Sunday, November 30, 2025

सत्य एक पथहीन भूमि है : जे. कृष्णमूर्ति

जे. कृष्णमूर्ति 

“मैं यह दृढ़ता से कहता हूँ कि सत्य एक पथहीन भूमि है—और आप किसी भी मार्ग, किसी भी धर्म, किसी भी संप्रदाय के माध्यम से उसकी ओर नहीं जा सकते। यही मेरा दृष्टिकोण है, और मैं इसे पूरी तरह और बिना किसी शर्त के मानता हूँ। सत्य असीम है, असंस्कारित है—इसलिए उसे किसी संगठन में बाँधा नहीं जा सकता।

मैं किसी भी आध्यात्मिक संगठन से संबंध नहीं रखना चाहता—कृपया इसे समझें। ऐसे संगठन व्यक्ति को अपंग बना देते हैं, उसकी विशिष्टता नष्ट कर देते हैं—वही विशिष्टता जिसमें स्वयं सत्य की खोज अंकुरित होती है।

मैं अनुयायी नहीं चाहता—और मैं इसे पूरी गंभीरता से कहता हूँ। क्योंकि जैसे ही आप किसी का अनुकरण करते हैं, आप सत्य का अनुसरण करना छोड़ देते हैं।

मेरा उद्देश्य एक ही है—मनुष्य को मुक्त करना। मैं उसे हर प्रकार के पिंजरे से मुक्त करना चाहता हूँ, हर भय से, हर बंधन से—न कि नई धर्म व्यवस्थाएँ खड़ी करना या नए सिद्धांत स्थापित करना।

फिर आप पूछेंगे—“फिर आप दुनिया भर में बोलने क्यों जाते हैं?”

मैं आपको कारण बताता हूँ:

न अनुयायियों के लिए,

न किसी विशेष शिष्य समूह के लिए,

न धन के लिए,

न आरामदायक जीवन के लिए।

मनुष्य विचित्र रूप से अपने को दूसरों से अलग दिखाना चाहता है, चाहे वे भेद कितने भी हास्यास्पद क्यों न हों। मैं इस मूर्खता को बढ़ावा नहीं देना चाहता। मेरे न तो कोई शिष्य हैं, न कोई दूत—न पृथ्वी पर, न किसी आध्यात्मिक लोक में।

यदि केवल पाँच लोग भी ऐसे हों जो सचमुच सुनें, जीएँ, और अपने चेहरे को अनंत की ओर मोड़ें—तो वही पर्याप्त है। हजारों ऐसे लोगों का होना निरर्थक है जो परिवर्तन नहीं चाहते, जो नए को अपने पुराने, जड़ मन से ढालना चाहते हैं।

यदि मैं तीखे शब्दों में बोलता हूँ तो कृपया इसे करुणा की कमी न समझें।

जैसे एक शल्य-चिकित्सक दर्द देकर भी उपचार करता है—वैसे ही मैं भी बोलता हूँ।

मैं फिर कहता हूँ—मेरा केवल एक उद्देश्य है—मनुष्य को मुक्त करना।

उसे उसकी सीमाओं से बाहर निकलने में सहायता देना—क्योंकि उसी में शाश्वत आनंद और असीम आत्मबोध है।

मैं स्वयं मुक्त हूँ—अखंड, अपार, अंश नहीं, सम्पूर्ण।

जैसे एक कलाकार चित्र इसलिए बनाता है क्योंकि उसमें उसकी सहज अभिव्यक्ति है—वैसे ही मैं यह कार्य करता हूँ। मुझे किसी से कुछ प्राप्त नहीं करना।

आप इतने वर्षों से सुन रहे हैं, पर परिवर्तन कुछ ही लोगों में आया है।

अब कृपया मेरे शब्दों का परीक्षण करें—आलोचनात्मक बनें—ताकि आप मूल तक पहुँचें।

आप पूछें—“आप समाज के लिए कितने ख़तरनाक हैं?”

क्योंकि जो असत्य और अनावश्यक पर टिका है—उसके लिए सत्य सदा खतरा है।

मैं आपसे सहमति नहीं चाहता, न अनुकरण चाहता हूँ—मैं चाहता हूँ कि आप समझें।

मैं कहता हूँ—प्रकाश, पवित्रता, सौंदर्य—सब आपके भीतर है।

सच्ची आध्यात्मिकता यही है— स्व की विशुद्धता, जहाँ बुद्धि और प्रेम समरस हों।

यही वह शाश्वत सत्य है जो जीवन ही है।

कमज़ोर लोगों के लिए कोई संगठन सत्य का मार्ग नहीं दिखा सकता—क्योंकि सत्य बाहर नहीं, भीतर है—न दूर, न पास—वह हमेशा यहीं है।

पत्रकार मुझसे हमेशा पूछते हैं—“कितने सदस्य हैं? कितने अनुयायी हैं? संख्या से हम सत्य को परखेंगे।”

मैं कहता हूँ—मुझे नहीं पता। मैं परवाह भी नहीं करता।

यदि एक मनुष्य भी मुक्त हुआ—तो वही पर्याप्त है।

आप सोचते हैं कि कोई अन्य व्यक्ति सुख और मुक्ति की कुंजी रखता है।

कोई भी उस कुंजी का स्वामी नहीं।

वह कुंजी आप स्वयं हैं—आपकी पवित्रता, आपकी निर्मलता, आपकी अडिग सत्यनिष्ठा ही अनंत के द्वार खोलती है।

इसलिए बाहर सहारे ढूँढना, दूसरों पर निर्भर रहना—यह सब निरर्थक है।

हर्ष, शक्ति, शांति—सब भीतर से जन्म लेते हैं।

आपको बताया जाता है कि आपकी आध्यात्मिक प्रगति कितनी है—कितना बचकाना है यह!

आपके भीतर सौंदर्य या कुरूपता कौन बता सकता है—सिवाय आपके?

जो लोग सचमुच समझना चाहते हैं—जो आरंभहीन-अंतहीन चिर सत्य को पाना चाहते हैं—वे साथ चलेंगे, तीव्रता के साथ, और वे असत्य के लिए खतरा होंगे।

वे स्वयं ही दीपक बनेंगे—क्योंकि वे समझते हैं।

ऐसा समूह बनाना आवश्यक है—और यही मेरा उद्देश्य है।

इस समझ से ही सच्ची मित्रता उत्पन्न होगी—जिसे आप अभी नहीं जानते—और इस मित्रता से सहयोग।

पर यह न किसी अधिकार से होगा, न मुक्ति के लालच से—केवल समझ के कारण।

यदि आप संगठन बनाना चाहते हैं, सजावट करना चाहते हैं—वह आपका काम है।

पर मेरा कार्य एक ही है—मनुष्य को पूर्ण रूप से, बिना शर्त मुक्त करना.”

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Thursday, November 27, 2025

बाल विवाह के विरूद्ध 100 दिवसीय जन जागरूकता अभियान आरंभ

बाल विवाह की प्रथा समाज के लिए अभिशाप है, आइये इस कुप्रथा को समाप्त करें।  

पन्ना। बाल विवाह के विरूद्ध जन जागरूकता के लिए 100 दिवसीय अभियान का आगाज आज गुरुवार 27 नवम्बर से हो रहा है। बाल विवाह का अर्थ है जब लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम और लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम हो, तो उनका विवाह हो जाए। भारत में बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिस पर रोक लगाने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है, जिसके अनुसार लड़की की न्यूनतम आयु 18 और लड़के की 21 वर्ष है। इसके दुष्परिणामों में स्वास्थ्य जोखिम, शिक्षा में बाधा और हिंसा का खतरा शामिल है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बाल विवाह की प्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरूआत 27 नवम्बर 2024 को की गई थी। अभियान के एक वर्ष पूर्ण होने पर एवं बाल विवाह मुक्त भारत की दिशा में तेजी लाने के लिए अब संपूर्ण देश में 100 दिवसीय इंटेंसिव थीम वाला अभियान 27 नवम्बर 2025 से आरंभ होगा। यह अभियान आगामी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च तक निरंतर रूप से संचालित किया जाएगा। सेचुरेशन अप्रोच के साथ आयोजित होने वाले इस अभियान में प्रत्येक चिन्हित संस्था, सामुदायिक स्थल व सेवा प्रदाता तक पहुँच सुनिश्चित की जाएगी। कलेक्टर ऊषा परमार ने अभियान के क्रियान्वयन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, जिला संयोजक, जनपद पंचायत सीईओ, बाल विकास परियोजना अधिकारी तथा प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

जिला कार्यक्रम अधिकारी अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि अभियान का शुभारंभ गुरूवार को विशाखापट्टनम में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम से होगा। इस अवसर पर पूरे देश में एक सामूहिक शपथ के माध्यम से भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने के संकल्प को पुनः दोहराया जाएगा। कैंपेन का पहला चरण 27 नवम्बर से 31 दिसम्बर तक शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से जनजागरूकता पर केन्द्रित होगा, जबकि द्वितीय चरण में एक से 26 जनवरी तक धार्मिक स्थानों और विवाह से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर्स पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 

इसमें मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारा, वेडिंग हॉल, बैन्ड पार्टी, डीजे, कैटरर और टेंट हाउस शामिल हैं। इस दौरान स्थानीय पुलिस और कम्युनिटी वालेंटियर्स के साथ वैवाहिक सीजन में सघन निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। तृतीय तथा अंतिम चरण में एक फरवरी से 8 मार्च तक समुदाय स्तर पर जुड़ाव और ओनरशिप को मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायत और नगरीय क्षेत्रों के वार्डों में गतिविधियों का आयोजन कर फोकस किया जाएगा।

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Saturday, November 22, 2025

पन्ना टाइगर रिज़र्व में हथिनी अनारकली ने दिया दो मादा बच्चों को जन्म

  •  नन्हे मेहमानों के आने से टाइगर रिजर्व में खुशी का माहौल 
  •  पन्ना में बाघों के साथ-साथ बढ़ रहा हाथियों का भी कुनबा

हथिनी अनारकली अपने दोनों नवजात शिशुओं के साथ, पास ही खड़े वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। बाघों के लिए प्रसिद्ध मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व में बाघों के साथ-साथ हांथियों का कुनबा भी बढ़ रहा है। यहाँ की हथिनी अनारकली ने एक साथ दो मादा बच्चों को जन्म दिया है। आमतौर पर हथिनी एक ही बच्चे को जन्म देती है, पन्ना टाइगर रिज़र्व के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी हथिनी ने तक़रीबन 3 घण्टे के अंतराल में दो बच्चों को जन्म दिया है। इन नन्हे मेहमानों के आने से पन्ना टाइगर रिज़र्व में खुशी का माहौल है। इन नये मेहमानों के आने के साथ ही पीटीआर में हांथियों का कुनबा बढ़कर 21 हो गया है। 

वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि हथिनी अनारकली ( 57 वर्ष ) ने शुक्रवार को दोपहर 2.20 बजे खैरईया में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। जन्म देने के उपरांत हथिनी नन्हे बच्चे को वहां से लेकर हिनौता हांथी कैम्प पहुंची और यहाँ पर शाम 5.50 बजे दूसरे बच्चे को जन्म दिया। दोनों नवजात बच्चे व मां पूरी तरह से स्वस्थ हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि इसके पूर्व उन्होंने न तो कहीं देखा और न ही सुना कि किसी हथिनी ने एक साथ दो बच्चों को जन्म दिया है। पन्ना में यह अजूबा पहली बार देखने को मिला है। 

उन्होंने बताया कि हथिनी व उसके नन्हे शिशु की समुचित देखरेख तथा विशेष भोजन की व्यवस्था की जा रही है। हथिनी को दलिया, गुड, गन्ना तथा शुद्ध घी से निर्मित लड्डू खिलाये जा रहे हैं ताकि दोनों नन्हे शिशुओं को पर्याप्त दूध मिल सके। हथनी व उसके शिशुओं की देखरेख व निगरानी के लिए स्टाफ की तैनाती की गई है। गौरतलब है कि पन्ना टाईगर रिजर्व में वनराज व गजराज दोनों के ही कुनबे में वृद्धि हो रही है, जो निश्चित ही प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक शुभ संकेत है। वर्तमान में पन्ना टाईगर रिजर्व के पास कुल 21 हाथी हो गये हैं,  जिनमें से 05 नर एवं 16 मादा हांथी हैं। इनमें 11 वयस्क, 3  अर्द्ध वयस्क एवं 7 बच्चे सम्मिलित हैं। 

सोनपुर के मेले से पन्ना लाई गई थी अनारकली 

हथिनी अनारकली के पन्ना आने की भी दिलचस्प दास्तान है। बताया गया है क़ि 18 वर्ष की उम्र में हथिनी अनारकली को जून 1986 में सोनपुर के मेले से पन्ना लाया गया था। तभी से यह हथिनी पन्ना टाइगर रिज़र्व में हांथियों के कुनबे में शामिल है। पन्ना टाइगर रिज़र्व में तक़रीबन 39 वर्ष तक अपनी सेवाएं देने के साथ इस हथिनी ने हांथियों के कुनबे को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अनारकली ने पन्ना टाइगर रिज़र्व में अब तक 6 बार बच्चों को जन्म दिया है। छठवीं बार इस हथिनी ने दो मादा बच्चों को जन्म देकर चर्चा में है। 

पन्ना टाइगर रिज़र्व के महावत बताते हैं कि अनारकली ग़स्ती के काम में बेहद निपुण है। वन क्षेत्र में शिकारियों व लकड़ी चोरों की आहट मिलने पर हथनी अनारकली उस दिशा में पत्थर बरसाने लगती हैं। जब हथिनी अपनी सूंड से पत्थर मारती है तो शिकारी जान बचाकर भागने को मजबूर हो जाते हैं। मानसून सीजन में बाघों की निगरानी व जंगल की सुरक्षा का दायित्व यहाँ के हाथी बखूबी निभाते हैं। टाइगर रिजर्व के पहुंच विहीन क्षेत्रों में जहां नदी नालों के कारण मैदानी वन अमला नहीं पहुंच पाता, ऐसे इलाकों में टाइगर रिजर्व के प्रशिक्षित हाथी मुस्तैदी के साथ गस्त करते हैं। हाथियों की मदद से टाइगर रिजर्व के बेहद संवेदनशील इलाकों में भी गस्त संभव हो जाती है।

नवजात शिशुओं के साथ हथिनी का वीडियो :



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Thursday, November 20, 2025

आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पाण्डेय को मिला कर्मयोगी पुरस्कार

 

पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश कुमार पाण्डेय कर्मयोगी पुरस्कार से सम्मानित करते हुए। 

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पदस्थ आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश कुमार पाण्डेय को कर्मयोगी पुरस्कार मिला है। कर्मयोगी प्रशिक्षण में मध्य प्रदेश में आबकारी विभाग में समस्त लोकसेवकों में राज्य स्तर पर तृतीय स्थान मिलने पर श्री पाण्डेय को आबकारी आयुक्त मध्य प्रदेश अभिजीत अग्रवाल द्वारा प्रदत्त प्रशस्ति पत्र को पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार ने प्रदान किया। इस अवसर पर जिला आबकारी अधिकारी मुकेश कुमार मौर्य, एसडीएम संजय कुमार नागवंशी, सहायक जिला आबकारी अधिकारी शंभू दयाल जाटव भी उपस्थित थे।

केंद्र सरकार द्वारा केंद्र और राज्य कर्मचारियों को विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने के लिए आई गॉट कर्मयोगी पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल में केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा अपने विभाग संबंधी विषय, योजनाओं और गतिविधियों के संबंध में विभिन्न कोर्स तैयार किए गए। इसके साथ ही जीवन प्रबंधन एवं कार्यस्थल प्रबंधन संबंधी पाठ्यक्रम भी तैयार किए गए। केंद्र और राज्य सरकार ने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को कर्मयोगी पोर्टल से न्यूनतम प्रशिक्षण अनिवार्य किया है। 

प्रदेश शासन द्वारा इसके लिए गत माह अभियान भी चलाया गया था। आबकारी आयुक्त कार्यालय द्वारा विभाग के टॉप 10 कर्मयोगी लोकसेवकों को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया था। इस क्रम में आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश कुमार पाण्डेय को भी कर्मयोगी सम्मान से सम्मानित किया गया। श्री पाण्डेय की इस उपलब्धि पर समस्त अधिकारी-कर्मचारियों सहित शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।

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Wednesday, November 19, 2025

पन्ना ने दिलाया प्रदेश को डायमंड स्टेट और टाइगर स्टेट का दर्जा : मुख्यमंत्री

  • जीआई टैग मिलने से पन्ना के डायमंड को मिली है वैश्विक पहचान
  • मुख्यमंत्री ने 83 करोड़ रू. के कार्यों का किया लोकार्पण व भूमिपूजन

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव पन्ना जिले के शाहनगर में आयोजित हितग्राही सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए 

पन्ना। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को पन्ना जिले के शाहनगर में आयोजित हितग्राही सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि पन्ना की रत्नगर्भा भूमि किसी पहचान की मोहताज नहीं है। पन्ना ने खुद के साथ मध्यप्रदेश को भी गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि इन दिनों जहां देखो, उधर अपना पन्ना ही चमक रहा है। पन्ना की पुण्यधरा से निकलने वाले पारस (हीरा) से मध्यप्रदेश पूरे विश्व में मशहूर हो रहा है। मध्यप्रदेश को 'डायमंड स्टेट' और 'टाइगर स्टेट' का दर्जा दिलाने का श्रेय भी पन्ना को ही जाता है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना डायमंड को जीआई टैग मिलने पर जिलेवासियों को बधाई देते हुए कहा कि जीआई टैग ने पन्ना की पहचान पर अब वैश्विक मुहर लगा दी है। अब पूरी दुनिया यहां के हीरों को 'पन्ना डायमंड' के नाम से ही जानेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'पन्ना डायमंड' अब एक ब्रांड के रूप में उभर रहा है। इससे न सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में पहचान बढ़ेगी, बल्कि वैल्यू-चेन, माइनिंग, प्रोसेसिंग, एक्सपोर्ट और जेम-आधारित उद्योग, सबमें निवेश के नए अवसर सामने आएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पन्ना जिले को बहुत जल्द मेडिकल कॉलेज की सौगात मिलने वाली है। आज पन्ना और छतरपुर के बीच भव्य राजगढ़ पैलेस होटल का शुभारंभ भी हुआ है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को पन्ना जिले की पवई विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत शाहनगर में हितग्राही सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां करीब 83 करोड़ रूपए की लागत वाले 14 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इसमें 9 करोड़ रूपए की लागत से बनी बिसानी-श्यामगिरी-कल्दा-सले हा वाया मैन्हा मार्ग के उन्नयन कार्य का लोकार्पण एवं 74 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले 13 विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल हैं। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री ने 4.25 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले पवई में तिघरा बैराज का भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन एवं कन्या पूजन कर हितग्राही सम्मेलन की शुरूआत की। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मारतम् गायन के साथ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई विकास प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर रैपुरा में नवीन महाविद्यालय खोलने, वर्तमान ग्राम पंचायत शाहनगर को नगर परिषद बनाने तथा शाहनगर ब्लॉक में दो अतिरिक्त स्वास्थ्य केन्द्र खोलने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने करीब 135 करोड़ की लागत से टिकरिया-रीठी वाया खमरिया मार्ग का निर्माण करने, शाहनगर-बोरी-चमरईया सड़क मार्ग के चौड़ीकरण सहित पुराने बांधों की नहरों का सर्वे कराकर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार का काम कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पवई और शाहनगर महाविद्यालय में विधि और विज्ञान संकाय भी शुरु किया जाएगा तथा शाहनगर के बंद उद्योग फिर से शुरू कराए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पन्ना के विकास को नई उड़ान देने के लिए राज्य सरकार पन्ना में 15 करोड़ की लागत से डायमंड बिजनेस पार्क तैयार कर रही है। यह पार्क पन्ना की अर्थव्यवस्था में एक नया अध्याय लिखेगा। इसके साथ बड़ागांव में 40 हेक्टेयर क्षेत्र में औद्योगिक पार्क का विकास लगभग पूर्ण है। वर्षों से बंद पड़ी एनएमडीसी परियोजना को हमने पुनः प्रारंभ कराया गया है, जिससे बड़े स्तर पर हीरो का खनन एक बार फिर प्रारंभ हो चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना जिले के विकास को नया रूप देगी। केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना से जिले में 1 लाख 35 हज़ार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 600 से अधिक गांवों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। हमारे पवई को भी इसका भरपूर लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि पन्ना टाइगर रिज़र्व, विश्व प्रसिद्ध हीरे, समृद्ध वन संपदा, केन नदी का अ‌द्भुत कछार और राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियां सब मिलकर आने वाले वर्षों में जिले की अर्थव्यवस्था को एक नए स्वरूप में ढालने वाले हैं। 

उन्होंने कहा कि पन्ना टाइगर रिज़र्व वाइल्ड लाइफ टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। बाघों की बढ़ती संख्या, पार्क की वैश्विक प्रतिष्ठा और पर्यटकों का रुझान, स्थानीय युवाओं के लिए गाईडिंग, होटल रिसॉर्ट, ट्रांसपोर्ट और हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर बना रहा है। सरकार द्वारा होम-स्टे, एडवेंचर टूरिज्म और कनेक्टिविटी सुधारने के प्रयासों से क्षेत्र के विकास को गति मिल रही है। हम पन्ना जिले के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण में पन्ना पूरे प्रदेश में अग्रणी है। यहां 10 हज़ार 301 स्व-सहायता समूहों की 1 लाख से अधिक बहनों को 180 करोड़ रुपए से ज़्यादा का बैंक लिंकेज मिला है, जिसमें से लगभग 18 हज़ार महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पन्ना जिले की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। लाड़ली बहनों को प्रति माह 1500 रुपए राशि भेजी जा रही है। 

उन्होंने कहा कि पन्ना जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापना के लिए करीब 25 एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है और संबंधित निवेशक के साथ एमओयू भी हो चुका है। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत पवई बांध ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना द्वारा 158 ग्रामों में पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, खजुराहो सांसद वी.डी. शर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह, पवई विधायक प्रह्लाद सिंह लोधी सहित जनप्रतिनिधि, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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पन्ना टाइगर रिजर्व में गाइडों की हड़ताल से पर्यटक हो रहे परेशान

पन्ना टाइगर रिजर्व मड़ला कोर गेट के गाइड अपनी समस्या बताते हुए। 

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में पिछले तीन दिनों से गाइडों की हड़ताल चल रही है। इस हड़ताल के चलते पन्ना टाइगर रिज़र्व भ्रमण हेतु आने वाले पर्यटक परेशान हो रहे हैं। पर्यटक वाहनों के साथ गाइडों के न जाने से टाइगर रिजर्व के कोर जोन में नियमों का उल्लंघन भी हो रहा है।

उल्लेखनीय है की विगत तीन दिनों से पन्ना टाइगर रिजर्व के गाइड हड़ताल पर है। हड़ताल किए जाने की मुख्य वजह पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक द्वारा अचानक जारी किया गया एक आदेश है। गाइडों के मुताबिक 13 नवंबर को बिना किसी पूर्व सूचना के कोर गेट मंडला एवं झिन्ना गेट बफर में नए गाइडों की भर्ती का आदेश कर दिया गया है। 

मंगलवार को इन गाइडों ने अपनी मांगों के निराकरण हेतु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं स्थानीय सांसद विष्णु दत्त शर्मा तथा विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह से जिला मुख्यालय पहुंचकर मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा है। गाइडों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि कोर गेट मंडला में पहले से ही पर्याप्त संख्या में 49 गाइड कार्यरत हैं । उन्हें वर्तमान में भी प्रतिदिन रोजगार नहीं मिल पा रहा है। नई भर्ती हो जाने से पुराने गाइडों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा और उनकी बेरोजगारी की समस्या और बढ़ जाएगी। उन्होंने मांग पत्र के माध्यम से क्षेत्र संचालक द्वारा की गई इस नई गाइड भर्ती को तत्काल प्रभाव से रोके जाने और पुराने गाइडों को यथावत उनके पद पर बनाए रखने की मांग की है।


बताया गया है कि कोर गेट मंडला की महिला गाइडों को झिन्ना बफर में नाइट सफारी में जाने हेतु कहा जा रहा है। इस पर कोर क्षेत्र की महिला गाइडों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए इस पर असहमति जताई है। गाइडों का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मोहित सूद ने महिला गाइड के साथ अभद्रता पूर्ण व्यवहार करते हुए कहा है कि अगर बफर नाइट सफारी में नहीं जाना तो आप नौकरी छोड़ दें। डिप्टी डायरेक्टर के इस व्यवहार से महिला गाइड अत्यधिक आहत हैं। सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने गाइडों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनकी मांगों के त्वरित और उचित निराकरण के लिए आश्वासन दिया है।



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मुख्यमंत्री आज 82 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की देंगे सौगात

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 

पन्ना। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को दोपहर 2.50 बजे सतना जिले के नागौद से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान कर 3.10 बजे पन्ना जिले की पवई विधानसभा के शाहनगर पहुंचेंगे और कार्यक्रम स्थल खेल परिसर आमा में हितग्राही सम्मेलन के कार्यक्रम में शामिल होकर विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री शाम 5 बजे हेलिकॉप्टर द्वारा शाहनगर हेलीपैड से खजुराहो विमानतल रवाना होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में 82.62 करोड़ के कुल 14 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन होगा। लोक निर्माण विभाग के एक कार्य के लोकार्पण सहित मुख्यमंत्री 13 विकास कार्योें का भूमिपूजन करेंगे। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग के एक विकास कार्य का भूमिपूजन भी होगा।

डॉ. यादव 8.78 करोड़ लागत राशि से निर्मित बिसानी-सलेहा वाया मैन्हा मार्ग के उन्नयन कार्य का लोकार्पण करेंगे। इसी तरह 4.25 करोड़ के तिघरा बैराज का भूमिपूजन भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 7.19 करोड़ के ताला सारंगपुर मार्ग में मजबूतीकरण कार्य, 2.15 करोड़ के तिघरा करिया पटना मार्ग, 2.82 करोड़ के किन्ना मेन रोड से महोडकला मार्ग, 5.39 करोड़ के करिया से महोडकला मार्ग, 6.98 करोड़ के बगरोड से सुर्रा डोभा मार्ग, 2.43 करोड़ के कल्दा बछौन से गुवरदा मार्ग, 1.99 करोड़ के कल्दा बछौन से मगरदा मार्ग, 12.15 करोड़ के बगरोड सलैया समारी मार्ग, 4.97 करोड़ के नांदचांद नयाखेडा मार्ग, 9.13 करोड़ के ताला बंजारी मार्ग, 4.63 करोड़ के मोहन्द्रा-रैपुरा मार्ग के कि.मी. 37/8 से 38/8 तक में सीमेंट कांक्रीट मार्ग तथा 9.76 करोड़ के झिरिया हरिशचन्द्र से चहकना मार्ग का भूमिपूजन करेंगे। 

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Saturday, November 15, 2025

पेंच ने कायम की अनूठी मिशाल, आखिर पन्ना ने अपने संस्थापक बाघों को क्यों भुलाया ?

  • पेंच टाइगर रिजर्व में कबाड़ से बनाई गई है दुनिया की सबसे बडी बाघ स्टेच्यू 
  • पन्ना को भी अपने संस्थापक बाघों के सम्मान में करना चाहिए अभिनव पहल 

पेंच टाइगर रिजर्व में स्थापित हुई बाघ की विशाल स्टेच्यू का नजारा 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। पेंच टाइगर रिजर्व ने कबाड़ से विश्व की सबसे बड़ी टाइगर प्रतिमा का निर्माण कराकर अनूठी मिशाल कायम की है। विगत 12 नवंबर को सिवनी आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसका अनावरण किया। लोहे के स्क्रैप मटेरियल से बनी यह प्रतिमा 40 फीट लंबी, 17 फीट 6 इंच ऊंची और 8 फीट चौड़ी है। पेंच टाइगर रिजर्व के खवासा पर्यटन परिसर में बनाई गई टाइगर की प्रतिमा को गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज कराने की कवायद भी शुरु हो गई है। पेंच की तर्ज पर पन्ना को भी अपने संस्थापक बाघों के सम्मान में उनकी स्मृतियों को कायम रखने के लिए रचनात्मक पहल करनी चाहिए। 

उल्लेखनीय है कि म.प्र. के पन्ना टाइगर रिजर्व ने देश और दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। बाघ पुनर्स्थापना योजना को यहाँ मिली चमत्कारिक सफलता से पन्ना विश्व गुरु के रूप में अपने को स्थापित करने में कामयाब हुआ है। बीते 15 सालों में यहां जो कुछ हुआ उसे देखकर दुनिया भर के वन्य जीव प्रेमी उत्साहित और हतप्रभ हैं। एक ऐसा वन क्षेत्र जो वर्ष 2009 में बाघ विहीन हो गया था वहां 15 साल में ही सौ से भी अधिक बाघ हैं। यहाँ घटित बाघ पुनर्स्थापना की अनूठी कामयाबी की प्रेरणादायी स्मृतियों को तरोताजा करने के लिये पार्क प्रबंधन ने अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया जिससे पन्ना में घटित चमत्कार को आने वाली पीढ़ियां याद रखें तथा उससे प्रेरणा लें। 

पन्ना टाइगर रिजर्व का संस्थापक बाघ टी-3

बाघ पुर्नस्थापना के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व विश्व स्तर पर सफलता का मानक बन चुका है। यही वजह है कि दुनिया भर से लोग पन्ना आकर बाघों को फिर से आबाद करने के गुर सीखना चाहते हैं। बाघ पुर्नस्थापना योजना को यहां पर जिस तरह से शानदार सफलता मिली है, उसे द्रष्टिगत रखते हुए पन्ना में ग्लोबल टाइगर लर्निंग सेन्टर की स्थापना होनी चाहिए। यदि यहां पर टाइगर लर्निंग सेन्टर की स्थापना हो जाती है तो पूरी दुनिया के लोग यहां बाघों के संरक्षण व पुर्नस्थापना का पाठ सीखने के लिए आयेंगे, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ - साथ स्थानीय कम्युनिटी को भी लाभ मिलेगा। 

पन्ना की सफलता पूरे विश्व में उत्कृष्ट श्रेणी का है, जहां सभी पुर्नस्थापित बाघिनों का सफलतम प्रजनन हुआ है। पन्ना में न सिर्फ पुर्नस्थापित बाघों ने सफलता पूर्वक प्रजनन कर वंशवृद्धि की है, अपितु दो अर्द्ध जंगली बाघिनों को भी यहां जंगली बनाने में सफलता मिली है। इन दोनों ही बाघिनों ने जंगली बनकर शावकों को जन्म भी दिया है।

पन्ना में बाघ पुर्नस्थापना की कामयाबी के शिल्पी रहे तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर.श्रीनिवास मूर्ति ने पेंच टाइगर रिजर्व के अभिनव पहल को न सिर्फ सराहा है अपितु पन्ना को भी इससे प्रेरणा लेने की सलाह दी है। उन्होंने पीटीआर प्रबंधन से अनुरोध किया है कि पन्ना के सभी संस्थापक बाघों के लिए सकारात्मक अभिनव पहल हो, जिसमें प्रतिमा का निर्माण भी शामिल है। 

पन्ना टाइगर रिज़र्व को आज इस मुकाम तक लाने में सात संस्थापक बाघों का अहम् योगदान है। उनके इस योगदान को यादगार बनाया जाना चाहिए। पन्ना के संस्थापक बाघों में टी1 से टी7 तक सभी नर व मादा बाघ हैं। टी1, टी2 और टी6 मादा बाघ हैं, टी4 और टी5 अर्द्धजंगली बाघिनें थीं जिन्हे जंगली बनाया गया जबकि टी3  और टी7 नर बाघ हैं। श्री मूर्ति कहते हैं कि अपने संस्थापक बाघों के सम्मान में हम भी कुछ अभिनव पहल करें क्योंकि हम पहले ही देर कर चुके हैं। 

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Friday, November 14, 2025

खुशखबरी : पन्ना का हीरा अब होगा और खास, मिला जीआई टैग

  • पन्ना के हीरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अब मिलेगी एक विशिष्ट पहचान
  • जीआई टैग प्राप्त होने से अब हीरा व्यवसाय से जुड़े लोगों को होगा लाभ 


।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। बेशकीमती रत्न हीरा की खदानों के लिए देश और दुनिया में प्रसिद्ध मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की धरती से निकलने वाले हीरों को  जीआई टैग (GI tag) मिल गया है। जीआई टैग मिलने से पन्ना के हीरों की कीमत व महत्व और बढ़ जायेगा। मध्यप्रदेश के गौरव को बढ़ाने वाली यह खुशखबरी पन्ना के हीरा अधिकारी रवि पटेल ने आज शुक्रवार को दी है। 

उन्होंने बताया कि जीआई टैग मिलने से पन्ना के हीरों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैल्यू बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) यानी भौगोलिक संकेत एक प्रतीक है, जो मुख्य रूप से किसी उत्पाद को उसके मूल क्षेत्र से जोड़ने के लिए दिया जाता है। जिस वस्तु को यह टैग मिलता है, वह उसकी विशेषता बताता है।

पन्ना के हीरों को जीआई टैग मिले, इसके लिए ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी लखनऊ ने चेन्नई स्थित संस्था में जून 2023 में आवेदन किया था। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाली यह संस्था पूरी जांच पड़ताल और छानबीन के बाद जीआई टैग देती है। जीआई टैग मिलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उस प्रोडक्ट की कीमत व महत्व बढ़ जाता है। 

हीरा अधिकारी श्री पटेल ने बताया कि जिला प्रशासन, हीरा खनन विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग और पद्मश्री डॉ. रजनी कांत, मानव कल्याण संघ के  जीआई तकनीकी सहायता से पन्ना के हीरों को यह महत्वपूर्ण उपलब्धि (जीआई टैग) प्राप्त हुई है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की पहचान सदियों से यहां की धरती से निकलने वाले बेशकीमती हीरों के कारण है। यही वजह है कि पन्ना को डायमंड सिटी के नाम से भी जाना जाता है। 

जीआई टैग मिलने से पन्ना के हीरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक विशिष्ट पहचान मिलेगी, जिसका लाभ निश्चित ही पन्ना के हीरा व्यवसाय से जुड़े लोगों को मिलेगा। पन्ना के हीरे न केवल कानूनी मान्यता प्राप्त करेंगे, बल्कि अब इन हीरों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी तथा उपभोक्ताओं को प्रमाणित और विश्वसनीय हीरे मिल सकेंगे। पन्ना के हीरों की अपनी एक विशेष पहचान रही है, उनका हल्का हरा रंग और कार्बन लाइन इन्हें अन्य हीरों से अलग तथा कटिंग और चमक में बेजोड़ बनाती हैं।

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Thursday, November 13, 2025

पन्ना के धरमसागर तालाब परिसर का होगा सौंदर्यीकरण

  • जिपं सीईओ ने अधिकारियों के साथ किया स्थल का निरीक्षण
  • यह स्थल टूरिस्ट और पिकनिक स्पॉट के रूप में होगा विकसित 


पन्ना। मन्दिरों के शहर पन्ना में पहाड़ियों की तलहटी में स्थित झीलनुमा प्राचीन धरमसागर तालाब परिसर का सौंदर्यीकरण करके उसे टूरिस्ट और पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया जायेगा। यहाँ पर वृहद रूप में सौंदर्यीकरण सहित अन्य विकास कार्य किया जाना प्रस्तावित है। विभिन्न कार्यों के समय पर क्रियान्वयन के उद्देश्य से एवं समयबद्ध कार्ययोजना के मुताबिक आवश्यक कार्य प्रारंभ किया जाएगा। 

जिला कलेक्टर के निर्देश पर गुरूवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमराव सिंह मरावी द्वारा परियोजना अधिकारी जिला शहरी विकास अभिकरण शशिकपूर गढ़पाले एवं सीएमओ उमाशंकर मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों के साथ विकास कार्य स्थल का निरीक्षण किया गया और अधिकारियों को समय सीमा मेें वांछित कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अवैध अतिक्रमणकारी परिवार के सदस्यों से चर्चा कर नियत समय सीमा में निर्धारित सीमा से अतिक्रमण हटाने की समझाईश दी। इसके अलावा कुछ परिवारों को पूर्ण रूप से सतना बैरियर, काष्ठागार के निकट स्थित भूमि पर विस्थापन के संबंध में निर्देशित किया गया। 

इस दौरान विकास कार्य दायरे की चिन्हांकित सीमा को सुरक्षित करने के लिए फैंसिंग कार्य कराने पर भी चर्चा हुई। साथ ही पक्की सड़क के दोनों किनारों पर पेबर्स लगाने, चिन्हित स्थानों पर स्टोन पिचिंग कार्य सहित पार्क और गार्डन के विकास के लिए बाधारहित कार्य कराने पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने पैदल भ्रमण कर विभिन्न कार्यों के स्थल का निरीक्षण किया और नवीन एस्टीमेट सहित आर्किटेक्चर से आवश्यक प्लान तैयार कराने तथा नवीन प्रोजेक्ट के तहत नए सिरे से विकास कार्य की रूपरेखा पर भी विचार विमर्श किया।  


जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि धरमसागर तालाब के सौंदर्यीकरण से नगरवासियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। साथ ही प्राचीन तालाब और परिसर के नवीन स्वरूप से पन्ना नगर की अलग पहचान भी स्थापित होगी। निरीक्षण के दौरान वन विभाग की भूमि से भी अवैध अतिक्रमण हटाने के संबंध में जरूरी समन्वय के लिए अधिकारियों से जानकारी लेकर जरूरी निर्देश दिए गए। नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारियों को तालाब घाट परिसर की नियमित रूप से बेहतर साफ-सफाई तथा संयुक्त टीम के गठन के लिए भी निर्देशित किया गया। 

मौके पर उपस्थित सीएमओ को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए। उल्लेखनीय है कि नगर के प्राचीन धरमसागर तालाब के बेहतर स्वरूप में कायाकल्प से यह स्थान पुरा धरोहर के संरक्षण के साथ टूरिस्ट और पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित होगा। आगामी दिनों में महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा का लोकार्पण किया जाना भी प्रस्तावित है। निरीक्षण के दौरान एसडीएम संजय कुमार नागवंशी एवं तहसीलदार अखिलेश प्रजापति भी उपस्थित रहे।

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