पन्ना। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षा उपलब्ध कराना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है। अधिनियम स्पष्ट करता है कि किसी भी कारण से बच्चों को स्कूल में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके कई स्कूलों में बच्चों से जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, समग्र आईडी जैसे कागजात माँगे जा रहे हैं, जिसके कारण गरीब और वंचित समुदायों के कई बच्चे इन दस्तावेजों के अभाव में शिक्षा और हॉस्टल प्रवेश से वंचित रह जाते हैं।
पन्ना जिले के बहेलिया–पारधी समुदाय के बड़ी संख्या में नाबालिग इस सत्र में अभी तक स्कूलों में प्रवेश नहीं पा सके हैं। दस्तावेजों के कारण वे कई छात्रावासों में भी दाखिला नहीं कर पा रहे हैं। अनेक परिवारों ने अधिकारियों व शिक्षा विभाग के पास आवाज उठाई, पर कहीं से ठोस राहत नहीं मिली। आज बच्चे अपने माता–पिता के साथ पन्ना जिला कलेक्टर के कार्यालय पर पहुंचकर शिक्षा का अधिकार दिलाने की गुहार लगाने आए।
जनसुनवाई कक्ष के बाहर बच्चों को देख कर कलेक्टर ने सीधे उनकी बात नहीं सुनी, लेकिन उन्होंने कुछ अभिभावकों को जनसुनवाई कक्ष में बुलाकर समस्या से संबंधित पत्र लिया और इसे कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा केन्द्र (डीपीसी), पन्ना को भेज दिया।
स्थायी बसेरे के अभाव से दस्तावेजों की समस्या
बहेलिया–पारधी समाज जंगल के नज़दीकी इलाकों में रहता है और पारंपरिक रूप से यहाँ के लोग शिकार व जड़ी-बूटियों के व्यापार पर निर्भर रहे हैं। लगभग डेढ़ दशक पहले तक यह समाज शिक्षा से पूरी तरह वंचित था। समाज के अधिकांश लोगों के पास अपनी जाति प्रमाणित करने वाले दस्तावेज, आधार, समग्र आईडी और बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं। इसी कारण वे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं व सुविधाओं से भी वंचित हैं और अब उनके बच्चों का स्कूल दाखिला भी प्रभावित हो रहा है।
पन्ना टाइगर रिजर्व की पहल
पन्ना टाइगर रिजर्व वर्ष 2008 में बाघ विहीन हो गया था। बाघों की पुनर्स्थापना के प्रयास के दौरान तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर आर. श्रीनिवास मूर्ति ने महसूस किया कि पारधी–बहेलिया समाज को मुख्यधारा से जोड़ना बाघों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। इस दृष्टि से पन्ना टाइगर रिजर्व ने पारधी समाज के बच्चों के लिए आवासीय छात्रावास खोला और जिले भर से बच्चों को खोजकर उनकी शिक्षा का प्रबंध किया। बाद में यह जिम्मेदारी सर्व शिक्षा अभियान को सौंपी गई और जिला मुख्यालय के बालक–बालिका छात्रावासों में पारधी समाज के बच्चों को प्रवेश मिलना शुरू हुआ। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इन छात्रावासों में पारधी समाज के कम बच्चों का ही दाखिला हो पाया और इस वर्ष दस्तावेज अनिवार्यता के कारण बड़ी संख्या में बच्चे प्रवेश से वंचित रह गए हैं।
डीपीसी ने मदद का भरोसा दिया
कलेक्टरेट से लौटने के बाद पारधी समाज के बच्चे व उनके अभिभावक जिला शिक्षा केन्द्र, पन्ना पहुंचे और स्कूल व हॉस्टल में प्रवेश न मिलने की समस्या से संबंधित जानकारी दी। डीपीसी सुश्री किरण कौशिक ने अभिभावकों की बात सुनी और बच्चों के स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई व सहयोग का भरोसा दिया।
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