पन्ना। गणेश चतुर्थी पर्व की पूर्व संध्या पर मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला गेट पर विश्व की सबसे उम्रदराज हथिनी वत्सला की स्मृति में उनके स्टेच्यू का भव्य अनावरण किया गया। इस गरिमामयी समारोह में मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार, पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं वरिष्ठजन उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, वन मंडलाधिकारी दक्षिण पन्ना, उप संचालक, सहायक संचालक पन्ना, परिक्षेत्र अधिकारी सहित वन अमला इस अवसर पर मौजूद रहा।
वत्सला के इस स्टेचू की स्थापना और अनावरण में जे.के. सीमेंट अमानगंज की विशेष और महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके अधिकारीगण भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। अनावरण करते हुए विस अध्यक्ष श्री तोमर द्वारा विधि-विधान से वत्सला की पूजा-अर्चना की गई और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए याद किया गया तथा उनकी प्रतिमा को अकोला गेट पर स्थापित किया गया।
उल्लेखनीय है कि वत्सला विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी मानी जाती थी। उनका जन्म लगभग वर्ष 1917 के आसपास केरल के नीलांबुर जंगलों में हुआ था। इसके पश्चात वे पन्ना आईं और पन्ना की भौगोलिक परिस्थितियों एवं उबड़-खाबड़ स्थानों में उन्होंने अपना एक लंबा जीवन व्यतीत किया। वत्सला ने अपने सम्पूर्ण जीवन में किसी नर हाथी के साथ मेटिंग नहीं की। इसके साथ ही उन्होंने दूसरी हथिनियों के बच्चों का लालन-पालन अत्यंत स्नेह और वात्सल्य के साथ किया। उनके इसी प्रेमपूर्ण और वात्सल्यमयी स्वभाव के कारण आसपास के वन्यजीव प्रेमी और पन्ना के स्थानीय लोग उन्हें आदर और स्नेह से दादी मां कहकर पुकारते थे। वत्सला दादी मां की इन्हीं स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए अकोला गेट पर इस स्टेच्यू को स्थापित किया गया है।
![]() |
| वर्ष 2007 में गणतंत्र दिवस समारोह में वत्सला कुछ इस तरह हुई थी शामिल, जिसे झांकी में प्रथम पुरस्कार मिला था। |
गौरतलब है कि दुनिया की सबसे उम्रदराज कही जाने वाली हथिनी वत्सला की तमाम खूबियों में से एक खूबी उसके शारीरिक बनावट को लेकर भी है। जिससे हाथियों के झुंड में भी वत्सला को आसानी से पहचाना जा सकता था। दरअसल वत्सला की सूंड दूसरे अन्य हांथियों के मुकाबले अधिक लंबी रही है। सूंड की लंबाई इतनी अधिक थी कि वत्सला जब खड़ी होती थी तो दो से तीन फिट सूंड को जमीन के ऊपर मोड़ कर रखना पड़ता था। उसकी इस खूबी के कारण वन्यजीव प्रेमी वत्सला को पांच पैर वाली हथिनी भी कहते रहे हैं। वत्सला की सूंड इतनी लंबी कैसे हुई, इस बाबत वन्य प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव कुमार गुप्ता का कहना है कि शुरुआती दिनों में हथिनी वत्सला के द्वारा लकड़ी की बोगियों को उठाने व रखने का कार्य किया जाता रहा है। यही वजह है कि उम्र बढ़ने के साथ ही वत्सला की सूंड भी लंबी हो गई। वत्सला भौतिक रूप से भले ही अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन दुनिया भर के वन्य जीव प्रेमियों के जेहन में उसकी स्मृतियाँ हमेशा जीवित रहेंगी।
00000


No comments:
Post a Comment