Wednesday, December 11, 2019

प्रशिक्षु वन अधिकारियों के लिये पन्ना बना शिक्षा का केन्द्र

  •   भारतीय वन सेवा के अधिकारियों का छ: दिवसीय अध्ययन प्रवास
  •   वन अधिकारी पन्ना टाइगर रिजर्व में हासिल कर रहे व्यवहारिक ज्ञान



अरुण सिंह,पन्ना। म.प्र. का पन्ना टाइगर रिजर्व देश व विदेश के प्रशिक्षु वन अधिकारियों तथा वन्य जीव प्रेमियों के लिये शिक्षा का केन्द्र बन चुका है। बीते 10 सालों में यहां पर जिस तरह के अनूठे और अभिनव प्रयोग हुये हैं तथा इन प्रयोगों से जो चमत्कारिक सफ लता मिली है उससे पन्ना टाइगर रिजर्व की ख्याति पूरी दुनिया में फैली है। इस कामयाबी को निकट से देखने व समझने के लिये भारत ही नहीं अपितु अन्य दूसरे देशों के वन अधिकारी अध्ययन प्रवास में यहां आ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रशिक्षु वन अधिकारियों का 92 सदस्यीय दल गत 9 दिसम्बर को यहां पहुंचा है। छ: दिवसीय इस अध्ययन प्रवास में ये अधिकारी पन्ना टाइगर रिजर्व के अतीत, वर्तमान व भविष्य की संभावनाओं का गहराई से अध्ययन करेंगे। इन्दिरा गाँधी नेशनल फारेस्ट एकेडमी के इन प्रशिक्षु वन अधिकारियों को डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिकों तथा पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रवास में आये वन अधिकारी पन्ना टाइगर रिजर्व में प्रकृति, पर्यावरण व वन्य प्रांणियों के बारे में बड़ी लगन व मेहनत से व्यवहारिक ज्ञान भी प्राप्त कर रहे हैं। मालुम हो कि वर्ष 2009 में पन्ना टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया था। ऐसी स्थिति में यहां पर बाघों को फिर से आबाद करने के लिये बाघ पुनर्स्थापना योजना शुरू की गई। जिसे यहां पर अभूतपूर्व कामयाबी मिली, परिणामस्वरूप बीते 10 सालों में पन्ना टाईगर रिजर्व में राष्ट्रीय पशु बाघों की संख्या शून्य से 50 से भी अधिक पहुँच गई है। यह चमत्कारिक सफलता देश ही नहीं पूरी दुनिया को आकृष्ट कर रही है। दुनियाभर के वन अधिकारी व वन्यजीव प्रेमी पन्ना की सफलता को जानने और समझने के लिये यहां आ रहे हैं। भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी भी वन व वन्यजीवों के संरक्षण और प्रबंधन के संबंध में व्यवहारिक ज्ञान अॢजत करने के लिये अध्ययन प्रवास पर हैं। निश्चित ही पन्ना टाईगर रिजर्व के लिये यह गौरव की बात है।

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