Thursday, April 8, 2021

कोरोना वायरस से बचाव हेतु पन्ना जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू

  • नगरीय क्षेत्रों में शुक्रवार शाम 6 बजे से सोमवार प्रात: 6 बजे तक लॉकडाउन रहेगा
  • सोशल डिस्टेंसिंग का पालन तथा मास्क न लगाने पर लगाया जा सकेगा जुर्माना

 कोरोना वायरस से बचाव हेतु पन्ना शहर में नागरिकों को जागरूक करते कलेक्टर व एस.पी. । 

पन्ना। कोरोना वायरस से बचाव हेतु पन्ना जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किये गए हैं। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी संजय कुमार मिश्र द्वारा गृह विभाग द्वारा जारी निर्देशों के परिपालन में कोविड-19 महामारी की रोकथाम एवं बचाव के निर्णय फलस्वरूप पन्ना जिले में कोरोना वायरस के संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण एवं जनसामान्य के स्वास्थ्य हित एवं लोक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (1) एवं मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ एक्ट 1949 की धारा 71 (1) 72 (2) के तहत सम्पूर्ण जिले में अतिरिक्त प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किये गए हैं।

लागू किए गए आदेशों में जिले के समस्त नगरीय क्षेत्रों एवं नगर परिषद क्षेत्रों में प्रतिदिन रात्रि 10 बजे से प्रात: 6 बजे तक रात्रि कालीन लॉक डाउन रहेगा। समस्त नगरीय क्षेत्रों में शुक्रवार शाम 6 बजे से सोमवार प्रात: 6 बजे तक लॉकडाउन रहेगा। लॉकडाउन अवधि में अन्य राज्यों से मॉल सेवाओं का आगमन, केमिस्ट राशन दुकाने, अस्पताल, पेट्रोल पम्प, बैंक एवं एटीएम, दूध, सब्जी की दुकानें एवं समाचार पत्र वितरण, औद्योगिक मजदूरों, उद्योगों हेतु कच्चा मॉल,तैयार मॉल, उद्योगों के अधिकारी, कर्मचारियों का आवागमन, केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं स्थानीय निकायों के अधिकारी, कर्मचारियों का आवागमन, परीक्षा केन्द्र, आने जाने वाले परीक्षार्थी तथा परीक्षाओं से जुडे अधिकारी, कर्मचारी, एम्बुलेन्स, फायर बिग्रेड सेवाएं, टीकाकरण हेतु आवागमन कर रहे नागरिक एवं कर्मचारी, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट से आने जाने वाले नागरिक, पंजीकृत गैस एजेन्सी द्वारा गैस आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं जैसे अस्पताल, नर्सिंग होम एवं स्वास्थ्य सुविधा के लिए यात्रा, अपातकाल उद्देश्यों के लिए दो या चार पहिया वाहन का उपयोग, दो पहिया पर एक व्यक्ति, चार पहिया पर दो व्यक्ति (मेडिकल आपातकालीन स्थिति को छोडकर) ऐसे समस्त होटल जिनमें यात्रियों के ठहरने के साथ भोजन की सुविधा उपलब्ध है उन्हें नियमानुसार छूट रहेगी। उपरोक्त गतिविधियों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए, मास्क न लगाने पर जुर्माना लगाया जा सकेगा।

 कार्यालयों का कार्यदिवस सोमवार से शुक्रवार निर्धारित

जिले के समस्त कार्यालयों का कार्यदिवस सप्ताह में 5 दिवस सोमवार से शुक्रवार निर्धारित किया जाता है। शनिवार एवं रविवार को समस्त कार्यालय बंद रहेंगे। 5 कार्यदिवसों में कार्यालयीन समय प्रात: 10 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है। यह आदेश 31 जुलाई तक प्रभावशील रहेगा। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण द्वारा जारी गाइड लाइन अनुसार घोषित किए गए हॉट स्पॉट क्षेत्र कन्टेंमेंट जोन में आवाजाही पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की गाइडलाइन अनुसार प्रतिबंध लागू होंगे। 

सम्पूर्ण जिले में किसी भी प्रकार के सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक आयोजन प्रतिबंधित रहेंगे। विशेष परिस्थियों में संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी से लिखित अनुमति लेकर ही आयोजन किए जा सकेंगे। शासन की गाइड लाइन के अनुसार शादी समारोह एवं अन्य सामाजिक कार्यक्रम में अधिकतम 100 एवं तिलक कार्यक्रम में दोनों पक्षों से कुल 50 व्यक्ति शामिल हो सकेंगे। उठावना मृत्यु आदि कार्यक्रम में 50 व्यक्ति शामिल हो सकेगे। इसके अलावा इन कार्यक्रम में डीजे, हलवाई तथा अन्य स्टाफ उपरोक्त 100 की संख्या में शामिल माने जाएंगे। बंद हॉल में आयोजित कार्यक्रमों में क्षमता का 50 प्रतिशत अधिकतम 100 व्यक्ति शामिल हो सकेंगे। प्रत्येक मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई आगामी आदेश तक बंद रहेगी। 

जनसुविधा को दृष्टिगत रखते हुए जनसुनवाई पेटी लगाई जाएगी जिसमें आवेदक अपना आवेदन डाल सकेंगे। कोविड-19 प्रोटोकाल (फेस मास्क, सेनेटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग) का पालन अनिवार्य होगा। मास्क न लगाने पर 100 रूपये का जुर्माना तथा आवश्यकता होने पर अस्थाई जेल भेजा जा सकेगा। जिले की समस्त दुकानों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में रस्सी के माध्यम से अथवा चूने के गोले बनाकर सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित कराई जाए। व्यापारी व स्टाफ तथा दुकान में आने वालों के लिए मास्क का उपयोग सुनिश्चित कराया जाए। दुकान के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न कराने पर 500 रूपये जुर्माना व दूसरी बार उल्लंघन होने पर दुकान को 24 घण्टे के लिए सील किया जाएगा। बार-बार उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध विधि अनुसार दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।

बाहर से आने वाले व्यक्तियों को रहना होगा क्वारेंटाइन

लागू किए गए उपरोक्त आदेश का पालन न करने पर नगरपालिका क्षेत्र पन्ना में मुख्य नगरपालिका अधिकारी पन्ना, अनुभाग अन्तर्गत उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार नायब तहसीलदार तथा अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, नगर परिषद क्षेत्रान्तर्गत थाना प्रभारी के उडनदस्ता दल द्वारा कोविड-19 के प्रोटोकाल (फेस मास्क, सेनेटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्केनिंग) का पालन न किए जाने तथा आदेश का उल्लंघन पाए जाने पर अर्थदण्ड तथा वैधानिक कार्यवाही करेंगे। कोविड संक्रमण रोकथाम एवं बचाव के लिए पन्ना जिले के बाहर से आने वाले व्यक्तियों को 7 दिवस तक अनिवार्य रूप से होम क्वारेंटाइन में रहना होगा।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पन्ना ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी तथा मुख्य नगरपालिका परिषद समस्त नगर पंचायत, नगरीय क्षेत्रों में जिले के बाहर से आने वाले व्यक्तियों की जानकारी रजिस्टर में संधारित करेंगे और नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र फीवर क्लीनिक में भेजकर उनका स्क्रीनिंग टेस्ट किया जाएगा। संबंधित व्यक्ति की जानकारी कोरोना कमाण्ड एवं कन्ट्रोल रूम को भेजेंगे तथा आवश्यक होने पर मरीज के होम आइसोलेशन अथवा होम क्वारेंटाइन की व्यवस्था कराना सुनिश्चित करेंगे।

 इसी प्रकार ग्राम पंचायतों के सचिव नगरीय क्षेत्र के वार्ड प्रभारी द्वारा भी मास्क नही लगाए जाने पर लोगों के विरूद्ध 100 रूपये का जुर्माना लगाएंगे। पंचायत सचिव, वार्ड प्रभारी अपने अपने क्षेत्र में आने वाले सर्दी, जुकाम, बुखार एवं कोरोना जांच रिपोर्ट प्राप्त होने तक लोगों को स्कूल, आंगनवाडी भवनों में रूकने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। समस्त कार्यालयों, बैंकों, अस्पताल परिसरों में शत प्रतिशत मास्क लगाना सुनिश्चित करें। इन संस्थाओं के प्रवेश द्वार पर एक कर्मचारी की ड्यूटी प्रात: 10 बजे से शाम 6 बजे तक लगाई जिससे संस्थान पर आने वाले समस्त व्यक्तियों की जानकारी दर्ज की जा सके।

यात्री वाहनों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना दण्डनीय

कोरोना संक्रमण बचाव के लिए आटो रिक्शा, बसों, समस्त सार्वजनिक यात्री बसों में यात्रा के दौरान समस्त यात्री तथा चालक परिचालक को मास्क लगाना अनिवार्य होगा। यात्री वाहनों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना दण्डनीय होगा। यात्रियों से मास्क लगवाने की जिम्मेदारी वाहन आपरेटर की होगी। प्रथम बार उल्लंघन करने पर जुर्माने की कार्यवाही, द्वितीय वार उल्लंघन किए जाने पर वाहन का परमिट रद्द करते हुए वाहन जप्ती की कार्यवाही की जाएगी। 

कोरोना संक्रमण रोकथाम हेतु राष्ट्रीय एवं मध्यप्रदेश शासन के दिशानिर्देशों का पालन न करने वालों के विरूद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 से 60 के प्रावधानों के अलावा आईपीसी की धारा 188 एवं अन्य विधिसंगत कानूनी प्रावधानों के अन्तर्गत जुर्माना सहित दण्डिक कार्यवाही की जाएगी। कोरोना संक्रमण के बचाव हेतु पूर्व से गठित रैपिड रिस्पांस टीम पूर्ववत कार्य करेगी। समस्त टीमें आवंटित कार्य क्षेत्र के अन्तर्गत भ्रमण कर उपरोक्त आदेशों एवं अन्य आदेशों के प्रोटोकाल का पालन कराने के लिए उत्तरदायी होंगी। चूंकि वर्तमान में ऐसी परिस्थितियां है कि जनसामान्य को जिन्हें यह आदेश निर्दिष्ट है को व्यक्तिश: सूचना सम्यक रूप से तामील किया जाना संभव नही है अत: दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 (2) के अन्तर्गत एक पक्षीय रूप से आदेश पारित किया जाता है।

 इस सूचना का प्रकाशन जिला कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला अस्पताल कार्यालय, समस्त राजस्व अधिकारी कार्यालय, समस्त जनपद पंचायत कार्यालय, पुलिस थाने के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने के साथ आमजन की जानकारी के लिए समाचार पत्रों में इसका प्रकाशन जनसम्पर्क विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188, 269, 271 कोविड-19 रेग्युलेशन 2020 आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 तथा अन्य संगत प्रावधानों के अन्तर्गत कार्यवाही की जाएगी।

00000 

Wednesday, April 7, 2021

पानी की टपकती बूंदे जो हर चीज को बना देती हैं पत्थर

  • बेधक कुंड के बियाबान जंगल में प्रकृति का अद्भुत नजारा 
  •  पेट की बीमारी व चर्म रोग के लिए यह पानी रामबाण औषधि 

बेधक कुण्ड का वह स्थल जहाँ वृक्ष की जड़ों से टपकता है रहस्यमय पानी। 
फोटो - अरुण सिंह 
।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। रहस्य और रोमांच से लबरेज पन्ना जिले के जंगलों में प्रकृति के ऐसे-ऐसे अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं जो लोगों को विस्मय विमुग्ध कर देते हैं। जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 40 किलोमीटर दूर सालिकपुर सेहा के बियाबान जंगल में एक ऐसा स्थान है, जहां पेड़ की जड़ों से टपकने वाला पानी हर चीज को कठोर पत्थर में तब्दील कर देता है। इस रहस्यमय पानी के संपर्क में आने वाले वृक्ष, जड़ें व सूखी लकडय़िां कुछ समय के अंतराल में पत्थर बन जाती हैं। ऐसा क्यों होता है, सैकड़ों वर्षो से यह रहस्य बना हुआ है।

 गौरतलब है कि बृजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बरहों कुदकपुर के निकट घनघोर जंगल में यह अनूठा स्थान है, जिसे बेधक कुंड के नाम से जाना जाता है। रहस्यों से परिपूर्ण इस क्षेत्र में चारों तरफ ऊंचे पहाड़ व गहरे सेहे हैं, जहां दिन के उजाले में भी जाने से लोग खौफ खाते हैं। यहां पर गहरे कुण्डों की एक पूरी श्रृंखला है, जिनमें बृहस्पति कुंड, सूरजकुंड, पतालिया कुंड व हत्यारा कुंड सहित सात ऐसे कुंड हैं जिनके बारे में अंचल के लोग जानते हैं। इन सभी कुंडों के पीछे कोई न कोई गाथा जुड़ी हुई है। इन्हीं में से एक बेधक कुंड है, जहां कठपीपल की पहाड़ से झूलती विशालकाय जड़ों से हमेशा पानी टपकता रहता है।

 भीषण गर्मी के दिनों में भी इस स्थान पर गजब की शीतलता का अनुभव होता है। पहाड़ की चट्टानों पर चारों तरफ मधुमक्खियों के बड़े-बड़े छत्ते नजर आते हैं। कुंड के आसपास सुरंग नुमा कई गुफाएं भी हैं, जहां भालुओं सहित कई तरह के वन्य जीव निवास करते हैं। तराई अंचल का यह क्षेत्र साधु-सन्यासियों व तपस्वियों के अलावा डकैतों को भी अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। बेधक कुंड भी डकैतों की पसंदीदा शरण स्थली रही है। घनघोर जंगल व गहरे सेहे में स्थित बेधक कुंड तक पहुंचना आसान नहीं है। दुर्गम व खतरनाक जंगली रास्तों से होते हुए जो कोई भी इस मनोरम स्थल पर पहुंचता है, वह प्रकृति की अद्भुत कारीगरी को देख मंत्रमुग्ध हो जाता है।

आज तक नहीं सुलझ पाई रहस्य की गुत्थी 

 

इस तरह नजर आती हैं पत्थर बन चुकीं वृक्षों की जड़ें।  (फोटो - अरुण सिंह) 

हैरत की बात तो यह है कि पूरे इलाके में कहीं भी पानी की एक बूंद नजर नहीं आती। पहाड़ रूखा सूखा नजर आता है, फिर भी इस स्थान पर वृक्ष की जड़ों से रहस्यमय पानी की बूंदे अनवरत रूप से टपकती रहती हैं। यह पानी कहां से और कैसे जड़ों में पहुंचता है तमाम खोजबीन के बाद भी इसकी गुत्थी आज तक कोई नहीं सुलझा पाया है। यहां जड़ों से टपकने वाला पानी हर किसी के लिए अचरज का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थान के बारे में उन्होंने अपने पुरखों से भी यही सुना था कि यहां पानी टपकता है। यह पानी जिस किसी चीज के भी संपर्क में आता है वह पत्थर बन जाता है। यह चमत्कार यहां पर आज भी उसी तरह घटित होता है। पानी के गुण धर्म में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं आया।

आश्चर्य चकित कर देने वाली बात यह है कि कठपीपल के जिस वृक्ष की जड़ से यह रहस्यमय पानी नीचे टपकता है, उस वृक्ष की जड़ें पत्थर की तरह कठोर हो चुकी हैं। पहाड़ से लटकने वाली लताएं व वृक्षों की जड़ें भी इस पानी के सतत संपर्क में रहने के कारण पत्थर की शक्ल अख्तियार करके अनूठी कलाकृतियों में तब्दील हो गई हैं। प्रकृति का यह सृजन अचंभित कर देने वाला है। 

अंचल के ग्रामीण तथा ग्राम बरहों कुदक पुर के आदिवासी बताते हैं कि बेधक कुंड में जड़ों से टपकने वाले पानी में औषधीय गुण भी मौजूद हैं। बताया जाता है कि इस पानी का सेवन करने से पेट से संबंधित बीमारियां दूर हो जाती हैं। चर्म रोग के लिए तो बेधक कुंड के पानी को रामबाण औषधि कहा जाता है। अंचल के ग्रामीण औषधि के रूप में यहां के चमत्कारिक जल का उपयोग करते हैं और उन्हें फायदा भी होता है। ग्राम बरहों कुदकपुर के निवासी व अन्य कई लोगों ने पानी के औषधीय गुणों के बारे में पुष्टि की है। बेधक कुंड के बारे में यह भी कहा जाता है कि वर्ष में एक दो बार यहां जड़ों से पारस की बूंदे भी टपकती हैं। पारस की खूबी यह होती है कि लोहे से इसका संपर्क होने पर लोहा सोना बन जाता है।

00000

Saturday, April 3, 2021

केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में उतरीं राजमाता

  •   पन्ना टाइगर रिज़र्व व केन नदी को बचाने युवाओं ने संभाली कमान 
  •   मुख्यमंत्री जी के पन्ना प्रवास के समय भी युवकों ने किया था विरोध 
  •   खजुराहो सांसद श्री शर्मा के पन्ना पहुँचने पर सौंपा गया ज्ञापन 

राजमाता दिलहर कुमारी राजमंदिर पैलेश के सामने विरोध प्रकट करते हुए। 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। केन नदी के नैसर्गिक प्रवाह को रोककर पर्यटन पर आधारित एक मात्र आजीविका की धरोहर पन्ना टाईगर रिजर्व के बड़े हिस्से को डुबाने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध का सिलसिला अब थमने का नाम नहीं ले रहा। पन्ना राजघराने की सबसे बुजुर्ग सदस्य राजमाता दिलहर कुमारी सहित भाजपा की कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले ने भी इस विवादित परियोजना का पुरजोर विरोध किया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान होली के समय परिवार के साथ जब एकांतवास में पन्ना आए थे, उस समय यहां के युवकों ने कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए अनूठे अंदाज में केन-बेतवा परियोजना का विरोध किया था। शनिवार को आज जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद बीडी शर्मा पन्ना पहुंचे, उस समय कांग्रेस के नेताओं ने इस परियोजना को पन्ना के लिए घातक बताते हुए उन्हें ज्ञापन सौंपा। इस तरह से पन्ना में विरोध का सिलसिला अनवरत रूप से जारी है।


सरकिट हाउस में जिले के कांग्रेस नेता सांसद व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री शर्मा को ज्ञापन सौंपते हुए। 

 उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए पन्ना जिले के नागरिक केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करने के लिए नये-नये तरीके ईजाद कर रहे हैं। वाहनों में नारे लिखवाकर लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया जा रहा है। ताकि केन नदी को बचाने के इस अभियान में अधिक से अधिक लोग जुड़ सकें। पन्ना वासियों का कहना है कि केन नदी पर पहला हक उनका है, हमें हमारे हक से वंचित नहीं किया जा सकता। मालुम हो कि पन्ना जिले में पेयजल की आपूर्ति बोर, कुंओं व तालाबों के जरिये होती है। इन जल श्रोतों में अत्यधिक कैल्शियम होने के कारण पन्ना की 90 फीसदी जनता उदर रोगों से पीडि़त है। यदि केन नदी का पानी जो पूरी तरह प्रदूषण से मुक्त है तथा जिस पर पन्नावासियों का पहला हक है, वह पेयजल के लिये उपलब्ध हो जाये तो पन्नावासियों को उदर रोगों से निजात मिल सकती है।

पन्ना जिले को नहीं मिलेगा कोई लाभ



इस परियोजना की हकीकत से जनमानस को अवगत कराने की मुहिम में सक्रिय अंकित शर्मा बताते हैं कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना जिले के किसी भी भू-भाग को कोई लाभ नहीं मिलेगा। जबकि 427 किमी लम्बी केन नदी का अधिकांश भाग जो केन को विशाल बनाता है, जल आपूर्ति वाला यह क्षेत्र पन्ना जिले में ही स्थित है। केन नदी से प्रति वर्ष अरबों रू. की रेत निकलती है, जो इस परियोजना के मूर्तरूप लेने पर खत्म हो जायेगी, जिससे पन्ना जिले को भारी भरकम राजस्व की हानि होगी। चूंकि पन्ना टाईगर रिजर्व के स्थापित होने में पन्नावासियों ने अत्यधिक बलिदान दिया है, और अब जब पन्ना टाईगर रिजर्व बाघों से आबाद हुआ व यहां पर्यटन के विकास की संभावनायें बढ़ीं तो टाईगर रिजर्व को ही उजाडऩे की साजिश रच दी गई जो इस जिले के साथ घोर अन्याय है।

बफर क्षेत्र में होगा पार्क का विस्तार

प्रस्तावित ढोढऩ बाँध चूंकि पन्ना टाईगर रिजर्व के कोर एरिया में आता है जो बाघों का प्रिय विचरण व रहवास स्थल है। इसी जगह पर अति दुर्लभ लम्बी चोंच वाले गिद्ध भी रहते हैं। पार्क का यह अति महत्वपूर्ण हिस्सा डूब में आ जायेगा। बाँध निर्माण के बाद पार्क का बफर एरिया निश्चित ही कोर एरिया में परिवर्तित होगा जिसके परिणाम स्वरूप पन्नावासियों को फिर विस्थापन का दंश झेलना पड़ेगा। पन्ना टाईगर रिजर्व के कड़े नियमों व बफर क्षेत्र के कारण पन्ना जिले के लोगों को मौजूदा समय अनेकों मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं, यदि बाँध का निर्माण हुआ और कोर क्षेत्र को विस्तारित किया गया तो पन्नावासियों की मुसीबतें और बढ़ जायेंगी तथा रोजी-रोजगार के साधन भी खत्म हो जायेंगे।

000000


केन-बेतवा परियोजना से बुंदेलखंड होगा हरा-भरा : बी.डी. शर्मा

प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते सांसद बी. डी. शर्मा साथ में खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह। 

पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना के मूर्त रूप लेने पर सूखे की विभीषिका को झेलने वाला बुंदेलखंड क्षेत्र हरा भरा हो जायेगा। यह बात शनिवार को आज खजुराहो सांसद व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.डी. शर्मा ने सर्किट हाउस पन्ना में आयोजित प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि यह बहुप्रतीक्षित और बहुआयामी योजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी का सपना है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी जी पूरा करेंगे।

 केन-बेतवा परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व को होने वाली बड़ी क्षति तथा स्थानीय लोगों के असंतोष व विरोध की ओर पत्रकारों द्वारा जब खजुराहो सांसद का ध्यान आकृष्ट कराया गया तो उन्होंने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व को इस योजना से होने वाली क्षति का समाधान किया जायेगा। श्री शर्मा ने कहा कि यह बात गलत है कि परियोजना से पन्ना जिले को कोई लाभ नहीं होगा। आपने बताया कि पन्ना जिले की 70 हजार हेक्टेयर भूमि लिफ्ट से सिंचित होगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री शर्मा को जब पत्रकारों ने बताया कि जिले में लिफ्ट सिंचाई की योजनायें असफल रही हैं, जिन्हें सिंचाई विभाग ने बंद कर दिया है। इस पर उन्होंने कहा कि लिफ्ट सिंचाई योजनाएं असफल नहीं हुई। भाजपा की वरिष्ठ नेता व प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना का खुलकर किए जा रहे विरोध के संबंध में सांसद श्री शर्मा ने कहा कि सुश्री महदेले पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं। हम उनसे मिलकर चर्चा करेंगे, जब उन्हें वास्तविकता से अवगत कराया जाएगा तो उनके मन में जो गलतफहमी है वह दूर हो जाएगी। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की इस प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश के खनिज मंत्री व पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह भी मौजूद रहे।

00000

Friday, April 2, 2021

धधकते जंगल और ठुमके लगाते वन अधिकारी

  •  इतने गैर जिम्मेदार अधिकारियों के रहते कैसे बचेंगे जंगल
  •  भीषण आग भड़कने से दो प्लांटेशन जलकर हो गये खाक 

वन विभाग के रेस्ट हाउस में ठुमके लगाते अधिकारी व कर्मचारी। 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। जंगल जब धू-धूकर जल रहे हों, उस समय जिम्मेदार वन अधिकारी जंगल को आग से बचाने के बजाय वन अमले के साथ फिल्मी गानों पर ठुमके लगाते हुए जश्न मनायें, तो जंगल की क्या दशा होगी इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। मामला पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल अंतर्गत शाहनगर क्षेत्र का है, जहां वन विभाग के दो प्लांटेशन भीषण आग की चपेट में आकर खाक हो गये। विगत 31 मार्च को भड़की आग ने 1 अप्रैल को विकराल रूप धारण कर लिया, क्योंकि जिम्मेदार वन अमले द्वारा आग पर नियंत्रण पाने कोई प्रयास नहीं किए गये। शर्मनाक बात तो यह है कि जब प्लांटेशन जल रहे थे, उसी समय उप वन मंडलाधिकारी हेमंत यादव वन कर्मचारियों के साथ होली गीत पर ठुमके लगाकर जश्न मना रहे थे।

आग से जलकर खाक हो चुके प्लांटेशन का नजारा। 

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मार्च के महीने में ही आगजनी की घटनाओं ने तांडव दिखाना शुरू कर दिया था। बीते माह मार्च में उत्तर वन मंडल व दक्षिण वन मंडल सहित पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में कई इलाकों पर आग भड़क चुकी है, जिससे जंगल को भारी क्षति पहुंची है। उत्तर वन मंडल व बफर क्षेत्र में आग भड़कने पर वन अमले द्वारा उसे बुझाने तथा नियंत्रित करने के लिए प्रयास भी किये गये। लेकिन दक्षिण वन मंडल का जंगल ऐसा प्रतीत होता है कि वह भगवान भरोसे है। यहां पदस्थ वन अधिकारी अपने दायित्वों और कर्तव्यों के प्रति कितने सजग व संवेदनशील हैं, यह ठुमके लगाते वन कर्मियों व अधिकारियों के वीडियो को देखकर लगाया जा सकता है। ठुमके लगाने वाला तथा आग से जलकर खाक हो चुके वन विभाग के दो प्लांटेशनों का वीडियो वायरल होने पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। लोग कह रहे हैं कि इतने गैर जिम्मेदार और लापरवाह अधिकारियों के रहते दक्षिण वन मंडल पन्ना का जंगल कैसे सुरक्षित रहेगा ? अभी तो मार्च का महीना बीता है तथा भीषण तपिश वाली गर्मी आने को है। जब मार्च में ही जंगल धू-धू कर जलता रहा और आग पर काबू नहीं पाया जा सका तो अप्रैल और मई की भीषण गर्मी में क्या हालात निर्मित होंगे।

लापरवाहों के बीच सच्चे वन योद्धा भी मौजूद 

जिले के वन महकमे में गैर जिम्मेदार और लापरवाह वन अधिकारियों तथा कर्मचारियों के कारण जंगल तथा वन्य प्राणियों की सुरक्षा जहां खतरे में हैं, वहीं ऐसे वन कर्मचारी भी हैं जो सच्चे वन योद्धा की भूमिका का निर्वहन कर जंगल और प्राणियों की सुरक्षा इमानदारी से कर रहे हैं। उत्तर वनमंडल पन्ना अंतर्गत सिंहपुर वन क्षेत्र के एक वन योद्धा की जानकारी पर्यावरण प्रेमी हनुमंत सिंह ने साझा की है। आपने बताया कि पिछले दिनों इस वन क्षेत्र में जब आग भड़की तो वनरक्षक मुरली अहिरवार एक सच्चे वन योद्धा की तरह वन समिति की अपनी टीम को लेकर जंगल में ही डटे रहे। भड़की आग को काबू में करने के लिए उनकी टीम ने हर संभव प्रयास किया और भूखे प्यासे आग की लपटों से जूझते रहे। ठुमके लगाने वाले वन अधिकारियों व कर्मचारियों को इस वन योद्धा से सीख लेनी चाहिए।

सही समय पर लगायें ठुमके, तो होगी तारीफ

 

बारिश शुरू होने पर ख़ुशी का इजहार करती वन अधिकारी स्नेहा ढाल। 

ठुमके लगाकर अपनी खुशी का इजहार करना बुरी बात नहीं है, लेकिन इसके लिए सही वक्त और उचित वजह का होना जरूरी है। तब ठुमके लगाने पर भी तारीफ होती है, लोग खुले दिल से सराहना भी करते हैं। इसका जीता जागता उदाहरण महिला वन अधिकारी स्नेहा ढाल हैं, जिनके नृत्य ने हजारों लोगों का दिल जीत लिया है। मामला ओडिशा के सिमलीपाल नेशनल पार्क का है। यहां मार्च के दूसरे सप्ताह में आग भड़की हुई थी, जिसे नियंत्रित करने के अथक प्रयास किए जा रहे थे। लेकिन जंगल में भड़की यह आग लगातार बेकाबू हो रही थी, वन अधिकारी स्नेहा ढाल भी आग की लपटों पर काबू पाने के लिए जी जान से जुटी थीं। उसी समय अचानक मौसम बदला और बारिश होने लगी, जिससे आग बुझाने में मदद मिली। अचानक बारिश शुरू होने पर महिला वन अधिकारी स्नेहा ढाल जंगल में ही खुशी से झूम उठी। स्नेहा का यह वीडियो वन अधिकारी रमेश पांडे ने ट्विटर पर शेयर कर दिया, जिसे अब तक लाखों लोग देख चुके हैं तथा तारीफ में कमेंट भी कर रहे हैं।

00000


Thursday, April 1, 2021

पन्ना नगरपालिका की सीमाओं का हुआ विस्तार

  •  सीमाओं की वृद्धि होने से ग्राम पंचायतों के निवासियों को मिलेंगी नागरिक सुविधायें 
  • पर्यटन गतिविधियों बढने से सामाजिक,आर्थिक एवं शैक्षणिक स्तर में आयेगा सुधार 

नगरपालिका परिषद पन्ना का कार्यालय। 

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना नगरपालिका परिषद की सीमाओं का विस्तार करने की कार्यवाही जिला प्रशासन द्वारा की गई है। सीमा विस्तार संबंधी अधिसूचना का प्रारंभिक प्रकाशन 31 मार्च 2021 को कर दिया गया है। इस संबंध में किसी भी व्यक्ति को आपत्ति हो तो लिखित रूप से 30 दिवस के अन्दर कलेक्टर पन्ना को प्रस्तुत कर सकता है। सीमावृद्धि का यह प्रस्ताव जिला प्रशासन द्वारा 02 वर्ष पूर्व राज्य शासन को भेजा गया था। शासन स्तर पर लंबित इस प्रकरण पर कार्यवाही खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के प्रयासों से हुई और 31 मार्च को मध्यप्रदेश शासन के राज्यपत्र में प्रकाशित की गयी।

मिली अधिकृत जानकारी के अनुसार पन्ना नगरपालिका की सीमाओं की वृद्धि के लिए जिन ग्राम पंचायतों को जोडा गया है उनमें जनकपुर, पुरूषोत्तमपुर, जनवार, कुंजवन, गहरा एवं पुराना पन्ना शामिल हैं। नगर परिषद पन्ना की सीमाओं की वृद्धि होने से जहां एक ओर नगरीय क्षेत्र का तेजी से सर्वांगीण विकास होगा वहीं सीमा वृद्धि में शामिल हुई ग्राम पंचायतों के निवासियों को नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे नगरपालिका क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियां बढने से लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा। इसके अलावा क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों बढने से नगर का सर्वांगीण विकास होने से लोगों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्तर में सुधार आयेगा।

मालुम हो कि नगरपालिका परिषद पन्ना की सीमा विस्तार के लिए उत्तर दिशा मेें जनकपुर एवं पुरूषोत्तमपुर पन्ना अजयगढ मार्ग 47 के 5/2 किलो मीटर से वन सीमा होते हुए रानीपुर तिराहा नाला लोकपाल सागर तालाब की वेस्ट वियर तक, पूर्व दिशा में पुरूषोत्तम एवं जनवार लोकपाल सागर तालाब की वेस्ट वियर से वन सीमा होते हुए मदारटेकरी बीएसएनएल टावर को शामिल कर धरमसागर तालाब की बाहरी सीमा अर्थात वन सीमा होते हुए श्मशान, जगात चैकी पानी टंकी एवं हनुमान जी मंदिर शामिल करते हुए वन सीमा तक, दक्षिण दिशा में जनवार एवं कुंजवन आराजी खसरा क्र. 3702/03 को शामिल करते हुए राष्ट्रीय राज्य मार्ग क्र. 75 से होते हुए सत्यम पैलेस एवं संजय नर्सरी, दुबे तालाब, कुंजवन, वन विभाग की चैकी, बृजेन्द्र सिंह बुन्देला के फार्म हाउस को शामिल करते हुए वन सीमा होते हुए किशोरी बंगाली के मकान के सामने स्थित नाले तक। इसी प्रकार पश्चिम दिशा में कुंजवन, गहरा एवं पुराना पन्ना, किशोरी बंगाली के मकान के सामने स्थित नाले से होते हुए निरपत सागर को शामिल कर मुडिया पहाड की वन सीमा होते हुए एनएमडीसी कालोनी को एवं ग्राम पंचायत पुराना पन्ना के ग्राम टपरियन को शामिल कर कचरा प्रसंस्करण को शामिल करते हुए अजयगढ रोड राष्ट्रीय मार्ग क्र. 47 के 5/2 किलो मीटर तक शामिल किया गया है।

00000 

आदिवासियों के लिये महुआ सीजन किसी उत्सव से कम नहीं

  •  महुआ फूलों की गंध से महक रहा विंध्य व बुंदेलखंड का जंगल
  • आदिवासी समाज के लिये महुआ फूल है रोजी-रोटी का जरिया 

सूखने के लिए फैले महुआ फूलों के पास बैठी आदिवासी महिला।  (फोटो - बाबूलाल दहिया) 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। वन क्षेत्रों के आस-पास रहने वाले आदिवासियों के लिये महुआ का सीजन किसी उत्सव से कम नहीं होता। गर्मी के इस मौसम में आदिवासी समाज के लोग व ग्रामीण महिलायें सुबह 5 बजे से महुआ बीनने के लिये जंगल की ओर कूच कर जाती हैं। विंध्य व बुंदेलखंड का जंगल इस सीजन में महुआ फूलों की गंध से महक उठता है। सुबह के समय यहां शीतल हवाओं व सफेद रसभरे महुआ फूलों की महक से वातावरण में मादकता इस कदर घुल जाती है कि गहरी सांस लेने भर से मन प्रफुल्लित और मदहोश हो जाता है। पन्ना जिले के कल्दा पठार में आदिवासी समाज के लिये तो महुआ के फूल रोजी-रोटी का जरिया है, इस मौसम में आदिवासियों का पूरा कुनबा महुआ फूल चुनने में लगा रहता है। जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा देशी अनाजों विशेषकर धान की दो सौ से भी अधिक प्रजातियों को संरक्षित करने वाले सुप्रसिद्ध बघेली कवि पद्म श्री बाबूलाल दहिया जी ने महुआ फूल के संबंध में अपने भावों का इजहार कुछ इस तरह किया है-

 महुआ गनी गरीब का,सब का पालन हार।

विंध्य समूचा इनदिनों,है इससे  गुलजार।।

किया विन्ध्य ने इस तरह,मौसम से अनुबंध।

हर  आंगन  से  आ  रही, सोंधी सोंधी  गंध।।   

 उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के दक्षिण वन मण्डल के अन्तर्गत आने वाले कल्दा पठार के जंगल में महुआ वृक्षों की भरमार है। महुआ के अलावा भी यहां के जंगल में हर्र, बहेरा, आंवला, चिरौंजी का प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है। गर्मी का यह मौसम मार्च से लेकर मई तक कल्दा पठार के आदिवासियों के लिये बहुत अहम होता है, क्यों कि इसी सीजन में महुआ के वृक्षों से सफेद रसभरे फूल टपकते हैं। इन महुआ फूलों को एकत्र कर आदिवासी सुखाते हैं, जिससे उन्हें इतनी आय हो जाती है कि पूरे वर्ष भर उनका गुजारा हो जाता है। जैव विविधता से परिपूर्ण कल्दा के जंगल में महुआ के वृक्ष बहुतायत से पाये जाते हैं, नतीजतन यह इलाका महुआ फूल व गोही के उत्पादन में अग्रणी है। इन दिनों सुबह 5 बजे से ही आदिवासी बांस की टोकरियां लेकर कुनबा सहित महुआ फूल चुनने के लिये जंगल में निकल जाते हैं और दिन ढलने तक वृक्षों से टपकने वाले महुआ फूलों का संग्रहण करते हैं। इस सीजन में पठार के आदिवासियों की यह दिनचर्या बन जाती है।

वनोपज है आदिवासियों के जीवन का आधार


महुआ फूल चुनने के बाद प्रशन्न मुद्रा में खड़ी महिला।  (फोटो-अनिल नागर) 

श्यामगिरी में महुआ फूल का संग्रहण कर रहे कुसुआ आदिवासी व तुलसी बाई ने बताया कि कल्दा पठार के श्यामगिरी सहित रामपुर, मैनहा, पिपरिया, जैतुपुरा, टोकुलपोंडी, भोपार, कुसमी, झिरिया व डोडी आदि में 50 ट्रक से भी अधिक महुआ फूल का संग्रहण हो जाता है। आदिवासियों ने बताया कि पेडों से इस कदर महुआ फूल टपकते हैं कि पूरे दिन चुनने के बाद भी पूरे फूल हम नहीं चुन पाते। इस सीजन की सबसे बड़ी खूबी और विशेषता यह भी होती है कि महुआ फूल आने पर बिछुड़े परिजनों का भी मिलन हो जाता है।

पठार के जो लोग रोजी रोटी की तलाश व अन्य कारणों से बाहर चले जाते हैं वे भी इस सीजन में वापस घर लौट आते हैं। पूरा कुनबा साथ मिलकर महुआ फूलों के संग्रहण में जुटता है ताकि पूरे साल के खर्च की व्यवस्था हो सके। कुसुआ आदिवासी ने बताया कि अमदरा, मैहर, पवई व सलेहा के व्यापारी यहां आकर आदिवासियों से महुआ खरीदकर ले जाते हैं। सीजन में यहां एक व्यक्ति 5 से 6 क्विंटल महुआ एकत्र कर लेता है। हर्र, बहेरा, आंवला, चिरौंजी व शहद से भी पठार के आदिवासियों को आय हो जाती है। यहां के लोग खेती किसानी से कहीं ज्यादा वनोपज पर ही आश्रित रहते हैं, जंगल यहां के आदिवासियों के जीवन का आधार है।

भालुओं का हर समय रहता है खतरा

पन्ना टाईगर रिजर्व के बफर क्षेत्र व कल्दा पठार के जंगल में जहां महुआ के पेड़ बहुतायत में हैं, वहां भालुओं का खतरा भी हर समय बना रहता है। महुआ फूल चूंकि भालुओं का प्रिय भोजन है, इसलिये महुआ फूल बीनने के लिये जंगल जाने वालों का आमना-सामना भालुओं से यदा-कदा हो जाता है। ऐसी स्थिति में कभी-कभी भालू हमला भी कर देते हैं। इस खतरे से बचने के लिये वन क्षेत्र के लोग आमतौर पर महुआ बीनने के लिये समूह में जंगल जाते हैं, वहीं हर समय सजग और चौकन्ने भी रहते हैं ताकि भालुओं द्वारा यकायक हमला करने की स्थिति में बचाव कर सकें। महुआ सीजन में भालुओं के हमले की सबसे ज्यादा घटनायें होती हैं। जानकारों के मुताबिक छोटे बच्चों वाली मादा भालू ज्यादा आक्रामक और हमलावर होती है। यदि धोखे से भी किसी ने उसके बच्चों की तरफ रुख किया तो मादा भालू बच्चों को असुरक्षित जान हमला बोल देती है।

पत्ते जलाने से भड़क जाती है आग

महुआ सीजन गर्मी के मौसम में आता है। तेज धूप और गर्मी पडऩे पर ही महुआ फूल नीचे टपकते हैं। चूंकि गर्मी में पतझड़ भी होता है जिससे महुआ वृक्ष के नीचे बड़ी मात्रा में पत्ते जमा हो जाते हैं जिसके चलते महुआ फूल इन पत्तों के बीच से बीनने पर काफी असुविधा होती है। इसे दूर करने के लिये लापरवाहीवश ग्रामीण पेड़ के नीचे सफाई करने के लिये पत्तों में आग लगा देते हैं, यह आग फैलकर कभी-कभी जंगल को ही अपनी चपेट में ले लेती है जिससे वन व वन्य प्राणियों को नुकसान होता है। महुआ फूल बीनने वालों को चाहिये कि वे पत्तों पर आग लगाने के बजाय पत्तों को वहां से हटाकर पेड़ के नीचे की सफाई करें ताकि जंगल की आग से सुरक्षा हो सके।

00000

Wednesday, March 31, 2021

मुरली मुकुट छीन यशोदा के लाल को पहनाय दियो घाघरा चोली

  •   पन्ना के श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर में कायम है अनूठी परम्परा
  •   वर्ष में एक बार चैत्र मास की तृतीया को होते हैं सखी वेष के दर्शन

सखी वेष में राधिका जी के संग श्री जुगल किशोर जी की मनोरम झाँकी। 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। मध्यप्रदेश में मंदिरों के शहर पन्ना में हर तीज त्योहार बड़े ही अनूठे और निराले अंदाज में मनाया जाता है। रंगों के पर्व होली पर यहाँ के सुप्रसिद्ध भगवान श्री जुगल किशोर जी मंदिर की छटा देखते ही बनती है। चैत्र मास की तृतीया को यहां भगवान श्री जुगुल किशोर जी सखी वेष धारण करते हैं। भगवान के इस नयनाभिराम अलौकिक स्वरूप के दर्शन वर्ष में सिर्फ एक बार होली के बाद तृतीया को ही होते हैं। यही वजह है कि सखी वेष के दर्शन करने पन्ना के श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। मुरली मुकुट छीन पहनाय दियो घाघरा चोली, यशोदा के लाल को दुलैया सो सजायो है। कृष्ण की भक्ति में लीन महिलायें जब ढोलक की थाप पर इस तरह के होली गीत गाते हुये गुलाल उड़ाकर नृत्य करती हैं तो म.प्र. के पन्ना शहर में स्थित सुप्रसिद्ध श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर में वृन्दावन जीवंत हो उठता है।

उल्लेखनीय है कि मन्दिरों के शहर पन्ना में स्थित श्री जुगुल किशोर जी का मन्दिर जन आस्था का केन्द्र है। इस भव्य और अनूठे मन्दिर में रंगों का पर्व होली वृन्दावन की तर्ज पर मनाया जाता है। कोरोना संक्रमण के चलते सोशल डिस्टेंसिंग सहित अन्य बंदिशों के बावजूद तृतीया के दिन आज बुद्धवार को इस मन्दिर की रंगत देखते ही बन रही थी। सुबह 5 बजे से ही महिला श्रद्धालुओं का सैलाब भगवान के सखी वेष को निहारने और उनके सानिद्ध में गुलाल की होली खेलने के लिये उमड़ पड़ा। ढोलक की थाप और मजीरों की सुमधुर ध्वनि के बीच महिला श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य की भक्ति और प्रेम में लीन होकर जब होली गीत और फाग गाया तो सभी के पाँव स्वमेव थिरकने लगे। फाग, नृत्य और गुलाल उड़ाने का यह सिलसिला सुबह 5 बजे से 11 बजे तक अनवरत चला। यह अनूठी परम्परा श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर में साढ़े तीन सौ वर्ष से भी अधिक समय से चली आ रही है, जो आज भी कायम है। इस मन्दिर के प्रथम महन्त बाबा गोविन्ददास दीक्षित जी के वंशज देवी दीक्षित ने जानकारी देते हुये बताया कि सखी वेष के दर्शन की परम्परा प्रथम महन्त जी के समय ही शुरू हुई थी। ऐसी मान्यता है कि चार धामों की यात्रा श्री जुगुल किशोर जी के दर्शन बिना अधूरी है।

गुलाल का ही मिलता है प्रसाद

परम्परा के अनुसार पन्ना के श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर में चैत्र मास की तृतीया को गुलाल का ही प्रसाद श्रद्धालुओं को मिलता है। सखी वेष में भगवान जुगुल किशोर व मुरली मुकुट धारण किये राधिका जी के अलौकिक स्वरूप को निहारने जब महिला श्रद्धालु मन्दिर पहुँचती हैं तो उनका सत्कार गुलाल से ही होता है। आज के दिन सुबह 5 बजे से 11 बजे तक मन्दिर के भीतर सिर्फ महिला श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलता है, जहां महिलायें एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पूरे भक्ति भाव के साथ फाग और होली गीत गाती हैं। पूरा मन्दिर आज गुलाल के रंग में सराबोर नजर आता है। यहां पर रंगों के पर्व होली की पूरे पाँच दिनों तक धूम रहती है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुु यह गीत गुनगुनाते हुये पन्ना के जुगुल किशोर मुरलिया में हीरा जड़े हैं होली का उत्सव मनाते हैं।

00000 


Tuesday, March 30, 2021

मामा, पेड़ कट जायेंगे तो हमें सांस लेने में दिक्कत होगी

  •  बच्चों, बूढ़ों और जवानों ने की प्रदेश के मुख्यमंत्री से मार्मिक अपील 
  •  केन-बेतवा प्रोजेक्ट को पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए बताया अभिशाप 

हाँथ में पोस्टर लिए मामा जी से मार्मिक अपील करता मासूम बालक। 

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। विश्व जल दिवस के मौके पर 22 मार्च को केन बेतवा लिंक परियोजना के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एमओए पर हस्ताक्षर किये थे। बाघों से आबाद हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए डेथ वारंट जारी करने के छठवें दिन ही प्रदेश के मुखिया शिवराज जी रंगों के पर्व होली पर परिवार सहित एकांतवास के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व की वादियों में आ पहुंचे। यहां उन्होंने अकोला बफर के जंगल में बाघों का दीदार भी किया और दीर्घजीवी बृक्ष बरगद के पौधे का रोपण भी किया। चूंकि उनका यह निजी और एकांत प्रवास था, इसलिए वे न तो स्थानीय लोगों से मिले और न ही उनकी समस्याएं सुनीं। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री जी के पन्ना प्रवास के दौरान ही होली पर्व पर पन्नावासियों ने कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए अनूठे अंदाज में मुख्यमंत्री का ध्यान केंद्र बेतवा लिंक परियोजना तथा उसके विनाशकारी परिणाम की ओर आकृष्ट किया जो राष्ट्रीय स्तर पर अब चर्चा का विषय बन चुका है।

वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री जी परिवार सहित जब पन्ना टाइगर रिज़र्व में आये थे, उस समय की तस्वीर। 

अपने हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर बूढ़े, बच्चे और जवान जो जहां था वहीं से ही प्रदेश के मुखिया शिवराज जी को होली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए उनसे मार्मिक अपील की। पन्नावासियों ने मुख्यमंत्री जी से अनुरोध किया कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को दृष्टिगत रखते हुए जिस वनक्षेत्र में आपने परिवार सहित शांति और सुकून के पल बिताये हैं, उस खूबसूरत वनक्षेत्र को कृपा कर उजडऩे से बचायें। विकास के नाम पर बीते 73 सालों में पन्ना को कुछ नहीं मिला, अब कम से कम उसकी प्राकृतिक संपदा को तो सुरक्षित रहने दें। केन नदी न सिर्फ पन्ना टाइगर रिजर्व अपितु बुंदेलखंड क्षेत्र की जीवन रेखा है, जिससे जीव-जंतु, वनस्पतियां, पेड़-पौधे और मानव सभी जीवन पाते हैं। ऐसी जीवनदायी नदी के नैसर्गिक प्रवाह को थाम कर इस अंचल के लोगों की सांसो को अवरुद्ध करने का अपराध मत करें। यहां के लोग आपसे प्यार करते हैं और बच्चे आपको मामा कहते हैं। उनके प्रेम और विश्वास को कायम रखें ताकि आने वाली पीढय़िां भी आपके प्रति सम्मान का भाव रख सकें।


 पन्ना जिले की धरती न सिर्फ रतनगर्भा है अपितु यह ऋषि-मुनियों और साधकों की तपोस्थली भी रही है। यहां का जंगल सुतीक्षण मुनि व अगस्त्य मुनि जैसे ऋषि यों का ठिकाना रहा है, जहां वनवास के समय मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम भी आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इस धरा की यह तासीर रही है कि यहां के लोग सिर्फ प्रेम और सद्भाव जानते हैं तथा समूचे प्रदेश, राष्ट्र व विश्व की मंगल कामना करते हैं। ऐसे प्रेम पूर्ण और सहज, सरल व प्राकृतिक जीवन जीने वाले लोगों की शांतिपूर्ण जिंदगी में कृपया खलल पैदा न करें। कम से कम इस मासूम बच्चे की अपील पर गौर करें, जो बड़े प्यार से आपको मामा कहते हुए अनुरोध कर रहा है कि प्यारे मामा, इतने पेड़ कट जाएंगे फिर हम लोगों को सांस लेने में दिक्कत होगी न। पन्ना के युवक अपनी भावनाओं का इजहार करते हुए कह रहे हैं कि केन बेतवा प्रोजेक्ट पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए अभिशाप है, कृपा करके इसे रोकें।

 नदी के प्रवाह को रोकने के बजाय धरा को पानीदार बनायें



 नदी के नैसर्गिक प्रवाह को रोकने, लाखों पेड़ पौधों को काटने और एक आबाद व जीवंत वन क्षेत्र को उजाडऩे से किसी का कोई भला नहीं हो सकता। बल्कि इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भोगना पड़ेगा। नदी को हमने नहीं बनाया, यह तो प्रकृति का सृजन है, तो फिर हमें यह अधिकार कहां से मिल गया कि हम मनचाहे तरीके से उसके प्रवाह को बाधित करें। हमारी नासमझी से केन की ही एक सहायक मिढ़ासन नदी मृतप्राय हो चुकी है। इस नदी को पुनर्जीवित करने के लिए आपने एक दशक पूर्व अभियान छेड़ा था, जिसमें 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि भी खर्च हो चुकी है। लेकिन इस नदी की क्या हालत है, कृपया एक बार आकर जरूर देखें।  मिढ़ासन नदी आज भी सुखी और मृत पड़ी है, सिर्फ बारिश में यह नदी बहती नजर आती है। केन की ही सहायक नदी पतने के भी बुरे हाल हैं। इन हालातों में पन्ना टाइगर रिजर्व को जीवन देने वाली केन नदी को बांधना व यहां के खूबसूरत जंगल को उजाडऩा घातक होगा। हमें इस तरह की विनाशकारी परियोजनाओं के जरिए खुशहाली लाने की कथित सोच पर पुनर्विचार करना चाहिए और इस वसुंधरा को हरा-भरा एवं पानीदार बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिये।

00000

Sunday, March 28, 2021

प्रकृति भी बाघों का बसेरा उजाडऩे के खिलाफ

  •  बीते तीन माह में ही पीटीआर में जन्मे 13 बाघ शावक 
  •  प्रकृति से मिल रहे संकेतों का सरकार को करना चाहिए सम्मान

बाघों के घर पन्ना टाइगर रिज़र्व के बीच से प्रवाहित होने वाली केन नदी।

।। अरुण सिंह ।।

पन्ना। विंध्य पर्वत श्रेणी में स्थित मध्य प्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व इन दिनों विवादित केन बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चर्चा में हैं। परियोजना के अंतर्गत इस रिजर्व के कोर क्षेत्र में 73.40 मीटर ऊंचा और 14 68 मीटर लंबा बांध बनाया जाना है। इस बांध के पानी को 231.45 किलोमीटर लंबी नहर के जरिए बेतवा नदी तक पहुंचाया जायेगा। शासन की इस अति महत्वाकांक्षी परियोजना से लोगों को कितना लाभ होगा, यह तो भविष्य के गर्त में है लेकिन इससे पन्ना टाइगर रिजर्व का वजूद जरूर खत्म हो जायेगा। 

उल्लेखनीय है कि पन्ना टाइगर रिजर्व की भौगोलिक संरचना अनूठी है। यहां के घने खूबसूरत जंगलों में राष्ट्रीय पशु बाघ सहित जंगल का राजकुमार कहा जाने वाला तेंदुआ, भालू ,नीलगाय, चिंकारा, चीतल, चौसिंगा, सांभर व सेही जैसे सैकड़ों प्रजाति के जीव जंतुओं सहित 200 से भी अधिक प्रजाति के पक्षी रहते हैं। यहां विलुप्त प्राय गिद्धों की सात प्रजातियां भी निवास करती हैं तथा पन्ना टाइगर रिजर्व के मध्य से प्रवाहित होने वाली केन नदी जो यहां की जीवन रेखा है उसमें घडय़िाल और मगरमच्छ भी पाये जाते हैं। जैव विविधता से परिपूर्ण ऐसे समृद्ध वन क्षेत्र को डुबाकर उसे नष्ट किए जाने की योजना से प्रकृति भी नाखुश दिखाई देती है। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा जिस गति से बढ़ा है तथा इसके साथ ही शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या में इजाफा हुआ है, उससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि प्रकृति इस समृद्ध और खूबसूरत वन क्षेत्र को उजाडऩे के पक्ष में नहीं है। बीते 3 माह के दौरान ही यहां पर 13 बाघ शावकों का जन्म हुआ है। प्रकृति से मिल रहे इन संकेतों को हम कैसे अनदेखा कर रहे हैं ? क्या हम इतने संवेदनहीन और स्वार्थी हो चुके हैं कि प्रकृति की इच्छा का सम्मान करना ही भूल गये हैं। यूनेस्को ने जिस वन क्षेत्र को मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम के तहत बायोस्फीयर रिजर्व की वैश्विक सूची में शामिल किया है, उस अनमोल धरोहर को नष्ट करने की योजना भला कैसे हितकारी साबित होगी ?


पन्ना की यह बाघिन शायद यही कह रही है कि इन जीवनदायी पेड़ों को मत काटो। 

मालुम हो कि हमारे वन, पर्वत और नदियां इस धरती की अमूल्य निधियां और उपहार हैं, जो हमारे जीवन को प्रेम, उत्साह और शक्ति से भरते हैं। ये बिना किसी अपेक्षा के अनवरत रूप से हमें शुद्ध वायु, जल व स्वास्थ्यवर्धक आबोहवा नि:शुल्क प्रदान करते हैं। फिर भी हम अपने निहित स्वार्थों व तात्कालिक लाभ के लिए प्रकृति प्रदत्त इन अनमोल उपहारों का आदर करने के बजाय उनका विनाश करने पर तुले हुए हैं। आखिर यह कैसी बुद्धिमत्ता और समझदारी है ? जिन प्राकृतिक संरचनाओं को हम सृजित नहीं कर सकते उन्हें नष्ट करने का अधिकार हमें कैसे और कहां से मिल गया ? समझदारी तो इसी में है कि हम प्रकृति के इन उपहारों का आदर करें, इनकी सुरक्षा करें, इनके सानिध्य में रहें ताकि स्वस्थ, तनावमुक्त और खुशहाल जीवन जी सकें।

 पूर्व मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेत्री सुश्री महदेले ने उठाए सवाल 



पर्यावरणविदों ने केन - बेतवा लिंक परियोजना का शुरुआती दौर से ही विरोध किया है तथा इसे प्रकृति और पर्यावरण के लिए घातक बताया है। स्थानीय लोग भी लंबे समय से इस विवादित परियोजना का विरोध करते आ रहे हैं। लेकिन किसी वरिष्ठ भाजपा नेता ने पहली मर्तबे केन-बेतवा लिंक परियोजना पर खुलकर विरोध दर्ज किया है। यह हौसला पन्ना जिले की कद्दावर नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले ने दिखाया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए इसे पन्ना जिले के लिए घातक बताया है। सुश्री महदेले ने ट्वीट कर कहा है कि केन - बेतवा नदियों को जोडऩे से पन्ना टाइगर रिजर्व पूरी तरह से उजड़ जायेगा तथा बाघों का रहवास खत्म हो जायेगा। पन्ना में पर्यटन व्यवसाय की संभावनाएं भी क्षीण हो जायेंगी। सुश्री महदेले के इस हौसले और साहसिक पहल की आम जनमानस के बीच जहां सराहना हो रही है, वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस परियोजना को लेकर नये सिरे से विचार मंथन शुरू हो गया है।

00000