Friday, March 20, 2026

बुंदेलखंड यात्रा पर पन्ना पहुंचे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल, भाजपा पर जमकर बरसे

 


पन्ना। मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल अपनी बुंदेलखंड यात्रा के दौरान आज, 20 मार्च को पन्ना पहुंचे। इंद्रपुरी स्थित जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह (दाऊ साहब) के छायाचित्र पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।

​इस अवसर पर कांग्रेस जनों को संबोधित करते हुए अजय सिंह राहुल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और कांग्रेस की सेवा भावना को उजागर किया। उन्होंने कहा, "भाजपा शोषण की राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस सेवा की राजनीति में विश्वास रखती है।"

​अपनी बुंदेलखंड यात्रा के उद्देश्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं पिछले तीन दिनों से बुंदेलखंड की यात्रा पर हूं। इस दौरान मुझसे मीडिया के एक साथी ने पूछा कि मैं यह यात्रा क्यों कर रहा हूं। मैंने उन्हें बताया कि मैं दाऊ साहब के उन पुराने कार्यकर्ताओं से मिलने निकला हूं जिन्होंने पार्टी के लिए वर्षों तक निस्वार्थ भाव से कार्य किया है।"

​बुंदेलखंड की राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "बुंदेलखंड के अंदर भाजपा के बड़े नेता कांग्रेस के नेताओं को दबाने का काम कर रहे हैं। हम सभी को एकजुट होकर इसका मुकाबला करने की आवश्यकता है।" उन्होंने पार्टी के भीतर एकता पर जोर देते हुए कहा, "टिकट किसी को भी मिले, हमारा मुख्य लक्ष्य अपनी पार्टी को जिताने का होना चाहिए। यदि पार्टी नहीं जीती तो उस टिकट का क्या होगा?"


​भाजपा सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "यदि कोई कांग्रेस समर्थक बीमार पड़ जाए, तो हमारे कहने पर मुख्यमंत्री केवल 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देते हैं। वहीं, यदि भाजपा के लोग मांगें तो उन्हें तीन-चार लाख रुपये दिए जाते हैं।"

​आगामी विधानसभा चुनाव की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "2028 में भाजपा सरकार को 25 वर्ष हो जाएंगे। नई पीढ़ी को शायद यह भी पता नहीं होगा कि मध्य प्रदेश में कभी कांग्रेस की सरकार भी रही होगी।" उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा, "हमें किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं है। हमें अपने आप को मजबूत बनाकर भाजपा के कुशासन से लड़ना है।"

​इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनीश खान ने अजय सिंह राहुल का स्वागत किया और उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा, "हमारे पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व नेता प्रतिपक्ष विधायक अजय सिंह राहुल भैया ने हमेशा सदन के अंदर और सड़क पर दलित, शोषित और कमजोर तबके की आवाज को बुलंद किया है। आज पन्ना में उनके आने से कांग्रेस परिवार के प्रत्येक सदस्य में उत्साह का संचार हुआ है।" उन्होंने आने वाले चुनाव में पार्टी की जीत के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कहा, "आने वाले चुनाव में हम सभी मिलकर जिले की तीनों सीटों पर पार्टी के द्वारा दिए गए प्रत्याशी को जिताने का काम करेंगे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के दौरे के समय पार्टी के वरिष्ठ नेता पदाधिकारी और काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कांग्रेस जनों के निवास पर पहुंचे की मुलाकात

पूर्व नेता प्रतिपक्ष आज कांग्रेस पार्टी के कांग्रेस नेता महेंद्र दीक्षित, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष शिवाजीत सिंह भैया राजा, वरिष्ठ नेता राजेश तिवारी, नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष स्वतंत्र प्रभाकर अवस्थी, पूर्व सदर स्वर्गीय जमीन मोहम्मद जल्ला, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामकिशोर मिश्रा, मार्तंड देव बुंदेला, पार्षद रेहान मोहम्मद, रामदास जाटव, पूर्व जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष दीपक तिवारी, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह परमार, वरिष्ठ नेता ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिव्या रानी सिंह, कांग्रेस नेता एडवोकेट अंकित शर्मा की माता जी व स्वर्गीय पंडित दिनेश गंगेले  के निधनं होने पर निवास पर पहुंचकर शोक संवेदनाएं प्रकट की।

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पेड़ों व घरों के बाहर पक्षियों को आश्रय देने लटका रहे कृत्रिम घोंसले

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सेवानिवृत्त सहायक महानिर्देशक डा.सदाचारी सिंह तोमर ने की पहल 
  • पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने कहा कि वर्तमान में बड़े संकट में हैं हमारे सहचर पक्षी, इनका संरक्षण जरुरी  


नवरात्रि में जहां लोग तरह तरह के सेवा के कार्य शुरू करते है वहीं मध्यप्रदेश के सतना जिले में उचेहरा क्षेत्र के डुडहा गांव के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सेवानिवृत्त सहायक महानिर्देशक डा.सदाचारी सिंह तोमर द्वारा पक्षियों के लिए पहल करते हुए घोंसले बनाकर पेड़ों व घरों के बाहर लटकाने का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया व अध्यक्षता चंद्रिका तोमर कोल माइंस (टेक्निकल प्रबंधक) छत्तीसगढ़ रहे। इस दौरान घोंसले बनाकर घर के अलग-अलग जगह पेड़ों पर टांगे गए है। 

पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने कहा कि वर्तमान में हमारे सहचर पक्षी बड़े संकट में हैं। चिड़ियों से मनुष्य की प्राचीन समय से ही समीपता रही हैं। धार्मिक साहित्यिक कोई भी ग्रंथ हों, किसी भी देश काल या वहां की भाषा में हों लेकिन पक्षियों का वर्णन उनमें अवश्य मिलता है। हमारे बघेली में तो अनेक गीत, मुहावरे, लोकोक्तियां, पहेलियां और लोक कथाएं ही चड़ियों पर आधारित हैं। प्राचीन समय में जब आज जैसे यातायात के साधन नही थे और लोग पैदल ही यात्राएं करते तब अक्सर कहते कि "भइया चुहचुहिया बोलत हामी चल देय क है?" क्योंकि पेड़ों में आराम फरमाती चिड़ियां चार बजे भोर से ही चूं चूं बोलने लगती थीं। 

भले ही गौरेया चिड़िया मुर्गे मुर्गी की तरह मनुष्य की गुलामी स्वीकार न करते हुए हमेशा एक दूरी बनाकर ही रही हो परंतु वह वहीं पाई जाती है जहां - जहां मनुष्य की बस्ती है और मनुष्य के आंगन का दाना ही चुगती है। प्राचीन समय में जब गांव घने जंगलों के बीच हुआ करते थे तो लोगों को यदि गौरेया दिख जाएं तो समझ जाते थे कि "आस पास ही कोई गांव होगा। यही हाल गलरी, पेंगा आदि कुछ मैना प्रजाति की अन्य चिड़ियों का भी है जो किसानों के खेतों ,बागानों आदि में लगने वाले कीड़ों को खाकर ही अपना जीवन यापन करती हैं। प्राचीन समय में एक लोक मान्यता ही हुआ करती थी कि "अगर गौरेया किसी गांव को छोड़ कर चली जाय तो उसका अर्थ था कि गांव में हैजा आदि कोई महामारी आने वाली है।"


गर्मी में पानी की कमी तो हर वर्ष आती ही है और बहुत से दयालु लोग घड़े के अर्ध भाग को फोड़ किसी छायादार पेड़ की डालियों में बांध पानी का प्रबंध भी कर देते हैं। लेकिन सबसे अधिक संकट उनके वंश परिवर्धन का है। मैना, दर्जिन आदि चिड़ियों के घोंसले तो सर्व विदित हैं। पर कुछ पक्षी अपने अंडे पेड़ के कोटर में रखते थे। लेकिन अब जब कहीं बड़े पेड़ बचे ही नहीं तो वे बेचारे कहां अंडे रखें ? एक छोटी सी फुदकैली चिड़ियां घरों के पास उगी सघन झाड़ियों के बीच अपनी छोटी सी पाल बनाकर अंडे रखती थी, जिससे कौए की नजर से बचाकर वे अंडे बच्चे पाल सके। किन्तु अब हर जगह कंक्रीट पुत जाने के कारण ऐसी झाड़ियां ही नहीं बची।  

गौरेया बिल्ली और कौआ की नजर बचा कच्चे मकानों के अंदर किसी छेंद, झोपड़ी की ठाठ अथवा घर के आस पास बने घोंपा छतुरा आदि में अंडे रखती थी। लेकिन आज न तो कच्चे मकान झोपड़ी आदि बचे न ही घोंपा छतुरा ही। और यदि पक्के मकानों में कहीं छिद्र भी हैं तो उनमें इतना ताप बढ़ जाता है जिससे अंडों से बच्चे ही नही बन पाते। इसलिए एक मुश्किल बात यह भी आ रही है कि मनुष्य के फसलों की रक्षा करने वाले उसके यह सहचर पक्षी कैसे अपना वंश परिवर्धन करें ? इतना ही नहीं कुछ पक्षी तो मौसम के परिचायक होते हैं। टिटिहरी उपना अंडा नालों के बीच बालू में रखती है पर वह तभी वहां अंडे रखेगी जब मौसम 10-12 दिन का सूखा रहने की संभावना हो।

इसी तरह जिस वर्ष बया घने पत्तों के नीचे घोषला बनाए उसका अर्ध है कि उस वर्ष अधिक वर्षा होगी। चंद्रिका तोमर ने कहा कि मौजूदा समय में पेयजल की किल्लत गहराती जा रही है। ऐसे में कई बार पक्षियों को पानी नहीं मिल पाता। इसके साथ ही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के चलते पक्षी अपना घोंसला भी नहीं लगा पाती। ऐसे में पक्षियों को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमी आगे आएं। 

श्री तोमर ने कहा कि यह घोंसले डिब्बे नुमा होते हैं, जिसमें चिड़ियों के जाने के लिए एक छेंद रहता है। और उसमें वे तिनके आदि रख कर आसानी से अपनी सुरक्षित पाल बना सकती हैं। शुरू में एक घोषला जो उनने परीक्षण के लिए लगाया था, उसमें एक चिड़िया ने अपने अंडे रख भी लिया है। यही कारण है कि उनने अब दर्जनों उसी तरह के घोंसले बनवा कर लटकवा रहे हैं। अगर दो चार किस्म की चिड़ियों ने उसे अपना लिया तो वे इस तरह के कुछ और अभिनव प्रयोग करेंगे और लोगों को प्रेरित करने के लिए अब जागरूकता अभियान भी करेंगे। 

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Tuesday, March 17, 2026

पन्ना जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित, जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किया आदेश

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार ने जनहित में पेयजल एवं अन्य निस्तार समस्याओं के दृष्टिगत तथा आम जनता को पेयजल प्रदाय बनाए रखने व जनता की आवश्यकता की पूर्ति के उद्देश्य से इस सम्बन्ध में विधिवत आदेश जारी किया गया है। म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग कर जारी आदेश में जिले के सभी विकासखंड व नगरीय क्षेत्रों को 16 मार्च से 20 जुलाई 2026 तक की अवधि के लिए जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि सिंचाई इत्यादि कार्यों में भूगर्भीय जल का अत्यधिक दोहन होने के कारण पेयजल स्रोतों के जल स्तर में कमी आई है। नलकूपों एवं अन्य जल स्रोत के जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। इस कारण जिले में पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना है। इस संबंध में कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खंड पन्ना द्वारा सार्वजनिक पेयजल स्रोतों की क्षमता प्रभावित न होने के मद्देनजर निजी नलकूप खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई थी। 

आदेश लागू होने के उपरांत अब कोई भी व्यक्ति बगैर अनुमति के शासकीय भूमि पर स्थित जल स्रोतों में पेयजल तथा घरेलू प्रयोजनों को छोड़कर अन्य किसी भी प्रयोजन के लिए नहरों में प्रवाहित जल के अलावा अन्य स्रोतों का जल दोहन किन्हीं भी साधनों द्वारा जल का उपयोग नहीं करेगा। जिले के सभी विकासखंड और नगरीय क्षेत्रों के समस्त नदी, नालों, स्टॉप डैम, सार्वजनिक कुओं व अन्य जल स्रोतों का उपयोग घरेलू प्रयोजनों के लिए भी तत्काल प्रभाव से सुरक्षित किया गया है। जल अभावग्रस्त क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति स्वयं अथवा निजी ठेकेदार एसडीएम की अनुज्ञा प्राप्त किए बगैर किसी भी प्रयोजन के लिए नवीन नलकूप का निर्माण नहीं करेगा। शासकीय नलकूप खनन पर यह आदेश लागू नहीं होगा।

निजी भूमि पर नलकूप खनन की लेना होगी अनुमति

स्वयं की निजी भूमि पर नलकूप खनन कार्य के लिए संबंधित व्यक्तियों को निर्धारित प्रारूप में नियत शुल्क के साथ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन करना होगा। इसके लिए सभी एसडीएम को उनके क्षेत्राधिकार अंतर्गत सक्षम अधिकारी प्राधिकृत किया गया है। संबंधित एसडीएम द्वारा अनुमति देने के पूर्व आवश्यक जांच एवं परीक्षण की कार्रवाई पूर्ण की जाएगी तथा अनुमति दिए जाने के संबंध में जनपद पंचायत सीईओ, तहसीलदार एवं नगरीय निकायों के सीएमओ से अभिमत प्राप्त किया जाएगा। 

सार्वजनिक पेयजल स्रोत सूखने एवं वैकल्पिक रूप से कोई दूसरा पेयजल स्रोत उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित एसडीएम पेयजल परीक्षण संशोधित अधिनियम 2002 की धारा 4ए तथा 4बी के प्रावधानों के अधीन निश्चित अवधि के लिए निजी पेयजल स्रोत का अधिग्रहण कर सकेंगे। आदेश के उल्लंघन पर संबंधित के विरूद्ध म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 संशोधन 2022 की धारा 9 व भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकेगी। समस्त अनुविभागीय मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, थाना प्रभारी, पीएचई के फील्ड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी, नगरीय निकायों के सीएमओ, जनपद पंचायत सीईओ तथा ग्राम पंचायतों के सचिव को आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के लिए निर्देशित किया गया है।

पशु चारा एवं भूसा के निर्यात व परिवहन पर लगा प्रतिबंध

जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार द्वारा पन्ना जिले में पशुधन के लिए चारा-भूसा की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से जिले के बाहर भूसा चारा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिला मजिस्ट्रेट ने उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश चारा निर्यात नियंत्रण आदेश 2000 में निहित प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से आगामी 31 जुलाई तक भूसा चारा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। अब कोई भी कृषक, व्यापारी, निर्यातक व्यक्ति किसी भी प्रकार से प्रतिबंधित पशुचारा व भूसा का परिवहन किसी वाहन, मोटर या किसी भी यान द्वारा पन्ना जिले के बाहर अन्य जिले में संबंधित क्षेत्र के उपखंड मजिस्ट्रेट की अनुज्ञा के बगैर निर्यात नहीं करेगा। आदेश के क्रियान्वयन व अनुपालन के लिए संबंधित तहसीलदार, नायब तहसीलदार व थाना प्रभारी को दायित्व सौंपा गया है। पशु आहार में आने वाले सभी प्रकार के चारा भूसा को जिले के बाहर सीमावर्ती जिलों में परिवहन एवं निर्यात संबंधी प्रतिबंध के पालन के दौरान संबंधित अधिकारी द्वारा नियत बिंदुओं पर जांच कर उल्लंघन संबंधी प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

जिले में पशु चारा और भूसा की कमी की आशंका के दृष्टिगत पशुओं को पर्याप्त मात्रा में चारा भूसा की आपूर्ति बनाए रखने के संबंध में सीमावर्ती जिलों में पशुचारा व भूसा निर्यात संबंधी प्रतिबंध के तहत नियुक्त अधिकारी पशु चारे के निर्यात के लिए उपयोग में लाए गए साधन को रोककर तलाशी ले सकेंगे या रोकने व तलाशी के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत भी कर सकते हैं। इसके अलावा किसी स्थान में प्रवेश कर तलाशी लेने एवं किसी व्यक्ति को प्रवेश करने व तलाशी लेने के लिए भी प्राधिकृत किया जा सकेगा। जांच के दौरान वस्तुओं को ले जाने के लिए उपयोग में लाए जा रहे पशुओं, यानों, जलयानों, नावों अथवा वाहनों के साथ अधिग्रहित कर सकेगा।

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डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध है गैस बुकिंग की सुविधा

 


पन्ना। अपर मुख्य सचिव खाद्य विभाग द्वारा सिलेंडर की वितरण व्यवस्था सुचारू बनाए रखने तथा घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। ऑयल कंपनियो ने मोबाइल एप, एसएमएस, व्हाट्सएप तथा आईवीआरएस कॉल द्वारा गैस बुकिंग की सुविधा प्रदान की है। उपभोक्ता बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यम का प्रयोग कर अनावश्यक रूप से एजेंसी पर जाने से बच सकते हैं।

सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि सूचना तंत्र सुदृढ़ कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करें। यदि कहीं वितरण व्यवस्था में अनियमितता या विलंब की शिकायत मिलती है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराई जाए। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी तथा घरेलू एलपीजी गैस की उपलब्धता के संबंध में ऑयल कंपनियों से समन्वय के लिए राज्य स्तर पर 6 सदस्यीय समिति भी गठित की गई है, जो कामर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी करेगी। औद्योगिक एवं वाणिज्यिक संस्थाओ से आग्रह किया गया है कि वे उपलब्धता अनुसार पीएनजी के कनेक्शन लें। पीएनजी की आपूर्ति लगातार बनी हुई है और आगे भी जारी रहेगी। प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, घरेलू पीएनजी तथा सीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है। साथ ही गैस सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक है। प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट एवं वितरकों के गोदाम में पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि विगत अंतिम रिफिल के 25 दिन बाद पुनः बुकिंग कराएं। प्रशासन द्वारा वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह भी दी गई है। जिन कार्यों में गैस ज्यादा खर्च होती है, उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। प्रदेश में घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति जारी है, उपभोक्ता अनावश्यक रूप से अफवाहों से भ्रमित न हों। देश की रिफायनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही हैं तथा पश्चिम एशिया के अतिरिक्त अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सिलेंडर बुकिंग संबंधित शिकायत या सुझाव हेतु भारत गैस हेल्पलाइन नंबर 1800-22-4344, इंडेन गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 तथा एचपी गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क किया जा सकता है।

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Monday, March 16, 2026

एक छोटा सा प्रवासी पक्षी जिसने तोड़ दिया विश्व रिकॉर्ड, 11 दिनों में तय किया 13,560 किमी. का सफर

 


कुदरत का करिश्मा देखिए, एक छोटे से प्रवासी पक्षी ने विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है....! उसने विशाल पैसिफिक महासागर को बिना रुके पार कर 8,425 मील (13,560 किमी) की लंबी उड़ान भरी। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, इस पक्षी ने अपनी यात्रा 12 अक्टूबर, 2022 को अमेरिका के अलास्का से शुरू की थी और यह 11वें दिन ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया में जाकर रुका। बार-टेड "गॉडविट" नाम का यह पक्षी पैसिफिक महासागर के पार अपने प्रवास के दौरान खाने, पीने या सोने के लिए नहीं रुकता। 

आखिर यह कैसे कर लेता है यह सब ? उड़ान से पहले यह अपने शरीर में लगभग शल्य चिकित्सा जैसा बदलाव करता है। यह अपने पाचन अंगों को लगभग शून्य कर देता है। पेट, आंतों और लीवर को कच्चे ईंधन में बदल देता है। पक्षी मूल रूप से अपने पेट को फैट रिजर्व बनाने के लिए खाता है, जो इसके पंखों को लगभग दो सप्ताह तक शक्ति प्रदान करेगा। मस्तिष्क भी पूरी तरह से सोता नहीं है। इसका आधा हिस्सा सक्रिय रहता है, जबकि दूसरा आधा आराम करता है। 

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, इस पक्षी ने अपनी यात्रा 12 अक्टूबर, 2022 को अमेरिका के अलास्का से शुरू की थी और यह 11वें दिन ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया में जाकर रुका। इस दौरान इस पक्षी ने 13,560 किलोमीटर का सफर तय किया। इस शानदार पक्षी ने बिना रुके लगातार 11 दिन और एक घंटे तक अपनी उड़ान जारी रखी और अपना सफर पूरा किया। अपनी उड़ान के दौरान गॉडविट की पीठ के निचले हिस्से में वैज्ञानिकों ने 5G सैटेलाइट टैग लगा दिया था, जिसकी मदद से वह उसे ट्रैक कर रहे थे।


आपको बता दें गॉडविट पक्षी का आकार लड़ाकू विमान की तरह होता है और इसके लंबे-नुकीले पंख इसे हवा में इसे तेज उड़ने की क्षमता देते हैं। इस पक्षी का वजन 230 से 450 ग्राम के बीच होता है। इसके पंखों की चौड़ाई लगभग 70 से 80 सेंटीमीटर होती है। वहीं एक वयस्क गॉडविट की लंबाई 37 से 39 सेंटीमीटर के बीच हो सकती है। इस पक्षी के बारे में बताया गया है कि ये दिन और रात की उड़ान के दौरान अपने शरीर के वजन को आधा या उससे भी कम कर लेते हैं। इसके साथ ही वह अपने अंगों को सिकोड़ लेते हैं जिसकी वजह से हवा में उड़ने पर इस पक्षी का शरीर काफी छोटा हो जाता है। इसी वजह से यह पक्षी बगैर रुके लंबे समय तक उड़ पाते हैं। 

उड़ान के दौरान गॉडविट एक ही समय में बेहोश और नेविगेटिंग (Navigating) कर रहा होता है, इसकी नेविगेशनल प्रेसिजन वास्तव में आश्चर्यजनक है। पक्षी अलास्का से निकलता है...., और न्यूज़ीलैंड में उतरता है, जिसकी सटीकता शुरुआती जीपीएस सिस्टम को भी शर्मिंदा कर देगी। यह पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड, वायुमंडलीय दबाव ग्रेडिएंट, तारों की स्थिति और संभावित रूप से क्वांटम-लेवल कंपास मेकैनिज्म को पढ़ता है, जो इसे मैग्नेटिक फील्ड लाइनों को अपने दृश्य क्षेत्र पर ओवरले देखने देता है। हम मशीनों को इंजीनियर करने में अरबों खर्च करते हैं, जो इस पक्षी को इंस्टिंक्ट, फैट रिजर्व और आधे सोए हुए मस्तिष्क पर करते हैं। ज्ञात रहे, एक वाणिज्यिक विमान द्वारा सबसे लंबी रिकॉर्ड की गई नॉन-स्टॉप उड़ान लगभग 20 घंटे है। इस पक्षी ने 11 दिन लगाए, बिना रनवे के.....!

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Sunday, March 8, 2026

महिला दिवस आज : भविष्य की सभ्यता स्त्री के आसपास बनेगी


बुनियादी भूल जो सारी शिक्षा और सारी सभ्यता को खाए जा रही है, वह यह है कि अब तक के जीवन का सारा निर्माण पुरुष के आसपास हुआ है, स्त्री के आसपास नहीं। अब तक की सारी सभ्यता, सारी संस्कृति, सारी शिक्षा पुरुष ने निर्मित की है, पुरुष के ढंग से निर्मित हुई है, स्त्री के ढंग से नहीं। पुरुष के जो गुण हैं, सभ्यता ने उनको ही सब कुछ मान रखा है। स्त्री की जो संभावना है, स्त्री के जो मन के भीतर छिपे हुए बीज हैं, वे जैसे विकसित हो सकते हैं, उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पुरुष बिलकुल अधूरा है, स्त्री के बिना तो बहुत अधूरा है। और पुरुष अगर अकेला ही सभ्यता को निर्मित करेगा तो वह सभ्यता भी अधूरी होगी; न केवल अधूरी होगी, बल्कि खतरनाक भी होगी।

वह खतरनाक इसलिए होगी कि पुरुष के मन की जो तीव्र आकांक्षा है वह एंबीशन है, महत्वाकांक्षा है। पुरुष के मन में प्रेम बहुत गहराई पर नहीं है, महत्वाकांक्षा! और जहां महत्वाकांक्षा है वहां ईर्ष्या होगी, जहां महत्वाकांक्षा है वहां हिंसा होगी, जहां महत्वाकांक्षा है वहां घृणा होगी, जहां महत्वाकांक्षा है वहां युद्ध होगा। पुरुष का सारा चित्त एंबीशन से भरा हुआ है। स्त्री के चित्त में एंबीशन नहीं है, महत्वाकांक्षा नहीं है, बल्कि प्रेम है। और हमारी पूरी सभ्यता प्रेम से बिलकुल शून्य है, प्रेम से बिलकुल रिक्त है, प्रेम की उसमें कोई जगह नहीं है। पुरुष ने अपने ही ढंग से पूरी बात निर्मित कर ली है। उसकी सारी शिक्षा भी उसने अपने ढंग से निर्मित कर ली है। उसने जीवन की जो संरचना की है वह अपने ही ढंग से की है। उसमें युद्ध प्रमुख है, उसमें संघर्ष प्रमुख है, उसमें तलवार प्रमुख है।

यहां तक कि अगर कोई स्त्री भी तलवार लेकर खड़ी हो जाती है तो पुरुष उसे बहुत आदर देता है। जोन ऑफ आर्क को, झांसी की रानी लक्ष्मी को पुरुष बहुत आदर देता है। इसलिए नहीं कि वे बहुत कीमती स्त्रियां थीं, बल्कि इसलिए कि वे पुरुष जैसी स्त्रियां थीं। वह उनकी मूर्तियां खड़ी करता है चौरस्तों पर। वह गीत गाता है: खूब लड़ी मर्दानी, झांसी वाली रानी थी। वह कहता है कि वह मर्दानी थी, इसलिए आदर देता है। लेकिन अगर कोई पुरुष जनाना हो तो अनादर करता है, आदर नहीं देता। स्त्री मर्दानी हो तो आदर देता है। स्त्री तलवार लेकर लड़ती हो, सैनिक बनती हो, तो पुरुष के मन में सम्मान है। पुरुष के मन में हिंसा के और महत्वाकांक्षा के अतिरिक्त किसी बात का कोई सम्मान नहीं है।

यह जो पुरुष अधूरा है, सारी शिक्षा भी उसी पुरुष के लिए निर्मित हुई है। हजारों वर्षों तक स्त्री को कोई शिक्षा नहीं दी गई। एक बड़ी भूल थी कि स्त्री अशिक्षित रह जाए। फिर कुछ वर्षों से स्त्री को शिक्षा दी जा रही है। और अब दूसरी भूल की जा रही है कि स्त्री को पुरुषों जैसी शिक्षा दी जा रही है। यह अशिक्षित स्त्री से भी खतरनाक स्त्री को पैदा करेगी। अशिक्षित स्त्री कम से कम स्त्री थी। शिक्षित स्त्री पुरुष के ज्यादा करीब आ जाती है, स्त्री कम रह जाती है। क्योंकि जिस शिक्षा से गुजरती है उसका मौलिक निर्माण पुरुष के लिए हुआ है। एक ऐसी स्त्री पैदा हो रही है सारी दुनिया में, जो अगर सौ दो सौ वर्ष इसी तरह की शिक्षा चलती रही तो अपने समस्त स्त्री-धर्म को खो देगी। उसके जीवन में जो भी महत्वपूर्ण है, उसकी प्रतिभा में जो भी कीमती है, उसके स्वभाव में जो भी सत्य है, वह सब विनष्ट हो जाएगा।

स्त्री शिक्षित होनी चाहिए। लेकिन उस तरह की शिक्षा में नहीं जो पुरुष की है। स्त्री के लिए ठीक स्त्री जैसी शिक्षा विकसित होनी जरूरी है। यह हमारे ध्यान में नहीं है और अभी मनुष्य-जाति के किन्हीं विचारकों के ध्यान में बहुत स्पष्ट नहीं है कि नारी की शिक्षा पुरुष से बिलकुल ही भिन्न शिक्षा होगी।

नारी भिन्न है।

मैं आपको यह कहना चाहता हूं, स्त्री और पुरुष समान आदर के पात्र हैं, लेकिन समान बिलकुल भी नहीं हैं, बिलकुल असमान हैं। स्त्री स्त्री है, पुरुष पुरुष है। और उन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है। इस फर्क को अगर ध्यान में न रखा जाए तो जो भी शिक्षा होगी वह स्त्री के लिए बहुत आत्मघाती होने वाली है। वह स्त्री को नष्ट करने वाली होगी। स्त्री और पुरुष मौलिक रूप से भिन्न हैं। और उनकी यह जो मौलिक भिन्नता है, यह जो पोलेरिटी है, जैसे उत्तर और दक्षिण ध्रुव भिन्न हैं, जैसे बिजली के निगेटिव और पाजिटिव पोल भिन्न हैं, यह जो इतनी पोलेरिटी है, इतनी भिन्नता है, इसी की वजह से उनके बीच इतना आकर्षण है। इसी के कारण वे एक-दूसरे के सहयोगी और साथी और मित्र बन पाते हैं। यह असमानता जितनी कम होगी, यह भिन्नता जितनी कम होगी, यह दूरी जितनी कम होगी, उतना ही खतरनाक है मनुष्य के लिए। 

मेरी दृष्टि में, स्त्रियों को पुरुषों जैसा बनाने वाली शिक्षा, सारी दुनिया में हर, एक-एक बच्चे तक पहुंचाई जा रही है। पुरुष तो पहले से ही विक्षिप्त सभ्यता को जन्म दिया है। एक आशा है कि स्त्री एक नई सभ्यता की उन्नायक बने। लेकिन वह आशा भी समाप्त हो जाएगी अगर स्त्री भी पुरुष की भांति दीक्षित हो जाती है।

मेरी दृष्टि में, स्त्री को गणित की नहीं, संगीत की और काव्य की शिक्षा ही उपयोगी है। उसे इंजीनियर बनाने की कोई भी जरूरत नहीं। इंजीनियर वैसे ही जरूरत से ज्यादा हैं। पुरुष पर्याप्त हैं इंजीनियर होने को। स्त्री को कुछ और होने की जरूरत है। क्योंकि अकेले इंजीनियरों से और अकेले गणितज्ञों से जीवन समृद्ध नहीं होता। उनकी जरूरत है, उनकी उपयोगिता है। लेकिन वे ही जीवन के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जीवन की खुशी किन्हीं और बातों पर निर्भर करती है। बड़े से बड़ा इंजीनियर और बड़े से बड़ा गणितज्ञ भी जीवन में उतनी खुशी नहीं जोड़ पाता जितना गांव में एक बांसुरी बजाने वाला जोड़ देता है।

मनुष्य-जाति की खुशी बढ़ाने वाले लोग, मनुष्य के जीवन में आनंद के फूल खिलाने वाले लोग वे नहीं हैं जो प्रयोगशालाओं में जीवन भर प्रयोग ही करते रहते हैं। उनसे भी ज्यादा वे लोग हैं जो जीवन के गीत गाते हैं और जीवन के काव्य को अवतरित करते हैं।

मनुष्य जीता किसलिए है? काम के लिए? फैक्ट्री चलाने के लिए? रास्ते बनाने के लिए? मनुष्य रास्ते बनाता है, फैक्ट्री भी चलाता है, दुकान भी चलाता है, इसलिए कि इन सब से एक व्यवस्था बन सके और उस व्यवस्था में वह आनंद, शांति और प्रेम को पा सके। वह जीता हमेशा प्रेम और आनंद के लिए है। लेकिन कई बार ऐसा हो जाता है कि साधनों की चेष्टा में हम इतने संलग्न हो जाते हैं कि साध्य ही भूल जाता है।

मेरी दृष्टि में, पुरुष की सारी शिक्षा साधन की शिक्षा है। स्त्री की सारी शिक्षा साध्य की शिक्षा होनी चाहिए, साधन की नहीं। ताकि वह पुरुष के अधूरेपन को पूरा कर सके। वह पुरुष के लिए परिपूरक हो सके। वह पुरुष के जीवन में जो अधूरापन है, जो कमी है, उसे भर सके। पुरुष फैक्ट्रियां खड़ी कर लेगा, बगीचे कौन लगाएगा? पुरुष बड़े मकान खड़े कर लेगा, लेकिन उन मकानों में गीत कौन गुंजाएगा? पुरुष एक दुनिया बना लेगा जो मशीनों की होगी, लेकिन उन मशीनों के बीच फूलों की जगह कौन बनाएगा? 

स्त्री के व्यक्तित्व के प्रेम को कितना गहरा कर सके, ऐसी शिक्षा चाहिए। ऐसी शिक्षा चाहिए जो उसके जीवन को और भी सृजनात्मक प्रेम की तरफ ले जा सके।

:- ओशो, नारी और क्रांति

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