Monday, December 14, 2020

बाघिन को लगाया गया जीपीएस सैटलाइट कॉलर

  •  भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञों की देखरेख में होगा अध्ययन 
  •  केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के अंतर्गत बन रहा है लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान

पन्ना टाइगर रिज़र्व की युवा बाघिन पी-213 (63) को जीपीएस सैटलाइट कॉलर पहनाती टीम। 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में रविवार 13 दिसम्बर को बफर क्षेत्र में रहने वाली एक युवा बाघिन को जीपीएस सैटलाइट कॉलर लगाया गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञ इस बाघिन के विचरण क्षेत्र व गतिविधियों का अध्ययन करेंगे। यह अध्ययन केन - बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के अंतर्गत लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान बनाने के लिए हो रहा है। उपसंचालक पन्ना टाइगर रिजर्व जरांडे ईश्वर राम हरि ने बताया कि क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा की मौजूदगी में 2 वर्ष 2 माह की आयु वाली युवा बाघिन पी-213 (63) को अमानगंज बफर में कॉलर किया गया है। 

 उल्लेखनीय है कि बाघ पुनर्स्थापना योजना की सफलता के चलते बाघों से आबाद हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व ने दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित किया है। पालतू बाघिन को जंगली बनाने के सफल प्रयोग सहित यहां पर हुए अनेकानेक अभिनव प्रयोगों के कारण भी पन्ना टाइगर रिजर्व हमेशा चर्चा में रहा है। यहां पाए जाने वाले गिद्धों के विचरण व रहवास का अध्ययन करने के लिए विभिन्न प्रजाति के 25 गिद्धों को रेडियो टैगिंग करने का कार्य शुरू किया गया है। देश में अपनी तरह का यह पहला प्रयोग है जहां गिद्धों पर इस तरह से गहन अध्ययन हो रहा है। रेडियो कॉलर लगाकर बाघों की सतत निगरानी का कार्य पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापना योजना शुरू होने के साथ ही किया जा रहा था, लेकिन पहली मर्तबा किसी बाघिन को ऑटोड्रॉप  जीपीएस सेटलाइट कॉलर  लगाया गया है। इसकी खासियत यह है कि विशेषज्ञ देश के किसी भी हिस्से में रहकर इस बाघिन के विचरण व गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे। 

भारत सरकार से 14 बाघों को रेडियो कॉलर करने की मिली अनुमति

क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने जारी प्रेस नोट में बताया कि परिक्षेत्र अमानगंज बफर के बीट तारा में वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता द्वारा युवा बाघिन पी-213 (63) को बेहोशकर सफलता पूर्वक कॉलर किया गया है। आपने बताया पन्ना टाइगर रिज़र्व के अन्तर्गत केन - बेतवा लिंक परियोजना के तहत भारत सरकार द्वारा पन्ना लैण्ड स्केप के प्रबंधन आयोजना हेतु 14 बाघों को रेडियो कॉलर करने की अनुमति प्रदान की गई है। पन्ना टाइगर रिज़र्व द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से बाघिन को कॉलर किया गया है, जिससे मानव बाघ द्वन्द, बाघों के बफर क्षेत्र में विचरण, कॉरीडोर में विचरण आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी। जो भविष्य में बाघों के प्रबंधन में काम आयेगी। कॉलर लगने के बाद अब यह बाघिन पन्ना लैंडस्केप में जहां कहीं भी विचरण करेगी उसकी जानकारी मिलती रहेगी। इस जीपीएस सेटेलाइट कॉलर की एक विशेषता यह भी है कि जब चाहे तब सेटेलाइट के द्वारा इसे निकाला जा सकता है। वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि बाघिन पूर्णरूपेण स्वस्थ और 116 किलोग्राम वजन की है। ऑटोड्रॉप कॉलर पहनाने की पूरी प्रक्रिया 30 - 35 मिनट में संपन्न हो गई, फल स्वरुप बाघिन को स्वच्छंद रूप से विचरण के लिए छोड़ दिया गया है।

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