Thursday, February 20, 2020

ऐसे प्रयास होने चाहिये कि समस्या ही पैदा न हो : आयुक्त

  •   हमें समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण को मिटाना होगा: श्री शर्मा 
  • कलेक्टर ने कहा  मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने हो रहे प्रयास  


 समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते आयुक्त सागर।

अरुण सिंह,पन्ना। हमें समस्याओं के उत्पन्न होने के कारणों को मिटाना होगा, जिससे समस्यायें पैदा ही न हों।यह बात आयुक्त सागर संभाग आनन्द कुमार शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा बैठक में कही। समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों विभाग के अधिकारी-कर्मचारी आपसी समन्वय बनाकर कार्य करें। पलायन पंजी में जाने और आने वाले माताओं का नाम अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाये। उन्होंने जिले में बच्चों का कुपोषण मिटाने के लिये चलाये जा रहे संजीवनी अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पन्ना कलेक्टर द्वारा पहले से ही विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच समन्वय बनाने की योजना के तहत अभ्युदय योजना प्रारंभ की गई। इससे दोनों विभाग को कार्य करने में सुविधा उपलब्ध हो रही है। अब आगे आपसी तालमेल बनाकर दोनों विभाग कार्य करें जिससे आँकड़ों में अन्तर नहीं आये।
उन्होंने विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के दौरान निर्देश दिये कि विभिन्न योजनाओं में शासन से जो राशि भुगतान की जाती है वह संबंधित हितग्राही को समय पर उपलब्ध हो जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि दोनों विभाग की योजनाओं में चिन्हित हितग्राही के बैंक खाते, आधार कार्ड आदि की जानकारी चिन्हांकन के समय ही प्राप्त कर ली जाये। जिससे भुगतान में किसी तरह की देरी न हो। उन्होंने मलेरिया, फाइलेरिया, क्षय रोग की अधिकता वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर उन क्षेत्रों में बीमारी की रोकथाम के लिये प्रभावी कदम उठाये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने शिशु एवं मातृ मृत्युदर को रोकने एवं कुपोषण को मिटाने के लिये कहा कि दोनों विभागों को किशोरी बालिकाओं एवं माताओं के स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिये। उन्होंने कहा कि जिन किशोरियों एवं माताओं में रक्त की कमी अथवा अन्य किसी तरह का कुपोषण है उनकी जांच कराकर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना चाहिये। उन्होंने कहा कि शिशु एवं गर्भवती माताओं को शत-प्रतिशत टीकाकरण कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज में लड़का-लड़की के अन्तर को मिटाने के लिये जागरूकता लाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। गर्भवती महिलाओं पर दोनों विभाग के मैदानी कर्मचारी को सतत निगरानी रखनी चाहिये कि गर्भवती का प्रसव कब होने वाला है प्रसव से तीन दिन पहले ही प्रसव के लिये निर्धारित संस्था, परिवहन की व्यवस्था आदि कर लेनी चाहिये। जिससे शिशु एवं मातृ मृत्युदर में कमी आ सके।

50 फीसदी से अधिक बच्चे अतिकुपोषण से बाहर

कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने जिले में चलाये जा रहे पोषण संजीवनी अभियान के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुये बताया कि इस अभियान के तहत 2800 बच्चों को चिन्हित किया गया था जो अतिकुपोषित थे। इन अतिकुपोषित बच्चों को जनप्रतिनिधियों, समाज सेवियों एवं अन्य लोगों के माध्यम से गोद दिलाकर कुपोषण मुक्ति का कार्य किया गया। उन्होंने बताया कि जिले में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे अतिकुपोषण से बाहर होकर मध्यम श्रेणी में आ गये हैं। वहीं 880 बच्चे सामान्य श्रेणी में पहुँच चुके हैं। जिले में इस अभियान का द्वितीय चरण प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिले में शत-प्रतिशत बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास श्रीमती शशिश्याम उइके ने बैठक में उपस्थितों को सम्बोधित करते हुये शिशु एवं मातृ मृत्युदर कम करने, कुपोषण मिटाने आदि विषयों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। सम्पन्न हुई बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बालागुरू के., मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एल.के. तिवारी, कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास ऊदल सिंह , समस्त एसडीएम, दोनों विभागों के जिला, खण्ड एवं ग्रामीण स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
00000

No comments:

Post a Comment