- ग्रामीण आँखों के सामने देख रहे हैं अपना उजड़ता संसार, प्रशासन नदारत
- बढ़ते जलस्तर के साथ लोगों की चिंताएँ बढ़ रहीं लेकिन जिम्मेदार संवेदनहीन
पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में निर्मित मझगांय बाँध के डूब क्षेत्र में घरों तक पानी पहुँच गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बढ़ते जलस्तर और विस्थापन की समस्याओं को लेकर जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में दो दिन से यहाँ चिता आंदोलन चल रहा है। डूब क्षेत्र में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार हर दिन पानी गाँव की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और कई घरों में पानी भरता जा रहा है। पानी को लगातार अपनी ओर बढ़ता देखकर ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है। कई लोग बीमार हैं, अनेक परिवारों की आँखों में आँसू हैं और चेहरों पर अपने घर, खेत और भविष्य को लेकर गहरी चिंता दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों को ज्ञापन दे चुके हैं, अपनी समस्याओं को लेकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया। ग्रामीणों के अनुसार कई पात्र परिवारों को अभी तक मुआवज़ा नहीं मिला है और मुआवज़े की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पैसों की मांग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब गाँव डूबने की कगार पर है और लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर रहा है, उस समय जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी दिखाई नहीं दे रही है। ग्रामीणों ने सत्ता पक्ष के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने बताया कि "आज चिता आंदोलन का दूसरा दिन है। हर दिन पानी गाँव की तरफ बढ़ रहा है। लोग अपनी आँखों के सामने अपने घर और संसार को डूबते देख रहे हैं। उनकी आँखों में आँसू हैं, मन में डर है और अनेक सवाल हैं, लेकिन जिनसे जवाब चाहिए, वही प्रशासन और जिम्मेदार लोग दिखाई नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि लोगों ने बार-बार ज्ञापन दिए, अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए और न्याय की गुहार लगाई, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो मजबूर होकर चिता आंदोलन शुरू करना पड़ा। अब लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है और उनके सवालों के साथ उनकी मांगें भी बढ़ती जा रही हैं।
आंदोलन दबाने के लिए बिजली काटने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आंदोलन के पहले दिन मझगाय डेम प्रभावित गांव वनहरी के टपरियन गाँव की बिजली काट दी गई, जिसे ग्रामीण आंदोलनकारियों पर दबाव बनाने और गाँव में भय का माहौल पैदा करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ पानी बढ़ रहा है और दूसरी तरफ बिजली काटे जाने से उनकी परेशानियाँ और बढ़ गई हैं। उन्होंने बिजली व्यवस्था तत्काल बहाल करने की मांग की है।
मुआवज़ा दो, पुनर्वास दो, लोगों को डूबने के लिए मजबूर मत करो। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में लंबित मुआवज़े का तत्काल भुगतान, पारदर्शी सर्वे, उचित पुनर्वास, बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था तथा मुआवज़े की प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच शामिल है। अमित भटनागर ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या विकास के खिलाफ नहीं है, बल्कि विस्थापितों के अधिकार, न्याय और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ घर और गाँव नहीं डूब रहे हैं। अगर विस्थापितों के अधिकार, संविधान और इंसानियत की आवाज को भी डुबो दिया गया, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर स्थिति होगी। जय किसान संगठन की नेता दिव्या अहिरवार, हिसाबी राजपूत ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर तत्काल संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो चिता आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
आंदोलन को जिला कांग्रेस ने दिया समर्थन
चिता आंदोलन के दूसरे दिन भी जिला कांग्रेस के नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पहुंच कर प्रदर्शन कारियों की मांग को जायज ठहराया, भाजपा की मोहन सरकार और जिला प्रशासन को तानाशाह और भ्रष्ट करार दिया। अनीस खान जिलाध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी पन्ना,पूर्व प्रत्याशी भरत मिलन पांडे, प्रेम कुमार पांडेय,राकेश गर्ग, सौरभ पटेरिया, कदीर खान, सुरेन्द्र आदिवासी, हसीब खान, रिंकू खान,मैकू अहिरवार, राजा जी बुंदेला, विकास तिवारी, आशा यादव, रेहान मोहम्मद नेता प्रतिपक्ष, वैभव थापक महामंत्री जिला कांग्रेस, अक्षय तिवारी महामंत्री जिला कांग्रेस, जगत पाल सिंह पूर्व प्रदेश सचिव मध्य प्रदेश कांग्रेस, भूपेन्द्र सिंह सचिव जिला कांग्रेस प्रदर्शन स्थल में पहुंचे।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े पटवारी रिश्वत कांड के शिकायतकर्ता दयाराम आदिवासी,राजकुमार आदिवासी, सुना बाई, मझगांय बांध से दीपक द्विवेदी, उपेन्द्र विश्वकर्मा,अंकित सोनी, ठाकुरदीन पाल, राजरानी प्रजापति, रानी आदिवासी, मंगल यादव, गयाप्रसाद कोंदर, रूंझ बांध से महेश आदिवासी, दौलत आदिवासी, मालती आदिवासी, अनारी आदिवासी, अमरप्रसाद आदिवासी, कृपाल आदिवासी, निरपत आदिवासी, प्रभुदयाल आदिवासी, रामौतार आदिवासी, रतन आदिवासी, प्रकाश आदिवासी, बद्री आदिवासी, राकेश आदिवासी, देवीदीन आदिवासी, राजाराम आदिवासी, ललितपुर सिंगरौली रेल मार्ग- पूरन यादव, राजाराम प्रजापति, अखिलेश जैन, शिवधनी यादव, जगदीश पटेल, आशा बाई साहू, इन्दू पाठक, मालती बाई सोनकर, रामनारायण प्रजापति सहित सैकड़ों विस्थापितों ने आंदोलन में सक्रिय सहभागिता निभाई।
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