Saturday, May 30, 2026

देशी एवं पारम्परिक भोजन स्वास्थ्य एवं जलवायु के अनुकूल

  • बीज एवं खाद्य विविधता मेले में पारंपरिक व्यंजनों की दिखी झलक
  • स्थानीय खाद्य ज्ञान को सुरक्षित रखने प्रकाशित होगी रेसिपी पुस्तक


पन्ना। भारतीय भोजन आत्मविश्वास और प्रामाणिकता के साथ अपने मूल स्वरूप में लौट रहा है, जहां स्वाद, परंपरा और स्थानीय सामग्री प्रमुख भूमिका निभाएंगे। देशी एवं पारंपरिक भोजन हमारी समृद्ध संस्कृति, स्वास्थ्य और स्थानीय मौसम का प्रतीक है। ताज़ा मसालों, मौसमी सब्जियों और प्राकृतिक रूप से पकाया गया यह भोजन पीढ़ियों से चली आ रही विरासत है, जो पोषण और स्वाद का बेहतरीन संतुलन प्रदान करता है। यह हमारे आस-पास आसानी से उपलब्ध मौसमी सब्जियों और अनाजों से बनता है, जो शरीर की तासीर के अनुकूल होते हैं।

देशी एवं पारम्परिक भोजन के प्रति जनमानस में जागरूकता लाने व अभिरुचि पैदा करने की मंशा से समर्थन संस्था द्वारा रिवाइटलाइजिंग रेनफेड एग्रीकल्चर (RRA) नेटवर्क एवं वासान (WASSAN), स्थानीय संस्था पृथ्वी ट्रस्ट व  रिलायंस फाउन्डेसन के  सहयोग से  बीज एवं खाद्य विविधता मेले का आयोजन किया गया। इस मेले का उद्देश्य पारंपरिक किस्मों से बने स्थानीय व्यंजनों को पुनर्जीवित करना, उनका संरक्षण करना तथा उनका दस्तावेजीकरण करना था।


इस मेले में दो विकासखंडों के 12 गांवों से उत्साहपूर्वक सहभागिता देखने को मिली। प्रतिभागियों द्वारा लगभग 40 पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित किए गए, जिन्हें स्थानीय पारंपरिक फसल किस्मों से तैयार किया गया था। विशेष रूप से महिलाओं एवं ग्रामीण समुदायों ने अपने घरों से पारंपरिक भोजन तैयार कर लाकर क्षेत्र की समृद्ध खाद्य संस्कृति और कृषि परंपरा को प्रस्तुत किया। मेंले में कृवि केन्द्र के वैज्ञानिक प्रमुख डा. पी.एन त्रिपाठी, रीतेश बगोरा, रिलायंस फाउन्डेसन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक मुकेश कुमार सेगर, प्रदीप तिवारी, राज्य ग्रमीण आजिविका मिशन के जिला प्रबंधक प्रमोद शुक्ला, पृथ्वी ट्रस्ट की निदेशक समीना युसुफ बेग, आर.आर.ए नेटवर्क के शुभदीप ने अपने वक्तव्य रखे । 

शुभ दीप ने कहा सभी जिलो एवं राज्य के जलवायु के अनुरूप खाद्य परम्परा बनी है, उसके अनुरूप ही भोजन अच्छा माना गया है। प्रमोद शुक्ला ने कहा कि दीदी लोग आजिविका मिशन से जुड़ कर अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं। परम्परागत भोजन एवं पकवान जिले में एवं कई फूड मेंलो में रखा जा सकता है और आमदनी का जरिया हो सकता है। वैज्ञानिक प्रमुख ने कहा कि  देशी बीज एवं परम्परागत खाद्य हमारे सस्कृति एवं व्यावहार में शामिल है। मुकेश कुमार सेंगर ने कहा कि संस्था स्थानीय एवं देशी खाद्य श्रृखला पर काम कर रही है, जिले में इसके परिणाम भी देखने को मिल रहे है।


मेले का मुख्य उद्देश्य कृषि और भोजन के बीच के संबंध को पुनर्स्थापित करना तथा पारंपरिक फसल किस्मों के पोषण, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व को उजागर करना था। मेले में विभिन्न देशी बीजों एवं खाद्य पदार्थों का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे किसानों और स्थानीय समुदायों में पारंपरिक फसलों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी। मेले में प्रस्तुत सभी पारंपरिक किस्मों एवं व्यंजनों का विधिवत दस्तावेजीकरण किया गया। इस दस्तावेजीकरण के आधार पर भविष्य में एक पारंपरिक रेसिपी पुस्तक प्रकाशित की जाएगी, ताकि स्थानीय खाद्य ज्ञान और परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जा सके।

यह मेला किसानों के बीच संवाद, बीज आदान-प्रदान और अनुभव साझा करने का भी एक महत्वपूर्ण मंच बना, जिसने जैव विविधता संरक्षण और सतत कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समर्थन के ज्ञानेन्द्र तिवारी एवं दिवाकर वागरी ने कहा की हमें कुपोषण दूर करने के लिये इस प्रकार के मेंले लगाना बहुत जरूरी है। कार्यक्रम में समर्थन के सभी विस्तार कार्यकर्ताओं ने सहयोग प्रदान किया।

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Tuesday, May 26, 2026

कुआं धसकने से एक ही परिवार के चार सदस्यों सहित 5 मजदूरों की मौत

  • बीहरपुरवा गांव में मातम का माहौल, मुख्यमंत्री सहित नेताओं ने जताया दुःख   
  • अजयगढ़ में हुआ पोस्टमार्टम, बुधवार को सभी मृतकों का होगा अंतिम संस्कार 


पन्ना।  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में अजयगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बीहरपुरवा के नयापुरवा में निर्माणाधीन कुआं की मिट्टी धसकने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में एक ही परिवार के चार सदस्यों सहित 5 मजदूरों की मौत हुई है। मंगलवार की सुबह तक़रीबन 11 बजे घटित इस दिल दहला देने वाले हादसे की जानकारी लगने के उपरांत पुलिस प्रशासन और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, मलबे के नीचे दबे मजदूरों को मौत के शिकंजे से नहीं बचाया जा सका। हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों में जहाँ कोहराम मचा है वहीं गांव में मातम का माहौल है। 

घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत द्वारा सार्वजनिक कूप की खुदाई का कार्य कराया जा रहा था। बताया गया है कि सुबह इस निर्माणाधीन कूप के भीतर 6 मजदूर खुदाई का कार्य कर रहे थे। हादसे के कुछ क्षण पहले पानी पीने के लिए एक मजदूर ऊपर आया और देखते ही देखते कुंआ धसक गया। कुंआ के भीतर काम कर रहे शेष पांच मजदूर मिट्टी के मलबे में दब गए। अचानक हुए इस खौफनाक हादसे के बाद चीख पुकार मच गई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचकर दबे मजदूरों को मलबे से निकालने का प्रयास किया लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके। 

हादसे के तक़रीबन दो घंटे बाद पुलिस प्रशासन और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, फलस्वरूप जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू हुआ। लेकिन तब तक मलबे में दबे मजदूरों के जीवित बचने की संभावना ख़तम हो चुकी थी। घंटों मशक्कत के बाद राहत व बचाव दल द्वारा मलबे में दबे पांचो शव एक-एक करके बाहर निकाल लिए गए।

पन्ना कलेक्टर श्रीमती ऊषा परमार ने अजयगढ़ ब्लॉक के बीहरपुरवा में कुंआ की मिट्टी धसकने से मृत 5 व्यक्तियों के परिवारजनों से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया एवं सांत्वना दी। जिला कलेक्टर ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया। मालूम हो कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 5 व्यक्तियों क्रमशः आशीष यादव, राजकुमार यादव, रामपाल यादव, चुन्नू यादव एवं चुनवाद पाल की मृत्यु हुई है। कुआँ धसकने से 5 मजदूरों की मौत पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दुःख व्यक्त करते हुए मृतको के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। 

ग्रामवासियों के मुताबिक पूर्व में इस सार्वजानिक कूप की खुदाई का काम हुआ था। लगभग 20 फिट गहरा खुदने के बाद काम बंद करा दिया गया। बलुई मिट्टी होने के कारण बारिश में यह कूप क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे पुनः खोदना शुरू कराया गया। बिना तकनीकी मार्गदर्शन व देखरेख के जिस तरह से कूप खुदाई का कार्य कराया जा रहा था, उसे देखते हुए ऐसे हादसे को नाकारा नहीं जा सकता। और वही हुआ जिस बात का डर था, पांच जिंदगियां मलबे के ढेर में दबकर असमय काल कवलित हो गईं। 

कुआं हादसे में मृत श्रमिकों के परिजनों से मिले कमिश्नर एवं आईजी



कमिश्नर सागर संभाग अनिल सुचारी एवं पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश कुमार शुक्ला ने मंगलवार को अजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत बीहरपुरवा में हुई कुआं धंसकने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर अजयगढ़ पहुंचकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर दुख जताते हुए मृतक के परिजनों को सांत्वना दी तथा शासन प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने परिजनों की मांगो के निराकरण के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। अधिकारीद्वय ने प्रभावित परिवार के सदस्यों को शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदान करने के लिए निर्देशित किया। इस मौके पर कलेक्टर ऊषा परमार, पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना चौहान, एसडीएम संजय कुमार नागवंशी, तहसीलदार सुरेन्द्र अहिरवार एवं जनपद पंचायत सीईओ सतीश नागवंशी भी मौजूद थे। 

विदित हो कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस घटना पर दुख जताया है तथा मृत श्रमिकों के निकटतम वारिश को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता  राशि स्वीकृत की है। इसके पूर्व जिला कलेक्टर एवं अन्य अधिकारियों द्वारा भी मौका स्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारजनों से भेंट की गई। एसडीईआरएफ की टीम ने रेस्क्यू कार्रवाई संपन्न कर 5 शव निकाले। मृत श्रमिकों का पोस्टमार्टम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजयगढ़ में करवाया गया। बुधवार को मृतकों का अंतिम संस्कार होगा।

दर्दनाक हादसे को लेकर उठ रहे सवाल

ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की ज़मीनी हकीकत यह है कि अधिकांश कार्यों में जिम्मेदार इंजीनियर साइट पर दिखाई ही नहीं देते। कागज़ों में निरीक्षण और मेजरमेंट पूरे हो जाते हैं तथा अधिकारी ऑफिस के वातानुकूलित कमरों में बैठकर ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तय कर रहे हैं। जब मौके पर जाकर निरीक्षण ही नहीं होगा, तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मजदूरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी ? ऐसी लापरवाही ही बड़े हादसों की वजह बनते हैं। ग्राम पंचायत बीहरपुरवा की घटना इसका जीता जगता उदाहरण है। क्या जिम्मेदार अधिकारी व प्रशासन इस हादसे से कोई सबक लेगा ताकि फिर कभी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो ?

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Monday, May 25, 2026

“जैवविविधता स्वामित्व रखने वाला सर्वश्रेष्ठ विभाग” श्रेणी में दक्षिण वनमण्डल पन्ना हुआ सम्मानित

  • गिद्ध संरक्षण, जैवविविधता अभिलेखीकरण, जनभागीदारी आधारित नवाचार सर्पदंश जागरूकता अभियान ने दिलाई पहचान
  • व्यक्तिगत श्रेणियों में दक्षिण पन्ना के वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रथम व वीरेंद्र पटेल को मिला द्वितीय पुरस्कार


पन्ना। अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड द्वारा घोषित “राज्य स्तरीय वार्षिक जैवविविधता पुरस्कार 2024 एवं 2025” में दक्षिण पन्ना वनमण्डल को “जैवविविधता स्वामित्व रखने वाला सर्वश्रेष्ठ विभाग” श्रेणी में सम्मानित किया गया। राज्य जैवविविधता बोर्ड द्वारा जारी आदेश अनुसार दक्षिण पन्ना वनमण्डल का चयन उक्त श्रेणी में किया गया।

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में विशाल वन क्षेत्र को तमाम तरह की चुनौतियों, व्यवधानों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद काफी हद तक पन्ना जिलावासियों ने सहेज कर रखा है। इस कार्य में उन वन योद्धाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने कठिन चुनौतियों का मुकाबला करते हुए न सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया अपितु इस अनमोल धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। विषम परिस्थितियों के बीच रहकर अनगिनत चुनौतियों का सामना करते हुए जंगल, यहाँ की जैवविविधता तथा विचरण करने वाले वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले इन्हीं कर्तव्यनिष्ठ वन योद्धाओं में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार व वीरेंद्र पटेल के कार्य विशेष उल्लेखनीय हैं। इन दोनों वन योद्धाओं को अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया है। 

इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण, चेन्नई के अध्यक्ष वीरेंद्र आर. तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल के निदेशक डॉ. के. रविचंद्रन ने की तथा राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. बी. बालाजी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राज्य स्तरीय पुरस्कार दक्षिण पन्ना वनमण्डल की ओर से वनमण्डलाधिकारी अनुपम शर्मा, वन परिक्षेत्र अधिकारी पवई नितेश पटेल एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी कल्दा परिवेश भदौरिया द्वारा प्राप्त किया गया। दक्षिण पन्ना वनमण्डल के नामांकन की अनुशंसा जिला कलेक्टर श्रीमती उषा परमार एवं वनमण्डलाधिकारी द्वारा की गई थी।

दक्षिण पन्ना वनमण्डल द्वारा जैवविविधता संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में अनेक अभिनव एवं जनभागीदारी आधारित कार्य किए गए। वनमण्डल द्वारा पक्षियों, तितलियों, औषधीय पौधों, विरासत वृक्षों, प्राकृतिक झिरियों तथा स्थानीय जैविक धरोहरों का व्यापक अभिलेखीकरण एवं दस्तावेजीकरण किया गया। साथ ही स्थानीय स्तर पर जैवविविधता संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए गए।

गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में दक्षिण पन्ना द्वारा “वल्चर फ्रेंडली गौशाला”, सतत मॉनिटरिंग, प्रतिबंधित दवाइयों की रोकथाम एवं ग्रामीण सहयोग आधारित संरक्षण मॉडल विकसित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दक्षिण पन्ना क्षेत्र में गिद्धों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2021 में जहां गिद्धों की संख्या 614 थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1127 तक पहुँच गई।

मानव-सर्प संघर्ष को कम करने एवं सर्पदंश से बचाव हेतु दक्षिण पन्ना वनमण्डल द्वारा विशेष “सांप-सीढ़ी” आधारित शैक्षणिक खेल विकसित किया गया। इस नवाचार के माध्यम से हजारों बच्चों एवं ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव, प्राथमिक उपचार एवं वैज्ञानिक जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराई गई। इस पहल से जनजागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा मानव-सर्प संघर्ष संबंधी भ्रांतियों को कम करने में सहायता मिली।


व्यक्तिगत (शासकीय) श्रेणी में दक्षिण पन्ना वनमण्डल के वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रथम पुरस्कार एवं वनरक्षक वीरेंद्र पटेल को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार द्वारा दक्षिण पन्ना क्षेत्र में 129 महत्वपूर्ण औषधीय पौधों का अभिलेखीकरण एवं जनजागरूकता कार्य किया गया। वहीं वीरेंद्र पटेल द्वारा कल्दा क्षेत्र में 97 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण कर पक्षी एवं जैवविविधता संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का उल्लेखनीय कार्य किया गया।

दक्षिण पन्ना वनमण्डल की यह उपलब्धि जनभागीदारी, टीम भावना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नवाचार आधारित संरक्षण प्रयासों का परिणाम है। यह सम्मान न केवल दक्षिण पन्ना वन विभाग बल्कि पूरे पन्ना जिले के लिए गौरव का विषय है तथा भविष्य में जैवविविधता संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में प्रेरणादायक सिद्ध होगा।

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Thursday, May 14, 2026

हाईवे पर वाहन की टक्कर से तेंदुए की मौत, जांच जारी

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में वन क्षेत्र से लगे सड़क मार्गों पर आये दिन वन्य जीव हादसे का शिकार हो रहे हैं। सड़क मार्ग से गुजरने वाले तेज रफ़्तार वाहनों की चपेट में आकर बाघ व तेंदुआ तक असमय कल कवलित हो जाते हैं, बावजूद इसके वन्य जीवों की सुरक्षा व ऐसे सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे। बीती रात फिर एक तेंदुआ सड़क हादसे का शिकार हो गया, हादसे के बाद वन विभाग द्वारा जाँच की औपचारिकता निभाई जा रही है।      

उल्लेखनीय है कि दक्षिण वनमण्डल पन्ना अंतर्गत पवई रेंज में शिकारपुरा के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग NH 43 पर बीती रात एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक तेंदुए की मृत्यु हो गई। घटना की सूचना रात्रि लगभग 9:35 बजे प्राप्त होते ही पवई वन परिक्षेत्र की टीम मौके के लिए रवाना हुई एवं घटनास्थल पर पहुंचकर क्षेत्र को सुरक्षित रूप से घेराबंदी कर संरक्षित कर दिया गया। वन विभाग द्वारा सावधानी पूर्वक तेंदुए के शरीर का प्रारंभिक परीक्षण किया गया, जिसमें श्वसन, आंखों की पुतलियों की प्रतिक्रिया, सीने की गतिविधि एवं अन्य जीवन संकेत नहीं पाए गए। 

बताया गया है कि दुर्घटना में तेंदुए को गंभीर आंतरिक चोटें आई हैं। वन विभाग द्वारा आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया जा रहा है तथा रात्रि से ही वनकर्मियों की ड्यूटी लगाकर स्थल की निगरानी सुनिश्चित की गई है। वन विभाग की एक अन्य टीम तत्काल शाहनगर के समीप स्थित टोल प्लाजा पहुंची, जहां सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का परीक्षण कर दुर्घटना में शामिल वाहन की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

वन विभाग द्वारा पन्ना टाइगर रिजर्व के डॉग स्क्वाड को भी आज प्रातः घटनास्थल पर बुलाया गया है। डॉग स्क्वाड एवं अन्य आवश्यक जांच प्रक्रियाओं के उपरांत तेंदुए के शव को सड़क से हटाया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) कराया जाकर विधिवत अंतिम संस्कार किया जाएगा। वन विभाग द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है।

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Friday, May 8, 2026

रुंझ-मझगांय परियोजना पर बढ़ा तनाव, सामाजिक कार्यकर्ता सहित 10 आंदोलनकारी गिरफ्तार

पन्ना एसपी कार्यालय के बाहर परिसर में धरना में बैठे ग्रामीण

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में रुंझ, मझगांय डैम और केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर किसानों का विरोध अब बड़े आंदोलन में बदलता नजर आ रहा है। भू-अधिग्रहण, मुआवजा और विस्थापन पैकेज की मांग को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे किसानों में उस समय आक्रोश बढ़ गया, जब सामाजिक कार्यकर्ता व किसान नेता अमित भटनागर समेत 9 किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के विरोध में शुक्रवार को जिले के कई गांवों से सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए और पन्ना एसपी कार्यालय का घेराव कर रात भर धरना दिया। इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। 

रुंझ व मझगांय डैम परियोजना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर काम शुरू कराने की कोशिश जारी है। शुक्रवार 8 मई की दोपहर जिले के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में किसान पुरुष व महिलायें पन्ना जिला मुख्यालय पहुंचे और एसपी कार्यालय का घेराव कर धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान झाबुआ विधायक एवं किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया और यूथ कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार भी पन्ना पहुंचे और आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई। 

किसानों की मांग है कि अमित भटनागर सहित गिरफ्तार किसानों की गिरफ्तारी का कारण स्पष्ट किया जाए तथा उन्हें रिहा किया जाए। एसपी से मुलाकात न होने पर महिलाएं, बुजुर्ग और युवा पूरी रात एसपी कार्यालय के बाहर डटे रहे। वहीं दूसरी ओर अजयगढ़ क्षेत्र में रुंझ और मझगांय डैम परियोजनाओं को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। परियोजना स्थलों पर भारी पुलिस बल तैनात कर निर्माण कार्य शुरू कराने की कोशिश की जा रही है। अमित भटनागर के वकील ने पुलिस कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर किसानों को जेल भेजा गया है। हालांकि एसपी निवेदिता नायडू का कहना है कि परियोजना कार्य में बाधा पहुंचाने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की गई है।

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Tuesday, May 5, 2026

पन्ना टाइगर रिजर्व के दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध मौत, मॉनिटरिंग व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न


पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में एक दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध मौत का मामला प्रकाश में आया है। कुछ दिनों पूर्व एक वयस्क नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि आज एक और बाघ की मौत होने की खबर आने के बाद से पन्ना टाइगर रिज़र्व में हड़कंप मचा है।

उल्लेखनीय है कि अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा के आसपास यह बाघ देखा गया था। जिसे रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा गया था। लेकिन स्वस्थ हालत में छोड़े गए इस दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पन्ना टाइगर रिजर्व एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस बाघ को सप्ताह भर पूर्व आबादी क्षेत्र से सुरक्षित पकड़कर गहन चिकित्सीय परीक्षण के बाद पूरी तरह स्वस्थ बताते हुए कोर एरिया में छोड़ा गया था, उसकी अचानक मौत ने वन्यजीव सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

जानकारी के अनुसार मंगलवार की सुबह अमानगंज वन परिक्षेत्र की रमपुरा बीट के हाथीडोल क्षेत्र में एक नाले के पास उक्त बाघ का शव मिला। यह वही बाघ है जिसे 26 अप्रैल 2026 को ग्राम तारा के आबादी क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था। बाघ को रेडियो कॉलर पहनाकर उसकी सतत निगरानी का दावा किया जा रहा था, इसके बावजूद उसकी मौत कैसे हुई- यह सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है। रेस्क्यू के बाद कॉलरिंग कर उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया गया था। ऐसे में एक सप्ताह के भीतर ही उसकी संदिग्ध मौत होना कई सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व बृजेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि मृत पाए गए इस बाघ को पन्ना टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र अमानगंज बफर के पास तारा ग्राम से विगत 26 अप्रैल को रेस्क्यू किया गया था। रेस्क्यू उपरांत बाघ को पन्ना टाइगर रिज़र्व कोर क्षेत्र में स्वस्थ अवस्था में रेडियो कॉलर पहनाकर छोड़ा गया था। उक्त बाघ की हाथियों और वनकर्मियों द्वारा सतत निगरानी की जा रही थी। चिकित्सक दल द्वारा पोस्टमार्टम के उपरांत बताया गया कि उक्त बाघ के शरीर के विभिन्न अंगों में घाव के निशान हैं एवं Vertebral bone, Skull bone भी टूटी पाई गई। जिससे यह प्रतीत होता है कि बाघ की मत्यु प्रथम दृष्टया आपसी संघर्ष के कारण हुई होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने पर मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा। पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए समस्त सैंपल सक्षम प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेज दिए गए हैं।

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