Friday, May 16, 2025

पन्ना टाइगर रिजर्व में मादा तेंदुआ शावक की मौत

मृत मादा तेंदुआ शावक जिसका शव परिक्षेत्र पन्ना बफर की झिन्ना बीट में मिला है। 

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में परिक्षेत्र पन्ना बफर की झिन्ना बीट के कक्ष क्रमांक पी 282-283 की सीमा पर वन मार्ग में एक मादा तेंदुआ शावक का शव मिला है। मादा तेंदुआ शावक की आयु लगभग 4 माह बताई जा रही है। चिकित्स्कों द्वारा ऐसी आशंका जताई गई है कि मादा तेंदुआ शावक की मौत किसी अज्ञात बीमारी के कारण हुई है। 

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व कार्यालय से घटना के पांचवे दिन आज शुक्रवार को मिली जानकारी के मुताबिक विगत 12 मई को मृत तेंदुआ शावक का शव ग्रामीणों द्वारा देखा गया था, जिसकी सूचना ग्रामीणों ने पार्क प्रबंधन को दी गई थी। सूचना पाकर परिक्षेत्र अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा पूरे क्षेत्र की सर्चिंग कराई गई। क्षेत्रीय वन मंडल सतना के श्वान दल के द्वारा भी मौके की सर्चिंग की गई।

सर्चिंग उपरांत क्षेत्र संचालक एवं अन्य अमले की उपस्थिति में 13 मई को वन्य प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव कुमार गुप्ता एवं अजयगढ़ के पशु चिकित्सक डॉक्टर मोतीलाल प्रजापति के द्वारा मादा तेंदुए शावक का शव परीक्षण किया जाकर समस्त अंगों को जलाकर विनष्टीकरण किया गया। प्रथम दृष्टया चिकित्सकों का मानना है कि तेंदुए शावक की मृत्यु किसी बीमारी से होना प्रतीत हो रही है। शावक के अंगों के सैंपल जांच हेतु शोध संस्थान में भेज दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत ही तेंदुआ शावक के मौत की असल वजह का खुलासा हो सकेगा।

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Wednesday, May 14, 2025

अमलतास के अप्रतिम सौंदर्य को देख मंत्रमुग्ध हो रहे लोग

 

न्यायलय परिसर पन्ना में लगे अमलतास के पेड़ का मनमोहक द्रश्य।  

पन्ना। गर्मियों के इस मौसम में अमलतास के पेड़ों का सौंदर्य देखते ही बनता है। सुनहरे फूलों से लदे इसके पेड़ को देखकर मन जहाँ प्रफुल्लित हो जाता है, वहीं यह आँखों को भी सुकून देता है। सुनहरे फूलों की मालाओं से आच्छादित अमलतास के पेड़ पन्ना के जंगलों में खूब नजर आते हैं। पन्ना शहर से लगे चोपड़ा मंदिर मार्ग व बाईपास मार्ग पर भी अमलतास के फूलों से लदे कई पेड़ हैं, जो इन दिनों सुबह की सैर करने वाले लोगों व राहगीरों को सहज ही अपनी और आकर्षित कर रहे हैं। न्यायलय परिसर में लगे अमलतास के पेड़ों का अप्रतिम सौंदर्य ऐसा है कि लोग ठिठककर उन्हें निहारते हैं और प्रकृति के इस रूप से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। 

अमलतास (वैज्ञानिक नाम: Cassia fistula) को "गोल्डन शॉवर ट्री" के नाम से भी जाना जाता है। इसकी सुनहरी फूलों की माला जैसी लटकती शाखाएँ इसे अत्यधिक आकर्षक बनाती हैं। यह भारत का एक पारंपरिक और औषधीय पेड़ है, जो अपनी खूबसूरती और उपयोगिता के लिए जाना जाता है। भारत में इसके वृक्ष प्राय: सब प्रदेशों में मिलते हैं। गर्मी (अप्रैल, मई) में पूरा पेड़ पीले फूलों के लंबे लंबे गुच्छों से भर जाता है। ऐसा माना जाता है कि फूल खिलने के बाद 45 दिन में बारिश होती हैं। इस कारण इसे गोल्डन शॉवर ट्री और इंडियन रेन इंडिकेटर ट्री भी कहा जाता है।

पन्ना शहर से लगे चोपड़ा मंदिर मार्ग पर जंगल में लगा अमलतास का पेड़।  

आयुर्वेद में बताया गया है कि इस वृक्ष के सब भाग औषधि के काम में आते हैं। कहा गया है, इसके पत्ते मल को ढीला और कफ को दूर करते हैं। फूल कफ और पित्त को नष्ट करते हैं। फली और उसमें का गूदा पित्तनिवारक, कफनाशक, विरेचक तथा वातनाशक है। फली के गूदे का आमाशय के ऊपर मृदु प्रभाव ही होता है, इसलिए दुर्बल मनुष्यों तथा गर्भवती स्त्रियों को भी विरेचक औषधि के रूप में यह दिया जा सकता है। 

अमलतास के फल के गूदे  का उपयोग अत्यंत लाभकारी बताया गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो जंगलों में खुद-ब-खुद उगता है, लेकिन यह पेड़ औषधीय गुणों का भंडार है। यह सिर्फ एक आम पेड़ नहीं, बल्कि गठिया और पाइल्स जैसी तकलीफदेह बीमारियों के लिए किसी जादुई औषधि से कम नहीं है। 

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Thursday, May 8, 2025

प्रदेश की मेरिट सूची में आए पन्ना जिले के 8 मेधावी छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान

  • मेहनत और साहस सफलता के मूल मंत्र : कलेक्टर
  • छात्र-छात्राओं और अभिभावको को दी शुभकामनाएं



पन्ना। माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा आयोजित हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की परीक्षा में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले पन्ना जिले के 8 मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान गुरूवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर सुरेश कुमार द्वारा किया गया। 

मेधावी छात्र सम्मान कार्यक्रम में हाई स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा 2025 में प्रदेश में सातवां स्थान प्राप्त करने पर सरस्वती उ.मा. विद्यालय देवेन्द्रनगर की छात्रा प्रिया पटेल, नौवां स्थान प्राप्त करने पर रैनबो पब्लिक स्कूल की छात्रा ओशी जैन एवं शासकीय मॉडल उ.मा. विद्यालय अजयगढ़ के छात्र महेन्द्र यादव, दसवां स्थान प्राप्त करने पर बीपी मेमोरियल उ.मा. विद्यालय शाहनगर के छात्र सौरभ कुशवाहा एवं सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर के छात्र राज सिंह राजपूत का सम्मान किया गया। 

इसी तरह हायर सेकेण्डरी परीक्षा में कला संकाय के शासकीय मॉडल उ.मा. विद्यालय पन्ना के छात्र रंजीत कुमार पटेल को चौथा स्थान प्राप्त करने पर, शासकीय मॉडल उ.मा. विद्यालय अजयगढ़ की छात्रा चंचल विश्वकर्मा को नौवां स्थान प्राप्त करने पर तथा शासकीय मॉडल उ.मा. विद्यालय पन्ना के छात्र प्रकाश कुशवाहा को प्रदेश की प्रावीण्य सूची में दसवां स्थान प्राप्त करने पर कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया। कलेक्टर ने बच्चों के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचाई।

कलेक्टर ने प्रावीण्य सूची में आने वाले छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावको, शिक्षकों को बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बच्चों से परीक्षा की तैयारी एवं अनुभवों को साझा करते हुए उनके भविष्य के लक्ष्य की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मेहनत और साहस के दो मूल मंत्रो के साथ आगे बढ़ें। कलेक्टर ने मेधावी छात्रों के अभिभावकों से भी उनके त्याग और सहयोग की जानकारी लेकर इच्छा के अनुसार तय किए गए लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ने में मदद करने की बात कही। कलेक्टर ने बच्चों से कहा कि सफलता पर रुकें नहीं, बल्कि सफलता को निरंतर बनाए रखने के लिए मेहनती प्रयास जारी रखें। अपने माता-पिता और गुरुजनों का सदैव आदर करें। 

जिला कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थी एवं शिक्षकों के सार्थक प्रयास से इस वर्ष के परीक्षा परिणाम में उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होंने सभी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं तथा शैक्षिक गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार के लिए आवश्यक प्रयास की बात कही। जिला पंचायत उपाध्यक्ष संतोष सिंह यादव ने भी सम्मान कार्यक्रम के अवसर पर छात्र-छात्राओं को बेहतर भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लगन और परिश्रम से आगे की पढ़ाई कर सफलता की निरंतरता बनाए रखें। 

जिला शिक्षा अधिकारी रविप्रकाश खरे ने परीक्षा परिणाम में सुधार के लिए परीक्षा पूर्व किए गए विभागीय स्तर पर समन्वित प्रयासों की जानकारी से अवगत कराया। साथ ही जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ द्वारा समय समय पर प्रदान किए गए मार्गदर्शन के प्रति आभार भी जताया। इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, सहायक संचालक शिक्षा अमित जैन, एडीपीसी भारती श्रीवास्तव, परियोजना अधिकारी संजय सिंह परिहार सहित संबंधित विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षक एवं अभिभावक भी उपस्थित थे।

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Friday, May 2, 2025

सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन और सामुदायिक भवन का होगा निर्माण : श्री पटेल

  • अधिकारों के प्रति सजग रहकर कर्त्तव्यों का बेहतर निर्वहन करें सरपंच  
  •  पंच सरपंच सम्मेलन में शामिल हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री

पंच-सरपंच सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में आयोजित पंच-सरपंच सम्मेलन एवं जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नदी पूजन कार्यक्रम को पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने आज संबोधित किया। उन्होंने कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था को प्रभावी एवं उद्देश्यपरक बनाने की दिशा में जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें। ग्राम पंचायतें स्वयं विकास की कार्ययोजना तैयार कर तरक्की की दिशा में आगे बढ़ें।  

पन्ना विकासखंड की ग्राम पंचायत इटवांखास के बंदरखोह में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों में स्वयं का पंचायत भवन और वैवाहिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों के लिए सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही पांच हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों में 2 सामुदायिक भवन की स्वीकृति भी मिलेगी। कैबिनेट मंत्री श्री पटेल ने कहा कि सभी सरपंच अपने अधिकारों के साथ कर्त्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहकर जिम्मेदार बनें। पंचायत के सभी विकास कार्यों को समय पर पूर्ण कराएं। ग्राम विकास की बेहतर कार्ययोजना तैयार कर क्रियान्वयन कराएं। मंत्री ने जानकारी दी कि नवीन प्रावधान अनुसार अब तीन मंजिला पंचायत भवनों का निर्माण भी कराया जा सकेगा। सरपंचों को 25 लाख रुपए तक के वित्तीय अधिकार प्रदान किए गए हैं। भविष्य में जिला और जनपद पंचायत के भवन भी आगामी 50 वर्ष की आवश्यकताओं के मुताबिक तैयार किए जाएंगे। यहां रिकार्ड रूम का भी बेहतर तरीके से संधारण हो सकेगा। 

वर्ष 2026 तक आवास प्लस योजना में सर्वे के माध्यम से आवास से वंचित सभी ग्रामीण परिवारों को स्वयं के पक्के आवास की सुविधा भी मिलेगी। उन्होंने सभी सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों से विकास कार्यों के लिए तेजी के साथ काम करने की आदत विकसित करने की सलाह भी दी। साथ ही पंचायत को आवंटित राशि का सदुपयोग करने की नसीहत देते हुए आगामी एक अप्रैल 2026 से 16वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि से विकास कार्यों के लिए कार्ययोजना बनाने के लिए भी कहा।

मंत्री ने संबल योजना को लाभकारी बताते हुए कहा कि इस माह के अंत तक गत वित्तीय वर्ष के समस्त प्रकरणों में राशि का भुगतान हो जाएगा। आगामी दिनों में 15 से 20 दिवस की तय समय सीमा में हितग्राहियों को संबल योजना का लाभ मिल सकेगा। इस अवसर पर सरपंचों के अधिकार हनन नहीं होने का भरोसा भी दिया। पंचायत भवनों में क्रमशः ई-ऑफिस व्यवस्था के क्रियान्वयन की बात भी कही। उन्होंने भ्रमण कर ग्रामीण क्षेत्र की प्राथमिकता वाले विकास कार्यों की रिपोर्ट बनाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि पंचायत स्तर पर आगामी 30 मई तक शासकीय जमीन की फेंसिंग व सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ही पौधरोपण की स्वीकृति मिलेगी। कार्यक्रम में उन्होंने समस्त जनप्रतिनिधियों से जनकल्याण और विकास कार्यों के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।

इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक पन्ना बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि पन्ना जिले में नदियों के उद्गम स्थल पर पूजन और प्राचीन जल स्रोतों के जीर्णोद्धार कार्य का वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजन का यह पहला शुभ अवसर है। उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा पवित्र नर्मदा नदी की पद यात्रा के माध्यम से 2700 किलोमीटर की परिक्रमा को प्रेरणास्पद बताया और उनके कुशल नेतृत्व, प्रशासनिक क्षमता, दूरदृष्टि सोच, स्पष्टवादी विचार और व्यक्तित्व की सराहना की। उन्होंने पन्ना नगर को पानी उपलब्ध कराने और प्रमाणी संप्रदाय के लिए ऐतिहासिक महत्व की किलकिला नदी के पुनरुद्धार के संबंध में जरूरी सहयोग की अपेक्षा की। साथ ही इसके माध्यम से छोटे तालाबों में जल संचयन के बारे में अवगत करते हुए राम वन पथ गमन स्थल के बीच बाघिन नदी के उद्गम स्थल बंदरखोह तक पहुंच मार्ग के निर्माण की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध स्थल वृहस्पति कुंड की महत्ता के बारे में भी अवगत कराया तथा कहा कि विकासपरक सोच व प्रतिबद्धता से अब क्षेत्र के विकास का नया आयाम स्थापित होगा। 

गुनौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा ने प्रदेशव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान में जनता के सहयोग से प्राचीन जल स्रोतों के पुनर्जीवन कार्य को सराहनीय बताया और इसके लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों व जागरूकता कार्यक्रमों इत्यादि के बारे में जानकारी दी। जिला पंचायत अध्यक्ष मीना राजे द्वारा भी कार्यक्रम को संबोधित किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष संतोष सिंह यादव, नगर पालिका अध्यक्ष मीना पाण्डेय, जिला सहकारी प्रेस के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र गर्ग एवं अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर सुरेश कुमार, पुलिस अधीक्षक साईं कृष्ण एस थोटा, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, सीएमओ शशिकपूर गढ़पाले, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग सतीश शर्मा भी उपस्थित रहे। ग्राम पंचायत इटवांखास की सरपंच उर्मिला पटेल द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

किलकिला नदी के उद्गम स्थल पर किया पूजन



पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने पन्ना शहर के निकट स्थित किलकिला नदी के उद्गम स्थल पहुंचकर पूजन किया। जल गंगा संवर्धन आभियान अंतर्गत ग्राम पंचायत जनवार के छापर गांव में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने किलकिला नदी के विकास और पुनरुद्धार कार्यों की जानकारी भी ली। साथ ही उपस्थित ग्रामीणजनों की समस्याएं सुनकर तत्काल निराकरण के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस दौरान उन्होंने जल कलश में नदी का जल अर्पण कर जल संरक्षण का संकल्प भी दिलाया। मंत्री श्री पटेल के आगमन पर महिलाओं ने कलश यात्रा निकलकर जल संरक्षण का संदेश दिया। जनप्रतिनिधि और अधिकारियों द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री का आत्मीय स्वागत किया गया।

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Wednesday, April 30, 2025

पन्ना में अभिनव पहल, पेड़ों पर लगाया क्यूआर कोड


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति लोगों में जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय पन्ना के प्राचार्य अमित दहिया के मार्गदर्शन में स्कूल के इको क्लब ने एक नवाचारी पहल शुरू की है। इस पहल के अंतर्गत विद्यालय परिसर में लगे पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाए गए, जो छात्रों और आगंतुकों को उन पेड़ों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। 

इन पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाने का मकसद विद्यार्थियों को पेड़ों के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करना तथा तकनीक का उपयोग करके पर्यावरण शिक्षा को रोचक और सुलभ बनाना है। इस कोड के माध्यम से विद्यार्थी पेड़ों की पहचान तथा उनके औषधीय गुण, पारिस्थितिक महत्व और संरक्षण के बारे में जागरूक होंगे।

विद्यालय में लगे प्रत्येक पेड़ पर विद्यार्थियों द्वारा एक यूनिक क्यूआर कोड लगाया गया, जिसे स्कैन करने पर उस पेड़ का नाम, वैज्ञानिक नाम, उपयोग, और अन्य रोचक तथ्य दिखाई देते हैं। इस प्रोजेक्ट में विद्यालय के विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस अवसर पर प्राचार्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल न केवल छात्रों के लिए शैक्षिक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है। 

इको क्लब इस तरह की रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने में सफल हो रहा है। इस पहल में विद्यालय के जीवविज्ञान के शिक्षक क्षितिज चौधरी का योगदान सराहनीय रहा।

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Sunday, April 27, 2025

प्रकृति का एक विलक्षण मौसम विज्ञानी पक्षी टिटिहरी !

  • टिटिहरी के अंडों का रंग मटमैला हू बहू बालू की तरह ही होता है। अगर वह कहीं नाले के बीच में अंडा रखती हैं, तो उसका अर्थ यह है कि "जब तक उनके अंडों से बच्चे निकल बड़े होकर उड़ न जायेंगे तब तक तेज पानी की बारिश न होगी"।                  


।। बाबूलाल दाहिया ।।

मनुष्य का अपना मौलिक ज्ञान कुछ नही है। उसने अनेक तरह के जंतुओं से ही सब कुछ सीखा है। चींटियों, मधु मक्खियों से यदि उसने संचय करना सीखा तो भेड़िया से समूह बनाकर आक्रमण करना। कतार में चलना शायद उसने भोर में उड़कर हजारों किलो मीटर की यात्रा करने वाले जल पक्षियों से सीखा होगा। इसी तरह उसका पहिए का गुरु गोबरौरा कीट रहा होगा।

एक बार हमें नदियों के किनारे झोपड़ी बनाकर रहने वाले समुदाय के लोगों ने बताया था कि नदिया के तीर में उन्हें किस वर्ष कहाँ तक झोपड़ा बनाकर रहना चाहिए कि पानी उनके झोपड़े तक न चढ़े ? यह ज्ञान उन्हें बया नामक पक्षी के घोंसलों से हो जाता है। उनके घोसला के हिसाब से ही वे लोग अपने आवास बनाते हैं ?

लेकिन वही बया पक्षी यदि पेड़ के टहनी के घने पत्तों के नीचे घोंसला बनाता है तो उसका अर्थ होता है कि इस वर्ष अधिक बारिश होगी। और अगर वह पेड़ की टहनी के बिल्कुल किनारे बनाता है तो उसका अर्थ है कि इस साल बारिश की कमी रहेगी। इसी तरह से बहुत कुछ जानकारी टिटिहरी नामक पक्षी से भी मिलती है। टिटिहरी ऐसा पक्षी है, जो उड़कर जमीन में ही बैठता है पेड़ों में बैठने लायक उसके पंजे नही होते। यही कारण है कि जमीन में ही पाल बनाकर अपने अंडे भी देता है। 


प्राचीन समय में जब शिकार में प्रतिबंध नही था और लोग शिकार करने के लिए तीन फीट चौड़ा, ढाई फीट गहरा गड्ढा खोद कर उसमें बंदूक लेकर बैठते थे, तो उन्हें जानवरों के आने की टोह टिटिहरी से ही मिलती थी। क्योंकि अपने अंडों को से रही टिटिहरी जानवरों को आता देख टें टें की आवाज करके चिल्लाने लगती। उससे शिकारी एलर्ट हो जाते कि जानवर आ रहा है। 

कहते हैं टिटिहरी अंडा सेते समय पैर आकाश की ओर कर लेती है और पंख अंडों के ऊपर होते हैं। जमीन में रखे टिटिहरी के अंड़ों को कोई सांप, नेवला, सियार, लोमड़ी आदि न खा सकें अस्तु वह नाले के बीच बालू में रखती है। पर अंडों का रंग मटमैला हूं बहू बालू की तरह ही होता है। अगर वह कहीं नाले के बीच में अंडा रखती हैं तो उसका अर्थ यह है कि "जब तक उनके अंडों से बच्चे निकल बड़े होकर उड़ न जायेंगे  तब तक तेज पानी की बारिश न होगी।"

इन दिनों हमारे टमाटर भिंडी के खेत में दो टिटिहरियों ने अलग-अलग स्थान में अपने अंडे दे रखे हैं। और शाम सुबह जैसे ही वहां घूमने गए तो वह बेचारी भयभीत हो टी-टी बोलने लगती हैं। उन्हें क्या पता कि अपन तो यूं ही जैव विविधता संरक्षक हैं ? इसलिए उनके अंडों, बच्चों को अपन से कोई नुकसान न होगा।

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Tuesday, April 22, 2025

जल संकट : पन्ना जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित

  • जिला मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार ने जारी किया आदेश
  • बिना अनुमति नवीन नलकूप खनन पर प्रतिबंध


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार ने म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 के तहत जनहित में पन्ना जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। जिले के सभी ब्लॉक और नगरीय क्षेत्रों में उक्तादेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील हो गया है। यह आगामी 20 जुलाई तक लागू रहेगा।

जिला मजिस्ट्रेट ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड पन्ना के कार्यपालन यंत्री द्वारा सिंचाई इत्यादि कार्यों में भू-गर्भीय जल का अत्यधिक दोहन होने के कारण पेयजल स्त्रोतों के जल स्तर में कमी आने तथा इससे नलकूपों व अन्य जल स्त्रोतों के जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज होने सहित जिले में पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना संबंधी प्रस्तुत प्रतिवेदन के दृष्टिगत जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की कार्यवाही की है। 

ईई पीएचई द्वारा पेयजल संकट के स्थिति के मद्देनजर एवं सार्वजनिक पेयजल स्त्रोतों की क्षमता प्रभावित होने की संभावना के दृष्टिगत निजी नलकूप खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने के साथ जनहित में पेयजल व अन्य निस्तार समस्याओं को ध्यान में रखकर आम जनता के लिए पेयजल आपूर्ति की उपलब्धता एवं इसका समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए भी जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की अनुशंसा की गई थी।

पन्ना जिले में जल अभावग्रस्त क्षेत्र संबंधी आदेश प्रभावशील होने के फलस्वरूप सभी विकासखण्ड और नगरीय क्षेत्रों के समस्त नदी, नालों, स्टॉप डैम, सार्वजनिक कुओं तथा अन्य जल स्त्रोतों का उपयोग एवं घरेलू प्रयोजन के लिए भी इनका उपयोग सुरक्षित किया गया है। साथ ही जिले में निर्धारित अवधि तक कोई भी व्यक्ति स्वयं अथवा निजी ठेकेदार बगैर एसडीएम की अनुज्ञा के किसी भी प्रयोजन के लिए नवीन नलकूप का खनन नहीं कर सकेगा। 

कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट पन्ना सुरेश कुमार 

शासकीय नलकूप खनन पर यह आदेश लागू नहीं होगा। इसके अलावा बगैर अनुमति के कोई भी व्यक्ति शासकीय भूमि पर स्थित जल स्त्रोतों में पेयजल एवं घरेलू प्रयोजनों को छोड़कर अन्य किसी भी प्रयोजन के लिए नहरों में प्रवाहित जल के अलावा अन्य स्त्रोतों का जल दोहन एवं किन्हीं भी साधनों द्वारा जल का उपयोग नहीं कर सकेगा। 

जिल मजिस्ट्रेट द्वारा नलकूप खनन की अनुज्ञा के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को उनके क्षेत्राधिकार अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है। एसडीएम द्वारा अनुमति के पूर्व आवश्यक जांच और परीक्षण की कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। साथ ही अनुमति के संबंध में संबंधित जनपद पंचायत सीईओ, तहसीलदार, मुख्य नगर पालिका अधिकारी से भी अभिमत प्राप्त करना होगा। एसडीएम सार्वजनिक पेयजल स्त्रोत सूख जाने के कारण तथा वैकल्पिक रूप से दूसरा कोई सार्वजनिक पेयजल स्त्रोत उपलब्ध नहीं होने पर जनहित में निजी पेयजल स्त्रोतों का निर्धारित अवधि के लिए अधिग्रहण करने के साथ आदेश के उल्लंघन पर अधिनियम की धाराओं में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही कर सकेंगे। 

आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के निर्देश समस्त अनुविभागीय मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, थाना प्रभारी, पीएचई के मैदानी अधिकारी-कर्मचारी, नगरीय निकायों के सीएमओ, जनपद पंचायत सीईओ तथा समस्त ग्राम पंचायत सचिवों को दिए गए हैं।

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Sunday, April 20, 2025

पन्ना टाइगर रिजर्व के घायल बाघ पी-243 का हुआ उपचार

  • आपसी संघर्ष में बुरी तरह से हो गया था जख्मी
  • गहरे घाव का ट्रेंकुलाइज करके किया गया इलाज

आपसी संघर्ष में घायल बाघ पी-243 को ट्रेंकुलाइज करके उसका उपचार किया गया, चित्र उसी अवसर का है।  

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व का 10 वर्षीय बाघ पी-243 विगत माह आपसी संघर्ष में बुरी तरह से जख्मी हो गया था, इस बाघ के सिर में गहरा घाव था जो प्राकृतिक रूप से ठीक नहीं हो रहा था। बाघ की दिनोंदिन बिगड़ती हालत को देखते हुए आज सुबह उसे ट्रेंकुलाइज करके घाव का उपचार किया गया है।    

क्षेत्र संचालक कार्यालय मिली जानकारी के मुताबिक पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता परिक्षेत्र में विगत कुछ दिनों से बाघ पी-243 के सिर पर चोट का निशान दिखाई दे रहा था। पिछले दिनों पर्यटकों ने जब इस जख्मी बाघ की तस्वीर ली, तब पता चला कि बाघ के सिर पर गहरा जख्म है। आपसी संघर्ष में घायल हुए इस बाघ की पार्क प्रबंधन द्वारा सतत निगरानी की जा रही थी। परंतु उसके घाव में सुधार न होने के कारण आज रविवार 20 अप्रैल को सुबह हिनौता रेंज अंतर्गत बाघ पी-243 को उप संचालक की उपस्थिति में वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी पन्ना टाइगर रिजर्व डॉ संजीव कुमार गुप्ता द्वारा ट्रेंकुलाइज किया जाकर उसका उपचार किया गया। 


वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि बाघ के सिर में घाव काफी बड़ा व गहरा था। घाव में मैगट भी पड़ गए थे, जिन्हे पूरी तरह से निकाल दिया गया है। उपचार उपरांत बाघ को बड़गड़ी स्थित इन्क्लोजर में रखा गया है तथा उसकी सतत निगरानी की जा रही है। बाघ के उपचार हेतु उसे  ट्रेंकुलाइज करने की कार्रवाई उपसंचालक के निर्देशन में वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी के तकनीकी मार्गदर्शन में संपन्न की गई। इस मौके पर सहायक संचालक पन्ना, परिक्षेत्र हिनौता, गहरी घाट, पन्ना बफर, रेस्क्यू दल,  हाथी महावत एवं अन्य क्षेत्रीय कर्मचारी उपस्थित रहे।

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Thursday, April 17, 2025

पन्ना की इस बाघिन ने आबाद किया चित्रकूट का जंगल

  • बाघिन पी-213(22) नौ वर्ष पूर्व यहाँ के जंगल में दी थी दस्तक
  • कई बार शावकों को दिया जन्म, मौजूदा समय 30-35 टाइगर  

फरवरी 2020 में बाघिन पी-213 (22) को चित्रकूट के जंगल में बेहोश कर रेडियो कॉलर पहनाने की कार्यवाही पूरी करती पन्ना की रेस्क्यू टीम।  ( फाइल फोटो )

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व की बाघिन पी-213(22) ने चित्रकूट के जंगल को बाघों से आबाद कर दिया है। पन्ना की यह बाघिन अपने लिए नए आशियाने की तलाश में 24 नवंबर 2015 को पन्ना कोर क्षेत्र से बाहर निकलकर चित्रकूट के जंगल में दस्तक दी थी। तभी से यह बाघिन वन मंडल सतना के वन परिक्षेत्र मझगवां अंतर्गत सरभंगा के जंगल को अपना ठिकाना बनाए हुए है। यहाँ रहते हुए इस बाघिन ने कई मर्तबे नन्हे शावकों को जन्म दिया, फलस्वरूप यह जंगल बाघों और नन्हे शावकों की चहल कदमी से गुलजार है।

उल्लेखनीय है कि बाघ पुनर्स्थापना योजना की चमत्कारिक सफलता के बाद देश व दुनिया में विख्यात हो चुके पन्ना टाइगर रिज़र्व में जन्मे बाघ बुंदेलखंड सहित विंध्य क्षेत्र के जंगलों को भी आबाद कर रहे हैं। आलम यह है कि चित्रकूट के निकट सरभंगा के जंगल में बाघिन पी-213(22) के बच्चों के भी बच्चे हो गए हैं। बाघ पुनर्स्थापना योजना के दौरान पन्ना टाइगर रिज़र्व में सहायक संचालक रहे एम. पी. ताम्रकार बताते हैं कि सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने वर्ष 2015-16 में अपनी सेवाएं इस बाघिन के ट्रैकिंग में दी हैं। इस दौरान बाघिन के मूवमेंट व गतिविधि पर हम पूरी नजर रखते थे।    

श्री ताम्रकार बताते हैं कि बाघिन पी-213(22) ने अब तक चार मर्तबे शावकों को जन्म दिया है। इस बाघिन के बच्चों के बच्चे भी हो रहे हैं। मौजूदा समय सरभंगा के जंगल में पन्ना की इस बाघिन की चार पीढ़ियां जंगल में स्वच्छंद रूप से विचरण कर रही हैं। बाघों का कुनबा बढ़ने से अब यहाँ अक्सर सड़क मार्ग पर भी राहगीरों को वनराज के दर्शन होने लगे हैं। यही वजह है कि वन्य जीव प्रेमी बाघों से आबाद हो चुके चित्रकूट के इस जंगल को टाइगर रिज़र्व का दर्जा देने की मांग करने लगे हैं।

पन्ना टाइगर रिज़र्व को बाघों से आबाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति बताते हैं कि बाघिन पी-213(22) की कहानी बेहद दिलचस्प और अनूठी है। इस बाघिन ने पन्ना से सरभंगा के जंगल का सफर तय करके वहां पर बाघों का नया कुनबा बसाकर इतिहास रच दिया है। इस बाघिन ने सरभंगा में एक और पन्ना जोड़ दिया है। मालूम हो क़ि पूर्व में पन्ना टाइगर रिज़र्व में अधिकतम 35 बाघ रहा करते थे। लेकिन बाघ पुनर्स्थापना योजना की कामयाबी के बाद पन्ना टाइगर रिज़र्व व आसपास के जंगल में 90 से अधिक बाघ विचरण कर रहे हैं। पन्ना कोर क्षेत्र से बाघ बाहर निकलकर बिन्ध्य व बुन्देलखण्ड क्षेत्र के जंगलों को आबाद कर रहे हैं।   

दिसम्बर 2013 में जन्मी थी यह बाघिन

पन्ना बाघ पुनर्स्थापना योजना की सफलतम रानी कही जाने वाली कान्हा की बाघिन टी-2 ने पी-213 को अक्टूबर 2010 में जन्म दिया था। इस बाघिन ने नर बाघ पी-111 से जोड़ा बनाकर दिसंबर 2013 में चार शावकों को जन्म दिया। जिनमें तीन मादा व एक नर शावक था। इन्हीं तीन मादा शावकों में से एक बाघिन पी- 213 (22) है जिसने चित्रकूट के जंगल को न सिर्फ अपना ठिकाना बनाया अपितु यहां पर कई बार शावकों को जन्म देकर यहां के जंगल को बाघों से आबाद भी किया है। मौजूदा समय इस वन क्षेत्र में बाघिन पी-213(22) सहित कुल 30-35 बाघ  विचरण कर रहे हैं।

सरभंगा मांगे सम्मान, बने टाइगर रिजर्व पहचान

क्या आप जानते हैं ? चित्रकूट की पावन भूमि के निकट, मझगवां सरभंगा का जंगल अब सिर्फ जंगल नहीं, बाघों का जीता-जागता गढ़ बन चुका है। सतना जिले के वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर शर्मा बाघों से आबाद हो चुके इस जंगल को टाइगर रिज़र्व बनाने के लिए मुहिम चला रहे हैं। वे बताते हैं कि यह गर्व की बात है कि सरभंगा में आज 34 बाघों का कुनबा (जिनमें 6 नन्हे शावक भी शामिल हैं) शान से विचरण कर रहा है। पन्ना की बाघिन पी-213(22) यहाँ 18 शावकों को जन्म दे चुकी है। यह अद्भुत क्षेत्र 19,000 हेक्टेयर में फैला प्रकृति का खजाना है। 

सरभंगा के जंगल को टाइगर रिजर्व बनाना क्यों जरूरी है ? इस सम्बन्ध में श्री शर्मा का कहना है कि यह अनूठा और जैव विविधता से समृद्ध वन क्षेत्र सिर्फ बाघों से ही आबाद नहीं है, यहाँ 70 से अधिक तेंदुए, 60 भेड़िये,150 लकड़बग्घे, 50 से अधिक भालू, जंगली कुत्ते, लोमड़ियाँ और बड़ी संख्या में हिरण, नीलगाय व दुर्लभ पक्षी बसते हैं। आपका कहना है कि पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश में सिर्फ 3 बाघों पर रानीपुर को टाइगर रिजर्व बना दिया गया है, जबकि हमारे यहाँ सरभंगा के जंगल में वहां की तुलना में 11 गुना ज़्यादा बाघ हैं। यह मध्य प्रदेश के लिए सुनहरा अवसर है, कि सरभंगा के जंगल को टाइगर रिज़र्व बनाया जाय।  

यह जंगल पन्ना और रानीपुर टाइगर रिजर्व को जोड़ता है, जो वन्यजीवों के सुरक्षित आने-जाने (गलियारे) के लिए ज़रूरी है। केन-बेतवा लिंक से प्रभावित होने वाले पन्ना के बाघों के लिए सरभंगा प्राकृतिक शरणस्थली बन सकता है। टाइगर रिजर्व बनने पर यहाँ पर्यटन बढ़ेगा, हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा फलस्वरूप चित्रकूट क्षेत्र में समृद्धि आएगी। सरभंगा का भविष्य खनन नहीं, संरक्षण और पर्यटन में है। इसलिए आवाज़ उठाइये और समर्थन दीजिये !

यह सिर्फ जंगल बचाने की बात नहीं, यह है -

  •  मध्य प्रदेश के गौरव को विश्व पटल पर स्थापित करने का मौका !
  •  चित्रकूट के विकास को नई उड़ान देने का अवसर !
  •  स्थानीय निवासियों के लिए समृद्धि लाने का संकल्प !
  •  हमारी प्राकृतिक धरोहर को सहेजने का कर्तव्य !
  •  सरभंगा की दहाड़ अब अनसुनी न रहे, इसे वैश्विक पहचान दिलाएं !

 

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Sunday, April 13, 2025

आपसी संघर्ष में पन्ना टाइगर रिजर्व का नर बाघ घायल

  •  10 वर्षीय बाघ पी-243 के सिर पर है गहरा जख्म  
  •  सतत उपचार के बावजूद ठीक नहीं हो पा रहा घाव 

पन्ना टाइगर रिजर्व का 10 वर्षीय नर बाघ पी-243, जो आपसी संघर्ष में घायल हुआ है। 

।। अरुण सिंह ।।   

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व में बाघों की संख्या बढऩे के साथ ही उनके बीच इलाके में आधिपत्य को लेकर आपसी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। बाघों के बीच होने वाली इस टेरिटोरियल फाइट (आपसी संघर्ष) में कई बार बाघ बुरी तरह से जख्मी हो जाते हैं। अभी हाल ही में पन्ना टाइगर रिजर्व का 10 वर्षीय बाघ पी-243 आपसी संघर्ष में बुरी तरह जख्मी हुआ है, इस बाघ के सिर में गहरा घाव है। यह वही प्रसिद्ध नर बाघ है, जिसने चार अनाथ शावकों की परवरिश की थी, जिनकी मां बाघिन पी-213(32) की मौत मई 2021 में हो गई थी। 

पिछले दिनों पर्यटकों ने जब इस जख्मी बाघ की तस्वीर ली, तब पता चला कि वह जख्मी है। सोशल मीडिया में बाघ की वायरल हुई फोटो तथा उठ रहे सवालों की ओर पन्ना टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक अंजना सुचिता तिर्की का ध्यान आकृष्ट कराए जाने पर उन्होंने आज बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र हिनौता अंतर्गत स्वच्छंद रूप से नर बाघ पी-243 उम्र 10 वर्ष विचरण कर रहा है। लगभग तीन माह पूर्व आपसी संघर्ष में बाघ के सिर पर चोट लग जाने के कारण घाव निर्मित हुआ है, जिसका उपचार बाघ विशेषज्ञों की सलाह पर सतत रूप से वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी पन्ना टाइगर रिजर्व के द्वारा किया गया, किंतु उपचार से बहुत अधिक लाभ नहीं हुआ।

क्षेत्र संचालक के मुताबिक ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बाघ के स्कल में फ्रैक्चर है, जिस कारण से घाव ठीक नहीं हो रहा। बाघ विशेषज्ञों के सतत संपर्क में रहते हुए बाघ का उपचार एवं प्रबंधन किया जा रहा है। यहाँ विशेष गौरतलब बात यह है कि नर बाघ पी-243 इसके पूर्व भी वर्ष 2021 में आपसी लड़ाई में घायल हुआ था। उस समय भी इस बाघ के सिर में आँखों के बीचोबीच जख्म हुआ था, जो उपचार से ठीक हो गया था। लेकिन इस बार का जख्म पहले की तुलना में ज्यादा गहरा तो है ही स्कल फ्रैक्चर की आशंका भी जताई जा रही है। यही वजह है की सतत उपचार के बाद भी घाव ठीक नहीं हो पा रहा है।   

खुले जंगल में स्वच्छंद रूप से विचरण करने वाले बाघों के बीच टेरिटोरियल फाइट (आपसी संघर्ष) होने व अन्य प्राकृतिक कारणों से जख्मी होने पर क्या उनका उपचार दवाइयों से होना चाहिए ? इस मुद्दे पर पन्ना टाइगर रिज़र्व के तत्कालीन क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा का कहना है कि जंगल का नियम है "सर्वाइवल ऑफ फिटेस्ट"। यानी जो फिट और ताकतवर है वहीं रह सकता है। जो अनफिट व कमजोर है उसे या तो मरना पड़ता है या फिर उस इलाके को छोड़कर भागना पड़ता है। 

घायल बाघ को दवाई देकर उपचार करके उसे बचाने का तात्पर्य यह होगा कि हम प्रकृति के विरुद्ध जा रहे हैं। उनके अनुसार बाघ को उपचार कर बचाने से प्रत्यक्ष लाभ यह होगा कि बाघों की संख्या स्थिर रहेगी परंतु हानि यह है कि युवा बाघ इलाके की तलाश में बाहर चले जाएंगे। असुरक्षित इलाकों में जाने से कई बार वे हादसों का शिकार हो जाते हैं। 

मालुम हो कि तीन वर्ष पूर्व दिसंबर 2021 में नर बाघ पी-243 जब आपसी संघर्ष में घायल हुआ था, उस समय भी वन्य जीव प्रेमियों द्वारा बाघ की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की जा रही थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तत्कालीन क्षेत्र संचालक श्री शर्मा ने कहा था कि टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र बाघों के रहवास हेतु सबसे उपयुक्त और सुरक्षित स्थान होता है। लेकिन सीमित वन क्षेत्र होने के कारण यहां बाघों की एक निश्चित संख्या ही रह सकती है। 

धारण क्षमता से अधिक संख्या होने पर अतिरिक्त बाघों को अपने लिए बाहर जाकर इलाके की खोज करनी होती है। इन परिस्थितियों में यदि हमने प्रकृति के विरुद्ध जाकर घायल व कमजोर बाघों को बचाया तो कोर क्षेत्र में वृद्ध बाघों की संख्या अधिक हो जाने से शावकों की जन्म दर व संख्या धीरे-धीरे कम होना प्रारंभ हो जाएगी। इतना ही नहीं अच्छा और मजबूत "जीन" कोर क्षेत्र से बाहर चला जाएगा।   

क्या कहती है एनटीसीए की गाइडलाइन 

बाघ अभयारण्यों व संरक्षित क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने जो गाइडलाइन निर्धारित की है उसके मुताबिक बाघ जैसे वन्य जीवों के प्राकृतिक रहवास स्थलों में संतुलन को कायम रखने तथा उनके लिए उपयुक्त परिस्थितियों को बढ़ावा देने के लिए न्यूनतम मानव हस्तक्षेप जरूरी है। सर्वाइवल ऑफ  फिटेस्ट के द्वारा प्राकृतिक तरीके से वृद्ध व कमजोर आबादी का उन्मूलन होता है। इसलिए वृद्ध, कमजोर व घायल जंगली बाघों को कृत्रिम भोजन देकर प्राकृतिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। 

ऐसा करने से मानव व वन्यजीवों के बीच संघर्ष के हालात बन सकते हैं। वृद्ध व अक्षम जंगली बाघों की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए कृत्रिम आहार देना वन्य जीव संरक्षण के मूल सिद्धांतों के खिलाफ जाता है, इसलिए ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। सिर्फ विशेष परिस्थितियों में जब किसी वृद्ध या घायल बाघ से मानव बाघ संघर्ष के हालात बने, तो इन परिस्थितियों में ऐसे बाघों को किसी मान्यता प्राप्त चिडय़िाघर में पुनर्वास किया जाना चाहिए।

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