Tuesday, September 22, 2026

चिता आंदोलन के 11वें दिन सैकड़ों लोग गहरे पानी में उतरे

  • घर, खेत और गांव संकट में, लेकिन प्रभावितों को अभी तक न्यायपूर्ण मुआवजा नहीं
  • केन-बेतवा, मझगाय, रुंझ सहित विभिन्न परियोजनाओं के प्रभावितों ने उठाई आवाज


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मझगाय बांध प्रभावितों का चिता आंदोलन 11वें दिन और तेज हो गया। सैकड़ों महिला-पुरुष गहरे पानी में उतरकर जल सत्याग्रह में शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने कमर से लेकर छाती तक पानी में खड़े होकर शरीर पर मिट्टी लगाई और विरोध दर्ज कराया। सुबह शुरू हुआ प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। आंदोलनकारियों का कहना है कि सांकेतिक जल सत्याग्रह अब धीरे-धीरे वास्तविक जल सत्याग्रह में बदल रहा है।

चिता सत्याग्रह के साथ मिट्टी सत्याग्रह और फांसी सत्याग्रह के बाद अब जल सत्याग्रह ने आंदोलन को नया स्वरूप दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि बढ़ते पानी के बीच घर, खेत और गांव संकट में हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को अभी तक न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिला है। जय किसान संगठन के नेता एवं आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने बिना किसी जनप्रतिनिधि का नाम लिए कहा, “घर डूब रहे हैं, गांव डूब रहे हैं और जिंदगियां डूब रही हैं, लेकिन जवाबदेह और जिम्मेदार लोगों की बेशर्मी तैर रही है।”

उन्होंने कहा कि मझगाय के साथ रुंझ परियोजना, केन-बेतवा लिंक परियोजना, सिंगरौली-ललितपुर रेल मार्ग सहित विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित लोग लंबे समय से विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में वर्षों तक संघर्ष के बाद मुआवजा बढ़ाया जाता है और फिर इसका श्रेय लेने की कोशिश होती है, जबकि प्रभावित परिवार तब तक अपना घर, जमीन और आजीविका खो चुके होते हैं।

भटनागर ने आरोप लगाया कि किसानों की सिंचित जमीन को असिंचित मानने, खड़ी फसलों पर जेसीबी चलाने तथा निर्माण कार्यों में अनियमितताओं से ग्रामीणों को नुकसान हुआ है। उन्होंने परियोजनाओं से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल मुआवजे और पुनर्वास का नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा का भी संघर्ष है। विकास के नाम पर विस्थापन हो, लेकिन पर्यावरणीय नुकसान, जंगलों और जैव विविधता की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।

भटनागर ने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक मनमानी, विस्थापन और पर्यावरणीय क्षति के खिलाफ है। प्रभावितों को न्यायपूर्ण मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक सत्याग्रह जारी रहेगा।

00000

No comments:

Post a Comment