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| खटिया चौपाल में वृंदा करात प्रभावित परिवारों को सम्बोधित करते हुए। |
पन्ना। चिता आंदोलन के 46वें दिन आंदोलन स्थल पर आक्रोश रैली निकाली गई। इसके साथ ही केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित पन्ना जिले के उन आठ गांवों के विस्थापित परिवारों की खटिया चौपाल भी आयोजित की गई, जिनके परिवारों ने कथित जबरन विस्थापन और गांव उजाड़े जाने का दर्द झेला है।
खटिया चौपाल में वृंदा करात और अमित भटनागर ने प्रभावित परिवारों के बीच अपनी बात रखी। विस्थापितों ने मुआवजे, पुनर्वास, कानूनी प्रक्रियाओं और अपने अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए। उनका आरोप है कि वर्षों से बसे गांवों को पुलिस बल के सहारे उजाड़ा गया और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त न्याय नहीं मिला।
उल्लेखनीय है कि अमित भटनागर के आमरण अनशन की समाप्ति और 24 अक्टूबर को पन्ना में आयोजित संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ रैली एवं कलेक्ट्रेट घेराव में उमड़े जनसैलाब के बाद चिता आंदोलन लगातार गति पकड़ रहा है। अपने नेतृत्वकर्ता को फिर से अपने बीच पाकर प्रभावित परिवारों का उत्साह बढ़ा है और आंदोलन स्थल पर लोगों की भागीदारी में तेजी देखी जा रही है। अमित भटनागर की मौजूदगी के बाद आंदोलन स्थल पर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा जनसंगठनों की आवाजाही बढ़ी है।
विस्थापित गांवों की लगी खटिया चौपाल को संबोधित करते हुए वृंदा करात ने भाजपा सरकार और पन्ना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर वर्षों से बसे आदिवासी परिवारों को उजाड़ना और उनके अधिकारों की अनदेखी करना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने चिता आंदोलन को भोपाल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई।
कलेक्टर से भी मिले वृंदा करात और अमित भटनागर
विस्थापितों की समस्याओं और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को लेकर वृंदा करात ने पुलिस अधीक्षक से मिलने का प्रयास किया। एसपी के उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना चौहान से मुलाकात की और अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ज्ञापन सौंपा। इसके बाद वृंदा करात और अमित भटनागर ने पन्ना के नवागत कलेक्टर हर्ष सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन दिया। इसमें केन-बेतवा, रुंझ बांध और ललितपुर-सिंगरौली रेलमार्ग सहित विभिन्न परियोजनाओं में कथित गैरकानूनी बेदखली, नियमों के उल्लंघन, मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े सवालों तथा आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को उठाया गया। दोनों ने प्रभावितों के अधिकारों की रक्षा और शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
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