Monday, February 5, 2018

केन नदी में रेत के अवैध उत्खनन पर नहीं लग रहा अंकुश



  •   खनिज एवं पर्यावरण संबंधी नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां
  •   स्वीकृत क्षेत्र के बाहर मशीनों से हो रहा रेत का अवैध उत्खनन



अरुण सिंह,पन्ना। रेत के अवैध उत्खनन को लेकर पन्ना जिले का अजयगढ़ क्षेत्र इस समय सुर्खियों में है। केन नदी में हर तरफ भारी वाहन दैत्याकार मशीनों से बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन किया जा रहा है, जिससे खनिज एवं पर्यावरण संबंधी नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। कलेक्टर पन्ना मनोज खत्री के आदेश पर बीते माह अवैध उत्खनन के खिलाफ चलाये गये अभियान के बावजूद रेत माफियाओं के हौसले बढ़े हुये हैं। केन नदी में स्वीकृत रेत खदानों के अलावा उन क्षेत्रों में भी व्यापक  पैमाने पर अवैध उत्खनन चल रहा है जहां कोई खदान मंजूर नहीं है। रेत की इस लूट में लिप्त माफियाओं द्वारा पुलिस की अपहरणकाण्ड में व्यस्तता का भी भरपूर फायदा उठाया गया है। विगत एक सप्ताह से अजयगढ़ क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार कई गुना अधिक हो गया है।
उल्लेखनीय है कि स्वीकृत खदानों के ठेकेदार जहां निर्धारित क्षेत्र के बाहर बेखौफ होकर खुलेआम रेत का अवैध उत्खनन करा रहे हैं, वहीं केन नदी में एक दर्जन से भी अधिक स्थलों पर माफियाओं द्वारा पूर्णरूपेण अवैध रेत खदानें चलाई जा रही हैं। भारी भरकम मशीनों से हो रहे व्यापक उत्खनन के चलते पर्यावरण को जहां भारी नुकसान हो रहा है वहीं केन नदी का वजूद भी संकट में पड़ गया है। नियम व कानून को तांक में रखकर अनियन्त्रित उत्खनन से जलीय जीव-जन्तु व वनस्पतियां खत्म हो रही हैं, जिसका दूरगामी प्रभाव पर्यावरण पर पडऩे की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। मालुम हो कि विगत एक सप्ताह से जिले की पुलिस डायल 100 अपहरणकाण्ड में व्यस्त रही है। पुलिस अधिकारियों की इस व्यस्तता का रेत माफियाओं ने भरपूर फायदा उठाया है, दिन ढलने के साथ ही दैत्याकार मशीनें रेत निकालने में जुट जाती हैं। केन नदी की रेत खदानों में पूरी रात ट्रकों व डम्फरों की लाइन लगने से यहां पूरी रात गहमा-गहमी मची रहती है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केन नदी के जिगनी घाट में फिर से अवैध उत्खनन शुरू हो गया है। यहां शाम होते ही जेसीबी व पोकलैन मशीनों को उतार दिया जाता है जो पूरी रात केन नदी का सीना छलनी करते हुये रेत निकालती हैं। यहां से निकलने वाली रेत को परिवहन कराने में पड़ोसी खदानों के ठेकेदार अहम भूमिका निभाते हैं। जिन स्वीकृत खदानों में पर्याप्त रेत नहीं है, वहां के ठेकेदार पिटपास की बिक्री के धन्धे में लिप्त हैं। जिसके चलते अस्वीकृत खदानों की रेत का परिवहन भी वैध तरीके से हो रहा है। डिजियाना कम्पनी द्वारा बीरा में संचालित रेत खदान में भी यह गोरखधन्धा चल रहा है। केन नदी की भीना चांदीपाठी रेत खदान का संचालन भी स्वीकृत क्षेत्र से बाहर बड़े क्षेत्र में हो रहा है। मझगांय खदान में रेत नहीं है जिसके पिटपासों की बिक्री होती है, फलस्वरूप मझगांय व मोहाना क्षेत्र से बड़े पैमाने पर रेत की निकासी हो रही है।

प्रतिबन्ध के बावजूद मशीनों से उत्खनन


नदी के प्रवाह क्षेत्र में भारी भरकम मशीनों का उपयोग कर रेत के उत्खनन पर कानूनी तौर पर प्रतिबन्ध के बावजूद केन नदी की रेत खदानों में दैत्याकार मशीनों का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं केन नदी में पानी के भीतर से भी रेत निकाली जा रही है। यदा कदा पुलिस व राजस्व अमले द्वारा कार्यवाही किये जाने के बावजूद रेत के उत्खनन में मशीनों का उपयोग बन्द होने के बजाय मशीनों की तादाद और बढ़ गई है। इससे पता चलता है कि रेत की लूट में लिप्त माफिया कितने बेखौफ और ताकतवर हैं जिन्हें नियम और कानून का भी कोई भय नहीं है।

अवैध उत्खनन पर 1.67 करोड़ का जुर्माना

रेत के अवैध उत्खनन को रोकने के लिये प्रशासन द्वारा पूर्व में दर्जनों जेसीबी मशीनों को जब्त कर अस्थाई पुलों व मार्गों को ध्वस्त किया गया था। अवैध उत्खनन करने वाले माफियाओं पर 1 करोड़ 67 लाख रू. का जुर्माना भी लगाया गया। यह कार्यवाही मोहाना, जिगनी, चंदौरा, बरौली व रामनई खदान क्षेत्रों पर की गई, इसके बावजूद रेत का अवैध उत्खनन थमने का नाम नहीं ले रहा। केन नदी की सहायक रून्ज व बागैं नदी में भी बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन होने की जानकारी मिली है। धरमपुर थानान्तर्गत इन नदियों के आस-पास स्थित ग्रामों में बिना किसी मंजूरी के बालू के डम्प नजर आते हैं, जिससे पता चलता है कि जिले में रेत का कारोबार कितने बृहद रूप में चल रहा है।
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