Monday, November 11, 2019

तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की टक्कर से युवक की मौत

  •   राष्ट्रीय राजमार्ग 39 में जनवार मोड़ के पास हुआ हादसा
  •   सड़क के किनारे पंचर जोडऩे की दुकान चलाता था मृतक



 पन्ना-सतना मार्ग जहां पर हादसा घटित हुआ।

अरुण सिंह,पन्ना। जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 5 किमी दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 39 में सोमवार को दोपहर के समय एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो कार 40 वर्षीय युवक को टक्कर मारते हुये पलट गई। घटना में युवक की मौके पर ही मौत हो गई है। यह दर्दनाक हादसा पन्ना-सतना मार्ग पर जनवार मोड़ के पास घटित हुआ है। बताया गया है कि मृतक युवक सड़क मार्ग के किनारे पंचर जोडऩे की दुकान चलाता था, जो हादसे का शिकार होने पर असमय काल कवलित हो गया। इस हादसे में कार चालक मंजू रिछारिया उपयंत्री लोक निर्माण विभाग पन्ना भी घायल हुये हैं, जिन्हें जिला चिकित्सालय पन्ना में भर्ती कराया गया है।
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार उपयंत्री मंजू रिछारिया अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से स्वयं ड्राइव करते हुये पन्ना आ रहे थे। मोहनगढ़ी के आगे सकरिया मोड़ के पास तेज रफ्तार स्कॉर्पियो कार अचानक बेकाबू हो गई और वह सड़क किनारे पंचर की दुकान चलाने वाले छोटे मोहम्मद 40 वर्ष निवासी पन्ना को टक्कर मारते हुये वहीं आगे जाकर पलट गई। हादसे में युवक की घटना स्थल पर ही जहां मौत हो गई, वहीं उपयंत्री मंजू रिछारिया भी गंभीर रूप से घायल हुये हैं, जिन्हें इलाज के लिये जिला चिकित्सालय पन्ना में भर्ती कराया गया है। हादसे की खबर मिलते ही थाना कोतवाली पन्ना से पुलिस बल मौके पर पहुँच गया था। पुलिस ने मर्ग कायम कर घटना की विवेचना शुरू कर दी है।

बेलगाम ट्रक ने भैसों को मारी टक्कर, 4 की मौत

 तेज रफ्तार से बेलगाम होकर सड़क मार्ग पर दौडऩे वाले भारी वाहन कब किसे अपनी चपेट में ले लें, कुछ कहा नहीं जा सकता। सड़क मार्गों पर यमराज बनकर तेज गति से दौडऩे वाले भारी वाहनों के कारण सड़कों में आवागमन अब सुरक्षित नहीं रहा। बीती रविवार की रात पन्ना-अजयगढ़ मार्ग पर ग्राम विश्रामगंज के पास एक बेलगाम ट्रक सड़क से गुजर रही भैसों के झुण्ड को बुरी तरह से रौंदते हुये निकल गया। इस भीषण सड़क हादसे में 4 बेजुवान भैसों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक भैंस बुरी तरह से घायल हुई है। ट्रक चालक हादसे के बाद घटना स्थल पर ही ट्रक छोड़कर फरार हो गया है।
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार रविवार को रात लगभग 10 बजे परमलाल कोंदर निवासी विश्रामगंज अपनी भैसों को लेकर जब घर की तरफ जारहा था, उसी दौरान तेज रफ्तार से आ रहे ट्रक क्र. एमपी-19एचए-2605 ने सड़क मार्ग के किनारे चल रही भैसों को टक्कर मार दी। इस भयावह हादसे में भैसों को लेकर घर जा रहा युवक परमलाल कोंदर बाल-बाल बचा, अन्यथा वह भी यमराज बनकर आये इस ट्रक की चपेट में आज जाता। युवक ने बताया कि टक्कर इतनी तेज और भयावह थी कि चार भैसों ने घटना स्थल पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। एक भैंस बुरी तरह से घायल हुई है। अजयगढ़ थाना पुलिस ने हादसे को अंजाम देने वाले ट्रक को जब्त कर उसे थाना परिसर में खड़ा करा दिया है। घटना के बाद फरार हो चुके ट्रक चालक की पुलिस तलाश कर रही है।
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Saturday, November 9, 2019

पन्ना में अमन, चैन और भाईचारे का रहा माहौल

  •   सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का सभी वर्ग के लोगों ने किया स्वागत
  •   जिले में कानून व्यवस्था कायम रखने पुलिस व प्रशासन रहा सक्रिय



अरुण सिंह,पन्ना। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद मन्दिरों के शहर पन्ना में अमन, चैन और भाईचारे का माहौल कायम रहा। गंगा-जमुनी संस्कृति की विरासत वाले इस शान्तिप्रिय शहर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी वर्ग के लोगों ने स्वागत किया, साथ ही शान्ति व्यवस्था बरकरार रखने के लिये अपील भी की। फैसले की अहमियत और संवेदनशीलता को देखते हुये प्रशासन द्वारा समूचे जिले में सुरक्षा के जहां माकूल इंतजाम किये गये थे वहीं आम जनता से निरंतर यह अपील भी की जा रही थी कि सभी संयम और समझदारी का परिचय देते हुये आपसी भाईचारे की विरासत को कायम रखें। जिले की जनता ने प्रशासन की इस अपील का न सिर्फ सम्मान किया बल्कि उसका अक्षरश: पालन भी किया।
उल्लेखनीय है कि शनिवार 9 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दृष्टिगत रखते हुये प्रशासन द्वारा जिले के सभी थाना क्षेत्रों में बैठकों का आयोजन कर शान्ति और कानून व्यवस्था बनाये रखने का संदेश दिया था। इन बैठकों में सभी वर्गों के लोग शामिल हुये थे और प्रशासन को यह आश्वस्त किया था कि जिले में प्रेम और भाईचारे के माहौल को किसी भी कीमत पर बिगडऩे नहीं दिया जायेगा। फैसला आने के बाद जैसा कि सभी को भरोसा था जिला मुख्यालय पन्ना सहित जिले के ग्रामीण अंचलों में भी आम जन जीवन रोज की तरह सामान्य रहा। ऐहतियाती कदम उठाते हुये प्रशासन द्वारा शनिवार को शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश की घोषणा कर दी थी और सुबह से ही पुलिस बल व आला प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हो गये थे। सड़कों पर सायरन बजाते हुये जब पुलिस और प्रशासन की गाडिय़ां निकलती थीं उस समय जरूर यह एहसास होता था कि आज का दिन कुछ विशेष है। अन्यथा शहर में सब कुछ सामान्य और यथावत था। बाजार में दुकानें भी जहां रोज की तरह खुली हुई थीं वहीं आम जन जीवन में भी कोई खास फर्क देखने को नहीं मिला। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने एवं शान्ति पूर्ण वातावरण बनाये रखने के लिये नगर मुख्यालय सहित जिले के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण किया गया।


जिले में शान्ति एवं कानून व्यवस्था कायम: पुलिस अधीक्षक


कलेक्टर श्री शर्मा ने जिले के निवासियों से अपील करते हुये कहा कि आप लोगों ने जिस तरह शान्ति एवं भाईचारे का प्रदर्शन किया है इसी तरह आगामी आने वाले समय में भी बनाये रखेंगे। पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने कहा कि आम आदमी की हिफाजत करना हमारा दायित्व है। इसके लिये हम सभी निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि जिले में शान्ति एवं कानून व्यवस्था कायम है, सभी लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्यौहार मनायें और पन्ना जिले की भाईचारे की परम्परा को और मजबूत करें।

देवेन्द्रनगर ने पेश की आपसी सौहार्द और भाईचारे की मिशाल



अयोध्या मामले में शनिवार को आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कस्बे में सद्भाव और भाईचारा की मिशाल कायम रही। गंगा-जमुनी तहजीब वाले इस कस्बे में मुस्लिम समाज ने खुद आगे आकर फैसले का स्वागत किया और सभी वर्गों से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने का आह्वान भी किया। इधर सुरक्षा के मद्देनजर पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी के निर्देशानुसार 9 नवम्बर को अयोध्या मामले के फैसले के अनुसार सम्पूर्ण जिले में धारा 144 कठोरता से लागू किये जाने के निर्देश दिये गये थे। वहीं अयोध्या फैसला आने के पूर्व व बाद में कस्बे में अमन चैन बनी रहे इसके लिये नगरीय प्रशासन पूर्णत: मुस्तैद रहा और देवेन्द्रनगर थाना प्रभारी घनश्याम मिश्रा व मातहत स्टाफ द्वारा सुबह 8 बजे से लेकर देर रात्रि तक कस्बे में भ्रमण किया गया। कस्बे में शान्ति व सुरक्षा के लिहाज से नगरीय प्रशासन द्वारा फ्लैग मार्च भी किया जिसमें एसडीएम पन्ना शेर ङ्क्षसह मीणा भी सम्मलित हुये। थाना प्रभारी देवेन्द्रनगर घनश्याम मिश्रा एवं तहसीलदार सुश्री दिव्या जैन द्वारा देवेन्द्रनगर में फ्लैग मार्च निकाला गया। फ्लैग मार्च में नगर परिषद देवेन्द्रनगर के सीएमओ महमूद हसन, प्रजापति नायब तहसीलदार, रामधन अहिरवार सदर पटवारी, रामप्रकाश शर्मा पटवारी, रामनरेश गौतम राजस्व निरीक्षक, सभी समाज के लोग व पत्रकार उपस्थित रहे। फ्लैग मार्च के साथ-साथ आम जनता से अपील की गई कि शान्ति व्यवस्था बनाये रखें एवं धारा 144 का पालन करें। कस्बे का दोपहर 1 बजे पन्ना कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी द्वारा भी भ्रमण किया गया।
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Friday, November 8, 2019

ध्वनि प्रदूषण व शोरगुल से परिंदों की जिंदगी में पड़ रहा खलल

  • विभिन्न प्रजाति के पंछियों की आबादी घटने का खतरा उत्पन्न
  • अध्ययन रिपोर्ट में भी चौकाने वाले तथ्य हुये उजागर 



अरुण सिंह, पन्ना। बढ़ते ध्वनि प्रदूषण व शोरगुल के माहौल से परेशानी सिर्फ मनुष्यों को ही नहीं बल्कि परिंदों को भी होती है. ध्वनि प्रदूषण के कारण चिडिय़ों में संवाद करने की क्षमता पर असर पड़ा है। शोरगुल की वजह से नर पक्षी की पुकार मादा तक नहीं पहुंच पाती, ऐसे में विभिन्न प्रजाति के रंग विरंगे पंछियों की आबादी घटने का खतरा उत्पन्न हो गया है। पन्ना शहर के आसपास स्थित वनाच्छादित पहाडिय़ों में कुछ वर्षों पूर्व तक सैकड़ों प्रजाति के पंछियों के दर्शन सहजता से हो जाते थे। सुबह के समय पंछियों के कलरव व सुरीले गीतों को सुन मन प्रफुल्लित हो जाता था, लेकिन वाहनों के प्रेसर हार्न, जंगलों की बेतहासा कटाई व मानव दखलंदाजी बढने से पंछियों का प्राकृतिक रहवास तेजी से नष्ट हो रहा है जिससे उनके दर्शन दुर्लभ हो गये हैं।
उल्लेखनीय है कि बढ़ते ध्वनि प्रदूषण से पक्षियों का जीवन बेहद प्रभावित हो रहा है। उनमें प्रजनन की शक्ति घट रही है और साथ ही उनके व्यवहार में भी परिवर्तन आ रहा है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। यह अध्ययन जर्मनी के मैक्स प्लैँक इंस्टीट्यूट फॉर ऑर्निथोलॉजी के शोधार्थियों ने किया है। उन्होंने जेबरा फिंच नाम के पक्षी पर अध्ययन किया और पाया कि ट्रैफिक के शोर से उनके रक्त में सामान्य ग्लकोकार्टिकोइड प्रोफाइल में कमी हुई और पक्षियों के बच्चों का आकार भी सामान्य चूजों से छोटा था। अध्ययन में दावा किया गया है कि ट्रैफिक के शोर की वजह से पक्षियों के गाने-चहचहाने पर भी फर्क पड़ता है।
यह अध्ययन कंजर्वेशन फिजियोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में पक्षियों के दो समूह को शामिल किया गया। इनमें एक समूह वह था, जो जर्मनी के राज्य बावरिया की राजधानी म्युनिख के एक शोर भरे इलाके में रहता है, जबकि दूसरा समूह शांत इलाके में रहता है। यह अध्ययन पक्षियों के प्रजनन काल के दौरान किया गया। जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली प्रजनन अवधि के अंत के कुछ समय बाद दोनों समूहों के समान जोड़ो के लिए शोर की स्थिति बदल दी गई। शोधकर्ताओं ने दोनों परिस्थितियों में प्रजनन अवधि के दौरान, पहले और बाद में हार्मोन में तनाव के स्तर को दर्ज किया। इसके अलावा, उन्होंने (इम्यून फंक्शन) प्रतिरक्षा कार्य और प्रजनन की सफलता के साथ-साथ चूजों की वृद्धि दर को भी देखा।

उन्होंने पाया कि जब वे शांत वातावरण में प्रजनन कर रहे थे, तब पक्षियों के खून में कॉर्टिकोस्टेरॉन का स्तर ट्रैफिक के शोर में प्रजनन कर रहे पक्षियों की तुलना में कम था। यह आश्चर्यजनक था क्योंकि तनाव अक्सर कॉर्टिकोस्टेरॉन के उच्च स्तर का परिणाम होता है, एक हार्मोन जो तनावपूर्ण अनुभवों के दौरान चयापचय क्रिया में शामिल होता है। प्रमुख अध्ययनकर्ता सू एनी जोलिंगर कहते हैं, शांत वातावरण में प्रजनन करने वाले पक्षियों में, प्रजनन के पूरे मौसम में उनका आधारभूत कॉर्टिकोस्टेरॉन कम रहता है। इससे पता चलता है कि जिन पक्षियों को शोर में रहने की आदत नहीं थी उनके प्रजनन चक्र के दौरान उनके हार्मोन का स्तर उपर-नीचे होता है अर्थात असामान्य पाया गया था। वहीं इसके विपरीत जो शांत वातावरण में इस प्रक्रिया से गुजरते हैं उनके हार्मोन का स्तर सामान्य पाया गया था। जिन चूजों के माता-पिता ट्रैफिक के शोर के संपर्क में थे, उनके चूजे शांत वातावरण में रहने वाले माता-पिता की तुलना में छोटे थे।  हालांकि, एक बार शोरगुल की स्थिति में रह रहे चूजों के बड़े होकर घोंसला छोड़ देने के पशचात, वे फिर शांत जगहों पर घोंसले बनाने में कामयाब रहते हैं। हालांकि, शोधकर्ता ने संतानों पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को नहीं लिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले एक अध्ययन से पता चला है कि ट्रैफ़िक के शोर के संपर्क से युवा जेबरा फ़िंच पक्षी में टेलोमेयर क्षति में तेजी आई है, जिसका अर्थ है कि इन पक्षियों का जीवनकाल छोटा होने की आशंका है। हालांकि घोंसले में चूजों की संख्या पर यातायात के शोर का कोई प्रभाव नहीं था।
पक्षियों के साथ अध्ययन आम तौर पर यातायात से जुड़े अन्य कारकों, जैसे कि रासायनिक प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण और शहरी क्षेत्रों में पाए जाने वाले अन्य भिन्नताओं को शामिल करने के लिए किया गया था, उदाहरण के लिए पक्षी समुदायों की संख्या और संरचना, निवास स्थान की संरचना, खाद्य प्रकार और उसकी उपलब्धता आदि थे। शोध समूह के मुख्य अध्ययनकर्ता हेनरिक ब्रम कहते हैं, हमारे आंकड़े बताते है कि शहरी परिवेश की अन्य सभी गड़बड़ियों के बिना यातायात (ट्रैफिक) का शोर, पक्षियों के शरीर क्रिया विज्ञान को बदल देता है और उनके विकास पर प्रभाव डालता है। इसका मतलब यह है कि पक्षियों की प्रजातियां जो पहली नजर में शहरों में अच्छी तरह से मुकाबला करती दिखती हैं, ट्रैफ़िक के शोर से प्रभावित हो सकती हैं।
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जिंदगी में काम नहीं आते रटे रटाये उत्तर

सिद्धांत से नहीं, बोध से जीयो: ओशो 



पुरानी कहानी है। दो मंदिर थे एक गांव के। दोनों मंदिरों में पुराना झगड़ा था। झगड़ा इतना था कि मंदिर के पुजारी एक-दूसरे से बोलते भी नहीं थे। दोनों पुजारियों के पास दो छोटे बच्चे थे जो उनके लिए सब्जी खरीद लाते और कुछ सेवा-टहल कर देते। उन पुजारियों ने कहा उन बच्चों से कि तुम भी आपस में बोलना मत, रास्ते में कहीं मिल जाओ तो। बच्चे, बच्चे हैं! उनको बता दिया कि हमारा झगड़ा बहुत पुराना है, हजारों साल से चल रहा है। उस मंदिर को हम नर्क मानते हैं। उस मंदिर के बच्चे से बोलना मत, बातचीत मत करना।
लेकिन बच्चे तो आखिर बच्चे हैं, रोकने से और उनकी जिज्ञासा बढ़ी। पहले मंदिर का बच्चा एक दिन खड़ा हो गया बाजार में। जब दूसरे मंदिर का बच्चा आता था तो उसने दूसरे मंदिर के बच्चे से पूछा, कहां जा रहे? तो उस बच्चे ने कहा, सुनते-सुनते वह भी ज्ञानियों की बातें, ज्ञानी हो गया था, उसने कहा, जहां हवा ले जाए! पहला बच्चा बड़ा हैरान हुआ कि अब बात कैसे आगे चले? हवा ले जाए, अब तो सब बात ही खत्म हो गई! वह बड़ा उदास आया। उसने अपने गुरु को कहा कि भूल से मैंने उससे बात कर ली। उससे मैंने पूछ लिया, कहां जा रहे? आपने तो मना किया था, मुझे क्षमा करें! लेकिन मैं बच्चा ही हूं। मगर सच में आदमी उस मंदिर के बड़े गड़बड़ हैं। मैंने तो सीधा-सादा सवाल पूछा, वह बड़ा अध्यात्म झाड़ने लगा। वह बोला, जहां हवा ले जाए! और चला भी गया हवा की तरह!
गुरु ने कहा, मैंने पहले ही कहा था कि वे लोग गलत हैं। अब तू ऐसा कर, कल उससे फिर पूछना। और जब वह कहे, जहां हवा ले जाए, तो तू कहना, अगर हवा न चल रही हो तो फिर क्या करोगे?
वह बच्चा गया दूसरे दिन। उसने पूछा, कहां जा रहे हो? उस बच्चे ने कहा, जहां पैर ले जाएं। अब बड़ी मुश्किल हो गई। अब जहां पैर ले जाएं! वह तो बंधा हुआ उत्तर ले कर आया था। वह फिर लौट कर आया, उसने कहा कि वे तो बड़े बेईमान हैं। आप ठीक कहते हैं, वे आदमी तो बड़े बेईमान हैं! उस मंदिर के लोग तो बदल जाते हैं। कल बोला, जहां हवा ले जाएय आज बोला, जहां पैर ले जाएं!
गुरु ने कहा, मैंने पहले ही कहा था, उनकी बातों का कोई भरोसा ही नहीं। उनसे शास्त्रार्थ हो ही नहीं सकता। कभी कुछ कहते, कभी कुछ कहते। जैसा मौका देखते हैं, अवसरवादी हैं। तो तू ऐसा कर, कल तैयार रह। अगर वह कहे जहां हवा ले जाए, तो पूछना, हवा न चले तो? अगर कहे, जहां पैर ले जाएं, तो कहना भगवान न करे कहीं अगर लूले-लंगड़े हो गए, फिर?
वह गया। अब दो उत्तर उसके पास थे। उसने फिर पूछा, कहां जा रहे हो? उस लड़के ने कहा, सब्जी खरीदने।
मैं तुम्हें उत्तर नहीं देता। मैं तुम्हें सिर्फ इतना इशारा देता हूं कि जो पूछे, उसकी तरफ गौर से देखना, उसकी स्थिति को समझना और जैसा उचित हो वैसा करना।
जीवन को कभी भी बंधे हुए नियमों में चलाने की जरूरत नहीं है। उसी से तो आदमी धीरे - धीरे मुर्दा हो जाता है। जीवन को जगाया हुआ रखो। बोध से जीयो, सिद्धांत से नहीं। जागरूकता से जीयो, बंधी हुई धारणाओं से नहीं। मर्यादा बस एक ही रहे कि बिना होश के कुछ मत करो।
ओशो ❤, अष्‍टावक्ररू महागीता--प्रवचन--29

Wednesday, November 6, 2019

अमन का पैगाम देने शहर में निकाला गया सदभावना मार्च

  •   शहर की सड़कों पर पैदल निकले कलेक्टर, एसपी व गणमान्यजन
  •   सद्भावना मार्च में सभी वर्गों के लोग बड़ी संख्या में  हुये शामिल


सद्भावना मार्च में शामिल कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं शहर के गणमान्यजन। 

अरुण सिंह,पन्ना। मन्दिरों के शहर पन्ना में शान्ति, सद्भाव एवं आपसी भाईचारा कायम रखने के लिये आज सायं सद्भावना मार्च आयोजित हुआ, जिसमें जिले के प्रशासनिक मुखिया कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी सहित सभी प्रमुख राजनैतिक दलों के नेता व गणमान्यजन शामिल हुये। शहर के गाँधी चौक से शुरू हुआ सद्भावना मार्च प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। इस दौरान लोगों से अमन और शान्ति बनाये रखने की अपील की गई।
उल्लेखनीय है कि पन्ना शहर हमेशा से अमन, शान्ति और भाईचारे के लिये जाना जाता रहा है। विपरीत परिस्थितियों में भी यहां पर कभी ऐसे हालात नहीं बने जिससे भाईचारा प्रभावित हुआ हो। शहर की सड़कों पर पैदल चलते हुये प्रशासनिक अधिकारी व गणमान्यजन लोगों को प्रेम और भाईचारा कायम रखने का संदेश देते हुये निकले। इस मार्च में सभी वर्गों व समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर न सिर्फ हिस्सा लिया अपितु सभी ने यह संकल्प भी किया कि वे हर हाल में पन्ना शहर की प्राचीन भाईचारे की परम्परा को कायम रखेंगे। इस बीच जिला मजिस्टे्रट एवं कलेक्टर पन्ना कर्मवीर शर्मा ने गाँधी चौक में सभी को सद्भावना की शपथ दिलाई और यह अपील की कि त्यौहारों के इस मौसम में सभी लोग आपस में मिलकर रहेंगे। आपने बताया कि प्रशासन ने शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के लिये हरसंभव कदम उठाये  हैं। जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है और सभी से यह अपील भी की गई है कि वे किसी भी कीमत पर असमाजिक तत्वों को बढ़ावा न दें। उन्होंने लोगों से यह भी अपील की है कि साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाडऩे वाली कोई भी अफवाह न फैलायें तथा सोशल मीडिया में भी ऐसी कोई भी पोस्ट न डालें जिससे भाईचारा बिगडऩे व शान्ति भंग होने की संभावना हो। ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक श्री अवस्थी ने कहा कि संवेदनशील स्थलों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है तथा हर तरह की परिस्थिति से निपटने की पूरी तैयारियां की जा चुकी हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे पुलिस का सहयोग कर शहर में अमन और शान्ति कायम रखने में सहभागी बनें।

शहर की सड़कों पर पैदल मार्च कर अमन का सन्देश देते नगरवासी। 

शान्ति व्यवस्था भंग करने वालों के विरूद्ध होगी कठोर कार्यवाही: कलेक्टर

 कलेक्टर कर्मवीर शर्मा की अध्यक्षता मेें जिला स्तरीय शान्ति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी आने वाले महत्वपूर्ण त्यौहारों देवउठनी ग्यारस, मिलादउन्नवी, गुरूनानक जयंती, क्रिसमस एवं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या संबंधी प्रकरणों में निर्णय तथा वर्तमान में अन्य शहरों में अधिवक्ताओं एवं पुलिस के बीच चल रहे विवाद को दृष्टिगत रखते हुये जिले में शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के संबंध में जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ आगामी आने वाले समय में जिले में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान कलेक्टर द्वारा कहा गया कि कोई भी व्यक्ति यदि जिले में शान्ति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करता है तो उसके विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने बैठक में उपस्थितों से अपेक्षा करते हुये कहा कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक एवं अफवाह फैलाने वाली पोस्ट डालने वाले व्यक्तियों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलजुलकर परम्परानुसार त्यौहारों को मनायें।  बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों द्वारा शान्ति व्यवस्था बनाये रखने में जिला प्रशासन की हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया।

जिले में धारा 144 लागू, न फैलायें अफवाह

कलेक्टर श्री शर्मा द्वारा बैठक में बताया गया कि जिले में 144 धारा लागू हो गई है। इसका उलंघन करने पर संबंधित के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर कोई भी व्यक्ति ऐसे आपत्तिजनक संदेश एवं चित्रों, वीडियो, ऑडियो मैसेज पोस्ट या फारवर्ड नहीं करेगा जो सामाजिक एवं व्यक्तिगत रूप से किसी भी प्रकार से आपत्तिजनक हो। साम्प्रदायिक सद्भाव को खतरा उत्पन्न करते हो।  कोई भी व्यक्ति जिले में किसी भी जुलूश प्रदर्शन, आन्दोलन, धरने, भण्डारण आदि का बिना सक्षम अनुमति के न तो आयोजन करेगा, न रखेगा और न ही उसका नेतृत्व करेगा। सार्वजनिक स्थानों पर कोई भी व्यक्ति चाकू, डण्डा, धारदार हथियार और अन्य घातक हथियार जैसी वस्तुयें अपने साथ नहीं रखेगा। किसी भी होटल, लॉज, सार्वजनिक धर्मशाला पर रूकने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की जानकारी देने की जिम्मेदारी प्रबंधक और मालिक की होगी। स्थानीय थाना में सूचना दिये बिना कोई भी व्यक्ति अपने मकान में किरायेदार, पेइंगगेस्ट को नहीं रखेगा। होटल, लॉज, धर्मशाला और ऐसे ही किसी स्थानों पर रुकने वालों के पहचान पत्र और जानकारी रजिस्टर में अंकित कर प्रतिदिन थाने में सूचना देना अनिवार्य होगा। लम्बे समय से बिना किसी कारण से नये एवं बाहरी व्यक्ति होटल, लॉज, सार्वजनिक धर्मशाला पर नहीं रूकेंगे।

 संवेदनशील और चिन्हित स्थलों पर पुलिस बल तैनात

पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी द्वारा बताया गया कि जिले के सभी चिन्हित स्थानों पर पुलिस/फोर्स लगाई गई है। कुछ ऐसे स्थान भी होते है जहां लोग कभी-कभी पूजा अर्चना या इबादत के लिये जाते हैं। ऐसे स्थानों पर कभी कोई असामाजिक तत्व कुछ करता है तो इसकी सूचना दी जाये। ऐसे प्रकरणों की तुरंत जांच कर कार्यवाही की जायेगी और संबंधितों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग अफवाह एवं आपत्तिजनक पोस्ट वायरल करते रहते हैं ऐसे व्यक्तियों पर निरंतर नजर रखी जा रही है। परिवार एवं समाज के लोगों को, बच्चों को समझाना चाहिये कि इस तरह की पोस्टो को पोस्ट न करें। ऐसा करने पर इन बच्चों के विरूद्ध कार्यवाही होगी। जिससे इनका जीवन बर्वाद हो जायेगा। जिला स्तरीय शान्ति समिति की बैठक में जिले के राजस्व अधिकारी, पुलिस अधिकारी, विभिन्न विभागों के जिला प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, उपाध्यक्ष माधवेन्द्र सिंह , नगरपालिका अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा, जिला पंचायत सदस्य केशव प्रताप सिंह , श्रीमती दिव्यारानी, सतानन्द गौतम, पूर्व विधायक पन्ना श्रीकांत दुबे, मोहम्मद आसिफ सिद्दिकी के साथ विभिन्न समुदाय के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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आखिर कोई भी डॉक्टर सीताफल खाने की सलाह क्यों नहीं देता ?


जिसे मै अब तक सीताफल समझता रहा हूँ वह दरअसल शरीफा है! चूंकि शराफत अनमोल होती है! खरीदी या बेची नही जा सकती! ऐसे मे आपकी और दुकानदार की सहूलियत के लिये इसे सीताफल नाम दिया गया! हाँलाकि अब इस नामकरण का कोई मतलब रह नही गया है, शरीफ आजकल गली गली बिकते फिरते हैं और सीताफलो से सस्ते हैं !
एक जानकार के हिसाब से तो सीताफल पूरी दवाई की दुकान है! इसमे पोटेशियम, मैग्नेशियम, आयरन ,कॉपर, फाईबर, कैल्शियम और पता नही क्या क्या होता है ! इसको खाने का मतलब यह है कि आपको कभी डॉक्टर, वैद्य की शकल नही देखनी पडेगी! इस बेशकीमती जानकारी से ही मै जान पाया कि दुनिया का कोई भी डॉक्टर सीताफल खाने की सलाह देने से क्यों बचता है! 
ये भी पता चला कि सीताफल को सीताफल इसलिये कहते है क्योकि उसे बंदर नही खाते ! मुझे लगता है इस बात मे दम तो है ! मैने भी कभी बंदरो को सीताफल खाते नही देखा ! सच्ची बात तो यह है कि जो सीताफल नही खाते वो बंदर ही होते है ! झाबुआ ,अलीराजपुर ,धार वालो ने तो अपने यहाँ पैदा होने वाले सीताफलो के सबसे अच्छे होने का दावा तो ठोका ही बैतूल ,नरसिंहगढ ,मांडवगढ ,चित्तोढगढ ,चंदेरी ,सिवनी छपारा ,सारंगपुर ,नागपुर भी पीछे नही रहे ! सबका यही ख्याल है कि उनके यहाँ वाले सीताफल सबसे मीठे है ! पर मै इन सभी महानुभावो के दावे की कदर तभी कर सकूंगा जब ये अपने यहाँ के सीताफल मुझे भिजवाने की व्यवस्था करे !
और फिर यह भी पता चला कि रामफल और सीताफल के अलावा हनुमानफल भी होता है ! और उसे हनुमान जी का नाम मिला भी इसलिये है क्योंकि वो अपने खानदान का सबसे बड़ा और हष्ट पुष्ट फल है ! सीताफल खाने के तरीके बाबत भी मेरी जानकारी मे इजाफा हुआ ! इसके बीजो का इधर उधर फैलना वाकई बडी दिक्कत थी ! ये बीज आपकी पत्नी को आप पर तनने का मौका मुहैया कराते है ऐसे मे सीताफल खाते वक्त अखबार बिछा लेने ता आईडिया बहुत अच्छा है ! 
आजकल के अखबारो का इससे अच्छा और क्या इस्तेमाल हो सकता है ! आदमी को करना यह चाहिये कि सीताफल को शराफत से दो हिस्सों में तोड़े ! ये दोनों हिस्से छोटे बड़े हो भी जाये तो कोई नुकसान है नही ! इसके बाद इस तरह मिली दो कटोरियों में मौजूद अमृत लिपटे बीजों को चम्मच की मदद से पूरे इत्मीनान से ,किश्तों में अपने मुँह के हवाले करे !
ये भी जानकारी हासिल हुई मुझे कि सीताफल के बीजो पर लिपटा गूदा उतारने मे जीभ यदि चूक जाये ! और आप गूदा लिपटा बीज थूक बैठे तो दुनिया मे इससे बडा और कोई दुख नही ! साथ बैठे लोग आपको ऐसे देखते है जैसे आपने गाय मार दी हो इसलिये सीताफल खाने के पहले अपनी जीभ को समझा देना बहुत जरूरी होता है !
सीताफल खाते वक्त एक जो दूसरी परेशानी सर पर आ खड़ी होती है कि इसे अकेले खायें या दोस्तों और घरवालों के साथ बाँट लें ! दिमाग अकेले ही खा जाने की सलाह देता है और दिल मिल बाँटने की बात करता है ! अकेले इसे इत्मीनान से खा सकते हैं आप और मंडली में इसे खाते वक्त हड़बड़ी पेश आ सकती है ! पर मेरा यह मानना है कि सीताफल अकेले खाने की चीज नही इसलिये जब भी इसकी टोकरी हाथ लगे यार दोस्तों को न्यौता दे ही देना चाहिये !
ये भी एक उपयोगी जानकारी ये मिली की इस मीठे फल को खाते वक्त इसके बीज थूकना इसलिये भी जरूरी है ताकि ये पेट मे ना चले जायें ! इन बीजो के पेट मे जाने पर पेट मे सीताफल का पेड ऊगने का खतरा हो सकता है ! यह भी कि सीताफल खाने के फौरन बाद पानी नही पीना चाहिये ! ऐसा करने पर पानी नाक के नल से बाहर आने की कोशिश करता है ! 
यह भी पता चला कि सीताफल खाने के बाद इसके काले काले बीजो को फैंकना नही चाहिये ! इन्हे पीस कर इनका पेस्ट बनाकर सर पर लगा लेने से जुँओ की समस्या से छुटकारा मिल जाता है ! चूकिं मेरे सर मे गिनती के ही  बाल मौजूद है ! बालो में जुयें होने के अब तक कोई सबूत मुझे मिले नही है ,इसलिये सीताफल के बीज मेरे किसी काम के नही ! जिन्हे इनकी जरूरत हो वो मुझसे संपर्क कर सकता है!

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Tuesday, November 5, 2019

त्रासदी, पुनर्स्थापना और साकार हुये सपने का जश्न

  •   पन्ना बाघ पुनर्स्थापना के 10 वर्ष पूरे होने पर आयोजित हुआ समारोह
  •   यहां मिली कामयाबी की गौरव गाथा का वक्ताओं ने रोचक ढंग से किया बखान
  •   सफलता के नायक रहे श्री मूर्ति सहित तत्कालीन वन अधिकारी भी हुये शामिल
  •   बुन्देलखण्ड का गौरव बन चुके पन्ना के बाघों को सहेजना अब सबका दायित्व


समारोह को संबोधित करते हुये आर.श्रीनिवास मूर्ति ।

अरुण सिंह,पन्ना। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की वापसी किसी तिलस्म से कम नहीं है। एक दशक पूर्व बाघों से आबाद रहने वाला यह खूबसूरत वन क्षेत्र बाघ विहीन हो गया था। उस समय भी राष्ट्रीय स्तर पन्ना की चर्चा थी, लेकिन वह बाघों के पूर्णरूपेण सफाया होने से उपजी त्रासदी को लेकर थी। लेकिन एक दशक बाद अब चर्चा सफलता और कामयाबी की हो रही है। त्रासदी और पुनर्स्थापना के बाद साकार हुये सपने का अब उत्सव मनाया जा रहा है। मंगलवार 5 नवम्बर को पन्ना टाईगर रिजर्व के जंगल कॉटेज परिसर हिनौता में भव्य समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें बाघ पुनर्स्थापना योजना के नायक रहे तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर.श्रीनिवास मूर्ति व विक्रम सिंह परिहार सहित अनेकों लोग शामिल हुये, जिनका बाघों को फिर से आबाद कराने में योगदान रहा है। इस अनूठे समारोह में सभी वक्ताओं ने बड़े ही रोचक अंदाज में पन्ना बाघ पुनर्स्थापना योजना के अपने अनुभवों को साझा किया और यह आगाह भी किया कि पन्ना के बाघ समूचे बुन्देलखण्ड ही नहीं अपितु म.प्र. के गौरव बन चुके हैं, इसलिये अब इस सम्पदा की सुरक्षा तथा इन्हें सहेजकर रखने का दायित्व हम सबका है।
समारोह का शुभारंभ पन्ना टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया सहित मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। इस मौके पर मौजूद रहे तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर.श्रीनिवास मूर्ति ने समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि आज का यह त्यौहार पन्ना की जनता का है। इस मुकाम तक पहुँचने में जनता की सहभागिता को अनदेखा नहीं किया जा सकता। जनसमर्थन से ही पन्ना में वह कमाल हुआ है जो आज तक दुनिया में कहीं नहीं हुआ। इसीलिये हमने जन समर्थन से बाघ संरक्षण का नारा दिया था, जिसे हमेशा याद रखना होगा। श्री मूर्ति ने 10 वर्ष पूर्व की स्थितियों का जिक्र करते हुये बताया कि उस समय हर तरफ आलोचना हो रही थी, लोग पन्ना टाईगर रिजर्व के विरोध में थे तथा बाघों का सफाया होने के बाद लोगों का आक्रोश उफान पर था। लेकिन इस विपरीत हालातों में भी हमने प्रयास जारी रखा, फलस्वरूप जहां बन्दूकें चलती थीं वहां अब प्रेम बरस रहा है।

आयोजित समारोह में उपस्थित अधिकारी, कर्मचारी, नागरिक व ग्रामीणजन।

श्री मूर्ति ने बताया कि 5 नवम्बर 2009 को लोगों ने यह प्रण किया था कि बाघों के खात्मे से बुन्देलखण्ड की नाक कट गई है, लेकिन अब हम बाघों को आबाद करेंगे ओर नाक नहीं कटने देंगे। आपने उन सभी जनप्रतिनिधियों व गणमान्य जनों का जिक्र किया, जिनका बाघ पुनर्स्थापना योजना में योगदान रहा है। जो लोग अब हमारे बीच नहीं हैं उनको भी पूरे सम्मान के साथ श्री मूर्ति ने याद किया और कहा कि अशोक वीर विक्रम सिंह भैया राजा, अमर सिंह, जितेन्द्र सिंह बुन्देला, बृजेन्द्र सिंह बुन्देला, कामता प्रसाद व लखन नागर आज दुर्भाग्य से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन इनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। आपने पन्ना नामक हांथी व उन बाघ और बाघिनों को भी याद किया जिनकी मौत हो चुकी है। समारोह में जिन जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी नहीं रही उनके योगदान व सहभागिता को भी श्री मूर्ति ने सराहा और उनकी चर्चा की। आपने उस नर बाघ की रोचक दास्तान भी सुनाई, जिसकी मौजूदगी से पन्ना का गौरव फिर वापस मिला। श्री मूर्ति ने बताया कि बाघ टी-3 को यदि हम पन्ना वापस लाने में कामयाब न होते तो पन्ना कभी आबाद न हो पाता। आपने कहा कि टीम वर्क से ही सफलता मिलती है, पन्ना में टीम पहले है लीडर बाद में है।

श्री भदौरिया ने प्रजेन्टेशन देकर बताई सफलता की कहानी

क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व के.एस. भदौरिया ने प्रोजेक्टर के माध्मय से प्रजेन्टेशन देकर बाघों के आबाद होने की पूरी कहानी को बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। आपने पन्ना टाईगर रिजर्व के बनने से लेकर अब तक के इतिहास से भी लोगों को अवगत कराया और बताया कि मौजूदा समय पन्ना टाईगर रिजर्व में आधा सैकड़ा से भी अधिक बाघ हैं। पन्ना के बाघ अब कोर क्षेत्र से निकलकर बाहर भी जा रहे हैं जिसे देखते हुये बफर क्षेत्र के जंगल की सुरक्षा व्यवस्था व मॉनीटरिंग सिस्टम सुदृढ़ की जा रही है। श्री भदौरिया ने बताया कि पन्ना टाईगर रिजर्व में 142 पेट्रोलिंग कैम्प व 47 निगरानी कैम्प बनाये गये हैं। कैमरा ट्रेप व ड्रोन से भी बाघों व वन्य जीवों की निगरानी की जाती है तथा बफर क्षेत्र के ग्रामों में लोगों को संरक्षण से जोड़ा जा रहा है।

स्मृति चिह्न प्रदान कर योगदान देने वालों का किया गया सम्मान।

जो दुनिया में नहीं हुआ वह पन्ना ने कर दिखाया: लोकेन्द्र सिंह

पूर्व सांसद व पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के संस्थापक लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि मैं दुबारा यहां बाघ देख रहा हूँ। जो कार्य दुनिया में कहीं नहीं हुआ वह पन्ना ने कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि इस बात पर रिसर्च होना चाहिये कि पन्ना में कम समय में इतने बाघ कैसे बढ़ गये। समारोह को राजनगर विधायक विक्रम सिंह नाती राजा ने संबोधित करते हुये कहा कि म.प्र. का गौरव म.प्र. को वापस दिलाने में पन्ना टाईगर रिजर्व का सबसे अहम योगदान रहा है। आपने वन अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुये कहा कि जिन्हें विस्थापित किया गया है उन्हें मूलभूत सुविधायें मिलें इस पर ध्यान देना चाहिये। कार्यक्रम को श्यामेन्द्र सिंह बिन्नी राजा ने भी संबोधित किया।

समस्या नहीं समाधान बने पन्ना टाईगर रिजर्व: बृजेन्द्र प्रताप सिंह

समारोह को संबोधित करते हुये पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि पन्ना टाईगर रिजर्व पन्ना की पहचान बन चुका है। लेकिन हमें यह ध्यान देना चाहिये कि टाईगर रिजर्व पन्नावासियों के लिये समस्या नहीं अपितु समाधान बने। आपने कहा कि लम्बे समय तक पन्ना के बाघों को सुरक्षित व संरक्षित रखने के लिये समन्वय और संवाद दोनों जरूरी है। वन विभाग का लोगों में खौफ नहीं होना चाहिये। बफर क्षेत्र के लोग मूलभूत सुविधओं से वंचित न रहें। पन्ना विधायक ने यह भी कहा कि पर्यटन विकास से ही यहां के लोग आगे बढ़ सकते हैं। समारोह को पेंच टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक विक्रम सिंह परिहार, पूर्व क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व रविकान्त मिश्रा, आर.पी. राय सीसीएफ  छतरपुर, अनुपम सहाय वन मण्डलाधिकारी ने भी संबोधित किया और महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये।समारोह में राजमाता दिलहर कुमारी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।  इस मौके पर वन अधिकारियों, कर्मचारियों व संरक्षण कार्य में सहभागिता निभाने वाले लोगों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन मीना मिश्रा ने किया।

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Monday, November 4, 2019

पन्ना शहर के निकट मांझा गाँव से लगे जंगल में मिला अजगर

  •  वन्यजीव का शिकार कर चुके अजगर को बकरी चरा रहे बच्चों ने देखा
  •   टाईगर रिजर्व के कर्मचारियों ने रेस्क्यू कर कौआसेहा में सुरक्षित छोड़ा



अरुण सिंह, पन्ना। बाघों के लिये प्रसिद्ध पन्ना जिले के जंगलों में वनराज सहित जंगल का राजकुमार कहे जाने वाले तेन्दुओं की जहां भरमार है, वहीं यहां पर विविध प्रकार के मांसाहारी व शाकाहारी वन्य जीव प्रचुर संख्या में पाये जाते हैं। पन्ना के घने जंगलों में रंग-बिरंगे पक्षियों की भी दो सौ से भी अधिक प्रजातियां देखने को मिलती हैं। इतना ही नहीं, यहां पर सर्पों का भी भरा-पूरा और समृद्ध संसार है। बेहद जहरीले कहे जाने वाले किंग कोबरा व रसेल बाइपर सहित भारी भरकम अजगर भी पन्ना के जंगलों में अक्सर नजर आते हैं । गत 3 नवम्बर रविवार को पन्ना शहर से लगे मांझा गाँव के पास फारेस्ट बैरियर के थोड़ा सा आगे एक भारी भरकम अजगर साँप देखा गया, जिसे पन्ना टाईगर रिजर्व के तफ्शील खान व संजय विश्वकर्मा ने सावधानी के साथ पकड़कर कौआसेहा के जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया है।


उल्लेखनीय है कि फारेस्ट बैरियर के आगे जंगल में बकरियां चरा रहे गाँव के बच्चों ने इस विशालकाय अजगर को जब देखा तो घबराकर वहां से भागे और गाँव में लोगों को बताया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। जानकारी मिलने पर पन्ना टाईगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर जरांडे ईश्वर रामहरि ने सर्प पकडऩे में माहिर पन्ना टाईगर रिजर्व के रेस्क्यू दल के सदस्य तफ्शील खान व संजय विश्वकर्मा को मौके पर भेजा। संजय विश्वकर्मा ने बताया कि अजगर झाडिय़ों के बीच आराम से पड़ा हुआथा। उसका मध्य भाग काफी फूला था, जिससे साफ पता चल रहा था कि इसने किसी वन्य जीव का शिकार किया है। पन्ना टाईगर रिजर्व के इन दोनों कर्मचारियों ने बड़ी कुशलता के साथ तकरीबन 7 फिट लम्बे व 35-40 किग्रा वजन वाले इस अजगर को पकड़कर बोरा में कैद कर लिया। फिर इसे मांझा गाँव से दूर कौआसेहा के निकट जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया। श्री विश्वकर्मा ने बताया कि लम्बे समय तक बोरा में रहने के कारण जैसे ही उसे जंगल में छोड़ा गया, वह स्वभाव के विपरीत बेहद फुर्ती के साथ बोरा से निकला और जंगल में चला गया। अजगर पकड़े जाने के बाद मांझा गाँव के लोगों ने राहत की साँस ली है।
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दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर 

Sunday, November 3, 2019

पवई विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त

  • विधान सभा सीट रिक्त घोषित होते ही पवई क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी 
  • उपचुनाव की संभावनाओं को देख महत्वाकांक्षी नेता हुये सक्रिय 


पवई विधायक प्रहलाद लोधी 

अरुण सिंह,पन्ना। विधानसभा सचिवालय ने पन्ना जिले की पवई विधानसभा सीट से निर्वाचित भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी है। लोधी के खिलाफ एक आपराधिक मामले में भोपाल की विशेष अदालत ने 2 साल की सजा सुनाई थी। विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को उनकी सदस्यता समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। लोधी की सदस्यता खत्म होने से भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पवई विधानसभा सीट के अप्रत्याशित रूप से रिक्त घोषित होने के साथ ही क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। विधायक बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले नेता अवसर को देखते हुए सेटिंग ज़माने में जुट गये हैं। मालुम हो कि भाजपा कुछ ही दिन पहले झाबुआ की सीट गंवा चुकी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया इस सीट से विधायक चुने गये हैं। यदि पवई में भी उपचुनाव होता है और झाबुआ की ही तरह यहाँ भी कांग्रेस जीत का परचम फहराने मेँ कामयाब होती है तो यह भाजपा के लिए चिंता की बात होगी। सूत्रों के मुताबिक विधायक की सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी करने के बाद भारत निर्वाचन आयोग को रिक्त सीट की सूचना भेजी जाएगी। प्रदेश में यह दूसरा मामला है जिसमें आपराधिक प्रकरण में विधायक को सजा होने पर उसकी सदस्यता समाप्त की गई है।


उल्लेखनीय है कि भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी के खिलाफ अवैध उत्खनन रोकने पहुंचे तहसीलदार और सरकारी अमले पर हमला कर मारपीट का एक मामला अदालत में विचाराधीन था। इसमें विशेष न्यायालय ने सुनवाई के बाद गुरुवार को 2 साल की सजा सुनाई थी।शनिवार को विधानसभा सचिवालय में अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति पहुंची जिस पर दिन भर इसके कानूनी पहलुओं पर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने विभिन्न लोगों से चर्चा की। कानून विदो के साथ भी सचिवालय के अधिकारियों ने राय मशविरा किया। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 2013 के लिली थॉमस विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका के फैसले के आधार पर विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 (4 ) को समाप्त कर दिया था। इस धारा में अदालत के फैसले पर अपील अवधि तक सांसद या विधायक की सदस्यता बरकरार रहने का प्रावधान था। विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने फैसले पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अब इसकी अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया चल रही है और इसके बाद अधिसूचना की प्रीति के साथ भारत निर्वाचन आयोग को पवई विधानसभा क्षेत्र के रिक्त होने की सूचना भी दी जाएगी। निर्वाचन आयोग इसके आगे की कार्यवाही करेगा।

निर्णय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध: राकेश सिंह

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष  राकेश सिंह  ने पवई विधायक  प्रहलाद लोधी के मामले में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लिए गए निर्णय को अलोकतांत्रिक और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध बताया है। उन्होंने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष सदन के अभिभावक होते हैं, उनकी गरिमा होती है और इस  नाते दलीय राजनीति से ऊपर उठकर समानता के आधार पर विचार करते हैं। लेकिन मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष  ने विधानसभा अध्यक्ष की तरह व्यवहार न करते हुए राजनीतिक विद्वेषवश कांग्रेस के नेता की तरह निर्णय करते हुए पवई विधानसभा सीट को रिक्त घोषित किया है। पवई विधायक को न्याय के लिए उच्च न्यायालय में जाने का अधिकार है और हम जाएंगे भी। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के इस  निर्णय ने सदन में भविष्य के लिए ऐसी परंपरा को विकसित कर दिया है जो किसी भी कोण से उचित नहीं कही जा सकती।

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Friday, November 1, 2019

परेड ग्राउण्ड में समारोहपूर्वक सम्पन्न हुआ म.प्र. स्थापना दिवस

  •   राष्ट्रीय ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के साथ प्रारंभ हुआ कार्यक्रम
  •   मुख्य अतिथि कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने किया ध्वजारोहण



अरुण सिंह,पन्ना। म.प्र. के 64वें स्थापना दिवस को जिला मुख्यालय के पुलिस परेड ग्राउण्ड पर समारोहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर पुलिस बल के दल द्वारा ध्वज को सलामी दी गई। इस अवसर पर राष्ट्रगान के उपरान्त मुख्य अतिथि द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री जी का प्रदेश की जनता के नाम संदेश का वाचन किया गया। इसके उपरान्त कार्यक्रम में उपस्थित लोगों द्वारा संकल्प लिया गया कि मैं प्रदेश के सर्वागीर्ण विकास के लिये अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दूँगा तथा समर्पित भाव से संवृद्ध म.प्र. के निर्माण तथा समाज के सभी वर्गो के कल्याण के लिये निरंतर कार्य करते रहेंगे। इस अवसर पर कलेक्टर श्री शर्मा ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित किया गया।


इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इनमें डायमण्ड पब्लिक स्कूल द्वारा बेटी हिन्दुस्तान की गीत पर आकर्षक नृत्य तथा एमडीआरएल पन्ना द्वारा नेशनल कराटे सॉंग की प्रस्तुति की गई। वहीं राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर प्रदर्शन कर चुके मलखम्ब दल द्वारा भारतीय प्राचीन खेल मलखम्ब का प्रदर्शन किया गया। इसके उपरान्त विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतियोगियों को पुरूस्कार वितरित किये गये। इनमें रन फार यूनिटी में भाग लेने वाले बच्चों में यशपाल यादव को प्रथम, आशिम मित्री को द्वितीय एवं गजेन्द्र कुशवाहा को तृतीय पुरूस्कार दिया गया। बालिका वर्ग में क्रमश: अन्नू चौधरी, ममता चौधरी एवं रविना चौधरी को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरूस्कार से नवाजा गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में डायमण्ड पब्लिक स्कूल को प्रथम, एमडीआरएल को द्वितीय पुरूस्कार दिया गया।
कार्यक्रम स्थल पर राज्य ग्रामीण आजीविकास मिशन द्वारा गठित स्वसहायता समूह के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। वहीं कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग द्वारा कृषि से संबंधित उत्पादों, जैव उर्वरक आदि का प्रदर्शन किया गया। महिला बाल विकास विभाग द्वारा पोषण आहार से संबंधित पौष्टिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर शासकीय अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधिगण, पत्रकारगण, गणमान्य नागरिक, स्कूल एवं कॉलेजों के छात्र-छात्रायें एवं आमजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद अवस्थी एवं श्रीमती मीना मिश्रा द्वारा किया गया।

पर्यटन पैकेज में पन्ना को भी जोड़ा जाये: कलेक्टर

  •   नीति आयोग की बैठक में पन्ना कलेक्टर ने की मांग



 पन्ना जिले को पर्यटक जिला बनाने एवं खजुराहो व राष्ट्रीय उद्यान के साथ पर्यटन पैकेज में जोडऩे के संबंध में कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने गत दिवस दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की बैठक में अनुरोध किया है कि खजुराहो, राष्ट्रीय उद्यान एवं पन्ना को पर्यटन पैकेज में जोड़ा जाये। खजुराहो की तरह पन्ना में भी पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाये। जिससे जिले का सर्वांगीण विकास होने के साथ जिले के बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। पर्यटन पैकेज में पन्ना जिले को जोडऩे से क्षेत्र का आर्थिक विकास होने से लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा।
उन्होंने कहा कि जिले में ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विविधता, कला संस्कृति, धार्मिक एवं डायमण्ड जैसे क्षेत्र पर्यटन के लिये उपलब्ध हैं। इस संबंध में जिले में पर्यटन गतिविधियों के लिये जिला पर्यटन संवर्धन परिषद की बैठक आयोजित कर पर्यटन के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित जानकारी तैयार करने एवं पर्यटन के लिये विकसित किये जाने की कार्ययोजना तैयार करने के लिये अलग-अलग समितियां गठित की जा चुकी हैं। इसके साथ ही कलेक्टर द्वारा पर्यटन व्यवसायियों, पर्यटन से जुड़े ट्रेवल्स एजेन्सी संचालकों के साथ बैठक कर पन्ना जिले में पर्यटकों को लाने की अपेक्षा की गई है। इसी क्रम में जिले में 12 अक्टूबर से सिटी वाक फेस्टिवल का आयोजन 10 नवम्बर तक किया जा रहा है। इसमें नगर के विभिन्न विशाल मन्दिरों, ऐतिहासिक इमारतों, पुरातात्विक महत्व के स्थल एवं डायमण्ड उत्खनन क्षेत्र का भ्रमण कराया जा चुका है।
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