Sunday, October 11, 2026

पीपल का पेड़ : एक जीता-जागता चमत्कार

 

खजरी-कुड़ार गांव में स्थित पीपल के विशालकाय पेड़ का अद्भुत द्रश्य। 

।। अरुण सिंह।।

पेड़-पौधों की दुनिया में पीपल के वृक्ष की अपनी एक अलग ही शान है। भारत में हर कहीं शहर हो या गांव पीपल के विशालकाय वृक्ष नजर आ जाते हैं, जो सहज ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कुछ माह पूर्व फील्ड रिपोर्टिंग के लिए मेरा एक आदिवासी बहुल गांव खजरी-कुडार जाना हुआ। यह गांव मध्य प्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर स्थित है। गांव के चारो तरफ जंगल है, जाहिर है कि यहां के आदिवासियों का जीवन काफी हद तक जंगल पर ही निर्भर है।

खजरी-कुड़ार गांव के भीतर जाने पर रास्ते में एक विशाल पीपल का पेड़ मिला। यह इतना विशाल और असाधारण नजर आ रहा था कि मैं वहां ठिठक  गया। पेड़ की मोटी और लम्बी शाखाएं दूर-दूर तक फैली हुई थीं तथा इस पेड़ की ऊंचाई भी सामान्य पेड़ों से काफी अधिक थी। गर्मी और धूप में बाइक से जब मैं इस गांव में पेड़ के पास पहुंचा, तो उसकी घनी और शीतल छाँव में जो शांति और सुकून मिला, वह अकथनीय है। प्यारी और सुकूनभरी इस अनुभूति को और घनीभूत करने की मंशा से वृक्ष के नीचे बने विशाल चबूतरे में चुपचाप बैठ गया।

दोपहर का वक्त था, इसलिए वृक्ष की छांव में गांव के अनेकों लोग बैठे हुए थे और छोटे बच्चे खेल रहे थे। थोड़ी देर विश्राम करने के बाद इस पेड़ के बारे में मेरे मन में उत्सुकता जगी और मैं ग्रामीणों से बातचीत करने लगा। चबूतरे में विश्राम कर रहे गांव के बुजुर्गों ने बताया कि इस पेड़ को हमने बचपन से ही इसी तरह देखा है। इसकी उम्र कितनी होगी बता पाना कठिन है। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी के दिनों में दोपहर का हमारा वक्त इसी पेड़ के नीचे गुजरता है, यहां गर्मी का एहसास बिल्कुल नहीं होता। यह पेड़ हम लोगों के लिए किसी वरदान से काम नहीं, देव तुल्य है। इसके नीचे गांव के लोग तो विश्राम करते ही हैं, सैकड़ों की संख्या में पक्षी भी इस पेड़ पर आश्रय पाते हैं। पीपल के इस पेड़ की अपनी एक अलग ही दुनिया है, जो हर किसी को शांति और सुकून मुफ्त में ही प्रदान करती है।


इसकी घनी छांव के नीचे बैठकर एक गहन प्रतीति यह हुई कि पीपल का पेड़ एक जीता-जागता चमत्कार है। पर्यावरण की दृष्टि से भी इस पेड़ की महत्ता कहीं ज्यादा है, क्योंकि यह अन्य दूसरे पेड़ों के मुकाबले कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा अवशोषित करता है। इस विशालकाय वृक्ष के बीज राई के दाने से भी छोटे होते हैं। छोटे से बीज में इतने विशाल वृक्ष के प्रकट होने की संभावना छिपी रहती है। यह बात मन को विस्मय विमुग्ध कर देती है कि आखिर यह सब कैसे संभव होता है।

इससे बड़ा चमत्कार भला और क्या हो सकता है। पीपल के पत्ते भी अत्यधिक सुंदर, कोमल और चंचल होते हैं जो हर समय सक्रिय रहते हैं। इस पेड़ के फूल गुप्त रहते हैं, इसलिए इसे "गुह्यपुष्पक" भी कहा जाता है। हिंदुओं की मान्यताएं पीपल के प्रति बहुत ही पवित्र हैं, यही वजह है कि हिंदू न सिर्फ इस वृक्ष की पूजा करते हैं बल्कि इसे देवतुल्य समझते हैं। बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध को इसी वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, इसलिए पीपल को "बोधिवृक्ष" भी कहा जाता है।

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