Monday, November 2, 2020

पन्ना की रत्नगर्भा धरती ने दो किसानों को फिर किया मालामाल

  •   कोरोना काल में आर्थिक तंगी के बीच हीरा मिलते ही बदली किस्मत
  •  किसानों ने जमा किये 14.98 एवं 7.44 कैरेट वजन के दोनों हीरे

 

अरुण सिंह,पन्ना।
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की रत्नगर्भा धरती इन दिनों आर्थिक तंगी से गुजर रहे गरीब किसानों पर मेहरबान है। सोमवार को आज फिर दो किसानों की किस्मत चमक गई है और वे पलक झपकते लखपति बन गये हैं। एक ही दिन में रंक से राजा बने इन किसानों को 14.98 एवं 7.44 कैरेट वजन के जेम क्वालिटी वाले दो बेशकीमती हीरे मिले हैं, जिससे इनकी जिंदगी बदल गई है। हीरा मिलते ही इन दोनों किसानों के घरों में दिवाली से पहले ही उजियारा फैल गया है। परिजनों की खुशी देखते ही बन रही है। मालूम हो कि 5 दिन पूर्व ही 29 अक्टूबर को एक गरीब खेतिहर मजदूर को कृष्णा कल्याणपुर पटी हीरा खदान क्षेत्र से 7.2 कैरेट वजन का हीरा मिला था।

 हीरा अधिकारी पन्ना ने जानकारी देते हुए बताया कि एनएमडीसी कॉलोनी पन्ना के निवासी लखन यादव को कृष्णा कल्याणपुर पटी उथली हीरा खदान क्षेत्र में 14.98 कैरेट वजन का जेम क्वालिटी वाला हीरा मिला है। जबकि ग्राम जरुआपुर निवासी दिलीप कुमार मिस्त्री को जरुआपुर में ही निजी भूमि पर 7.44 कैरेट वजन का हीरा मिला है। यह हीरा भी जेम क्वालिटी का है, जो अच्छी गुणवत्ता वाला व कीमती माना जाता है। किस्मत के धनी दोनों ही किसानों ने आज दोपहर में कलेक्ट्रेट स्थित हीरा कार्यालय आकर हीरा जमा कर दिये हैं। हीरा कार्यालय पन्ना के हीरा पारखी अनुपम सिंह ने इन हीरों को बकायदे तौलऔर परख कर उन्हें जमा कर लिया है।उन्होंने बताया कि दोनों मजदूर किसानों के द्वारा विधिवत दो-दो सौ रूपए का चालान जमा कर 10 बाई 10 मीटर की खदान खोदने का पट्टा लिया गया था। इन दोनों हीरो को आगामी नीलामी में बिक्री के लिए रखा जायेगा। हीरा पारखी से अनुमानित कीमत पूछे जाने पर उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए बताने से इंकार कर दिया। लेकिन जानकारों व शहर के हीरा पारखियों ने 7.44 वजन वाले हीरे की कीमत 20 से 25 लाख तथा 14.98 कैरेट वजन के हीरे की अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रुपये आंकी है।

जीवन में पहली बार मिला हीरा, बच्चों को पढ़ायेंगे  

हीरा धारक दिलीप मिस्त्री ने बताया कि खदान में हम चार लोग पार्टनर हैं और पिछले 06 माह से हीरा खदान खोद रहे हैं। हमारे द्वारा निजी खेत में सरकारी पट्टा बनवाया गया था। हीरों की तलाश में हमने जी तोड़ मेहनत की है फलस्वरूप ऊपर वाले ने हमारी सुन ली। दिलीप ने बताया कि उसे जिंदगी में पहली बार हीरा मिला है। हमारे द्वारा इसी खेत में खेती की जाती है बस किसी तरह गुजर बसर होता था, लेकिन अब संकट दूर हो गया है। कोरोना के समय जब लॉकडाउन के कारण कहीं कोई काम नहीं मिल रहा था, उस समय हमने हीरा खदान खोदने का विचार बनाया। हमने मेहनत की और ईश्वर की कृपा हो गई, फलस्वरूप हमें इतना बडा हीरा मिला है। हम चारों लोग अब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलायेंगे ताकि उन्हें हमारी तरह मजदूरी न करनी पड़े। दिलीप ने बताया कि हमारी खदान में अभी कुछ चाल शेष है जिसमें हीरा बिनाई की जायेगी। एनएमडीसी कॉलोनी निवासी लखन यादव जिसे 14. 98 कैरेट वजन का हीरा मिला है उसने बताया कि हमें खदान लगाए हुए चार माह हो गये। हमारी आर्थिक स्थिति सदैव से ही कमजोर रही है। मेरे द्वारा करीब बीस वर्षों से हीरा खदान लगाई जा रही थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से खदान में काम करने का मुझे ज्यादा समय मिल गया और भगवान ने हमारी सुन ली जो हमें इतना बडा हीरा मिला।

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