Wednesday, June 5, 2019

जल संकट के चलते वीरान हुआ पन्ना का छापर गाँव

  • गाँव से पलायन कर 250 लोगों ने 20 किमी दूर ककरहटी में ली शरण
  •  एक सैकड़ा से अधिक ग्रामों में पानी के लिए मची है त्राहि - त्राहि 




अरुण सिंह,पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में भीषण पेयजल संकट के चलते एक सैकड़ा से भी अधिक ग्रामों में पानी के लिये त्राहि-त्राहि मची हुई है। ग्रामीण अंचलों की अधिकांश नल जल योजनायें ठप पड़ी हैं जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं। जल स्तर नीचे खिसकने से कुये जहां सूख चुके हैं वही हैण्डपम्पों से पानी की जगह गर्म हवा निकल रही है। हालात इतने खराब हैं कि पेयजल संकट के कारण लोग पलायन करने को विवश हो रहे हैं। जिला मुख्यालय पन्ना से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित छापर गाँव से ढाई सौ लोग अपना गाँव छोड़कर पलायन कर चुके हैं ग्रामीणों के पलायन का एकमात्र कारण भीषण जल संकट है इस गाँव में पानी की विकराल समस्या के चलते पिछले 3 माह से अधिकांश घरों में ताले लटक रहे गाँव से बड़ी तादाद में लोगों का महानगरों के लिये पलायन करना तो आम बात है लेकिन पानी के लिये पलायन नया आग उगलती गर्मी के बीच पन्ना जिले में जल संकट से उत्पन्न त्रासदी का हाल यह है कि यहां के छात्र ग्राम के लोग जल संकट के कारण 3 माह पहले ही अपना गाँव छोड़कर 20 किमी दूर ककरहटी गाँव में शरण लेने को मजबूर हुये हैं। लगभग वीरान हो चुके इस गाँव में सिर्फ तीन बुजुर्ग और कुछ मवेशी ही अब शेष बचे हैं जो कि जिंदा रहने की जद्दोजहद करते हुये इस चिलचिलाती धूप में 4 किमी दूर से पीने का पानी लाकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिला मुख्यालय के निकट नेशनल हाईवे क्रमांक 39 के किनारे स्थित छापर गाँव से ग्रामीणों के पानी के अभाव में पलायन करने को लेकर समूचा प्रशासन अब तक बेखबर है। आदिवासी बहुल छापर गाँव में पेयजल का इतना विकराल संकट पहली बार निर्मित हुआ है। गाँव के बुजुर्ग बंदी चौधरी का कहना है कि उन्होंने जब से होश संभाला है तब से पहली बार पानी का इतना भीषण संकट अपने गाँव में देखा है। बंदी चौधरी ने बताया कि गर्मी बढऩे के साथ ही जल स्तर लगातार पाताल की ओर खिसकने के कारण 3 माह पूर्व उनके गाँव के अधिकांश लोग गाँव छोड़कर 20 किमी दूर ककरहटी के लिये पलायन कर गये हैं। बंदी को छोड़कर उसके परिवार के अन्य सदस्य भी ककरहतटी में रह रहे हैं । बंदी चौधरी के अलावा छापर में बचे दो अन्य ग्रामीण गेंदालाल चौधरी और बुधवा चौधरी ने बताया कि आग उगलती गर्मी में वे 3 से 4 किमी दूर जनवार गाँव या फि र मोहनगढ़ी से पीने का पानी लाते हैं जब पानी लाने की हिम्मत नहीं रहती तो वे जंगल में स्थित प्राचीन झिरिया का गंदा पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं। यह झिरिया भी छापर गाँव की आबादी से लगभग 1 कि मी दूर स्थित है। बंदी चौधरी ने बताया कि छापर गाँव में पेयजल व्यवस्था के लिये 3 हैण्डपम्प और एक प्राचीन कुआं स्थित है लेकिन पिछले तीन-चार माह से जल स्तर नीचे खिसकने के कारण हैण्डपम्प से पानी की जगह गर्म हवा निकल रही है। एकमात्र कुआं का पानी भी समाप्त हो चुका है इसकी तलछट पर कीचड़ बचा है। पानी के अभाव में ग्रामीणों को मजबूर होकर 20 किमी दूर ककरहटी में शरण लेनी पड़ी है। छापर गाँव में भीषण जल संकट व ग्रामीणों के पलायन करने के संबंध में जब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री एस.के. जैन से चर्चा की गई तो उन्होंने आश्चर्य जताते हुये कहा कि छापर गाँव से ग्रामीणों का 3 माह पूर्व पानी के अभाव में पलायन करना बेहद गंभीर मामला है। मुझे आपके माध्यम से यह जानकारी मिल रही है क्षेत्र के हमारे सब इंजीनियर और हैण्डपम्प तकनीशियन के संज्ञान में यह मामला अब तक क्यों नहीं आया? मैं उनसे चर्चा करता हूँ और समस्या का तत्परता से समाधान कराता हूँ।

पेयजल संकट को लेकर ग्रामीण कर रहे आंदोलन





जिले के शहरी व ग्रामीण अंचलों में पेयजल संकट दिनों दिन विकराल हो रहा है। पानी के लिये भटकते ग्रामवासी अब आंदोलन करने के लिये मजबूर हो रहे हैं। गुनौर सिली में भीषण जल संकट को देखते हुये स्थानीय लोगों द्वारा पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु आंदोलन शुरू किया गया है।
मालुम हो कि विगत 31 मई को आंदोलनकारियों द्वारा स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन के माध्यम से आगाह किया गया था कि यदि 2 दिवस के अंदर पानी की समस्या से निजात नहीं दिलाया गया तो स्थानीय लोग आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों द्वारा आगाह किये जाने के बावजूद प्रशासन द्वारा स्थानीय लोगों की मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया जिस कारण ग्रामवासी आज पानी के लिये आंदोलित हो गये।
आंदोलनकारियों ने क्षेत्रीय विधायक सहित प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुये कहा कि पानी की समस्या पर न तो स्थानीय विधायक का ध्यान है न ही प्रदेश सरकार का सब केवल तबादला उद्योग में व्यस्त हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में लोग पानी के लिये हैरान और परेशान हैं फिर भी प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा, प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। आंदोलनकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर आरोप लगाते हुये कहा कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है। जनता एक-एक बूँद पानी को तरस रही है और स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी एसी में बैठकर मौज कर रहे हंै। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुये कहा कि यदि हमारी समस्याओं का त्वरित निराकरण नहीं हुआ तो हम उग्र आंदोलन के लिये मजबूर होंगे जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी प्रशासन की होगी। आंदोलन में प्रमुख रूप से मलखान ङ्क्षसह बैस,राजेंद्र चौबे, बृजेश प्रताप ङ्क्षसह,ब्रजेन्द्र खम्परिया,विजय चौबे, चंदन सपेरा, डॉ. अजीत पाठक, बृजेश तिवारी, धर्मेंद्र अवधिया, सोनू पाठक, नीलेश द्विवेदी, पंकज दुबे, पुष्पेंद्र पटेल, बिटानू पटेल, संकुल गुप्ता, मंजू विश्वकर्मा, सत्येंद्र द्विवेदी, डॉ. टी.के. मालिक, नारी शक्ति उर्मिला नामदेव, कुमुदनी खरे, उर्मिला लखेरा, अनीता नामदेव, प्रेमा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
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