- पानी बचाने की मिसाल बना पन्ना जिले का फुलवारी गांव
- गांव को जल संकट से निजात दिलाने पंचायत संकल्पित
- बचे हुए घरों में पंचायत पूरा करायेगी रूफवाटर हार्वेस्टिंग
पन्ना। दशकों से पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे इस गांव की कहानी बहुत दिलचस्प और प्रेरणादायी है। बारिश के पानी का संरक्षण करने की पहल से यह गांव अब पानीदार हो गया है। जिन हैंडपम्पों से जनवरी के महीने से ही पानी की जगह सिर्फ हवा निकलने लगती थी, अब उनसे स्वच्छ पानी निकल रहा है। वर्षा जल संचय की तकनीक अपनाने से ग्रामीणों को अब खारे पानी की समस्या से भी निजात मिल गई है। इस अनूठे बदलाव से पन्ना जिले का फुलवारी गांव अन्य दूसरे गांवों के लिए जो जल संकट का सामना कर रहे हैं, उनके लिए मिशाल बन गया है।
उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय पन्ना से 38 किलोमीटर दूर स्थित फुलवारी गांव में कुल 162 परिवार रहते हैं। तक़रीबन 500 की आबादी वाला यह गांव दशकों से पानी की कमी और इसके खारेपन की समस्या से जूझ रहा था। जनवरी से ही गांव के कुएं और बोरवेल सूखने लगते थे, जिससे ढाई किलोमीटर पैदल चलकर गांव की महिलाओं को दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता था। महिलाएं झुंड बनाकर इटवा तिलहा गांव पानी लेने जाया करती थीं। पानी की कमी इस गांव की पहचान बन चुकी थी। जनवरी 2025 में यहां जल जीवन मिशन ने हर घर नल से जल पर काम करना शुरू किया।
सरकार के साथ ही एक निजी संस्था समर्थन ने भी ग्रामीणों की मदद के लिए आगे आया। दरअसल, समर्थन पन्ना जिले के 32 पंचायतों के 40 गांवों में जल जीवन मिशन और अटल भू-जल योजना में सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। इन्हीं में फुलवारी भी शामिल है। गांव में जल संकट को देखते हुए संस्था ने वर्षा जल संचयन पर कार्य करने की योजना बनाई। ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। हालांकि यह काम इतना आसान नहीं था। क्योंकि ग्रामीण सुबह होते ही मजदूरी के लिए गांव से निकल जाते थे। संस्था ने महिलाओं को जागरूक करना शुरू किया।
स्कूल में वर्षा जल संचयन की अनुमति मिलते ही आया बदलाव
शुरुआती संघर्ष और लोगों की मानसिकता बदलने में ज्यादा समय नहीं लगा। समर्थन के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. योगेश कुमार बताते हैं कि संस्था ने यह पहल शुरू की तो गांव के लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनका मानना था कि जल संचयन संरचना का निर्माण व्यर्थ है और इससे कोई लाभ नहीं होगा। कई ग्रामीणों ने संस्था पर अविश्वास जताया और उनके प्रयासों को नकार दिया। वे इसे एक सरकारी या गैर-सरकारी योजना समझकर नजर अंदाज कर रहे थे, लेकिन संस्था के ब्लॉक समन्वयक कमल ने गांव की महिला कविता, राखी और माया को जल मित्र बनाया और उन्हें साथ लेकर ग्रामीणों को जागरूक करने लगे।
उनकी मेहनत का पहला परिणाम तब देखने को मिला जब पंचायत की मदद से गांव के स्कूल ने अपनी छत पर वर्षा जल संचयन संरचना के निर्माण की अनुमति दे दी गई। बस यहीं से बदलाव शुरू हो गया। गांव के स्कूल में एक हैंडपंप था, जो दिसंबर और जनवरी में सूख जाया करता था। संस्था ने स्कूल की छत से वर्षा जल को पाइप के माध्यम से जमीन के अंदर भेजने के लिए एक जल संचयन संरचना बनाई। कुछ ही महीनों में इसका असर दिखने लगा। जो हैंडपंप सर्दियों में ही पानी देना बंद कर देता था, वह अब साल भर पानी देने लगा। सबसे बड़ी बात यह थी कि पहले पानी खारा होता था, लेकिन अब मीठा पानी मिलने लगा।
यह बदलाव ग्रामीणों के लिए चौकाने वाला था। जो लोग पहले जल संचयन संरचनाओं के निर्माण को लेकर संदेह में थे, वे अब इसे अपनाने के लिए आगे आने लगे। जिले के कई पंचायत के प्रतिनिधि ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यो ने ग्राम का भ्रमण कर परिणाम को देखा एवं सरपंच कीर्ति बागरी एवं सचिव अखिलेश गर्ग से समझा। ग्राम पंचायत के सचिव का कहना है कि हमारा संकल्प फुलवारी गांव को पानीदार बनाकर ग्रामीणों को स्वच्छ मिठा पानी उपलब्ध करना है, इस लक्ष्य को हम हासिल करके ही रहेंगे। गांव के लोगो ने जनभागीदारी करके जिले के लिये एक मिशाल कायम किया है। समर्थन टीम के सक्रिय सहयोग से ग्राम पंचायत भी फुलवारी गांव को पानीदार बनाने के लिए उत्साहित और संकल्पित है।
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