Tuesday, December 31, 2024

नया साल मनाने के दौरान हुड़दंग करने एवं शराब के नशे मे वाहन चलाने वालों पर होगी कार्यवाही

  • नव वर्ष 2025 के उपलक्ष्य मे पार्टी करने और जश्न मनाने एवं पन्ना जिले में घूमने आने वाले पर्यटको की सुरक्षा की दृष्टि से सभी प्रमुख स्थलों पर पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। इस बावत पन्ना पुलिस द्वारा एडवायजरी जारी की गई है। 

मंदिरों के शहर पन्ना स्थित श्री बल्देव जी का भव्य मंदिर। 

पन्ना। नव वर्ष 2025 के उपलक्ष्य मे 31 दिसम्बर एवं 01 जनवरी को पन्ना जिले में घूमने आने वाले पर्यटकों एवं आमजनों को किसी तरह की असुविधा व परेशानी न हो, इस बावत सभी प्रमुख स्थलों पर पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। जिले में नव वर्ष के जश्न के दौरान शांति व सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस अधीक्षक पन्ना साईं कृष्ण एस. थोटा द्वारा पुलिस बल को और अधिक मुस्तैद रहने एवं शराब के नशे मे वाहन चलाने, ओव्हर स्पीडिंग करने वाले लोगों पर शख्त वाहन चैकिंग कर कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।

पुलिस का उद्देश्य है कि लोगों को सेलिब्रेशन में कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े एवं सुगम यातायात व्यवस्था में नव वर्ष पर पसंदीदा स्थलों पर घूम सकें। पुलिस अधीक्षक पन्ना द्वारा इस हेतु एडवाइजरी जारी की गई है, उन्होंने सभी से अपील की है कि एडवाइजरी का पालन कर पुलिस का सहयोग करें।

पन्ना मंदिरो की नगरी है एवं जिले मे विभिन्न पर्यटक स्थल मौजूद है जहां नववर्ष के अवसर पर अधिक मात्रा में पर्यटक आते हैं, जिनकी सुरक्षा एवं सुगम यातायात हेतु पुलिस बल की तैनात की गई है। ड्रंक & ड्राइव और रश ड्राइविंग पर जगह-जगह वाहन चैकिंग लगाकर नजर रखी जाएगी साथ ही सीसीटीवी कंट्रोल रूम एवं इंटरसेप्टर के माध्यम से ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। सभी थानों एवं चौकी का पुलिस बल सड़कों पर उपस्थित रहकर व्यवस्था संभालेगा, साथ ही चैकिंग भी की जाएगी।


31 दिसंबर की रात्रि में होटलों, ढाबों, मॉडल शॉप, क्लब समेत अन्य मनोरंजन गृहों के बाहर पुलिस दस्ते मुस्तैद रहेंगें, क्षेत्र में मोबाइल पुलिस टीम भ्रमण पर रहेगी, आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर शीघ्र कार्यवाही होगी। ध्वनि प्रदूषक/विस्तारक यंत्रों का प्रयोग ना करें, निर्धारित डेसिबल से अधिक तेज ध्वनि करने पर कार्यवाही की जाएगी। पुलिस ने भीड़-भाड़ वाले स्थानों, बाजारों, हाटों पर विशेष सतर्कता के लिए आम लोगों से अपील की है।

ट्रैफिक कर्मी की 10 टीमे मोटर साइकिलों पर पेट्रोलिंग करेंगी एवं पुलिस नशा करने वालों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच करेगी। शराब पीकर वाहन चलाने वाले लोगों पर कार्यवाही भी की जाएगी। सड़क दुर्घटना रोकने हेतु य़ातायात नियमो जैसे शीटवेल्ट धारण न करने, हेलमेट न लगाने, निर्धारिति क्षमता से अधिक सवारियों को लाने-ले जाने वालों पर भी कार्यवाही की जाएगी

रात्रि में अनावश्यक घूमते पाए जाने वाले लोगों एवं नियमों का उल्लंघन करने वालों पर की जाएगी सख्त से सख्त कार्यवाही। अपराधिक गतिविधियों एवं शिकायत संबंधी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 7049101043 पर, डायल-100 या संबंधित नजदीकी पुलिस थाने में देवें।

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Monday, December 30, 2024

प्राकृतिक मनोरम स्थलों में नये साल का जश्न मनाने की हो रही तैयारी

  • पर्यटन गांव मड़ला में देशी और विदेशी पर्यटकों का हो रहा जमावड़ा 
  • वन्य प्राणी बाहुल्य क्षेत्र में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग प्रतिबंधित

पन्ना टाइगर रिज़र्व के जंगल में वनराज का दीदार करते पर्यटक ( फ़ाइल फोटो ) 

पन्ना। मंदिरों के शहर पन्ना सहित आस-पास स्थित प्राकृतिक मनोरम स्थलों में नये साल का जश्न बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल भी ज्यादातर लोगों ने प्रकृति के सानिध्य में रहकर नये वर्ष का जश्न अनूठे अंदाज में मनाने की तैयारी की है। जिले के पर्यटन गांव मड़ला में तो देशी व विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा हो रहा है। यहां  के पर्यटन विकास निगम के होटल जंगल कैम्प सहित अन्य सभी रिसोर्ट पर्यटकों से फुल हो चुके हैं। कोलाहल से दूर प्रकृति के बीच नए साल का जश्न मनाने की लोगों में बढ़ती अभिरुचि को देखते हुए प्रशासन ने गाइड लाइन जारी की है। 

कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 अंतर्गत आदेश जारी कर पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एवं बफर जोन तथा चिन्हित ईको सेंसेटिव जोन के अतिसंवेदनशील वन्य प्राणी बाहुल्य क्षेत्र तथा इनकी सीमा के समीप तीव्र ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। प्रतिबंधात्मक आदेश 30 दिसम्बर 2024 की रात्रि 8 बजे से 5 जनवरी 2025 की शाम 5 बजे तक प्रभावशील रहेगा, जिसके तहत निर्धारित क्षेत्र में वैवाहिक कार्यक्रम, जुलूस, रैली, धरना प्रदर्शन, खेल प्रतियोगिता, पटाखे, पार्टी, टी.वी., एलसीडी या चलित वाहन आदि में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा। 

इसके अलावा प्रतिबंधित अवधि में उक्त क्षेत्र में सड़क, जंगल एवं नदी के समीप किसी भी प्रकार की अनाधिकृत गतिविधि, उपद्रव, पार्टी, शराब पीकर गाड़ी चलाने, दस से अधिक व्यक्तियों का जमावड़ा पाए जाने या किसी भी प्रकार की गतिविधि, जिससे आमजन एवं सैलानियों को असुविधा अथवा समस्या उत्पन्न हो या वन्य प्राणियों के दैनिक क्रियाकलाप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। साथ ही किसी भी प्रकार से कानून एवं शांति व्यवस्था को बाधित पाए जाने पर संबंधित के विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि नव वर्ष पर वन्य प्राणी क्षेत्र के समीप स्थित होटल, लॉज एवं रिसोर्ट में नव वर्ष का पर्व मनाए जाने तथा इस दौरान कानून व शांति व्यवस्था एवं लोक सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार के व्यवधान की रोकथाम के दृष्टिगत उक्त आदेश जारी किया गया है।

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Friday, December 27, 2024

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर 7 दिवस का राष्ट्रीय शोक


पन्ना। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की उम्र में गुरुवार 26 दिसंबर को निधन हो गया। वह उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। पूर्व पीएम के निधन के संबंध में दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने एक प्रेस रिलीज जारी की, जिसमें बताया गया, ''अत्यंत दुःख के साथ हम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के 92 वर्ष की आयु में निधन की सूचना देते हैं। उनकी आयु-संबंधी चिकित्सा स्थितियों का उपचार किया जा रहा था और 26 दिसंबर 2024 को घर पर ही उन्हें अचानक बेहोशी आ गई। घर पर तुरन्त उन्हें बचाने के उपाय शुरू किए गए। 

उन्हें रात 8:06 बजे नई दिल्ली के एम्स के मेडिकल इमरजेंसी में लाया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और रात 9:51 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पूर्व पीएम के निधन पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर देश के कई बड़े नेताओं और हस्तियों ने दुख व्यक्त किया है। भारत सरकार ने आज (27 दिसंबर) के लिए निर्धारित सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। 

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर 7 दिवस का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। इस दौरान 26 दिसम्बर से 1 जनवरी तक राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। शासकीय रूप से सांस्कृतिक एवं मनोरंजन कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होगा। इसके अलावा शासकीय मंचीय कार्यक्रम, स्वागत, भाषण, अतिथियों के माध्यम से हितलाभ वितरण इत्यादि के समारोह भी नहीं होंगे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार शिविर इत्यादि का आयोजन किया जा सकेगा।

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Thursday, December 26, 2024

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुआ और सहभक्षी वन्य-प्राणियों की गणना

  • 1278 कैमरों की मदद से 800 से अधिक कर्मचारी कर रहे गणना
  • गणना में बाघ, तेंदुआ और पक्षियों के मूवमेंट की होगी जानकारी 


मध्यप्रदेश में उमरिया जिले के बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में फेस-44 की गणना की जा रही है। इसमें टाइगर रिजर्व के 9 परिक्षेत्रों में ट्रैप कैमरे लगाये गये हैं। गणना के बाद आँकड़ों को एकत्रित कर वाइल्ड-लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून भेजा जायेगा। टाइगर रिजर्व में फेस-44 की गणना प्रतिवर्ष की जाती है। 

टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में चिन्हित स्थानों में ट्रैप कैमरे लगाये गये हैं। यह कैमरे 25 दिन के लिये लगाये जाते हैं। इन कैमरों में एकत्रित फोटो का मिलान किया जाता है और इससे नये वन्य-प्राणियों की पहचान की जाती है। गणना में बाघ, तेंदुआ और पक्षियों के मूवमेंट, टेरिटरी की भी जानकारी प्राप्त हो जाती है।

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गणना के लिये 2 ब्लॉक बनाये गये हैं। एक ब्लॉक में 4 परिक्षेत्र और दूसरे ब्लॉक में 5 परिक्षेत्र हैं। दोनों ब्लॉकों के लिये नोडल अधिकारी भी नियुक्त किये गये हैं, जो पूरी गणना और गणना में लगे कर्मचारी का सहयोग करेंगे। ट्रैप कैमरे का डाटा बीटीआर के टाइगर सेल तक पहुँचाया जायेगा।

1200 से अधिक कैमरे 640 स्थानों पर लगाये गये

टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुआ और सहभक्षी वन्य-प्राणियों की गणना के लिये 9 परिक्षेत्रों में 640 स्थानों पर 1200 से अधिक ट्रैप कैमरे लगाये गये हैं। इनकी सुरक्षा के लिये भी स्टॉफ को नियुक्त किया गया है। ट्रैप कैमरों में सेंसर लगा होता है। कैमरों को जंगल में चिन्हित स्थानों पर आमने-सामने लगाया गया है। कैमरों के सामने से वन्य-प्राणी के निकलते ही, कैमरों को मूवमेंट मिलते ही फोटो क्लिक कर लेता है। 

वन्य-प्राणियों की गणना का उद्देश्य वन्य-प्राणियों के संभावित आँकड़े प्राप्त होने से बाघ, तेंदुआ के संरक्षण को लेकर योजना बनाने में सहयोग मिलता है। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 165 से अधिक बाघ और 130 से अधिक तेंदुआ हैं।

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Tuesday, December 24, 2024

25 दिसम्बर और पीटीआर को आबाद करने वाला बाघ टी-3

  •  प्रधानमंत्री इसी दिन कर रहे केन-बेतवा लिंक परियोजना का भूमिपूजन
  •  इस अजब गज़ब संयोग को आखिर किस रूप में याद करेंगे पन्नावासी

बाघ विहीन पन्ना टाइगर रिजर्व को आबाद करने वाला बाघ टी-3  ( फोटो- विक्रम सिंह परिहार )

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। देश की बहुचर्चित व केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। शुरूआती दौर से ही विवादों के घेरे में रही इस परियोजना को लेकर इन दिनों व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद व विधायक सभी परियोजना के गुणगान में जुटे हुए हैं, प्रशासनिक अमला भी गांव-गांव अभियान चलाकर इस परियोजना के लाभों को बता रहा है। लेकिन नेताओं और अधिकारियों के बड़े - बड़े दावों के बावजूद लोग सशंकित हैं। क्योंकि अतीत के अनुभव ( जेके सीमेन्ट प्लांट ) बेहद कडुवे साबित हुए हैं।

 विशेष गौरतलब बात यह है कि इस बहुप्रतीक्षित और विवादित केन-बेतवा लिंक परियोजना का भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी 25 दिसम्बर को खजुराहो में करने जा रहे हैं। यह तिथि 25 दिसम्बर कई मामले में महत्वपूर्ण है। भाजपा के शीर्ष पुरुष व पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी बाजपेयी जी का जहाँ जन्म दिवस है, वहीं पन्ना टाइगर रिज़र्व को आबाद करने वाले बाघ टी-3 की स्मृतियाँ भी इस तिथि से जुडी हुई हैं। इस अजब गज़ब संयोग को पन्नावासी किस रूप में याद रखेंगे, यह आने वाला वक्त बतायेगा।  

भोपाल एअरपोर्ट में भी प्रचार 

जहाँ तक बाघ टी-3 की इस तिथि से कनेक्शन की बात है तो वह कुछ इस प्रकार है। पन्ना के जंगलों से बाघों की उजड़ चुकी दुनिया को फिर से आबाद करने के लिए 7 नवम्बर 2009 को पेंच टाइगर रिजर्व से नर बाघ टी-3 को यहां लाया गया था। इस नर बाघ को बाड़े में कुछ दिन रखने के बाद 13 नवम्बर को खुले जंगल में स्वच्छन्द विचरण के लिए छोंड़ दिया गया। मालुम हो कि बाघ टी-3 को पन्ना लाये जाने से पूर्व कान्हा व बांधवगढ़ से दो बाघिनों को  पन्ना में 3 और 6 मार्च को लाया जाकर टाइगर रिजर्व के जंगल में छोंड़ दिया गया था ताकि नर बाघ के संपर्क में आकर दोनों बाघिन वंशवृद्धि कर सकें। लेकिन नर बाघ की मुलाकात इन बाघिनों से नहीं हो सकी और 27 नवम्बर को पेंच का यह बाघ पन्ना से अपने घर पेंच की तरफ कूच कर गया। पूरे 30 दिनों तक यह बाघ कड़ाके की ठंड में अनवरत यात्रा करते हुए 442 किमी. की दूरी तय कर डाली, जिसे अथक प्रयासों व जन सहयोग से 25 दिसम्बर को पकड़ा जा सका।

पन्ना टाइगर रिजर्व के तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर.श्रीनिवास मूर्ति के मुताबिक टी - 3 पेंच से लाया गया वह नर बाघ है जो एक तरह से पुन: स्थापित बाघों के कुनबा का पिता है। बाघ टी-3 के 30 दिनों की यात्रा का स्मरण करते हुए श्री मूर्ति बताते हैं कि ये दिन हमारे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण व महत्व के थे, क्योंकि इसी नर बाघ पर पन्ना बाघ पुर्नस्थापना योजना का भविष्य टिका हुआ था। इन 30 दिनों में टी-3 ने बाघ आवास व उनके जीवन के बारे में पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम व पूरे देश को इतना ज्ञान दिया जो अन्यत्र संभव नहीं था। यह बाघ पन्ना के दक्षिणी दिशा में छतरपुर, सागर एवं दमोह जिलों में विचरण करते हुए 442 किमी. की यात्रा की। जिस इलाके में बाघ विचरण कर रहा था वह पूरी तरह असुरक्षित था और शिकार हो जाने की प्रबल संभावना थी। लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी और कडाके की ठंड में नदी, नाले व जंगल पार करते हुए उक्त बाघ को सुरक्षित तरीके से पुन: बेहोश करते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व में मुक्त किया।

बाघ टी-3 की इस खोज ने ही पन्ना टाइगर रिजर्व के प्रबंधन को एक टीम का रूप दिया। पन्ना टाइगर रिज़र्व के अधिकारियों-कर्मचारियों की रात-दिन की कड़ी मेहनत, सतत निगरानी और स्थानीय लोगों का सहयोग तब रंग लाया जब बाघिन टी-1 ने पहली बार 16 अप्रैल, 2010 को 4 शावकों को जन्म देकर वन्य-प्राणी जगत में पन्ना टाइगर रिजर्व का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा दिया। पन्ना टाइगर रिज़र्व का वर्ष 2009 से अब तक का सफ़र उपलब्धियों से भरा रहा है। मौजूदा समय यहाँ के जंगलों में 90 से भी अधिक बाघ विचरण कर रहे हैं। इन बाघों को सुरक्षित व अनुकूल रहवास प्रदान करना पार्क प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। बाघों का रहवास जिस तरह से निरंतर सिकुड़ रहा है और जंगलों पर मानव आबादी व विकास योजनाओं की दखलंदाजी बढ़ी है उससे मानव व वन्य जीवों के बीच संघर्ष की स्थितियां निर्मित होने लगी हैं, जो निश्चित ही चिंता की बात है। अभी हाल ही में घटित पन्ना टाइगर रिज़र्व से लगे हिनौता गांव की घटना इस समस्या की गंभीरता को बयां करती है।

 बांध बनने से क्या थम जायेगा केन नदी का अविरल प्रवाह ?



देश की स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त नदियों में सुमार केन नदी पन्ना टाइगर रिज़र्व के मध्य से प्रवाहित होती है। यह नदी वन्य प्राणियों सहित केन किनारे स्थित ग्रामों के लोगों के जीवन का आधार है। केन नदी के किनारे स्थित गांव के लोग बहुचर्चित केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर सशंकित और चिंतित हैं। बीरा गांव के वीरेंद्र सिंह (78 वर्ष) अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहते हैं कि "केन को पानी यदि ऊपर छेंक लेहें तो हम का करबी। हमसे कउनो राय व सहमति नहीं ली गई, जा तो हम लोगन के संगे सरासर अन्याय है"। ग्रामीणों का साफ कहना है कि केन के पानी पर पहला हक हमारा है। हम केन के पानी को रोककर बांध बनाने के पक्षधर नहीं हैं, क्योंकि इस नदी की जलधार पर ही हमारा जीवन निर्भर है।

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले से प्रवाहित होने वाली केन नदी रीठी कटनी के पास से निकलती है और 427 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद उत्तर प्रदेश के बांदा में यमुना नदी से मिल जाती है। ढोढन गांव के निकट जहां पर बांध का निर्माण होना है, वह नदी के उद्गम स्थल से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर है। इस तरह से बांध के निचले क्षेत्र में नदी की लंबाई तकरीबन 227 किलोमीटर बचती है, जहां सैकड़ों की संख्या में पन्ना, छतरपुर व बांदा जिले के गांव स्थित हैं। 44 हजार करोड रुपए से भी अधिक लागत वाली इस परियोजना के मूर्तरूप लेने से बाघों सहित दूसरे वन्य जीवों और गिद्धों का सदियों पुराना रहवास जहाँ नष्ट होगा वहीं लाखों पेड़ों के कटने से पर्यावरण की अपूर्णीय क्षति होगी। केन नदी के किनारे स्थित फरस्वाहा गांव के करण त्रिपाठी का कहना है कि बांध बनने से केन की जलधार यदि रुक गई तो केन किनारे के गांवों में जिंदगी मुश्किल हो जाएगी। केन नदी में यदि पानी नहीं रहा तो इन गांवों के लोग कैसे जिंदा रहेंगे ?

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Friday, December 20, 2024

पन्ना के श्री जुगल किशोर मंदिर को भी प्राप्त हुआ ईट राइट भोग स्थल का प्रमाण पत्र

 


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना शहर में स्थित सुप्रसिद्ध श्री जुगल किशोर मंदिर को ईट राइट भोग स्थल का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा यह प्रमाण पत्र दिया गया है। 

इसके पहले पन्ना के ही श्री प्राणनाथ मंदिर ट्रस्ट को दो वर्ष की अवधि के लिए 26 नवम्बर 2026 तक ईट राइट भोग स्थल का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया था। अब श्री जुगल किशोर मंदिर को भी एफएसएसएआई संस्था द्वारा दो वर्ष की अवधि के लिए 20 दिसम्बर 2024 से 19 दिसम्बर 2026 तक के लिए यह प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है।

कलेक्टर पन्ना सुरेश कुमार ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के प्रावधानों का पालन करते हुए मंदिर द्वारा भोग निर्माण की प्रक्रिया संचालित करने एवं समस्त खाद्य सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करने पर संस्था द्वारा सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। अब जुगल किशोर मंदिर द्वारा निर्मित किया जाने वाला भोग सुरक्षित भोग की श्रेणी में होगा। 

जिले को ईट राइट चैलेंज प्रतियोगिता के चतुर्थ चरण में दो धार्मिक स्थलों को सुरक्षित भोग प्लेस के रूप में प्रमाणित करने का लक्ष्य दिया गया था। इस क्रम में श्री प्राणनाथ जी मंदिर पन्ना एवं श्री जुगल किशोर मंदिर को ईट राइट भोग प्लेस के रूप में प्रमाणित किया जा चुका है। एफएसएसएआई की मान्यता प्राप्त ऑडिट एजेंसी द्वारा मंदिर में भोग निर्माण की प्रक्रिया एवं अन्य संसाधनों का ऑडिट करने के बाद सर्टिफिकेट प्रदान किया गया है।

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मध्यप्रदेश को प्रकृति से मिला है सभी राज्यों से अधिक वन सम्पदा का वरदान

 

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में खूबसूरत घने जंगल का नजारा। 

।। के. के. जोशी।।

मध्यप्रदेश का वन क्षेत्र देश में सबसे अधिक विस्तृत है। यहां वनों को प्रकृति ने अकूत सम्पदा का वरदान से समृद्ध किया है। प्रदेश में 30.72 प्रतिशत वन क्षेत्र है जो देश के कुल वन क्षेत्र का 12.30 प्रतिशत है। यहां कुल वन क्षेत्र 94 हजार 689 वर्ग किलोमीटर (94 लाख 68 हजार 900 हेक्टेयर) है। वन क्षेत्रों का वैज्ञानिक प्रबंधन और वन संसाधनों का संरक्षण एवं संवर्धन क्षेत्रीय स्तर पर 16 वृत्त, 64 वन मण्डल, 135 उप वन मण्डल, 473 परिक्षेत्र, 871 उप वन परिक्षेत्र और 8 हजार 286 परिसर कार्यरत हैं। प्रदेश में 24 अभयारण्य, 11 नेशनल पार्क और 8 टाइगर रिजर्व हैं, जिसमें कान्हा, पेंच, बाँधवगढ़, पन्ना, सतपुड़ा और संजय डुबरी टाइगर रिजर्व बाघों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित हुए हैं।

मध्यप्रदेश वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम लागू करने वाला सबसे देश का पहला राज्य है। प्रदेश में वर्ष 1973 में वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम लागू किया गया था। प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की संभावित सूची में शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश में सफेद बाघों के संरक्षण के लिये मुकुंदपुर में महाराजा मार्तण्ड सिंह जू देव व्हाइट टाइगर सफारी की स्थापना की गई है, इसे विश्वस्तरीय बनाये जाने के प्रयास जारी हैं। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व बाघ सहित कई वन्य-जीवों की आदर्श आश्रय स्थली और प्रजनन के सर्वाधिक अनुकूल स्थान है। पेंच टाइगर रिजर्व की ‘कॉलर वाली बाघिन’ के नाम से प्रसिद्ध बाघिन को सर्वाधिक 8 प्रसवों में 29 शावकों को जन्म देने के अनूठे विश्व-कीर्तिमान के कारण ‘सुपर-मॉम’ के नाम से भी जाना जाता है। विशेष रूप से कान्हा टाइगर रिजर्व में पाए जाने वाले हार्ड ग्राउण्ड बारहसिंगा को मध्यप्रदेश के राजकीय पशु का दर्जा मिला हुआ है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अथक प्रयासों से कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की पुनर्स्थापना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह प्रधानमंत्री श्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश राज्य को गौरवान्वित किया है। देश में 13 हजार से भी अधिक तेंदुए हैं, जिसमें से 25 प्रतिशत तेंदुए मध्यप्रदेश में हैं। प्रदेश में तेंदुओं की संख्या 3300 से अधिक है। देश में तेंदुओं की आबादी में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि मध्यप्रदेश में यह वृद्धि 80 प्रतिशत है। घड़ियाल, गिद्धों, भेड़ियों, तेंदुओं और भालुओं की संख्या में भी मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। मध्यप्रदेश बाघों का घर होने के साथ ही तेंदुओं, चीतों, गिद्धों और घड़ियालों का भी आँगन है। हाल ही में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़, राजस्थान और उड़ीसा में कुछ बाघों के स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। इस तरह मध्यप्रदेश अन्य राज्यों की जैव-विविधता को सम्पन्न बनाने में भी अपना योगदान दे रहा है।

मध्यप्रदेश में बाघों को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिये महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। हाल ही में प्रदेश के रातापानी अभयारण्य को भी टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया है। उल्लेखनाय है रातापानी हमेशा से बाघों का घर रहा है। रायसेन एवं सीहोर जिले में रातापानी अभयारण्य का कुल 1272 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अधिसूचित है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद कुल क्षेत्रफल में से 763 वर्ग किलोमीटर को कोर क्षेत्र घोषित किया गया है। यह वह क्षेत्र है, जहाँ बाघ बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकेंगे। शेष 507 वर्ग किलोमीटर को बफर क्षेत्र घोषित किया गया है। यह क्षेत्र कोर क्षेत्र के चारों ओर स्थित है। इसका उपयोग कुछ प्रतिबंधों के साथ स्थानीय समुदाय कर सकेंगे। आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। भोपाल के अर्बन फॉरेस्ट की रातापानी से समीपता होने के कारण भोपाल को अब टाइगर राजधानी के रूप में पहचान मिलेगी। रातापानी के टाइगर रिजर्व बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिये रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे।


मानव-वन्य-जीव संघर्ष को कम करने के लिये शासन के प्रयास


मध्यप्रदेश बाघ एवं तेंदुआ स्टेट है। यहाँ 30 प्रतिशत से अधिक बाघ संरक्षित क्षेत्रों के बाहर विचरण कर रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना अधिक हो गयी है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिये वन्यजीव कॉरिडोर एवं अन्य वन क्षेत्रों में रेस्क्यू के लिये 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वॉड और एक राज्यस्तरीय रेस्क्यू स्क्वॉड का गठन किया गया है। वन्यजीवों को मानव-वन्यजीव संघर्ष के लिए संवेदनशील क्षेत्रों से रेस्क्यू कर संरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जायेगा, जिससे वन्यजीवों का प्रबंधन एवं संरक्षण अधिक प्रभावी रूप से हो सकेगा। इन संघर्षों में प्रतिवर्ष औसतन 80 प्रतिशत जनहानि, 15 हजार पशु हानि होती है और 1300 नागरिक घायल होते हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिये शासन ने जनहानि के प्रकरणों में क्षतिपूर्ति राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का निर्णय लिया है। इन प्रकरणों में लोकसेवा गारंटी अधिनियम के तहत 30 दिवस के अंदर क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जाता है।

प्रदेश में बढ़ते हुए हाथियों की संख्या को देखते हुए एक एलीफेंट-टॉस्कफोर्स का गठन किया गया है। हाथी प्रबंधन के लिये योजना तैयार की जा रही है। इसमें एआई तकनीक के उपयोग से स्थानीय समुदायों की सहभागिता को भी प्रबंधन में सम्मिलत किया जा रहा है। हाथी विचरण क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रदेश में मनुष्य के साथ ही सम्पूर्ण जीव-जगत को अपना कुटुम्ब माना जाता है। हम वनों, पहाड़ों और नदियों को पूजा जाता रहा है। पूर्वजों की इस परंपरा को अक्षुण्ण रखने के लिए जैव-विविधता संरक्षण के प्रयासों से आने वाली पीढ़ियों के लिये वन जीवन को सहेजकर रखना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है।

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Tuesday, December 17, 2024

इसे बहुत से लोग नहीं पहचानते ?



  ।। बाबूलाल दाहिया ।।

इसे अब शहर वाले तो दूर गाँव वाले लोग भी नहीं जानते। क्योंकि नई पीढ़ी का नाता अपने आस पास के पेड़ पौधों वनस्पतियों से छूटता सा जा रहा है। यही कारण है कि यदि शहर के किसी लड़के से कोई पेड़ों के नाम पूछे तो वह आम, जामुन, खिरनी, अमरूद,नीबू , आंवला, बेर, नीम, इमली, बरगद, पीपल आदि 10-12 पेड़ों से अधिक नहीं बता पाते। इसी तरह अगर गाँव के लोगों से पूछें तो वह भी 25-30 के बाद हिच्च बोल जायेंगे। किन्तु यदि उसी गाँव के बड़े बूढ़ों से पूछा जाय तो सैकड़ों पेड़ों और उनके फूल फलों तक की आकृति आज भी उनके ह्रदय में बनी हुई होती है।

चित्र में दिख रहा यह फल मरोड़ फल के पौधे का है, जिसे बघेली में (ऐंठी) तथा इसके पेड़ को (अटइन ) कहा जाता है। इसका पौधा झाड़ी नुमा 5-6 फीट का होता है और पेड़ के आस-पास 1 इंच मोटी जमीन से बहुत सारी शाखाएँ निकलती हैं। इसके फल में निकलने वाले बीज का जहाँ पहले औषधीय उपयोग था, वहीं इसके छाल का उपयोग बन्धन के रूप में होता है। प्राचीन समय में घर के छप्पर और बाड़ वगैरह में इसी का उपयोग होता था। लेकिन अब तो नई पीढ़ी अनेक पेड़ों की उपयोगिता और बाप पुरखों के लिए उसके अबदान को पूरी तरह भुला चुकी है। यही कारण है कि कारपोरेट घराने बगैर रोंक टोंक अपनी इकाई लगाने के लिए जंगलों को साफ करते रहते हैं और वहां के लोग हाथ में हाथ रखे बैठे रहते हैं। 

मुझे ऐसा लगता है कि हर स्कूलों में एक बीस- पचीस मीटर लम्बा चौड़ा ऐसा हर्बल गार्डन होना चाहिए, जहां 40 -50 तरह के मेडिसनल प्लांट लगे हों जिनकी जानकारी छात्रों को दी जाय। क्योंकि स्कूल का अपने क्षेत्र में एक बहुत बड़ा नेटवर्क होता है, जहां हर घर के छात्र पढ़ने जाते हैं।

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पन्ना की उथली खदान में किसान को मिला 17.11 कैरेट वजन का हीरा

  • कृष्णा कल्याणपुर की पटी हीरा खदान में प्रकाश कुशवाहा को मिला यह हीरा 
  • सात दिन पूर्व किस्मत अजमाने अपने 5 अन्य साथियों के साथ लगाई थी खदान 

रानीबाग पन्ना निवासी किसान प्रकाश कुशवाहा हीरा दिखाते हुए। 

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की रत्नगर्भा धरती ने आज एक गरीब किसान को फिर मालामाल कर दिया है। हीरा की खदानों के लिए प्रसिद्ध पन्ना जिले की उथली खदान से इस किसान को 17 कैरेट 11 सेन्ट वजन का कीमती हीरा मिला है। यह हीरा पन्ना शहर के रानीबाग निवासी प्रकाश कुशवाहा  को कृष्णा कल्याणपुर की पटी हीरा खदान में मिला है। खदान से निकले इस हीरा को किसान ने आज ही हीरा कार्यालय में जमा करा दिया है। 

हीरा कार्यालय पन्ना के हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि रानीबाग पन्ना निवासी प्रकाश कुशवाहा को 17.11 कैरेट वजन का हीरा मिला है, जो जेम क्वालिटी का है। हीरा पारखी ने बताया कि जमा हुए इस हीरे को आगामी नीलामी में बिक्री के लिए रखा जायेगा। बिक्री से प्राप्त राशि में से शासन की रायल्टी काटने के बाद शेष राशि हीरा धारक को प्रदान की जाएगी। हीरे की अनुमानित कीमत पूंछे जाने पर हीरा पारखी ने बताया कि अभी उसकी कीमत नहीं बताई जा सकती। जानकर इस हीरे की अनुमानित कीमत 30 से 35 लाख रुपये आंक रहे हैं।

 हीरा धारक किसान प्रकाश कुशवाहा ने बताया कि विगत 7 दिन पूर्व उसने अपने पांच अन्य साथियों के साथ कृष्णा कल्याणपुर स्थित पटी हीरा खदान क्षेत्र में अपनी किस्मत अजमाने के लिए खदान शुरू की थी। अपनी ख़ुशी का इजहार करते हुए इस युवा किसान ने कहा कि सात दिन के भीतर ही उन्हें यह हीरा मिल गया। जिसे हमने नियमानुसार कलेक्ट्रेट स्थित हीरा कार्यालय में आकर जमा कर दिया है। इस हीरे की बिक्री से जो भी पैसा मिलेगा, उससे कोई नया धंधा शुरू करेंगे।   

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Monday, December 16, 2024

पन्ना टाइगर रिजर्व में हथिनी अनंती ने दिया मादा बच्चे को जन्म

  • नन्हे मेहमान के आने से टाइगर रिजर्व में खुशी का माहौल 
  • बच्चों सहित अब यहाँ हाथियों का कुनबा बढ़कर 20 हुआ 

पन्ना टाइगर रिजर्व की 14 वर्षीय हथिनी अनंती अपने नन्हे शिशु के साथ। 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। बाघों के लिए प्रसिद्ध मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में 14 वर्षीय हथिनी अनंती ने सोमवार को आज दोपहर एक स्वस्थ मादा बच्चे को जन्म दिया है। यहाँ हाथियों के कुनबे में एक नये और नन्हे मेहमान के आ जाने से खुशी का माहौल है। हथिनी अनंती का यह पहला बच्चा है, इस नन्हे मेहमान के आ जाने से पन्ना टाइगर रिजर्व में हाथियों का कुनबा बढ़कर 20 हो गया है। हांथियों के इस कुनबे में दुनिया की सबसे उम्रदराज हथिनी वत्सला भी शामिल है, जो पन्ना टाइगर रिज़र्व के लिये किसी धरोहर से कम नहीं है। 

पन्ना टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक अंजना सुचिता तिर्की ने जानकारी देते हुए आज बताया कि हथनी अनंती ने 16 दिसम्बर को दोपहर 2 बजे हिनौता हाथी कैम्प में मादा बच्चे को जन्म दिया है। नवजात शिशु तथा हथनी दोनों पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं। आपने बताया कि पन्ना टाइगर रिज़र्व की मादा हथिनी अनंती के गर्भवती होने पर विगत कुछ महीनों से उससे काम नहीं लिया जा रहा था। मौजूदा समय पन्ना टाइगर रिज़र्व में नन्हे मेहमानों सहित हांथियों के कुनबे में 5 नर व 15 मादा हांथी हैं। प्रसव के उपरांत हथिनी व बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण पन्ना टाइगर रिज़र्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता द्वारा किया गया है।  बताया जा रहा है कि मादा शिशु अपनी मां का दूध पीने के साथ-साथ अठखेलियां भी करने लगी है। 

वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. गुप्ता ने बताया कि हथिनी अनंती 14 वर्ष की है तथा उसने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया है। आपने बताया कि वर्ष 2024 में पन्ना टाइगर रिज़र्व के हाथियों का कुनबा बढ़कर 20 हो गया है। इस साल पन्ना टाइगर रिज़र्व में चार हांथी के बच्चों का जन्म हुआ है, जिनमें एक नर व तीन मादा बच्चे हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि हथिनी व उसके नन्हे शिशु की समुचित देखरेख तथा विशेष भोजन की व्यवस्था की जा रही है। हथिनी को दलिया, गुड, गन्ना तथा शुद्ध घी से निर्मित लड्डू खिलाये जा रहे हैं ताकि नन्हे शिशु को पर्याप्त दूध मिल सके। हथनी व उसके शिशु की देखरेख व निगरानी के लिए स्टाफ की तैनाती की गई है। गौरतलब है कि पन्ना टाईगर रिजर्व में वनराज व गजराज दोनों के ही कुनबे में वृद्धि हो रही है, जो निश्चित ही प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक शुभ संकेत है।

वीडियो : अपनी मां के साथ नन्हा शिशु अठखेलियां करते हुए 



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