- बीहरपुरवा गांव में मातम का माहौल, मुख्यमंत्री सहित नेताओं ने जताया दुःख
- अजयगढ़ में हुआ पोस्टमार्टम, बुधवार को सभी मृतकों का होगा अंतिम संस्कार
पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में अजयगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बीहरपुरवा के नयापुरवा में निर्माणाधीन कुआं की मिट्टी धसकने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में एक ही परिवार के चार सदस्यों सहित 5 मजदूरों की मौत हुई है। मंगलवार की सुबह तक़रीबन 11 बजे घटित इस दिल दहला देने वाले हादसे की जानकारी लगने के उपरांत पुलिस प्रशासन और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, मलबे के नीचे दबे मजदूरों को मौत के शिकंजे से नहीं बचाया जा सका। हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों में जहाँ कोहराम मचा है वहीं गांव में मातम का माहौल है।
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत द्वारा सार्वजनिक कूप की खुदाई का कार्य कराया जा रहा था। बताया गया है कि सुबह इस निर्माणाधीन कूप के भीतर 6 मजदूर खुदाई का कार्य कर रहे थे। हादसे के कुछ क्षण पहले पानी पीने के लिए एक मजदूर ऊपर आया और देखते ही देखते कुंआ धसक गया। कुंआ के भीतर काम कर रहे शेष पांच मजदूर मिट्टी के मलबे में दब गए। अचानक हुए इस खौफनाक हादसे के बाद चीख पुकार मच गई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचकर दबे मजदूरों को मलबे से निकालने का प्रयास किया लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके।
हादसे के तक़रीबन दो घंटे बाद पुलिस प्रशासन और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, फलस्वरूप जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू हुआ। लेकिन तब तक मलबे में दबे मजदूरों के जीवित बचने की संभावना ख़तम हो चुकी थी। घंटों मशक्कत के बाद राहत व बचाव दल द्वारा मलबे में दबे पांचो शव एक-एक करके बाहर निकाल लिए गए।
पन्ना कलेक्टर श्रीमती ऊषा परमार ने अजयगढ़ ब्लॉक के बीहरपुरवा में कुंआ की मिट्टी धसकने से मृत 5 व्यक्तियों के परिवारजनों से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया एवं सांत्वना दी। जिला कलेक्टर ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया। मालूम हो कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 5 व्यक्तियों क्रमशः आशीष यादव, राजकुमार यादव, रामपाल यादव, चुन्नू यादव एवं चुनवाद पाल की मृत्यु हुई है। कुआँ धसकने से 5 मजदूरों की मौत पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दुःख व्यक्त करते हुए मृतको के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
ग्रामवासियों के मुताबिक पूर्व में इस सार्वजानिक कूप की खुदाई का काम हुआ था। लगभग 20 फिट गहरा खुदने के बाद काम बंद करा दिया गया। बलुई मिट्टी होने के कारण बारिश में यह कूप क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे पुनः खोदना शुरू कराया गया। बिना तकनीकी मार्गदर्शन व देखरेख के जिस तरह से कूप खुदाई का कार्य कराया जा रहा था, उसे देखते हुए ऐसे हादसे को नाकारा नहीं जा सकता। और वही हुआ जिस बात का डर था, पांच जिंदगियां मलबे के ढेर में दबकर असमय काल कवलित हो गईं।
कुआं हादसे में मृत श्रमिकों के परिजनों से मिले कमिश्नर एवं आईजी
कमिश्नर सागर संभाग अनिल सुचारी एवं पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश कुमार शुक्ला ने मंगलवार को अजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत बीहरपुरवा में हुई कुआं धंसकने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर अजयगढ़ पहुंचकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर दुख जताते हुए मृतक के परिजनों को सांत्वना दी तथा शासन प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने परिजनों की मांगो के निराकरण के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। अधिकारीद्वय ने प्रभावित परिवार के सदस्यों को शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदान करने के लिए निर्देशित किया। इस मौके पर कलेक्टर ऊषा परमार, पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना चौहान, एसडीएम संजय कुमार नागवंशी, तहसीलदार सुरेन्द्र अहिरवार एवं जनपद पंचायत सीईओ सतीश नागवंशी भी मौजूद थे।
विदित हो कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस घटना पर दुख जताया है तथा मृत श्रमिकों के निकटतम वारिश को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की है। इसके पूर्व जिला कलेक्टर एवं अन्य अधिकारियों द्वारा भी मौका स्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारजनों से भेंट की गई। एसडीईआरएफ की टीम ने रेस्क्यू कार्रवाई संपन्न कर 5 शव निकाले। मृत श्रमिकों का पोस्टमार्टम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजयगढ़ में करवाया गया। बुधवार को मृतकों का अंतिम संस्कार होगा।
दर्दनाक हादसे को लेकर उठ रहे सवाल
ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की ज़मीनी हकीकत यह है कि अधिकांश कार्यों में जिम्मेदार इंजीनियर साइट पर दिखाई ही नहीं देते। कागज़ों में निरीक्षण और मेजरमेंट पूरे हो जाते हैं तथा अधिकारी ऑफिस के वातानुकूलित कमरों में बैठकर ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तय कर रहे हैं। जब मौके पर जाकर निरीक्षण ही नहीं होगा, तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मजदूरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी ? ऐसी लापरवाही ही बड़े हादसों की वजह बनते हैं। ग्राम पंचायत बीहरपुरवा की घटना इसका जीता जगता उदाहरण है। क्या जिम्मेदार अधिकारी व प्रशासन इस हादसे से कोई सबक लेगा ताकि फिर कभी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो ?
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