Friday, July 19, 2019

पन्ना के हक पर डाका डालने वाला एग्रीमेंट हो खत्म: बृजेन्द्र प्रताप सिंह

  •   हम खुद प्यासे हैं और हमारा पानी दूसरे राज्य में जा रहा
  •   विधानसभा में पन्ना विधायक ने उठाया बरियारपुर डेम का मुद्दा



अजयगढ़ जनपद क्षेत्र के ग्राम बरियारपुर के निकट केन नदी पर बना बरियारपुर डेम का दृश्य।

अरुण सिंह,पन्ना। जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिये यदि समय रहते हम नहीं चेते तो आने वाली पीढिय़ों को भयावह जल संकट के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से भी जूझना पड़ सकता है। पन्ना जिले के घने जंगलों से होकर प्रवाहित होने वाली प्रदेश की इकलौती प्रदूषण मुक्त केन नदी के वजूद को बचाने में यदि हम सफल रहे तो यह जीवनदायी नदी ही हमारी जरूरतों को पूरा कर सकती है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि जिस नदी के पानी पर पहला हक पन्ना जिलावासियों का है, उस नदी के पानी का उपयोग करने की इजाजत इस जिले के लोगों को नहीं है। पन्ना जिले में ही अजयगढ़ जनपद क्षेत्र के ग्राम बरियारपुर के निकट केन नदी पर आजादी से पूर्व अंग्रेजों के समय निर्मित  बरियारपुर डेम का पानी अभी भी पड़ोसी राज्य उ.प्र. के बांदा जिले के खेतों तक पहुँचता है और पानी न मिलने के कारण हमारे खेत सूखे पड़े रहते हैं। पन्ना जिले के साथ लम्बे समय से हो रहा यह अन्याय अब बन्द होना चाहिये।
बृजेन्द्र प्रताप सिंह  विधायक पन्ना।

जिले की जनता और किसानों से जुड़े इस अहम मुद्दे को पन्ना विधानसभा क्षेत्र के विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने विधानसभा में उठाते हुये पूर्व में हुये एग्रीमेंट को अव्यवहारिक और पन्ना जिले के लिये घातक बताया है। उन्होंने कहा कि हम खुद प्यासे हैं, हमारी जमीन सूखी पड़ी रहती है फिर भी हमारे यहां का पानी दूसरे प्रदेश को दिया जा रहा है। जिस पानी से हमारी कृषि भूमि की सिंचाई होनी चाहिये हम उसका उपयोग नहीं कर पा रहे। ऐसी स्थिति में अब इस पुराने एग्रीमेन्ट को रिवाइज करना चाहिये ताकि पन्ना जिला वासियों के साथ न्याय हो सके। विधायक श्री सिंह ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे इस एग्रीमेन्ट को मौजूदा परिस्थितियों में स्वीकार नहीं किया जा सकता। बीते कई दशकों से हम इस एग्रीमेन्ट की सजा भुगत रहे हैं। पन्ना विधायक ने बताया कि आजादी के बाद बरियारपुर डेम को लेकर दोनों राज्यों के बीच दुबारा एग्रीमेन्ट हुआ था। सिंगल  पेज का यह एग्रीमेन्ट 31-01-1977 को तत्कालीन मुख्यमंत्रियों एन.डी. तिवारी और श्यामाचरण शुक्ल के बीच हुआ था। इस एग्रीमेन्ट में 37 टीएमसी पानी देने की बात कही गई है। हमें उसमें कोई कण्डीशन ही नजर नहीं आ रही है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि जमीन हमारी, पानी हमारा फिर भी हम अपनी कृषि भूमि की सिंचाई के लिये उ.प्र. से बंधे हुये हैं।
गौरतलब है कि केन नदी पर बने रनगवां बांध, गंगऊ व बरियारपुर डेम आज भी सिंचाई विभाग उ.प्र. के अधीन हैं। इन बांधों पर केन नदी के पानी को रोककर पड़ोसी राज्य उ.प्र. के बांदा जिले में न सिर्फ लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है अपितु गर्मी के मौसम में इन बांधों के पानी को नहर के माध्यम से ले जाकर वहां के तालाबों को भरा जाता है। जिससे कि गर्मी में जनता व मवेशियों को पानी के लिये भटकना न पड़े। पन्ना जिले के लोगों को इस बात पर ऐतराज नहीं है कि पड़ोसी प्रान्त व जिले के लोग खुशहाल हैं, पन्ना जिलावासियों को ऐतराज इस बात पर है कि जिस पानी पर पहला हक उनका होना चाहिये, उसको उपयोग करने तक की उन्हें इजाजत नहीं है। आश्चर्य की बात तो यह है कि बीते सौ सालों से केन नदी के पानी को लूटा जा रहा है फिर भी इस जिले के लोग भूखे, प्यासे और फटेहाल रहकर भी इसे बर्दाश्त करते आ रहे हैं। अब तो केन नदी के पानी को बेतवा में ले जाने की तैयारी चल रही है। इस लिंक  परियोजना के मूर्तरूप लेने पर न सिर्फ पन्ना टाईगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा डूब जायेगा अपितु केन घडिय़ाल अभ्यारण्य का वजूद भी मिट जायेगा। इतना ही नहीं केन नदी का प्रवाह थमने से इस नदी के किनारे बसे दर्जनों ग्रामों के रहवासियों की जिन्दगी मुसीबतों से घिर जायेगी।

मझगांय डेम को लेकर भी उठाये सवाल

पन्ना विधानसभा क्षेत्र के अजयगढ़ विकासखण्ड अन्तर्गत ग्राम कुँवरपुर के पास निर्माणाधीन 35 हजार 099 लाख रू. की लागत वाले मझगांय डेम के संबंध में भी पन्ना विधायक ने सवाल उठाये हैं। इस डेम के निर्माण में अब तक 22 हजार 773 लाख रू. खर्च किये जा चुके हैं। इतना ही नहीं इस निर्माणाधीन डेम के पानी से अजयगढ़ जनपद क्षेत्र के 118 ग्रामों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये पाईप लाइन बिछाने में जल निगम द्वारा 196 लाख रू. खर्च किये गये हैं। लेकिन अभी तक डेम में पानी आना चालू नहीं हुआ। जहां से नहर निकलनी है उस भूमि पर तकरीबन 1 किमी उ.प्र. का आधिपत्य है और वे उस भूमि पर नहर नहीं खोदने दे रहे। एक किमी लम्बी नहर का यह विवाद अभी तक हल नहीं हो सका और इतनी भारी भरकम राशि खर्च की जा चुकी है, जो विचारणीय है।

दैनिक जागरण ग्वालियर में प्रकाशित खबर 

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