Wednesday, July 10, 2019

झमाझम हो रही बारिश से उफनाने लगे नदी और नाले

  •   जंगली नदी व नालों में नहीं  हैं  सुरक्षा के इंतजाम
  •   तेज बारिश होने पर हो जाते हैं  बेहद खतरनाक
  •   जान जोखिम में डालकर लोग नालों को करते हैं पार




अरुण सिंह,पन्ना। पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही झमाझम बारिश के चलते नदियां और नाले उफनाने लगे हैं। बारिश के मौसम में जंगल और पहाड़ों से होकर गुजरने वाले नाले व छोटी नदियां बेहद खतरनाक हो जाती हैं।     इसके बावजूद इन नदी व नालों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं  हैं । ऐसी स्थिति में तेज बारिश होने पर जब पहाड़ी नाले उफनाते हुये बहते हैं  उस समय भी लोग अपनी जान जोखिम में डालते हुये नाला पार करते हैं । इतना ही  नहीं  इन बरसाती नालों का पानी उतरने का इंतजार करने के बजाय यात्रियों से भरे वाहन भी निकलते हैं , जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है ।
उल्लेखनीय है  कि पन्ना जिले में ऐसे पहाड़ी नालों व छोटी नदियों की संख्या दर्जनों में है  जिनसे होकर सड़क मार्ग गुजरते हैं । इन नदी व नालों में सुरक्षित पुलों की जगह रपटा बने हैं  जो सूखे मौसम में आवागमन के लिये उपयोगी हैं  लेकिन तेज बारिश होने की स्थिति में नालों का पानी रपटे के ऊपर से बहने लगता है । इन पहाड़ी नालों के पानी का प्रवाह इतना तेज रहता है  कि जरा सी लापरवाही  व असावधानी होने पर बड़े वाहन भी इस प्रवाह की चपेट में आ सकते हैं । फिर भी तेज प्रवाह वाले  रपटों के ऊपर से बारिश के दौरान भी आवागमन जारी रहता है , जो किसी भी दृष्टि से सुरक्षित नहीं  कहा  जा सकता।

निर्माणाधीन पुल का डायवर्सन मार्ग बहा, कई ग्रामों का टूटा संपर्क





जिले के बडग़ड़ी-सिरस्वाहा मार्ग पर निर्माणाधीन पुल का अस्थाई डायवर्सन बीती रात हुई तेज बारिश में बह गया। जिससे उक्त मार्ग पर आवागमन ठप्प हो गया। करीब एक दर्जन गाँवों का आपस में सड़क संपर्क टूट गया है। आठ माह से निर्माणाधीन पुल के डायवर्सन में लगाये गये सीमेण्ट के पाईप नदी के पानी का तेज बहाव नहीं सह सके और बारिश के पानी के साथ बह गये। आवागमन बाधित होने से करीब एक दर्जन गाँव के लोगों के सामने समस्या उत्पन्न हो गई है। आवागमन बाधित होने से स्कूल और कॉलिज जाने वाले बच्चे नहीं जा पा रहे हैं। बीमारी की हालत में वाहनों का आवागमन भी उक्त मार्ग पर संभव नहीं हो पा रहा। जानकारी के अनुसार बडग़ड़ी-सिरस्वाहा मार्ग पर छोटी नदी में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनाये जा रहे मार्ग में एक पुल का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य की कछुआ चाल के कारण कार्य पूरा नहीं हो पाया और ग्रामीणों के लिये मुसीबत बन गया है। बताया गया है कि तेज बारिश के चलते नदी में पानी ज्यादा आ गया और बहाव तेज होने से मिट्टी कटने से डायवर्सन में लगे तीनों पाईप बह गये। जिससे डायवर्सन मार्ग का कटाव ज्यादा हो गया और मार्ग अवरूद्ध हो गया। इससे पानी रूकने और बहाव कम होने तक इसे दोबारा बना पाना संभव नहीं हैं। इसके अलावा पानी के बहाव के चलते मिट्टी का कटाव बढ़ता जा रहा है और बीस फिट से भी अधिक की खाई बन गई है। डायवर्सन मार्ग से आवागमन करने वाले करीब एक दर्जन गाँवों का सड़क मार्ग से सम्पर्क टूट गया है। इन गाँवों के लोगों को अब करीब 40 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में भी यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो लोगों की मुसीबत और भी बढ़ सकती है।

कीचड़ युक्त मार्ग से स्कूल जाने को मजबूर हैं छात्रायें




 बारिश के इस मौसम में आवागमन हेतु मार्ग का निर्माण न होने से छात्र-छात्राओं को कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। पन्ना जनपद की ग्राम पंचायत गढ़ीपड़रिया के वार्ड 20 के रहवासियों ने पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाली जनसुनवाई में कलेक्टर पन्ना के नाम मार्ग बनवाने हेतु आवेदन दिया। जानकारी के अनुसार गढ़ीपड़रिया से ककरहटी को जोडऩे के लिये लगभग 7 वर्ष पहले 5 किमी की प्रधानमंत्री सड़क स्वीकृत थी जिसे 3 कि मी ककरहटी से रानीपुरा तक ही बनाया गया, शेष 2 किमी कच्चा ढर्रा होने से बरसात के समय आवागमन अवरुद्ध हो जाता है। इस हेतु कलेक्टर के नाम आवेदन दिया गया। बताया जाता है कि इस मार्ग से ग्रामीणों सहित स्कूल में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन निकलना पड़ता है लेकिन कीचडय़ुक्त रोड होने के कारण इन्हें आने-जाने में काफी  दिक्कत होती है। कीचडय़ुक्त मार्ग  से निकलते समय अगर कोई वाहन तेज गति से निकल जाता है तो स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं की यूनिफार्म खराब हो जाती है। ऐसी स्थिति में लोगों की मांग है कि शीघ्र ही मार्ग की मरम्मत कर पक्का सड़क मार्ग बनाया जाये।
ग्राम पंचायत गढ़ीपड़रिया के वार्ड 20 बगीचा मोहल्ला के रहवासियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुये बताया कि हमारे मोहल्ले से गाँव के लिये जो मार्ग है वह बारिश के दिनों में कीचड़ से सराबोर हो जाता है जिससे आवागमन करना बहुत मुश्किल हो जाता है। ग्रामवासियों द्वारा जानकारी देते हुये बताया गया कि इस गंभीर समस्या को लेकर सरपंच सचिव से अनेकों बार कहा गया लेकिन इस समस्या को लेकर किसी भी जवाबदेह ने सुध नहीं ली। इस संबंध में जनसुनवाई में कलेक्टर पन्ना के नाम आवेदन देकर गुजारिश की गई है कि ग्राम पंचायत को आदेशित कर मार्ग दुरुस्त कराने की तत्कालिक व्यवस्था की जाये ताकि बच्चों को स्कूल जाने तथा बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने में असुविधा न हो।
00000

चांदा घाटी में सड़क पर चहल कदमी करते दिखा तेंदुआ



पन्ना। म.प्र. के पन्ना जिले में मुख्य सड़क मार्गों पर अभी तक लोगों को चहल कदमी करते हुये वनराज के ही दर्शन होते रहे हैं लेकिन अब जंगल का राजकुमार कहा जाने वाला तेंदुआ भी सड़क मार्ग पर दिखने लगा है। पवई के निकट चांदा घाटी में सिल्वर फॉल के निकट आज सड़क को पार करते हुये राहगीरों को जब तेंदुआ नजर आया तो लोग ठिठक गये। जंगल का यह राजकुमार कुछ मिनिट तक मुख्य सड़क मार्ग पर चहल-कदमी करता नजर आया तब तक सड़क मार्ग के दोनों तरफ यातायात थम गया। मिली जानकारी के अनुसार नागपुर से खजुराहो की ओर जा रही यात्री बस में सवार यात्रियों ने इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया और वीडियो भी बनाया। चांदा घाटी में तेंदुये की मौजूदगी होने की खबर मिलने पर वन विभाग की टीम तुरन्त मौके पर पहुँच गई लेकिन तब तक तेंदुआ सड़क पारकर पास के ही घने जंगल में चला गया। मालुम हो कि चांदा घाटी स्थित सिल्वर फॉल बारिश के मौसम में लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन जाता है। यहां के मंत्रमुग्ध कर देने वाले जल प्रपात को देखने के लिये प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुँचते हैं। इसके अलावा इस जल प्रपात के निकट ही बाबा झूलनशाह की मजार भी है जहां श्रद्धालु पहुँचते हैं। इस घाटी में तेंदुये की मौजूदगी व मुख्य सड़क मार्ग पर चहल-कदमी करने की खबर मिलने पर अब लोग सिल्वर फॉल के अदभुत  नजारे का आनन्द उठाने के लिये यहां जाने से कतराने लगे हैं।
00000

Monday, July 8, 2019

पर्यावरण इस देश मे मुद्दा नहीं


@ विक्रम सिंह चौहान। मुम्बई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए महाराष्ट्र के समुद्री इलाकों के 54 हज़ार मैंग्रोव के पेड़ काटे जाएंगे।यह बस शुरुआत है उस कथित विकास का जिसकी कीमत बस कुछ वर्षों बाद पूरा मुम्बई और महाराष्ट्र चुकाने वाला है।एक रिपोर्ट में तो स्वीकार भी किया गया है इससे नवी मुंबई में बाढ़ आ सकता है।मैंग्रोव समुद्र के तटीय इलाकों में खारे पानी में उगने वाले पेड़.पौधे होते हैं। मैंग्रोव धरती और समुद्र के बीच एक बफर की तरह काम करते हैं। मैंग्रोव की तकरीबन 80 प्रजातियां है। ये पौधे दलदल में उगने वाले होते हैं। जहां ऑक्सीजन की भारी कमी होती है। मैंग्रोव से बाढ़ का बचाव होता है। पर्यावरण के लिए समुद्र के किनारे मैंग्रोव बहुत जरूरी है। सरकार तर्क दे रही है जो प्रत्येक पेड़ काटे जाएंगे उसके एवज़ में हम 5 पौधे लगाएंगे।लेकिन यह झूठ हैएप्राकृतिक तौर पर उगे पौधों का विकल्प ही नहीं होता।वह पर्यावास ही नहीं मिलेगा।लेकिन हमारे देश में इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही है।इसके उलट ऑस्ट्रेलिया में कोल परियोजना के लिए अडानी का भारी विरोध हुआ।दुर्लभ वृक्षों और सरीसृपों को बचाने के लिए जनमत सर्वेक्षण तक किया गया।
भारत ग्लोबल वार्मिंग से सबसे ज्यादा प्रभावित है।वैश्विक स्तर पर इससे निपटने वैज्ञानिकों ने 1000 अरब पेड़ पूरे विश्व में लगाने की सलाह दी है।मतलब लगभग अमेरिका जितना क्षेत्रफल में अगर पौधे लगे तो आशिंक तौर पर जलवायु परिवर्तन से बचा जा सकता है।लेकिन हम इसका उल्टा कर रहे हैं।इस वर्ष भारत के कई शहर गर्मियों में अधिक तपे।इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज  के आंकड़ों के अनुसार भारत उन देशों में है जिनपर जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा प्रभाव पड़ने की आशा है मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑन टेक्नोलॉजी     ( MIT ) के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दुनिया कार्बन उत्सर्जन को सुझाए गए स्तर तक घटाने में सफल भी हो जाती है तो भी भारत के कुछ हिस्सों में गर्मी इतनी बढ़ जाएगी कि यह इंसानों के इतनी गर्मी में जिंदा रहने की परीक्षा लेगीण्लेकिन इन रिपोर्ट्स से वर्तमान सरकार को कोई लेना देना नहीं हैएक्योंकि वे तो जंगलों को कटाई के लिए अडानी को देने का मास्टरप्लान बनाया हुआ है।मसलन छत्तीसगढ़ का सुदूर सरगुजा क्षेत्र जहाँ वनों की कटाई शुरू कर दी गई है।एमआईटी का ही एक और रिसर्च कहता है कि भारत के 25 शहर अगले 50 सालों में नष्ट हो जाएंगे।चेन्नई के लिए ये मियाद 20 वर्ष का ही है।
पर्यावरण किसी के लिए मायने नहीं रखता।न मेरे न आपके।अगर होता तो हम सड़क के लिए 100 साल पुराने बरगदएपीपल के कटने का विरोध करते।हमने विकास का मतलब पेड़ो का कटना समझ लिया है।हरियाली का मतलब अब हरी रंगीन पेंट हो गया है।डिवाइडर पर विदेशी पौधेए ज़हरीले कनेरएनकली अशोक के वृक्षएदमा अस्थमा को बढ़ाने वाला छातिम अब शहरों की शोभा बढ़ा रहा है।नीम पीपल बरगद हमारे दुश्मन थे ही अब इसमें मैंग्रोव भी जुड़ गया है।
(आशीष सागर आशीष की फेसबुक वाल से)

हल्की बारिश में कलेक्ट्रेट परिसर बन जाता है डबरा

  •   कीचड़ में तब्दील मार्ग पर वाहन चलाना मुश्किल
  •   फिसलनभरी मिट्टी में गिर चुके हैं कई बाइक चालक


पन्ना का नवीन कलेक्ट्रेट भवन तथा हल्की बारिश में ही मुख्य द्वार के सामने भरे पानी का नजारा। 
अरुण सिंह,पन्ना। हल्की बारिश होने पर जिला मुख्यालय पन्ना स्थित नवीन कलेक्ट्रेट भवन तक पहुँच पाना आसान नहीं रहता। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने तथा कलेक्ट्रेट भवन के सामने वाले मैदान में जलभराव हो जाने के चलते पहुँच मार्ग फिसलनभरा और कीचड़ में तब्दील हो जाता है। ऐसी स्थिति में चार पहिया वाहन तो किसी तरह नवीन कलेक्टे्रट भवन तक पहुँच जाते हैं, लेकिन पैदल व दुपहिया वाहन से जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। परिसर में धरमसागर तालाब की चिकनी मिट्टी डलवाई गई थी, जो हल्की बारिश में ही चिपचिपी और फिसलनभरी हो जाती है। ऐसी स्थिति में दुपहिया वाहन से यहां जाने वाले लोग जरा सी असावधानी होने पर फिसलकर गिर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में शहर के मध्य स्थित राजाशाही जमाने की प्राचीन इमारत(पैलेस) महेन्द्र भवन में कलेक्ट्रेट संचालित होता रहा है। नवीन कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण होने के उपरान्त प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह  चौहान द्वारा जल्दबाजी में आनन-फानन इस नवीन भवन का उद्घाटन कर दिया गया था, जबकि इस भवन तक पहुँचने के लिये अभी डामरीकृत पक्के मार्ग का निर्माण नहीं हुआ। मुख्य सड़क मार्ग से नवीन कलेक्ट्रेट भवन तक पहुँचने के लिये लोगों को होमगार्ड मैदान को पारकर कलेक्ट्रेट परिसर में पहुँचना होता है जो हल्की बारिश में ही तलैया नजर आने लगता है। चार पहिया वाहन यहां तक पहुँच सकें, इसके लिये अभी हाल ही में गिट्टी व ककरू मार्ग में डलवाई गई है लेकिन जल निकासी की माकूल व्यवस्था अभी भी नहीं हो सकी, जिससे बारिश होने पर जलभराव की समस्या यथावत बनी हुई है।
लगभग 7 करोड़ से भी अधिक लागत से निर्मित  नवीन कलेक्ट्रेट में ज्यादातर शासकीय कार्यालय महेन्द्र भवन से यहां शिफ्ट हो गये हैं। लेकिन भवन के अनुरूप साज-सज्जा व फर्नीचरों की व्यवस्था नहीं हुई। अधिकांश कार्यालयों में पुराने फर्नीचर और अलमारियां उपयोग में लाई जा रही हैं। महेन्द्र भवन स्थित कार्यालयों से आम जनता अच्छी तरह वाकिफ थी कि कौन कार्यालय कहां संचालित होता है। लेकिन इस नवीन कलेक्ट्रेट भवन की विशालकाय बिल्डिंग में लोगों को कार्यालय ढूँढऩे के लिये भटकना पड़ता है। इस दो मंजिले कलेक्ट्रेट भवन में कौन कार्यालय किस ब्लाक में और कहां स्थित है, यह पता करने के लिये ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। बिल्डिंग में लाइन से कार्यालयों के लिये कमरे आबंटित किये गये हैं, जहां अभी बोर्ड तक नहीं लगे। ऐसी स्थिति में आबंटित कमरा नम्बर से कार्यालयों को ढूँढऩा पड़ता है।

नवीन भवन की नहीं होती नियमित सफाई


नवीन कलेक्ट्रेट भवन में साफ-सफाई की माकूल व्यवस्था न होने से यह भव्य बिल्डिंग  अभी से ही बदरंग होने लगी है। सीढिय़ों व फर्श में जहां-तहां पान व गुटखे के दाग जहां नजर आने लगे हैं, वहीं गन्दगी और कचरा भी फैला रहता है। सबसे बुरी स्थिति दूसरी मंजिल में जाने वाली सीढिय़ों की है, जहां शायद कई दिनों तक झाड़ू भी नहीं लगती। बारिश के इस मौसम में शाम के समय पंखियों व कीड़ों के यहां ढेर लग जाते हैं। सुबह सफाई न होने से इन बरसाती कीड़ों के पंख हवा में जहां-तहां उड़ते और बिखरते रहते हैं। कलेक्टर कार्यालय सहित अन्य आला प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तर प्रथम तल पर ही नीचे हैं, यहां तो साफ-सफाई दिखती है, लेकिन दूसरे मंजिल में स्थित कार्यालयों की हालत बेहद दयनीय है। नवीन कलेक्ट्रेट भवन के सार्वजनिक टॉयलेट भी गन्दगी और अव्यवस्था की गिरफ्त में आ चुके हैं, इनकी नियमित साफ-सफाई न होने पर ये उपयोग के लायक भी नहीं बचेंगे। आला अधिकारियों को चाहिये कि नवीन कलेक्ट्रेट भवन में साफ-सफाई की माकूल व्यवस्था के लिये जरूरी पहल करें ताकि इस भव्य इमारत की उपयोगिता व आकर्षण बना रहे।
00000

Friday, July 5, 2019

पन्ना जिले में सुरक्षित प्रसव के दावे साबित हो रहे खोखले

  •   मातृ एवं शिशु मृत्यु का जिले में नहीं थम रहा सिलसिला
  •   प्रसव के दौरान जिला अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत


प्रसूता की मौत के बाद विलाप करते हुये पीएम के लिये जाते परिजन।  
 
अरुण सिंह,पन्ना। शिशु और मातृ मृत्युदर के मामले में वर्षों से प्रदेश व देश में अग्रणी रहा पन्ना जिला अब प्रसव के दौरान होने वाली मौतों के मामले में नया रिकार्ड बनाने की ओर अग्रसर प्रतीत होता है। स्वास्थ्य महकमे द्वारा किये जाने वाले सुरक्षित प्रसव के दावे खोखले साबित हो रहे हैं । क्योंकि जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। विगत 4 जुलाई को जिला चिकित्सालय पन्ना में प्रसव के लिये भर्ती एक महिला एवं उसके गर्भस्थ शिशु की अचानक संदेहजनक परिस्थितियों में मौत होने की खबर जिस तरह से सामने आई है, उससे यहां की व्यवस्थायें एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं।
मामले के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार बृजपुर निवासी प्रसूता रेनू लखेरा पति रूपेश लखेरा को प्रसव पीड़ा होने के चलते जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया था। जब उसे भर्ती किया गया था तब उसकी हालत सामान्य थी और सभी जाँच रिपोर्ट भी सामान्य आई थीं। जिसके चलते डॉक्टरों का कहना था कि डिलेवरी सामान्य होगी। लेकिन समय बीतने के साथ और दवाई देने के बाद भी देर रात तक सामान्य रूप से प्रसव न होने के कारण डॉक्टरों की टीम ने निर्णय लिया कि डिलेवरी ऑपरेशन के द्वारा होगी। तब रात लगभग 3 बजे ऑपरेशन की सम्पूर्ण तैयारी के साथ निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. स्मृति गुप्ता ने जैसे ही प्रसूता को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया तब उसकी हालत बिगडऩे लगी। तब पूरी टीम द्वारा प्रसूता की स्थिति को नियंत्रण में करने का प्रयास किया गया। बावजूद इसके हालत और भी गंभीर होती गई और अंतत: प्रसूता रेनू के साथ पेट में ही उसके बच्चे की मौत हो गई।

परिजनों ने किया हंगामा, लगाये आरोप

परिजनों को जैसे ही रेनू की मौत की खबर लगी वह सब सदमे में आ गये और अस्पताल में हंगामा करते हुये अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुये कहा कि जब हमने रेनू को भर्ती किया था तो वह पूर्णत: स्वस्थ थी और सभी जाँच रिपोर्ट भी सामान्य थीं। डॉक्टरों द्वारा कहा गया था कि सामान्य डिलेवरी होगी फिर ऐसा क्या हो गया कि जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज के दौरान लापरवाही के आरोप लगाये हैं। परिजनों का कहना है कि दो साल पूर्व शादी हुई थी और अब हमारे घर में खुशियां आनी थीं जो अब गम में बदल गईं। परिजन सहित काफ ी संख्या में एकत्रित लोगों ने हंगामा करते हुये जाँच की माँग की तथा दोषियों के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही की बात कही।

जेठ ने लगाये गुमराह करने के आरोप

रेनू लखेरा के जेठ रत्नेश लखेरा ने बताया कि मैं बहू को लेकर आया था जिस समय उसे भर्ती किया गया था उस समय वह बिल्कुल सामान्य थी। रात करीब 11 बजे हमें डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन से डिलेवरी होगी। जिस पर हमारे द्वारा हां कह दिया गया। डॉक्टरों द्वारा हमें दवाईयों का पर्चा थमा दिया गया जिस पर हम बाहर मेडिकल स्टोर से दवाईयां लेकर आये। जैसे ही हमने दवाई लाकर दीं तो डॉक्टर बोले कि ऑपरेशन में रक्त की आवश्यकता पड़ेगी उसकी व्यवस्था करें, तब हम ब्लड बैंक गये वहां बताया गया कि आपको जितना ब्डल चाहिये उसके बदले उतना ब्लड देना पड़ेगा। जिस पर मैं तैयार हो गया और वापस लौटकर डॉक्टरों के पास आया तब तक रात काफ ी हो चुकी थी। जैसे ही मैं ऑपरेशन थियेटर के पास पहुँचा तब डॉक्टरों ने हमसे बात ही नहीं की। लगभग दो घण्टे तक हम लोग परेशान रहे। रात 3 बजे मेरी बहू को ऑक्सीजन व बॉटल लगाकर बाहर परिजनों के पास लिटा दिया और मुझे दूर ले जाकर बताया गया कि हार्ट अटैक आ जाने से रेनू की मौत हो गई है अब कुछ नहीं हो सकता। घटना को लेकर जिला अस्पताल में हंगामा कर रहे परिजन व अन्य लोगों को मौके पर पहुँची पुलिस द्वारा जाँच कर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया। साथ ही उन्हें समझाईश दी गई तब कहीं जाकर परिजन शांत हुये और शव को पीएम के लिये भेजा गया।

इनका कहना है...

0  प्रसूता बुधवार दोपहर को भर्ती की गई थी सामान्य प्रसव की संभावना थी दवाई के बाद भी बच्चेदानी का मुँह नहीं खुलने पर रात को ऑपरेशन की तैयारी की गई। पूरी टीम की उपस्थिति में जैसे ही बेहोशी का इंजेक्शन लगाने लगे उसी समय प्रसूता की हालत बिगडऩे लगी। डॉक्टरों द्वारा आधे घण्टे तक प्रयास किया गया लेकिन हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई। शव का पीएम कराया गया है रिपोर्ट आने के बाद अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्यवाही की जायेगी।
डॉ. एस.एस. त्रिपाठी, सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय पन्ना

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर 




0000

जुड़वा बच्चों को जन्म देने के बाद प्रसूता की हुई मौत

 जिला चिकित्सालय पन्ना में ऑपरेशन थियेटर के बाहर विलाप करते परिजन।    
 
 जिला चिकित्सालय पन्ना में प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत को अभी  चौबीस घण्टे भी  नहीं बीते थे कि चिकित्स्कीय  लापरवाही और व्यवस्थाओं  कमी के चलते एक और महिला  की मौत हो गई।  महिला  मौत का यह मामला  पवई सामुदायिक  स्वास्थ्य केन्द्र से सामने आया। जहां एक गर्भवती महिला सविता सोनी पति केदार नाथ सोनी निवासी पवई ने दो मासूम बच्चों को जन्म दिया। उसके बाद उसकी अचानक तबीयत बिगड़ गई। वहां के डॉक्टरों ने उसे तत्काल पन्ना जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जहां आते ही उसकी मौत हो गई।

इनका कहना है...

 जब हम पवई स्वास्थ्य केन्द्र गये तो वहां के डॉक्टर ने सारी रिपोर्ट देखकर सविता को स्वस्थ बताया था और डिलेवरी करा दी। जिसके बाद ही महिला की तबीयत अचानक बिगडऩे लगी और मुझे लगता है कि उसकी मौत हो गई थी। लेकिन डॉक्टरों ने ऑक्सीजन लगाकर पन्ना के लिये रेफर कर दिया और यहां के डॉक्टर ने महिला को मृत घोषित कर दिया है।
  • केदार नाथ सोनी, मृतिका के पति, निवासी पवई 
 प्रसूता को खून की कमी थी दो दिन पहले ही मैंने पन्ना जिला चिकित्सालय जाने के लिये कहा था लेकिन वह नहीं गये और उन्होंने सलाह न मनाते हुये यहीं डिलेवरी कराई। महिला को अत्यधिक ब्लीडिंग होने से हालत गंभीर होती चली जा रही थी जिस कारण उसे जिला चिकित्सालय पन्ना के लिये रेफ र कर दिया गया था।
  • डॉ. एम.एल. चौधरी, बीएमओ उपस्वास्थ्य केन्द्र पवई 

00000

हल्की बारिश में ही जीवंत हो उठी किलकिला नदी

  •  कुछ ही दिन पूर्व तक नजर आ रही थी रूखी - सूखी और बेजान
  •  नदी किनारे खड़े अर्जुन के पेड़ जलधार के साथ करने लगे नृत्य


चौपड़ा मंदिर के निकट से प्रवाहित हो रही किलकिला नदी का दृश्य। फोटो -  अरुण सिंह

अरुण सिंह,पन्ना। चार दिन पूर्व तक रूखी - सूखी और बेजान सी दिखने वाली किलकिला नदी हल्की बारिश होने के साथ ही जीवंत हो उठी है। जिस नदी के प्रवाह क्षेत्र में सन्नाटा पसरा रहता था वहां अब उत्सवी माहौल है। नदी के प्रवाह क्षेत्र में खड़े विशालकाय अर्जुन के वृक्षों की उदासी भी अब दूर हो गई है और वे नदी की जलधार के साथ झूम - झूम कर नृत्य करने लगे हैं। पन्ना शहर के निकट से गुजरी यह छोटी सी नदी बड़ी देवी मंदिर के पास से गुजरती हुई चोपड़ा मंदिर से होते हुए लगभग ढाई - तीन किलोमीटर लंबा सफर तय कर कौवा सेहा की गहराई में समा जाती है। प्रणामी धर्मावलंबियों की धार्मिक आस्था से जुड़ी किलकिला नदी को प्रणामी संप्रदाय की गंगा कहा जाता है लेकिन सतत उपेक्षा और गंदगी के कारण धार्मिक महत्व वाली यह नदी बारिश के अलावा शेष महीनों में गंदा नाला बन जाती है। बताया जाता है कि प्रणामी धर्म के प्रणेता महामति प्राणनाथ जी जब अपने 5000 अनुयायियों के साथ किलकिला नदी के किनारे रुके थे उस समय भी इस नदी का पानी दूषित और विषाक्त था। लेकिन महामति के इस स्थल पर प्रवास करने का असर यह हुआ कि विषाक्त और दूषित किलकिला नदी का पानी स्वच्छ और निर्मल हो गया। महामति की अलौकिक देशना और उपदेश आज भी यहां की आबोहवा में महसूस की जा रही है, लेकिन उनके अशरीरी होने के बाद इस नदी के दुर्दिन फिर शुरू हो गए जो अभी तक नहीं सुधरे। नदी के निकट ही प्रणामी धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र चोपड़ा मंदिर है जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। महामति के अनुयायियों की संख्या हजारों से लाखों में पहुंच गई है लेकिन किलकिला नदी को अपने पुनरुद्धार के लिए एक बार फिर महामति प्राणनाथ जैसे किसी अलौकिक पुरुष का इंतजार है जो उसे स्वच्छ और निर्मल बना सके।
000
दैनिक  जागरण में प्रकाशित खबर 


दूल्हा बने भगवान जगन्नाथ स्वामी, हजारों श्रद्धालु बने बाराती

  •   पन्ना में धूमधाम के साथ निकली भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा
  •   राजपरिवार के सदस्यों सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
  •   जगन्नाथपुरी की तर्ज पर निकलती है पन्ना की ऐतिहासिक रथयात्रा


पन्ना के श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर के सामने खड़े रथ में सवार जगत के नाथ 

अरुण सिंह,पन्ना। मन्दिरों के शहर पन्ना में भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा परम्परानुसार बड़े ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ गुरूवार शाम 6 बजे बड़ा दिवाला मन्दिर से निकली। 166 वर्ष पुराने बुन्देलखण्ड अंचल के इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में हजारों धर्मप्रेमी बाराती बनकर शामिल हुये। दूल्हा बने भगवान जगन्नाथ स्वामी के दर्शन पाकर और इतनी बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों के जुटने से मन्दिरों की पवित्र नगरी पन्ना का कण-कण पुलकित हो उठा। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार गुरूवार की शाम शहर के जगदीश स्वामी मन्दिर से जब भगवान बलभद्र, शक्तिस्वरूपा देवी सुभद्रा और दूल्हा बने भगवान जगन्नाथ स्वामी की प्रतिमाओं को मन्दिर के गर्भगृह से निकालकर उन्हें शाही रथों पर आसीन किया गया, तो वहां भगवान की एक झलक पाने उपस्थित श्रद्धालु धर्मप्रेमी भाव-विभोर हो उठे और पूरा प्रांगण भगवान जगन्नाथ स्वामी के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। भगवान की मनमोहक छवि की एक झलक पाने भक्तों में होड़ मच गई। मन्दिरों की नगरी पन्ना में डेढ़ सौ वर्ष से भी अधिक समय से आयोजित हो रहे ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव की बात ही कुछ निराली है। तभी तो वर्षों से रथयात्रा महोत्सव में शामिल होकर धर्मलाभ उठाने यहां प्रतिवर्ष बुन्देलखण्ड अंचल के अन्य जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। परम्परानुसार भगवान के बड़े भाई बलभद्र, बहन देवी सुभद्रा व भगवान जगन्नाथ स्वामी की प्रतिमाओं को पन्ना राज परिवार के सदस्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान के साथ रथारूढ़ कराया गया।

दर्शन के लिए मंदिर परिसर में उमड़े श्रद्धालुओं का द्रश्य। 

भगवान के रथों में सवार होने के साथ जैसे ही रथयात्रा शुरू हुई, उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने गगनभेदी जयकारों के साथ जगत के नाथ के दर्शन किये साथ ही रथयात्रा में शामिल भक्तों के बीच रथों को खींचने की होड़ मच गई। भगवान जगन्नाथ स्वामी जी का कीर्तन करते हुये भक्तों ने रथों को खींचकर धर्मलाभ उठाया। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति पूरे श्रद्धाभाव के साथ कीर्तन करते हुये भगवान के रथों को खींचता है। वह पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है। धर्माचार्यों का मानना है कि यह एक ऐसा अद्वितीय पर्व है जब भगवान जगन्नाथ चलकर जनता के बीच आते हैं, भगवान दसों अवतार का रूप धारण करते हैं और सभी भक्तों को दर्शन देकर समान रूप से तृप्त करते हैं। पन्ना नगर में ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव का आयोजन जगन्नाथपुरी की तर्ज पर होता है। भगवान के रथों के आगे तुरही एवं शंख तथा घण्टों व घरियाल के सुमधुर स्वरों ने पूरे नगर को भक्ति के सागर में सराबोर कर दिया। इस अवसर पर पन्ना राजपरिवार के महाराज राघवेन्द्र सिंह, पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह, नपा अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा, पूर्व विधायक श्रीकांत दुबे, बबलू पाठक, कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी, सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारी तथा हजारों की तादाद में दूर - दूर से आये श्रद्धालु उपस्थित रहे।
शहर में मार्ग से गुजरती रथयात्रा 

श्रद्धालुओं ने जगह-जगह उतारी आरती

जगदीश स्वामी जी मन्दिर से प्रथम पड़ाव लखूरन बाग के लिये ऐतिहासिक रथयात्रा के मार्ग में पडऩे वाले मन्दिरों में तथा जगह-जगह धर्मप्रेमी जनता द्वारा पूरे श्रद्धाभाव के साथ भगवान की आरती उतारी और अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिये जगत के नाथ से प्रार्थना की। जगन्नाथ स्वामी मंदिर जहाँ से  रथयात्रा शुरू हुई  वहां  लेकर प्रथम पड़ाव लखूरन बाग तक भगवान की एक झलक पाने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।   

रथयात्रा के दौरान सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम


जिला प्रशासन ने रथयात्रा के भव्य आयोजन को लेकर जहां सड़क, बिजली, पानी आदि की बेहतर व्यवस्था की वहीं पुलिस प्रशासन द्वारा आयोजन में बड़ी संख्या में भक्तों की भागीदारी को देखते हुये सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये। रथयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने पर पुलिस द्वारा महिला पुलिसकर्मियों की भी पर्याप्त संख्या में तैनाती की गई। रथयात्रा में बड़ी संख्या में पुलिस बल शामिल रहा और इसके अतिरिक्त रथयात्रा के मार्ग में पडऩे वाले प्रमुख चौराहों पर भी पुलिस और नगरसेना के जवान मुस्तैदी से तैनात रहे।
00000

Thursday, July 4, 2019

टूरिस्ट सीजन में 35 हजार से अधिक पर्यटक पहुँचे पन्ना टाईगर रिजर्व

  •   बाघों का दीदार होने के कारण बढ़ी है पर्यटकों की संख्या
  •   पन्ना टाइगर रिज़र्व में हैं 40 से अधिक बाघ 


पन्ना टाइगर रिज़र्व में अपने इलाके का जायजा लेता बाघ 

अरुण सिंह,पन्ना। बाघों से आबाद हो चुके म.प्र. के पन्ना टाईगर रिजर्व में देशी व विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस साल टूरिस्ट सीजन में 35 हजार से भी अधिक पर्यटक पन्ना टाईगर रिजर्व में भ्रमण के लिये पहुँचे हैं। मानसून सीजन शुरू होने के साथ ही अब 1 जुलाई से पन्ना टाईगर रिजर्व के द्वार पर्यटकों के लिये बन्द हो गये हैं। पूरे तीन माह तक पर्यटक अब पार्क का भ्रमण कर बाघों का दीदार नहीं कर पायेंगे। लेकिन इस दौरान पाण्डव जल प्रपात व रनेह फाल के अप्रितिम सौन्दर्य को पर्यटक जरूर निहार सकेंगे। बारिश के मौसम में भी यहां पर्यटन चालू रहता है।
क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व के.एस. भदौरिया ने बताया कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2017-18 के पर्यटन सीजन में 24128 देशी व 6712 विदेशी पर्यटक पन्ना टाईगर रिजर्व के भ्रमण हेतु पहुँचे थे, जबकि इस वर्ष 2018-19 में 29131 देशी व 6752 विदेशी पर्यटकों ने पार्क भ्रमण कर बाघों व अन्य वन्य प्राणियों का दीदार किया। मौजूदा समय पन्ना टाईगर रिजर्व में 40 से भी अधिक बाघ हैं। जबकि पन्ना लैण्ड स्केप में कुल विचरण कर रहे बाघों की संख्या 65 के लगभग है। यह संख्या पन्ना टाईगर रिजर्व के इतिहास में सर्वाधिक है। श्री भदौरिया ने बताया कि पन्ना के जंगलों में स्वच्छन्द रूप से विचरण कर रहे बाघों की सतत मॉनीटरिंग  के लिये पार्क में कैमरा ट्रैप मॉनीटरिंग सिस्टम के तहत 200 कैमरे लगाये गये हैं। वॉच टॉवर तथा अस्थाई कैम्पों के माध्यम से भी बाघों की निगरानी की जा रही है।
0000
दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर 

Tuesday, July 2, 2019

खेतिहर मजदूर के बेटे ने संभाला जिला पंचायत सीईओ का पदभार

  •   31 वर्षीय आईएएस अधिकारी बालागुरू की प्रेरणाप्रद है संघर्ष की कहानी
  •   कठिन चुनौतियों और बाधाओं को भी सीढ़ी बना कर लेते हैं लक्ष्य हासिल
  •   पन्ना जिला वासियों को इस होनहार युवा अधिकारी से हैं ढेरों अपेक्षायें
  •   आरोपों से घिरे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में सुधार की उम्मीद



पन्ना के जिला पंचायत सीईओ बालागुरू पदभार गृहण करते हुये।

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। लक्ष्य हासिल करने के लिये यदि किसी में जुनून, जज्बा और इच्छाशक्ति है तो बड़ी से बड़ी चुनौतियां व बाधायें भी उसकी सफलता के मार्ग को नहीं रोक सकतीं। जिला पंचायत पन्ना के नये सीईओ 31 वर्षीय बालागुरू इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। मूलरूप से तमिलनाडु अरावकुरिची के गाँव थेरापडी के निवासी इस युवा आईएएस अधिकारी की संघर्षपूर्ण जीवन गाथा बेहद दिलचस्प, रोमांचकारी और प्रेरणादायी है।
 
सोमवार 1 जुलाई को इनके पदभार गृहण करने के साथ ही जिला पंचायत कार्यालय पन्ना की कार्य प्रणाली में बदलाव नजर आने लगा है। गुणवत्ताविहीन कार्यों, जन कल्याण की योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही तथा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अब बदलाव दिखेगा, ऐसी पन्ना जिलावासियों को उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ में एसडीएम के पद पर कार्य कर चुके आईएएस अधिकारी बालागुरू का स्थानान्तरण राज्य सरकार द्वारा हाल ही में जिला पंचायत सीईओ पन्ना के पद पर किया गया था, फलस्वरूप उन्होंने यहां आकर अपना कार्यभार संभाल लिया है। कार्यभार संभालते ही उन्होंने जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी कार्यशैली व प्राथमिकताओं से अवगत कराते हुये उसी के अनुरूप पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिये हैं, जिसका असर पदभार गृहण करने के दूसरे ही दिन से दिखने लगा है। 
भीषण गरीबी और अनगिनत चुनौतियों के बीच पले-बढ़े बालागुरू में संवेदनायें कूट-कूट कर भरी हैं, जाहिर है कि गरीबों, वंचितों और समाज के अन्तिम छोर पर खड़े व्यक्ति को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिये वे हरसंभव प्रयास करेंगे। वर्ष 2014 में भारतीय समाज में सबसे प्रतिष्ठित कही जाने वाली यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर आईएएस अधिकारी बनने वाले बालागुरू का बाल्यकाल कैसे बीता तथा उन्होंने किन परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच शिक्षा हासिल कर यह उच्च मुकाम हासिल किया, आज की युवा पीढ़ी के लिये किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

बचपन से ही कलेक्टर बनने का था सपना 


पन्ना के नवागत जिला पंचायत सीईओ बालागुरू बताते हैं कि उन्होंने बचपन में ही यह मन बना लिया था कि उनको कलेक्टर बनना है। लेकिन इसके साथ ही उन्हें इस बात का भी पूरा अहसास था कि आर्थिक  तंगी और गरीबी के चलते इस सपने को पूरा करना सहज नहीं होगा। बालागुरू के पिता कुमारसामी खेतिहर मजदूर थे तथा माँ मवेशी पालकर किसी तरह घर चलाती थीं। इन परिस्थितियों में बालागुरू ने अपनी स्कूली शिक्षा सरकारी स्कूल में हासिल की। 12वीं से आगे की पढ़ाई को जारी रखना माता-पिता की माली हालत को देखते हुये मुश्किल था। इन हालातों में भी होनहार युवा बालागुरू ने अपना हौसला बनाये रखा और यह तय किया कि कुछ काम करते हुये वह अपनी आगे की पढ़ाई को जारी रखेगा ताकि परिजनों पर मेरी पढ़ाई बोझ न बने।

 अस्पताल में की सुरक्षागार्ड की नौकरी  

अपने सपने को साकार करने तथा आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिये बालागुरू ने बिलरोथ हास्पिटल में सुरक्षागार्ड की नौकरी महज 4 हजार रू. महीने के वेतन में की। रात्रि शिफ्ट में सुरक्षागार्ड की नौकरी करते हुये इन्होंने पत्राचार कोर्स से स्नातक की डिग्री हासिल की और इस दौरान न सिर्फ माँ व पिता को आर्थिक मदद भी करते रहे अपितु अपनी बहन जानकी का विवाह भी कराया। यूपीएससी की परीक्षा पास करने के उपरान्त बालागुरू ने इस बात का जिक्र मीडिया के साथ करते हुये बताया था कि अपने सपने को पूरा करने के लिये मैं आगे बढूँ, इसके पूर्व बहन की शादी कर उसे सेटल करना चाहता था। इस दायित्व का निर्वहन करने के बाद मैं निश्चिन्त होकर अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केन्द्रित कर सका।

नाई की दुकान व लाइब्रेरी में पढ़ते थे न्यूजपेपर

संघर्ष के दिनों को याद करते हुये बालागुरू बताते हैं कि आर्थिक  तंगी के चलते परीक्षा की तैयारी करने के लिये न्यूज पेपर पढऩे वे नाई की दुकान में जाते थे। फिर उन्होंने चेन्नई की पब्लिक लाइब्रेरी में भी जाना शुरू किया जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई युवकों से परिचय हुआ। इन युवाओं से प्रेरित होकर बालागुरू परीक्षा की तैयारी में जुटे रहे और वर्ष 2011 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा में सम्मिलित हुये, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। 
इस तरह लगातार तीन बार उन्हें असफलता मिली फिर भी उन्होंने अपने सपने को मरने नहीं दिया। चौथी बार बालागुरू कामयाब हुये और वह लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसे पाने का सपना उन्होंने बचपन से ही अपने जेहन में संजोकर रखा था। अपनी इस कामयाबी का श्रेय वे अपनी माँ को देते हैं और गर्व से बताते हैं कि मेरी माँ ने पशु पालकर स्कूली शिक्षा दिलाई और आगे बढऩे के लिये प्रोत्साहित किया। शासकीय सेवा में आने के बाद से बालागुरू अपने पिता व माँ को हमेशा अपने पास ही रखते हैं।

00000

Monday, July 1, 2019

बुन्देलखण्ड के पन्ना जिले में अनूठी है रथयात्रा की परम्परा


  •   जगन्नाथपुरी के बाद देश की सबसे पुरानी रथयात्राओं में शामिल
  •   इस धार्मिक समारोह में मिलती है  राजशी ठाट-बाट व वैभव की झलक


पन्ना में निकलने वाली रथयात्रा का नजारा। - (फाइल फोटो)


अरुण सिंह,पन्ना। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के पन्ना शहर में हर साल आयोजित होने वाली रथयात्रा की परम्परा अनूठी है । देश की तीन सबसे पुरानी व बड़ी रथयात्राओं में पन्ना की रथयात्रा भी शामिल है।  ओडि़शा के जगन्नाथपुरी की तर्ज पर यहां  आयोजित होने वाले इस भव्य धार्मिक समारोह  में राजशी ठाट-बाट और वैभव की झलक देखने को मिलती है । रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ स्वामी की एक झलक पाने समूचे बुन्देलखण्ड क्षेत्र से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां  पहुँचते हैं । पन्ना जिले के इस सबसे बड़े धार्मिक समारोह  के दरम्यान यहां  की अद्भुत और निराली छटा देखते ही  बनती है । पन्ना की यह  ऐतिहासिक रथयात्रा 166 वर्ष पूर्व तत्कालीन पन्ना नरेश महाराजा किशोर सिंह  द्वारा शुरू कराई गई थी, जो परम्परानुसार अनवरत् जारी है । इस वर्ष रथयात्रा 4 जुलाई को शाम 6:30 बजे पूरे विधि विधान के साथ जगन्नाथ स्वामी मन्दिर से निकलेगी।
उल्लेखनीय है  कि पन्ना जिले की प्राचीन व ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव को भव्यता व गरिमा प्रदान करने के लिये इस वर्ष विशेष तैयारियां की जा रही हैं । जिले के प्रशासनिक मुखिया कर्मवीर शर्मा सहित नगर के गणमान्य जन इसमें विशेष रूचि ले रहे  हैं । जानकारों का कहना है कि पन्ना नरेश महाराजा किशोर सिंह  ने जब यहां  रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत की थी, उस समय वे पुरी से भगवान जगन्नाथ स्वामी जी की मूर्ति लेकर आये थे और पन्ना में भव्य मन्दिर का निर्माण कराया था। पुरी में चूंकि समुद्र है  इसलिये पन्ना के जगन्नाथ स्वामी मन्दिर के सामने सुन्दर सरोवर का निर्माण कराया गया था। तभी से यहां  पुरी की ही  तर्ज पर रथयात्रा समारोह का आयोजन होता है  जिसमें लाखों लोग पूरे भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं । ऐसी किवदंती है  कि जिस वर्ष यहां  मन्दिर का निर्माण हुआ तो यहाँ  अटका चढ़ाया गया। महाराजा किशोर सिंह  को स्वप्न आया कि पन्ना में अटका न चढ़ाया जाये अन्यथा पुरी का महत्व कम हो  जायेगा। इसलिये यहां  भगवान जगन्नाथ स्वामी को अंकुरित मूँग का प्रसाद चढ़ाया जाता है । आज भी यहां  पर अंकुरित मूँग व मिश्री का प्रसाद चढ़ता है ।
शहर के पुराने बुजुर्ग बताते हैं  कि राजाशाही  जमाने में पन्ना की रथयात्रा बड़े ही  शान-शौकत व वैभव के साथ निकलती थी। इस रथयात्रा में सैकड़ों हांथी, घुड़सवार, सेना के जवान, राजे-महाराजे व जागीरदार सब शामिल होते थे। रूस्तम गज हांथी की कहानी भी यहां  काफी प्रचलित है । बताते हैं  कि तत्कालीन महाराज का यह प्रिय हांथी रथयात्रा में अपनी सूड़ से चाँदी का चँवर हिलाते हुये चलता था। हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल माह की द्वितीय तिथि को यहां  पुरी के जगन्नाथ मन्दिर की तरह हर साल रथयात्रा निकलती है । रथयात्रा के दौरान यहां  भी भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ मन्दिर से बाहर सैर के लिये निकलते हैं । यह अनूठी रथयात्रा पन्ना से शुरू होकर तीसरे दिन जनकपुर पहुँचती है । तत्कालीन पन्ना नरेशों द्वारा जनकपुर में भी भव्य मन्दिर का निर्माण कराया गया है । रथयात्रा के जनकपुर पहुँचने पर यहां  के मन्दिर को बड़े ही  आकर्षक ढ़ंग से सजाया जाता है  तथा यहां  पर मेला भी लगता है ।

धार्मिक पर्यटन को मिल सकता है  बढ़ावा

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि  पन्ना की इस प्राचीन और ऐतिहासिक रथयात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर जो पहचान मिलनी चाहिये थी, वह नहीं  मिल सकी। इस दिशा में यदि शासन स्तर पर ठोस व प्रभावी पहल की जाये तो पन्ना में ईको टूरिज्म के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है । रियासत काल में इस समारोह का महत्व इतना ज्यादा था कि तत्कालीन नरेशों ने जगन्नाथ स्वामी मन्दिर से लेकर अजयगढ़ चौराहा  तक डेढ़ किमी. रथयात्रा मार्ग के दोनों तरफ बरामदा का निर्माण कराया था, जहां  पर रथयात्रा में शामिल होने के लिये आने वाले श्रद्धालु ठहरते थे। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते वह प्राचीन व्यवस्था अतिक्रमण के चलते ध्वस्त हो  गई फलस्वरूप रथयात्रा वाला मार्ग संकीर्ण हो  गया। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह  ने पन्ना के ऐतिहासिक रथयात्रा को उसका पुराना वैभव वापस दिलाने की दिशा में रूचि ली थी और वे 2003 में पन्ना आकर समारोह में शामिल हुये थे। लेकिन इसके बाद फिर किसी मुख्यमंत्री ने पन्ना की प्राचीन रथयात्रा को वह महत्व नहीं  दिया, जिसकी पन्ना नगर के लोग अपेक्षा करते हैं । पन्ना नगरवासियों का यह मानना है कि समूचे बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लोगों की आस्था व धार्मिक महत्ता को देखते हुये पन्ना की     ऐतिहासिक व प्राचीन रथयात्रा समारोह को राज्य उत्सव का दर्जा मिलना चाहिये।
00000