Monday, October 14, 2019

जागनी रास के उल्लास में रात भर झूमे सुन्दरसाथ

  •   अन्तर्राष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव में गरबा नृत्य की रही धूम
  •   सांस्कृतिक विविधता के साथ प्रेम और भक्ति का दिखा समागम


 जागिनी की रात के बाद ढोल-मंजीरा के साथ भजन-कीर्तन करते हुये श्रद्धालु।
         
अरुण सिंह,पन्ना। अन्तर्राष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव में सांस्कृतिक विविधता के साथ प्रेम और भक्ति का अनूठा समागम देखने को मिला। प्रणामी सम्प्रदाय के इस प्रमुख तीर्थ में देश के कोने-कोने से आये श्रद्धालुओं ने शरद पूॢणमा की रात गरबा नृत्य में लीन होकर आनन्द रस का पान किया। आकर्षक परिधानों से सुसज्जित युवक व युवतियों द्वारा प्रस्तुत गरबा नृत्य समारोह में आकर्षण का केन्द्र रहा। जागनी रास के उल्लास में सभी सुन्दरसाथ पूरी रात आनन्द मग्न होकर झूमते और नाचते रहे। इस दौरान ऐसा आभास होता रहा मानो साक्षात बृज के बाल-गोपाल श्रीकृष्ण अपनी अखण्ड शक्तियों के साथ प्राणनाथ जी के स्वरूप को पुन: भक्तों के दिलों में उसी तरह से प्रकाशित कर रहे हैं जैसे सैकड़ों वर्ष पहले हुआ था।
उल्लेखनीय है कि पन्ना धाम में चल रहे अन्तर्राष्ट्रीय शरद पूर्णिमा उत्सव में जहां धर्माचार्यों द्वारा धर्म का मार्ग बताया जा रहा है तो वहीं नन्हें-मुन्हें बच्चों द्वारा श्री कृष्ण की लीलाओं पर नृत्य किये जा रहे हैं तो महामति की वाणी पर आधारित गायन देश के ख्याति प्राप्त गायकों द्वारा किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रणामी समाज के युवक व युवतियों द्वारा भी शानदार रास गरबे की प्रस्तुतियां दी जा रहीं हैं। विश्व प्रसिद्ध श्री प्राणनाथ जी मदिर पन्ना में रात-दिन धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चल रहा है। विदित हो कि शरद पूर्णिमा की रात महामति की शोभायात्रा बंगला जी दरबार से रासमण्डल पहुंची उसके बाद शुरू हुआ अन्तर्राष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव कार्यक्रम जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया, उक्त कार्यक्रम पंचमी तक चलेगा। जिसमें रात-दिन धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ रास, गरबा के मुख्य कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। जागिनी रात की सुबह ग्रामीण क्षेत्रों से आये सुन्दरसाथ अपने सुर-ताल व ढोलक-मंजीरों के साथ बृह्म चबूतरे के प्रांगण में भजन-कीर्तन में मस्त दिखे। इन मण्डलियों में नर-नारी व बच्चे सभी शामिल रहे और महामति श्री प्राणनाथ जी की वाणी पर आधारित भजन-कीर्तन सुर-ताल के साथ गाते दिखे। बीच-बीच में उनके साथी भाव-विभोर होकर नाचने और गरबा करने में मग्न दिखे।
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Sunday, October 13, 2019

अखण्ड रास के रचईया और प्राणनाथ के जयकारों से गूँजा पन्ना

  • अन्तर्राष्ट्रीय शरदपूर्णिमा  महोत्सव में उमड़े हजारों श्रद्धालु
  •   पंचमी तक चलेंगी जागिनी रास की लीलायें
  •   देश-विदेश से पन्ना धाम पहुँचे हजारों तीर्थयात्री


बृह्म चबूतरे पर श्री बंगला जी मन्दिर से रासमण्डल के लिये जाती श्रीजी की सवारी।

अरुण सिंह, पन्ना। प्रणामी सम्प्रदाय के प्रमुख तीर्थ पद्मावतीपुरी धाम पन्ना में आज अन्तर्राष्ट्रीय शरदपूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। अखण्ड मुक्तिदाता निष्कलंक बुद्ध अवतार श्री प्राणनाथ जी 5 दिनों तक चलने वाले इस महारास में सुन्दरसाथ के साथ साक्षात उन्हें रासमण्डल में परमधाम के वास्तविक सुख व अध्यात्मिक द्रष्टिकोण से रत करते हुये उनका जीवन धन्य करेंगे।शरदपूर्णिमा  के अवसर पर पचास हजार से अधिक सुन्दरसाथ व नगरवासियों ने श्री जी को निहारकर अपने नैनों को तृप्त किया। जैसे ही मध्य रात्रि में बंगला जी दरबार साहब से श्री जी की सवारी रासमण्डल के लिये निकली वैसे ही रास के रचइया की, श्री प्राणनाथ प्यारे के जयकारों से पन्ना नगरी गूंज उठी।
प्रणामी धर्म का सबसे पवित्र धाम श्री गुम्बट जी मन्दिर जिसका प्रांगण बृह्म चबूतरा (रास मण्डल) कहा जाता है। क्योंकि यहीं पर श्री प्राणनाथ जी ने अपने परम स्नेही सुन्दरसाथ जी को श्री राज जी-श्यामा जी की अलौकिक अखण्ड रासलीला, जागिनी रास का दर्शन कराया था। इसीलिये इसे जागिनी लीला भी कहा जाता है। उसी समय से अन्तर्राष्ट्रीय शरदपूर्णिमा महोत्सव का यहां पर बड़े ही धूमधाम और भक्ति भाव के साथ आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु यहां विराजमान साक्षात अक्षरातीत पूर्णबृह्म के अलौकिक रास के आनंद में सराबोर होते हैं। रविवार पूनम की रात जैसे ही श्रीजी की भव्य सवारी बंगला जी दरबार साहब से रासमण्डल में आई तो वहां उपस्थित हजारों सुन्दरसाथ अपने पिया के साथ प्रेम रंग में डूब गये। यह अखण्ड रास का आयोजन पांच दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय शरदपूर्णिमा उत्सव के रूप में रात-दिन चलेगा।

 बृह्म चबूतरे में रामत गाते सुन्दरसाथ व उपस्थित श्रद्धालुगण। 

इस महोत्सव में प्रणामी धर्म के सभी गादीपति, धर्मगुरू व संतगण उपस्थित रहकर कार्यक्रम में शामिल होते हैं। सर्वप्रथम श्री बंगला जी मन्दिर में सेवा, पूजा व आरती हुई। तत्पश्चात श्री राज जी महाराज के दिव्य          सिंहासन को मन्दिर के पुजारियों द्वारा अपने कंधों पर लेकर श्री प्राणनाथ जी के जयघोष के साथ शोभयात्रा रात्रि ठीक 12 बजे निकली। शोभायात्रा निकलते ही उपस्थित हजारों की संख्या में प्रणामी धर्मावलम्बी सुन्दरसाथ की भावनायें व उत्साह कुछ ऐसा दिखा जैसे कि श्री प्राणनाथ जी स्वयं पालकी में विराजमान हों। शोभायात्रा बृह्म चबूतरे पर ही स्थित रासमण्डल में पधराई गई। श्री राज जी की शोभयात्रा की एक झलक पाने के लिये  लगभग पचास हजार से अधिक सुन्दरसाथ क्षणिक दर्शन पाने के लिये बेताब दिखे जो कभी श्री प्राणनाथ जी ने साक्षात जागिनी लीला कर इसी बृह्म चबूतरे में सुन्दरसाथ को दिखाया था। देश के कोने-कोने से आये सुन्दरसाथ पारम्परिक वेशभूषा में सुसज्जित अपनी-अपनी बोलियों में भजन-कीर्तन करते नजर आये।

सफाई कार्य में जुटे रहे नपा के सफाई कर्मी

इस वर्ष इतनी अधिक भीड होने के बावजूद भी कहीं भी गन्दगी नजर नहीं आई। कारण यह था कि नगरपालिका के सफाई कर्मी रात-दिन सजग रहे जिस कारण से मन्दिर परिसर और उसके चारों ओर कहीं भी गन्दगी नाम की चीज नहीं दिखी। नगरपालिका अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा व सीएमओ ओ.पी. दुबे की संवेदनशीलता के कारण इस वर्ष चहुँओर साफ - सफाई नजर आई। सफाई कर्मियों की इस महोत्सव में सफाई के प्रति लगनशीलता को देखते हुये स्थानीय लोगों सहित दूर-देश से आये हुये लोगों ने भी तहेदिल से आभार व्यक्त किया।

श्री जुगल किशोर जी मन्दिर में भी रही शरद पूर्णिमा  की धूम



पन्ना के सुप्रसिद्ध श्री जुगल किशोर जी मन्दिर में भी शरदपूर्णिमा  के दिन श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ी रही। सुबह से ही नगर सहित आस-पास के ग्रामों से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का पहुँचना शुरू हुआ जो रात 10 बजे तक जारी रहा। मन्दिर समिति के सदस्य जगदीश नामदेव ने बताया कि शरदपूर्णिमा  के दिन महिलायें उपवास रखतीं हैं। जिसके अन्तर्गत भोग के रूप में 750 ग्राम खोवा के पेड़े बनाये जाते हैं जिसको 6 भागों में बाँटकर करके महिलायें श्री किशोर जी मन्दिर में राधिका रानी को सखी भाव से एक भाग अर्पित करतीं हैं। बताया जाता है की दोपहर से ही शुरू होता है। राधा रानी को एक भाग अर्पित करने के बाद एक भाग प्रसाद के रूप में स्वयं ग्रहण कर उपवास पूरा करतीं हैं। इसके अलावा शेष बचे भाग में से एक भाग गाय, एक पति, एक गर्भवती महिला, एक तुलसी को अर्पित कर शरदपूर्णिमा का व्रत पूरा किया जाता है।

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सेवानिवृत्त होने पर सहा. संचालक शिक्षा की हुई भावभीनी विदाई

  •   सरकारी कार्य को बड़े ही असरकारी ढंग से करते थे श्री शुक्ल: डीईओ
  •   आर. पी. हायर सेकण्डरी स्कूल में आयोजित हुआ कार्यक्रम 


सहायक संचालक शिक्षा रामप्रकाश शुक्ल के सेवानिवृत्त होने पर आयोजित समारोह में मंचासीन अतिथि। 

अरुण सिंह,पन्ना। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सहायक संचालक के पद पर कार्यरत रहे रामप्रकाश शुक्ल के सेवानिवृत्त होने पर उन्हें शिक्षा महकमे से जुड़े लोगों द्वारा भावभीनी विदाई दी गई। रूद्र प्रताप हायर सेकेण्डरी स्कूल पन्ना के सभागार में आयोजित गरिमामय समारोह में बोलते हुये जिला शिक्षा अधिकारी कमल सिंह  कुशवाहा ने कहा कि श्री शुक्ला पूरे दो वर्ष मेरे साथ सहायक संचालक रहे। इस दौरान मैने महसूस किया कि श्री शुक्ला में कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्यों को भी सहजता से बिना किसी तनाव के पूरा करने की क्षमतायें हैं। सरकारी कार्य को बहुत ही असरकारी ढंग से करने वाला इनके जैसा कोई दूसरा व्यक्ति मैने अपने सेवाकाल में नहीं देखा। शिक्षा के क्षेत्र में इनकी गहरी समझ और अन्तर्दृष्टि का उपयोग हमने जिले की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण बनाने में किया है, जिसका परिणाम भी जिले को प्राप्त हुआ है।
कार्यक्रम की शुरूआत समारोह के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी कमल सिंह कुशवाहा व रामप्रकाश शुक्ला सहित अन्य मंचासीन अतिथियों द्वारा सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन के साथ हुई। सरस्वती वन्दना एवं स्वागत गीत के बाद विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य महेन्द्र यादव ने श्री शुक्ला जी के व्यक्तत्व, उनके सेवाकाल की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया। आपने कहा कि आर.पी. हायर सेकेण्डरी स्कूल में बतौर प्राचार्य श्री शुक्ला जी ने इस विद्यालय को सजाने और सँवारने से लेकर संसाधन जुटाने व शैक्षणिक व्यवस्था बेहतर बनाने में जो अथक श्रम और प्रयास किये हैं, उसे भुलाया नहीं जा सकता। इस विद्यालय के जर्रे-जर्रे में आपके चिह्न मौजूद हैं। श्री यादव ने कहा कि इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये आॢथक मामलों में सौ फीसदी ईमानदार हैं। यही वजह है कि आपके प्राचार्य रहते हुये यहां पर जो भी कार्य हुये हैं, उनकी गुणवत्ता देखते ही बनती है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये समारोह के मुख्य अतिथि डीईओ श्री कुशवाह ने कहा कि ज्ञान कुंज टीम के साथ-साथ श्री शुक्ला ने पूरे जिले का भ्रमण कर विगत कई वर्षों के परीक्षा परिणाम का रिकार्ड तोड़ा है। प्रदेश की टॉप टेन की मैरिट सूची में पिछले वर्ष हमारे जिले से 4 व इस वर्ष 7 बच्चों ने स्थान अॢजत किया है। निश्चित ही इसका श्रेय ज्ञान कुंज टीम एवं उसका नेतृत्व कर रहे रामप्रकाश शुक्ला जी को जाता है। कार्यक्रम को डाइट से रमजान खान ने भी संबोधित किया और श्री शुक्ल द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किये गये अभिनव प्रयोगों के बारे में बताया।
विदाई समारोह में सेवानिवृत्त सहायक संचालक श्री शुक्ल ने भावुक होकर अपने सभी सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुये कहा कि आप सबसे जो सम्मान औन अपनापन मिला है वह हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। श्री शुक्ल ने डीईओ श्री कुशवाहा को धन्यवाद देते हुये कहा कि इनके समय मैं जो कुछ कर पाया उसकी वजह यह रही कि इन्होंने पूरी टीम और नेतृत्व पर भरोसा किया और कार्य करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की। कार्यक्रम को पुष्पराज सिंह ने भी संबोधित किया तथा सफल संचालन डॉ. शेर सिंह ने किया। इस मौके पर श्रीमति प्रतिमा शुक्ला, आर.के. रैकवार, आर.एस. भदौरिया, निशा जैन, श्रीमति भारती खरे, विजय कुमार शुक्ला, डॉ. राजकिशोर पाण्डे, रामलखन शुक्ला, के.के. सोनी सहित शिक्षक व गणमान्य जन उपस्थित रहे।
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Saturday, October 12, 2019

20 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुये उपयंत्री गिरफ्तार

  •   अजयगढ़ जनपद में पदस्थ है आरोपी उपयंत्री
  •   आँगनबाड़ी केन्द्र का मूल्यांकन करने माँग रहा था रिश्वत
  •   लोकायुक्त पुलिस सागर की टीम ने की कार्यवाही


कार्यवाही करते हुये लोकायुक्त पुलिस तथा सामने बैठा आरोपी उपयंत्री। 

अरुण सिंह,पन्ना। लोकायुक्त पुलिस सागर की टीम ने शनिवार को अजयगढ़ जनपद में पदस्थ उपयंत्री संतोष जगवानी को उनके पन्ना स्थित निवास में 20 हजार रू. की रिश्वत लेते हुये रंगे हाँथ गिरफ्तार किया है। आरोपी उपयंत्री द्वारा आँगनबाड़ी केन्द्र का मूल्यांकन करने के एवज में अजयगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत छतैनी के सरपंच से रिश्वत की माँग की जा रही थी। मामले की शिकायत सरपंच के पुत्र छुट्टन यादव द्वारा लोकायुक्त सागर से की गई, फलस्वरूप डीएसपी लोकायुक्त राजेश खेड़े के नेतृत्व में पन्ना पहुँची टीम ने आरोपी उपयंत्री को रिश्वत लेते हुये रंगे हाँथ पकड़ लिया।
उल्लेखनीय है कि अजयगढ़ तहसील के ग्राम छतैनी निवासी छुट्टन यादव ने लोकायुक्त कार्यालय सागर में शिकायत की थी कि छतैनी पंचायत स्थित आँगनबाड़ी केन्द्र का मूल्यांकन करने के लिये उपयंत्री संतोष जगवानी द्वारा 5 प्रतिशत के हिसाब से 20 हजार रू. की रिश्वत माँगी जा रही है। शिकायत के बाद तथ्यों की पड़ताल करने पर आरोप सही पाये जाने पर लोकायुक्त पुलिस सागर की टीम ने शनिवार को पन्ना शहर के धाम मुहल्ला स्थित उपयंत्री के निवास में छापामार कार्यवाही करते हुये आरोपी को रिश्वत के रूपयों सहित गिरफ्तार किया। लोकायुक्त पुलिस की इस कार्यवाही के बाद हड़कम्प मचा रहा। लोकायुक्त पुलिस द्वारा आरोपी उपयंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध कर कार्यवाही की जा रही है।
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पन्ना में महिला को मिला 7.87 कैरेट का बेशकीमती हीरा



हीरा जमा कराते हुए श्रीमती राधा साथ में उनका पति मुकेश। 
 ।। अरुण सिंह,पन्ना।।  
                                                            
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की उथली हीरा खदानों में बेशकीमती हीरों के मिलने का सिलसिला जारी है। जिला मुख्यालय पन्ना के रानीगंज मुहल्ला निवासी श्रीमति राधा पति मुकेश कुमार अग्रवाल को सकरिया स्थित चौपरा हीरा खदान में 7.87 कैरेट का जेम क्वालिटी वाला बेशकीमती हीरा मिला है।  आश्चर्य की बात तो यह है कि किस्मत की धनी इस महिला ने हीरा मिलने के महज चार  दिन पूर्व 7 अक्टूबर 19 को पन्ना स्थित हीरा कार्यालय से 8 गुणे 7 मीटर का उत्खनन पट्टा प्राप्त किया था। पट्टा मिलने के तीन दिन बाद ही महिला को यह कीमती हीरा मिल गया, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। हीरा कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार महिला ने हीरा मिलने पर 11 अक्टूबर बुधवार को उसे विधिवत जमा कर दिया है, जिसे इसी माह होने वाली उथली खदानों से प्राप्त हुए हीरों की खुली नीलामी में बिक्री के लिये रखा जायेगा। हीरे की अनुमानित कीमत 20 लाख रु. से अधिक बताई जा रही है।  
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Thursday, October 10, 2019

शरद पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होने पन्ना पहुँचे हजारों श्रद्धालु

  •  विविधता व भक्ति भाव से युक्त तेरस की सवारी निकलेगी आज
  •   महामति श्री प्राणनाथ जी मन्दिर में चल रहे विविध धार्मिक कार्यक्रम


पन्ना स्थित श्री 108 प्राणनाथ जी मन्दिर।

अरुण सिंह,पन्ना। मन्दिरों के शहर पन्ना में आयोजित होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय शरदपूर्णिमा महोत्सव में शामिल होने के लिये देश के विभिन्न प्रान्तों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुँच चुके हैं तथा उनके आने का सिलसिला अभी भी जारी है। प्रणामी सम्प्रदाय के प्रमुख तीर्थ पद्मावतीपुरी धाम पन्ना में धार्मिक आयोजन के अन्तर्गत 11 अक्टूबर शुक्रवार की शाम विविधता व भक्तिभाव से युक्त  ऐतिहासिक तेरस की सवारी (शोभा यात्रा) पूरी भव्यता व धूमधाम के साथ श्री खेजड़ा मन्दिर से निकाली जायेगी। इस सवारी में देश-विदेश से आये हजारों श्रद्धालु सुन्दरसाथ नाचते गाते शामिल होकर व पन्ना धाम की पवित्र माटी को चूमकर इस नगरी का गौरव बढ़ायेंगे। श्री प्राणनाथ जी मन्दिर ट्रस्ट पन्ना द्वारा आयोजन के संबंध में बताया गया कि तेरस की सवारी नगर के प्राचीन खेजड़ा मन्दिर से शुक्रवार की शाम 5.30 बजे से शुरू होगी, जो नगर के बीटीआई चौराहा, कोतवाली चौक, बल्देव मन्दिर चौराहा से बड़ा बाजार होते हुये किशोर जी मन्दिर, पंचम ङ्क्षसह चौराहा व महेन्द्र भवन चौराहे से होकर देर रात श्री प्राणनाथ जी मन्दिर पहुंचेगी जहां इसका समापन होगा। श्रीजी की इस विशाल सवारी में नगर के निवासियों के अलावा देश विदेश के हजारों सुन्दरसाथ शामिल रहेंगे। परम्परानुसार सभी सुन्दरसाथ बैण्डवाजे की धुन पर अलग-अलग टुकडिय़ों में नाचते गाते तथा अपनी-अपनी परम्पराओं को पन्ना नगर की पवित्र धरती पर प्राणनाथ जी के प्रेम का अहसास कराते नगर के प्रमुख मार्गों से निकलेंगे।  
  मन्दिर प्रांगण में एकत्रित सुन्दरसाथ नाचते-गाते हुये।
उल्लेखनीय है कि पन्ना नगर में महामति के समय से लगातार श्री जी की सवारी पन्ना में भव्य स्वरूप के साथ निकाली जाती है। मान्यता है कि इस सवारी का आयोजन पहली बार बुन्देलखण्ड केशरी महाराजा छत्रसाल जी ने किया था। कहा जाता है कि जब बुन्देलखण्ड को चारों तरफ  से औरंगजेब के सरदारों ने घेर लिया था तब महामति श्री प्राणनाथ जी ने महाराजा छत्रसाल को अपनी चमत्कारी दिव्य तलवार देकर विजयश्री का आशीर्वाद दिया था और कहा था कि हे राजन जब तक तुम अपने दुश्मनों को धूल चटाकर नहीं आ जाते तब तक में इसी खेजड़ा मन्दिर में ही रहूँगा। तेरस को जब महाराजा छत्रसाल अपने दुश्मनों पर फ तह हासिल कर लौटे तो अपने सद्गुरू महामति प्राणनाथ जी को पालकी में बिठाकर अपने कंधों का सहारा देकर बृह्म चबूतरा  श्री प्राणनाथ जी मन्दिर लाये थे। तभी से हर वर्ष महाराजा छत्रसाल द्वारा निकाली गई सवारी के प्रतीक स्वरूप दशहरे के बाद तेरस के दिन यह सवारी निकाली जाती है।

जगह-जगह होगी श्रीजी की आरती

ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व की इस विशाल शोभायात्रा को निहारने पन्ना नगर वासियों में अन्तर्राष्ट्रीय शरदपूर्णिमा महोत्सव को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। जिसके चलते नगरवासियों द्वारा भी अपनी तरफ  से इस सवारी के स्वागत की जोरदार तैयारियां की जा रहीं हैं। इस वर्ष भी पन्ना वासियों ने पूरे उत्साह के साथ जगह-जगह श्री जी की आरती एवं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये पेयजल सहित अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी कर रखी हैं।

चल रहे हैं विविध धार्मिक कार्यक्रम

महामति श्री प्राणनाथ जी मन्दिर प्रांगण (बृह्म चबूतरे) में अंतर्राष्टीय शरद पूर्णिमा मनाने आये हजारों सुन्दरसाथ एकत्रित होते हैं और वहां प्रतिदिन धर्माचार्य,  विद्वत्तजनों द्वारा बृह्मज्ञान की बातें बताई जा रहीं हैं। इसके साथ-साथ भजन व गरबे के कार्यक्रम भी आयोजित हो रहे हैं। जिसके रसरंग में भींगे सुन्दरसाथ कभी नाचते नजर आते हैं तो कभी एकटक बृह्मज्ञान की बातें आत्मसात करते हैं।
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भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह यादव का निधन

  • प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा नेताओं ने जताया शोक    


महेन्द्र सिंह यादव पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष पन्ना।  

पन्ना। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष महेन्द्र सिंह यादव का बुधवार की शाम दिल्ली में इलाज के दौरान दु:खद निधन हो गया। 50 वर्षीय श्री यादव ने संगठन में विभिन्न पदों पर रहते हुये अपनी क्षमता और काबलियत की दम पर एक होनहार राजनेता की छवि बनाई थी। उनके आकस्मिक निधन से समूचे पन्ना जिले में शोक का माहौल है। श्री यादव की अन्त्येष्टि गुरूवार को पन्ना के धरमसागर स्थित मुक्तिधाम में किया गया।
उल्लेखनीय है कि पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष के निधन की खबर मिलते ही उनके बेनीसागर मुहल्ला पन्ना स्थित निवास में भाजपा नेताओं, समर्थकों व नागरिकों का तांता लगा रहा। श्री यादव का पार्थिव शरीर गुरूवार को दोपहर जैस ही पन्ना पहुँचा, उनके निवास में मौजूद लोग बिलख-बिलखकर रो पड़े। भाजपा नेता श्री यादव की दो पुत्रियां हैं, इनकी छोटी पुत्री ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। बेटी को पिता का अग्नि संस्कार करते हुये देख वहां मौजूद लोगों की आँखें छलक पड़ीं। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा के नेताओं ने पूर्व जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा नेता श्री यादव की विगत तीन माह से तबियत खराब चल रही थी। लीवर में संक्रमण होने का पता चलने पर आपको एम्स दिल्ली में इलाज के लिये भर्ती कराया गया था। लेकिन हरसंभव प्रयासों के बावजूद उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ और बुधवार की शाम श्री यादव की साँसें हमेशा के लिये थम गईं। पन्ना जिले के इस होनहार नेता को अन्तिम विदाई देने के लिये लोग उमड़ पड़े, जिसमें सभी राजनैतिक दलों के लोग शामिल थे। अन्त्येष्टि के समय प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष सतानंद गौतम, लोकेन्द्र प्रताप सिंह इटौरी, जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश चतुर्वेदी, कांग्रेस नेता शिवजीत सिंह, रवीन्द्र शुक्ला, मुरारी लाल थापक, प्रतिष्ठित व्यवसायी प्रदीप सिंह राठौड़, रोनी जेम्स, प्रदीप मिश्रा, बबलू पाठक, पत्रकार बृजेन्द्र गर्ग, अरूण सिंह सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता व पदाधिकारी तथा गणमान्य जन मौजूद रहे।
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Wednesday, October 9, 2019

राम के बाण से मरने पर रावण ने कहा मेरी आकांक्षा पूरी हुई


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रावण ब्रह्मज्ञानी था। यह भी परमात्मा की मर्जी थी कि वह यह पार्ट अदा करे। उसने यह भली तरह अदा किया। और कहते हैं, जब राम के बाण से वह मरा, तो उसने कहा कि मेरी जन्मोंकृजन्मों की आकांक्षा पूरी हुई। राम के हाथों मारा जाऊं, इससे बड़ी और कोई आकांक्षा हो भी नहीं सकती। क्योंकि जो राम के हाथ मारा गया, वह सीधा मोक्ष चला जाता है। गुरु के हाथ जो मारा गया, वह और कहां जाएगा!
और जैसे पांडवों को कहा है कृष्ण ने कि मरते हुए भीष्म से जाकर धर्म की शिक्षा ले लो, वैसे ही राम ने लक्ष्मण को भेजा है रावण के पास कि वह मर न जाए, वह परम ज्ञानी हैय उससे कुछ ज्ञान के सूत्र ले आ। उस बहती गंगा से थोड़ा तू भी पानी पी ले। लेकिन कठिनाई क्या है? कठिनाई हमारी यह है कि हमारी समझ चुनाव की है। अगर हम राम को चुनते हैं, तो रावण दुश्मन हो गया। अगर हम रावण को चुनते हैं, तो राम दुश्मन हो गए। और दोनों को तो हम चुन नहीं सकते। क्योंकि हमको लगता है, दोनों तो बड़े विरोधी हैं, इनको हम कैसे चुनें! और जो दोनों को चुन ले, वही रामलीला का सार समझा। क्योंकि रामलीला अकेली राम की लीला नहीं है, रावण के बिना हो भी नहीं सकती। थोडा रावण को हटा लो रामलीला से, फिर रामलीला बिलकुल ठप्प हो जाएगी, वहीं गिर जाएगी। सब सहारे उखड़ जाएंगे।

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राम खड़े न हो सकेंगे बिना रावण के। राम को रावण का सहारा है। प्रकाश हो नहीं सकता बिना अंधेरे के। अंधेरा प्रकाश को बड़ा सहारा है। जीवन हो नहीं सकता बिना मृत्यु के। मृत्यु के हाथों पर ही जीवन टिका है। जीवन विपरीत में से चल रहा है। राम और रावण, मृत्यु और जीवन, दोनों विरोध वस्तुतरू विरोधी नहीं हैं, सहयोगी हैं। और जिसने ऐसा देखा, उसी ने समझा कि रामलीला का अर्थ क्या है। तब विरोध नाटक रह जाता है। तब भीतर कोई वैमनस्य नहीं है। न तो राम के मन में कोई वैमनस्य है, न रावण के मन में कोई वैमनस्य है। और इसीलिए तो हमने इस कथा को धार्मिक कहा है। अगर वैमनस्य हो, तो कथा नहीं रही, इतिहास हो गया। इस फर्क को भी ठीक से समझ लो। पुराण और इतिहास का यही फर्क है। इतिहास साधारण आदमियों की जीवन घटनाएं हैं। वहां संघर्ष है, विरोध है, वैमनस्य है, दुश्मनी है। पुराण! पुराण नाटक है, लीला है। वहां वास्तविक नहीं है वैमनस्यय दिखावा है, खेल है। जो मिला है अभिनय, उसे पूरा करना है।

कथा यह है कि वाल्मीकि ने राम के होने के पहले ही रामायण लिखी। अब जब लिख ही दी थी, तो फिर राम को पूरा करना पड़ा। कर भी क्या सकते थे। जब वाल्मीकि जैसा आदमी लिख दे, तो तुम करोगे क्या! फिर उसको पूरा करना ही पड़ा। यह बड़ी मीठी बात है। द्रष्टा कह देते हैं, फिर उसे पूरा करना पड़ता है। इसका अर्थ कुल इतना ही है, जैसे कि नाटक की कथा तो पहले ही लिखी होती है, फिर कथा को पूरा करते हैं नाटक में। नाटक में कथा पैदा नहीं होती। कथा पहले पैदा होती है, फिर कथा के अनुसार नाटक चलता है। क्या किसको कहना है, सब तय होता है। जीवन का सारा खेल तय है। क्या होना है, तय है। तुम नाहक ही अपना बोझ उठाए चल रहे हो। अगर तुम समझ लो कि सिर्फ नाटक है जीवन, तो तुम्हारा जीवन रामलीला हो गया, तुम पुराणकृपुरुष हो गए, फिर तुम्हारा इतिहास से कोई नाता न रहा। फिर तुम इस भ्रांति में नहीं हो कि तुम कर रहे हो। फिर तुम जानते हो कि जो उसने कहा है, हो रहा है। हम उसकी मर्जी पूरी कर रहे हैं। अगर वह रावण बनने को कहे, तो ठीक।

रावण को तुम मार तो नहीं डालते! जो आदमी रावण का पार्ट करता है रामलीला में, उसको तुम मार तो नहीं डालते कि इसने रावण का पार्ट किया है, इसको मार डालों। जैसे ही मंच के बाहर आया, बात खतम हो गई। अगर उसने पार्ट अच्छा किया, तो उसे भी तगमे देते हो। असली सवाल पार्ट अच्छा करने का है। राम का हो कि रावण का, यह बात अर्थपूर्ण नहीं है। ढंग से पूरा किया जाए ऋ कुशलता से पूरा किया जाए। अभिनय पूराकृपूरा हो, तो तुम पुराणकृपुरुष हो गए। लड़ो बिना वैमनस्य के, संघर्ष करो बिना किसी अपने मन केय जहां जीवन ले जाए बहो। तब तुम्हारे जीवन में लीला आ गई। लीला आते ही निर्भार हो जाता है मन। लीला आते ही चित्त की सब उलझनें कट जाती हैं। जब खेल ही है, तो चिंता क्या रही! फिर एक सपना हो जाता है।

इसी अर्थ में हमने संसार को माया कहा है। माया का अर्थ इतना ही है कि तुम माया की तरह इसे लेना। अगर तुम इसे माया की तरह ले सको, तो भीतर तुम ब्रह्म को खोज लोगे। अगर तुमने इसे सत्य की तरह लिया, तो तुम भीतर के ब्रह्म को गंवा दोगे।

@ओशो, गीता दर्शन (भाग 8)

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परम्परानुसार महाराजा छत्रसाल के वंशज को सौंपी गई तलवार

  •   खेजड़ा मन्दिर में हजारों श्रद्धालु सैकडों वर्षों से चली आ रही परम्परा के बने साक्षी
  •   महामति प्राणनाथ जी व बुन्देल केशरी महाराजा छत्रसाल के जयकारों से गूँजा पन्ना


 महाराज छत्रसाल के वंशज को तलवार व बीरा भेंट करते हुए।

अरुण सिंह,पन्ना। बुन्देल केशरी महाराजा छत्रसाल के वंशजों को दशहरा के दिन खेजड़ा मन्दिर में पान बीरा और तलवार भेंट किये जाने की प्राचीन परम्परा का निर्वहन पूरे विधि विधान और उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। पद्मावतीपुरी धाम पन्ना के प्राचीन खेजड़ा मन्दिर मेंं महामति के हजारों अनुयायी व श्रद्धालु अपरान्ह 4 बजे से ही मन्दिर प्रांगण में एकत्रित हो गए और उस घड़ी का इंतजार करने लगे जो आज से लगभग  चार सौ वर्ष पूर्व घटी थी। उस समय महामति श्री प्राणनाथ जी द्वारा छत्रसाल जी को दिव्य तलवार व वीरा भेंट कर उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया था। महामति श्री प्राणनाथ जी से मिले इस आशीर्वाद के उपरान्त उन्होंने ऐतिहासिक 52 लडाईयां मुगलों के खिलाफ  जीती थीं। तभी से इस प्राचीन परम्परा के निर्वहन में प्रतिवर्ष दशहरा के दिन महाराज छत्रसाल के वंशजों को तलवार व वीरा भेंट किया जाता है। इस समारोह में भाग लेने तथा परम्परानुसार पानी वीरा व तलवार भेंट किये जाने के दृश्य को निहारने के लिये हजारों की संख्या में प्रणामी सम्प्रदाय के अनुयायी व श्रद्धालु यहां पहुँचते हैं।
उल्लेखनीय है कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक महाराज छत्रसाल के वंशज जैसे ही खेजड़ा मन्दिर पहुंचे, प्राणनाथ प्यारे और  महाराजा छत्रसाल के जयकारों से समूचा वातावरण गूँज उठा। मंगलवार शाम 7 बजे के लगभग पन्ना महाराजा राघवेन्द्र सिंह जू देव को मन्दिर के पुजारी द्वारा तलवार व वीरा भेंटकर परम्परा निभाई गई। इस परम्परा के साक्षी बने देश-विदेश से आए हजारों सुन्दरसाथ श्रद्धालुओं ने अपने आप को धन्य महसूस करते हुए श्री जी के चरणों में मत्था टेका। मालुम हो कि महामति श्री प्राणनाथ जी ने बुन्देलखण्ड की रक्षा के लिए महराजा छत्रसाल को वरदानी तलवार सौंपी थी तथा वीरा उठाकर संकल्प करवाया था जिससे महाराजा छत्रसाल मुगलों के खिलाफ लड़ी गई सभी 52 लड़ाईयों को जीतने में सफल हुये थे। अपराजेय महाराजा छत्रसाल ने अपना साम्राज्य स्थापित कर पन्ना को राजधानी बनाया था। पन्ना में उसी समय से इस परम्परा का निर्वहन किया जा रहा है। विजयादशमी के दिन सायं 6 बजे से 8 बजे के बीच आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में श्री प्राणनाथ जी मन्दिर के पुजारी महाराज छत्रसाल के वंशजों का तिलक कर वीरा व तलवार देकर इस पुरानी रस्म को निभाते हैं।

महोत्सव में दिखी सांस्कृतिक विविधता की झलक


 खेजड़ा मन्दिर प्रांगण में आयोजन के दौरान मौजूद श्रद्धालु।

पन्ना के खेजड़ा मन्दिर में आयोजित इस भव्य समारोह को देखने के लिये हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। देश के कोने-कोने से यहां पहुँचे श्रद्धालुओं की सांस्कृतिक विविधता देखते ही बन रही थी। कोई नेपाल से आया था तो कोई सिक्किम से, कोई गुजरात से आया था तो कोई महाराष्ट्र से यहां पहुँचा था। महोत्सव के बीच जब महाराज छत्रसाल के वंशज पन्ना महाराज राघवेन्द्र ङ्क्षसह जू देव साथ में राजपरिवार के सदस्यगण पधारे तो सभा भवन प्राणनाथ जी की जय व बुन्देल केशरी महाराजा छत्रसाल के जयकारों से गूँज उठा।

धर्मगुरूओं ने महाराज छत्रशाल के शौर्य का किया बखान

समारोह में प्रणामी सम्प्रदाय के धर्म गुरूओं द्वारा महाराजा छत्रसाल के शौर्य, साहस और बहुमुखी प्रतिभा का बखान किया गया जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ मंत्रमुग्ध होकर सुना। इस मौके पर महामति श्री प्राणनाथ जी द्वारा दिए गए आशीर्वाद स्वरूप दिव्य तलवार व बीरा का महत्व भी बतलाया गया। धर्मोपदेशक पं. खेमराज जी ने इस स्थान की विशेषता तथा अखंड मुक्तिदाता, निष्कलंक बुद्ध अवतार, प्राणनाथ जी की महिमा सुनाते हुए कहा कि इसी स्थान से नरबीर केसरी महाराजा छत्रसाल साकुण्डल हुये थे और पूरे देश में एकता, सामाजिक समरसता का वह भाव जो उन्हें महामति प्राणनाथ जी ने दिया था उसे विस्तारित किया था। आपने कहा कि यह महामति का आशीर्वाद ही था कि छत्रसाल छत्ता हो गए और उनके तेज से सारे सुल्तान घबऱाने लगे। भोपाल से आये धर्माचार्य रूपराज शर्मा ने भी उपस्थित जनसमूह को महाराजा छत्रसाल व महामति श्री प्राणनाथ जी की महिमा बताई। जैसे ही मन्दिर के पुजारी जी ने पन्ना महाराजा राघवेन्द्र  सिंह जू देव को तिलक कर वीरा देते हुए तलवार दिया महोत्सव में उपस्थित सैकड़ों लोग महामति प्राणनाथ की जय, महाराज छत्रसाल की जय तथा सभी सुन्दरसाथ की जय का उद्घोष किया। इस अवसर पर श्री प्राणनाथ मन्दिर ट्रस्ट के पदाधिकारी अजय शर्मा, जयप्रकाश शर्मा, प्रबंधक राजकिशन शर्मा व न्यासीगण सहित धर्माचार्य व हजारों की संख्या में देश-विदेश से आये सुंदरसाथ उपस्थित रहे।
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दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट। 

नकारात्मक सोच से हम खुद बन रहे भस्मासुर


मनोवैज्ञानिक तथ्य .......

अमेरिका में जब एक कैदी को फॉसी की सजा सुनाई गई तो वहॉ के कुछ बैज्ञानिकों ने सोचा कि क्यों न इस कैदी पर कुछ प्रयोग किया जाय ! तब कैदी को बताया गया कि हम तुम्हें फॉसी देकर नहीं अपितु  जहरीला कोबरा सांप से डसाकर मारेगें !
बैज्ञानिकों ने कैदी के सामने बड़ा सा जहरीला सांप लेकर आये  और इसके बाद कैदी की ऑखे बंद करके उसे कुर्सी से बॉधा गया और फिर उसको सांप से डसवाने के बजाय उसके शरीर में दो सेफ्टी पिन्स चुभाई गई ! इसके बाद जो कुछ घटित हुआ वह बेहद चौकाने वाला था। सेफ्टी पिन्स शरीर में चुभाने के कुछ सेकेन्ड में ही कैदी की मौत हो गई। पोस्टमार्डम के बाद पाया गया कि कैदी के शरीर मे सांप के जहर के समान ही जहर है ।
अब यहाँ यह विचारणीय है कि आखिर ये जहर कहॉ से आया, जिसने उस कैदी की जान ले ली ......वो जहर उसके खुद के शरीर ने ही सदमे में उत्पन्न किया था । हमारे हर संकल्प से पाजिटीव एवं निगेटीव एनर्जी उत्पन्न होती है और वो हमारे शरीर मे उस अनुसार हॉर्मोन्स उत्पन्न करती है । 75 फीसदी बीमारियों का मूल कारण नकारात्मक सोंच से उत्पन्न ऊर्जा ही है । आज इंसान ही अपनी गलत सोंच से भस्मासुर बन खुद का विनाश कर रहा है ......अपनी सोंच सदैव सकारात्मक रखें और खुश रहें।