Saturday, April 25, 2026

सूखे कुंए में 15 घंटे साथ रहे बछड़ा और तेंदुआ, दिखा दोस्ती का अनोखा रिश्ता

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक सूखे कुंए में तेंदुआ और बछड़ा गिर गए, इस गहरे कुंए में दोनों तक़रीबन 15 घंटे तक साथ रहे। आश्चर्य की बात यह रही कि छोटे बछड़े को शिकारी तेंदुए ने किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। संकट की घडी में दोनों के बीच बहुत ही आत्मीय और दोस्ताना रिश्ता कायम रहा, जबकि बछड़ा तेंदुए का पसंदीदा शिकार है। बछड़ा और तेंदुआ के कुंआ में गिरने की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने इन दोनों को सुरक्षित कुएं से बाहर निकाला। यह वाकया इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। 

यह अनोखा मामला पन्ना जिले के रैपुरा वन परिक्षेत्र के ग्राम मक्केपाला का है। जहां एक तेंदुआ और बछड़ा करीब 15 घंटे तक एक ही कुएं में फंसे रहे, जिन्हे वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को बड़ी सूझबूझ के साथ रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की। जानकारी के अनुसार पन्ना जिले के दक्षिण वनमंडल के रैपुरा रेंज अंतर्गत अलौनी बीट के ग्राम मक्केपाला में तेंदुआ और बछड़ा एक ही कुंए में गिर गए थे। करीब 15 घंटे तक दोनों साथ फंसे रहे, फिर भी तेंदुआ जो कि बछड़े का शिकारी माना जाता है, उसने बछड़े कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। कुंए के भीतर अविश्वसनीय नजारा दिखाई दिया, कभी बछड़ा तेंदुए की पीठ पर बैठता तो कभी तेंदुआ उसके पास जाकर उसे चाटता नजर आया। दोनों के बीच संकट के समय बनी यह दोस्ती अब एक मिसाल बन चुकी है। 

सूखे और गहरे कुंए से इन दोनों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने शानदार तरीका अपनाया। उन्होंने लकड़ी के लट्ठों और रस्सियों से अस्थायी सीढ़ी तैयार की, जिसके सहारे तेंदुआ सुरक्षित बाहर निकल आया। रेस्क्यू आपरेशन की रणनीति कुछ इस तरह बनाई गई कि बाहर निकलते ही तेंदुआ गांव की ओर न जाकर सीधे जंगल की तरफ जाए। दक्षिण वन मंडल पन्ना के डीएफओ अनुपम शर्मा ने बताया कि शुक्रवार की सुबह हमें जानकारी मिली कि एक कुएं में बछड़ा और तेंदुआ गिर गए हैं। उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हमारी टीम ने एक सूझबूझ भरा निर्णय लिया। जब दोनों कुएं में थे, तब आपस में खेल रहे थे। कुएं के अंदर तेंदुए ने बछड़े को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। तेंदुए को निकालने के बाद हमने बछड़े को बाहर निकाल लिया जो अब अपनी मां के साथ है। 

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Tuesday, April 7, 2026

पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था, बच्चों ने दिखाई संवेदनशीलता


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्कूली बच्चों ने अनुकरणीय पहल की है, जिसकी सराहना हो रही है। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच बेजुबान पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए पवई ब्लॉक के शासकीय माध्यमिक शाला नारायणपुरा के विद्यार्थियों ने यह सराहनीय पहल की है। विद्यालय परिसर में स्थित पेड़ पर बच्चों ने मिट्टी के सकोरों में दाना-पानी रखकर पक्षियों के लिए जीवनदायिनी व्यवस्था की है। 

उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों ने स्वयं सकोरे एकत्र किए, उन्हें साफ कर पानी से भरा और अनाज डालकर पेड़ की शाखाओं पर सावधानीपूर्वक टांगा। इस दौरान बच्चों के चेहरों पर उत्साह और सेवा भाव साफ झलक रहा था। शिक्षक सतानंद पाठक ने बच्चों को बताया कि गर्मी के मौसम में तालाब, नदी-नाले सूख जाने से पक्षियों को पानी मिलना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में हमारी छोटी सी मदद उनके जीवन की रक्षा कर सकती है।

प्रधान अध्यापक माया खरे ने विद्यार्थियों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा किताबों तक सीमित न रहकर व्यवहार में आनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने घरों की छतों, बालकनियों और आंगन में पक्षियों के लिए दाना-पानी अवश्य रखें। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने भी बच्चों की इस सोच को अनुकरणीय बताया। अंत में सभी बच्चों ने संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से सकोरों में पानी बदलेंगे और दाना डालते रहेंगे, ताकि गर्मी में कोई भी पक्षी प्यासा न रहे।

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Thursday, April 2, 2026

ब्लावट्स्की को "तुलकू' क्यों कहा जाता है ?


तिब्बत में एक शब्द है "तुलकू'। ब्लावट्स्की को भी तिब्बत में "तुलकू' ही कहा जाता है। "तुलकू' का अर्थ होता है ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी बोधिसत्व के प्रभाव में इतना समर्पित हो गया है कि बोधिसत्व उसके द्वारा काम कर सके। ब्लावट्स्की तुलकू बन सकी। स्त्री थी, इसलिए आसानी से बन सकी; समर्पित थी। जो लोग ब्लावट्स्की के पास रहते थे, वे लोग चकित होते थे। जब वह लिखने बैठती थी, तो आविष्ट होती थी, पजेस्ड होती थी। लिखते वक्त उसके चेहरे का रंग-रूप बदल जाता था। आंखें किसी और लोक में चढ़ जाती थीं। और जब वह लिखने बैठती थी तो कभी दस घंटे, कभी बारह घंटे लिखती ही चली जाती थी। पागल की तरह लिखती थी। कभी काटती नहीं थी, जो लिखा था उसको। यह कभी-कभी होता था। जब वह खुद लिखती थी, तब उसे बहुत मेहनत करनी पड़ती थी।

तो उसके संगी-साथी उससे पूछते थे, यह क्या होता है? तो वह कहती थी कि जब मैं "तुलकू' की हालत में होती हूं, तब मुझसे कोई लिखवाता है। थियोसाफी में उनको मास्टर्स कहा गया है। कोई सदगुरु लिखवाता है, मैं नहीं लिखती; मेरे हाथ किसी के हाथ बन जाते हैं; कोई मुझमें आविष्ट हो जाता है, और तब लिखना शुरू हो जाता है, तब मैं अपने वश में नहीं होती, मैं सिर्फ वाहन होती हूं। यह पुस्तक भी ऐसे ही वाहन की अवस्था में उपलब्ध हुई है।

कभी-कभी ऐसा होता था कि कुछ लिखा जाता था और उसके बाद महीनों तक वह अधूरा ही पड़ा रहता था। संगी-साथी ब्लावट्स्की के कहते कि वह पूरा कर डालो, जो अधूरा पड़ा है। वह कहती, कोई उपाय नहीं है पूरा करने का; क्योंकि मैं पूरा करूं, तो सब खतरा हो जाए; जब मैं फिर आविष्ट हो जाऊंगी, तब पूरा हो जाएगा। उसकी कुछ किताबें अधूरी ही छूट गई हैं, क्योंकि जब कोई बोधिसत्व चेतना उसे पकड़ ले, तभी लिखना हो सकता है।

ये जो बोधिसत्व हैं, ऐसी चेतनाएं जो परमद्वार पर खड़ी हैं; क्षीण होने के, विलीन होने के, शांत होने के, नष्ट हो जाने के द्वार पर खड़ी हैं- महामृत्यु अभी घटनेवाली है जिनके लिए, ये हजार तरह से काम करती हैं। किसी व्यक्ति में आविष्ट हो सकती हैं, किसी व्यक्ति को पता भी न चले, उसका उपयोग कर सकती हैं। इन सारी आत्माओं का तिब्बत में खयाल है, और खयाल सही है कि एक दुर्ग है, जो मनुष्य-जाति को घेरे हुए है चारों तरफ से।

आदमी जैसा है, वह बिलकुल पागल है। और वह जो भी करता है, वह सब पागलपन से भरा है। अगर आदमी को बिलकुल उसके ही सहारे छोड़ दिया जाए, तो वह अपने को भी नष्ट कर ले सकता है। वह जो भी कर रहा है वह सब उपद्रव से ग्रस्त है। उसे कुछ पता ही नहीं कि क्या कर रहा है, और क्या हो रहा है। यह बोधिसत्वों का दुर्ग, उसे बार-बार मार्ग पर ले आता है, बार-बार उसे भटकने से बचाता है, बार-बार अनेक उपाय करके दिशा और दृष्टि देने की कोशिश करता है। यह सूत्र कह रहा है कि जब तू सातवें द्वार को भी पार कर जाएगा, तब अपनी ही स्वेच्छा से तू भी इस महादुर्ग की एक ईंट बनना चाहेगा। अनेक गुरुओं की यातनाओं से निर्मित यह दुर्ग है। यह दुर्ग मनुष्य-जाति की रक्षा करता है।

तिब्बत में हर बुद्ध-पूर्णिमा को एक विशेष पर्वत पर पांच सौ बौद्ध लामा इकट्ठे होते हैं। हर वर्ष बुद्ध- पूर्णिमा की रात, आधी रात बुद्ध की वाणी सुनाई पड़ती है। यह बोधिसत्व-वाणी है। एक नियत योजना के अनुसार, एक नियत घड़ी में बुद्ध की वाणी उपलब्ध होती है। नियत लोग, निश्चित लोग, जो उस वाणी को सुन सकते हैं- क्योंकि वाणी अशरीरी है- वे ही केवल वहां इकट्ठे होते हैं। पांच सौ से ज्यादा लामा वहां कभी इकट्ठे नहीं होते हैं। जब एक लामा उनमें से मर जाता है, समाप्त हो जाता है, तभी एक नए लामा को प्रवेश मिलता है। स्थान गुप्त रखा जाता है; क्योंकि कोई भी गैर-व्यक्ति वहां पहुंच जाए, तो बाधा पड़ सकती है उस घटना में। बुद्ध मरते वक्त वह निश्चित कर गए हैं।

सदगुरु अक्सर निश्चित कर जाते हैं कि उनके साथ, बाद में जब उनका शरीर न होगा, तो कैसे संबंध स्थापित किया जाए। यह संबंध स्थापित करने के निश्चित सूत्र हैं और उनके ही अनुसार चला जाए, तो संबंध स्थापित होते हैं। जो परंपराएं अपने गुरु से संबंध स्थापित करती रहती हैं, वे जीवित हैं। 

~ओशो

(समाधि के सप्त द्वार)

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Wednesday, April 1, 2026

खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर ठगी करने वाले 02 आरोपी गिरफ्तार

  • आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार एवं नगदी जप्त
  • धोखाधड़ी के इस सनसनीखेज मामले में एक आरोपी फरार 

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की पुलिस ने खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर भोले-भाले किसानों से ठगी करने वाले 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार एवं नगदी जप्त की गई है। मामले में 01 आरोपी फरार है जिसकी तलाश की जा रही है।बताया गया है कि आरोपी अलग-अलग कंपनियों के फर्जी प्रतिनिधी बनकर किसानों को फंसाकर खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर लाइसेंस दिलवाने के नाम पर धोखाधड़ी करते थे।  

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू ने आज आयोजित पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि पन्ना पुलिस द्वारा शाहनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत खाद-बीज डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर की गई धोखाधड़ी के गंभीर मामले में कार्यवाही करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। मामले में फरियादी मुकेश कुमार साहू निवासी ग्राम बोरी द्वारा थाना शाहनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा मुझे खाद-बीज के डिस्ट्रीब्यूटर का लायसेन्स दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी पूर्वक 02 लाख 34 हजार 500 रूपये की ठगी कर ली है। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना शाहनगर में अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 269/25 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत पंजीबद्ध किया जाकर विवेचना मे लिया गया। 

मामले में थाना प्रभारी शाहनगर परशुराम डाबर के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। गठित पुलिस टीम द्वारा आरोपियों की पतारसी एवं गिरफ्तारी हेतु फरियादी के बताये अनुसार आरोपियों के आने जाने वाले संभावित सभी रास्तो पर लगे सीसीटीव्ही कैमरो के फुटेज खंगाले गये एवं संदेही व्यक्तियों को चिन्हित किया गया। पुलिस टीम द्वारा मुखबिर सूचना एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले में 02 संदेही व्यक्तियों को सीतापुर उ0प्र0 से पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। उक्त दोनो संदेहियों द्वारा पूँछताछ किये जाने पर अपने-अपने नाम पता पुलिस टीम को बताये गये। पुलिस टीम द्वारा घटना के संबंध में कड़ाई से पूँछताछ किये जाने पर अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर फरियादी को फर्टिलाइजर कंपनी का प्रतिनिधि बनकर डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का लालच देकर डिस्ट्रीब्यूटर लाइसेंस एवं खाद-बीज उपलब्ध कराने का झांसा देकर धोखाधड़ी करना स्वीकार किया गया। पुलिस टीम द्वारा आरोपियों के बताये अनुसार आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक स्विफ्ट कार एवं 15 हजार रूपये नगद जप्त किये जाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में एक आरोपी फरार है जिसे जल्द गिरफ्तार किया जावेगा। 

धोखाधड़ी के इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में गोपीचन्द्र पिता जोधी प्रसाद श्रीवास्तव 42 वर्ष निवासी जिला सीतापुर (उ.प्र.) तथा कन्हैया लाल यादव पिता दुलारे यादव 32 वर्ष निवासी जिला सीतापुर (उ.प्र.) हैं। एक अन्य आरोपी अनूप पिता जोधी प्रसाद श्रीवास्तव 42 वर्ष, निवासी जिला सीतापुर (उ.प्र.) फरार है। आरोपियों से पूंछतांछ में पता चला है कि  पन्ना जिले के अतिरिक्त इन्होंने कटनी, औरैया, जबलपुर एवं झाँसी में इसी तरीके की धोखाधड़ी कारित की गई है। वर्तमान में आरोपी धर्मशाला हिमांचल प्रदेश की तरफ इसी तरीके की धोखाधड़ी हेतु अपना नेटवर्क तैयार कर रहे थे, जिन्हे पन्ना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूँछताछ जारी है, जिनसे अन्य राज्यो एवं जिलो के मामलो का खुलासा होने की प्रबल संभावना है। 

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