Wednesday, August 14, 2019

भक्ति शर्मा जिन्होंने प्रदेश की महिलाओं का बढ़ाया मान

  • आत्मविश्वास से लवरेज महिला ने बदल दी गांव की तस्वीर 
  • महिलाओं के लिये प्रेरणादाई है भक्ति शर्मा की कहानी 


भारत की 100 प्रभावी महिला में शामिल भक्ति शर्मा अमेरिका से लौटी हैं अब मध्यप्रदेश में एक ग्राम पंचायत की सरपंच है। अपने साथ हमेशा एक पिस्टल रखती हैं। इनके गांव में बहुत सारे खास काम होते हैं, यहां एक सरपंच योजना चलती है.. किसान को मुआवजा मिलता है। हर आदमी का बैंक अकाउंट है और हर खेत का मृदा कार्ड.. कुछ ही वर्षों में इन्होंने अपने गांव की तस्वीर बदल दी है.. पढ़िए इनकी सफलता की कहानी...
भक्ति शर्मा ने एमए राजनीति शास्त्र से किया है, अभी वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। भोपाल जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर बरखेड़ी अब्दुल्ला ग्राम पंचायत है। इस पंचायत की सरपंच भक्ति शर्मा के शौक पुरुषों जैसे हैं। इन्हें ट्रैक्टर चलाना, पिस्टल रखना, अपनी गाड़ी से सड़कों पर फर्राटे भरना, किसी भी अधिकारी से बेधड़क बात करना पसंद है। ये अपनी बोलचाल की भाषा में भी जाता है, खाता है, आता हूँ का प्रयोग सामान्य तौर पर करती हैं। इस पंचायत में कुल 2700 जनसँख्या है जिसमे 1009 वोटर हैं। ओडीएफ हो चुकी इस पंचायत में आदर्श आंगनबाड़ी से लेकर हर गली में सोलर स्ट्रीट लाइटें हैं।
“सरपंच बनते ही सबसे पहला काम हमने गांव में हर बेटी के जन्म पर 10 पौधे लगाना और उनकी माँ को अपनी दो महीने की तनख्वाह देने का फैसला लेकर किया। पहले साल 12 बेटियां पैदा हुई, माँ अच्छे से अपना खानपान कर सके इसलिए अपनी यानि सरपंच की तनख्वाह ‘सरपंच मानदेय’ के नाम से शुरू की।”
भक्ति ने कहा, “हमारी पहली ऐसी ग्राम पंचायत बनी जहाँ हर किसान को उसका मुआवजा मिला। हर ग्रामीण का राशनकार्ड, बैंक अकाउंट, मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाया। इस समय पंचायत का कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं है। महीने में दो से तीन बार फ्री में हेल्थ कैम्प लगता है।
भक्ति ने कहा, “हमारी पहली ऐसी ग्राम पंचायत बनी जहाँ हर किसान को उसका मुआवजा मिला। हर ग्रामीण का राशनकार्ड, बैंक अकाउंट, मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाया। पहले साल में 113 लोगों को पेंशन दिलानी शुरू की, इस समय पंचायत का कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं है। महीने में दो से तीन बार फ्री में हेल्थ कैम्प लगता है, जिससे पंचायत का हर व्यक्ति स्वस्थ्य रहे।”




ग्राम पंचायत का कोई भी काम भक्ति अपनी मर्जी से नहीं करती हैं। पंचों की बैठक समय-समय पर अलग से होती रहती है। जब ये सरपंच बनी थीं तो इस पंचायत में महज नौ शौचालय थे अभी ये पंचायत ओडीएफ यानि खुले में शौच से मुक्त हो चुकी है। भक्ति का कहना है, “हमने पंचायत में कोई भी काम अलग से नहीं किया, सिर्फ सरकारी योजनाओं को सही से लागू करवाया है। पंच बैठक में जो भी निर्धारित करते हैं वही काम होता है। ढ़ाई साल में बहुत ज्यादा विकास तो नहीं करवा पाए हैं क्योंकि जब हम प्रधान बने थे उस समय गांव की सड़कें ही पक्की नहीं थी, इसलिए पहले जरूरी काम किए।”
भक्ति ने अपने प्रयासों से अपनी पंचायत को सरकार की मदद से एक बड़ा सामुदायिक भवन पास करा लिया है। भक्ति का कहना है, “आगामी छह महीने में इस भवन में डिजिटल क्लासेज शुरू हो जायेंगी, जो पूरी तरह से सोलर से चलेंगी। इसमें महिलाओं के लिए सिलाई सेंटर, और चरखा केंद्र खुलेगा। किसानों के लिए समय-समय पर बैठकें होंगी, जिससे वो खेती के आधुनिक तरीके सीख सकें। बच्चों के लिए तमाम तरह की गतिविधी होंगी जिससे उन्हें गांव में शहर जैसी सुविधाएँ मिल सकें।”
पंचायत की हर महिला निडर होकर रात के 12 बजे भी अपनी पंचायत में निकल सके भक्ति शर्मा की ऐसी कोशिश है। भक्ति ने कहा, “पंचायत की हर बैठक में महिलाएं ज्यादा शामिल हों ये मैंने पहली बैठक से ही शुरू किया। मिड डे मील समिति में आठ महिलाएं है। महिलाओं की भागीदारी पंचायत के कामों में ज्यादा से ज्यादा रहे जिससे उनकी जानकारी बढ़े और वो अपने आप को सशक्त महसूस करें।”
पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से ग्राम पंचायत में पानी की बहुत समस्या है। पीने के पानी के लिए तो सबमर्सिबल लगा है लेकिन खेती को समय से पानी मिलना थोड़ा मुश्किल होता है। भक्ति का कहना है, “जिनके पास 1012 एकड़ जमीन है, हमारी कोशिश है वो हर एक किसान कम से कम एक एकड़ में जैविक खेती जरुर करें। बहुत ज्यादा संख्या में तो नहीं लेकिन किसानों ने जैविक खेती करने की शुरुआत कर दी है।”
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Tuesday, August 13, 2019

बहुचर्चित नीलेश द्विवेदी हत्याकाण्ड का पुलिस ने किया खुलासा

  •   मामले में 9 आरोपी गिरफ्तार, 2 कट्टा एवं 2 जिन्दा कारतूस बरामद
  •   हत्याकाण्ड का एक आरोपी अज्जू उर्फ अजय परमार अभी भी फरार
  •   आरोपी की पन्ना पुलिस द्वारा की जा रही सरगर्मी से तलाश


आयोजित प्रेस वार्ता में हत्याकाण्ड का खुलासा करते हुये पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी। 

अरुण सिंह,पन्ना। बहुचॢचत नीलेश द्विवेदी हत्याकाण्ड मामले में पन्ना पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की है। इस मामले का एक आरोपी अज्जू उर्फ अजय परमार अभी भी फरार है जिसकी पुलिस द्वारा सरगर्मी के साथ तलाश की जा रही है। पुलिस ने इन आरोपियों के कब्जे से दो कट्टा व दो जिन्दा कारतूस भी बरामद किया है। मालुम हो कि विगत एक पखवाड़ा पूर्व 26 जुलाई को भाजपा नेता नीलेश द्विवेदी को आरोपियों द्वारा उस समय गोली मारी गई थी जब वे मोटर साइकिल से अपने  गाँव की ओर जा रहे थे। घटना को लेकर इलाके में अभी भी भय और दहशत का माहौल बना हुआ है। आरोपियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर लोगों द्वारा धरना और प्रदर्शन भी किये जा रहे थे। जिससे पुलिस के ऊपर भी  खासा दबाव था। हत्याकाण्ड के 9 आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद पुलिस ने भी राहत की साँस ली है। पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने प्रेसवार्ता आयोजित कर आज इस सनसनीखेज हत्याकाण्ड का खुलासा किया। मामले की जानकारी देते हुये उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को फ रियादी राजेश शुक्ला पिता रामचरण शुक्ला उम्र 40 वर्ष निवासी मोहनपुरा द्वारा चौकी ककरहटी में रिपोर्ट की गई थी कि आज मैं सब्जी खरीदकर नीलेश द्विवेदी के साथ उसकी मोटर साइकिल पर पीछे बैठकर अपने घर वापस आ रहा था तभी रास्ते में अटरहा नाला के पास रिपटा के पास लाल साहब उर्फ  वासुदेव बुन्देला अपने साथियों भूपत अहिरवार , जगदीश राजपूत और सत्तार खान निवासी पन्ना के साथ रोड पर खड़े थे। इन्होंने मोटर साईकिल रोककर भूपत अहिरवार एवं जगदीश राजपूत मुझे मोटर साईकिल से उतार कर गले में हाथ डाल कर रोड के किनारे ले गये और आगे पुलिया के पास नीलेश द्विवेदी को रोककर लाल साहब बुन्देला ने पिछली सरपंची के चुनाव की बुराई पर से जान से मारने की नियत से कट्टा से दो फायर नीलेश द्विवेदी को मारे, जो बाये पैर के घुटना व घुटना के नीचे लगे। नीलेश को गोली मार कर चारो लोग मोटर साईकिलों में बैठकर मुराज तरफ  भाग गये । नीलेश को इलाज हेतु अस्पताल ले जाया गया। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली पन्ना में अप.क्र. 522/19 धारा 307,34 भादवि 25,27 आर्म्स  एक्ट का कायम किया गया।

आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु गठित की गई थीं तीन टीमें


मामले की गंभीरता को देखते हुये पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी द्वारा स्वयं घटना स्थल पर पहुँचकर घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। इलाज दौरान रीवा अस्पताल में आहत नीलेश द्विवेदी की मृत्यु हो जाने पर मामले में आरोपियों के विरूद्ध धारा 302 भादवि का इजाफ ा किया गया। पुलिस अधीक्षक पन्ना के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बी.के.एस. परिहार के कुशल मार्गदर्शन तथा एसडीओपी आर.एस. रावत के नेतृत्व में आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु 3 विशेष पुलिस टीमो का गठन किया गया जिसमें एक टीम की कमान नगर निरीक्षक कोतवाली पन्ना अरविन्द कुजूर दूसरी टीम की कमान उनि एम.एल. यादव एवं तीसरी टीम की कमान उनि सुशील शुक्ला को सौपी गई। उक्त पुलिस टीम एवं सायबर सेल की मदद से आरोपियो की गिरफ्तारी हेतु घटना दिनांक से सतत् प्रयास किये गये। पुलिस द्वारा अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया। मुखबिर सूचना  एवं सायबर सेल की मदद से तकनीकी साक्ष्यो के आधार पर घटना के मुख्य आरोपी लाल साहब उर्फ  वासुदेव सिंह  बुन्देला निवासी समाना की बातचीत एफआईआर में नामजद आरोपियों के अलावा छतरपुर तरफ  के अन्य लोगो से होना पाया गया एवं लाल साहब एवं छतरपुर तरफ  के अन्य संदेहियों की मौजूदगी घटना स्थल के आस-पास एवं घटना स्थल पर 1 दिन पूर्व से घटना समय तक पाई गई। उक्त व्यक्तियों का संपर्क लाल साहब सिंह से होना पाया गया तकनीकी साक्ष्य के आधार पर घटना स्थल पर उपस्थित सन्तराजा उर्फ  मानवेन्द्र सिंह परमार निवासी बुढरख, विवेक सिंह बुन्देला निवासी भगवां, विकास द्विवेदी निवासी बजरंग नगर छतरपुर, गोलू उर्फ  महिपाल सिंह परमार निवासी नयागाँव, अभिषेक शुक्ला के घरों में जाकर पुलिस द्वारा पता किया गया जो घटना के एक दिन पूर्व से अपने अपने घरों में मौजूद नहीं थे। संदेहियों की पतारसी एवं गिरफ्तारी में लगी पुलिस टीमों द्वारा अलग-अलग संभावति जगहों में तलाश की गई।

बायपास रोड झांसी से गिरफ्तार हुये मुख्य आरोपी


पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दिनांक 12-13 अगस्त की दरिम्यानी रात सत्तार खान निवासी पन्ना, लालसाहब उर्फ  वासुदेव सिंह बुन्देला निवासी समाना, सन्तराजा उर्फ  मानवेन्द्र सिंह परमार निवासी बुढरख व सन्तराजा के साथी अभिषेक शुक्ला निवासी बरोल को दतिया, ग्वालियर तरफ  जाने की सूचना प्राप्त होने पर बायपास रोड झाँसी से पकड़ा गया। आरोपियों से पूछताछ किये जाने पर लालसाहब द्वारा अपने साथी जगदीश राजपूत, भूपत अहिरवार, सत्तार खान, सन्तराजा परमार, अभिषेक शुक्ला, विकास द्विवेदी, गोलू परमार, विवेक सिंह व अज्जू उर्फ अजय परमार के साथ घटना कारित करना बताया । बाद पूछताछ चारों को अभिरक्षा में लिया एवं विवेक सिंह बुन्देला, विकास द्विवेदी, गोलू उर्फ  महिपाल सिंह परमार की तलाश हेतु उनि एम.एल. यादव को सतना-रीवा तरफ  रवाना किया गया था जो उक्त तीनों आरोपियों को सतना रोड शेरगंज के पास एवं भूपत अहिरवार, जगदीश राजपूत को उनि सुशील शुक्ला द्वारा दमोह जबलपुर रोड जबलपुर नाका के पास से पकड़ा गया। आरोपियों से पूछताछ करने पर उनके द्वारा जुर्म स्वीकारने पर पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। आरोपी सन्तराजा उर्फ  मानवेन्द्र सिंह परमार एवं उसके साथी अभिषेक पिता घनश्याम शुक्ला निवासी बरोल अन्धेरी ईस्ट मुंबई से मुताबिक मेमोरेण्डम घटना में प्रयुक्त आलाजर्ब एक 12 बोर का देशी कट्टा, 1 जिन्दा कारतूस सन्तराजा से एवं एक 315 बोर का देशी कट्टा व 1 जिन्दा कारतूस अभिषेक शुक्ला से जप्त किया गया है।

पुलिस ने इन आरोपियों को किया है गिरफ्तार


मामले में पुलिस ने जिन 9  आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनमें लालसाहब उर्फ  वासुदेव सिंह बुन्देला पिता स्व.मुन्नू राजा उर्फ  दिवाकरदेव बुन्देला 30 साल निवासी समाना थाना कोतवाली पन्ना, जगदीश सिंह पिता रामसिंह राजपूत उम्र 55 वर्ष निवासी रनवाहा थाना कोतवाली पन्ना जिला पन्ना, भूपत पिता नन्दी अहिरवार  45 साल निवासी घटारी थाना कोतवाली पन्ना, शेख सत्तार पिता शेख सकूर 53 साल निवासी आगरा मोहल्ला पन्ना थाना कोतवाली पन्ना, गोलू उर्फ  महिपाल सिंह पिता बहादुर सिंह परमार 23 साल नि. नयागांव थाना पिपट छतरपुर, विकास द्विवेदी पिता कृष्णकुमार द्विवेदी 22 साल निवासी पन्ना नाका बजरंगनगर जीवन ज्योती कालोनी छतरपुर, सन्तराजा उर्फ  मानवेन्द्र सिंह पिता गोविन्द सिंह परमार निवासी बुढरख थाना महराजपुर छतरपुर, विवेक सिंह पिता बलबीर सिंह बुन्देला 24 साल निवासी भगवां जिला छतरपुर एवं अभिषेक पिता घनश्याम शुक्ला 26 साल निवासी निवासी बरोल अन्धेरी ईस्ट मुंबई ( महाराष्ट्र ) शामिल हैं। मामले में आरोपी अज्जू उर्फ  अजय परमार निवासी बड़ामलहरा फरार है जिसकी गिरफ्तारी होना शेष है।

गिरफ्तारी में इनकी रही सराहनीय भूमिका


हत्याकाण्ड के आरोपियों की गिरफ्तारी व सम्पूर्ण कार्यवाही में नगर निरीक्षक कोतवाली अरविन्द कुजूर, उनि एम.एल. यादव, उनि सुशील शुक्ला, उनि राकेश तिवारी, उनि एम.डी. शाहिद, प्र. आर. रामकृष्ण पाण्डेय , शिवेन्द्र सिंह, कुंजबिहारी सिंह,प्रेमलाल पाण्डेय, आर. बृषकेतु रावत, सरवेन्द्र , बीरेन्द्र , रामपाल, राहुल सिंह बघेल, आईमात सेन, नितिन मिश्रा, तेजेन्द्र राजौरा , दीपप्रकाश, बृह्मदत्त शुक्ला, सलीम खान, रविकरन सिंह, प्रदीप पाण्डेय, कमलेश नगायच एवं सायबर सेल से सूबेदार नेहा सिंह, नीरज रैकवार, आशीष अवस्थी, धर्मेन्द्र सिंह राजावत का सराहनीय योगदान रहा। उक्त टीम को पुलिस अधीक्षक पन्ना द्वारा पुरुष्कृत करने की घोषणा की गई है।
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Sunday, August 11, 2019

वनोपज से समृद्ध पन्ना के जंगलों में पड़ोरा की बहार

  • मानसून सीजन में इन्ही दिनों मिलती है पौष्टिक गुणों से भरपूर यह सब्जी 
  • यह जंगली सब्जी बाजार में बिक रही 100 से 150 रुपये प्रति किलो 



अरुण सिंह,पन्ना । औषधीय जड़ी बूटियों और वनोपज से समृद्ध पन्ना जिले के जंगलों में इन दिनों पड़ोरा की बहार है। अत्यधिक पौष्टिक व आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर यह जंगली सब्जी पन्ना के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगती है। इन दिनों पड़ोरा की लतर में फल आये हुये हैं जो बामुश्किल एक पखवाड़ा तक ही मिलेंगे। वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले आदिवासी जंगल से पड़ोरा तोड़कर न सिर्फ खाते हैं अपितु बाजार में बेंच भी देते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय हो जाती है। पन्ना के बाजार में जंगली पड़ोरा 100 से 150 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
गौरतलब है कि पड़ोरा एक बहुवर्षीय कद्दूवर्गीय फसल है, जो पौष्टिक गुणों से भरपूर होने के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों की रोकथाम में सहायक होती है। इसकी खेती कर किसान समृद्ध बन सकते हैं। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों से इसकी खेती करने की अपील की गई है।  उद्यान विभाग के सहायक संचालक एमके भट्ट ने बताया कि पन्ना के जंगली क्षेत्रों में पड़ोरा बिना उगाये उग जाता हैं इसलिए आदिवासियों द्वारा पन्ना के जंगलों से तुड़ाई कर बाजार में इन दिनों 100 से 150 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। जंगल क्षेत्रों के आस-पास के लोग इसको सब्जी के रूप में बहुतायत से उपयोग करते हैं। पड़ोरा के बीजों की बुवाई का समय जून-जुलाई है। पड़ोरा के बीज को एक बार बोने के बाद इसके मादा पौधे से लगभग 8 से 10 वर्षो तक फल प्राप्त होते रहते हैं। इस पर कीड़ों व बीमारियों का प्रकोप बहुत कम होता है। परन्तु फल मक्खी पड़ोरा के फलों को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। सहायक संचालक भट्ट ने बताया कि पड़ोरा का प्रयोग सब्जी के रूप में किया जाता है जो बहुत स्वादिष्ट होती है तथा मानव संतुलित आहार का एक महत्वपूर्ण भाग है। आपने बताया कि पड़ोरा की सब्जी पौष्टिक गुणों से भरपूर होती है। पड़ोरा के फलों का उपयोग अचार बनाने के लिए भी किया जाता है। यह कफ, खांसी, अरूचि, वात, पित्तनाशक और हृदय में होने वाले दर्द से राहत दिलाता है। पड़ोरा के फलों का सेवन मधुमेह रोगी के शर्करा नियंत्रण में भी बहुत उपयोगी होता है।

पड़ोरा को कहा जाता है सबसे ताकतवर सब्जी


मौजूदा दौर में जंक फूड का इतना क्रेज बढ़ चुका है कि लोग अपने शरीर को जरूरी ताकत देने वाली सब्जी, दाल का सेवन कम ही करते हैं। यह बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ सबज्यिां ऐसी होती हैं, जिन्हें कुछ दिन खाने पर ही इसका फायदा मिल जाता है. ऐसी ही एक सब्जी पड़ोरा है। ऐसा कहा जाता है कि यह दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है. इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इस सब्जी में इतनी ताकत होती है कि महज कुछ दिन के सेवन से ही आपका शरीर तंदुरुस्त बन जाता है। पड़ोरा को कंटोला,ककोड़े और मीठा करेला के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में भी इसे सबसे ताकतवर सब्जी के रूप में माना गया है। यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूर होती है, जिसे खाने से शरीर ताकतवर बनता है। यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्जी है. जो शरीर को साफ रखने में भी काफी सहायक है। अगर आप इसकी सब्जी नहीं खाना चाहते तो अचार बनाकर भी सेवन कर सकते हैं। आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज के लिए इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं, यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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Thursday, August 8, 2019

केन नदी के तेन्दूघाट में पूरा हुआ बांध निर्माण का कार्य

  •   इस मध्यम सिंचाई परियोजना से पवई व गुनौर जनपद के 83 गाँव होंगे लाभान्वित
  •   बांध की जलधारण क्षमता 124.80 मिलियन घन मीटर, 25 हजार हेक्टेयर से अधिक   भूमि में होगी सिंचाई




केन नदी के तेंदू घाट में जल संसाधन विभाग द्वारा निर्मित कराया गया बांध। 

।।अरुण सिंह,पन्ना।।

 केन नदी के तेन्दूघाट पर वर्ष 2015 से निर्माणाधीन पवई मध्यम सिंचाई परियोजना का कार्य पूरा हो गया है। जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 105 किमी दूर शाहनगर तहसील के पडऱहा ग्राम के निकट जल संसाधन विभाग द्वारा 806 मीटर लम्बा तथा 37 मीटर ऊँचा बांध बनाया गया है, जिसकी पुनरीक्षित लागत 600.81 करोड़ रू. है। इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना से पवई व गुनौर जनपद क्षेत्र के 83 ग्रामों के किसानों की 25 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि ङ्क्षसचित होगी। सिंचाई सुविधा मिलने से इस अंचल के किसान अब अपने खेतों से जहां भरपूर पैदावार ले सकेंगे, वहीं उनकी जिन्दगी में भी खुशहाली आयेगी।


उल्लेखनीय है कि बारिश के ही पानी पर पूरी तरह से आश्रित इस अंचल के किसानों की जिन्दगी में खुशहाली लाने तथा खेती को लाभ का धन्धा बनाने की मंशा से प्रदेश सरकार ने केन नदी के तेन्दूघाट पर बांध के निर्माण को मंजूरी प्रदान की थी। जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री बी.एल. दादौरिया की देखरेख में पवई मध्यम सिंचाई परियोजना का कार्य वर्ष 2015 में शुरू हुआ और इन्हीं के रहते बांध निर्माण का यह कार्य पूरा हो गया। मौजूदा समय कार्यपालन यंत्री श्री दादौरिया जल संसाधन संभाग पवई में कार्यरत हैं। इनकी तकनीकी दक्षता और कार्यक्षमता को देखते हुये प्रदेश सरकार ने पन्ना जिले की निर्माणाधीन दो मध्यम सिंचाई परियोजनाओं रून्ज व मझगांय बांध के निर्माण की जवाबदारी भी इन्हें सौंप दी है। मालुम हो कि ये दोनों ही सिंचाई परियोजनायें जल संसाधन संभाग पन्ना के अन्तर्गत आती हैं। लेकिन भू-अर्जन व डूब क्षेत्र के किसानों को मुआवजा वितरण सहित अन्य कई तकनीकी कारणों के चलते इन दोनों ही मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का कार्य विवादों में घिरा हुआ था, जिससे निर्माण कार्य या तो ठप्प था या फिर कछुआ गति से चल रहा था। इस व्यवधान व विवादों को दूर करने तथा कार्य की गति में तेजी लाने के लिये शासन ने जल संसाधन संभाग पवई के कार्यपालन यंत्री बी.एल. दादौरिया को इन दोनों बांधों की जिम्मेदारी सौंप दी है।

तेंदूघाट पर बने बांध में लगे हैं 9 गेट


केन नदी में तेंदूघाट पर बनकर तैयार हुये विशाल बांध में 10 मी. गुणे  10.50 मी. के कुल 9 गेट लगे हैं। गेट के लेबल तक बांध में पानी भरा हुआ है। मौजूदा समय इस बांध के गेट खुले हैं, फलस्वरूप अतिरिक्त पानी इन गेटों से निरन्तर निकल रहा है। कार्यपालन यंत्री श्री दादौरिया ने बताया कि मानसूनी बारिश में विराम लगने पर अगस्त महीने के बाद बांध के गेट बन्द कर दिये जायेंगे। इस बांध के बन जाने से अब जहां हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि ङ्क्षसचित होगी, वहीं पूरे इलाके में जल स्तर भी सुधरेगा। जिससे पेयजल की समस्या का काफी हद तक निराकरण हो सकेगा। श्री दादौरिया के मुताबिक बांध की जलधारण क्षमता 124.80 मिलियर घन मीटर तथा जल गृहण क्षेत्र लगभग 995 वर्ग किमी है। बांध के डूब क्षेत्र में तकरीबन 1373 हेक्टेयर भूमि आई है, जिसमें निजी भूमि 599 हेक्टेयर, शासकीय भूमि 536 हेक्टेयर तथा 238 हेक्टेयर के लगभग वन भूमि प्रभावित हुई है।

नहरों से होगी 11 हजार हेक्टेयर की सिंचाई


पवई मध्यम सिंचाई परियोजना के द्वारा नहरों के माध्यम से 11 हजार हेक्टेयर से भी अधिक कृषि भूमि         सिंचित होगी। नहरों के अलावा 14 हजार 800 हेक्टेयर की पाइप लाइन एरीगेशन की निविदा बुलाई गई है। कार्यपालन यंत्री श्री दादौरिया ने बताया कि पवई मध्यम ङ्क्षसचाई परियोजना के तहत निर्मित  की जाने वाली मुख्य नहरों की लम्बाई 40.61 किमी है। इसमें 37 किमी लम्बी नहर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, शेष कार्य इस वर्ष नवम्बर माह तक पूरा करने का लक्ष्य है। नहरों के निर्माण का कार्य पूरा होने पर अंचल के किसानों को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी, जिससे सूखा और अल्प वर्षा के चलते बदहाली का जीवन गुजारने वाले किसानों की जिन्दगी खुशहाल होगी।
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सुषमा जी के जीवन का हर क्षण देश को समर्पित रहा: महदेले

  •  भाजपा कार्यालय पन्ना में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा
  •   म.प्र. के कार्यकर्ता भाग्यशाली, जिन्हें सुषमा जी का सानिध्य मिला


 वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व  विदेश मंत्री स्व. श्री मति सुषमा स्वराज जी को श्रद्धांजली अर्पित करते हुये भाजपा नेता। 

पन्ना। म.प्र. के कार्यकर्ता भाग्यशाली हैं, जिन्हें सुषमा स्वराज जी का मार्गदर्शन मिला। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं,  लेकिन वे विचारों से हमेशा अजर अमर रहेंगी। सुषमा जी ने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक देश की सेवा की। विचार और संगठन के लिये अपना तिल-तिल दिया। आदरणीय सुषमा जी ऐसी पुस्तक थीं जिसमें ज्ञान, संवेदनशीलता, नैतिकता, कर्तव्यबोध और अद्भुत संगठन क्षमता समाहित थी। यह बात भारतीय जनता पार्टी कि वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री कुसुम सिंह  महदेले ने जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में स्व. सुषमा जी का पुण्य स्मरण करते हुये कही। उन्होंने कहा कि वह मेरे लिये चार चुनाव में प्रचार करने के लिये आई ओर उन्होंने सभा की मुझे उनका आशीर्वाद व सानिध्य प्राप्त हुआ है!
सभा में पार्टी के जिलाध्यक्ष सतानंद गौतम ने श्रीमती सुषमा स्वराज जी से जुड़े संस्मरण साझा करते हुये कहा कि आदरणीय सुषमा दीदी अद्भुत व्यक्तित्व की धनी थीं। उनकी जिह्वा पर माँ सरस्वती विराजमान थीं। उनको सदन में सुनने के लिये सांसद लालायित रहते थे। उनके द्वारा रखे गये विषयों में हमेशा नवीनता के साथ ही सार्थकता भी होती थी। सदन में वे अपनी बुद्धियुक्ति से किये गये प्रश्न और उठाये गये मुद्दों से सब को निरुत्तर कर देती थीं। विदेश मंत्री रहते हुये उनके कार्यकाल में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिसमें उन्होंने विदेशों में फं से भारतीयों की त्वरित मदद की। उनमें गजब की संवेदनशीलता के साथ व्यवस्था के प्रति समर्पण भी था। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बाबू लाल यादव ने कहा कि वे एक संवेदनशील महिला थीं। उन्होंने अपनी कार्यकुशलता के बल पर समाज में एक अलग छाप छोड़ी। वे संगठनात्मक क्षमता की धनीं थी। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से उनका सीधा संवाद था। श्रद्धांजली सभा में नगर पालिका अध्यक्ष मोहन लाल कुशवाहा  ने कहा कि वे मातृत्व और स्नेह से भरी हुई, आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय विदुषी थीं। उन्होंने भारतीयता और भारत को अपने अंदर विचारों के माध्यम से जीने का काम किया। शोक सभा में जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, मंडल अध्यक्ष नेमीचंद्र जैन, महामंत्री विवेक मिश्रा,  तरूण पाठक, बृजेन्द्र गर्ग, बृजेन्द्र मिश्रा, आशा गुप्ता सहित अन्य नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने स्व. श्रीमती सुषमा स्वराज को श्रद्धांजली दी।
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Tuesday, August 6, 2019

जंगल की वनाच्छादित भूमि में बेखौफ होकर हो रहा अतिक्रमण

  • उत्तर वन मंडल के देवेन्द्रनगर परिक्षेत्र में सौ से भी अधिक लोगों ने किया कब्ज़ा 
  • भवानीपुर बीट के जंगल में करीब डेढ़  दो किमी. क्षेत्र में बन गई हैं झुग्गियां 
  • वन अमले की लापरवाही और अनदेखी के चलते अतिक्रमण की समस्या हुई गंभीर 


देवेंद्रनगर वन परिक्षेत्र के भवानीपुर बीट में हुये अतिक्रमण का द्रश्य। 

अरुण सिंह,पन्ना। वनों की सुरक्षा और पर्यावरण को संतुलित बनाये रखने के लिए एक ओर जहां  पौधरोपण के लिए जिले भर में जगरूकता अभियान व  रैलियों का आयोजन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वन अमले लापरवाही और अनदेखी के चलते  जंगल की भूमि में  खुले आम जहाँ - तहाँ बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो रहा है। ताजा मामला पन्ना जिले के उत्तर वन मण्डल में देवेन्द्रनगर परिक्षेत्र के अन्तर्गत वन चौकी पहाड़ीखेरा के भवानीपुर बीट का  है।  नागौद-कालींजर स्टेट हाईवे सड़क मार्ग के किनारे उमरी, भवानीपुर, हनुमानपुर, टिगुंलीटोला आदि ग्रामों के सैकड़ों लोगों ने जंगल की करीब 20 हेक्टेयर जमीन पर झोपड़ी बनाकर लगभग डेढ़ से दो किमी तक अवैध कब्जा कर लिया है।
उल्लेखनीय है कि इस बेशकीमती वनाच्छादित भूमि पर अवैध कब्जा होने से जंगल व पर्यावरण को भारी नुकसान होने की सम्भावना जताई जा रही है। वन अमले की अनदेखी और लापरवाही के  कारण यह स्थित निर्मित हो रही है। वन भूमि पर झोपड़ी बनाकर कब्जा करने वालों ने बताया कि हम लोग इस जमीन पर वर्षों से झाड़ी काटकर काबिज चले आ रहे हैं। हमारे बसने व निवासरत रहने की जगह न होने के कारण हम लोगों के द्वारा अतिक्रमण किया गया है। इनका यह  भी कहना है कि डिप्टी व रेन्जर द्वारा हमसे पैसे लेकर हमें काबिज होने के लिए कहा गया था। वन भूमि पर अवैध कब्जों से जंगल जहां उजड़ रहे हैं वहीँ वन्य प्राणी मजबूर होकर आबादी क्षेत्र की ओर जाने को मजबूर हैं, जिससे वन्य प्राणियों और ग्रामीणों  के बीच संघर्ष की स्थिति निर्मित हो रही है। इसका सबसे दु:खद और चिंताजनक पहलू यह है कि जंगल कटने  के साथ - साथ  बहुमूल्य वनौषधियॉ भी अपना अस्त्तिव खोती जा रही हैं। वन भूमि पर अतिक्रमण की इस गंभीर हो चुकी समस्या की ओर वन मंडलाधिकारी उत्तर वन मंडल पन्ना नरेश सिंह यादव का ध्यान आकृष्ट कराये जाने पर आपने स्वीकार किया कि वन भूमि में अतिक्रमण हुआ है, जिसके लिये कहीं न कहीं वन अमले की अनदेखी और नकारापन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार वनकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी तथा वन भूमि से अतिक्रमण हटवाया जायेगा।

वन अमले से बेखौफ हैं अतिक्रमणकारी 


मौके पर मौजूद जंगल में झुग्गी बनाकर रहने वाले अतिक्रमणकारी । 

वनाच्छादित भूमि पर डेढ़ से दो किमी. तक अतिक्रमण कर झुग्गियां बनाकर रह रहे लोग इतने बेखौफ हैं कि उन्हें वन अमले से भी कोई भय नहीं लगता। हालात ये हैं कि वन अमला भी पुलिस फ़ोर्स के बिना अतिक्रमण स्थल पर  जाने से कतरा रहा है। इन अतिक्रमणकारियों से इलाके के लोग भी परेशान हैं. क्योंकि वहां से वे मवेशियों को भी नहीं निकलने दे रहे। ग्रामीणों के जाने पर वे मारपीट व झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। क्षेत्र के ही निवासी राजकुमार मिश्रा ने पन्ना आकर डीएफओ श्री यादव को बताया कि कुछ  वनकर्मी  अतिक्रमण करने वालों के बीच जाकर बैठते हैं जिससे उनके हौसले बढे  हुये हैं। ग्रामीण ने बताया कि ये लोग रातोरात अतिक्रमण कर  झुग्गी बना लेते हैं। इनमें से ज्यादातर लोग ईंट गारा का काम करते हैं, कारीगर हैं जिससे कुछ  दिनों में ईंट गारे का घर भी तैयार कर लेते हैं। वन भूमि में कुछ घर बन भी चुके हैं।

डीएफओ ने डिप्टी रेंजर व वीट गार्ड को दिया नोटिस  



नरेश सिंह यादव डीएफओ 
वन मंडलाधिकारी नरेश सिंह यादव  ने डिप्टी रेंजर दद्दी प्रसाद यादव व बीट गार्ड गोरेलाल द्विवेदी को फटकार लगाते हुये उन्हें कारण बताओ नोटिस थमाया है। डीएफओ का साफ कहना है कि वन अमले की मिली भगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण संभव नहीं है। उन्होंने डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड की इस बात को कि अतिक्रमण एक रात  में हुआ है को  सिरे से ख़ारिज करते हुये कहा कि इतना बड़ा अतिक्रमण एक ही रात में  कैसे संभव हो सकता है ? निश्चित ही  इसके लिए किसी न किसी रूप में वन अमला जिम्मेदार है, अपनी जवाबदारी से वे बच नहीं सकते ।  श्री यादव ने कहा कि डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने वन परिक्षेत्राधिकारी देवेंद्रनगर को निर्देश दिये कि जब तक वन भूमि से पूरी तरह अतिक्रमण नहीं हट जाता तब तक अतिक्रमण वाली वन भूमि पर कैम्प करें। डीएफओ ने मामले के संबंध में पुलिस की मदद लेने के लिये एसपी पन्ना मयंक अवस्थी को पत्र भी लिखा है। उन्होंने बताया कि पुलिस व राजस्व अमले के साथ मौके पर जाकर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जायेगी।

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Sunday, August 4, 2019

कोई तरस रहा उजियारे को, कोई सूरज बांध के सोता है

  •   'अंधेरों ने पत्र लिखा सूरज के नाम' काव्य कृति का हुआ लोकार्पण
  •   छत्रसाल महाविद्यालय के सभाकक्ष में रहा साहित्य रसिकों का जमावड़ा
  •   अच्छी कविता अपने समय के साथ भविष्य की भी बात करती है : डॉ. शर्मा


छत्रसाल महाविद्यालय के सभा कक्ष में  काव्य कृति के लोकार्पण अवसर पर मंचासीन अतिथि गण। फोटो - अरुण सिंह 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। अंधेरों ने पत्र लिखा सूरज के नाम काव्य कृति के लोकार्पण अवसर पर आज छत्रसाल महाविद्यालय पन्ना के सभाकक्ष में समूचे जिले के साहित्य रसिकों, बुद्धिजीवियों व शिक्षाविदों का जमावड़ा रहा। इस मौके पर वक्ताओं ने साहित्य के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुये अंधकार और प्रकाश की गहन विवेचना की। किसी ने कहा कि अंधकार का अपने आपमें कोई वजूद नहीं होता, वह तो महज प्रकाश की अनुपस्थिति है, प्रकाश की मौजूदगी होते ही अंधकार तिरोहित हो जाता है। 

कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों ने अंधकार की महत्ता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि अंधकार के बिना प्रकाश की ओर यात्रा नहीं हो सकती। बीज का अंकुरण गहन अंधकार में ही होता है, तभी उसका साक्षात्कार रोशनी से हो पाता है। अंधेरे में ही सृजन के अंकुर फूटते हैं, तभी कोपलें बाहर निकलकर हवाओं के साथ नृत्य करते हुये सूरज से बातें कर पाती हैं।

सेवानिवृत्त वाणिज्यिक कर अधिकारी एवं साहित्यकार बी.एम. नायक की अंधेरों ने पत्र लिखा सूरज के नाम काव्य कृति के लोकार्पण अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सत्येन्द्र शर्मा जहां उपस्थित रहे, वहीं छत्रसाल महाविद्यालय पन्ना के पूर्व प्राचार्य डॉ. टी.आर. नायक, डॉ. ए.के. खरे, नपा अध्यक्ष मोहन लाल कुशवाहा, डॉ. एच.एस. शर्मा, डॉ. पी.पी. मिश्रा मंचासीन रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन अपने चिर परिचित अंदाज में प्रो: एस.एस. राठौर ने किया। 

कार्यक्रम का शुभारंभ शास्त्रीय संगीत के शिक्षक जनार्दन खरे द्वारा सुमधुर स्वर में प्रस्तुत की गई सरस्वती वन्दना के साथ हुआ। तबले पर उनका साथ भगवत प्रसाद मिश्रा ने दिया। स्वागत गीत विजय कुमार शर्मा ने सस्वर प्रस्तुत किया। तदुपरान्त मंचासीन अतिथियों द्वारा काव्य कृति अंधेरों ने पत्र लिखा सूरज के नाम का लोकार्पण किया।

समारोह को संबोधित करते हुये मुख्य अतिथि डॉ. सत्येन्द्र शर्मा ने कहा कि अच्छी कविता जहां एक ओर अपने समय की कविता होती है, वहीं वह भविष्य की भी बात करती है। वर्तमान व भविष्य दोनों को अपने जेहन में समेटने वाली कविता ही कालजयी कृति बनती है। पुस्तक के रचयिता श्री नायक ने कविता में अपने परिजनों सहित छत्रसाल महाविद्यालय की यादों को भी संजोया है। उन्होंने नगर के चित्रकार लल्लू भैया एवं अजयगढ़ के देवीदयाल पाठक को याद करते हुये कृतज्ञता ज्ञापित की है। 

डॉ. शर्मा ने कहा कि नायक जी की कविता में व्यक्ति से समष्टि तक जन तंत्रीय व्यवस्था, व्यथा की बात विशेष उल्लेखनीय है। जन तंत्रीय प्रणाली एवं नारी की संवेदना दोनों ही नाजुक विषयों पर उनका चित्रण सराहनीय है। उनकी कविता में ज्ञान की सुरसरि प्रवाहित है। कार्यक्रम में डॉ. टी.आर. नायक, डॉ. पी.पी. मिश्रा तथा डॉ. एच.एस. शर्मा ने भी काव्य कृति पर प्रकाश डालते हुये सारगर्भित उदबोधन  दिया। 

इस मौके पर छत्रसाल महाविद्यालय पन्ना के पूर्व छात्र रहे प्रदीप सिंह राठौड़, मुरारी लाल थापक, रोनी जेम्स, कल्लू दीक्षित सहित नगर के साहित्यकारों में एस. कुमार चनपुरिया, गोविन्द यदुवंशी, पं. उमादेव उपाध्याय, सुरेश सौरभ, जगदीश कुशवाहा, प्रदीप श्रीवास्तव दीप, उपेन्द्र मिश्र, सीताराम कुशवाहा, शम्भू प्रसाद खरे, श्रीमति राधा जनार्दन, श्रीमति भूमि कुमारी, रामआसरे सोनी व अश्वनी चौबे की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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बाघ की उपस्थिति वन इको सिस्टम संरक्षित होने का प्रतीक : श्री परशुराम

  • जैव-विविधता का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन जरूरी है 
  • व्याख्यान-माला असरदार परिवर्तन-टिकाऊ परिणाम सम्पन्न



अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के महानिदेशक श्री आर. परशुराम ने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन के लिये सभी प्रजातियों का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बाघ के संरक्षण का महत्व और भी अधिक है, क्योंकि यह प्राणी वनों में शीर्ष प्रिडेटर के रूप में स्थापित है। इसकी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि वन इकोसिस्टम संरक्षित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में विकास एवं जैव-विविधता में भी संतुलन बनाये रखना महत्वपूर्ण है। श्री परशुराम व्याख्यान-माला असरदार परिवर्तन-टिकाऊ परिणाम में सरवाइवल ऑफ पन्ना टाइगर रिजर्व इन द लार्जर कान्टेक्स्ट ऑफ प्रोटेक्टिंग बॉयो डायवर्सिटी एण्ड नेचुरल इकोसिस्टम्स विषय पर विचार व्यक्त कर रहे थे।

टाइगर स्टेट का दर्जा मिलने में पन्ना के बाघों का महत्वपूर्ण योगदान


मध्यप्रदेश जैव-विविधता बोर्ड के सदस्य श्री आर. श्रीनिवास मूर्ति ने कहा कि जैव-विविधता के तीन स्तर- जीन, प्रजाति तथा पारिस्थितिक तंत्र हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन्हीं के संरक्षण से मनुष्य को खाद्य, पानी एवं स्वास्थ्य की सुरक्षा प्राप्त होती है, लेकिन इसमें लगातार क्षति हो रही है, जिसका पुनर्स्थापन किया जाना जरूरी है।

श्री मूर्ति ने पन्ना टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर के रूप में पदस्थ रहने के दौरान किये गये कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाघ विहीन हो गये पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों को पुनर्स्थापित करने में स्थानीय लोगों की सहभागिता सराहनीय थी। उन्होंने इस प्रक्रिया में आयी चुनौतियों को भी साझा किया। श्री मूर्ति ने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिलने में पन्ना के बाघों की संख्या में हुई बढ़ोत्तरी का महत्वपूर्ण योगदान है।

Saturday, August 3, 2019

रवीश : बेजुबानों को आवाज देने वाला पत्रकार

  • पत्रकारिता में रवीश होने के लिये झंझावातों से गुजरकर निखरना पड़ता है 





पत्रकारिता में रवीश हो जाना हर युवा पत्रकार की ख्वाहिश हो सकती है, लेकिन इस ख्वाहिश को हकीकत बनाना आसान नहीं होता। इसके लिए झंझावातों से गुजरना पड़ता है, न सहन होने वाली गालियों और धमकियों को भी सहज भाव से झेलना पड़ता है तब कहीं जाकर बेजुबानों को आवाज देने वाले तथा सत्ता सिंहासन में बैठे लोगों से तीखे सवाल पूछने वाले रवीश का जन्म होता है। नोबेल पुरस्कार का एशियाई संस्करण कहा जाने वाला रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिलने से आज रवीश कुमार के माध्यम से उन सभी पत्रकारों को संबल और प्रेरणा मिली है जो जन सरोकार वाली सकारात्मक पत्रकारिता के न सिर्फ पक्षधर हैं अपितु उसी राह पर चल भी रहे हैं। पत्रकारिता को गौरव और नया आयाम प्रदान करने वाले रवीश कुमार को इस उपलब्धि के लिए बधाई!
अवार्ड फाउंडेशन ने पुरस्कार के लिए चयनित किए गए पत्रकार रवीश कुमार के बारे में क्या कहा है पढ़ें -

पिछले कुछ सालों में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आजाद और ज़िम्मेदार पत्रकारिता के स्पेस को सिकुड़ते देखा है। इसके पीछे कई सारे कारण हैं।  नई सूचना प्रोद्योगिकी के कारण बदलता मीडिया का स्वरूप, खबर और रायशुमारी का बाजारीकरण, सरकार का बढ़ता नियंत्रण और सबसे चिंताजनक है लोकप्रिय अधिनायकवाद और धार्मिक-जातीय-राष्ट्रवादी कट्टरपंथियों का अपने सतत विभाजनकारी, असहिष्णु और हिंसक तरीके से उभार।

इन बढ़ते खतरों के विरोध में भारत में एक अहम आवाज हैं टीवी पत्रकार रवीश कुमार। हिंदीभाषी राज्य बिहार के जितवापुर गांव में पैदा हुए और पले-बढ़े रवीश ने अपने शुरुआती रुझान के मुताबिक अपनी परास्नातक डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और पब्लिक अफेयर्स में ली। 1996 में उन्होंने एनडीटीवी ज्वाइन किया और एक फील्ड रिपोर्टर के तौर पर शुरुआत की। देश की 42 करोड़ हिंदी भाषी जनता के बीच एनडीटीवी ने जब अपना हिंदी चौनल एनडीटीवी-इंडिया लॉंच किया तो रवीश कुमार का अपना शो शुरु हुआ - प्राइम टाइम। आज एनडीटीवी के सीनियर एक्सीक्यूटिव एडीटर के तौर पर रवीश कुमार, देश के सबसे प्रभावशाली टीवी पत्रकारों में से एक हैं।

हालांकि उनकी सबसे बड़ी विशेषता वो पत्रकारिता है, जिसका वो प्रतिनिधित्व करते हैं। एक ऐसे मीडिया के माहौल में, जो एक दखलअंदाज सत्ता से डरा हुआ है, जो कट्टर राष्ट्रवादी ताकतों और ट्रोल्स से जहरीला हो गया है और फेक न्यूज से भरता जा रहा है और जहां बाजार की रेटिंग्स ने सारा दांव मीडिया शख्सियतों, पीत पत्रकारिता और दर्शकों को लुभाने वाली सनसनी पर लगा रखा है, रवीश पत्रकारिता की सभ्य, संतुलित और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग शैली को ही पेशेवर पत्रकारिता बनाए रखने पर अड़े हुए हैं। एनडीटीवी पर उनका कार्यक्रम प्राइम टाइम ताजातरीन सामाजिक मुद्दों को उठाता है, गंभीर बैकग्राउंड रिसर्च करता है और मुद्दे को एक या उससे भी अधिक एपीसोड्स में एक बहुआयामी चर्चा के साथ सामने रखता है। इस कार्यक्रम में मुद्दे असल ज़िंदगी में आम लोगों की अनकही दिक्कतों की बात करते हैं - जो सीवर में नंगे हाथ-पैर उतरने वालों और रिक्शाचालकों से लेकर सरकारी कर्मचारियों और किसानों की तकलीफ से अर्थाभाव से जूझते सरकारी स्कूलों और अकर्मण्य रेलवे तंत्र तक हो सकते हैं। रवीश सरलता से गरीब जनता से संवाद करते हैं, खूब यात्राएं करते हैं और अपने दर्शकों से संपर्क में रहने के लिए सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल करते हैं और इसके जरिए भी अपने कार्यक्रम के लिए स्टोरीज तैयार करते हैं। जन-आधारित पत्रकारिता की लगातार कोशिश करते हुए, वो अपने न्यूजरूम को जनता का न्यूजरूम कहते हैं।

रवीश भी कई बार कुछ नाटकीयता का सहारा लेते हैं क्योंकि उनका मानना है कि ये प्रभावी तरीका है। उन्होंने 2016 में एक अनोखे ढंग के शोर में नाटकीय ढंग से बताया था कि कैसे टीवी न्यूज शोज में बहस का स्तर कितना गिर चुका है। शो की शुरुआत में स्क्रीन पर आते हुए रवीश बताते हैं कि कैसे टीवी न्यूज शोज गुस्सैल और कानफो़ड़ू आवाजों के अंधेरे जगत में बदल गए हैं। उसके बाद स्क्रीन काली हो जाती है और अगले एक घंटे तक स्क्रीन काली रहती है और पीछे से असल टीवी शोज के कर्कश ऑडियो, जहरीली धमंकियां, बौखलाहट भरी रट, साउंडबाइट्स और दुश्मन का खून बहाने को तत्पर भीड़ का शोर सुनाई देते रहते हैं। रवीश के मुताबिक उनके लिए हमेशा संदेश अहम है, जिसे दिया जाना ही चाहिए।

एक एंकर के तौर पर रवीश हमेशा भद्र हैं, संतुलित हैं और सूचना से सुसज्जित रहते हैं। वो अपने अतिथि पर हावी नहीं होते बल्कि उनको अपनी बात कहने का मौका देते हैं। वो चिल्लाते नहीं, लेकिन सबसे ऊंचे शक्ति की ज़िम्मेदारी भी गिनाते हैं और देश में सार्वजनिक-विमर्श में भूमिका के लिए मीडिया की भी निंदा कर डालते हैं, इस वजह से उनको लगातार अलग-अलग तरह की कट्टर शक्तियों की धमकिय़ों और खतरों का सामना करना पड़ता रहा है। इन सारी मुश्किलों और बाधाओं के बावजूद भी रवीश एक समीक्षात्मक, सामाजिक तौर पर जवाबदेह मीडिया के स्पेस को बढ़ाते रहने के अपने प्रयासों में लगे रहे हैं। एक ऐसी पत्रकारिता में भरोसा रखते हुए, जिसके केंद्र में आम लोग हैं, रवीश पत्रकार के तौर पर अपनी भूमिका को मूलभूत रूप से परिभाषित करते हैं, अगर आप लोगों की आवाज बन सकते हैं, तो ही आप पत्रकार हैं।

2019 के रेमन मैगसेसे पुरस्कार के लिए रवीश कुमार का चुनाव करते हुए, बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज उनके उच्चतम कोटि के तिक पत्रकारिता के प्रति अडिग समर्पण को ध्यान में रखता हैरू उनका नैतिक साहस जिसके दम पर वो सच के लिए खड़े होते हैं, उनकी ईमानदारी, आजादी और उनके उस सैद्धांतिक विश्वास को सम्मानित करता है, जिसके मुताबिक पत्रकारिता लोकतंत्र की उन्नति में अपना सबसे आदर्श लक्ष्य तब हासिल करती है, जब वो सच को साहस से बोलती है, बेआवाजों की आवाज को सत्ता के सामने ताकत देती है, लेकिन अपनी भद्रता नहीं खोती...
( रेमन मैगसेसे पुरस्कार की वेबसाइट से, अनुवाद - मयंक सक्सेना )

Friday, August 2, 2019

करोंडो रुपये कीमत की इकोलॉजिकल सर्विस दे रहा पन्ना टाइगर रिज़र्व

  • आईआईएफएम ने किया देश के 10 टाइगर रिज़र्व की इकोनॉमिक वैल्यू का आकलन 
  •  रिज़र्व के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक


पन्ना टाइगर रिज़र्व के जंगल का विहंगम द्रश्य। 

।। अरुण सिंह, पन्ना ।।

जंगल और पेड़-पौधों का संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत है। जंगल से हमें सहज रूप में जो कुछ मिलता है उसका कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता। पेड़-पौधों और वनों द्वारा प्रदत्त सेवायें अतुलनीय और अमूल्य हैं यह बात अब कथा कहानियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि शोध रिपोर्ट भी वनों के महत्व को रेखांकित करती है। मालुम हो कि बाघों का पर्यावरण के संरक्षण व पारिस्थितिकी तंत्र को समृद्ध करने में अहम योगदान होता है।

जंगल में बाघों की मौजूदगी इस बात का संकेत होता है कि  वहां का जंगल अच्छा और समृद्ध है। बाघ अभ्यारण्यों के योगदान व उनके महत्व का आँकलन करने के लिए देश के 10 महत्वपूर्ण टाईगर रिज़र्व का मूल्यांकन भोपाल स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ  फारेस्ट मैनेजमेंट के सेंटर फॉर  इकोलॉजिकल सर्विसेस मैनेजमेंट ने किया है। आँकलन में यह पाया गया है कि रिजर्व के कारण स्वास्थ्य लाभ में न केवल बेहतर जलवायु और स्वच्छ हवा शामिल है बल्कि अन्य लाभ भी हैं। रिजर्व के आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। तीन साल की अवधि में किये गये अध्ययन में रोजगार सृजन, ईधन, लकड़ी, पानी और मिट्टी संरक्षण साथ-साथ जीन पल संरक्षण के लिए अन्य प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभों को भी ध्यान में रखा गया है।    
आँकलन रिपोर्ट के मुताबिक टाईगर रिजर्व में सिर्फ  बाघों का संरक्षण नहीं हो रहा, बल्कि ये हर साल देश की बड़ी आबादी को शुद्ध ऑक्सीजन और स्वच्छ पानी जैसी 4230.31 करोड़ से लेकर 16324.11 करोड़ रू. कीमत की पारिस्थितिकी सेवाएं दे रहे हैं। ये हजारों करोड़ रुपए के स्वास्थ्य लाभ भी हमें प्रदान करते हैं। अकेले मध्यप्रदेश के पन्ना टाईगर रिजर्व में 13745.53 करोड़ रू. के प्राकृतिक संसाधन जमा हैं। इसके अतिरिक्त यह हर साल 6954.56 करोड़ रू. की पारिस्थितिकी सेवाएं मुहैया करा रहा है। यह अपने चारों ओर की आबादी को हर साल 14455.42 करोड़ के स्वास्थ्य लाभ देता है। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) भोपाल के सेंटर फ ॉर इकोलॉजिकल सर्विस मैनेजमेंट ने देशभर के 10 टाईगर रिजर्व की इकोनॉमिक वैल्यू का आँकलन करते हुए यह निष्कर्ष निकाला है। पन्ना टाईगर रिजर्व पर हर साल सरकार जितना खर्च करती है, उसके बदले 1939.36 करोड़ रू. से अधिक के संसाधन यहां भविष्य के लिए तैयार हो रहे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में फैले टाईगर रिजर्व काष्ठ के रूप में कार्बन स्टोरेज और वाटर स्टोरेज का काम कर रहे हैं। वातावरण के बेहतर बनाने के लिए ऑक्सीजन उत्पादक और कार्बन डाई आक्साइड के अवशोषक का बड़ी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। नेशनल टाईगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के लिए इस रिपोर्ट को आईआईएफएम भोपाल की प्रोफेसर मधु वर्मा, चारु तिवारी, सुनीता आनंद, अद्वैत ईदगांवकर और आशीष डेविड ने मिलकर तैयार किया है।

टाईगर रिजर्व से होता है पानी का संरक्षण

टाईगर रिजर्व में सिर्फ  बाघों का ही संरक्षण नहीं हो रहा, बल्कि भविष्य के लिए लकड़ी और कार्बन स्टोरेज का काम कर रहे हैं। ये पानी का संरक्षण करते हैं, देश में 400 नदियां टाईगर रिजर्व से ही निकल रही हैं। ये बारिश में अपना सारा पानी बचाकर सालभर धीरे-धीरे हमें देते हैं। इन पर होने वाले इन्वेस्टमेंट कई गुना तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य में बड़ा राष्ट्रीय संसाधन होगा।

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