- सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने मुख्य बांध स्थल पर किया जंगी प्रदर्शन
- विस्थापितों को जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा
पन्ना। देश की बहुचर्चित व केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर चर्चा में है।केन–बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत बन रहे प्रमुख ढोढऩ बांध के निर्माण स्थल पर शुक्रवार को सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल अधिकांश महिलाएं आदिवासी समुदाय से हैं। महिलाओं ने प्रशासन पर कानून का पालन न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए बांध के निर्माण कार्य को रुकवा दिया।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि बांध का निर्माण बिना वैधानिक प्रक्रिया, बिना वास्तविक ग्राम सभा की सहमति और कानून की खुलेआम अनदेखी कर किया जा रहा है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन कानून के नाम पर फर्जी ग्राम सभाएं और आमसभाएं आयोजित कर रहा है, जबकि वास्तविक विस्थापितों की आवाज़ को दबाया जा रहा है।
आदिवासी महिलाओं का कहना है कि जब भी वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों और कानून के पालन की मांग करती हैं, तो उनके विरोध प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज कराया जाता है। वहीं दूसरी ओर, उनके घर-परिवार और आजीविका को डुबोने वाले बांध का निर्माण अवैध रूप से जारी रखा गया है। प्रदर्शनकारियों ने बांध निर्माण को लोकतंत्र और संविधान का अपहरण बताते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी विकास के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून, अधिकार और सम्मान के लिए है।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि “केन–बेतवा परियोजना में प्रशासन पूरी तरह मनमानी पर उतारू है। कानून, संविधान और आदिवासी अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। जब तक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं होगा और विस्थापितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।”
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