कि Ministry of Home Affairs द्वारा National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर 01 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों में ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज करने का प्रावधान लागू किया गया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत यदि पीड़ित द्वारा पोर्टल पर 1 लाख रुपये से अधिक की धनराशि की ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की जाती है, तो संबंधित प्रकरण स्वतः संबंधित राज्य/जिला पुलिस को अग्रेषित होता है तथा त्वरित विधिक कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। अधिकारियों को ई-एफआईआर की प्रक्रिया, शिकायत के सत्यापन, प्रारंभिक जांच, संबंधित बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराने, डिजिटल साक्ष्य संकलन तथा समयबद्ध विवेचना के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रावधान से गंभीर साइबर वित्तीय अपराधों में शीघ्र कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित होगी एवं पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने में सहायता मिलेगी।

प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों द्वारा बैंक खातों, यूपीआई, एटीएम फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग एवं अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित मामलों में तत्काल तकनीकी कार्यवाही संभव हो सकेगी। विशेष रूप से ऑनलाइन ठगी के मामलों में प्रारंभिक 24 घंटे को “गोल्डन आवर” माना जाता है, जिसमें त्वरित सूचना एवं कार्रवाई से ठगी गई धनराशि की रिकवरी की संभावना अधिक रहती है।

कार्यशाला के दौरान साइबर फ्रॉड की पहचान करने की तकनीक, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया, फॉरेंसिक जांच की मूलभूत जानकारी, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के उपयोग तथा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का भी व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। वास्तविक प्रकरणों की केस स्टडी के माध्यम से अधिकारियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से भी प्रशिक्षित किया गया।

पन्ना पुलिस जनता की सुरक्षा के प्रति सदैव सजग है एवं डिजिटल युग में नागरिकों को सुरक्षित एवं भरोसेमंद वातावरण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नागरिकों से अपील है कि साइबर अपराध से संबंधित किसी भी घटना की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा अपने नजदीकी थाना के साइबर हेल्पडेस्क पर दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

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Saturday, February 21, 2026

पन्ना जिले में 7 लाख 50 हजार 769 मतदाता पंजीकृत

  • एसआईआर मतदाता सूची का हुआ अंतिम प्रकाशन
  • सूची के प्रकाशन उपरांत बढ़े 14 हजार 837 मतदाता


पन्ना। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पन्ना जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 अंतर्गत शनिवार को पन्ना, पवई एवं गुनौर विधानसभा की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया। इस मौके पर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ऊषा परमार की अध्यक्षता में राजनैतिक दल की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें जानकारी दी गई कि 21 फरवरी को एसआईआर मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन उपरांत जिले में कुल 7 लाख 50 हजार 769 मतदाता पंजीकृत हैं, जबकि इसके पहले 23 दिसम्बर को प्रकाशित प्रारंभिक मतदाता सूची में 7 लाख 35 हजार 932 मतदाता दर्ज थे। एसआईआर घोषणा तिथि 27 अक्टूबर की स्थिति में 7 लाख 76 हजार 76 मतदाता शामिल थे। सूची के प्रारंभिक प्रकाशन से अंतिम प्रकाशन की अवधि में शुद्ध रूप से कुल 14 हजार 837 मतदाताओं की वृद्धि हुई है। 

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अंतर्गत विभिन्न चरणों में संपन्न कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आयोग के निर्देश मुताबिक सफल रूप से संपन्न हुई एसआईआर की समस्त गतिविधियों में निर्वाचन कार्य में संलग्न लोकसेवकों सहित सभी राजनैतिक दल का सहयोग भी सराहनीय रहा है। बैठक में राजनैतिक दल के अध्यक्ष व प्रतिनिधियों से प्रकाशित मतदाता सूची के संबंध में आवश्यक जानकारी को बूथ लेवल एजेन्ट तक पहुंचाने की अपेक्षा की गई। 

बैठक में विधानसभावार फोटोरहित मतदाता सूची की सीडी का वितरण किया गया। साथ ही फोटोयुक्त मतदाता सूची का सेट भी प्रदान किया गया। इस दौरान निरंतर रूप से नवीन नाम जोड़ने, निरसन और संशोधन के संबंध में अवगत कराया गया। बताया गया कि जिले में कुल एक हजार 4 मतदान केन्द्र हैं। एसआईआर प्रक्रिया अंतर्गत 23 दिसम्बर से 22 जनवरी तक दावा आपत्ति प्राप्त करने की अवधि निर्धारित थी। इस दौरान नवीन नाम जोड़ने के लिए 17 हजार 399 आवेदन स्वीकृत हुए, जबकि निरसन के लिए 2 हजार 122 आवेदन तथा आवश्यक संशोधन के लिए 6 हजार 357 आवेदन स्वीकृत हुए हैं। 

अंतिम मतदाता सूची अनुसार पवई विधानसभा में सर्वाधिक 2 लाख 77 हजार 144 मतदाता हैं। इनमें एक लाख 48 हजार 208 पुरूष मतदाता एवं एक लाख 28 हजार 936 महिला मतदाता शामिल हैं। गुनौर विधानसभा में एक लाख 22 हजार 834 पुरूष एवं एक लाख 5 हजार 653 महिला मतदाता सहित कुल 2 लाख 28 हजार 487 मतदाता हैं। इसी तरह पन्ना विधानसभा में 2 लाख 45 हजार 138 मतदाता शामिल हैं। इनमें एक लाख 32 हजार 152 पुरूष मतदाता, एक लाख 12 हजार 985 महिला मतदाता तथा एक अन्य मतदाता शामिल है। पन्ना विधानसभा में 185, पवई में 41 और गुनौर में 89 सर्विस वोटर्स हैं। 

एसआईआर प्रक्रिया में जिले के तीन विधानसभा अंतर्गत लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी एवं नो मैपिंग के एक लाख 46 हजार 466 नोटिस जारी कर तामील करवाए गए एवं सुनवाई का अवसर प्रदान कर प्रारंभिक सूची के आधार पर एक हजार 547 नाम विलोपित करने की कार्रवाई की गई। राजनैतिक दल की बैठक में अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी मधुवंतराव धुर्वे, निर्वाचन पर्यवेक्षक उमाशंकर दुबे सहित भारतीय जनता पार्टी से आशीष तिवारी एवं राजेश गुप्ता, इंडियन नेशनल कांग्रेस से राजबहादुर पटेल, बहुजन समाज पार्टी से चौधरी एस.बी. रमन और आम आदमी पार्टी से अंजली यादव उपस्थित रहीं।

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Thursday, February 19, 2026

बेहद जायकेदार होती है अजयगढ क्षेत्र की अरहर दाल

अजयगढ़ क्षेत्र के सिद्धपुर ग्राम में अरहर के खेत का दृश्य ( फोटो : ज्ञानेन्द्र तिवारी )

पन्ना। बुंदेलखंड क्षेत्र में पैदा होने वाली अरहर की दाल अपनी उच्च गुणवत्ता, प्राकृतिक स्वाद और पोषण के लिए प्रसिद्ध है, यह अनपॉलिश्ड (unpolished) अरहर फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है। अरहर की खेती व पैदावार को द्रष्टिगत रखते हुए इस पूरे इलाके को दाल का कटोरा भी कहा जाता है। यह क्षेत्र विशेषकर महोबा, हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट दाल के प्रमुख उत्पादक के रूप में जाने जाते हैं, यही वजह है कि इस इलाके को 'दाल का कटोरा' कहा जाता है।

खाने की थाली में यदि अरहर की दाल न हो तो भोजन करने पर पेट तो भर जाता है लेकिन संतुष्टि नहीं मिलती। बुंदेलखंड के बाँदा व चित्रकूट जिले से सटे विन्ध्यांचल पहाड़ियों की गोद में बसे अजयगढ की अरहर दाल का स्वाद बेहद जायकेदार होता है। अजयगढ क्षेत्र में उत्पादित होने वाली दाल को खाने के बाद फिर और कहीं की दाल रास नहीं आती। चावल के साथ अजयगढ़ की दाल खाने का मजा ही और है। अजयगढ के आरामगंज, सिंहपुर से लेकर सिद्धपुर व कालिंजर तक हर तरफ जिधर देखो वहां अरहर के खेत नजर आते हैं। विन्ध्यांचल की प्राचीन पहाड़ियों की तलहटी में अरहर की फसल से लहलहाते खेतों को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है। 

बताया जा रहा है कि बुंदेलखंड क्षेत्र में पैदा होने वाली अरहर की दाल को जल्द ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने वाली है। इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद अरहर की दाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और किसानों को दाल बेचने पर बेहतर दाम मिलेंगे। यहाँ की दाल पकाने में हल्की, क्रीमी और नरम होती है, जो अपनी पौष्टिकता के लिए जानी जाती है। यह दाल स्वास्थ्य के लिए उत्तम मानी जाती है, जिसे सुपाच्य होने के कारण सूप के रूप में भी पसंद किया जाता है।

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Tuesday, February 17, 2026

पेयजल समस्या से जूझ रहा गांव अब बन रहा पानीदार

  • पानी बचाने की मिसाल बना पन्ना जिले का फुलवारी गांव
  • गांव को जल संकट से निजात दिलाने पंचायत संकल्पित 
  • बचे हुए घरों में पंचायत पूरा करायेगी रूफवाटर हार्वेस्टिंग


पन्ना। दशकों से पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे इस गांव की कहानी बहुत दिलचस्प और प्रेरणादायी है। बारिश के पानी का संरक्षण करने की पहल से यह गांव अब पानीदार हो गया है। जिन हैंडपम्पों से जनवरी के महीने से ही पानी की जगह सिर्फ हवा निकलने लगती थी, अब उनसे स्वच्छ पानी निकल रहा है। वर्षा जल संचय की तकनीक अपनाने से ग्रामीणों को अब खारे पानी की समस्या से भी निजात मिल गई है। इस अनूठे बदलाव से पन्ना जिले का फुलवारी गांव अन्य दूसरे गांवों के लिए जो जल संकट का सामना कर रहे हैं, उनके लिए मिशाल बन गया है।   

उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय पन्ना से 38 किलोमीटर दूर स्थित फुलवारी गांव में कुल 162 परिवार रहते हैं। तक़रीबन 500 की आबादी वाला यह गांव दशकों से पानी की कमी और इसके खारेपन की समस्या से जूझ रहा था। जनवरी से ही गांव के कुएं और बोरवेल सूखने लगते थे, जिससे ढाई किलोमीटर पैदल चलकर गांव की महिलाओं को दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता था। महिलाएं झुंड बनाकर इटवा तिलहा गांव पानी लेने जाया करती थीं। पानी की कमी इस गांव की पहचान बन चुकी थी। जनवरी 2025 में यहां जल जीवन मिशन ने हर घर नल से जल पर काम करना शुरू किया। 

सरकार के साथ ही एक निजी संस्था समर्थन ने भी ग्रामीणों की मदद के लिए आगे आया। दरअसल, समर्थन पन्ना जिले के 32 पंचायतों के 40 गांवों में जल जीवन मिशन और अटल भू-जल योजना में सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। इन्हीं में फुलवारी भी शामिल है। गांव में जल संकट को देखते हुए संस्था ने वर्षा जल संचयन पर कार्य करने की योजना बनाई। ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। हालांकि यह काम इतना आसान नहीं था। क्योंकि ग्रामीण सुबह होते ही मजदूरी के लिए गांव से निकल जाते थे। संस्था ने महिलाओं को जागरूक करना शुरू किया।

स्कूल में वर्षा जल संचयन की अनुमति मिलते ही आया बदलाव

शुरुआती संघर्ष और लोगों की मानसिकता बदलने में ज्यादा समय नहीं लगा। समर्थन के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. योगेश कुमार बताते हैं कि संस्था ने यह पहल शुरू की तो गांव के लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनका मानना था कि जल संचयन संरचना का निर्माण व्यर्थ है और इससे कोई लाभ नहीं होगा। कई ग्रामीणों ने संस्था पर अविश्वास जताया और उनके प्रयासों को नकार दिया। वे इसे एक सरकारी या गैर-सरकारी योजना समझकर नजर अंदाज कर रहे थे, लेकिन संस्था के ब्लॉक समन्वयक कमल ने गांव की महिला कविता, राखी और माया को जल मित्र बनाया और उन्हें साथ लेकर ग्रामीणों को जागरूक करने लगे।


उनकी मेहनत का पहला परिणाम तब देखने को मिला जब पंचायत की मदद से गांव के स्कूल ने अपनी छत पर वर्षा जल संचयन संरचना के निर्माण की अनुमति दे दी गई। बस यहीं से बदलाव शुरू हो गया। गांव के स्कूल में एक हैंडपंप था, जो दिसंबर और जनवरी में सूख जाया करता था। संस्था ने स्कूल की छत से वर्षा जल को पाइप के माध्यम से जमीन के अंदर भेजने के लिए एक जल संचयन संरचना बनाई। कुछ ही महीनों में इसका असर दिखने लगा। जो हैंडपंप सर्दियों में ही पानी देना बंद कर देता था, वह अब साल भर पानी देने लगा। सबसे बड़ी बात यह थी कि पहले पानी खारा होता था, लेकिन अब मीठा पानी मिलने लगा। 

यह बदलाव ग्रामीणों के लिए चौकाने वाला था। जो लोग पहले जल संचयन संरचनाओं के निर्माण को लेकर संदेह में थे, वे अब इसे अपनाने के लिए आगे आने लगे। जिले के कई पंचायत के प्रतिनिधि ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यो ने ग्राम का भ्रमण कर परिणाम को देखा एवं सरपंच कीर्ति बागरी एवं सचिव अखिलेश गर्ग से समझा। ग्राम पंचायत के सचिव का कहना है कि हमारा संकल्प फुलवारी गांव को पानीदार बनाकर ग्रामीणों को स्वच्छ मिठा पानी उपलब्ध करना है, इस लक्ष्य को हम हासिल करके ही रहेंगे। गांव के लोगो ने जनभागीदारी करके जिले के लिये एक मिशाल कायम किया है। समर्थन टीम के सक्रिय  सहयोग से ग्राम पंचायत भी फुलवारी गांव को पानीदार बनाने के लिए उत्साहित और संकल्पित है। 

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Friday, February 13, 2026

प्राकृतिक खेती से कृषि लागत में आ सकती है कमी

  •  मौसम परिवर्तन के प्रभाव की रोकथाम के साथ प्राकृतिक खेती अपनाने से जलवायु एवं पर्यावरण भी रहेगा सुरक्षित


पन्ना। मौसम परिवर्तन (Climate Change) से फसल उत्पादन में कमी, अनिश्चित बारिश और कीटों का प्रकोप बढ़ा है। प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य को सुधारकर, जल संरक्षण कर और कार्बन सोखकर (Carbon Sequestration) जलवायु अनुकूल लचीलापन प्रदान करती है। यह रसायनों का उपयोग कम कर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करती है, जिससे यह टिकाऊ कृषि का एक प्रमुख समाधान है। प्राकृतिक खेती न केवल जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम करती है, बल्कि यह किसानों के लिए कम लागत में टिकाऊ आय का साधन भी बन रही है। 

हमारा देश कृषि प्रधान देश है। जलवायु में आ रहे परिवर्तन से किसान प्रभावित न हो इसके लिये जिले के जनकपुर में स्थिति केवीके के वैज्ञानिक लगातार सलाह दे रहे है। डा.पी.एन.त्रिपाठी,डा. आरके जायसवाल,डा.आरपी त्रिपाठी एवं रितेश बगोरा ने तकनीकी सलाह एवं किसान भाईयो को कम लागत से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सलाह भी दे रहे हैं। जिले की कई संस्थाये प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं।

मौसम में आ रहे परिवर्तन से फसल पर प्रभाव न पड़े इसके लिये किसान गेंहू एवं चने में पुष्प अवस्था में तापमान से राहत एवं नुकशान से बचने के लिये फसल को जीवन चक्र पूरा करने के लिये 05234 एवं वोरान का घोल बनाकर छिड़काव कर दें, ताकि पोषक तत्व  एवं पोषण मिले। वोरान पोषक तत्व है, फसल के जड़ो तक पहचेगा तो फसल उत्पादन अच्छा होगा। बोरान एवं 05234 का घोल गेहू एवं चना में डालने से फायदा होगा।

टमाटर एवं सब्जी के उत्पादन में जैविक खाद एवं कीटनाशक का उपयोग करें ताकि मानव जाति स्वास्थ्य रहे एवं किसान की लगात को कम किया जा सके।

प्राकृतिक खेती से उत्पादित सब्जियां न सिर्फ स्वास्थ्य को बेहतर रखती हैं अपितु इन सब्जियों का स्वाद भी रुचिकर होता है। प्राकृतिक खेती अपनाने से कृषि लागत में जहाँ कमी आयेगी वहीं पर्यावरण भी सुरक्षित होगा।

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Monday, February 9, 2026

दुर्लभ प्रवासी पक्षी ब्लूथ्रोट की सलेहा क्षेत्र के पटना–तमोली में उपस्थिति दर्ज


मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में सलेहा क्षेत्र अंतर्गत पटना–तमोली में बर्ड वाचिंग के दौरान दुर्लभ प्रवासी पक्षी ब्लूथ्रोट की उपस्थिति दर्ज की गई है। प्रकृति संरक्षण कार्यकर्ता अजय चौरसिया द्वारा ली गई स्पष्ट तस्वीरों के आधार पर क्षेत्र में इस आकर्षक प्रवासी पक्षी की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

ब्लूथ्रोट फ्लाईकैचर परिवार से संबंधित एक कीटभक्षी प्रवासी पक्षी है। यह प्रजाति यूरोप, पैलिआर्कटिक क्षेत्र तथा पश्चिमी अलास्का में पाई जाती है और शीत ऋतु में 8 से 10 हजार किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय कर भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंचती है।

लगभग 13 से 14 सेंटीमीटर लंबा यह पक्षी अपने विशिष्ट सौंदर्य के लिए जाना जाता है। नर ब्लूथ्रोट के गले पर मौजूद चमकीला नीला रंग, जिसके मध्य सफेद अथवा हल्का लाल धब्बा होता है, इसकी पहचान बनाता है। भूरी-स्लेटी पीठ और हल्के रंग का पेट इसके सौंदर्य को संतुलित रूप देता है।सलेहा क्षेत्र अंतर्गत पटना–तमोली में दशकों से किए जा रहे प्रकृति संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब जैव विविधता के रूप में सामने आ रहा है। 

विशेषज्ञों के अनुसार, इतने लंबे प्रवास के बाद इस पक्षी का यहां ठहराव क्षेत्र की सुरक्षित पारिस्थितिकी का प्रमाण है। संरक्षण कार्यकर्ताओं का मानना है कि ब्लूथ्रोट जैसे दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी भविष्य में और अधिक प्रजातियों के आगमन की संभावना को मजबूत करती है।

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पुणे शहर के छत्रपति शिवाजी पार्क में पक्षी दर्शन


महाराष्ट्र में पुणे शहर व इसके आसपास अनेकों हरे-भरे पार्क, झीलें और तालाब हैं। यहाँ पिंपरी-चिंचवड के मध्य में स्थित छत्रपति शिवाजी पार्क शहरी जंगल के बीच छिपा एक हरा-भरा मनोरम स्थल है, जहाँ आप शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर प्रकृति की गोद में शांति और सुकून का अनुभव कर सकते हैं। यह विशाल पार्क सुबह व शाम की सैर के लिए बेहद उपयुक्त और आदर्श स्थल है। 


इस पार्क में एक झीलनुमा जल संरचना भी है, जहाँ अनेकों प्रजाति के जलीय पक्षी नजर आते हैं। यहाँ के विशालकाय वृक्षों, बांस के सुन्दर झुरमुटों और बनस्पतियों के बीच पक्षियों का कलरव सुमधुर संगीत की तरह गूंजता रहता है। पक्षियों की इस निराली दुनिया को निहारने तथा उनकी जीवन चर्या को समझने का बीते रविवार को मुझे भी अनूठा अवसर मिला। सैकड़ों प्रजाति के पक्षियों को जानने व समझने वाले प्यूष शेखसरिया जी की मौजूदगी व मार्गदर्शन ने पक्षी दर्शन के इस भ्रमण को यादगार बना दिया है। इकोलॉजिकल सोसाइटी ने यह सुंदर अवसर प्रदान किया, जिसमें कई पेड़ पौधों व वनस्पतियों के बारे में रोचक जानकारी मिली। पक्षी दर्शन के इस भ्रमण में शामिल सभी प्रतिभागियों ने इस अवसर का खूब लुत्फ़ उठाया। 


इस भ्रमण में शामिल रहीं इकोलॉजिकल सोसाइटी के प्रतिनिधि ने एक ऐसे पौधे से परिचय कराया जिसका पौराणिक महत्त्व भी है। बेहद सुंदर नारंगी-लाल सुगंधित फूलों और औषधीय गुणों के लिए यह पेड़ प्रसिद्ध है। रामायण में सीता माता द्वारा लंका की अशोक वाटिका में इस वृक्ष के नीचे समय बिताने के कारण इसे 'सीता अशोक' कहा जाता है।

पौराणिक मान्यता है कि जब रावण ने माता सीता का हरण किया था, तब उन्हें लंका में अशोक वाटिका में रखा था। वहां माता सीता अशोक के वृक्षों के नीचे रहा करती थीं, शायद इसी वजह से इस पेड़ को सीता अशोक कहा जाता है। फाल्गुन के महीने में इसके फूलों की महक से आसपास का इलाका गमक उठता है। सीता अशोक या साराका अशोक पेड़ पर फरवरी से मार्च तक के महीने में फूल खिलने लगते हैं, इसके फूल काफी खूबसूरत और गुच्छेदार होते हैं। यह  पेड़ व इसके फूल औषधीय गुणों से भरपूर हैं, इसी पेड़ की छाल से ‘अशोकारिष्ठ’ नाम की दवा बनती है। 

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Saturday, February 7, 2026

केन–बेतवा विस्थापितों का फूटा आक्रोश, रुकवाया निर्माण कार्य

  • सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने मुख्य बांध स्थल पर किया जंगी प्रदर्शन 
  • विस्थापितों को जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा


पन्ना। देश की बहुचर्चित व केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर चर्चा में है।केन–बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत बन रहे प्रमुख ढोढऩ बांध के निर्माण स्थल पर शुक्रवार को सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल अधिकांश महिलाएं आदिवासी समुदाय से हैं। महिलाओं ने प्रशासन पर कानून का पालन न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए बांध के निर्माण कार्य को रुकवा दिया।

प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि बांध का निर्माण बिना वैधानिक प्रक्रिया, बिना वास्तविक ग्राम सभा की सहमति और कानून की खुलेआम अनदेखी कर किया जा रहा है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन कानून के नाम पर फर्जी ग्राम सभाएं और आमसभाएं आयोजित कर रहा है, जबकि वास्तविक विस्थापितों की आवाज़ को दबाया जा रहा है।

आदिवासी महिलाओं का कहना है कि जब भी वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों और कानून के पालन की मांग करती हैं, तो उनके विरोध प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज कराया जाता है। वहीं दूसरी ओर, उनके घर-परिवार और आजीविका को डुबोने वाले बांध का निर्माण अवैध रूप से जारी रखा गया है। प्रदर्शनकारियों ने बांध निर्माण को लोकतंत्र और संविधान का अपहरण बताते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी विकास के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून, अधिकार और सम्मान के लिए है।

इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि “केन–बेतवा परियोजना में प्रशासन पूरी तरह मनमानी पर उतारू है। कानून, संविधान और आदिवासी अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। जब तक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं होगा और विस्थापितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।”

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Thursday, February 5, 2026

नागौद-खजुराहो रेलवे प्रोजेक्ट के स्टोर रूम से हुई चोरी में इलेक्टिकल इंजीनियर सहित माल खरीदने वाला आरोपी गिरऱफ्तार

  • आरोपियों के कब्जे से चोरी गया केबल, वायर, पीवीसी पाइप एवं अन्य इलेक्ट्रिकल सामग्री सहित घटना मे प्रयुक्त पिकप वाहन एवं 01 मोबाइल फोन कुल कीमती करीब 20 लाख रुपये का मशरूका किया गया जप्त


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में देवेंद्रनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत रेलवे प्रोजेक्ट से हुई बड़ी चोरी का पुलिस ने खुलासा किया है। मामले में प्रोजेक्ट मे कार्य कर रहे आरोपी इलेक्टिकल इंजीनियर सहित चोरी का माल खरीदने वाले आरोपी को गिरऱफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी गया केबल, वायर, पीवीसी पाइप एवं अन्य इलेक्ट्रिकल सामग्री सहित घटना मे प्रयुक्त पिकप वाहन एवं 01 मोबाइल फोन कुल कीमती करीब 20 लाख रुपये का मशरूका जप्त हुआ है। 

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू ने जानकारी देते हुए आज बताया कि फरियादी रामप्रसाद शर्मा निवासी ग्राम थौलाई, तहसील जमवा रामगढ़, जिला जयपुर (राजस्थान) हाल निवासी ग्राम फुलवारी थाना देवेंद्रनगर द्वारा थाना देवेंद्रनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि के-3 कंस्ट्रक्शन कंपनी का नागौद से खजुराहो रेलवे स्टेशन तक निर्माण कार्य प्रगतिरत है। ग्राम फुलवारी स्थित रेलवे स्टेशन भवन के एक हाल में कंपनी द्वारा स्टोर बनाया गया था, जिसमें लगभग 30 लाख रुपये का इलेक्ट्रिकल सामान रखा हुआ था। स्टोर रूम में रखा इलेक्ट्रिकल सामग्री चोरी हो गया था। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना देवेंद्रनगर में अपराध क्रमांक 57/26, धारा 331(4), 305(ए) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

मुखबिर की सूचना के आधार पर संदेही इलेक्ट्रिकल इंजीनियर अंकित माथुर को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसने चोरी किया गया माल नागोद निवासी राकेश गर्ग को बेच दिया है। तत्पश्चात राकेश गर्ग को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई, जिसके गोदाम से चोरी गया संपूर्ण माल बरामद किया गया। उक्त संपूर्ण कार्यवाही में थाना प्रभारी देवेंद्रनगर उप निरीक्षक संतोष यादव, प्र.आर. धीरेन्द्र सिंह, लक्ष्मी नारायण यादव, वीर नारायण सिंह, आर. बृजेंद्र रैकवार, रोहित बागरी एवं सायबर सेल टीम की सराहनीय भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक पन्ना द्वारा पुलिस टीम को पुरस्कृत किए जाने की घोषणा की गई है।

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Wednesday, February 4, 2026

उड़ीसा से अवैध गाँजा की तस्करी कर पन्ना लाने वाले 05 आरोपी गिरफ्तार, 17 किलो 720 ग्राम गाँजा जप्त

  • पन्ना पुलिस द्वारा विगत 02 माह में अवैध मादक पदार्थ गांजा की तस्करी के मामले में कुल 07 प्रकरण कायम कर 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 01 क्विंटल गांजा कीमती करीब 15 लाख रुपये का जप्त किया गया है।


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की पुलिस ने उड़ीसा राज्य से अवैध गाँजा की तस्करी कर पन्ना लाने वाले 05 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 17 किलो 720 ग्राम अवैध मादक पदार्थ (गाँजा) कीमती करीब 03 लाख 50 हजार रूपये का जप्त किया है। आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू ने जानकारी देते हुए आज बताया कि पवई एवं देवेन्दनगर थाना क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थ (गाँजा) लिये पाये जाने पर 05 आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की गई है। आपने बताया कि जिले के समस्त थाना प्रभारियों को अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, विक्रय, उत्पादन एवं भण्डारण में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। उक्त निर्देशो के पालन मे समस्त थाना प्रभारियों द्वारा अपने-अपने थाना क्षेत्रो मे मुखविर तंत्र सक्रिय कर अवैध मादक पदार्थ मे संलिप्त व्यक्तियो पर कार्य़वाहियां की जा रही है। पन्ना पुलिस द्वारा विगत 02 माह में अवैध मादक पदार्थ गांजा की तस्करी के मामले मे कुल 07 प्रकरण कायम कर 15 आरोपियो को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 01 क्विंटल गांजा कीमती करीब 15 लाख रुपये का जप्त किया गया है।

आपने बताया कि स्टील के पाइप में अवैध मादक पदार्थ गांजा भरे हुए दो आरोपियों को पवई थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से सूखा गांजा कुल वजनी 8 किलो  कीमती करीब 01 लाख 60 हजार रुपये का पाया गया। गिरफ्तार आरोपियों में रामगोपाल पटेल 40 वर्ष निवासी झमटुली थाना बमीठा जिला छतरपुर तथा महेन्द्र पटेल 22 वर्ष निवासी पठारी थाना बिजावर जिला छतरपुर हैं। आरोपियों को गिरफ्तार किया जाकर उनके विरूद्ध थाना पवई में एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गांजा उड़ीसा से सस्ते दामों में पन्ना एवं आसपास के जिलो में विक्रय हेतु लाया गया था।

इसी तरह जिले के देवेन्द्रनगर थाना पुलिस ने अवैध मादक पदार्थ गांजा बैग एवं थैला में लिए हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। मुखबिर से मिली सूचना  पर पन्ना-सतना मुख्य मार्ग स्थित सुन्दरा तिराहा पर पुलिस टीम द्वारा संदिग्ध बस वाहन को रोककर तीनों संदेहियों को बस से उतारकर तलाशी ली गई। तलाशी मे आरोपियों के कब्जे से कुल 09 किलो 720 ग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 01 लाख 90 हजार रुपये है। पूछताछ में आरोपियों ने गांजा उड़ीसा राज्य से सस्ते दाम में लाकर पन्ना एवं आसपास के जिलो में विक्रय हेतु लाना स्वीकार किया। उक्त कृत्य धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत दंडनीय पाए जाने से थाना देवेन्द्रनगर में अपराध पंजीबद्ध कर आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में ब्रजेश निषाद 20 वर्ष निवासी सेमरी पोस्ट बम्हौरी थाना धाता जिला फतेहपुर (उ.प्र.), पवन पटेल 19 वर्ष निवासी ग्राम पुतरयान थाना बमीठा जिला छतरपुर तथा भुमन पटेल 18 वर्ष निवासी ग्राम पुतरयान थाना बमीठा जिला छतरपुर (म.प्र.) हैं। उक्त दोनो प्रकरण में आरोरियों के कब्जे से 17 किलो 720 ग्राम अवैध मादक पदार्थ (गाँजा) कीमती करीब 03 लाख 50 हजार रूपये का जप्त किया गया है। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि आरोपीगण मादक पदार्थ गांजा की तस्करी करने के लिए अत्यंत शातिर तरीकों का उपयोग कर रहे थे। आरोपियों द्वारा गांजे को खाने के डिब्बों, झाड़ू हैंडल, स्टील के पाइप, प्लास्टिक के तसले, बैग, जूते, पानी की बोतलों एवं टिफिन बॉक्स के भीतर कम्प्रेस कर भर दिया जाता था, जिससे बाहरी रूप से किसी भी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो। 

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