Wednesday, July 17, 2024

वन विभाग की भूमि से अभियान चलाकर हटाया गया अतिक्रमण

 


पन्ना। वन विभाग द्वारा वन परिक्षेत्र में अतिक्रमण की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जा रहा है। वन विभाग की भूमि पर ग्रामीणों द्वारा वर्षों से अतिक्रमण कर खेती की जा रही थी, जिसे जेसीबी की मदद से सख्ती से हटाया गया। साथ ही वन संरक्षण के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया गया। वहीं वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाकर विभिन्न स्थानों पर पौधरोपण भी किया गया।

मुख्य वन संरक्षक संजीव झा एवं वन मण्डलाधिकारी पुनीत सोनकर के निर्देशन में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान अंतर्गत मोहन्द्रा एवं पवई क्षेत्र की वन भूमि में ग्रामीणों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाकर समझाइश दी गई। वहीं कुछ स्थानों पर ग्रामीणों द्वारा बाड़ लगाकर वन भूमि पर कब्जा किया गया था, जिसे जेसीबी की मदद से हटाया गया। विभिन्न क्षेत्रों में हटाए गए अतिक्रमण के स्थान पर कंटूर ट्रेंच बनाए गए एवं कंटीले बबूल के बीज की बुवाई की गई। 

इस अभियान के दौरान मोहन्द्रा एवं पवई वन परिक्षेत्र का स्टाफ भी मौजूद रहा। ज्ञात हो कि मानसून सीजन में ग्रामीणों द्वारा शासकीय वन भूमियों पर अतिक्रमण कर फसलों की बुवाई की जाती है जिसे टीम द्वारा दल बल के साथ जेसीबी से फसलों को नष्ट कर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। साथ ही ग्रामीणों को समझाइश दी गई कि वे शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न करें। वहीं वन विभाग एवं ग्रामीणों द्वारा पौधारोपण भी किया गया।

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Thursday, July 11, 2024

विलुप्त होने से बचीं, ये हमारी सुगन्धित धान की किस्में


।। बाबूलाल दाहिया ।।

आजादी के पहले एक अनुमान के अनुसार कहते हैं हमारे देश में परम्परागत धान की 1 लाख 10 हजार किस्में हुआ करती थीं। 22 हजार 8 सौ किस्में तो रायपुर यूनिवर्सिटी के एक मसहूर कृषि बैज्ञानिक डॉ. राधेलाल रिछारिया जी ने ही अविभाजित मध्यप्रदेश में खोज निकाला था। परन्तु दुःखद बात यह है कि अब समूचे भारत की एक लाख 10 हजार किस्मों  में एक लाख तो पूरी तरह समाप्त ही हैं यदि बची भी होंगी तो 10 हजार के अन्दर ही।

इसी तरह मध्यप्रदेश में अब 22 हजार 8 सौ में से यदि 800 मिल जांय तो बहुत हैं। 200 के आस पास हमारे पास हैं इसी तरह कुछ अन्य पर्यावरण प्रेमी धान संरक्षक और कुछ किसानों के पाश बची होंगी। परन्तु बिगत 50 वर्षो में परम्परागत धानों का इतनी मात्रा में विलुप्त हो जाना भर दुखद नही है ? बल्कि दुखद तो यह भी है कि उनके द्वारा हजारों वर्षों से यहां की परिस्थितिकी में रच बस और ढल कर जो भी गुणधर्म अपने गुणसूत्रों में उनने विकसित किए थे वह भी उनके साथ पूरे के पूरे तिरोहित हो गए।

इन तमाम धानों में बहुत सारी  तो सुगन्धित किस्में भी थीं। कुछ तो इतनी सुगन्धित हुआ करती थीं कि अगर मुहल्ले में एक घर में उनका चावल बनता तो आस पास के घरों में भी अपनी सुवास बिखेर देता। दक्षिण भारत में इस तरह की कितनी सुगन्धित धानें थी ? भाषा की दुरूहता के कारण जान पाना कठिन है। पर (उत्तर मध्य भारत) में उनके नाम इस तरह थे जिनमें कुछ अभी भी संरक्षित हैं। उनके वह स्थान भी दिए जा रहे हैं जहां वह उगाई जाती थीं।

1- जीरा शंकर-- सिवनी- बालाघाट (मप्र)

2- चिंनोर      ---    "          "

3- लोंहदी      --     "         "

4-  दिलबक्सा--  छत्तीशगढ़

5- विष्णुभोग    --    "

6- बादशाह भोग--   "

7- जीरा फूल          "

8- बादशाह परसन   "

9- बाँसमती             "

10- बाँसमुखी         "

11- तुलसी वास     "

12- लोकटी          "

13- भैंस पाट      "

14- शमलिया भोग  "

15- भांटा फूल     --      सीधी ( मप्र)

16-  गोबिंद भोग --    बंगाल

17-    काली मूँछ--    डबरा ( ग्वालियर  ) मप्र।

18- काला नमक---   बिहार

19- तिलसान   -- परसमनिया पठार (सतना) मप्र।

20- कमल श्री  --     "                       "

21- धनाश्री     --      "                      "

22- जिलदार    --  रीवा तराई क्षेत्र

23- तिन दनिया -- श्याम गिरि कल्दा ( पन्ना) मप्र

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Saturday, July 6, 2024

आकांक्षी विकासखण्ड योजना में अजयगढ़ शामिल, 39 संकेतकों में होगा सुधार

  • आकांक्षी विकासखण्ड के 6 मानकों में 15 अगस्त तक संपूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश 
  • मातृ मृत्यु दर तथा शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करने चलेगा विशेष अभियान  



पन्ना। भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा देश भर में पाँच सौ विकासखण्डों को आकांक्षी विकासखण्ड योजना में शामिल किया गया है। इसमें पन्ना जिले का अजयगढ़ विकासखण्ड भी शामिल है। विभिन्न मानकों के आधार पर अन्य ब्लॉक की तुलना में पिछड़े इन आकांक्षी विकासखण्डों में निर्धारित सूचकांकों में अपेक्षित प्रगति के लिए 7 जनवरी 2023 को आकांक्षी विकासखण्ड कार्यक्रम शुरू किया गया है। इन विकासखण्ड में आगामी 30 सितम्बर तक संपूर्णता अभियान चलाकर निर्धारित 6 सूचकांकों में नियत लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति की जाना है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं नोडल अधिकारी संघ प्रिय ने यह बात शनिवार को अजयगढ़ में संपूर्णता अभियान के शुभारंभ अवसर पर कही।

जिपं सीईओ ने कहा कि निर्धारित विभागों के 39 संकेतकों में सुधार के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी, जिसके तहत आगामी 15 अगस्त तक कम चुनौतीपूर्ण ६ संकेतकों में शत प्रतिशत सेचुरेशन के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। स्वतंत्रता दिवस पर ग्राम पंचायतों में आयोजित ग्रामसभा के दौरान शत प्रतिशत लक्ष्य की उपलब्धि का संकल्प पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आकांक्षी विकासखण्डों की गतिविधियों की नीति आयोग द्वारा नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है।

उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों से गंभीरतापूर्वक आवश्यक कार्यवाही के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान करते हुए कहा कि आकांक्षी विकासखण्ड में शिशुओं तथा गर्भवती महिलाओं की देखभाल, पूरक पोषण आहार के वितरण तथा संपूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य शत-प्रतिशत प्राप्त करें। शिविर में महिलाओं एवं शिशुओं के स्वास्थ्य जाँच की उचित व्यवस्था करें। अभियान के दौरान संपूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करें। बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को सही समय पर टीके लगाना सुनिश्चित करें। इसका विवरण ऑनलाइन अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं। 

महिला स्वसहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए उन्हें चिन्हित गतिविधियों में ऋण और अनुदान देने के साथ बैकवर्ड तथा फारवर्ड लिंकेज का लाभ दें। सभी स्वसहायता समूहों को रिवाल्विंग फण्ड जारी कराएं। जिला प्रबंधक आजीविका मिशन, महिला स्वसहायता समूहों की प्रगति की मॉनीटरिंग कर हर सप्ताह रिपोर्ट प्रस्तुत करें। लगातार प्रयास करने पर ही स्वसहायता समूहों का सशक्तिकरण होगा।

इसी तरह जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीयन कराकर पूरक पोषण आहार का वितरण कराएं। शिशुओं के टीकाकरण तथा पोषण आहार वितरण की भी समुचित व्यवस्था करें। इसमें लापरवाही बरतने वाले के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करें। महिलाओं और बच्चों की उचित देखभाल होने तथा समय पर योजनाओं का लाभ मिलने पर ही मातृ मृत्यु दर तथा शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी। उप संचालक कृषि खेती में सुधार के लिए किसानों को उन्नत बीज वितरित कराएं। आकांक्षी विकासखण्ड के सभी किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण कराकर उन्हें स्वाइल हेल्थ कार्ड प्रदान करें। प्रत्येक किसान को अभियान चलाकर स्वाइल हेल्थ कार्ड प्रदान करें।

इस मौके पर नगर परिषद अजयगढ़ की अध्यक्ष सीता गुप्ता ने कहा कि संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारीगण संपूर्णता अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार कर शिविर आयोजन और जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित करें। समय-सीमा में लक्ष्यपूर्ति पर जोर दें। जनपद पंचायत सीईओ सतीश नागवंशी द्वारा स्वागत उद्बोधन दिया गया। कार्यक्रम का संचालन खण्ड पंचायत अधिकारी शिवनारायण गर्ग द्वारा किया गया। इस अवसर पर नीति आयोग के आर्थिक अन्वेषक कपिल सैनी सहित एसडीएम संजय नागवंशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी उदल सिंह ठाकुर, अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी व नागरिकगण उपस्थित रहे।

नाटक मंचन कर दिया संदेश

शुभारंभ कार्यक्रम के अवसर पर स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा आकर्षक नाटक की प्रस्तुति भी दी गई। इस दौरान कुपोषण दूर करने का संदेश दिया गया। साथ ही शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। नाटक मंचन करने वाले विद्यार्थियों और चित्रकला प्रतियोगिता में अव्वल विद्यार्थियों को पुरस्कार का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल भी लगाए गए। अतिथियों द्वारा स्टॉल और प्रदर्शनी का अवलोकन कर आवश्यक जानकारी ली गई। इसके अलावा शपथ वॉल पर हस्ताक्षर कर संकल्प व्यक्त किया गया। अतिथियों द्वारा उपस्थितजनों को अभियान के सभी इंडिकेटर्स को संतृप्त करने में योगदान देने और प्रेरणादायक ब्लॉक व जिला बनाने की दिशा में कार्य करने की प्रतिज्ञा भी दिलाई गई।  

रैली निकाल कर किया जागरूक

संपूर्णता अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम के समापन उपरांत जनपद पंचायत कार्यालय परिसर से माधवगंज तिराहा तक जागरूकता रैली निकाली गई। जिला पंचायत सीईओ एवं जनप्रतिनिधियों सहित संबंधित विभाग के मैदानी कर्मचारी रैली में शामिल हुए। इस दौरान आमजनों से अभियान अवधि में अधिकाधिक संख्या में निर्धारित विभागों की सेवाएं प्राप्त करने की अपील की गई। रैली वापस जनपद पंचायत कार्यालय परिसर पहुंचकर समाप्त हुई।

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Thursday, July 4, 2024

पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित मनीष को मिला पुनर्जीवन

  • मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में कुपोषण की समस्या आज भी गंभीर बनी हुई है। भीषण गरीबी से जूझ रहे आदिवासी परिवारों के मासूम कुपोषण के सर्वाधिक शिकार हैं। कुपोषण को ख़त्म करने के लिए सरकारी प्रयासों के बावजूद अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी । दूरदराज के आदिवासी बहुल इलाकों में मासूम बच्चों के साथ-साथ महिलाएं भी कुपोषण की समस्या से जूझ रही हैं।  

दो माह पूर्व अप्रैल में जब बालक को पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में भर्ती कराया गया था तब की है यह तस्वीर। 

।। अरुण सिंह ।। 

पन्ना। जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर स्थित मनौर गांव का गुडियाना टोला कुपोषण और सिलिकोसिस पीड़ितों के लिए जाना जाता है। इस गांव में कई लोगों की मौत सिलिकोसिस से हुई है। तकरीबन ढाई सौ घरों वाली इस आदिवासी बस्ती में 30 से अधिक विधवा महिलाएं हैं। भीषण गरीबी, कुपोषण व बेरोजगारी इस गांव की सबसे बड़ी समस्या है। मनौर गांव  वर्षीय आदिवासी बालक मनीष भी गंभीर रूप से कुपोषित था, जिसे पिछले दिनों पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में भर्ती कराया गया। 

पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में पदस्थ रश्मि त्रिपाठी ने बताया कि जब इस बच्चे को भर्ती करने के लिए पन्ना लाया गया, उस समय वह गंभीर रूप से कुपोषित था। इसका वजन महज 4 किग्रा के आसपास था, लेकिन पोषण पुनर्वास केंद्र में समुचित देखरेख और इलाज होने पर 22 दिनों में ही इस बालक की हालत में सकारात्मक सुधार  हुआ और वजन 4 किग्रा से बढ़कर 6.5 किग्रा हो गया। इस बालक की मां ने बताया कि उन्हें बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि हमारा यह बच्चा बीमारी (कुपोषण) से उबर पायेगा। हम लोग पूरी तरह से उम्मीद खो चुके थे, लेकिन पन्ना में इलाज होने और पौष्टिक खाना मिलने से मनीष अब अच्छा हो गया है।  

अब हालत बेहतर 

कुपोषण की यह समस्या सिर्फ मनौर गांव में हो ऐसा नहीं है, यहाँ आसपास जितने भी आदिवासी गांव हैं वहां कुपोषित बच्चे बड़ी तादाद में हैं। रश्मि त्रिपाठी ने बताया कि मनौर के अलावा पन्ना से लगे बड़ौर, मनकी, जरधोवा व सुनहरा आदि ग्रामों से भी कुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र में आते हैं। देवेंद्रनगर क्षेत्र के आदिवासी बहुल ग्रामों में भी कुपोषण की समस्या गंभीर है। आपने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में भर्ती कराए गए गंभीर कुपोषित बच्चे मनीष आदिवासी को पुनर्जीवन मिला है। अब मनीष पूरी तरह से स्वस्थ है और उसका वजन बढ़ने लगा है। मनीष की मां जयंती पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में हुए इलाज के उपरांत बालक मनीष के पूरी तरह स्वस्थ होने पर बेहद खुश है। जो बालक कुछ दिनों पूर्व तक अत्यधिक कमजोरी के कारण लाचार और बेबस पड़ा रहता था, अब वह खेलने लगा है तथा उसका वजन भी बढ़ रहा है। 

रश्मि त्रिपाठी बताती हैं कि मनौर गांव के बालक मनीष आदिवासी को अप्रैल माह में पन्ना पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया था, उस समय उसका वजन मात्र 4 किलो था। सरकार के मापदंड और पोषण पुनर्वास केंद्र की व्यवस्थाओं के अनुसार उसे डॉक्टरी इलाज और पोषित भोजन दिया गया। जिससे बालक का वजन बढ़ने लगा, अब वह पूरी तरह तंदुरुस्त है। मनीष आदिवासी का वजन बढ़ाकर 4 किलो से साढ़े 6.5 किलो हो गया है। आपने ने बताया कि जब पहली बार पोषण पुनर्वास केंद्र में मनीष को लाया गया, तब कुपोषित मनीष आदिवासी के शरीर में मात्र एक ग्राम हीमोग्लोबिन बचा था। रश्मि त्रिपाठी ने बताया कि डेढ़ वर्षीय मनीष आदिवासी को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पोषण पुनर्वास केंद्र लेकर आई थी, साथ में उसकी मां जयंती आदिवासी थी। बालक का पिता आलू गोड़ मजदूरी करने दिल्ली गया हुआ था, जब उसे खबर मिली कि उनका बच्चा मनीष स्वस्थ होकर खेलने लगा है तो पिता अपने को रोक नहीं पाया और वह दिल्ली से बच्चे को देखने मनौर पहुँच गया।  

सिविल सर्जन डॉक्टर आलोक गुप्ता ने बताया कि मनीष की तरह अक्सर कुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र में आते हैं, जिन्हें हम पोषित भोजन और इलाज देते हैं। यहाँ आने वाले अधिकांश कुपोषित बच्चे तंदुरुस्त होते हैं, मनीष आदिवासी एक उदाहरण है जिसकी बीमारी दूर हुई है और वजन तेजी से बढा है। डॉ.  गुप्ता ने अपील की है कि बरसात के सीजन में बीमारियों के फैलने का खतरा रहता है, लिहाजा मातायें अपने बच्चों को साफ सुथरा रखें और गंदगी से बचायें।   यदि कोई भी दिक्कत होती है तो अस्पताल लाकर डॉक्टरी इलाज अवश्य करायें।

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Monday, July 1, 2024

जीव - जन्तु और उनका अपना मौसम विज्ञान

 

आज के इस तकनीकी और वैज्ञानिक युग में मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में वैज्ञानिकों से भले ही चूक हो जाय, लेकिन पशु-पक्षियों में अन्तर्निहित नैसर्गिक क्षमता उन्हें इस बात का अहसास करा देती है कि आने वाला मौसम कैसा रहेगा। पक्षियों के संकेतों खासकर बया पक्षी के घोसले को देखकर अतीत में लोग अनुमान लगा लेते थे कि इस साल बारिश कैसी होगी।                  

।। बाबूलाल दाहिया ।।

मनुष्य ने हर क्षेत्रों में तरक्की की है। उसके दो अदद फुर्सत के हाथ और एक अदद विलक्षण बुद्धि ने जल, थल, अंतरिक्ष किसी को भी अपनी दखलन्दाजी से महफूज नहीं छोड़ा। उसका विज्ञान 24 य 48 घण्टे पहले ही बता देता है कि " समुद्र में तेज हवाएं आएंगी इसलिए नाविक गहरे समुद्र में मछली मारने मत जाए ?" कब वर्षा होगी या बर्फ पड़ेगी ? यह सब सटीक मौसम सम्बंधित ज्ञान प्रसारित कर वह लोगों को सचेत करता रहता है। आज ही उसकी एक भविष्यवाणी है कि 2 जून तक उत्तर भारत के अनेक प्रदेशों में भारी बारिश होगी।

परन्तु एक विज्ञान पशु पक्षियों में भी है जो उनके गुण सूत्रों में ही पीढ़ियों से मौजूद है। और समय - समय पर उनकी छठी इंद्री उन्हें निर्देश देती रहती है कि "तुम्हे यह करना है और यह नही करना ?"  हमें याद है कि 60 के दशक तक हमारे गाँव में जब खूब घना जंगल था तब अगर पहाड़ के खेतों की तरफ जुताई होती तो हल में चल रहे हमारे बैल सूर्यास्त होने के 2-3 घण्टा पहले से ही कान खड़ा कर बार -बार रुक जाते। जैसे हल चलाने वालों को इशारा देकर समझा रहे हों कि  " भाई अब तू अपना हल ढील और शीघ्र ही यहां से हमें ले चल। क्योकि बाघ तेंदुए के बिचरण का समय होने वाला है ?" और फिर जैसे ही हल ढिलता तो वे वहां से तुरन्त रवाना हो जाते। रास्ते में कितनी भी अच्छी घास लगी हो वह मुँह तक न मारते। इसके विपरीत जब वह गांव के मैदानी भाग वाले खेतों में होते तो हल से ढिल जाने के पश्चात भी रात्रि में घन्टों घास चरते रहते।

बया नामक पक्षी को देखिए अगर वह पेड़ की टहनी के बिल्कुल किनारे अपना घोंसला बनाए तो उसका संकेत है कि " इस साल वर्षा कम होगी।"  किन्तु वही बया पक्षी अगर टहनी के मध्य घने पत्तों के नीचे घोंसला बनाता है तो वह अधिक वर्षा का परिचायक होता है। नदियों के किनारे बसने वाले केवट लोग जिनकी आजीविका ही नदियों से जुड़ी रहती है हमेशा यह गुरज्ञान वे बया पक्षी से ही लेते हैं कि " इस वर्ष उन्हें नदी से कितनी ऊँचाई पर अपनी झोपड़ी बनाकर रहना चाहिए ?"  उनका घोंसला जितनी ऊँचाई तक होता है उसका अर्थ यह होगा कि " इस वर्ष नदी में इससे ऊपर बाढ़ नही आएगी।"


इसी तरह एक पक्षी टिटिहरी है जो उड़ तो सकता है पर उसके पैरों की बनावट पेड़ों में बैठने लायक नही होती, अस्तु वह जब भी बैठेगा तो जमीन में ही और जमीन में ही अपने अंडे भी देता है। किन्तु साँप या कौआ आदि कोई उसके अंडे को खा न पाए ? इसलिए वह  सूखे नाले के ठीक मध्य में पाल बना अपने अंडे रखता है। उसका अपना रंग तो मटमैला होता ही है किन्तु उसके अंडों का रंग  भी नाले के बालू या मिट्टी की तरह ही मटमैले रंग का  होता है। इससे कोई जन्तु वनस्पति रहित उस सूने नाले के मध्य नहीं जाते और अंडे से सुरक्षित बच्चे आराम से निकल आते हैं। परन्तु वह अंडे तभी देगा जब उसके मष्तिष्क का कम्प्यूटर बता रहा होता है कि  " अंडे से बच्चे निकल कर उड़ने तक अभी नाले में बहने लायक तेज बारिश नहीं होगी ?"

इस तरह सभी जीव जन्तु प्रकृति के नियमों में बंधे हैं। अगर कोई उसके नियमों को धता बता मनमानी रास्ते से चल रहा है तो वह  मनुष्य ही है। अस्तु मनुष्य को इन तमाम जीव जन्तुओं से शिक्षा लेनी चाहिए कि कम से कम ऐसा काम न करे जो समस्त जीव जगत को ही खतरे में डाल दे।

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Sunday, June 30, 2024

पन्ना में गाँजा तस्करों के कब्जे से 1 क्विंटल 7 किलो 500 ग्रा. गाँजा जप्त

  •  जप्त गाँजे की अनुमानित कीमत 21 लाख 50 हजार रू, तीन आरोपी गिरफ्तार 
  • आरोपियों द्वारा उक्त गाँजा उङीसा से सस्ते दामों में बिक्रय हेतु पन्ना लाया गया


पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पुलिस द्वारा गाँजा तस्करों के कब्जे से 21 लाख 50 हजार रू. का 1 क्विंटल 7 किलो 500 ग्रा. गाँजा जप्त किया गया है। मामले में तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि दो आरोपी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों के द्वारा बताया गया कि उक्त गाँजा उङीसा से 2 अन्य व्यक्तियों के साथ सस्ते दामों में बिक्रय हेतु पन्ना लाया गया है।

पुलिस अधीक्षक पन्ना साईं कृष्णा एस.थोटा ने आज पत्रकारों को बताया कि पुलिस द्वारा जिले में गाँजा तस्करों पर लगातार कार्यवाही की जा रही है। बीते 8 माह में पन्ना पुलिस द्वारा गाँजा तस्करों के विरुद्ध कुल 31 प्रकरण दर्ज कर 66 व्यक्तियों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से 7 क्विंटल 45 कि.ग्रा. गाँजा कीमती करीब 1 करोङ 50 लाख रूपए का जप्त किया गया है। 

आपने बताया कि पन्ना जिले में मादक पदार्थ की खेती, भण्डारण, परिवहन एवं बिक्री करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही किये जाने हेतु एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी तारतम्य में थाना प्रभारी शाहनगर को गत 28 जून को मुखविर से सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम कुपना में बहेलियों के एक घर में भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ (गांजा) बेचने के उद्देश्य से छिपा कर रखा  हुआ है। 

यह सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक पन्ना के निर्देशन में अनुभाग स्तर पर पुलिस टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम बिना देरी किए मुखबिर के बताये स्थान पर पहुची जहाँ पुलिस टीम को देखकर दो व्यक्ति एवं एक बालिका भागने का प्रयास करने लगे जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया। आरोपियों के घर की तलाशी लेने पर आरोपियों के घर से 3 प्लास्टिक की बोरियों मे कुल अवैध मादक पदार्थ (गाँजा) 107 किलो 500 ग्राम कुल कीमती करीबन 21 लाख 50 हजार रूपये का होना पाया गया जिसे जप्त करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 

आरोपियों के विरूध्द थाना शाहनगर में अपराध क्रमांक 208/24 धारा 8/20 एन.डी.पी.एस. का कायम किया जाकर विवेचना में लिया गया। मामले में जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है उनमें निरजेश बहेलिया 20 साल, किरकन बहेलिया 24 साल तथा एक विधिविरूद्ध बालिका सभी निवासी कुपनाघाट थाना शाहनगर जिला पन्ना हैं। मामले में फरार आरोपियों रखरू बहेलिया 25 साल तथा नजर बाई 23 साल निवासी कुपनाघाट थाना शाहनगर की पुलिस द्वारा सरगर्मी से तलाश की जा रही है। 

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Friday, June 28, 2024

पेड़ तभी होंगे जब चिड़ियां रहेंगी और चिड़िया भी तभी रहेंगी जब पेड़ रहेंगे

   


 

।। बाबूलाल दाहिया ।।

युवावस्था में मैंने एक आस्ट्रेलियन विद्वान ए. एल. बासम  की लिखी हुई पुस्तक ( अद्भुत भारत ) पढ़ी थी, जो अभी तक स्मरण में है। उनने भारत में लगभग 10 वर्ष रहकर यहां के वेद, उपनिषदों आदि के अध्ययन के पश्चात उस पुस्तक को लिखा था। अंग्रेजी में लिखी उस पुस्तक का हिन्दी अनुवाद भी है। ए.एल. बासम उस पुस्तक में एक स्थान पर एक छात्र का उल्लेख करते हैं, जो किसी ऋषि के पास (जीव जगत ) की शिक्षा लेने आया था।

ऋषि ने कहा " तुम एक पीपल का फल लाओ ?" उसने कहा " जी लाया गुरुवर ?" और वह पीपल का फल लाकर उनके सामने रख देता है। ऋषि ने कहा" इसे तोड़ो?" उसने कहा " जी तोड़ा गुरुवर ! इसमें बहुत से छोटे-छोटे दाने दिख रहे हैं?" ऋषि ने कहा " इसके एक दाने को तोड़ो ?"  छात्र ने कहा " जी तोड़ा गुरुवर पर इसमें तो कुछ दिखाई नही देता ?" ऋषि ने कहा  "जिस पीपल के बीज में तुम्हे कुछ दिखाई नही देता उसमें तो अनंत पीपल बृक्ष उगने की संभावना छिपी है ?"

ऋषि का कथन सही था। उसमें हजारों पीपल बृक्ष के उगने की संभावना छिपी थी। पर वह फलीभूत तो तब होगी जब कोई चिड़िया उस पीपल फल को खायगी और उसका बीज उसकी आहार नली की हल्की-हल्की आंच से अंकुरण लायक परिपक्व हो जाएगा। उसके पश्चात जब वह चिड़िया किसी घर के मुंडेर, कुँए के पाट अथबा पेड़ के कोटर में बैठ कर बीट करेगी तब वह उगेगा। क्योकि पीपल बरगद और ऊमर के बृक्ष के नीचे अरबों खरबों के संख्या में बीज बिछे रहते हैं परन्तु एक में भी अंकुरण नही होता। अंकुरण उसी बीज में होगा जिसकी चिड़िया के खाने के पश्चात उस बीज की उसके पेट में बेदरिंग हो जायगी।

परन्तु पीपल बरगद आदि का एक समन्वय चिड़ियों से यह भी है कि इन बृक्षों में रोज फल लगते हैं और चिड़ियों के खाने के लिए रोज उनके फल पकते भी हैं।  कहने का आशय यह कि पेड़ तभी होंगे जब चिड़ियां रहेंगी और चिड़िया भी तभी रहेंगी जब पेड़ रहेंगे। क्योकि बृक्षों को अस्सी प्रतिसत चिड़ियां ही उगाती हैं। मनुष्य की उनके ऊपर यही कृपा पर्याप्त है कि उनके ऊपर अपनी कुल्हाड़ी न चलाए।

जी हां कुछ पौधों का परागण चिड़ियों द्वारा भी  होता है

अमूमन पेड़ पौधों का परागण तितली, भौरा य मधु मक्खियों द्वारा ही होता है। पर यह जान कर आश्चर्य होगा कि कुछ फूलों में परागण का कार्य चिड़िया भी करती हैं। बहुत सारे जीवों और बनस्पतियों का ऐसा समन्वय है कि अगर एक न रहे तो दूसरा भी समाप्त हो जायगा। इसलिए स्वस्थ धरती के लिए उसमें सभी तरह के जीवों का रहना आवश्यक है।

अब तो (प्रधान मुख्य वन संरक्षक) पद से रिटायर होकर माननीय श्री बी.बी.सिंह साहब लखनऊ में रहते हैं। पर बात शायद 2008-09 की है जब वे मुख्य  वन संरक्षक जबलपुर हुआ करते थे। उनकी एक विशेषता यह भी रही है कि वे  जहां भी रहे सब से हट कर कुछ नवाचार अवश्य करते थे जिससे तमाम लोग उनसे जुड़ जाते थे।और उसी के तहद उनने जबलपुर में जड़ी बूटियों का एक बहुत बड़ा मेला लगबाया हुआ था जिसमें मंडला, जबलपुर, कटनी,बालाघाट आदि स्थानों के तमाम जड़ी बूटी विशेषज्ञ शामिल हुए थे।

उसमें उनने अपने अनेक जिलों के पूर्व परिचितों और मित्रों को भी आमंत्रित किया था। जिनमें एक मैं भी था । बांकी सभी आगंतुक तो हास्टल में ठहरे थे पर मुझे एवं प्रो. श्याम बोहरे सर को कुछ चर्चा करने केलिय अपने बंगले में ही ठहराया था। श्री श्याम बोहरे जी नहा धो रहे थे पर मैं फुर्सत होकर उन्ही के पास बाहर लान में आगया था।

उनके उस बंगले में फूलों की एक लता फैली हुई थी जिसमें करीब 2 इंच लम्बे ठीक उसी तरह के फूल लगे थे जैसे आइपोमिया के पौधे में लगते हैं। तभी मेरी निगाह एक काले मटमैले रंग की चिड़िया पर गई जो देखने में तो छोटी थी पर उसकी चोंच अपेक्षाकृत अधिक लम्बी थी। मैंने कहा "सर यह चिड़िया बार -बार इस फूल में अपनी चोंच क्यो डाल रही है ?"

बीबी सिंह साहब ने कहा " वह परागण कर रही है।" मैंने कहा " चिड़िया परागण कर रही है?" उनने कहा  "हां ? " और उस लता के  एक फूल को तोड़ एवं चीर कर बताया कि " देखिए इसमें तितली भौरे के बैठने के लिए  कोई चेम्बर ही नही है तो वह कैसे परागण करेंगे ? परन्तु यह लता बड़ी चालक है। इसने अपने फूल में एक मीठा चिपचिपा पदार्थ जमा कर रखा है जिसे खाने के लालच में  यह चिड़िया बार - बार  कभी इस फूल में तो कभी उस फूल में अपनी  चोंच डालती है  जिससे उसे वह मीठा पदार्थ खाने को भी मिल जाता है और उसी से उस पौधे के फूलों में  परागण भी हो जाता है। पर आश्चर्य तो यह हैं कि उसी अनुपात से उसकी चोंच भी लम्बी है जिस से सिद्ध है कि यह चिड़िया मात्र इसी के सम्बर्धन के लिए बनी है।"

कहने का आशय यह कि पेड़ पौधे वनस्पतियों के सम्बर्धन केलिए प्रकृति ने किसे क्या दायित्व सौंप रखा है ? यह बड़ा जटिल रहस्य है। इसलिए धरती की हरीतिमा बचाने केलिए सभी जीवों का रहना आवश्यक है। पता नही कौंन सा जीव किस वनस्पति का संरक्षक है और कौंन सा नियंत्रक ?

एक  बार एक भोपाल की कार्यशाला में  बाहर से आए विद्वान ने बताया था कि "अफ्रीका के जंगलों में एक बेल की तरह कड़े आवरण का फल होता था जिसे तोड़ कर  ( डोडा) नामक वहां का एक स्थानीय पक्षी ही  खा सकता था। और आफ्रिकन लोग उस पक्षी का परम्परगत ढंग से शिकार करके उसका मांस भी खाते थे।पर आधुनिक बन्दूकों के प्रचलन के पश्चात  जब उस पक्षी को पूरी तरह ही समाप्त कर दिया गया तो वह कड़े आवरण के फलों वाला बृक्ष भी समाप्त हो गया। क्योकि अन्य कोई जीव उसे तोड़ कर उसका बीज नही निकाल सकते थे। इसलिए प्रकृति के नियमों में बंधे इस जीव जगत के बारे में हमें बहुत गहराई से सोचने समझने की जरूरत है।

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Wednesday, June 12, 2024

सावधान ! मानसून आ रहा है ?

 


।। बाबूलाल दाहिया ।।

यह मैं नही कह रहा बल्कि इन कन्दों का संकेत है। आप इस घुइयां के कन्द को कहीं भी रखें, बराही कन्द खनुआ कन्द पीडी कन्द को सात कमरे के भीतर रखें पर वह सभी 1-2 जून तक अंकुरित हो जाते हैं। 

आप मानें न मानें पर यह हम किसानों के कई पीढ़ियों से सचेतक रहे हैं। हमारे गर्मी से अलसाए पुरखे इन्ही से गुरुज्ञान प्राप्त कर खेतों के नाट मोघा की बंधाई, घर की छवाई एवं खेतों में घूर, खातू की डराई आदि शुरू करते थे। जिनके गायों के बछड़े तीन साल के नाटे हो जाते, उनका भी हल में चलने के लिए अभ्यास शुरू हो जाता था।


अन्य लोगों के वर्ष के शुरुआत के महीने भले ही जनवरी य चैत्र रहे हों पर हम किसानों के साल का प्रथम महीना तो हर वर्ष आषाढ़ ही होता है। इसीलिए यह तमाम कन्द आधे जेठ से ही हमें सचेत करने लगते थे कि -

आधा जेठ आषाढ़ कहावय।  

सजग रहय तउनय फल पाबय।।

और फिर इन्हें देख हमारे पुरखे एलर्ट हो जाते थे इस आषाढ़ के काम के बोझ को उतारने में। क्योंकि यदि दौगरा गिर गया तो फिर अन्य कहावत चरितार्थ होने लगती थी कि -

 तेरा कातिक तीन आषाढ़।

  चूक जाय ते जाय बाजार।।

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Thursday, June 6, 2024

रून्ज नदी को सदानीरा बनाये रखने की ली गई सपथ

  •  विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित हुआ कार्यक्रम 
  •  यहाँ अमावस्या के दिन दीपदान करने की है प्रथा


पन्ना। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत शाहपुरा अजयगढ़ में 5  जून को सरपंच महेन्द्र दीक्षित सहित ग्रामीणों द्वारा रून्ज नदी को सदानीरा बनाये रखने की सपथ ली गई। इस मौके पर पंचायत एवं समर्थन संस्था के संयुक्त तत्वाधन में विभन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। 

सर्व प्रथम रून्ज नदी के घाट पर सभी महिला पुरूष बच्चे एकत्र हुए, जहां नदी पूजन किया गया एवं नदी को साफ-सुथरी एवं सदानीरा बनाये रखने की सपथ ली गई। गांव में स्वच्छता एवं जल संरक्षण के नारे के साथ रैली निकालते हुए हाईस्कूल प्रागण में महुआ के पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर बैठने का निर्णय लिया गया।

समर्थन संस्था के ज्ञानेन्द्र तिवारी ने कहा कि हमारी धरती मरूस्थल की ओर बढ़ रही है, पानी की कमी से खेती किसानी एवं सब्जी उत्पादन प्रभावित हो रही है। सरकार के अभियान अटल भू-जल चल रहे हैं, जनआन्दोलन से ही हमे पानीदार बनना है। ज्ज् नारी शक्ति, से जल शक्ति ज्ज् अभियान की चर्चा करते हुए पानी की एक एक बूॅंद बचाने का सलाह दिया। पौधो का पालन पोषण बच्चो जैसा ही करने की सलाह दी ताकि भविष्य खुसहाल हो सके।

किशोर एवं किशोरियो ने रून्ज नदी की बनाई पेन्टिंग 

बच्चो ने पेन्टिंग में रून्ज नदी पर घाट एवं पौधारोपण एवं सुन्दर पार्यटन के रूप में विकसित करने की कलाकृतियॉं तैयार की, जिसको सभी ग्रमीणो ने सराहा। संस्था ने अंजना पाल, लवकुश यादव, सीमापाल को पानी की बाटल दे कर सम्मानित किया। सभी बच्चो को स्केच पेन दी गई ओर सप्ताह में गांव में स्वच्छता अभियान चलाने की सहमति ली गई।

गांव के इच्छुक पांच सदस्यो ने अपनी इच्छा से आम,जामुन,आवला एवं पीपल के पौधे लिये, और उनकी समुचित देखरेख करने की जिम्मेदारी ली। कार्यक्रम में सचिव हरि गुप्ता, हाईस्कूल के आध्यापक, रोजगार सहायक रामनरायण, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता दिव्यावती दीक्षित, सहायिका बडडी वाई पाल, पंचायत मित्र सोनू ,समर्थन सें लखनलाल, विकास मिश्रा, फरीदा बी, रोहिणी सिंह, शुशील सेन, एवं अन्य ग्राम पंचायत से पंचायत मित्र शामिल हुए। कार्यक्रम का सफल संचालन टीम लीडर ज्ञानेन्द्र तिवारी ने किया।

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सीड बाल से होगा पर्यावरण सुरक्षित

  •  जीवन जीने के लिए स्वच्छ वातावरण जरुरी - रविकांत
  • 25 गाँव में 500 लोगों ने 3400 सीड बाल तैयार किये


पन्ना। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था विकास संवाद के सहयोग से संचालित दस्तक परियोजना के अंतर्गत गठित दस्तक बाल समूह, युवा समूह एवं महिला समूह के साथियों द्वारा अपने-अपने गाँव में पर्यावरण सुरक्षा को देखते हुए, सीड बाल बनाने की प्रक्रिया पिछले कुछ दिनों से चलाई जा रही है। 25 गाँव में 500 लोगों के द्वारा 3400 सीड बाल तैयार किये हैं, जिसमें 14 से 15 विलुप्त हो रहे वृक्षों के बीजों को डाला गया। 

विकास संवाद के जिला समन्वयक रविकांत पाठक बताते हैं कि परियोजना क्षेत्र में यह सीड बाल बनाने की प्रक्रिया ने एक अभियान का रूप ले लिया है। यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक गाँव में लगभग 150 सीड बाल बनाई गई, जिनमें 20 बीज इमली, 25 बीज मुनगा, 14 बीज तेंदू, 20 बीज सागौन, 12 बीज कैथा, 18 बीज बैल, 30 बीज बैर, 40 बीज सिरसा, 30 बीज जंगल जलेबी, 5 आम गुठली, 25 बीज चरवा, 10 बीज नीबू, 20 बीज पपीता, 18 बीज अमरूद, 10 बीज रामफल एवं 22 बीज सीताफल के शामिल किये गए। कुल मिला कर 300 के ऊपर बीजों को बोया गया। श्री पाठक बताते हैं कि इस प्रक्रिया से जीवन का गहरा जुड़ाव है, इसलिए जीवन जीने के लिए स्वच्छ वातावरण जरुरी है।

सीड बाल बनाने की प्रक्रिया



बीजों को इकठ्ठा किया गया, तालाब या पेड़ के नीचे की मिटटी को लाया गया, इसके बाद मिटटी में हल्का पानी डाला गया और बीजों को डाला गया सभी ने मिलाया और गेंद का आकार दिया गया इसके बाद बाल को सुरक्षित रखने के लिए चुना या मिर्ची पाउडर का छिडकाव किया गया। 

5 जून पर्यावरण दिवस के अवसर पर 25 गाँव में बाल समूह के नेतृत्व में सीड बाल को डालने के लिए सुरक्षित जगह का चिन्हांकन किया गया एवं खेल खेल के माध्यम से जमीन में 3400 बाल के साथ 8000 बीजों को बोया गया एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी का बंटवारा किया गया।  इस आयोजन में संस्था से छत्रसाल पटेल, रामविशाल, बबली, वैशाली, समीर एवं दस्तक समूहों से अरविन्द गौंड, दुर्गेश गौंड, बीरनगौंड ओतार सिंह मरावी, पार्वती सिंह और हल्की बाई शामिल रहे। 

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