- पुलिस कॉन्फ्रेंस हॉल पन्ना मे आयोजित उक्त प्रशिक्षण मे थाना प्रभारियों सहित 50 से अधिक विवेचना अधिकारी हुये शामिल
- एन.सी.आर.पी., e-FIR, जे.एम.आई.एस, सी.ई.आई.आर., पोर्टल एवं साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की गई विस्तृत चर्चा
पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता नायडू के निर्देशन में आज पुलिस कॉन्फ्रेंस हॉल पन्ना में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं प्रभावी विवेचना के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिले के समस्त थाना प्रभारियों सहित 50 से अधिक विवेचकों को प्रशिक्षित किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों - जैसे सोशल मीडिया दुरुपयोग, ऑनलाइन ठगी, बैंक फ्रॉड, डिजिटल पहचान चोरी, फिशिंग आदि की त्वरित एवं प्रभावी जांच सुनिश्चित करना तथा विवेचकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना रहा। पुलिस अधीक्षक पन्ना के निर्देशन में जिले के सभी थाना क्षेत्रों में साइबर हेल्पडेस्क की स्थापना की जा चुकी है, जिससे आमजन की शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
अतरिक्त पुलिस अधीक्षक पन्ना सुश्री वन्दना सिंह चौहान की उपस्थिति मे आयोजित उक्त प्रशिक्षण में जिला साइबर टास्क फोर्स के कर्मचारी प्र.आर. राहुल सिंह बघेल, आशीष अवस्थी, धर्मेन्द्र सिंह आर. राहुल पाण्डेय, नितिन नवराज, उपनेन्द्र सिंह, द्वारा अधिकारियों को साइबर अपराधों की तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्य के संकलन, संरक्षण एवं विश्लेषण की विधि तथा आवश्यकतानुसार उच्च स्तरीय एजेंसियों से समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यशाला में विभिन्न महत्वपूर्ण पोर्टलों के उपयोग संबंधी प्रशिक्षण भी दिया गया, जिनमें मोबाइल ट्रेसिंग हेतु सी.ई.आई.आर. (CEIR) पोर्टल, साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों के लिए एन.सी.आर.पी. (NCRP) पोर्टल तथा अन्य राज्यों से समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई हेतु सी.आई.ए.आर. (CIAR) पोर्टल शामिल हैं। इन पोर्टलों के माध्यम से विवेचक अब साइबर अपराधों की त्वरित जांच एवं धनराशि फ्रीज/रिकवरी जैसी कार्यवाही समयबद्ध रूप से कर सकेंगे।
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को यह भी अवगत कराया गया कि Ministry of Home Affairs द्वारा National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर 01 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों में ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज करने का प्रावधान लागू किया गया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत यदि पीड़ित द्वारा पोर्टल पर 1 लाख रुपये से अधिक की धनराशि की ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की जाती है, तो संबंधित प्रकरण स्वतः संबंधित राज्य/जिला पुलिस को अग्रेषित होता है तथा त्वरित विधिक कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। अधिकारियों को ई-एफआईआर की प्रक्रिया, शिकायत के सत्यापन, प्रारंभिक जांच, संबंधित बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराने, डिजिटल साक्ष्य संकलन तथा समयबद्ध विवेचना के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रावधान से गंभीर साइबर वित्तीय अपराधों में शीघ्र कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित होगी एवं पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने में सहायता मिलेगी।
प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों द्वारा बैंक खातों, यूपीआई, एटीएम फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग एवं अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित मामलों में तत्काल तकनीकी कार्यवाही संभव हो सकेगी। विशेष रूप से ऑनलाइन ठगी के मामलों में प्रारंभिक 24 घंटे को “गोल्डन आवर” माना जाता है, जिसमें त्वरित सूचना एवं कार्रवाई से ठगी गई धनराशि की रिकवरी की संभावना अधिक रहती है।
कार्यशाला के दौरान साइबर फ्रॉड की पहचान करने की तकनीक, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया, फॉरेंसिक जांच की मूलभूत जानकारी, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के उपयोग तथा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का भी व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। वास्तविक प्रकरणों की केस स्टडी के माध्यम से अधिकारियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से भी प्रशिक्षित किया गया।
पन्ना पुलिस जनता की सुरक्षा के प्रति सदैव सजग है एवं डिजिटल युग में नागरिकों को सुरक्षित एवं भरोसेमंद वातावरण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नागरिकों से अपील है कि साइबर अपराध से संबंधित किसी भी घटना की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा अपने नजदीकी थाना के साइबर हेल्पडेस्क पर दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्यवाही की जा सके।
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