Tuesday, May 26, 2026

कुआं धसकने से एक ही परिवार के चार सदस्यों सहित 5 मजदूरों की मौत

  • बीहरपुरवा गांव में मातम का माहौल, मुख्यमंत्री सहित नेताओं ने जताया दुःख   
  • अजयगढ़ में हुआ पोस्टमार्टम, बुधवार को सभी मृतकों का होगा अंतिम संस्कार 


पन्ना।  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में अजयगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बीहरपुरवा के नयापुरवा में निर्माणाधीन कुआं की मिट्टी धसकने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में एक ही परिवार के चार सदस्यों सहित 5 मजदूरों की मौत हुई है। मंगलवार की सुबह तक़रीबन 11 बजे घटित इस दिल दहला देने वाले हादसे की जानकारी लगने के उपरांत पुलिस प्रशासन और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, मलबे के नीचे दबे मजदूरों को मौत के शिकंजे से नहीं बचाया जा सका। हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों में जहाँ कोहराम मचा है वहीं गांव में मातम का माहौल है। 

घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत द्वारा सार्वजनिक कूप की खुदाई का कार्य कराया जा रहा था। बताया गया है कि सुबह इस निर्माणाधीन कूप के भीतर 6 मजदूर खुदाई का कार्य कर रहे थे। हादसे के कुछ क्षण पहले पानी पीने के लिए एक मजदूर ऊपर आया और देखते ही देखते कुंआ धसक गया। कुंआ के भीतर काम कर रहे शेष पांच मजदूर मिट्टी के मलबे में दब गए। अचानक हुए इस खौफनाक हादसे के बाद चीख पुकार मच गई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचकर दबे मजदूरों को मलबे से निकालने का प्रयास किया लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके। 

हादसे के तक़रीबन दो घंटे बाद पुलिस प्रशासन और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, फलस्वरूप जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू हुआ। लेकिन तब तक मलबे में दबे मजदूरों के जीवित बचने की संभावना ख़तम हो चुकी थी। घंटों मशक्कत के बाद राहत व बचाव दल द्वारा मलबे में दबे पांचो शव एक-एक करके बाहर निकाल लिए गए।

पन्ना कलेक्टर श्रीमती ऊषा परमार ने अजयगढ़ ब्लॉक के बीहरपुरवा में कुंआ की मिट्टी धसकने से मृत 5 व्यक्तियों के परिवारजनों से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया एवं सांत्वना दी। जिला कलेक्टर ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया। मालूम हो कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 5 व्यक्तियों क्रमशः आशीष यादव, राजकुमार यादव, रामपाल यादव, चुन्नू यादव एवं चुनवाद पाल की मृत्यु हुई है। कुआँ धसकने से 5 मजदूरों की मौत पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दुःख व्यक्त करते हुए मृतको के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। 

ग्रामवासियों के मुताबिक पूर्व में इस सार्वजानिक कूप की खुदाई का काम हुआ था। लगभग 20 फिट गहरा खुदने के बाद काम बंद करा दिया गया। बलुई मिट्टी होने के कारण बारिश में यह कूप क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे पुनः खोदना शुरू कराया गया। बिना तकनीकी मार्गदर्शन व देखरेख के जिस तरह से कूप खुदाई का कार्य कराया जा रहा था, उसे देखते हुए ऐसे हादसे को नाकारा नहीं जा सकता। और वही हुआ जिस बात का डर था, पांच जिंदगियां मलबे के ढेर में दबकर असमय काल कवलित हो गईं। 

कुआं हादसे में मृत श्रमिकों के परिजनों से मिले कमिश्नर एवं आईजी



कमिश्नर सागर संभाग अनिल सुचारी एवं पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश कुमार शुक्ला ने मंगलवार को अजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत बीहरपुरवा में हुई कुआं धंसकने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर अजयगढ़ पहुंचकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर दुख जताते हुए मृतक के परिजनों को सांत्वना दी तथा शासन प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने परिजनों की मांगो के निराकरण के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। अधिकारीद्वय ने प्रभावित परिवार के सदस्यों को शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदान करने के लिए निर्देशित किया। इस मौके पर कलेक्टर ऊषा परमार, पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना चौहान, एसडीएम संजय कुमार नागवंशी, तहसीलदार सुरेन्द्र अहिरवार एवं जनपद पंचायत सीईओ सतीश नागवंशी भी मौजूद थे। 

विदित हो कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस घटना पर दुख जताया है तथा मृत श्रमिकों के निकटतम वारिश को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता  राशि स्वीकृत की है। इसके पूर्व जिला कलेक्टर एवं अन्य अधिकारियों द्वारा भी मौका स्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारजनों से भेंट की गई। एसडीईआरएफ की टीम ने रेस्क्यू कार्रवाई संपन्न कर 5 शव निकाले। मृत श्रमिकों का पोस्टमार्टम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजयगढ़ में करवाया गया। बुधवार को मृतकों का अंतिम संस्कार होगा।

दर्दनाक हादसे को लेकर उठ रहे सवाल

ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की ज़मीनी हकीकत यह है कि अधिकांश कार्यों में जिम्मेदार इंजीनियर साइट पर दिखाई ही नहीं देते। कागज़ों में निरीक्षण और मेजरमेंट पूरे हो जाते हैं तथा अधिकारी ऑफिस के वातानुकूलित कमरों में बैठकर ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तय कर रहे हैं। जब मौके पर जाकर निरीक्षण ही नहीं होगा, तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मजदूरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी ? ऐसी लापरवाही ही बड़े हादसों की वजह बनते हैं। ग्राम पंचायत बीहरपुरवा की घटना इसका जीता जगता उदाहरण है। क्या जिम्मेदार अधिकारी व प्रशासन इस हादसे से कोई सबक लेगा ताकि फिर कभी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो ?

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Monday, May 25, 2026

“जैवविविधता स्वामित्व रखने वाला सर्वश्रेष्ठ विभाग” श्रेणी में दक्षिण वनमण्डल पन्ना हुआ सम्मानित

  • गिद्ध संरक्षण, जैवविविधता अभिलेखीकरण, जनभागीदारी आधारित नवाचार सर्पदंश जागरूकता अभियान ने दिलाई पहचान
  • व्यक्तिगत श्रेणियों में दक्षिण पन्ना के वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रथम व वीरेंद्र पटेल को मिला द्वितीय पुरस्कार


पन्ना। अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड द्वारा घोषित “राज्य स्तरीय वार्षिक जैवविविधता पुरस्कार 2024 एवं 2025” में दक्षिण पन्ना वनमण्डल को “जैवविविधता स्वामित्व रखने वाला सर्वश्रेष्ठ विभाग” श्रेणी में सम्मानित किया गया। राज्य जैवविविधता बोर्ड द्वारा जारी आदेश अनुसार दक्षिण पन्ना वनमण्डल का चयन उक्त श्रेणी में किया गया।

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में विशाल वन क्षेत्र को तमाम तरह की चुनौतियों, व्यवधानों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद काफी हद तक पन्ना जिलावासियों ने सहेज कर रखा है। इस कार्य में उन वन योद्धाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने कठिन चुनौतियों का मुकाबला करते हुए न सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया अपितु इस अनमोल धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। विषम परिस्थितियों के बीच रहकर अनगिनत चुनौतियों का सामना करते हुए जंगल, यहाँ की जैवविविधता तथा विचरण करने वाले वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले इन्हीं कर्तव्यनिष्ठ वन योद्धाओं में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार व वीरेंद्र पटेल के कार्य विशेष उल्लेखनीय हैं। इन दोनों वन योद्धाओं को अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया है। 

इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण, चेन्नई के अध्यक्ष वीरेंद्र आर. तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल के निदेशक डॉ. के. रविचंद्रन ने की तथा राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. बी. बालाजी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राज्य स्तरीय पुरस्कार दक्षिण पन्ना वनमण्डल की ओर से वनमण्डलाधिकारी अनुपम शर्मा, वन परिक्षेत्र अधिकारी पवई नितेश पटेल एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी कल्दा परिवेश भदौरिया द्वारा प्राप्त किया गया। दक्षिण पन्ना वनमण्डल के नामांकन की अनुशंसा जिला कलेक्टर श्रीमती उषा परमार एवं वनमण्डलाधिकारी द्वारा की गई थी।

दक्षिण पन्ना वनमण्डल द्वारा जैवविविधता संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में अनेक अभिनव एवं जनभागीदारी आधारित कार्य किए गए। वनमण्डल द्वारा पक्षियों, तितलियों, औषधीय पौधों, विरासत वृक्षों, प्राकृतिक झिरियों तथा स्थानीय जैविक धरोहरों का व्यापक अभिलेखीकरण एवं दस्तावेजीकरण किया गया। साथ ही स्थानीय स्तर पर जैवविविधता संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए गए।

गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में दक्षिण पन्ना द्वारा “वल्चर फ्रेंडली गौशाला”, सतत मॉनिटरिंग, प्रतिबंधित दवाइयों की रोकथाम एवं ग्रामीण सहयोग आधारित संरक्षण मॉडल विकसित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दक्षिण पन्ना क्षेत्र में गिद्धों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2021 में जहां गिद्धों की संख्या 614 थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1127 तक पहुँच गई।

मानव-सर्प संघर्ष को कम करने एवं सर्पदंश से बचाव हेतु दक्षिण पन्ना वनमण्डल द्वारा विशेष “सांप-सीढ़ी” आधारित शैक्षणिक खेल विकसित किया गया। इस नवाचार के माध्यम से हजारों बच्चों एवं ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव, प्राथमिक उपचार एवं वैज्ञानिक जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराई गई। इस पहल से जनजागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा मानव-सर्प संघर्ष संबंधी भ्रांतियों को कम करने में सहायता मिली।


व्यक्तिगत (शासकीय) श्रेणी में दक्षिण पन्ना वनमण्डल के वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रथम पुरस्कार एवं वनरक्षक वीरेंद्र पटेल को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार द्वारा दक्षिण पन्ना क्षेत्र में 129 महत्वपूर्ण औषधीय पौधों का अभिलेखीकरण एवं जनजागरूकता कार्य किया गया। वहीं वीरेंद्र पटेल द्वारा कल्दा क्षेत्र में 97 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण कर पक्षी एवं जैवविविधता संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का उल्लेखनीय कार्य किया गया।

दक्षिण पन्ना वनमण्डल की यह उपलब्धि जनभागीदारी, टीम भावना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नवाचार आधारित संरक्षण प्रयासों का परिणाम है। यह सम्मान न केवल दक्षिण पन्ना वन विभाग बल्कि पूरे पन्ना जिले के लिए गौरव का विषय है तथा भविष्य में जैवविविधता संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में प्रेरणादायक सिद्ध होगा।

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Thursday, May 14, 2026

हाईवे पर वाहन की टक्कर से तेंदुए की मौत, जांच जारी

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में वन क्षेत्र से लगे सड़क मार्गों पर आये दिन वन्य जीव हादसे का शिकार हो रहे हैं। सड़क मार्ग से गुजरने वाले तेज रफ़्तार वाहनों की चपेट में आकर बाघ व तेंदुआ तक असमय कल कवलित हो जाते हैं, बावजूद इसके वन्य जीवों की सुरक्षा व ऐसे सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे। बीती रात फिर एक तेंदुआ सड़क हादसे का शिकार हो गया, हादसे के बाद वन विभाग द्वारा जाँच की औपचारिकता निभाई जा रही है।      

उल्लेखनीय है कि दक्षिण वनमण्डल पन्ना अंतर्गत पवई रेंज में शिकारपुरा के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग NH 43 पर बीती रात एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक तेंदुए की मृत्यु हो गई। घटना की सूचना रात्रि लगभग 9:35 बजे प्राप्त होते ही पवई वन परिक्षेत्र की टीम मौके के लिए रवाना हुई एवं घटनास्थल पर पहुंचकर क्षेत्र को सुरक्षित रूप से घेराबंदी कर संरक्षित कर दिया गया। वन विभाग द्वारा सावधानी पूर्वक तेंदुए के शरीर का प्रारंभिक परीक्षण किया गया, जिसमें श्वसन, आंखों की पुतलियों की प्रतिक्रिया, सीने की गतिविधि एवं अन्य जीवन संकेत नहीं पाए गए। 

बताया गया है कि दुर्घटना में तेंदुए को गंभीर आंतरिक चोटें आई हैं। वन विभाग द्वारा आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया जा रहा है तथा रात्रि से ही वनकर्मियों की ड्यूटी लगाकर स्थल की निगरानी सुनिश्चित की गई है। वन विभाग की एक अन्य टीम तत्काल शाहनगर के समीप स्थित टोल प्लाजा पहुंची, जहां सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का परीक्षण कर दुर्घटना में शामिल वाहन की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

वन विभाग द्वारा पन्ना टाइगर रिजर्व के डॉग स्क्वाड को भी आज प्रातः घटनास्थल पर बुलाया गया है। डॉग स्क्वाड एवं अन्य आवश्यक जांच प्रक्रियाओं के उपरांत तेंदुए के शव को सड़क से हटाया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) कराया जाकर विधिवत अंतिम संस्कार किया जाएगा। वन विभाग द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है।

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Friday, May 8, 2026

रुंझ-मझगांय परियोजना पर बढ़ा तनाव, सामाजिक कार्यकर्ता सहित 10 आंदोलनकारी गिरफ्तार

पन्ना एसपी कार्यालय के बाहर परिसर में धरना में बैठे ग्रामीण

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में रुंझ, मझगांय डैम और केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर किसानों का विरोध अब बड़े आंदोलन में बदलता नजर आ रहा है। भू-अधिग्रहण, मुआवजा और विस्थापन पैकेज की मांग को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे किसानों में उस समय आक्रोश बढ़ गया, जब सामाजिक कार्यकर्ता व किसान नेता अमित भटनागर समेत 9 किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के विरोध में शुक्रवार को जिले के कई गांवों से सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए और पन्ना एसपी कार्यालय का घेराव कर रात भर धरना दिया। इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। 

रुंझ व मझगांय डैम परियोजना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर काम शुरू कराने की कोशिश जारी है। शुक्रवार 8 मई की दोपहर जिले के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में किसान पुरुष व महिलायें पन्ना जिला मुख्यालय पहुंचे और एसपी कार्यालय का घेराव कर धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान झाबुआ विधायक एवं किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया और यूथ कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार भी पन्ना पहुंचे और आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई। 

किसानों की मांग है कि अमित भटनागर सहित गिरफ्तार किसानों की गिरफ्तारी का कारण स्पष्ट किया जाए तथा उन्हें रिहा किया जाए। एसपी से मुलाकात न होने पर महिलाएं, बुजुर्ग और युवा पूरी रात एसपी कार्यालय के बाहर डटे रहे। वहीं दूसरी ओर अजयगढ़ क्षेत्र में रुंझ और मझगांय डैम परियोजनाओं को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। परियोजना स्थलों पर भारी पुलिस बल तैनात कर निर्माण कार्य शुरू कराने की कोशिश की जा रही है। अमित भटनागर के वकील ने पुलिस कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर किसानों को जेल भेजा गया है। हालांकि एसपी निवेदिता नायडू का कहना है कि परियोजना कार्य में बाधा पहुंचाने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की गई है।

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Tuesday, May 5, 2026

पन्ना टाइगर रिजर्व के दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध मौत, मॉनिटरिंग व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न


पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में एक दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध मौत का मामला प्रकाश में आया है। कुछ दिनों पूर्व एक वयस्क नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि आज एक और बाघ की मौत होने की खबर आने के बाद से पन्ना टाइगर रिज़र्व में हड़कंप मचा है।

उल्लेखनीय है कि अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा के आसपास यह बाघ देखा गया था। जिसे रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा गया था। लेकिन स्वस्थ हालत में छोड़े गए इस दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पन्ना टाइगर रिजर्व एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस बाघ को सप्ताह भर पूर्व आबादी क्षेत्र से सुरक्षित पकड़कर गहन चिकित्सीय परीक्षण के बाद पूरी तरह स्वस्थ बताते हुए कोर एरिया में छोड़ा गया था, उसकी अचानक मौत ने वन्यजीव सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

जानकारी के अनुसार मंगलवार की सुबह अमानगंज वन परिक्षेत्र की रमपुरा बीट के हाथीडोल क्षेत्र में एक नाले के पास उक्त बाघ का शव मिला। यह वही बाघ है जिसे 26 अप्रैल 2026 को ग्राम तारा के आबादी क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था। बाघ को रेडियो कॉलर पहनाकर उसकी सतत निगरानी का दावा किया जा रहा था, इसके बावजूद उसकी मौत कैसे हुई- यह सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है। रेस्क्यू के बाद कॉलरिंग कर उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया गया था। ऐसे में एक सप्ताह के भीतर ही उसकी संदिग्ध मौत होना कई सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व बृजेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि मृत पाए गए इस बाघ को पन्ना टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र अमानगंज बफर के पास तारा ग्राम से विगत 26 अप्रैल को रेस्क्यू किया गया था। रेस्क्यू उपरांत बाघ को पन्ना टाइगर रिज़र्व कोर क्षेत्र में स्वस्थ अवस्था में रेडियो कॉलर पहनाकर छोड़ा गया था। उक्त बाघ की हाथियों और वनकर्मियों द्वारा सतत निगरानी की जा रही थी। चिकित्सक दल द्वारा पोस्टमार्टम के उपरांत बताया गया कि उक्त बाघ के शरीर के विभिन्न अंगों में घाव के निशान हैं एवं Vertebral bone, Skull bone भी टूटी पाई गई। जिससे यह प्रतीत होता है कि बाघ की मत्यु प्रथम दृष्टया आपसी संघर्ष के कारण हुई होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने पर मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा। पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए समस्त सैंपल सक्षम प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेज दिए गए हैं।

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Saturday, April 25, 2026

सूखे कुंए में 15 घंटे साथ रहे बछड़ा और तेंदुआ, दिखा दोस्ती का अनोखा रिश्ता

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक सूखे कुंए में तेंदुआ और बछड़ा गिर गए, इस गहरे कुंए में दोनों तक़रीबन 15 घंटे तक साथ रहे। आश्चर्य की बात यह रही कि छोटे बछड़े को शिकारी तेंदुए ने किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। संकट की घडी में दोनों के बीच बहुत ही आत्मीय और दोस्ताना रिश्ता कायम रहा, जबकि बछड़ा तेंदुए का पसंदीदा शिकार है। बछड़ा और तेंदुआ के कुंआ में गिरने की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने इन दोनों को सुरक्षित कुएं से बाहर निकाला। यह वाकया इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। 

यह अनोखा मामला पन्ना जिले के रैपुरा वन परिक्षेत्र के ग्राम मक्केपाला का है। जहां एक तेंदुआ और बछड़ा करीब 15 घंटे तक एक ही कुएं में फंसे रहे, जिन्हे वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को बड़ी सूझबूझ के साथ रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की। जानकारी के अनुसार पन्ना जिले के दक्षिण वनमंडल के रैपुरा रेंज अंतर्गत अलौनी बीट के ग्राम मक्केपाला में तेंदुआ और बछड़ा एक ही कुंए में गिर गए थे। करीब 15 घंटे तक दोनों साथ फंसे रहे, फिर भी तेंदुआ जो कि बछड़े का शिकारी माना जाता है, उसने बछड़े कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। कुंए के भीतर अविश्वसनीय नजारा दिखाई दिया, कभी बछड़ा तेंदुए की पीठ पर बैठता तो कभी तेंदुआ उसके पास जाकर उसे चाटता नजर आया। दोनों के बीच संकट के समय बनी यह दोस्ती अब एक मिसाल बन चुकी है। 

सूखे और गहरे कुंए से इन दोनों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने शानदार तरीका अपनाया। उन्होंने लकड़ी के लट्ठों और रस्सियों से अस्थायी सीढ़ी तैयार की, जिसके सहारे तेंदुआ सुरक्षित बाहर निकल आया। रेस्क्यू आपरेशन की रणनीति कुछ इस तरह बनाई गई कि बाहर निकलते ही तेंदुआ गांव की ओर न जाकर सीधे जंगल की तरफ जाए। दक्षिण वन मंडल पन्ना के डीएफओ अनुपम शर्मा ने बताया कि शुक्रवार की सुबह हमें जानकारी मिली कि एक कुएं में बछड़ा और तेंदुआ गिर गए हैं। उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हमारी टीम ने एक सूझबूझ भरा निर्णय लिया। जब दोनों कुएं में थे, तब आपस में खेल रहे थे। कुएं के अंदर तेंदुए ने बछड़े को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। तेंदुए को निकालने के बाद हमने बछड़े को बाहर निकाल लिया जो अब अपनी मां के साथ है। 

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Tuesday, April 7, 2026

पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था, बच्चों ने दिखाई संवेदनशीलता


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्कूली बच्चों ने अनुकरणीय पहल की है, जिसकी सराहना हो रही है। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच बेजुबान पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए पवई ब्लॉक के शासकीय माध्यमिक शाला नारायणपुरा के विद्यार्थियों ने यह सराहनीय पहल की है। विद्यालय परिसर में स्थित पेड़ पर बच्चों ने मिट्टी के सकोरों में दाना-पानी रखकर पक्षियों के लिए जीवनदायिनी व्यवस्था की है। 

उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों ने स्वयं सकोरे एकत्र किए, उन्हें साफ कर पानी से भरा और अनाज डालकर पेड़ की शाखाओं पर सावधानीपूर्वक टांगा। इस दौरान बच्चों के चेहरों पर उत्साह और सेवा भाव साफ झलक रहा था। शिक्षक सतानंद पाठक ने बच्चों को बताया कि गर्मी के मौसम में तालाब, नदी-नाले सूख जाने से पक्षियों को पानी मिलना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में हमारी छोटी सी मदद उनके जीवन की रक्षा कर सकती है।

प्रधान अध्यापक माया खरे ने विद्यार्थियों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा किताबों तक सीमित न रहकर व्यवहार में आनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने घरों की छतों, बालकनियों और आंगन में पक्षियों के लिए दाना-पानी अवश्य रखें। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने भी बच्चों की इस सोच को अनुकरणीय बताया। अंत में सभी बच्चों ने संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से सकोरों में पानी बदलेंगे और दाना डालते रहेंगे, ताकि गर्मी में कोई भी पक्षी प्यासा न रहे।

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Thursday, April 2, 2026

ब्लावट्स्की को "तुलकू' क्यों कहा जाता है ?


तिब्बत में एक शब्द है "तुलकू'। ब्लावट्स्की को भी तिब्बत में "तुलकू' ही कहा जाता है। "तुलकू' का अर्थ होता है ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी बोधिसत्व के प्रभाव में इतना समर्पित हो गया है कि बोधिसत्व उसके द्वारा काम कर सके। ब्लावट्स्की तुलकू बन सकी। स्त्री थी, इसलिए आसानी से बन सकी; समर्पित थी। जो लोग ब्लावट्स्की के पास रहते थे, वे लोग चकित होते थे। जब वह लिखने बैठती थी, तो आविष्ट होती थी, पजेस्ड होती थी। लिखते वक्त उसके चेहरे का रंग-रूप बदल जाता था। आंखें किसी और लोक में चढ़ जाती थीं। और जब वह लिखने बैठती थी तो कभी दस घंटे, कभी बारह घंटे लिखती ही चली जाती थी। पागल की तरह लिखती थी। कभी काटती नहीं थी, जो लिखा था उसको। यह कभी-कभी होता था। जब वह खुद लिखती थी, तब उसे बहुत मेहनत करनी पड़ती थी।

तो उसके संगी-साथी उससे पूछते थे, यह क्या होता है? तो वह कहती थी कि जब मैं "तुलकू' की हालत में होती हूं, तब मुझसे कोई लिखवाता है। थियोसाफी में उनको मास्टर्स कहा गया है। कोई सदगुरु लिखवाता है, मैं नहीं लिखती; मेरे हाथ किसी के हाथ बन जाते हैं; कोई मुझमें आविष्ट हो जाता है, और तब लिखना शुरू हो जाता है, तब मैं अपने वश में नहीं होती, मैं सिर्फ वाहन होती हूं। यह पुस्तक भी ऐसे ही वाहन की अवस्था में उपलब्ध हुई है।

कभी-कभी ऐसा होता था कि कुछ लिखा जाता था और उसके बाद महीनों तक वह अधूरा ही पड़ा रहता था। संगी-साथी ब्लावट्स्की के कहते कि वह पूरा कर डालो, जो अधूरा पड़ा है। वह कहती, कोई उपाय नहीं है पूरा करने का; क्योंकि मैं पूरा करूं, तो सब खतरा हो जाए; जब मैं फिर आविष्ट हो जाऊंगी, तब पूरा हो जाएगा। उसकी कुछ किताबें अधूरी ही छूट गई हैं, क्योंकि जब कोई बोधिसत्व चेतना उसे पकड़ ले, तभी लिखना हो सकता है।

ये जो बोधिसत्व हैं, ऐसी चेतनाएं जो परमद्वार पर खड़ी हैं; क्षीण होने के, विलीन होने के, शांत होने के, नष्ट हो जाने के द्वार पर खड़ी हैं- महामृत्यु अभी घटनेवाली है जिनके लिए, ये हजार तरह से काम करती हैं। किसी व्यक्ति में आविष्ट हो सकती हैं, किसी व्यक्ति को पता भी न चले, उसका उपयोग कर सकती हैं। इन सारी आत्माओं का तिब्बत में खयाल है, और खयाल सही है कि एक दुर्ग है, जो मनुष्य-जाति को घेरे हुए है चारों तरफ से।

आदमी जैसा है, वह बिलकुल पागल है। और वह जो भी करता है, वह सब पागलपन से भरा है। अगर आदमी को बिलकुल उसके ही सहारे छोड़ दिया जाए, तो वह अपने को भी नष्ट कर ले सकता है। वह जो भी कर रहा है वह सब उपद्रव से ग्रस्त है। उसे कुछ पता ही नहीं कि क्या कर रहा है, और क्या हो रहा है। यह बोधिसत्वों का दुर्ग, उसे बार-बार मार्ग पर ले आता है, बार-बार उसे भटकने से बचाता है, बार-बार अनेक उपाय करके दिशा और दृष्टि देने की कोशिश करता है। यह सूत्र कह रहा है कि जब तू सातवें द्वार को भी पार कर जाएगा, तब अपनी ही स्वेच्छा से तू भी इस महादुर्ग की एक ईंट बनना चाहेगा। अनेक गुरुओं की यातनाओं से निर्मित यह दुर्ग है। यह दुर्ग मनुष्य-जाति की रक्षा करता है।

तिब्बत में हर बुद्ध-पूर्णिमा को एक विशेष पर्वत पर पांच सौ बौद्ध लामा इकट्ठे होते हैं। हर वर्ष बुद्ध- पूर्णिमा की रात, आधी रात बुद्ध की वाणी सुनाई पड़ती है। यह बोधिसत्व-वाणी है। एक नियत योजना के अनुसार, एक नियत घड़ी में बुद्ध की वाणी उपलब्ध होती है। नियत लोग, निश्चित लोग, जो उस वाणी को सुन सकते हैं- क्योंकि वाणी अशरीरी है- वे ही केवल वहां इकट्ठे होते हैं। पांच सौ से ज्यादा लामा वहां कभी इकट्ठे नहीं होते हैं। जब एक लामा उनमें से मर जाता है, समाप्त हो जाता है, तभी एक नए लामा को प्रवेश मिलता है। स्थान गुप्त रखा जाता है; क्योंकि कोई भी गैर-व्यक्ति वहां पहुंच जाए, तो बाधा पड़ सकती है उस घटना में। बुद्ध मरते वक्त वह निश्चित कर गए हैं।

सदगुरु अक्सर निश्चित कर जाते हैं कि उनके साथ, बाद में जब उनका शरीर न होगा, तो कैसे संबंध स्थापित किया जाए। यह संबंध स्थापित करने के निश्चित सूत्र हैं और उनके ही अनुसार चला जाए, तो संबंध स्थापित होते हैं। जो परंपराएं अपने गुरु से संबंध स्थापित करती रहती हैं, वे जीवित हैं। 

~ओशो

(समाधि के सप्त द्वार)

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Wednesday, April 1, 2026

खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर ठगी करने वाले 02 आरोपी गिरफ्तार

  • आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार एवं नगदी जप्त
  • धोखाधड़ी के इस सनसनीखेज मामले में एक आरोपी फरार 

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की पुलिस ने खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर भोले-भाले किसानों से ठगी करने वाले 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार एवं नगदी जप्त की गई है। मामले में 01 आरोपी फरार है जिसकी तलाश की जा रही है।बताया गया है कि आरोपी अलग-अलग कंपनियों के फर्जी प्रतिनिधी बनकर किसानों को फंसाकर खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर लाइसेंस दिलवाने के नाम पर धोखाधड़ी करते थे।  

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू ने आज आयोजित पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि पन्ना पुलिस द्वारा शाहनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर की गई धोखाधड़ी के गंभीर मामले में कार्यवाही करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। मामले में फरियादी मुकेश कुमार साहू निवासी ग्राम बोरी द्वारा थाना शाहनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा मुझे खाद-बीज के डिस्ट्रीब्यूटर का लायसेन्स दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी पूर्वक 02 लाख 34 हजार 500 रूपये की ठगी कर ली है। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना शाहनगर में अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 269/25 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत पंजीबद्ध किया जाकर विवेचना मे लिया गया। 

मामले में थाना प्रभारी शाहनगर परशुराम डाबर के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। गठित पुलिस टीम द्वारा आरोपियों की पतारसी एवं गिरफ्तारी हेतु फरियादी के बताये अनुसार आरोपियों के आने जाने वाले संभावित सभी रास्तो पर लगे सीसीटीव्ही कैमरो के फुटेज खंगाले गये एवं संदेही व्यक्तियों को चिन्हित किया गया। पुलिस टीम द्वारा मुखबिर सूचना एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले में 02 संदेही व्यक्तियों को सीतापुर उ0प्र0 से पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। उक्त दोनो संदेहियों द्वारा पूँछताछ किये जाने पर अपने-अपने नाम पता पुलिस टीम को बताये गये। पुलिस टीम द्वारा घटना के संबंध में कड़ाई से पूँछताछ किये जाने पर अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर फरियादी को फर्टिलाइजर कंपनी का प्रतिनिधि बनकर डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का लालच देकर डिस्ट्रीब्यूटर लाइसेंस एवं खाद-बीज उपलब्ध कराने का झांसा देकर धोखाधड़ी करना स्वीकार किया गया। पुलिस टीम द्वारा आरोपियों के बताये अनुसार आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक स्विफ्ट कार एवं 15 हजार रूपये नगद जप्त किये जाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में एक आरोपी फरार है जिसे जल्द गिरफ्तार किया जावेगा। 

धोखाधड़ी के इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में गोपीचन्द्र पिता जोधी प्रसाद श्रीवास्तव 42 वर्ष निवासी जिला सीतापुर (उ.प्र.) तथा कन्हैया लाल यादव पिता दुलारे यादव 32 वर्ष निवासी जिला सीतापुर (उ.प्र.) हैं। एक अन्य आरोपी अनूप पिता जोधी प्रसाद श्रीवास्तव 42 वर्ष, निवासी जिला सीतापुर (उ.प्र.) फरार है। आरोपियों से पूंछतांछ में पता चला है कि  पन्ना जिले के अतिरिक्त इन्होंने कटनी, औरैया, जबलपुर एवं झाँसी में इसी तरीके की धोखाधड़ी कारित की गई है। वर्तमान में आरोपी धर्मशाला हिमांचल प्रदेश की तरफ इसी तरीके की धोखाधड़ी हेतु अपना नेटवर्क तैयार कर रहे थे, जिन्हे पन्ना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूँछताछ जारी है, जिनसे अन्य राज्यो एवं जिलो के मामलो का खुलासा होने की प्रबल संभावना है। 

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Friday, March 20, 2026

बुंदेलखंड यात्रा पर पन्ना पहुंचे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल, भाजपा पर जमकर बरसे

 


पन्ना। मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल अपनी बुंदेलखंड यात्रा के दौरान आज, 20 मार्च को पन्ना पहुंचे। इंद्रपुरी स्थित जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह (दाऊ साहब) के छायाचित्र पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।

​इस अवसर पर कांग्रेस जनों को संबोधित करते हुए अजय सिंह राहुल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और कांग्रेस की सेवा भावना को उजागर किया। उन्होंने कहा, "भाजपा शोषण की राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस सेवा की राजनीति में विश्वास रखती है।"

​अपनी बुंदेलखंड यात्रा के उद्देश्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं पिछले तीन दिनों से बुंदेलखंड की यात्रा पर हूं। इस दौरान मुझसे मीडिया के एक साथी ने पूछा कि मैं यह यात्रा क्यों कर रहा हूं। मैंने उन्हें बताया कि मैं दाऊ साहब के उन पुराने कार्यकर्ताओं से मिलने निकला हूं जिन्होंने पार्टी के लिए वर्षों तक निस्वार्थ भाव से कार्य किया है।"

​बुंदेलखंड की राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "बुंदेलखंड के अंदर भाजपा के बड़े नेता कांग्रेस के नेताओं को दबाने का काम कर रहे हैं। हम सभी को एकजुट होकर इसका मुकाबला करने की आवश्यकता है।" उन्होंने पार्टी के भीतर एकता पर जोर देते हुए कहा, "टिकट किसी को भी मिले, हमारा मुख्य लक्ष्य अपनी पार्टी को जिताने का होना चाहिए। यदि पार्टी नहीं जीती तो उस टिकट का क्या होगा?"


​भाजपा सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "यदि कोई कांग्रेस समर्थक बीमार पड़ जाए, तो हमारे कहने पर मुख्यमंत्री केवल 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देते हैं। वहीं, यदि भाजपा के लोग मांगें तो उन्हें तीन-चार लाख रुपये दिए जाते हैं।"

​आगामी विधानसभा चुनाव की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "2028 में भाजपा सरकार को 25 वर्ष हो जाएंगे। नई पीढ़ी को शायद यह भी पता नहीं होगा कि मध्य प्रदेश में कभी कांग्रेस की सरकार भी रही होगी।" उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा, "हमें किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं है। हमें अपने आप को मजबूत बनाकर भाजपा के कुशासन से लड़ना है।"

​इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनीश खान ने अजय सिंह राहुल का स्वागत किया और उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा, "हमारे पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व नेता प्रतिपक्ष विधायक अजय सिंह राहुल भैया ने हमेशा सदन के अंदर और सड़क पर दलित, शोषित और कमजोर तबके की आवाज को बुलंद किया है। आज पन्ना में उनके आने से कांग्रेस परिवार के प्रत्येक सदस्य में उत्साह का संचार हुआ है।" उन्होंने आने वाले चुनाव में पार्टी की जीत के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कहा, "आने वाले चुनाव में हम सभी मिलकर जिले की तीनों सीटों पर पार्टी के द्वारा दिए गए प्रत्याशी को जिताने का काम करेंगे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के दौरे के समय पार्टी के वरिष्ठ नेता पदाधिकारी और काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कांग्रेस जनों के निवास पर पहुंचे की मुलाकात

पूर्व नेता प्रतिपक्ष आज कांग्रेस पार्टी के कांग्रेस नेता महेंद्र दीक्षित, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष शिवाजीत सिंह भैया राजा, वरिष्ठ नेता राजेश तिवारी, नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष स्वतंत्र प्रभाकर अवस्थी, पूर्व सदर स्वर्गीय जमीन मोहम्मद जल्ला, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामकिशोर मिश्रा, मार्तंड देव बुंदेला, पार्षद रेहान मोहम्मद, रामदास जाटव, पूर्व जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष दीपक तिवारी, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह परमार, वरिष्ठ नेता ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिव्या रानी सिंह, कांग्रेस नेता एडवोकेट अंकित शर्मा की माता जी व स्वर्गीय पंडित दिनेश गंगेले  के निधनं होने पर निवास पर पहुंचकर शोक संवेदनाएं प्रकट की।

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