Thursday, July 4, 2019

टूरिस्ट सीजन में 35 हजार से अधिक पर्यटक पहुँचे पन्ना टाईगर रिजर्व

  •   बाघों का दीदार होने के कारण बढ़ी है पर्यटकों की संख्या
  •   पन्ना टाइगर रिज़र्व में हैं 40 से अधिक बाघ 


पन्ना टाइगर रिज़र्व में अपने इलाके का जायजा लेता बाघ 

अरुण सिंह,पन्ना। बाघों से आबाद हो चुके म.प्र. के पन्ना टाईगर रिजर्व में देशी व विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस साल टूरिस्ट सीजन में 35 हजार से भी अधिक पर्यटक पन्ना टाईगर रिजर्व में भ्रमण के लिये पहुँचे हैं। मानसून सीजन शुरू होने के साथ ही अब 1 जुलाई से पन्ना टाईगर रिजर्व के द्वार पर्यटकों के लिये बन्द हो गये हैं। पूरे तीन माह तक पर्यटक अब पार्क का भ्रमण कर बाघों का दीदार नहीं कर पायेंगे। लेकिन इस दौरान पाण्डव जल प्रपात व रनेह फाल के अप्रितिम सौन्दर्य को पर्यटक जरूर निहार सकेंगे। बारिश के मौसम में भी यहां पर्यटन चालू रहता है।
क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व के.एस. भदौरिया ने बताया कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2017-18 के पर्यटन सीजन में 24128 देशी व 6712 विदेशी पर्यटक पन्ना टाईगर रिजर्व के भ्रमण हेतु पहुँचे थे, जबकि इस वर्ष 2018-19 में 29131 देशी व 6752 विदेशी पर्यटकों ने पार्क भ्रमण कर बाघों व अन्य वन्य प्राणियों का दीदार किया। मौजूदा समय पन्ना टाईगर रिजर्व में 40 से भी अधिक बाघ हैं। जबकि पन्ना लैण्ड स्केप में कुल विचरण कर रहे बाघों की संख्या 65 के लगभग है। यह संख्या पन्ना टाईगर रिजर्व के इतिहास में सर्वाधिक है। श्री भदौरिया ने बताया कि पन्ना के जंगलों में स्वच्छन्द रूप से विचरण कर रहे बाघों की सतत मॉनीटरिंग  के लिये पार्क में कैमरा ट्रैप मॉनीटरिंग सिस्टम के तहत 200 कैमरे लगाये गये हैं। वॉच टॉवर तथा अस्थाई कैम्पों के माध्यम से भी बाघों की निगरानी की जा रही है।
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दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर 

Tuesday, July 2, 2019

खेतिहर मजदूर के बेटे ने संभाला जिला पंचायत सीईओ का पदभार

  •   31 वर्षीय आईएएस अधिकारी बालागुरू की प्रेरणाप्रद है संघर्ष की कहानी
  •   कठिन चुनौतियों और बाधाओं को भी सीढ़ी बना कर लेते हैं लक्ष्य हासिल
  •   पन्ना जिला वासियों को इस होनहार युवा अधिकारी से हैं ढेरों अपेक्षायें
  •   आरोपों से घिरे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में सुधार की उम्मीद



पन्ना के जिला पंचायत सीईओ बालागुरू पदभार गृहण करते हुये।

। अरुण सिंह 

पन्ना। लक्ष्य हासिल करने के लिये यदि किसी में जुनून, जज्बा और इच्छाशक्ति है तो बड़ी से बड़ी चुनौतियां व बाधायें भी उसकी सफलता के मार्ग को नहीं रोक सकतीं। जिला पंचायत पन्ना के नये सीईओ 31 वर्षीय बालागुरू इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। मूलरूप से तमिलनाडु अरावकुरिची के गाँव थेरापडी के निवासी इस युवा आईएएस अधिकारी की संघर्षपूर्ण जीवन गाथा बेहद दिलचस्प, रोमांचकारी और प्रेरणादायी है।
 
सोमवार 1 जुलाई को इनके पदभार गृहण करने के साथ ही जिला पंचायत कार्यालय पन्ना की कार्य प्रणाली में बदलाव नजर आने लगा है। गुणवत्ताविहीन कार्यों, जन कल्याण की योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही तथा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अब बदलाव दिखेगा, ऐसी पन्ना जिलावासियों को उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ में एसडीएम के पद पर कार्य कर चुके आईएएस अधिकारी बालागुरू का स्थानान्तरण राज्य सरकार द्वारा हाल ही में जिला पंचायत सीईओ पन्ना के पद पर किया गया था, फलस्वरूप उन्होंने यहां आकर अपना कार्यभार संभाल लिया है। कार्यभार संभालते ही उन्होंने जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी कार्यशैली व प्राथमिकताओं से अवगत कराते हुये उसी के अनुरूप पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिये हैं, जिसका असर पदभार गृहण करने के दूसरे ही दिन से दिखने लगा है। 
भीषण गरीबी और अनगिनत चुनौतियों के बीच पले-बढ़े बालागुरू में संवेदनायें कूट-कूट कर भरी हैं, जाहिर है कि गरीबों, वंचितों और समाज के अन्तिम छोर पर खड़े व्यक्ति को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिये वे हरसंभव प्रयास करेंगे। वर्ष 2014 में भारतीय समाज में सबसे प्रतिष्ठित कही जाने वाली यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर आईएएस अधिकारी बनने वाले बालागुरू का बाल्यकाल कैसे बीता तथा उन्होंने किन परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच शिक्षा हासिल कर यह उच्च मुकाम हासिल किया, आज की युवा पीढ़ी के लिये किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

बचपन से ही कलेक्टर बनने का था सपना 


पन्ना के नवागत जिला पंचायत सीईओ बालागुरू बताते हैं कि उन्होंने बचपन में ही यह मन बना लिया था कि उनको कलेक्टर बनना है। लेकिन इसके साथ ही उन्हें इस बात का भी पूरा अहसास था कि आर्थिक  तंगी और गरीबी के चलते इस सपने को पूरा करना सहज नहीं होगा। बालागुरू के पिता कुमारसामी खेतिहर मजदूर थे तथा माँ मवेशी पालकर किसी तरह घर चलाती थीं। इन परिस्थितियों में बालागुरू ने अपनी स्कूली शिक्षा सरकारी स्कूल में हासिल की। 12वीं से आगे की पढ़ाई को जारी रखना माता-पिता की माली हालत को देखते हुये मुश्किल था। इन हालातों में भी होनहार युवा बालागुरू ने अपना हौसला बनाये रखा और यह तय किया कि कुछ काम करते हुये वह अपनी आगे की पढ़ाई को जारी रखेगा ताकि परिजनों पर मेरी पढ़ाई बोझ न बने।

 अस्पताल में की सुरक्षागार्ड की नौकरी  

अपने सपने को साकार करने तथा आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिये बालागुरू ने बिलरोथ हास्पिटल में सुरक्षागार्ड की नौकरी महज 4 हजार रू. महीने के वेतन में की। रात्रि शिफ्ट में सुरक्षागार्ड की नौकरी करते हुये इन्होंने पत्राचार कोर्स से स्नातक की डिग्री हासिल की और इस दौरान न सिर्फ माँ व पिता को आर्थिक मदद भी करते रहे अपितु अपनी बहन जानकी का विवाह भी कराया। यूपीएससी की परीक्षा पास करने के उपरान्त बालागुरू ने इस बात का जिक्र मीडिया के साथ करते हुये बताया था कि अपने सपने को पूरा करने के लिये मैं आगे बढूँ, इसके पूर्व बहन की शादी कर उसे सेटल करना चाहता था। इस दायित्व का निर्वहन करने के बाद मैं निश्चिन्त होकर अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केन्द्रित कर सका।

नाई की दुकान व लाइब्रेरी में पढ़ते थे न्यूजपेपर

संघर्ष के दिनों को याद करते हुये बालागुरू बताते हैं कि आर्थिक  तंगी के चलते परीक्षा की तैयारी करने के लिये न्यूज पेपर पढऩे वे नाई की दुकान में जाते थे। फिर उन्होंने चेन्नई की पब्लिक लाइब्रेरी में भी जाना शुरू किया जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई युवकों से परिचय हुआ। इन युवाओं से प्रेरित होकर बालागुरू परीक्षा की तैयारी में जुटे रहे और वर्ष 2011 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा में सम्मिलित हुये, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। 
इस तरह लगातार तीन बार उन्हें असफलता मिली फिर भी उन्होंने अपने सपने को मरने नहीं दिया। चौथी बार बालागुरू कामयाब हुये और वह लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसे पाने का सपना उन्होंने बचपन से ही अपने जेहन में संजोकर रखा था। अपनी इस कामयाबी का श्रेय वे अपनी माँ को देते हैं और गर्व से बताते हैं कि मेरी माँ ने पशु पालकर स्कूली शिक्षा दिलाई और आगे बढऩे के लिये प्रोत्साहित किया। शासकीय सेवा में आने के बाद से बालागुरू अपने पिता व माँ को हमेशा अपने पास ही रखते हैं।

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Monday, July 1, 2019

बुन्देलखण्ड के पन्ना जिले में अनूठी है रथयात्रा की परम्परा


  •   जगन्नाथपुरी के बाद देश की सबसे पुरानी रथयात्राओं में शामिल
  •   इस धार्मिक समारोह में मिलती है  राजशी ठाट-बाट व वैभव की झलक


पन्ना में निकलने वाली रथयात्रा का नजारा। - (फाइल फोटो)


अरुण सिंह,पन्ना। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के पन्ना शहर में हर साल आयोजित होने वाली रथयात्रा की परम्परा अनूठी है । देश की तीन सबसे पुरानी व बड़ी रथयात्राओं में पन्ना की रथयात्रा भी शामिल है।  ओडि़शा के जगन्नाथपुरी की तर्ज पर यहां  आयोजित होने वाले इस भव्य धार्मिक समारोह  में राजशी ठाट-बाट और वैभव की झलक देखने को मिलती है । रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ स्वामी की एक झलक पाने समूचे बुन्देलखण्ड क्षेत्र से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां  पहुँचते हैं । पन्ना जिले के इस सबसे बड़े धार्मिक समारोह  के दरम्यान यहां  की अद्भुत और निराली छटा देखते ही  बनती है । पन्ना की यह  ऐतिहासिक रथयात्रा 166 वर्ष पूर्व तत्कालीन पन्ना नरेश महाराजा किशोर सिंह  द्वारा शुरू कराई गई थी, जो परम्परानुसार अनवरत् जारी है । इस वर्ष रथयात्रा 4 जुलाई को शाम 6:30 बजे पूरे विधि विधान के साथ जगन्नाथ स्वामी मन्दिर से निकलेगी।
उल्लेखनीय है  कि पन्ना जिले की प्राचीन व ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव को भव्यता व गरिमा प्रदान करने के लिये इस वर्ष विशेष तैयारियां की जा रही हैं । जिले के प्रशासनिक मुखिया कर्मवीर शर्मा सहित नगर के गणमान्य जन इसमें विशेष रूचि ले रहे  हैं । जानकारों का कहना है कि पन्ना नरेश महाराजा किशोर सिंह  ने जब यहां  रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत की थी, उस समय वे पुरी से भगवान जगन्नाथ स्वामी जी की मूर्ति लेकर आये थे और पन्ना में भव्य मन्दिर का निर्माण कराया था। पुरी में चूंकि समुद्र है  इसलिये पन्ना के जगन्नाथ स्वामी मन्दिर के सामने सुन्दर सरोवर का निर्माण कराया गया था। तभी से यहां  पुरी की ही  तर्ज पर रथयात्रा समारोह का आयोजन होता है  जिसमें लाखों लोग पूरे भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं । ऐसी किवदंती है  कि जिस वर्ष यहां  मन्दिर का निर्माण हुआ तो यहाँ  अटका चढ़ाया गया। महाराजा किशोर सिंह  को स्वप्न आया कि पन्ना में अटका न चढ़ाया जाये अन्यथा पुरी का महत्व कम हो  जायेगा। इसलिये यहां  भगवान जगन्नाथ स्वामी को अंकुरित मूँग का प्रसाद चढ़ाया जाता है । आज भी यहां  पर अंकुरित मूँग व मिश्री का प्रसाद चढ़ता है ।
शहर के पुराने बुजुर्ग बताते हैं  कि राजाशाही  जमाने में पन्ना की रथयात्रा बड़े ही  शान-शौकत व वैभव के साथ निकलती थी। इस रथयात्रा में सैकड़ों हांथी, घुड़सवार, सेना के जवान, राजे-महाराजे व जागीरदार सब शामिल होते थे। रूस्तम गज हांथी की कहानी भी यहां  काफी प्रचलित है । बताते हैं  कि तत्कालीन महाराज का यह प्रिय हांथी रथयात्रा में अपनी सूड़ से चाँदी का चँवर हिलाते हुये चलता था। हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल माह की द्वितीय तिथि को यहां  पुरी के जगन्नाथ मन्दिर की तरह हर साल रथयात्रा निकलती है । रथयात्रा के दौरान यहां  भी भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ मन्दिर से बाहर सैर के लिये निकलते हैं । यह अनूठी रथयात्रा पन्ना से शुरू होकर तीसरे दिन जनकपुर पहुँचती है । तत्कालीन पन्ना नरेशों द्वारा जनकपुर में भी भव्य मन्दिर का निर्माण कराया गया है । रथयात्रा के जनकपुर पहुँचने पर यहां  के मन्दिर को बड़े ही  आकर्षक ढ़ंग से सजाया जाता है  तथा यहां  पर मेला भी लगता है ।

धार्मिक पर्यटन को मिल सकता है  बढ़ावा

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि  पन्ना की इस प्राचीन और ऐतिहासिक रथयात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर जो पहचान मिलनी चाहिये थी, वह नहीं  मिल सकी। इस दिशा में यदि शासन स्तर पर ठोस व प्रभावी पहल की जाये तो पन्ना में ईको टूरिज्म के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है । रियासत काल में इस समारोह का महत्व इतना ज्यादा था कि तत्कालीन नरेशों ने जगन्नाथ स्वामी मन्दिर से लेकर अजयगढ़ चौराहा  तक डेढ़ किमी. रथयात्रा मार्ग के दोनों तरफ बरामदा का निर्माण कराया था, जहां  पर रथयात्रा में शामिल होने के लिये आने वाले श्रद्धालु ठहरते थे। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते वह प्राचीन व्यवस्था अतिक्रमण के चलते ध्वस्त हो  गई फलस्वरूप रथयात्रा वाला मार्ग संकीर्ण हो  गया। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह  ने पन्ना के ऐतिहासिक रथयात्रा को उसका पुराना वैभव वापस दिलाने की दिशा में रूचि ली थी और वे 2003 में पन्ना आकर समारोह में शामिल हुये थे। लेकिन इसके बाद फिर किसी मुख्यमंत्री ने पन्ना की प्राचीन रथयात्रा को वह महत्व नहीं  दिया, जिसकी पन्ना नगर के लोग अपेक्षा करते हैं । पन्ना नगरवासियों का यह मानना है कि समूचे बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लोगों की आस्था व धार्मिक महत्ता को देखते हुये पन्ना की     ऐतिहासिक व प्राचीन रथयात्रा समारोह को राज्य उत्सव का दर्जा मिलना चाहिये।
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Saturday, June 29, 2019

एटीएम बदल कर धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफास

  •   पन्ना पुलिस ने किया 5 लाख 90  हजार की धोखाधड़ी का खुलासा
  •   दो आरोपी गिरफ्तार उनके कब्जे से 1 लाख रू. 10 एटीएम कार्ड एवं स्विफ्ट डिजायर    कार बरामद


पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी प्रेसवार्ता में मामले की जानकारी देते हुये।


अरुण सिंह,पन्ना। पन्ना सहित प्रदेश के अन्य जिलों व दूसरे कई राज्यों में भी एटीएम बदलकर धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पन्ना पुलिस ने पर्दाफ ाश किया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1 लाख रू., 10 एटीएम कार्ड एवं अपराध में प्रयुक्त डिजायर कार बरामद की है। इन शातिर आरोपियों द्वारा पन्ना जिले के अलावा प्रदेश के अन्य कई जिलों सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान व दिल्ली के अलग-अलग स्थानों में वारदात को अंजाम दिया जा चुका है। इस गिरोह ने पन्ना जिले में एक एटीएम कार्ड से 5 लाख 90 हजार रू. निकाले हैं। पीडि़त की शिकायत प्राप्त होने पर पुलिस ने तहकीकात करते हुये दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। जिनकी पहचान अनुपम उर्फ सूरज तिवारी 24 वर्ष एवं राहुल यादव पिता घनश्याम यादव 24 वर्ष दोनों निवासी जिला भदोही उ.प्र. के रूप में हुई है। धोखाधड़ी करने में माहिर गिरफ्तार हुये दोनों आरोपियों ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर विगत छ: माह पूर्व पन्ना जिले की नगर पंचायत देवेन्द्रनगर में भृत्य के पद पर पदस्थ जगत ङ्क्षसह घोष का एटीएम बदलकर उनके खाते से 5 लाख 90 हजार रू. निकाल लिये थे।
पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी ने शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि जगत ङ्क्षसह पिता रामङ्क्षसह घोष उम्र 59 वर्ष निवासी ग्राम करहिया पोस्ट डड़वरिया हाल भृत्य नगर पंचायत देवेन्द्रनगर द्वारा देवेन्द्रनगर थाने में शिकायत की गई थी कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसका एटीएम कार्ड बदलकर 18 जनवरी 2019 से लगातार 6 फरवरी 2019 तक उसके स्टेट बैंक खाता क्र. 11400391349 से 5 लाख 90 हजार रू. अलग शहरों के एटीएम से निकाले हैं। शिकायत प्राप्त होने पर 22 फरवरी 2019 को थाना देवेन्द्रनगर में अप.क्र. 40/19 धारा 420 भादंवि 66 (ग),(घ) आईटी एक्ट का कायम किया गया। अपराध की गंभीरता को देखते हुये पुलिस अधीक्षक पन्ना  मयंक अवस्थी द्वारा एक टीम का गठन किया गया। उक्त टीम को निर्देशित किया गया कि लोगों की मेहनत की कमाई से अर्जित रकम को धोखाधड़ी के माध्यम से हड़पने वाले गिरोहो पर पैनी नजर रखें व बैंक-एटीएम के आस-पास सादे कपड़ो में कर्मचारियों को लगाकर इन्हें पकड़ा जाये। आरोपीगणो के सीसीटीव्ही फु टेज को प्रसारित कर एवं फरियादी के बैंक स्टेटमेन्ट के आधार पर पैसे आहरित करने के स्थानों की जानकारी प्रचार-प्रसार करने हेतु सायबर टीम व  टीम प्रभारी को निर्देशित किया गया।

एसपी के निर्देश पर सक्रिय हुई सायबर टीम


पुलिस टीम द्वारा गिरफ्तार गिरोह के दो सदस्य।

मामूली भृत्य के साथ हुई धोखाधड़ी के इस मामले के संबंध में दिशा-निर्देश मिलने पर जिले की सायबर टीम जहां सक्रिय हो गई वहीं टीम प्रभारी द्वारा अपने मुखबिर तंत्र को एक्टिव किया गया। शनिवार 29 जून 2019 को मुखबिर द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि बड़वारा तिराहा के पास कुछ व्यक्ति संदिग्ध अवस्था में सफेद रंग की गाड़ी क्र. यूपी-66व्ही-2526 में बैठे हुये हैं। मुखबिर की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल ही टीम प्रभारी द्वारा उक्त सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उक्त संदिग्ध व्यक्तियों को पकडऩे हेतु टीम को निर्देशित किया गया। तत्काल ही पुलिस द्वारा बड़वारा तिराहा पहुँचकर उक्त कार की घेराबन्दी की गई। पुलिस को देखकर गाड़ी में सवार दोनों व्यक्ति गाड़ी को छोड़कर भागने का प्रयास करने लगे जिन्हें पुलिस टीम द्वारा दबोच लिया गया। उक्त दोनों व्यक्तियों की शक्ल एटीएम से प्राप्त सीसीटीव्ही फु टेज से मेल खा रही थी।  पकड़े गये व्यक्तियों से नाम पता पूछने पर उन्होने अपना नाम अनुपम उर्फ  सूरज तिवारी पिता स्व. राजेश तिवारी उम्र 24 साल निवासी ज्ञानपुर टाउन मोहल्ला थाना ज्ञानपुर जिला भदोही (उ.प्र.) तथा राहुल यादव पिता घनश्याम यादव उम्र 24 साल निवासी मूसी मोहल्ला थाना सिटी कोतवाली भदोही जिला भदोही (उ.प्र.) का होना बताया। दोनों संदिग्धों से कड़ाई से पूछताछ करने पर उनके द्वारा बताया गया कि वो दोनों एवं अन्य साथियों की मदद से एटीएम बूथों में व्यक्तियों का एटीएम कार्ड बदलकर उनके खातों से पैसे निकालने की वारदातों को अंजाम देते रहे हैं।

साथियों के साथ मिलकर पन्ना में की थी वारदात


पुलिस टीम के सक्रिय प्रयासों व सायबर टीम के सहयोग से गिरफ्तार हुये दोनों युवकों ने पूछताछ करने पर बताया कि 18 जनवरी 2019 को हम दोनों अन्य 03 साथी रत्नाकर ङ्क्षसह उर्फ  भोलू निवासी गडौरा जिला भदोही (उ.प्र.), नीलेश उर्फ  रज्जू तिवारी निवासी ज्ञानपुर मुहल्ला जिला भदोही उ.प्र., अंशुमान ङ्क्षसह निवासी शाहदाबाद खपटहा हडिया जिला प्रयागराज ( उ.प्र.) के साथ मिलकर रीवा, सतना होते हुये देवेन्द्रनगर के एटीएम बूथ से जगत ङ्क्षसह नाम के खाताधारक के एटीएम  कार्ड को बदलकर ले गये थे। जिसके खाते से हम लोगों द्वारा कुल 5 लाख 90 हजार रू. देवेन्द्रनगर, पन्ना, छतरपुर, सागर, रेलवे स्टेशन हबीबगंज भोपाल, उज्जैन, फ तेहपुर, इलाहाबाद, संतनगर दिल्ली, भदोही, वाराणसी आदि अलग-अलग स्थानों के एटीएम बूथों से निकाले थे। उक्त पैसा हम लोगों द्वारा आपस में 1-1 लाख रू. बाँट लिया गया था शेष बचा पैसा हम लोगों द्वारा रास्ता में आने-जाने रुकने एवं खाने में खर्च किया था।

आरोपियों से नगदी, एटीएम कार्ड, मोबाइल व कार बरामद


पुलिस अधीक्षक श्री अवस्थी ने जानकारी देते हुये बताया कि अनुपम उर्फ  सूरज तिवारी के कब्जे से कुल 60 हजार रू. नगद, 1 सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार जिसका रजिस्ट्रेशन नम्बर यूपी-66व्ही-2526, अन्य व्यक्तियों के विभिन्न बैंकों के 4 नग एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम 4, मोबाइल 3 नग एवं राहुल यादव के कब्जे से कुल 40 हजार रू. नगद, विभिन्न बैंको के 4 एटीएम कार्ड, 1 मोबाइल फ ोन जब्त किये गये हैं। आरोपियों द्वारा बताया गया कि हम लोग अपने सफ र के दौरान बीच-बीच में भीड़भाड़ वाले एटीएम बूथों में घुसकर किसी को रकम निकालने में मदद करने के नाम पर या धक्का देकर एटीएम गिरा देने और सामने वाले का ध्यान विचलित कर एटीएम बदल लेते थे। उक्त व्यक्तियों का पासवर्ड एटीएम बूथ में देख लेते थे बाद में दूसरी जगहों से नगदी रकम निकाल लेते थे। आरोपियों द्वारा पन्ना जिले के अलावा म.प्र. के मैहर, सतना, रीवा, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, भोपाल, उज्जैन, इंदौर एवं अन्य प्रान्तों उ.प्र., राजस्थान, दिल्ली के विभिन्न जिलों में अलग-अलग स्थानों से इस तरीके की वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है। पुलिस अधीक्षक श्री अवस्थी ने बताया कि उक्त आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाकर पुलिस रिमाण्ड में लेकर अन्य अपराधों के संबंध में पूछताछ की जायेगी। उन्होंने बताया कि पूछताछ करने पर अन्य राज्यों में इनके द्वारा की गई वारदातों के खुलासा होने की संभावना है। पन्ना पुलिस की इस बड़ी कामयाबी पर छतरपुर रेंज के डीआईजी अनिल महेश्वरी ने पुलिस टीम को 20 हजार रू. के पुरूस्कार से पुरूस्कृत करने की घोषणा की है।
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Wednesday, June 26, 2019

अफसरों और नेताओं ने नहीं सुनी तो पहुँचे संकट मोचन के दरबार

  •   पहुँच मार्ग के निर्माण हेतु ग्रामीणों ने हनुमान जी को सौंपा ज्ञापन
  •   गुनौर जनपद का ग्राम हनुमतपुरा बारिश में हो जाता है पहुँच विहीन
  •   समस्या से निजात दिलाने ग्रामीणों ने हनुमान जी से की प्रार्थना




अरुण सिंह,पन्ना। दशकों से बुनियादी और मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे ग्रामवासियों को अब प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं पर भरोसा नहीं है। इनके द्वारा इन भोले-भाले ग्रामीणों का भरोसा इतनी मर्तबे तोड़ा गया है कि अब वे अधिकारियों और नेताओं द्वारा दिये जाने वाले आश्वासनों पर भरोसा करना छोड़ दिया है। ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा और व्यथा वादा खिलाफी करने वाले नेताओं व अधिकारियों को सुनाने के बजाय एक नायाब तरीका ढूँढ़ा है। उन्होंने संकट मोचन हनुमानजी के दरबार में पहुँचकर समस्याओं से निजात दिलाने के लिये न सिर्फ प्रार्थना की अपितु उनको बकायदे एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें ग्राम की समस्याओं का जिक्र किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के गुनौर जनपद की ग्राम पंचायत बिल्हा का मजरा हनुमतपुरा व ग्राम पंचायत सरहंजा का मजरा उड़की आज भी पहुँचमार्ग से वंचित हैं। बारिश के मौसम में इन दोनों ही ग्रामों के लोगों का जीवन कष्टप्रद और नारकीय हो जाता है। इसकी वजह यह है कि बारिश होने पर तीन-चार किमी का मार्ग कीचड़ से लथपथ हो जाता है, फलस्वरूप किसी भी तरह के वाहनों से आवागमन संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में कीचड़ भरे रास्ते से पैदल निकलना ही एक मात्र विकल्प बचता है। यही वजह है कि बारिश के मौसम में दोनों ही गाँव एक तरह से पहुँच विहीन हो जाते हैं। विगत कई दशकों से यह मुसीबत झेल रहे ग्रामीणों ने न जाने कितनी बार अपनी समस्यायें आला अफसरों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सुनाईं और समस्याओं के निराकरण हेतु उनसे अनुरोध किया। लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला जो आज तक पूरा नहीं हो सका है। थक हारकर ग्रामीणों ने अब यह तय किया है कि अफसरों और नेताओं के पास जाकर गिड़गिड़ाने के बजाय क्यों न उसके सामने हाँथ जोड़कर प्रार्थना की जाये जो सबके संकट का हरण करने वाले हैं। इसी अभिनव सोच के तहत ग्रामीणों ने संकट मोचन हनुमान जी के दरबार में जाकर हाजरी देकर उनसे समस्याओं का निराकरण कराने की प्रार्थना की है और ज्ञापन सौंपा। अब देखना यह है कि पीडि़तों, वंचितों और भक्तों को हर तरह के संकट से उबारने वाले संकट मोचन बजरंग बली हनुमतपुरा गाँव के लोगों की प्रार्थना सुनकर उन्हें उनकी समस्या से कब तक निजात दिलाते हैं। हनुमतपुरा गाँव के ईश्वर प्रसाद पटेल का कहना है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अफसरों और नेताओं ने हमारी व्यथा भले ही नहीं सुनी लेकिन हनुमान जी जरूर हमारी समस्या दूर करने के लिये कोई न कोई जतन करेंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में ईश्वर प्रसाद पटेल, जय कुमार, प्रितपाल पटेल, महेन्द्र पटेल, जय प्रकाश, शुभम, राजकिशोर, रामभगत, अनुज पटेल, रमाकान्त, मुकेश, धीरू, व नरेश पटेल मुख्य रूप से शामिल रहे।

कीचड़ वाले मार्ग से स्कूल जाते हैं बच्चे


पहुँचमार्ग न बन पाने के कारण सबसे ज्यादा मुसीबत स्कूली बच्चों व बीमार व्यक्तियों की होती है। हनुमतपुरा गाँव के बच्चों को पढऩे के लिये ग्राम पंचायत बिल्हा स्थित माध्यमिक शाला में जाना पड़ता है। जाहिर है कि बारिश के मौसम में जब गाँव का रास्ता कीचड़ से सन जाता है तो बच्चों को भी इसी रास्ते से होकर पैदल स्कूल तक की तकरीबन 3 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। हनुमतपुरा गाँव से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गुनौर की दूरी लगभग 10 किमी है। ऐसी स्थिति में गाँव का कोई व्यक्ति यदि बारिश के मौसम में बीमार पड़ता है तो उसे समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती, जिससे कई मर्तबे बीमार व्यक्ति की असमय मौत तक हो जाती है।
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Monday, June 24, 2019

बुन्देलखण्ड की जीवनरेखा अस्तित्व बचाने कर रही संघर्ष

  •   रेत कारोबारियों ने सदानीरा केन नदी को कर दिया है खोखला
  •   अप्रैल में ही रुक जाता है जल प्रवाह, कई जगह मैदान में हुई तब्दील
  •   केन की अधिकांश सहायक नदियां बन चुकी हैं बरसाती नाला




पन्ना जिले में पण्डवन के पास सूखी पड़ी केन नदी का दृश्य।

। अरुण सिंह 


पन्ना। बुन्देलखण्ड क्षेत्र की जीवनरेखा कही जाने वाली केन नदी को बीते एक दशक में ही रेत कारोबारियों ने इस कदर खोखला कर दिया है कि गर्मी शुरू होते ही मार्च और अप्रैल के महीने में इस सदानीरा नदी की जलधार टूट जाती है। लगभग 427 किमी लम्बी इस नदी के कई हिस्से गर्मी के मौसम में मैदान बन जाते हैं जहां धूल के बबन्डर उठते नजर आते हैं।
 
अविरल बहने वाली स्वच्छ नदियों में शुमार केन की ऐसी दुर्दशा की कल्पना एक-डेढ़ दशक पूर्व शायद ही किसी ने की हो। चिन्ता की बात यह है कि हम अभी भी नहीं चेत रहे, केन नदी से भारी भरकम मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर रेत निकालकर उसका सीना छलनी करने में जुटे हुये हैं। जिससे यह बारहमासी नदी अब बरसाती बन रही है। रही सही कसर नदी के प्रवाह क्षेत्र में बन रहे बड़े बांध पूरी किये दे रहे हैं। इसका दुष्परिणाम केन नदी के तटवर्ती ग्रामों के रहवासियों को भोगना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि केन नदी के तटवर्ती 95 फीसदी ग्रामों के कुयें जल स्तर नीचे खिसकने के कारण जहां सूख चुके हैं, वहीं गर्मी के मौसम में हैण्डपम्पों से भी पानी निकलना बन्द हो जाता है। रेत के अधाधुन्ध उत्खनन से केन नदी का नैसॢगक प्रवाह बाधित होने तथा पानी की मात्रा कम होने से तटवर्ती ग्रामों के मछवारों, मल्लाहों, नदी किनारे खेती करने वाले किसानों की जीवनचर्या पर बुरा असर हुआ है। इतना ही नहीं जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध रही केन नदी में पाई जाने वाली वनस्पतियां जहां नष्ट हो रही हैं वहीं जीव-जन्तुओं और मछलियों की विभिन्न प्रजातियों के भी नष्ट होने का खतरा मंडराने लगा है। अपने अस्तित्व को बचाने के लिये बीते एक दशक से संघर्ष कर रही इस जीवनदायिनी नदी की पुकार सुनने को कोई तैयार नहीं है। 

लालची और संवेदनहीन रेत कारोबारी तथा निहित स्वार्थों की पूर्ति में रत रहने वाले राजनेताओं व अधिकारियों की सांठगांठ से केन सहित उसकी सहायक नदियों का सुनियोजित तरीके से जिस तरह से गला घोंटा जा रहा है, यह आने वाले समय में भयावह साबित हो सकता है। यह कितनी हास्यास्पद बात है कि एक ओर प्रदेश सरकार द्वारा नदियों को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर 15 जून से रेत के उत्खनन पर प्रतिबन्ध के बावजूद केन नदी से बेरोकटोक रेत निकाली जा रही है। पूरी रात रेत से उफनाते तक भरे डम्फर गरजते हुये सड़कों से निकलते हैं, लेकिन जिम्मेदारों को यह दिखाई नहीं देता। रेत से भरे डम्फर जब सड़कों से गुजरते हैं तो उनसे पानी टपकता रहता है जो इस बात का सबूत है कि लोड हुई रेत नदी के प्रवाह क्षेत्र की है।

 केन नदी में होने वाले रेत के अवैध उत्खनन का नजारा। ( फाइल फोटो )


सरकार ने माना 40 नदियों की टूटी जलधार

प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल ने बदहाली की ओर अग्रसर हो चुकी नदियों को चिह्नित कर उनको पुनर्जीवन देने के कार्य में रूचि दिखाई है। श्री पटेल का मानना है कि बीते 15 साल में बातें तो खूब हुईं लेकिन किसी ने नदियों की चिन्ता नहीं की। अवैध उत्खनन की खुली टूट देकर नदियों का तंत्र ही समाप्त कर दिया गया। बेतहासा पेड़ काटने की वजह से जड़ों से रिसकर जो पानी नदियों में आता था, वह व्यवस्था खत्म हो गई। 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पहले चरण में प्रदेश की 40 नदियों को पुनर्जीवित करने का रोड मैप बनाया है। विभाग ने इस काम में समाज की सहभागिता को फोकस में रखने की रणनीति बनाई है। यह शुभ संकेत है कि देर से सही किन्तु सरकार ने नदियों को बचाने तथा उनके पुनर्जीवन पर रूचि दिखाई है, लेकिन सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिये कि नदियों के नैसॢगक प्रवाह को बाधित करने वाली गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगे। अन्यथा नदियों को पुनर्जीवित करने की योजना का कोई मतलब नहीं रह जायेगा। भीषण जल संकट, सूखा और बाढ़ की विभीषिका से बचने व आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रखने के लिये हमें प्रकृति, पर्यावरण और नदियों का सम्मान करना सीखना होगा।

मिढ़ासन नदी के पुनर्जीवन में खर्च हुये 20 करोड़, हालात जस के तस


 पुनर्जीवन के नाम पर 20 करोड़ खर्च होने के बाद मिढ़ासन की हालत।

पन्ना जिले से प्रवाहित होने वाली केन नदी की सहायक नदियों में शुमार मिढ़ासन नदी को पुनर्जीवित करने के नाम पर 20 करोड़ रू. खर्च किये जा चुके हैं, फिर भी इस नदी की हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ गई है। पहले तो इस नदी में गर्मी के समय कहीं-कहीं गड्ढों में पानी दिख भी जाता था, लेकिन अब तो यह पूरी तरह सूखे मैदान में तब्दील हो जाती है। मालुम हो कि मिढ़ासन नदी को सदानीरा बनाने का संकल्प तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिया था और 10 वर्ष पूर्व बड़े ही धूमधाम के साथ इस अभिनव योजना का शुभारंभ किया था लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने योजना की हवा निकाल दी और पुनर्जीवन के नाम पर खर्च की गई राशि कहां और कैसे खर्च हुई, इस बात का आज तक खुलासा नहीं हो सका। 

मिढ़ासन नदी जस की तस रूखी-सूखी पड़ी है, सिर्फ बारिश होने पर ही यह नदी बहती नजर आती है। इस लिहाज से सदानीरा बनने के बजाय यह नदी बरसाती बनकर रह गई है। केन की ही सहायक पतने नदी अभी सूखे मैदान में तो तब्दील नहीं हुई, लेकिन नदी में हर तरफ गन्दगी और कचरे के ढेर नजर आते हैं। पवई के सुप्रसिद्ध कलेही माता मन्दिर के निकट से प्रवाहित होने वाली इस नदी को स्थानीय युवकों द्वारा अभियान चलाकर साफ सुथरा बनाने की प्रयास किया गया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

किलकिला नदी। 

            गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है किलकिला                 


प्रणामी धर्मावलंबियों की गंगा कही जाने वाली किलकिला नदी समुचित देखरेख के अभाव और सतत उपेक्षा के चलते गन्दे नाले में तब्दील हो चुकी है। हालात ये हैं कि इस नदी का पानी आचमन तो दूर छूने लायक तक नहीं बचा। नदी के आस-पास भीषण दुर्गन्ध उठती है तथा इसमें जहां-तहां सुअर लोटते हुये नजर आते हैं। गौरतलब है कि पन्ना शहर के नालियों का गन्दा पानी इसी किलकिला नदी में जाकर मिलता है। दुर्गन्धयुक्त नालियों का गन्दा पानी इस नदी में मिलने से नदी का पानी विषाक्त और जहरीला हो गया है। जलकुम्भी ने नदी के प्रवाह क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जिसके चलते पवित्र कही जाने वाली यह नदी गन्दगी और कचरे के ढेर में तब्दील हो चुकी है। किलकिला नदी के दोनों किनारों पर सब्जी की खेती होती है। सब्जी उगाने वाले कृषक खेतों में लगी सब्जी फसलों की ङ्क्षसचाई इसी नदी के जहरीले पानी से करते हैं, जिससे यहां उगने वाली सब्जी भी दूषित और जन स्वास्थ्य के लिये खतरनाक हो जाती है।

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दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर 

Friday, June 21, 2019

तेंदुये के हमले से वन्य प्राणी चिकित्सक सहित चार घायल

  •   चिकित्सक की हंथेली में तेंदुये ने गड़ाये दाँत, हुये गहरे जख्म
  •   25 फिट गहरे सूखे कुंये में छिपकर बैठा था तेंदुआ
  •   इसके पहले दो वन कर्मियों सहित तीन को कर चुका था घायल



अरुण सिंह,पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में बड़े पैमाने पर हो रही अनियंत्रित अवैध कटाई के चलते वन्य प्राणियों का रहवास उजड़ रहा है। उनकी प्राकृतिक जिन्दगी में खलल पडऩे से वन्य प्राणी जंगल से निकलकर अब आबादी क्षेत्रों में भी घुसने लगे हैं। जिससे वन्य प्राणियों व मनुष्यों के बीच संघर्ष की स्थिति निर्मित हो रही है। गत 21 जून गुरुवार को अमानगंज वन परिक्षेत्र के अन्तर्गत पन्ना टाइगर रिजर्व के बफ र जोन से लगे ग्राम पगरा में जो घटनाक्रम घटित हुआ वह चिन्ता में डालने वाला है। टाइगर रिजर्व के जंगल से भटक कर इस गाँव में पहुँचे एक तेंदुआ ने वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता सहित दो वन सुरक्षा श्रमिकों व एक ग्रामीण को बुरी तरह से घायल कर दिया है। तेंदुये के हमले की इस घटना के बाद से पगरा सहित आसपास के ग्रामों में भय और दहशत का माहौल है।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को सुबह तेंदुये ने सबसे पहले ग्राम पगरा निवासी रतन पटेल पर हमला बोला और उसे घायल कर पास की झोपड़ी में घुस गया। घटना की खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई जिससे तेंदुआ झोपड़ी से निकलकर गाँव के पास स्थित नाले में पेड़ों के नीचे जा बैठा। इस बीच ग्रामीणों द्वारा वन अधिकारियों को घटना से अवगत कराया गया, फलस्वरूप पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम दोपहर में ग्राम पगरा के लिये रवाना हुई। रेस्क्यू टीम के वहां पहुँचने पर हमलावर तेंदुये को ट्रेंकुलाइज कर पकडऩे का ऑपरेशन शुरू किया गया। लेकिन इसी दौरान गुस्साये तेंदुये ने दो वन सुरक्षा श्रमिकों पर हमला बोल कर उन्हें भी घायल कर दिया। इस हमले के बाद वहां पर अफ रा-तफ री मच गई। तेंदुये के हमले से अब तक 3 लोग घायल हो चुके थे और तेंदुआ आसपास कहीं नजर भी नहीं आ रहा था। जिससे लोग भयभीत और सशंकित थे कि पता नहीं कहां से अचानक निकलकर वह हमला कर दे। ऐसी स्थिति में एहतियाती कदम उठाते हुये गाँव के बच्चों को घरों के भीतर रहने की हिदायत दी गई।

सूखे कुयें में छिपकर बैठा था तेंदुआ

पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम द्वारा गाँव के आस-पास इस हमलावर तेंदुये की खोजबीन की जा रही थी उसी समय तकरीबन 5:30 बजे 20-25 फि ट गहरे एक सूखे कुयें में तेंदुआ बैठा नजर आया। पन्ना टाइगर रिजर्व के बेहद अनुभवी वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता व टीम के अन्य सदस्य कुयें के निकट खड़े होकर तेंदुये को ट्रेंकुलाइज करके बेहोश करने की योजना बना ही रहे थे कि अचानक बिजली की तरह तेंदुआ गहरे कुयें से निकल कर बाहर आया और वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. गुप्ता के ऊपर हमला कर दिया। तेंदुये ने उनकी उनकी गर्दन पकडऩी चाही लेकिन उन्होंने दाहिने हाथ से तेंदुये को धक्का दिया, फलस्वरूप उसने उनके हाथ की हथेली को मुँह में भरकर दाँत गड़ा दिये। टीम के अन्य लोगों के दौडऩे व बचाने पर तेंदुआ वहां से भाग खड़ा हुआ। हथेली में 4 दाँत गडऩे से गहरे जख्म हो गये थे जिससे तेजी से खून निकलने लगा था। आनन-फ ानन डॉ. गुप्ता को जिला चिकित्सालय पन्ना लाया गया जहां उनका इलाज चल रहा है। तेंदुये के हमले में घायल हुये दोनों वन कर्मियों व ग्रामीण का भी जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। बताया गया है यह हमलावर तेंदुआ जंगल की तरफ  भागा है लेकिन अभी भी पगरा सहित जंगल से लगे ग्रामों में भय और दहशत का माहौल है।
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दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट 

Wednesday, June 19, 2019

पन्ना में सड़क मार्ग के किनारे बाघ ने किया बैल का शिकार

  •   सुबह से दोपहर डेढ़ बजे तक वहीं झाड़ी के नीचे किया विश्राम
  •   सड़क मार्ग से गुजरने वाले सैकड़ों लोगों ने वनराज के किये दर्शन
  •   हाँथियों की मदद से दोपहर बाद वन अमले ने जंगल की ओर खदेड़ा


पन्ना टाईगर रिजर्व का नर बाघ पी-111


 अरुण सिंह,पन्ना। बाघों से आबाद हो चुके म.प्र. के पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघ दर्शन अब इतना सहज और आसान हो गया है कि लोगों को सड़क मार्ग से गुजरते हुये भी वनराज के दीदार हो जाते हैं। पन्ना-अमानगंज मार्ग पर रमपुरा बैरियर के निकट मुख्य सड़क मार्ग से बमुश्किल 25 मीटर की दूरी पर बाघ पी-111 कई घण्टे तक लेन्टाना की झाडिय़ों के नीचे आराम फरमाता रहा। झाडिय़ों की घनी छाँव में पूरी बेफिक्री के साथ लेटे इस वनराज को सड़क मार्ग से गुजरते हुये देखा जा सकता था। पन्ना टाईगर रिजर्व के इस बाघ ने बीती रात यहीं पर बैल का शिकार किया और उसे भरपेट खाने के बाद बचे हुये किल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये सड़क किनारे ही झाडिय़ों के नीचे छाँव में डेरा डाले रहा। मॉनीटरिंग दल द्वारा बाघ को वहां से हटाने का प्रयास जब विफल हो गया तो दोपहर लगभग डेढ़ बजे उसे दो हाँथियों की मदद से जंगल के भीतर अन्दर खदेड़ा गया। तब  तक सड़क मार्ग के किनारे मॉनीटरिंग  दल सहित वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता, सहायक संचालक आर.के. सक्सेना तथा रेंजर लालजी तिवारी पूरे समय मौजूद रहे।

 बाघ की निगरानी के लिये सड़क पर मौजूद वन अमला व अधिकारी ।

उल्लेखनीय है कि नर बाघ पी-111 बांधवगढ़ की बाघिन टी-1 की संतान है। बाघ पुनर्स्थापना  योजना के तहत इस बाघिन को 4 मार्च 2009 को पन्ना टाईगर रिजर्व में लाया गया था। पन्ना की पटरानी के रूप में प्रसिद्ध हुई इस बाघिन ने बाघ विहीन हो चुके पन्ना टाईगर रिजर्व को फिर से आबाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बाघिन टी. की मेटिंग  बाघ टी-3 के साथ होने के बाद 16 अप्रैल 2010 को रात्रि के समय धुंधवा सेहा में इस बाघिन ने पहली बार 4 शावकों को जन्म दिया था। उन्हीं शावकों में पहला बाघन पी-111 है जो मौजूदा समय 9 वर्ष का होकर पन्ना टाईगर रिजर्व का प्रमुख व सबसे विशालकाय नर बाघ है। लगभग 230 किग्रा वजन वाले इस शानदार बाघ को निकट से देखना बेहद रोमांचकारी अनुभव है, जिसे प्राप्त करने का अवसर बुद्धवार 19 जून  मुझे  मिला। मालुम कि  अपने जन्म के डेढ़ वर्ष बाद ही यह बाघ  अपनी माँ से पृथक होकर तालगाँव पठार पर अपना अलग साम्राज्य कायम किया तथा अपने पिता टी-3 के पूर्व इलाके पर कब्जा जमाया। बाघ पुनर्स्थापना योजना के तहत पन्ना टाईगर रिजर्व में जन्मे इस पहले बाघ का जन्म दिवस यहां पर हर साल 16 अप्रैल को बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है। केक काटकर बाघ का जन्म दिवस मनाने की यह अनूठी परम्परा पन्ना टाईगर रिजर्व के तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति ने शुरू की थी जो अनवरत् जारी है।

ओवर ईटिंग  के कारण कर रहा था विश्राम


 हाँथी धूल फेंककर बाघ को झाड़ी के नीचे से हटाते हुये।
यह पहला अवसर है जब बाघ पी-111 मुख्य सड़क मार्ग के इतने निकट झाड़ी के नीचे लेटा रहा। इस रेडियो कॉलर बाघ की निगरानी करने वाले दल ने बाघ को अन्दर जंगल की तरफ करने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हुये निगरानी दल ने इसकी जानकारी पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों को दी। कई घण्टे तक बाघ जब वहां से नहीं उठा तो वन अमले को बाघ की सेहत को लेकर आशंका हुई तथा उनके जेहन में तरह-तरह के सवाल भी उठने लगे कि आखिर इतना शोर-शराबा होने के बावजूद बाघ अपनी जगह से उठ क्यों नहीं रहा? यह आशंका भी हुई कि कहीं किल में तो कोई गड़बड़ नहीं है, जिसे बाघ ने खाया है। इन सारी आशंकाओं का समाधान करने के लिये वन अधिकारियों ने हाँथियों की मदद से बाघ के निकट जाकर स्थिति का जायजा लेने का निर्णय लिया और दो प्रशिक्षित हाँथी मौके पर बुलाये गये।

हाँथी ने सूंड़ से धूल फेंका तो उठ खड़ा हुआ बाघ


दोपहर लगभग 1 बजे दोनों हाँथी झाडिय़ों के नीचे लेटे बाघ के निकट पहुँचे, फिर भी यह बाघ पूरी बेफिक्री से ऐसे लेटा रहा मानो उसके आस-पास कोई है ही नहीं। जब बाघ नहीं उठा तो महावत के संकेत पर हाँथी ने सूंड़ से धूल उठाकर बाघ के ऊपर उछाल दिया, हाँथी की इस गुस्ताखी से नाराज होकर जोरदार दहाड़ के साथ बाघ तेजी से उठ  खड़ा हुआ। मौके की नजाकत को समझते हुये प्रशिक्षित हाँथी तत्काल पीछे हटकर बाघ से दूर हो गया। कुछ ही मिनट के इस रोमांचक घनाक्रम के बाद सारी आशंकाओं का समाधान हो चुका था, वन अधिकारी भी आश्वस्त हो गये थे कि बाघ बिलकुल सामान्य स्थिति में है कोई समस्या नहीं है। मौके पर मौजूद वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि ओवर ईटिंग  के कारण भोजन को पचाने के लिये बाघ इतने लम्बे समय तक यहां लेटा रहा। इसके अलावा पास में ही पड़े बचे हुये किल की सुरक्षा के लिये भी बाघ वहां से हट नहीं रहा था, जो सामान्य और स्वाभाविक बात है।

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रैपुरा वन परिक्षेत्र के जंगल में भी हुई अवैध कटाई


  •   दमोह जिले के शातिर वन अपराधियों ने कटवाये हरे-भरे पेड़
  •  पुलिस की मदद से वन अमले ने दमोह जिले में जब्त की लकड़ी



अरुण सिंह,पन्ना। पन्ना बफर वन परिक्षेत्र के हरसा बीट के टपकनिया जंगल में बड़े पैमाने पर सागौन वृक्षों की हुई कटाई का मामला अभी शान्त भी नहीं हुआ कि दक्षिण वनमण्डल पन्ना के परिक्षेत्र रैपुरा में जंगल कटने का मामला प्रकाश में आ गया है। बताया जाता है कि पड़ोसी जिला दमोह के हथियार बन्द वन अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से ट्रेक्टर-ट्राली लेकर रैपुरा वन परिक्षेत्र के जंगल में हरे-भरे वृक्षों को बेरहमी के साथ कटवाया, जब तक वन अमले को मामले की भनक मिली और वे मौके पर पहुँचे तब तक वन अपराधी लकड़ी लेकर अंधेरे का फायदा उठाते हुये पन्ना जिले की सीमा को पार कर अपने ठिकाने में पहुँच गये।
वन मण्डलाधिकारी दक्षिण वन मण्डल पन्ना कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार गत् 16 जून को बघवार के स्थानीय वन अमले द्वारा रात्रि 10.30 बजे सूचना प्राप्त हुई कि सगौनी बीट में कुछ व्यक्ति जंगल में घुसकर लकड़ी काट रहे हैं और वे लगातार फायरिंग कर रहे हैं। परिक्षेत्र अधिकारी रैपुरा ने प्रकरण की गम्भीरता को देखते हुये तत्काल थाना रैपुरा स्टाफ व वन अमले के साथ मौके पर पहुँचे व सॄचग की गई। जहां पर बीजा की लकड़ी के ठूँठ व ट्रेक्टर के पहिये के निशान पाये गये जिनका पीछा किया गया। परन्तु दुर्गम रास्ता एवं अंधेरा अधिक होने के कारण अपराधी नहीं मिले। पुन: सुबह जाकर जाँच कार्यवाही की गई व सूक्ष्म जाँच व मुखबिर से जानकारी प्राप्त हुई कि उक्त काटी गई लकड़ी दमोह जिला के महुआडांड़ गई है। सम्पूर्ण प्रकरण की जानकारी से श्रीमती मीना कुमारी मिश्रा, वन मण्डलाधिकारी दक्षिण पन्ना को अवगत कराया व आगे की कार्यवाही हेतु मार्गदर्शन प्राप्त किया। वन परिक्षेत्राधिकारी मोहन्द्रा से सम्पर्क कर उनके स्टाफ के साथ दुर्गम मार्ग व वर्षा होने के बावजूद विषम स्थिति, में छिपाई गई लकड़ी व ट्रेक्टर के समीप पहुँचे जहां पर ट्रेक्टर ट्राली में बीजा की लकड़ी के गोंद के निशान मिले। अवैध कटाई में लिप्त अपराधी प्रकाश पटेल व भारत आदिवासी से पूछताछ की जा रही थी। तभी कुछ दूर स्थित प्रकाश पटेल की झोपड़ी में आरोपियों द्वारा आग लगा दी गई, जिससे जब्ती की कार्यवाही न हो सके। जिसकी सूचना दूरभाष के माध्यम से वन मण्डलाधिकारी दक्षिण पन्ना एवं थाना प्रभारी थाना पटेरा को दी गई व थाना जाकर लिखित रिर्पोट थाना पटेरा में दर्ज कराई गई। वन अधिकारी व अमला पुलिस बल के साथ पुन: जब्ती स्थल पर गये जहां से आरोपियों द्वारा ट्रेक्टर वहां से भगा कर ले जाया गया था व लकड़ी को भी छिपाने की कोशिश में थे। पुलिस बल व वन अमला अधिक मात्रा में पहुँच जाने से भयवश जब्त शुदा लकड़ी को छिपा नहीं सके व जब्ती की कार्यवाही की गई। ऐसी सूचना प्राप्त हुई कि जब्त शुदा लकड़ी लेने व स्टाफ से झगड़ा करने के उद्देश्य से ग्रामवासी रोड पर संगठित हो रहे हैं। वन परिक्षेत्राधिकारी द्वारा सूझबूझ से काम लेते हुये स्टाफ व जब्त शुदा सामग्री को बेलखेड़ी, हिनोती एवं कुम्हारी के रास्ते से रैपुरा सकुशल आ सके। उक्त प्रकरण में लिप्त आरोपियों में से कुछ को पहचाना जा चुका है जिन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जावेगा। उक्त घटना की कार्यवाही कर वन अपराध प्रकरण क्र. 939/05 दिनांक 17 जून को कायम किया गया। कार्यवाही में पुलिस थाना पटेरा, वनमण्डल दमोह, परिक्षेत्राधिकारी मोहन्द्रा व स्टाफ शामिल रहे। परिक्षेत्राधिकारी देवेश गौतम के साथ गोकुल सिंह, उप वनक्षेत्रपाल धीरेन्द्र प्रताप सिंह , वनरक्षक रजनीश चौरसिया, वनरक्षक राकेश खरे, वनरक्षक कु. प्रियंका शर्मा, वनरक्षक प्रेमशंकर सिंह ठाकुर, वनरक्षक सूर्यप्रताप सिंह, वनरक्षक व अन्य परिक्षेत्र स्टाफ व कार्यरत सुरक्षा श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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Monday, June 17, 2019

पन्ना जिले के लिये अभिशाप है केन-बेतवा लिंक परियोजना


  •   जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिव्यारानी सिंह  ने परियोजना का किया विरोध
  •   मामले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री को दुष्परिणामों से कराया जायेगा अवगत
  •   बाघों से आबाद पन्ना टाइगर रिज़र्व डुबाने नहीं दिया जायेगा 


पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिव्या रानी सिंह 

अरुण सिंह,पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना पन्ना जिले के लिये अभिशाप साबित होगी, इसलिये पिछले दो दशकों से विवादों में घिरी इस लिंक परियोजना का न सिर्फ पुरजोर विरोध किया जायेगा अपितु इसके दुष्परिणामों से प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ जी से मुलाकात कर उन्हें हकीकत से अवगत कराया जायेगा। यह बात जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमति दिव्यारानी सिंह  ने आज प्रदेश सरकार के 6 माह पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि परियोजना के डूब क्षेत्र में पन्ना टाईगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा आ रहा है, जिससे बाघों का रहवास न सिर्फ नष्ट हो जायेगा बल्कि पन्ना टाईगर रिजर्व दो हिस्सों में विभाजित हो जायेगा। जिससे वन्य प्राणियों विशेषकर बाघों की मॉनीटरिंग सही ढंग से सम्भव नहीं हो पायेगी।
जिला कांगे्रस अध्यक्ष ने पत्रकारों को बताया कि पन्ना जिले में वैसे भी पानी की कमी है, भू-जल की स्थिति चिन्ताजनक है। यहां 6सौ फिट गहराई पर भी अपेक्षित पानी नहीं मिलता। यदि केन नदी को एक जगह रोककर उसके नैसर्गिक प्रवाह को बाधित कर दिया गया तो ग्राउण्ड वाटर खत्म हो जायेगा, नतीजतन केन नदी के किनारे बसे ग्रामों में भी लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति बनने पर दर्जनों ग्रामों के लोगों को पलायन करने के लिये मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि केन नदी ऊपर और बेतवा नीचे है, इसलिये केन का पानी तो बेतवा में चला जायेगा, लेकिन यहां सूखा पडऩे व पानी की जरूरत होने पर बेतवा का पानी केन में नहीं आ सकता। इसलिये यह परियोजना इस अंचल के लिये न्याय संगत नहीं कही जा सकती। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 10 वर्ष पूर्व पन्ना टाईगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया था। जिसे बाघ पुनर्स्थापना योजना के तहत एक बार फिर से आबाद किया गया है। अब केन-बेतवा लिंक परियोजना के द्वारा बाघों के इस बसेरा को डुबोने की तैयारी की जा रही है, जिसे पन्ना जिले के लोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।
मालुम हो कि केन-बेतवा लिंक परियोजना में शामिल केन नदी की कुल लम्बाई 427 किमी है। ढोढऩ में जहां बांध बन रहा है, वहां से केन नदी की डाउन स्ट्रीम की लम्बाई 270 किमी है। बांध में कांक्रीट डेम का हिस्सा 798 मीटर और मिट्टी के बांध की लम्बाई 1233 मी. है। बांध की ऊँचाई 77 मी. है। ढोढऩ बांध से बेतवा नदी में पानी ले जाने वाली ङ्क्षलक कैनाल की लम्बाई 220.624 किमी होगी। बांध का डूब क्षेत्र पन्ना टाईगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में शामिल है। मौजूदा समय पन्ना टाईगर रिजर्व में 40 से भी अधिक बाघ हैं, इसके अलावा इस वन क्षेत्र में बड़ी तादाद में दुर्लभ प्रजाति के अनेकों जीव-जन्तु भी हैं। योजना में इस वन क्षेत्र के डूब में आ जाने से बाघों सहित अन्य जीव-जन्तुओं को अपना रहवास छोड़ पलायन करना पड़ेगा। यही वजह है कि पर्यावरण एवं वन्य जीव प्रेमी तथा कई समाजसेवी संस्थायें इस विवादित लिंक परियोजना को पर्यावरण के विरूद्ध बताते हुये इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सहित जिले के कांग्रेसजनों ने भी लिंक  परियोजना को विरोध में मुहिम छेडऩे की बात कही है। इस मौके पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिव्यारानी सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रवीन्द्र शुक्ला, पुष्पेन्द्र सिंह परमार, केशव प्रताप सिंह, मनीष शर्मा, दीपचन्द्र अग्रवाल सहित अनेकों कांग्रेस नेता व पदाधिकारी मौजूद रहे।
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