महाराष्ट्र में पुणे शहर व इसके आसपास अनेकों हरे-भरे पार्क, झीलें और तालाब हैं। यहाँ पिंपरी-चिंचवड के मध्य में स्थित छत्रपति शिवाजी पार्क शहरी जंगल के बीच छिपा एक हरा-भरा मनोरम स्थल है, जहाँ आप शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर प्रकृति की गोद में शांति और सुकून का अनुभव कर सकते हैं। यह विशाल पार्क सुबह व शाम की सैर के लिए बेहद उपयुक्त और आदर्श स्थल है।
इस पार्क में एक झीलनुमा जल संरचना भी है, जहाँ अनेकों प्रजाति के जलीय पक्षी नजर आते हैं। यहाँ के विशालकाय वृक्षों, बांस के सुन्दर झुरमुटों और बनस्पतियों के बीच पक्षियों का कलरव सुमधुर संगीत की तरह गूंजता रहता है। पक्षियों की इस निराली दुनिया को निहारने तथा उनकी जीवन चर्या को समझने का बीते रविवार को मुझे भी अनूठा अवसर मिला। सैकड़ों प्रजाति के पक्षियों को जानने व समझने वाले प्यूष शेखसरिया जी की मौजूदगी व मार्गदर्शन ने पक्षी दर्शन के इस भ्रमण को यादगार बना दिया है। इकोलॉजिकल सोसाइटी ने यह सुंदर अवसर प्रदान किया, जिसमें कई पेड़ पौधों व वनस्पतियों के बारे में रोचक जानकारी मिली। पक्षी दर्शन के इस भ्रमण में शामिल सभी प्रतिभागियों ने इस अवसर का खूब लुत्फ़ उठाया।
इस भ्रमण में शामिल रहीं इकोलॉजिकल सोसाइटी के प्रतिनिधि ने एक ऐसे पौधे से परिचय कराया जिसका पौराणिक महत्त्व भी है। बेहद सुंदर नारंगी-लाल सुगंधित फूलों और औषधीय गुणों के लिए यह पेड़ प्रसिद्ध है। रामायण में सीता माता द्वारा लंका की अशोक वाटिका में इस वृक्ष के नीचे समय बिताने के कारण इसे 'सीता अशोक' कहा जाता है।
पौराणिक मान्यता है कि जब रावण ने माता सीता का हरण किया था, तब उन्हें लंका में अशोक वाटिका में रखा था। वहां माता सीता अशोक के वृक्षों के नीचे रहा करती थीं, शायद इसी वजह से इस पेड़ को सीता अशोक कहा जाता है। फाल्गुन के महीने में इसके फूलों की महक से आसपास का इलाका गमक उठता है। सीता अशोक या साराका अशोक पेड़ पर फरवरी से मार्च तक के महीने में फूल खिलने लगते हैं, इसके फूल काफी खूबसूरत और गुच्छेदार होते हैं। यह पेड़ व इसके फूल औषधीय गुणों से भरपूर हैं, इसी पेड़ की छाल से ‘अशोकारिष्ठ’ नाम की दवा बनती है।
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