Tuesday, May 5, 2026

पन्ना टाइगर रिजर्व के दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध मौत, मॉनिटरिंग व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न


पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में एक दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध मौत का मामला प्रकाश में आया है। कुछ दिनों पूर्व एक वयस्क नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि आज एक और बाघ की मौत होने की खबर आने के बाद से पन्ना टाइगर रिज़र्व में हड़कंप मचा है।

उल्लेखनीय है कि अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा के आसपास यह बाघ देखा गया था। जिसे रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा गया था। लेकिन स्वस्थ हालत में छोड़े गए इस दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पन्ना टाइगर रिजर्व एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस बाघ को सप्ताह भर पूर्व आबादी क्षेत्र से सुरक्षित पकड़कर गहन चिकित्सीय परीक्षण के बाद पूरी तरह स्वस्थ बताते हुए कोर एरिया में छोड़ा गया था, उसकी अचानक मौत ने वन्यजीव सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

जानकारी के अनुसार मंगलवार की सुबह अमानगंज वन परिक्षेत्र की रमपुरा बीट के हाथीडोल क्षेत्र में एक नाले के पास उक्त बाघ का शव मिला। यह वही बाघ है जिसे 26 अप्रैल 2026 को ग्राम तारा के आबादी क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था। बाघ को रेडियो कॉलर पहनाकर उसकी सतत निगरानी का दावा किया जा रहा था, इसके बावजूद उसकी मौत कैसे हुई- यह सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है। रेस्क्यू के बाद कॉलरिंग कर उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया गया था। ऐसे में एक सप्ताह के भीतर ही उसकी संदिग्ध मौत होना कई सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व बृजेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि मृत पाए गए इस बाघ को पन्ना टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र अमानगंज बफर के पास तारा ग्राम से विगत 26 अप्रैल को रेस्क्यू किया गया था। रेस्क्यू उपरांत बाघ को पन्ना टाइगर रिज़र्व कोर क्षेत्र में स्वस्थ अवस्था में रेडियो कॉलर पहनाकर छोड़ा गया था। उक्त बाघ की हाथियों और वनकर्मियों द्वारा सतत निगरानी की जा रही थी। चिकित्सक दल द्वारा पोस्टमार्टम के उपरांत बताया गया कि उक्त बाघ के शरीर के विभिन्न अंगों में घाव के निशान हैं एवं Vertebral bone, Skull bone भी टूटी पाई गई। जिससे यह प्रतीत होता है कि बाघ की मत्यु प्रथम दृष्टया आपसी संघर्ष के कारण हुई होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने पर मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा। पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए समस्त सैंपल सक्षम प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेज दिए गए हैं।

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Saturday, April 25, 2026

सूखे कुंए में 15 घंटे साथ रहे बछड़ा और तेंदुआ, दिखा दोस्ती का अनोखा रिश्ता

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक सूखे कुंए में तेंदुआ और बछड़ा गिर गए, इस गहरे कुंए में दोनों तक़रीबन 15 घंटे तक साथ रहे। आश्चर्य की बात यह रही कि छोटे बछड़े को शिकारी तेंदुए ने किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। संकट की घडी में दोनों के बीच बहुत ही आत्मीय और दोस्ताना रिश्ता कायम रहा, जबकि बछड़ा तेंदुए का पसंदीदा शिकार है। बछड़ा और तेंदुआ के कुंआ में गिरने की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने इन दोनों को सुरक्षित कुएं से बाहर निकाला। यह वाकया इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। 

यह अनोखा मामला पन्ना जिले के रैपुरा वन परिक्षेत्र के ग्राम मक्केपाला का है। जहां एक तेंदुआ और बछड़ा करीब 15 घंटे तक एक ही कुएं में फंसे रहे, जिन्हे वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को बड़ी सूझबूझ के साथ रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की। जानकारी के अनुसार पन्ना जिले के दक्षिण वनमंडल के रैपुरा रेंज अंतर्गत अलौनी बीट के ग्राम मक्केपाला में तेंदुआ और बछड़ा एक ही कुंए में गिर गए थे। करीब 15 घंटे तक दोनों साथ फंसे रहे, फिर भी तेंदुआ जो कि बछड़े का शिकारी माना जाता है, उसने बछड़े कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। कुंए के भीतर अविश्वसनीय नजारा दिखाई दिया, कभी बछड़ा तेंदुए की पीठ पर बैठता तो कभी तेंदुआ उसके पास जाकर उसे चाटता नजर आया। दोनों के बीच संकट के समय बनी यह दोस्ती अब एक मिसाल बन चुकी है। 

सूखे और गहरे कुंए से इन दोनों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने शानदार तरीका अपनाया। उन्होंने लकड़ी के लट्ठों और रस्सियों से अस्थायी सीढ़ी तैयार की, जिसके सहारे तेंदुआ सुरक्षित बाहर निकल आया। रेस्क्यू आपरेशन की रणनीति कुछ इस तरह बनाई गई कि बाहर निकलते ही तेंदुआ गांव की ओर न जाकर सीधे जंगल की तरफ जाए। दक्षिण वन मंडल पन्ना के डीएफओ अनुपम शर्मा ने बताया कि शुक्रवार की सुबह हमें जानकारी मिली कि एक कुएं में बछड़ा और तेंदुआ गिर गए हैं। उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हमारी टीम ने एक सूझबूझ भरा निर्णय लिया। जब दोनों कुएं में थे, तब आपस में खेल रहे थे। कुएं के अंदर तेंदुए ने बछड़े को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। तेंदुए को निकालने के बाद हमने बछड़े को बाहर निकाल लिया जो अब अपनी मां के साथ है। 

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Tuesday, April 7, 2026

पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था, बच्चों ने दिखाई संवेदनशीलता


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्कूली बच्चों ने अनुकरणीय पहल की है, जिसकी सराहना हो रही है। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच बेजुबान पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए पवई ब्लॉक के शासकीय माध्यमिक शाला नारायणपुरा के विद्यार्थियों ने यह सराहनीय पहल की है। विद्यालय परिसर में स्थित पेड़ पर बच्चों ने मिट्टी के सकोरों में दाना-पानी रखकर पक्षियों के लिए जीवनदायिनी व्यवस्था की है। 

उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों ने स्वयं सकोरे एकत्र किए, उन्हें साफ कर पानी से भरा और अनाज डालकर पेड़ की शाखाओं पर सावधानीपूर्वक टांगा। इस दौरान बच्चों के चेहरों पर उत्साह और सेवा भाव साफ झलक रहा था। शिक्षक सतानंद पाठक ने बच्चों को बताया कि गर्मी के मौसम में तालाब, नदी-नाले सूख जाने से पक्षियों को पानी मिलना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में हमारी छोटी सी मदद उनके जीवन की रक्षा कर सकती है।

प्रधान अध्यापक माया खरे ने विद्यार्थियों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा किताबों तक सीमित न रहकर व्यवहार में आनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने घरों की छतों, बालकनियों और आंगन में पक्षियों के लिए दाना-पानी अवश्य रखें। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने भी बच्चों की इस सोच को अनुकरणीय बताया। अंत में सभी बच्चों ने संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से सकोरों में पानी बदलेंगे और दाना डालते रहेंगे, ताकि गर्मी में कोई भी पक्षी प्यासा न रहे।

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Thursday, April 2, 2026

ब्लावट्स्की को "तुलकू' क्यों कहा जाता है ?


तिब्बत में एक शब्द है "तुलकू'। ब्लावट्स्की को भी तिब्बत में "तुलकू' ही कहा जाता है। "तुलकू' का अर्थ होता है ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी बोधिसत्व के प्रभाव में इतना समर्पित हो गया है कि बोधिसत्व उसके द्वारा काम कर सके। ब्लावट्स्की तुलकू बन सकी। स्त्री थी, इसलिए आसानी से बन सकी; समर्पित थी। जो लोग ब्लावट्स्की के पास रहते थे, वे लोग चकित होते थे। जब वह लिखने बैठती थी, तो आविष्ट होती थी, पजेस्ड होती थी। लिखते वक्त उसके चेहरे का रंग-रूप बदल जाता था। आंखें किसी और लोक में चढ़ जाती थीं। और जब वह लिखने बैठती थी तो कभी दस घंटे, कभी बारह घंटे लिखती ही चली जाती थी। पागल की तरह लिखती थी। कभी काटती नहीं थी, जो लिखा था उसको। यह कभी-कभी होता था। जब वह खुद लिखती थी, तब उसे बहुत मेहनत करनी पड़ती थी।

तो उसके संगी-साथी उससे पूछते थे, यह क्या होता है? तो वह कहती थी कि जब मैं "तुलकू' की हालत में होती हूं, तब मुझसे कोई लिखवाता है। थियोसाफी में उनको मास्टर्स कहा गया है। कोई सदगुरु लिखवाता है, मैं नहीं लिखती; मेरे हाथ किसी के हाथ बन जाते हैं; कोई मुझमें आविष्ट हो जाता है, और तब लिखना शुरू हो जाता है, तब मैं अपने वश में नहीं होती, मैं सिर्फ वाहन होती हूं। यह पुस्तक भी ऐसे ही वाहन की अवस्था में उपलब्ध हुई है।

कभी-कभी ऐसा होता था कि कुछ लिखा जाता था और उसके बाद महीनों तक वह अधूरा ही पड़ा रहता था। संगी-साथी ब्लावट्स्की के कहते कि वह पूरा कर डालो, जो अधूरा पड़ा है। वह कहती, कोई उपाय नहीं है पूरा करने का; क्योंकि मैं पूरा करूं, तो सब खतरा हो जाए; जब मैं फिर आविष्ट हो जाऊंगी, तब पूरा हो जाएगा। उसकी कुछ किताबें अधूरी ही छूट गई हैं, क्योंकि जब कोई बोधिसत्व चेतना उसे पकड़ ले, तभी लिखना हो सकता है।

ये जो बोधिसत्व हैं, ऐसी चेतनाएं जो परमद्वार पर खड़ी हैं; क्षीण होने के, विलीन होने के, शांत होने के, नष्ट हो जाने के द्वार पर खड़ी हैं- महामृत्यु अभी घटनेवाली है जिनके लिए, ये हजार तरह से काम करती हैं। किसी व्यक्ति में आविष्ट हो सकती हैं, किसी व्यक्ति को पता भी न चले, उसका उपयोग कर सकती हैं। इन सारी आत्माओं का तिब्बत में खयाल है, और खयाल सही है कि एक दुर्ग है, जो मनुष्य-जाति को घेरे हुए है चारों तरफ से।

आदमी जैसा है, वह बिलकुल पागल है। और वह जो भी करता है, वह सब पागलपन से भरा है। अगर आदमी को बिलकुल उसके ही सहारे छोड़ दिया जाए, तो वह अपने को भी नष्ट कर ले सकता है। वह जो भी कर रहा है वह सब उपद्रव से ग्रस्त है। उसे कुछ पता ही नहीं कि क्या कर रहा है, और क्या हो रहा है। यह बोधिसत्वों का दुर्ग, उसे बार-बार मार्ग पर ले आता है, बार-बार उसे भटकने से बचाता है, बार-बार अनेक उपाय करके दिशा और दृष्टि देने की कोशिश करता है। यह सूत्र कह रहा है कि जब तू सातवें द्वार को भी पार कर जाएगा, तब अपनी ही स्वेच्छा से तू भी इस महादुर्ग की एक ईंट बनना चाहेगा। अनेक गुरुओं की यातनाओं से निर्मित यह दुर्ग है। यह दुर्ग मनुष्य-जाति की रक्षा करता है।

तिब्बत में हर बुद्ध-पूर्णिमा को एक विशेष पर्वत पर पांच सौ बौद्ध लामा इकट्ठे होते हैं। हर वर्ष बुद्ध- पूर्णिमा की रात, आधी रात बुद्ध की वाणी सुनाई पड़ती है। यह बोधिसत्व-वाणी है। एक नियत योजना के अनुसार, एक नियत घड़ी में बुद्ध की वाणी उपलब्ध होती है। नियत लोग, निश्चित लोग, जो उस वाणी को सुन सकते हैं- क्योंकि वाणी अशरीरी है- वे ही केवल वहां इकट्ठे होते हैं। पांच सौ से ज्यादा लामा वहां कभी इकट्ठे नहीं होते हैं। जब एक लामा उनमें से मर जाता है, समाप्त हो जाता है, तभी एक नए लामा को प्रवेश मिलता है। स्थान गुप्त रखा जाता है; क्योंकि कोई भी गैर-व्यक्ति वहां पहुंच जाए, तो बाधा पड़ सकती है उस घटना में। बुद्ध मरते वक्त वह निश्चित कर गए हैं।

सदगुरु अक्सर निश्चित कर जाते हैं कि उनके साथ, बाद में जब उनका शरीर न होगा, तो कैसे संबंध स्थापित किया जाए। यह संबंध स्थापित करने के निश्चित सूत्र हैं और उनके ही अनुसार चला जाए, तो संबंध स्थापित होते हैं। जो परंपराएं अपने गुरु से संबंध स्थापित करती रहती हैं, वे जीवित हैं। 

~ओशो

(समाधि के सप्त द्वार)

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Wednesday, April 1, 2026

खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर ठगी करने वाले 02 आरोपी गिरफ्तार

  • आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार एवं नगदी जप्त
  • धोखाधड़ी के इस सनसनीखेज मामले में एक आरोपी फरार 

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की पुलिस ने खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर भोले-भाले किसानों से ठगी करने वाले 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार एवं नगदी जप्त की गई है। मामले में 01 आरोपी फरार है जिसकी तलाश की जा रही है।बताया गया है कि आरोपी अलग-अलग कंपनियों के फर्जी प्रतिनिधी बनकर किसानों को फंसाकर खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर लाइसेंस दिलवाने के नाम पर धोखाधड़ी करते थे।  

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू ने आज आयोजित पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि पन्ना पुलिस द्वारा शाहनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर की गई धोखाधड़ी के गंभीर मामले में कार्यवाही करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। मामले में फरियादी मुकेश कुमार साहू निवासी ग्राम बोरी द्वारा थाना शाहनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा मुझे खाद-बीज के डिस्ट्रीब्यूटर का लायसेन्स दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी पूर्वक 02 लाख 34 हजार 500 रूपये की ठगी कर ली है। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना शाहनगर में अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 269/25 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत पंजीबद्ध किया जाकर विवेचना मे लिया गया। 

मामले में थाना प्रभारी शाहनगर परशुराम डाबर के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। गठित पुलिस टीम द्वारा आरोपियों की पतारसी एवं गिरफ्तारी हेतु फरियादी के बताये अनुसार आरोपियों के आने जाने वाले संभावित सभी रास्तो पर लगे सीसीटीव्ही कैमरो के फुटेज खंगाले गये एवं संदेही व्यक्तियों को चिन्हित किया गया। पुलिस टीम द्वारा मुखबिर सूचना एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले में 02 संदेही व्यक्तियों को सीतापुर उ0प्र0 से पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। उक्त दोनो संदेहियों द्वारा पूँछताछ किये जाने पर अपने-अपने नाम पता पुलिस टीम को बताये गये। पुलिस टीम द्वारा घटना के संबंध में कड़ाई से पूँछताछ किये जाने पर अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर फरियादी को फर्टिलाइजर कंपनी का प्रतिनिधि बनकर डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का लालच देकर डिस्ट्रीब्यूटर लाइसेंस एवं खाद-बीज उपलब्ध कराने का झांसा देकर धोखाधड़ी करना स्वीकार किया गया। पुलिस टीम द्वारा आरोपियों के बताये अनुसार आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक स्विफ्ट कार एवं 15 हजार रूपये नगद जप्त किये जाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में एक आरोपी फरार है जिसे जल्द गिरफ्तार किया जावेगा। 

धोखाधड़ी के इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में गोपीचन्द्र पिता जोधी प्रसाद श्रीवास्तव 42 वर्ष निवासी जिला सीतापुर (उ.प्र.) तथा कन्हैया लाल यादव पिता दुलारे यादव 32 वर्ष निवासी जिला सीतापुर (उ.प्र.) हैं। एक अन्य आरोपी अनूप पिता जोधी प्रसाद श्रीवास्तव 42 वर्ष, निवासी जिला सीतापुर (उ.प्र.) फरार है। आरोपियों से पूंछतांछ में पता चला है कि  पन्ना जिले के अतिरिक्त इन्होंने कटनी, औरैया, जबलपुर एवं झाँसी में इसी तरीके की धोखाधड़ी कारित की गई है। वर्तमान में आरोपी धर्मशाला हिमांचल प्रदेश की तरफ इसी तरीके की धोखाधड़ी हेतु अपना नेटवर्क तैयार कर रहे थे, जिन्हे पन्ना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूँछताछ जारी है, जिनसे अन्य राज्यो एवं जिलो के मामलो का खुलासा होने की प्रबल संभावना है। 

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Friday, March 20, 2026

बुंदेलखंड यात्रा पर पन्ना पहुंचे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल, भाजपा पर जमकर बरसे

 


पन्ना। मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल अपनी बुंदेलखंड यात्रा के दौरान आज, 20 मार्च को पन्ना पहुंचे। इंद्रपुरी स्थित जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह (दाऊ साहब) के छायाचित्र पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।

​इस अवसर पर कांग्रेस जनों को संबोधित करते हुए अजय सिंह राहुल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और कांग्रेस की सेवा भावना को उजागर किया। उन्होंने कहा, "भाजपा शोषण की राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस सेवा की राजनीति में विश्वास रखती है।"

​अपनी बुंदेलखंड यात्रा के उद्देश्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं पिछले तीन दिनों से बुंदेलखंड की यात्रा पर हूं। इस दौरान मुझसे मीडिया के एक साथी ने पूछा कि मैं यह यात्रा क्यों कर रहा हूं। मैंने उन्हें बताया कि मैं दाऊ साहब के उन पुराने कार्यकर्ताओं से मिलने निकला हूं जिन्होंने पार्टी के लिए वर्षों तक निस्वार्थ भाव से कार्य किया है।"

​बुंदेलखंड की राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "बुंदेलखंड के अंदर भाजपा के बड़े नेता कांग्रेस के नेताओं को दबाने का काम कर रहे हैं। हम सभी को एकजुट होकर इसका मुकाबला करने की आवश्यकता है।" उन्होंने पार्टी के भीतर एकता पर जोर देते हुए कहा, "टिकट किसी को भी मिले, हमारा मुख्य लक्ष्य अपनी पार्टी को जिताने का होना चाहिए। यदि पार्टी नहीं जीती तो उस टिकट का क्या होगा?"


​भाजपा सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "यदि कोई कांग्रेस समर्थक बीमार पड़ जाए, तो हमारे कहने पर मुख्यमंत्री केवल 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देते हैं। वहीं, यदि भाजपा के लोग मांगें तो उन्हें तीन-चार लाख रुपये दिए जाते हैं।"

​आगामी विधानसभा चुनाव की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "2028 में भाजपा सरकार को 25 वर्ष हो जाएंगे। नई पीढ़ी को शायद यह भी पता नहीं होगा कि मध्य प्रदेश में कभी कांग्रेस की सरकार भी रही होगी।" उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा, "हमें किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं है। हमें अपने आप को मजबूत बनाकर भाजपा के कुशासन से लड़ना है।"

​इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनीश खान ने अजय सिंह राहुल का स्वागत किया और उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा, "हमारे पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व नेता प्रतिपक्ष विधायक अजय सिंह राहुल भैया ने हमेशा सदन के अंदर और सड़क पर दलित, शोषित और कमजोर तबके की आवाज को बुलंद किया है। आज पन्ना में उनके आने से कांग्रेस परिवार के प्रत्येक सदस्य में उत्साह का संचार हुआ है।" उन्होंने आने वाले चुनाव में पार्टी की जीत के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कहा, "आने वाले चुनाव में हम सभी मिलकर जिले की तीनों सीटों पर पार्टी के द्वारा दिए गए प्रत्याशी को जिताने का काम करेंगे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के दौरे के समय पार्टी के वरिष्ठ नेता पदाधिकारी और काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कांग्रेस जनों के निवास पर पहुंचे की मुलाकात

पूर्व नेता प्रतिपक्ष आज कांग्रेस पार्टी के कांग्रेस नेता महेंद्र दीक्षित, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष शिवाजीत सिंह भैया राजा, वरिष्ठ नेता राजेश तिवारी, नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष स्वतंत्र प्रभाकर अवस्थी, पूर्व सदर स्वर्गीय जमीन मोहम्मद जल्ला, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामकिशोर मिश्रा, मार्तंड देव बुंदेला, पार्षद रेहान मोहम्मद, रामदास जाटव, पूर्व जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष दीपक तिवारी, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह परमार, वरिष्ठ नेता ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिव्या रानी सिंह, कांग्रेस नेता एडवोकेट अंकित शर्मा की माता जी व स्वर्गीय पंडित दिनेश गंगेले  के निधनं होने पर निवास पर पहुंचकर शोक संवेदनाएं प्रकट की।

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पेड़ों व घरों के बाहर पक्षियों को आश्रय देने लटका रहे कृत्रिम घोंसले

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सेवानिवृत्त सहायक महानिर्देशक डा.सदाचारी सिंह तोमर ने की पहल 
  • पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने कहा कि वर्तमान में बड़े संकट में हैं हमारे सहचर पक्षी, इनका संरक्षण जरुरी  


नवरात्रि में जहां लोग तरह तरह के सेवा के कार्य शुरू करते है वहीं मध्यप्रदेश के सतना जिले में उचेहरा क्षेत्र के डुडहा गांव के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सेवानिवृत्त सहायक महानिर्देशक डा.सदाचारी सिंह तोमर द्वारा पक्षियों के लिए पहल करते हुए घोंसले बनाकर पेड़ों व घरों के बाहर लटकाने का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया व अध्यक्षता चंद्रिका तोमर कोल माइंस (टेक्निकल प्रबंधक) छत्तीसगढ़ रहे। इस दौरान घोंसले बनाकर घर के अलग-अलग जगह पेड़ों पर टांगे गए है। 

पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने कहा कि वर्तमान में हमारे सहचर पक्षी बड़े संकट में हैं। चिड़ियों से मनुष्य की प्राचीन समय से ही समीपता रही हैं। धार्मिक साहित्यिक कोई भी ग्रंथ हों, किसी भी देश काल या वहां की भाषा में हों लेकिन पक्षियों का वर्णन उनमें अवश्य मिलता है। हमारे बघेली में तो अनेक गीत, मुहावरे, लोकोक्तियां, पहेलियां और लोक कथाएं ही चड़ियों पर आधारित हैं। प्राचीन समय में जब आज जैसे यातायात के साधन नही थे और लोग पैदल ही यात्राएं करते तब अक्सर कहते कि "भइया चुहचुहिया बोलत हामी चल देय क है?" क्योंकि पेड़ों में आराम फरमाती चिड़ियां चार बजे भोर से ही चूं चूं बोलने लगती थीं। 

भले ही गौरेया चिड़िया मुर्गे मुर्गी की तरह मनुष्य की गुलामी स्वीकार न करते हुए हमेशा एक दूरी बनाकर ही रही हो परंतु वह वहीं पाई जाती है जहां - जहां मनुष्य की बस्ती है और मनुष्य के आंगन का दाना ही चुगती है। प्राचीन समय में जब गांव घने जंगलों के बीच हुआ करते थे तो लोगों को यदि गौरेया दिख जाएं तो समझ जाते थे कि "आस पास ही कोई गांव होगा। यही हाल गलरी, पेंगा आदि कुछ मैना प्रजाति की अन्य चिड़ियों का भी है जो किसानों के खेतों ,बागानों आदि में लगने वाले कीड़ों को खाकर ही अपना जीवन यापन करती हैं। प्राचीन समय में एक लोक मान्यता ही हुआ करती थी कि "अगर गौरेया किसी गांव को छोड़ कर चली जाय तो उसका अर्थ था कि गांव में हैजा आदि कोई महामारी आने वाली है।"


गर्मी में पानी की कमी तो हर वर्ष आती ही है और बहुत से दयालु लोग घड़े के अर्ध भाग को फोड़ किसी छायादार पेड़ की डालियों में बांध पानी का प्रबंध भी कर देते हैं। लेकिन सबसे अधिक संकट उनके वंश परिवर्धन का है। मैना, दर्जिन आदि चिड़ियों के घोंसले तो सर्व विदित हैं। पर कुछ पक्षी अपने अंडे पेड़ के कोटर में रखते थे। लेकिन अब जब कहीं बड़े पेड़ बचे ही नहीं तो वे बेचारे कहां अंडे रखें ? एक छोटी सी फुदकैली चिड़ियां घरों के पास उगी सघन झाड़ियों के बीच अपनी छोटी सी पाल बनाकर अंडे रखती थी, जिससे कौए की नजर से बचाकर वे अंडे बच्चे पाल सके। किन्तु अब हर जगह कंक्रीट पुत जाने के कारण ऐसी झाड़ियां ही नहीं बची।  

गौरेया बिल्ली और कौआ की नजर बचा कच्चे मकानों के अंदर किसी छेंद, झोपड़ी की ठाठ अथवा घर के आस पास बने घोंपा छतुरा आदि में अंडे रखती थी। लेकिन आज न तो कच्चे मकान झोपड़ी आदि बचे न ही घोंपा छतुरा ही। और यदि पक्के मकानों में कहीं छिद्र भी हैं तो उनमें इतना ताप बढ़ जाता है जिससे अंडों से बच्चे ही नही बन पाते। इसलिए एक मुश्किल बात यह भी आ रही है कि मनुष्य के फसलों की रक्षा करने वाले उसके यह सहचर पक्षी कैसे अपना वंश परिवर्धन करें ? इतना ही नहीं कुछ पक्षी तो मौसम के परिचायक होते हैं। टिटिहरी उपना अंडा नालों के बीच बालू में रखती है पर वह तभी वहां अंडे रखेगी जब मौसम 10-12 दिन का सूखा रहने की संभावना हो।

इसी तरह जिस वर्ष बया घने पत्तों के नीचे घोषला बनाए उसका अर्ध है कि उस वर्ष अधिक वर्षा होगी। चंद्रिका तोमर ने कहा कि मौजूदा समय में पेयजल की किल्लत गहराती जा रही है। ऐसे में कई बार पक्षियों को पानी नहीं मिल पाता। इसके साथ ही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के चलते पक्षी अपना घोंसला भी नहीं लगा पाती। ऐसे में पक्षियों को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमी आगे आएं। 

श्री तोमर ने कहा कि यह घोंसले डिब्बे नुमा होते हैं, जिसमें चिड़ियों के जाने के लिए एक छेंद रहता है। और उसमें वे तिनके आदि रख कर आसानी से अपनी सुरक्षित पाल बना सकती हैं। शुरू में एक घोषला जो उनने परीक्षण के लिए लगाया था, उसमें एक चिड़िया ने अपने अंडे रख भी लिया है। यही कारण है कि उनने अब दर्जनों उसी तरह के घोंसले बनवा कर लटकवा रहे हैं। अगर दो चार किस्म की चिड़ियों ने उसे अपना लिया तो वे इस तरह के कुछ और अभिनव प्रयोग करेंगे और लोगों को प्रेरित करने के लिए अब जागरूकता अभियान भी करेंगे। 

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Tuesday, March 17, 2026

पन्ना जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित, जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किया आदेश

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार ने जनहित में पेयजल एवं अन्य निस्तार समस्याओं के दृष्टिगत तथा आम जनता को पेयजल प्रदाय बनाए रखने व जनता की आवश्यकता की पूर्ति के उद्देश्य से इस सम्बन्ध में विधिवत आदेश जारी किया गया है। म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग कर जारी आदेश में जिले के सभी विकासखंड व नगरीय क्षेत्रों को 16 मार्च से 20 जुलाई 2026 तक की अवधि के लिए जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि सिंचाई इत्यादि कार्यों में भूगर्भीय जल का अत्यधिक दोहन होने के कारण पेयजल स्रोतों के जल स्तर में कमी आई है। नलकूपों एवं अन्य जल स्रोत के जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। इस कारण जिले में पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना है। इस संबंध में कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खंड पन्ना द्वारा सार्वजनिक पेयजल स्रोतों की क्षमता प्रभावित न होने के मद्देनजर निजी नलकूप खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई थी। 

आदेश लागू होने के उपरांत अब कोई भी व्यक्ति बगैर अनुमति के शासकीय भूमि पर स्थित जल स्रोतों में पेयजल तथा घरेलू प्रयोजनों को छोड़कर अन्य किसी भी प्रयोजन के लिए नहरों में प्रवाहित जल के अलावा अन्य स्रोतों का जल दोहन किन्हीं भी साधनों द्वारा जल का उपयोग नहीं करेगा। जिले के सभी विकासखंड और नगरीय क्षेत्रों के समस्त नदी, नालों, स्टॉप डैम, सार्वजनिक कुओं व अन्य जल स्रोतों का उपयोग घरेलू प्रयोजनों के लिए भी तत्काल प्रभाव से सुरक्षित किया गया है। जल अभावग्रस्त क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति स्वयं अथवा निजी ठेकेदार एसडीएम की अनुज्ञा प्राप्त किए बगैर किसी भी प्रयोजन के लिए नवीन नलकूप का निर्माण नहीं करेगा। शासकीय नलकूप खनन पर यह आदेश लागू नहीं होगा।

निजी भूमि पर नलकूप खनन की लेना होगी अनुमति

स्वयं की निजी भूमि पर नलकूप खनन कार्य के लिए संबंधित व्यक्तियों को निर्धारित प्रारूप में नियत शुल्क के साथ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन करना होगा। इसके लिए सभी एसडीएम को उनके क्षेत्राधिकार अंतर्गत सक्षम अधिकारी प्राधिकृत किया गया है। संबंधित एसडीएम द्वारा अनुमति देने के पूर्व आवश्यक जांच एवं परीक्षण की कार्रवाई पूर्ण की जाएगी तथा अनुमति दिए जाने के संबंध में जनपद पंचायत सीईओ, तहसीलदार एवं नगरीय निकायों के सीएमओ से अभिमत प्राप्त किया जाएगा। 

सार्वजनिक पेयजल स्रोत सूखने एवं वैकल्पिक रूप से कोई दूसरा पेयजल स्रोत उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित एसडीएम पेयजल परीक्षण संशोधित अधिनियम 2002 की धारा 4ए तथा 4बी के प्रावधानों के अधीन निश्चित अवधि के लिए निजी पेयजल स्रोत का अधिग्रहण कर सकेंगे। आदेश के उल्लंघन पर संबंधित के विरूद्ध म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 संशोधन 2022 की धारा 9 व भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकेगी। समस्त अनुविभागीय मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, थाना प्रभारी, पीएचई के फील्ड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी, नगरीय निकायों के सीएमओ, जनपद पंचायत सीईओ तथा ग्राम पंचायतों के सचिव को आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के लिए निर्देशित किया गया है।

पशु चारा एवं भूसा के निर्यात व परिवहन पर लगा प्रतिबंध

जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार द्वारा पन्ना जिले में पशुधन के लिए चारा-भूसा की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से जिले के बाहर भूसा चारा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिला मजिस्ट्रेट ने उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश चारा निर्यात नियंत्रण आदेश 2000 में निहित प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से आगामी 31 जुलाई तक भूसा चारा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। अब कोई भी कृषक, व्यापारी, निर्यातक व्यक्ति किसी भी प्रकार से प्रतिबंधित पशुचारा व भूसा का परिवहन किसी वाहन, मोटर या किसी भी यान द्वारा पन्ना जिले के बाहर अन्य जिले में संबंधित क्षेत्र के उपखंड मजिस्ट्रेट की अनुज्ञा के बगैर निर्यात नहीं करेगा। आदेश के क्रियान्वयन व अनुपालन के लिए संबंधित तहसीलदार, नायब तहसीलदार व थाना प्रभारी को दायित्व सौंपा गया है। पशु आहार में आने वाले सभी प्रकार के चारा भूसा को जिले के बाहर सीमावर्ती जिलों में परिवहन एवं निर्यात संबंधी प्रतिबंध के पालन के दौरान संबंधित अधिकारी द्वारा नियत बिंदुओं पर जांच कर उल्लंघन संबंधी प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

जिले में पशु चारा और भूसा की कमी की आशंका के दृष्टिगत पशुओं को पर्याप्त मात्रा में चारा भूसा की आपूर्ति बनाए रखने के संबंध में सीमावर्ती जिलों में पशुचारा व भूसा निर्यात संबंधी प्रतिबंध के तहत नियुक्त अधिकारी पशु चारे के निर्यात के लिए उपयोग में लाए गए साधन को रोककर तलाशी ले सकेंगे या रोकने व तलाशी के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत भी कर सकते हैं। इसके अलावा किसी स्थान में प्रवेश कर तलाशी लेने एवं किसी व्यक्ति को प्रवेश करने व तलाशी लेने के लिए भी प्राधिकृत किया जा सकेगा। जांच के दौरान वस्तुओं को ले जाने के लिए उपयोग में लाए जा रहे पशुओं, यानों, जलयानों, नावों अथवा वाहनों के साथ अधिग्रहित कर सकेगा।

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डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध है गैस बुकिंग की सुविधा

 


पन्ना। अपर मुख्य सचिव खाद्य विभाग द्वारा सिलेंडर की वितरण व्यवस्था सुचारू बनाए रखने तथा घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। ऑयल कंपनियो ने मोबाइल एप, एसएमएस, व्हाट्सएप तथा आईवीआरएस कॉल द्वारा गैस बुकिंग की सुविधा प्रदान की है। उपभोक्ता बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यम का प्रयोग कर अनावश्यक रूप से एजेंसी पर जाने से बच सकते हैं।

सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि सूचना तंत्र सुदृढ़ कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करें। यदि कहीं वितरण व्यवस्था में अनियमितता या विलंब की शिकायत मिलती है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराई जाए। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी तथा घरेलू एलपीजी गैस की उपलब्धता के संबंध में ऑयल कंपनियों से समन्वय के लिए राज्य स्तर पर 6 सदस्यीय समिति भी गठित की गई है, जो कामर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी करेगी। औद्योगिक एवं वाणिज्यिक संस्थाओ से आग्रह किया गया है कि वे उपलब्धता अनुसार पीएनजी के कनेक्शन लें। पीएनजी की आपूर्ति लगातार बनी हुई है और आगे भी जारी रहेगी। प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, घरेलू पीएनजी तथा सीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है। साथ ही गैस सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक है। प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट एवं वितरकों के गोदाम में पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि विगत अंतिम रिफिल के 25 दिन बाद पुनः बुकिंग कराएं। प्रशासन द्वारा वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह भी दी गई है। जिन कार्यों में गैस ज्यादा खर्च होती है, उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। प्रदेश में घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति जारी है, उपभोक्ता अनावश्यक रूप से अफवाहों से भ्रमित न हों। देश की रिफायनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही हैं तथा पश्चिम एशिया के अतिरिक्त अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सिलेंडर बुकिंग संबंधित शिकायत या सुझाव हेतु भारत गैस हेल्पलाइन नंबर 1800-22-4344, इंडेन गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 तथा एचपी गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क किया जा सकता है।

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Monday, March 16, 2026

एक छोटा सा प्रवासी पक्षी जिसने तोड़ दिया विश्व रिकॉर्ड, 11 दिनों में तय किया 13,560 किमी. का सफर

 


कुदरत का करिश्मा देखिए, एक छोटे से प्रवासी पक्षी ने विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है....! उसने विशाल पैसिफिक महासागर को बिना रुके पार कर 8,425 मील (13,560 किमी) की लंबी उड़ान भरी। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, इस पक्षी ने अपनी यात्रा 12 अक्टूबर, 2022 को अमेरिका के अलास्का से शुरू की थी और यह 11वें दिन ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया में जाकर रुका। बार-टेड "गॉडविट" नाम का यह पक्षी पैसिफिक महासागर के पार अपने प्रवास के दौरान खाने, पीने या सोने के लिए नहीं रुकता। 

आखिर यह कैसे कर लेता है यह सब ? उड़ान से पहले यह अपने शरीर में लगभग शल्य चिकित्सा जैसा बदलाव करता है। यह अपने पाचन अंगों को लगभग शून्य कर देता है। पेट, आंतों और लीवर को कच्चे ईंधन में बदल देता है। पक्षी मूल रूप से अपने पेट को फैट रिजर्व बनाने के लिए खाता है, जो इसके पंखों को लगभग दो सप्ताह तक शक्ति प्रदान करेगा। मस्तिष्क भी पूरी तरह से सोता नहीं है। इसका आधा हिस्सा सक्रिय रहता है, जबकि दूसरा आधा आराम करता है। 

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, इस पक्षी ने अपनी यात्रा 12 अक्टूबर, 2022 को अमेरिका के अलास्का से शुरू की थी और यह 11वें दिन ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया में जाकर रुका। इस दौरान इस पक्षी ने 13,560 किलोमीटर का सफर तय किया। इस शानदार पक्षी ने बिना रुके लगातार 11 दिन और एक घंटे तक अपनी उड़ान जारी रखी और अपना सफर पूरा किया। अपनी उड़ान के दौरान गॉडविट की पीठ के निचले हिस्से में वैज्ञानिकों ने 5G सैटेलाइट टैग लगा दिया था, जिसकी मदद से वह उसे ट्रैक कर रहे थे।


आपको बता दें गॉडविट पक्षी का आकार लड़ाकू विमान की तरह होता है और इसके लंबे-नुकीले पंख इसे हवा में इसे तेज उड़ने की क्षमता देते हैं। इस पक्षी का वजन 230 से 450 ग्राम के बीच होता है। इसके पंखों की चौड़ाई लगभग 70 से 80 सेंटीमीटर होती है। वहीं एक वयस्क गॉडविट की लंबाई 37 से 39 सेंटीमीटर के बीच हो सकती है। इस पक्षी के बारे में बताया गया है कि ये दिन और रात की उड़ान के दौरान अपने शरीर के वजन को आधा या उससे भी कम कर लेते हैं। इसके साथ ही वह अपने अंगों को सिकोड़ लेते हैं जिसकी वजह से हवा में उड़ने पर इस पक्षी का शरीर काफी छोटा हो जाता है। इसी वजह से यह पक्षी बगैर रुके लंबे समय तक उड़ पाते हैं। 

उड़ान के दौरान गॉडविट एक ही समय में बेहोश और नेविगेटिंग (Navigating) कर रहा होता है, इसकी नेविगेशनल प्रेसिजन वास्तव में आश्चर्यजनक है। पक्षी अलास्का से निकलता है...., और न्यूज़ीलैंड में उतरता है, जिसकी सटीकता शुरुआती जीपीएस सिस्टम को भी शर्मिंदा कर देगी। यह पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड, वायुमंडलीय दबाव ग्रेडिएंट, तारों की स्थिति और संभावित रूप से क्वांटम-लेवल कंपास मेकैनिज्म को पढ़ता है, जो इसे मैग्नेटिक फील्ड लाइनों को अपने दृश्य क्षेत्र पर ओवरले देखने देता है। हम मशीनों को इंजीनियर करने में अरबों खर्च करते हैं, जो इस पक्षी को इंस्टिंक्ट, फैट रिजर्व और आधे सोए हुए मस्तिष्क पर करते हैं। ज्ञात रहे, एक वाणिज्यिक विमान द्वारा सबसे लंबी रिकॉर्ड की गई नॉन-स्टॉप उड़ान लगभग 20 घंटे है। इस पक्षी ने 11 दिन लगाए, बिना रनवे के.....!

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