Tuesday, December 30, 2025

मतदाता सूची में नाम जुड़वाएं, जिम्मेदार नागरिक का कर्त्तव्य निभाएं

  • दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया 22 जनवरी 2026 तक
  • मतदाता अपना नाम प्रारूप सूची में अवश्य जांचे 


पन्ना। फोटो निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 अंतर्गत मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया जारी है। इस क्रम में निर्वाचक नामावली का प्रारूप प्रकाशन 23 दिसम्बर 2025 को किया गया है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे एक जिम्मेदार मतदाता के रूप में अपने नाम की जांच कर समय सीमा में आवश्यक दावे-आपत्तियां प्रस्तुत करें, जिससे कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे। प्रारूप निर्वाचक नामावली voters.eci.gov.in, ceoelection.mp.gov.in एवं ECINet App  पर उपलब्ध है। मतदाताओं को सर्वप्रथम अपना नाम प्रारूप सूची में अवश्य जांचना चाहिए। दावे एवं आपत्तियां प्रस्तुत करने की अवधि 23 दिसम्बर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक निर्धारित की गई है।

इस अवधि में प्रत्येक कार्य दिवस पर सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल ऑफिसर उपस्थित रहेंगे। उनके माध्यम से नाम जोड़ने, हटाने-आपत्ति दर्ज करने तथा संशोधन से संबंधित आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के साथ घोषणा पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। वहीं, यदि कोई मतदाता राज्य से बाहर से स्थानांतरित होकर आया है, तो उसे फॉर्म-8 के साथ भी घोषणा-पत्र देना होगा। ऑफलाइन आवेदन करने पर मतदाताओं को बीएलओ से पावती प्राप्त करना न भूलने की सलाह दी गई है।

दावे-आपत्तियों के निराकरण तथा गणना पत्रक के आधार पर तैयार प्रारूप निर्वाचक नामावली की पात्रता प्रविष्टियों की जांच के उपरांत, कतिपय निर्वाचकों को नोटिस जारी कर सुनवाई 23 दिसम्बर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक की जाएगी। नोटिस की तामीली के बाद संबंधित मतदाता को निर्धारित दिनांक, समय एवं स्थान पर आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियों सहित उपस्थित होना अनिवार्य होगा। फॉर्म-6, फॉर्म-6A, फॉर्म-7 एवं फॉर्म-8 मतदाता वेबसाइट से डाउनलोड, बीएलओ से, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा जिला निर्वाचन कार्यालय से भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन आवेदन सुविधा भी उपलब्ध है।

ईसीआई नेट एप के द्वारा ऑनलाइन आवेदन के लिए गूगल प्ले स्टोर से ECINet App डाउनलोड करें। मोबाइल नंबर एवं प्राप्त OTP से रजिस्ट्रेशन करें। Voters Services  सेक्शन में जाकर Voters Registration  पर क्लिक करें। फॉर्म-6 घोषणा-पत्र के साथ भरें। इसी तरह वोटर्स पोर्टल के जरिए आवेदन के लिए  https://voters.eci.gov.in पर जाएं। मोबाइल नंबर एवं OTP से साइन अप करें। New Voters Registration  टैब पर क्लिक कर फॉर्म-6 एवं घोषणा-पत्र भरें। मतदाता जागरूकता अभियान के संदेश कोई मतदाता छूट न जाए के साथ नागरिकों से सक्रिय सहभागिता की अपील की गई है। अधिक जानकारी एवं सहायता के लिए 1950 हेल्पलाइन पर भी संपर्क किया जा सकता है।

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Wednesday, December 24, 2025

पन्ना जिले में कुल 7 लाख 35 हजार 932 मतदाता

  • फोटो निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम अंतर्गत प्रारंभिक मतदाता सूची का हुआ प्रकाशन, 22 जनवरी तक प्राप्त किए जाएंगे दावा-आपत्तियां


पन्ना। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पन्ना जिले की समस्त तीन विधानसभाओं में संचालित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम अंतर्गत मंगलवार को प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। आयोग द्वारा विगत 27 अक्टूबर को पुनरीक्षण कार्यक्रम की घोषणा के पूर्व जिले में दर्ज कुल मतदाताओं की संख्या 7 लाख 76 हजार 76 थी। अब प्रकाशित प्रारंभिक सूची मुताबिक कुल 40 हजार 144 मतदाता कम हुए हैं।

अद्यतन स्थिति अनुसार जिले की समस्त तीन विधानसभा में कुल 7 लाख 35 हजार 932 मतदाता हैं। इनमें 3 लाख 41 हजार 97 महिला मतदाता एवं एक अन्य मतदाता भी शामिल है। पवई विधानसभा में सर्वाधिक 2 लाख 72 हजार 844 मतदाता एवं गुनौर विधानसभा में सबसे कम 2 लाख 24 हजार 289 मतदाता हैं, जबकि पन्ना विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 2 लाख 38 हजार 799 है। पवई में एक लाख 27 हजार 222, गुनौर में एक लाख 3 हजार 813 और पन्ना विधानसभा में एक लाख 10 हजार 62 महिला मतदाता सहित एक अन्य मतदाता दर्ज है।

निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 4 नवम्बर से 18 दिसम्बर तक गणना प्रपत्र वितरण, संग्रहण एवं डिजिटाईजेशन संबंधी कार्य पूर्ण किया गया था। मंगलवार को प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन उपरांत दावा-आपत्ति प्राप्त करने का कार्य भी आरंभ हो गया है। आगामी 22 जनवरी तक दावा आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। 23 दिसम्बर से 14 फरवरी तक नोटिस तामीली, सुनवाई एवं सत्यापन सहित दावा व आपत्ति निराकरण की प्रक्रिया संचालित रहेगी। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी को होगा। एसआईआर अवधि में 19 से 22 दिसम्बर तक मतदान केन्द्रों के युक्तियुक्तकरण का कार्य भी संचालित किया गया, जिसके तहत अब नवीन मतदान केन्द्रों को शामिल कर जिले में कुल 1004 मतदान केन्द्र हैं।

308 सर्विस वोटर्स, 18-19 आयु वर्ग के 4490 मतदाता

फोटोयुक्त निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत प्रकाशित प्रारंभिक मतदाता सूची में कुल 308 सर्विस वोटर्स भी दर्ज हैं। पन्ना में सर्वाधिक 186 एवं पवई व गुनौर विधानसभा में क्रमशः 35 एवं 87 सेवा निर्वाचक मतदाता हैं। जिले के समस्त तीन विधानसभा में 18 से 19 आयु वर्ग के 4 हजार 490, 20 से 29 आयु वर्ग के एक लाख 71 हजार 434, 30 से 39 आयु वर्ग के एक लाख 97 हजार 476, 40 से 49 आयु वर्ग के एक लाख 44 हजार 498, 50 से 59 आयु वर्ग के एक लाख 8 हजार 16, 60 से 69 आयु वर्ग के 67 हजार 369, 70 से 79 आयु वर्ग के 32 हजार 36, 80 से 89 आयु वर्ग के 9 हजार 269, 90 से 99 आयु वर्ग के एक हजार 237, 100 से 109 आयु वर्ग के 58, 110 से 119 आयु वर्ग के निरंक तथा 120 वर्ष एवं अधिक आयु के 48 मतदाता शामिल हैं। 

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Saturday, December 20, 2025

खेल–खेल के माध्यम से समाज को किया जा रहा जागरूक

  •  जल संरक्षण, स्वच्छता तथा सैनिटेशन जैसे विषय गांव-गांव पहुँच रहे 
  • अनूठे अभियान से बच्चो के कार्य व्यवहार में भी आया बड़ा बदलाव 


पन्ना। स्वयंसेवी संस्था समर्थन,परमार्थ समाजसेवी संस्थान एवं जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित UL4BC परियोजना के अंतर्गत  जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन एक निजी होटल पन्ना में सफलतापूर्वक किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य खेल–खेल के माध्यम से जल संरक्षण, स्वच्छता, वाटर एवं सैनिटेशन (WASH) जैसे महत्वपूर्ण विषयों को बच्चों के माध्यम से समुदाय तक पहुँचाना था। 

समर्थन एवं  परमार्थ समाजसेवी संस्थान द्वारा संचालित UL4BC परियोजना वर्तमान में मध्य प्रदेश के तीन जिलों निवाड़ी, छतरपुर एवं पन्ना में संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य बच्चों के माध्यम से खेल–खेल में जल संरक्षण, स्वच्छता तथा वाटर एवं सैनिटेशन (WASH) जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समुदाय तक पहुँचाना है। कार्यक्रम का विस्तृत उद्देश्य परमार्थ समाजसेवी संस्था की प्रोग्राम मनेजर शिवानी सिंह एवं कार्यक्रम के विषय विशेषज्ञ मुनेद्र सिंह ने बच्चो के खेल में सहयोग प्रदान किया ।

जल निगम के महांप्रबंधक शिवम सिन्हा ने कार्यक्रम के परिणाम की सराहना की एवं जल जीवन मिशन के उद्देश्य की पूर्ति में सहयोगी गतिविधियो को गांव — गांव तक ले जाने की बात कही है। समर्थन ने मंच प्रदान किया जहां समुदाय एवं बच्चों, सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। बच्चों ने फुटबॉल जैसे खेलों के माध्यम से जल संरक्षण, कीटाणुओं की पहचान एवं स्वच्छता जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर समाज के सामने रखा। कार्यक्रम में लगभग 115 बच्चो ने भागीदारी की। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उमराव सिंह मरावी ,जल निगम के महाप्रबंधक शिवम सिंन्हा, डीपीसी अनिल गुप्ता ,एपीसी सतेन्द्र सिंह परिवार एवं पांच स्कूलो के शिक्षक एवं बच्चे कार्यक्रम में उपस्थिति रहे।


इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रोग्राम को हम जिले के सभी स्कूलों में ले जाएंगे जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास को गति मिलेगी साथ में बच्चों को स्वावलंबन और स्वरोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब बच्चे निर्माण एवं व्यवहारिक गतिविधियों से जुड़ते हैं, तो उनमें स्वरोजगार से जुड़े विचार स्वतः विकसित होते हैं। इसी क्रम में फुटबॉल के माध्यम से जल स्रोतों की रक्षा विषय पर आधारित खेल का प्रदर्शन भी किया गया। जल संरक्षण एवं स्वच्छता से संबंधित प्रदर्शनी भी बच्चों द्वारा लगाई गई जिसका सभी अतिथियों ने अवलोकन किया और उनकी सराहना की गई। कठपुतली नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को जल संरक्षण, स्वच्छता एवं वाटर एंड सैनिटेशन (WASH) के प्रति जागरूक किया।

सरपंच श्रीमती रामरानी गोंड़ ने कहा की  संस्था द्वारा गांव के बच्चों को स्वच्छता जैसी विषयों पर जानकारी के साथ-साथ परिसर में स्वच्छ वातावरण मिलेगा साथ में बताया कि बताया कि किस प्रकार महिलाएँ जल संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और पानी बचाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही हैं, जिससे समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। जिला पंचायत सीईओ ने बच्चो,अभिभावक एवं सिक्षको को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये मेंडल भी प्रदान किया गया। शिक्षक प्रमोद तिवारी,सपना तिवारी,अंजना श्रीवास्तव,श्रीाकंन्त नामदेव,श्रीमती रेखा देवी नरेन्द्र शर्मा,रमजानखान,सरद एवं चरणदास नामदेव ने मेंडल प्राप्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन समर्थन संस्था के क्षेत्रीय समन्वयक ज्ञानेन्द्र तिवारी एवं परियोजना की जिला समन्वयक आरती विश्कर्मा एवं कमलचन्द्र सेंन द्वारा किया गया।

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Tuesday, December 9, 2025

पन्ना की उथली हीरा खदान से युवक को मिला 15. 34 कैरेट वजन का बेशकीमती हीरा


पन्ना। हीरा की खदानों के लिए प्रसिद्ध मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की उथली खदान से 15.34 कैरेट वजन वाला जेम क्वालिटी का बेशकीमती हीरा मिला है। हल्के हरे रंग वाला यह नायाब हीरा पन्ना के रानीगंज मुहल्ला निवासी सतीश खटीक को कृष्णा कल्याणपुर की पटी हीरा खदान में मिला है। इस नायाब हीरे की अनुमानित कीमत 50 से 60 लाख रुपये आंकी जा रही है।

हीरा अधिकारी रवि पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि हीरा धारक सतीश खटीक ने कलेक्ट्रेट स्थित हीरा कार्यालय में पहुंचकर आज दोपहर में विधिवत हीरे को जमा कर दिया है। आगामी होने वाली हीरों की नीलामी में इस हीरे को भी बिक्री के लिए रखा जाएगा। हीरा जितनी राशि में भी बिकेगा उसकी रॉयल्टी काटने के बाद शेष राशि हीरा धारक को प्रदान की जाएगी। हीरा पारखी अनुपम सिंह के अनुसार सतीश खटीक को मिला हीरा वजन और क्वालिटी के लिहाज से बहुमूल्य हीरा है, जिसे सरकारी खजाने में जमा कर लिया गया है। 

हीरा मिलने पर अपनी ख़ुशी का इजहार करते हुए युवक सतीश खटीक ने बताया कि बीते माह 19 नवम्बर को उसे हीरा खदान का पट्टा मिला था। कृष्णा कल्याणपुर स्थित खदान में 20 दिन पहले ही उन्होंने काम शुरू किया था। इतने कम समय में उन्हें यह हीरा मिल गया जिससे हमारी जिंदगी खुशहाल हो जाएगी। हीरा मिलने के बाद से इस युवक के परिवार में जश्न और ख़ुशी का माहौल है, लोग बधाइयाँ दे रहे हैं। 

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Monday, December 8, 2025

मुख्यमंत्री ने पन्ना नेशनल पार्क में 10 नई कैंटर बसों को दिखाई हरी झंडी

  • अब एक साथ 19 पर्यटक ले सकेंगे रोमांचक जंगल सफारी का आनंद
  • ऑनलाइन बुकिंग न होने पर पर्यटकों को मिलेगी पार्क राउंड की सुविधा


पन्ना। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में पर्यटन की सुविधाओं में लगातार विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पन्ना नेशनल पार्क के मड़ला गेट से 10 नई वीविंग कैंटर बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अब इन बसों के जरिए पर्यटक जंगल सफारी का रोमांचक अनुभव और अधिक सुविधाजनक तरीके से ले सकेंगे।

मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम ने पर्यटकों को एक नई सौगात देते हुए प्रदेश के विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में अहम कदम उठाया है। जंगल सफारी के लिए  10 नई आरामदायक वीविंग कैंटर बसें उपलब्ध करायी हैं। इन कैंटर बसों में एक साथ 19 पर्यटकों के बैठने की क्षमता है। यह बसें अन्य सफारी वाहनों की तुलना में अधिक लंबी और ऊंची हैं, जिससे पर्यटकों को बेहतर दृश्य और अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। 

बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये बसें अधिक सुरक्षित मानी जा रही हैं। इन बसों की लंबाई और ऊंचाई भी अधिक है, जिससे सफर के दौरान पर्यटकों को ज्यादा जगह और आराम मिलता है। वहीं बच्चों और सीनियर सिटिज़न्स के लिए यह बसें सुरक्षित और अनूठा अनुभव प्रदान करेंगी। इन बसों में बैठकर पर्यटक न केवल वन्यजीवों के विचरण का नज़ारा देख सकेंगे, बल्कि जंगल सफारी का एक सुखद और यादगार अनुभव भी ले सकेंगे।

ऑनलाइन बुकिंग न होने पर पर्यटकों को मिलेगी पार्क राउंड की सुविधा

10 नई वीविंग कैंटर बसों के संचालन से उन पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी, जो पहले ऑनलाइन बुकिंग न होने की वजह से जंगल सफारी का अनुभव नहीं ले पाते थे। इसके साथ ही ऑनलाइन स्लॉट जल्दी भर जाने से कई पर्यटक नेशनल पार्क पहुंचकर भी सफारी से वंचित रह जाते थे।

नेशनल पार्क्स के एंट्री गेट से ही बुकिंग की सुविधा

नई कैंटर बसों के संचालन के बाद अब पर्यटकों को नेशनल पार्क के गेट पर ही सफारी बुक करने की सुविधा मिलेगी। ऑनलाइन बुकिंग पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इन वाहनों से जंगल सफारी का आनंद लेने के लिए प्रति व्यक्ति/प्रति राउंड लगभग ₹1150 से ₹1450 तक शुल्क देना होगा। यह 10 नई कैंटर बसें प्रदेश के प्रमुख नेशनल पार्कों और पर्यटन स्थलों जैसे बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, पन्ना, परसिली (सीधी) सहित अन्य नेशनल पार्क्स और अन्य पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की सुविधा के लिए संचालित की जाएंगी।

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Saturday, December 6, 2025

बुंदेल केसरी महाराजा छत्रसाल का संघर्षमयी जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी : श्री तोमर

  •  विधानसभा अध्यक्ष ने पन्ना में आज किया महाराजा छत्रसाल की अष्टधातु की प्रतिमा का अनावरण
  • महाराजा छत्रसाल जैसे वीर पुरूष बुन्देलखण्ड और हमारे लिए गौरव, बुन्देलखण्ड रही उनकी कर्मभूमि 


पन्ना। बुंदेल केसरी महाराजा छत्रसाल की राजधानी एवं हीरा, तालाब और मंदिरों की नगरी पन्ना में प्राचीन व ऐतिहासिक धरम सागर तालाब के किनारे छत्रसाल जी की प्रतिमा का अनावरण गौरवशाली क्षण है। इस गरिमामयी कार्यक्रम में नगरवासी भी साक्षी बनकर उत्साहित हैं। मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक स्थान के रूप में मान्यता प्राप्त पन्ना भगवान श्री जुगल किशोर की पावन स्थली तथा महाराजा छत्रसाल के गुरु प्राणनाथ की तपस्थली भी है। यह बात विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने शनिवार को पन्ना नगर के धरम सागर तालाब परिसर में महाराजा छत्रसाल की अष्टधातु की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की हैसियत से कही। उन्होंने उपस्थितजनों को बधाई व शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर विस अध्यक्ष का तलवार एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।

विस अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि बुन्देलखण्ड महाराजा छत्रसाल की कर्मभूमि रहा है। भारत के कण कण में शंकर की भांति पन्ना के कण कण में हीरा की किवदंती प्रासंगिक है। इस ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी अवसर पर हमें सच्चे देशभक्त बनने का मजबूत संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराजा छत्रसाल का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मुगल साम्राज्य के विरूद्ध अद्भुत शौर्य और पराक्रम दिखाया। मात्र 12 वर्ष की अल्पायु में पिता के स्वर्गवास के बावजूद उन्होंने आक्रमणकारियों को न सिर्फ परास्त किया, बल्कि बुन्देलखण्ड पर कब्जा भी जमाया। सीमित संसाधन एवं संख्या बल की कमी के बावजूद अपने संकल्प बल की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ उन्होंने साहस और बहादुरी दिखायी। 

विस अध्यक्ष ने कहा कि हमारा देश वीरों की भूमि है। महाराजा छत्रसाल जैसे वीर पुरूष बुन्देलखण्ड और हमारे लिए गौरव हैं। इस अवसर पर छत्रसाल की जन्म जयंती एवं पुण्य तिथि पर भी गरिमामय कार्यक्रम के आयोजन तथा नई पीढ़ी को छत्रसाल के संघर्षमय जीवन व पराक्रम पर केन्द्रित साहित्य के वितरण के लिए कहा। शैक्षणिक संस्थाओं के विद्यार्थियों को इस स्थान का भ्रमण कराने का आह्वान भी किया। अध्यक्ष श्री तोमर ने महाराणा प्रताप और वीर शिवाजी के शौर्य का भी जिक्र करते हुए कहा कि पूर्वजों के प्राणों के बलिदान की बदौलत भारत देश को आजादी मिली है। इसलिए हमें अपनी संस्कृति, मान्यता और परंपरा का संरक्षण करना भी नितांत आवश्यक है।

खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम मात्र प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि महाराजा छत्रसाल के संघर्ष को निरंतर स्मरण करने का अवसर भी है। सांसद ने कहा कि आईकोनिक सिटी खजुराहो की भांति पन्ना नेशनल पार्क और मंदिरों में भी पर्यटकों का बड़ी संख्या में आगमन हुआ है। पन्ना टाईगर रिजर्व पर्यटकों का पसंदीदा पर्यटक स्थल बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि महाराजा छत्रसाल के नाम पर पन्ना नगर के स्टेडियम को विकसित किया जा रहा है। भविष्य में अटल पार्क का लोकार्पण होगा और यहां पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने पन्ना को स्वच्छ बनाने के लिए टीम भावना से कार्य करने का आह्वान भी किया।


पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक पन्ना बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने पन्ना में तीव्र गति से रेलवे परियोजनाओं के विकास और निर्माण कार्य के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 2100 करोड़ रूपए की एलिवेटेड रोड निर्माण शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। टाईगर कोरिडोर के जरिए पेंच, कान्हा और बाधवगढ़ टाईगर रिजर्व से पन्ना जुड़ेगा। कालिंजर-जबलपुर मार्ग का राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में उन्नयन के लिए प्रयास किया जा रहा है। पन्ना विधायक ने कहा कि धरम सागर तालाब परिसर में महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा की स्थापना से वर्तमान में भी इतिहास पुरूष की झलक देखने को मिलेगी। इस अवसर पर विधायक ने स्वयं के बेनीसागर तालाब को गोद लेने की भांति सांसद से भी धरमसागर तालाब को गोद लेने का अनुरोध किया और निर्माणाधीन पाथवे सहित तालाब परिसर के प्रस्तावित सौंदर्यीकरण की जानकारी दी। 

उन्होंने यादवेन्द्र क्लब को डायमण्ड म्यूजियम की बजाय हेरीटेज होटल या रेस्टोरेंट की भांति विकसित करने की बात कही। साथ ही तालाब के बीच स्थित शिव मंदिर तक पहुंच मार्ग की आवश्यकता बताई। इसके अलावा डायमण्ड पार्क के साथ म्यूजियम की स्थापना, वॉटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी को बढ़ावा देने के प्रयायों की जानकारी दी। नपाध्यक्ष मीना पाण्डेय ने स्वागत उद्बोधन दिया। 

कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बृजेन्द्र मिश्रा सहित विष्णु पाण्डेय, गुनौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष मीना राजे, उपाध्यक्ष संतोष यादव, नपा उपाध्यक्ष आशा गुप्ता, पार्षदगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर ऊषा परमार, पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, अपर कलेक्टर मधुवंतराव धुर्वे, सीएमओ उमाशंकर मिश्रा सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारीगण, प्रबुद्धजन, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद थे। 

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अरावली का पुनः नया संकट, प्रकृति और संस्कृति का विध्वंस


।। जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ।। 

अरावली क्षेत्र में 1980 के दशक में वैध-अवैध 28000 खदानें चालू थी। इनको बंद कराने का बीड़ा तरुण भारत संघ ने वर्ष 1988 में उठाया था। 1993 में अरावली की धरती पर सभी खदाने एक बार तो बंद करा दी थी। यह काम 1990 के दशहरे विजयदशमी पर सरिस्का का खनन रुकने से इसकी शुरुआत हुई थी।

महात्मा गांधी जयंती 2 अक्टूबर 1993 को हिम्मतनगर गुजरात से अरावली चेतना यात्रा द्वारा खनन बंद कराते हुए “अरावली का सिंहनाद“ दिल्ली संसद तक 22 नवंबर 1993 को पहुंचा था। तब अरावली एक बार तो खनन मुक्त हो गई था।  वर्ष 1994 में अरावली के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को खनन बंद करने की कार्यवाही हेतु अरावली संरक्षण समितियां गठित करके, उच्चतम न्यायालय को रिपोर्ट देने वाला तंत्र बनाया गया था।

उस समय लगता था कि अब अरावली बच गई है और आगे के लिए अरावली को बचाने वाली व्यवस्था भी अब बन गई है। वर्ष 1996 आते-आते मैं निश्चिंत हो गया था और मान लिया था कि अब मेरा संकल्प पूरा हो गया है। लेकिन 10- 15 वर्ष बाद ही मुझे देखने में आया कि खनन संगठन ज्यादा दल - बल के साथ संगठित होकर खनन  खुलवाने में जुट रहा हैं। तब बहुत से ख्याली मीणा जैसे युवा अरावली बचाने के लिए तैयार हो गए थे। पूरी अरावली में बहुत से लोग स्वयं सामने आकर अरावली बचाने में जुट गए थे। मन को उस समय बहुत समाधान और संतोष था। मुझे मालूम नहीं था कि, मेरे सामने ही संपूर्ण अरावली में वैध और अवैध खनन शुरू होगा और इस खनन को सरकारों व खनन उद्योग पतियों के गठजोड़ को उच्चतम न्यायालय भी मोहर लगा देगा

मैने जब तक उच्चतम न्यायालय का निर्णय आते ही पढ़ा, तब तक सरकारी एफिडेविट, सरकार की रिपोर्ट, मंत्रालय की कार्रवाई नहीं देखी थी। तब लगता था कि उच्चतम न्यायालय ने चारों राज्यों की अरावली का एक जैसी कानून व्यवस्था देने की मनसा से ऐसा किया होगा।

100 मीटर की ऊंचाई की परिभाषा को एक मानक माना होगा। जैसे हम अपनी पढ़ाई में कोई एक आधार बिंदु मानकर गणनाएं करते हैं, वैसे गणना के लिए यह रखा होगा। विस्तार से थ्.ै.प् वन सर्वेक्षण संस्थान, भारतीय सर्वेक्षण विभाग(जीएसआई) टेक्निकल सबकमेटी की रिपोर्ट (टीएससी) देखकर आंखें खुली कि यह संपूर्ण करवाई तो खनन उद्योग के सतत विकास के नाम पर हमारी प्राचीनतम विरासत अरावली के लिए नया संकट पैदा कर रही है।

अरावली का 20 मीटर तक की ऊंचाई वाला क्षेत्रफल 107494 वर्ग किमी है। 20 मीटर से ऊपर वाला क्षेत्र 12081 वर्ग किमी, 40 मीटर से ऊपर वाला क्षेत्र 5009 वर्ग किमी, 60 मीटर वाला क्षेत्र 2656 वर्ग किमी है, 80 मीटर वाला क्षेत्र 1594 वर्ग किलोमीटर, 100 मीटर वाला क्षेत्र 1048 वर्ग किलोमीटर, 100 मीटर से ऊपर वाला क्षेत्र केवल 8.7 प्रतिशत क्षेत्रफल है।

अब भारत सरकार का पर्यावरण मंत्रालय अपनी ईमानदारी से काम करेगा तो कुल 8.7 प्रतिशत अरावली क्षेत्र ही बचेगा। यह अरावली वासियों को स्वीकार नहीं है। अरावली क्षेत्र के आदिवासी तो ये स्वीकार नहीं करते हैं। अरावली में आदिवासियों के मुहासे, वाडे, घर, घेर तो 100 मीटर से नीचे की भूमि पर ही है। वहां से भी ये उजाड़ना नहीं चाहते। खनन की बीमारियों से भी बचकर इससे दूर रहना ही इनका स्वभाव है। उनकी अपनी संस्कृति और प्रकृति है। उनका आदिज्ञान तो प्रकृति से संस्कृति से जोड़ने वाला है।

अरावली की अपनी प्रकृति और संस्कृति तो दुनिया में सर्वोपरि है। अरावली में खनन उद्योग यहां की संस्कृति और प्रकृति के विरुद्ध है। इसी बात को समझकर 45 वर्ष पूर्व अरावली बचाने का काम जयपुर से शुरू हुआ था। अब रिपोर्ट को पढ़ने, देखने, समझने से समझ आया कि, जयपुर से ही खनन संगठन की पहल को उच्चतम न्यायालय ने मान्यता दे दी है। इन्हीं की बातें ही इस रिपोर्ट में  झलकती हैं।

अरावली को बचाने वालों से आज तक कभी भी कोई रिपोर्ट तैयार करने वाला नहीं मिला। जबकि बचाने वाले जयपुर, अलवर में ही अधिकतर रहते हैं; मुझे भी आज तक अरावली के विषय पर बात करने वाला कोई सरकारी अधिकारी नहीं मिला। मुझसे कोई बात करता तो मैं भी इस कार्रवाई में अरावली की सच्ची जानकारी देता और हम भी अरावली का सर्वमान्य सत्य बताते। 100 मीटर ऊंचाई वाली परिभाषा तो केवल खनन उद्योगों की बनाई परिभाषा है। यह परिभाषा किसी भू वैज्ञानिक, पर्यावरण, प्रकृति, संस्कृत , भू - संस्कृति को समझने वाला नहीं स्वीकारता है।

भारत सरकार व चारों राज्यों (गुजरात, राजस्थान हरियाणा, दिल्ली)की सरकार को अरावली की परिभाषा पर पुनर्विचार करना चाहिए।अन्यथा सरकारों की बड़ी बदनामी होगी। परिभाषा का यह विवाद उच्चतम न्यायालय के सिर पर नहीं डालना चाहिए । उच्चतम न्यायालय  तो हमारे लोकतंत्र का सर्वोपरि अंग माना जाता है; यह तो सरकार से भी ऊपर है। लेकिन न्यायपालिका आजकल जो भी न्याय करती है वे ज्यादातर एकतरफा समझौता जैसा दिखाई देता है। इसलिए आरवाली की परिभाषा वाला समझौता अरावली का न्याय नहीं है और अब हमें यह स्वीकार भी नहीं है क्योंकि इसमें अरावली  पर्वतमाला के पक्ष को ठीक से स्थान नहीं मिला। इसलिए इस निर्णय ने भारत की संस्कृति -प्रकृति के अनुरूप अरावली पर्वतमाला को न्याय नहीं मिला।

हम हमारी सम्मनीय न्यायपालिका के सर्वोच्च न्यायालय को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की प्रार्थना करते है। अरावली भारत की प्राचीनतम विरासत है। इसे भारतीय संस्कृति और प्रकृति योग का उच्चतम उदाहरण मानकर अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें। वही से भारतीय विरासत  अरावली को बचाने की पहल होगी।

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Friday, December 5, 2025

पन्ना टाइगर रिजर्व के नर बाघ पी-243 के सिर पर गहरा घाव

  • वन्य जीव विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहा है उपचार
  • विगत 8 माह पूर्व भी आपसी संघर्ष में हुआ था घायल 

जख्मी बाघ का उपचार करने के लिए उसे ट्रेंकुलाइज करते हुए डॉ संजीव कुमार गुप्ता। 
 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व में बाघों की संख्या बढऩे के साथ ही उनके बीच इलाके में आधिपत्य को लेकर आपसी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। बाघों के बीच होने वाली इस टेरिटोरियल फाइट (आपसी संघर्ष) में कई बार बाघ बुरी तरह से जख्मी हो जाते हैं। अभी हाल ही में पन्ना टाइगर रिजर्व का 11 वर्षीय बाघ पी-243 आपसी संघर्ष में बुरी तरह जख्मी हुआ है, इस बाघ के सिर में गहरा घाव है। यह वही प्रसिद्ध नर बाघ है, जिसने चार अनाथ शावकों की परवरिश की थी, जिनकी मां बाघिन पी-213(32) की मौत मई 2021 में हो गई थी। 

उल्लेखनीय है कि इसी साल अप्रैल 2025 में भी यह बाघ आपसी संघर्ष में बुरी तरह से जख्मी हो गया था। इस बाघ के सिर में गहरा घाव हो गया था जो प्राकृतिक रूप से ठीक नहीं हो पा रहा था। बाघ की दिनोंदिन बिगड़ती हालत को देखते हुए वन्य जीव स्वास्थ्य अधिकारी पन्ना टाइगर रिज़र्व द्वारा  ट्रेंकुलाइज किया जाकर उसके घाव का उपचार किया गया। अब तक़रीबन 8 माह बाद आपसी संघर्ष में फिर इस बाघ के सिर में उसी जगह पर गहरा घाव हो गया है।   

उपसंचालक टाइगर रिजर्व  मोहित सूद ने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ पी- 243 कुछ दिनों पूर्व घायल हो गया था, जिसका उपचार चल रहा है। वन्य जीव विशेषज्ञों व डॉ संजीव कुमार गुप्ता वन्य जीव स्वास्थ्य अधिकारी की देखरेख में चल रहे उपचार से घाव तेजी से सूख रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि सतत निगरानी व उपचार से इस बाघ का घाव जल्दी ही भर जायेगा और वह स्वस्थ होकर पूर्व की तरह जंगल में स्वच्छंद रूप से विचरण करेगा। 

अनाथ शावकों की बाघ पी-243 ने की थी परवरिश   

पन्ना टाइगर रिज़र्व का नर बाघ पी-243 अपने भारी भरकम डील डौल के चलते जहाँ आकर्षण का केंद्र रहता है वहीं इस बाघ में कुछ ऐसी विशिष्टताएं भी देखी गई हैं जो दुर्लभ है। चार वर्ष पूर्व  मई 2021 में बाघिन पी 213-32 की अज्ञात बीमारी के चलते मौत हो गई थी, उस समय इस बाघिन के तक़रीबन 7-8 माह के चार शावक थे जो मां की असमय मौत होने पर अनाथ हो गए। ऐसे समय जब इन अनाथ व असहाय शावकों के बचने की कोई सम्भावना नहीं थी उस समय इसी नर बाघ ने इन शावकों को न सिर्फ सहारा दिया बल्कि मां की तरह उनकी परवरिश भी की। इसका परिणाम यह हुआ कि चारो नन्हे शावक खुले जंगल में चुनौतियों के बीच अपने को बचाने में कामयाब हुए।   


नर बाघ पी-243 का व्यवहार शावकों के प्रति बहुत ही प्रेमपूर्ण और अच्छा था। वह अपने इलाके में घूमते हुए इन शावकों पर भी कड़ी नजर रखता था। खास बात यह थी कि बाघिन (जीवन संगिनी) की मौत के एक माह गुजर जाने पर भी नर बाघ ने शावकों की परवरिश के लिए जोड़ा नहीं बनाया। बाघ का इलाका चूँकि काफी बड़ा और फैला हुआ था, जिसकी वह सतत निगरानी भी करता रहा। लेकिन दो दिन से ज्यादा वह शावकों के रहवास स्थल से दूर नहीं रहता था। नर बाघ की गतिविधि पर नजर रखने वाले मैदानी वन कर्मियों के मुताबिक वह शावकों की देखभाल करने में पूरी रुचि लेता था। बाघ पी-243 शावकों के क्षेत्र में शिकार करके उनके भोजन का भी इंतजाम करता था। बाद में चारो शावक बड़े होकर दक्ष शिकारी बन जंगल में चुनौतियों और खतरों के बीच जीने में सक्षम हो गए। 

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Monday, December 1, 2025

हर किसी को आकर्षित करती है पक्षियों की अनोखी दुनिया


पक्षी सदा से मनुष्यों का मन मोहते आए हैं । हमारे साहित्य, कला, संस्कृति और लोक कथाओं में उनका विशेष स्थान रहा है। हिमालय पार करने वाला उनका रोमांचक सफर हो, या हमारे आंगन में जोड़ा बनाने और घोंसला बनाने का उनका जीवन कलाप, पक्षी हमें प्रकृति की सुंदर दुनिया को जानने और सराहने का अवसर देते हैं। सारस की शान से लेकर पपीहे की मधुर तान तक, हर प्रजाति की अपनी अनूठी कहानी है, जो हमारे जीवन को समृद्ध बनाती है।

बर्ड वॉचिंग (Bird Watching) के शौकीनों के लिए पन्ना टाईगर रिजर्व का जंगल किसी जन्नत से कम नहीं है । लगभग 543 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले पन्ना टाईगर रिजर्व के कोर एरिया का खूबसूरत जंगल तथा बीचों-बीच प्रवाहित होने वाली केन नदी में तीन सौ से भी अधिक प्रजातियों के रंग-बिरंगे पक्षी देखने को मिलते हैं। टाईगर रिजर्व के भ्रमण हेतु आने वाले पर्यटको में बर्ड वॉचिंग के शौकीनों की संख्या बढ़ी है। पक्षियों पर रिसर्च कर रहे विश्व स्तर के कई पक्षी विशेषज्ञ पक्षी दर्शन के लिए यहाँ पहुंचते हैं। 

विदित हो कि पूर्व में पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र टाईगर हुआ करता था। पार्क भ्रमण के दौरान पर्यटकों को यदि टाईगर देखने को नहीं मिला तो वे बड़े निराश होकर यहां से जाते थे। पार्क प्रबंधन व मैदानी अमला भी सिर्फ टाईगर को लोकेट करने में ही लगा रहता था लेकिन अब प्रबन्धन व पर्यटक दोनों का ही रूझान बदला है। टाईगर के अलावा भी अब पर्यटक अन्य दूसरे वन्य प्राणियों, पक्षियों व वनस्पतियों के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहते हैं। पर्यटकों के रुझान में आया यह बदलाव निश्चित ही शुभ संकेत है। प्रकृति, पर्यावरण व जैव विविधता के संरक्षण में यह बदलाव मददगार साबित होगा।

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