- प्रेरणादायी स्मृतियों को याद रखने संस्थापक बाघों के सम्मान में भी हो रचनात्मक पहल
- वत्सला की तरह पन्ना को आबाद करने वाले बाघों की प्रतिमाओं का कराया जाय सृजन
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| संस्थापक बाघ टी-3 जिसकी पन्ना बाघ पुनर्स्थापना योजना की सफलता में अहम् योगदान रहा। |
।। अरुण सिंह ।।
पन्ना। वन प्राणी संरक्षण सप्ताह के मौके पर यह बताया जाना जरूरी है कि मध्य प्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व आज जिस मुकाम पर पहुंचा है, उसमें यहां के संस्थापक बाघों का अहम योगदान रहा है। उनकी इस अनूठे योगदान की स्मृतियां तरोताजा रहें, इसके लिए इन बाघों की प्रतिमाओं का निर्माण हथिनी वत्सला की तरह कराया जाना चाहिए। ताकि आने वाली नई पीढ़ियां भी पन्ना के संस्थापक बाघों की चमत्कृत करने वाली रोचक और प्रेरणादाई कहानियों से रूबरू हो सकें।
उल्लेखनीय है कि बीते माह पन्ना की शान रही विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी वत्सला की विशाल स्टेच्यू का अनावरण पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला गेट पर मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किया था। वत्सला की पावन स्मृति में की गई इस अभिनव पहल की खूब सराहना हुई है। इसी तर्ज पर पन्ना के सभी संस्थापक बाघों की प्रतिमाओं का भी यदि निर्माण कराया जाए, तो पन्ना बाघ पुनर्स्थापना योजना की रोचक दास्तान हमेशा लोगों के जेहन में कौंधती रहेगी। बाघों के संरक्षण हेतु आने वाली पीढ़ियां भी प्रेरणा लेंगी।
यहां यह बताना जरूरी है कि पन्ना के जंगल आदिकाल से ही वन्य जीवों और बाघों से आबाद रहे हैं। लेकिन डेढ़ दशक पूर्व कुछ ऐसे हालात बने कि पन्ना का जंगल वर्ष 2009 में बाघ विहीन हो गया। पन्ना टाइगर रिजर्व के उजड़ चुके बाघों के संसार को फिर से आबाद करने के लिए यहां पर बाघ पुनर्स्थापना योजना शुरू की गई। जिसके तहत कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व से नर व मादा बाघों को पन्ना लाया गया। इन्हीं संस्थापक बाघों ने पन्ना को फिर से आबाद किया फलस्वरूप मौजूदा समय पन्ना लैंडस्केप में सौ से भी अधिक बाघ स्वच्छंद रूप से विचरण कर रहे हैं।
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| पन्ना टाइगर रिज़र्व की संस्थापक बाघिन टी-1 अपने शावकों के साथ। ( फाइल फोटो ) |
पन्ना के संस्थापक बाघों में टी-1 से लेकर टी-7 तक सभी नर व मादा बाघ हैं। टी-1, टी-2 और टी-6 मादा बाघ हैं, जबकि टी-4 और टी-5 अर्द्धजंगली बाघिनें थीं, जिन्हें सफलता पूर्वक जंगली बनाया गया। नर बाघों में टी-3 और टी-7 हैं, लेकिन टी-3 का बाघ पुनर्स्थापना योजना को कामयाब बनाने में सबसे महत्वपूर्ण और अहम् योगदान रहा है। कई वर्षों तक पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगल में एकछत्र राज करने वाले बाघ टी-3 ने पन्ना बाघ पुनर्स्थापना योजना को चमत्कारिक सफलता दिलाकर अपनी वैश्विक पहचान बनाई थी। इस नर बाघ के योगदान को देखते हुए ही उसे 'फादर ऑफ़ द पन्ना' कहा जाता है।
काबिले गौर है कि मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व ने बीते साल विश्व की सबसे बड़ी टाइगर प्रतिमा का निर्माण कराकर अनूठी मिसाल कायम की है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस विशाल प्रतिमा का अनावरण किया था। यदि हम भी अपने संस्थापक बाघों की स्मृति में उनकी प्रतिमाओं का निर्माण पन्ना टाइगर रिजर्व में करा दें, तो निश्चित ही यह अनूठी पहल होगी। यह स्थल पर्यटकों के आकर्षण का जहां केंद्र बनेगा, वहीं बाघ संरक्षण की महत्ता को भी परिभाषित करेगा।
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